केदारनाथ निर्माण में मोदी का देश के उद्यमियों को निमंत्रण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को केदारनाथ धाम में केदारपुरी के पुनर्निर्माण से संबंधित पांच परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इस अवसर पर राज्यपाल डॉ कृष्ण कान्त पाल और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी उपस्थित थे। प्रधानमंत्री मोदी ने केदार मंदिर परिसर पहुंचने के मुख्य मार्ग के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण कार्य, सरस्वती और मंदाकिनी नदियों के बाढ़ सुरक्षा और घाट निर्माण कार्य, तीर्थ पुरोहितों के लिए आवासीय भवनों के निर्माण कार्य तथा आदि शंकराचार्य के समाधि स्थल के पुनर्निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री केदारनाथ में प्रकृति और पर्यावरण के अनुकूल भव्य पुनर्निर्माण कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पुनर्निर्माण कार्य एक निश्चित समयसीमा में तीर्थ क्षेत्र की गरिमा के अनुकूल, पुरोहितों और पंडितों की व्यवस्था और आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने पुनर्निर्माण कार्य के लिए देश की राज्य सरकारों को भी अपना योगदान देने के लिए कहा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि औद्योगिक घराने सीएसआर के अंतर्गत पुर्ननिर्माण कार्य में योगदान देंगे। प्रधानमंत्री ने पर्यावरण के सभी नियमों का पालन करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि केदारपुरी में आधुनिक पुनर्निर्माण किया जाएगा, परंतु तीर्थ क्षेत्र की आत्मा और हिमालय की आध्यात्मिकता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उत्तराखंड सरकार की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 6 महीने के अल्प समय में महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं और विकास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री ने हिमालयी राज्यों की विशिष्टता की सराहना करते हुए उत्तराखंड को 2022 तक ऑर्गेनिक स्टेट बनने का संकल्प लेने को कहा। उन्होंने कहा कि अभी दुनिया होलिस्टिक हेल्थ केयर की ओर चल रही है। ऐसे में केमिकल फर्टिलाइजर को अस्वीकार कर ऑर्गेनिक उत्पादों की दुनिया में उत्तराखंड अग्रणी भूमिका निभा सकता है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड की स्वच्छता अभियान की भी सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड देश में ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच से मुक्त करने वाला चौथा राज्य बन गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में लगभग चार करोड़ परिवार ऐसे हैं जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। ऐसे लोगों के लिए प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना लागू की गई है। उन्होंने आशा व्यक्त की उत्तराखंड सरकार प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना को अपने राज्य में शीघ्र से शीघ्र पूरा करने का बीड़ा उठाएगी। उन्होंने कहा कि सभी हिमालयन राज्यों, सभी राज्यों के बीच विकास की दौड़ की एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों यह कार्य कर रहे हैं कि पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी पहाड़ के काम आए। बाबा केदार के जयजयकारो के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गढ़वाली भाषा में अपना भाषण आरम्भ करते हुए बाबा केदारनाथ से देश, दुनिया व राज्य के लोगो के लिए खुशहाली की कामना की।

प्रधानमंत्री ने भव्य व आधुनिक केदारपुरी पुनर्निर्माण व विकास हेतु 5 प्रमुख योजनाओं का शिलान्यास किया। इनके अंतर्गत मंदिर परिसर की मुख्य सड़क का चौड़ीकरण किया जाएगा। इन कार्य में आरसीसी तथा आधुनिक तकनीकी का प्रयोग किया जाएगा। पुरोहितों हेतु थ्री इन वन आवासीय परिसरों का निर्माण किया जाएगा। जिसमें पुरोहितों की रहने की व्यवस्था के अतिरिक्त निचली मंजिल पर श्रद्धालुओं व यात्रियों तथा ऊपरी मंजिल पर उनके यजमानों व मेहमानों की व्यवस्था की जाएगी। आवासीय परिसरों में चौबीस घण्टे बिजली, पानी व स्वच्छता सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। मंदिर परिसर में पोस्ट ऑफिस, टेलीफोन सुविधाओं तथा कम्युनिकेशन सुविधाओं की भी व्यवस्था की जाएगी। मन्दाकिनी और सरस्वती नदियों पर रिटेनिंग वॉल व घाटों का निर्माण किया जाएगा। आदि शंकराचार्य के समाधिस्थल का पुनर्निर्माण किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के अन्य राज्य सरकारों, सीएसआर के माध्यम से व्यापार जगत के उद्यमियों को निर्माण कार्य में सहयोग का निमंत्रण दिया। इस अवसर पर अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का बाबा केदार जी के आंगन में आने पर उत्तराखण्ड की ओर से हार्दिक अभिनन्दन व स्वागत है। प्रधानमंत्री द्वारा केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने तथा कपाट बन्द होने से पूर्व समाधि पूजा के समय लगभग 6 माह के भीतर दो बार दर्शन करने से पूरे विश्व में सुरक्षित व सुखमय केदारनाथ यात्रा का संदेश गया है। प्रधानमंत्री ने इस वर्ष दीपावली का पर्व सीमा पर तैनात हमारे वीर सैनिकों के साथ मनाया। सैनिकों की वीरभूमि उत्तराखण्ड के लिए यह सम्मान की बात है।

इससे पूर्व प्रधानमंत्री ने केदारनाथ मंदिर पहुंचकर गर्भगृह में सम्पूर्ण विधिविधान व मंत्रोचारण के साथ भगवान केदार का रूद्राभिषेक किया तथा मंदिर की परिक्रमा की। प्रधानमंत्री मोदी ने केदारनाथ मंदिर परिसर में लगभग डेढ़ घण्टे से अधिक समय व्यतीत किया। प्रधानमंत्री के समक्ष उत्तराखंड सरकार द्वारा तैयार किया केदारपुरी के पुनर्निर्माण पर एक 3डी प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी को राज्यपाल डॉ. कृष्णकान्त पाल तथा मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अंगवस्त्र तथा केदारनाथ मंदिर की अनुकृति भेंट की।

हिन्दुत्व की रक्षा में स्वामी दयानंद का अहम योगदान

स्वामी दयानंद आश्रम, ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल डॉ.कृष्ण कांत पाल व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ब्रह्मलीन पूज्य स्वामी दयानंद सरस्वती जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। राज्यपाल ने स्वामी जी की पुण्य स्मृति में नमन करते हुए कहा कि पूज्य स्वामी दयानंद सरस्वती जी ज्ञान, दर्शन व आध्यात्मिकता की अद्भुत मिसाल थे। अध्यात्म के साथ ही मानव जाति की सेवा में भी उनका अविस्मरणीय योगदान रहा है। स्वामीजी ने ज्ञानदर्शन व सेवा भाव का जो रास्ता हमें दिखाया है, उस पर चलकर ही मानव कल्याण सम्भव है। मेरा परम सौभाग्य है कि सितम्बर 2015 में प्रधानमंत्री के साथ आश्रम में आने पर मुझे स्वामीजी का आर्शीवाद मिला था। राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने पूज्य स्वामी जी द्वारा समयसमय पर विभिन्न अवसरों पर दिए गए व्याख्यानों व व्यक्त किए गए विचारों के संकलन पर आधारित ग्रन्थ का विमोचन भी किया। राज्यपाल ने इसे पुनित कार्य बताते हुए कहा कि ये ग्रन्थ समाज का दिशा निर्देश करने के साथ ही मानव उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान करेगा। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यता है। अन्य समकालीन सभ्यताओं में से बहुत सी सभ्यताएं पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। यह भारतीय सभ्यता ही है जो कि 5 हजार वर्षों से अपना मौलिक स्वरूप बनाए हुए है। धर्म, अध्यात्म व मूल्य आधारित व्यवस्था ही वे ताकतें हैं जिनके कारण भारतीय सभ्यता सदियों से कभी न रूकने वाली धारा की तरह लगातार प्रवाहित हो रही है। राज्यपाल ने कहा कि हमारे ऋषिमुनियों व विद्वानों के हजारों वर्षों के गहन चिंतन से रचित वेद, उपनिषद, महाकाव्य, पुराण आदि महान मार्गदर्शी रचनाएं, मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। हमारा दायित्व है कि हम अपने अध्यात्म, ज्ञान व दर्शन की विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संजो कर रखें। विश्व शांति, विश्व कल्याण और विश्वबंधुत्व की भारतीय दर्शन की अवधारणा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पूरी दुनिया के लिए और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। वेदांतों में वर्णित ज्ञान से सम्पूर्ण मानवता का कल्याण सम्भव है। स्वामी दयानंद सरस्वती जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भारत, भारतीयता एवं हिन्दुत्व की रक्षा में स्वामी जी का योगदान भारत ही नहीं बल्कि विश्वभर में स्वीकार्य है। जब भारत एवं भारत की संस्कृति की बात होती है तो उनका स्मरण स्वाभाविक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी परम्परा आदि शंकराचार्य से प्रारंभ हुई, जिसे अग्रदूत के रूप में आगे बढ़ाने का कार्य स्वामी जी ने किया। आज उनके लाखों भक्त इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत की संस्कृति में प्रहार हो रहे हैं। स्वामी जी के अनुयायी निश्चित रूप से ऐसा नहीं होने देंगे। मैं इस अवसर पर स्वामी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनके द्वारा दिया गया ज्ञान हम सब का आगे भी मार्गदर्शन करता रहेगा।

फोटो खींच व्हाट्सएप पर भेंजे, मिलेगा इनाम

सावधान, अब अगर नदी में कूड़ा डाला तो खैर नहीं और साथ ही जो व्यक्ति नदी में कूड़ा डालने वालों पर नजर रखेगा व उसकी फोटो खींचकर देगा। उसे पुरूस्कृत भी किया जायेगा। जी हां रुद्रप्रयाग प्रशासन ने नदी में कूड़ा डालने से रोकने के लिए अब नया फार्मूला निकाला है। कूड़ा डालने वाले व्यक्ति की फोटो लाने वाले व्यक्ति को प्रशासन इनाम भी देगा। ताकि लोगों की जागरुकता से नदियो को निर्मल बनाया जा सके।
कलक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल की अध्यक्षता में नमामि गंगे समिति के सदस्यों की बैठक आयोजित की गई। इसमें नदी को निर्मल एवं अविरल बनाए रखने के लिए व्यापक स्तर पर जागरुकता अभियान चलाने का निर्णय लिया। साथ ही कहा कि जो लोग नदी नालों में गंदगी डालेंगे उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि नमामि गंगे के अंतर्गत नदी एवं नालों तथा सामाजिक प्रतिष्ठानों पर कूड़ा फेंकने वालों पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए। साथ ही नदी, नालों और सामाजिक प्रतिष्ठानों पर कूड़ा फेंकने वालों की फोटो खींचकर उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप पर भेजने वाले को 500 रुपये का नगद पुरस्कार दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कूड़ा फेकने वाले की फोटो साफ होनी चाहिए, जिससे कूड़ा फेंकने वाले का पता चल सके। जिलाधिकारी ने कहा कि फोटो भेजने वाले का नाम, पता व स्थान का नाम भी उल्लेख करना होगा। कहा कि सामाजिक प्रतिष्ठानों (घाट) में दीवार लेखन, वाल पेटिंग के माध्यम से जन जागरुकता लाई जाएगी। नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत अगस्त्यमुनि में कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

अब फर्जी बाबाओं का सामूहिक बहिष्कार होगा, ये बाबा हैं लिस्ट में..

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत को दुष्कर्म मामलों में 20 साल जेल की सजा होने के बाद अब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने 11 बाबाओं को फर्जी मानते हुए उनकी सूची तैयार की है। इस सूची में आसाराम, राधे मां व निर्मल बाबा के भी नाम हैं। बताया जा रहा है कि यह सूची 10 सितंबर को इलाहाबाद के मठ बाघंबरी गद्दी में बुलाई गई बैठक में सार्वजनिक की जाएगी। बैठक में उनके सामूहिक बहिष्कार का भी फैसला किया जाएगा। परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि फर्जी धर्मगुरुओं से सनातन धर्म के स्वरूप को काफी नुकसान पहुंचा है। हम फर्जी धर्मगुरओं की सूची बनाकर उसे केंद्र व सभी राज्य सरकारों, चारों पीठ के शंकराचार्य व 13 अखाड़ा के पीठाधीश्वरों को भेजकर सामूहिक बहिष्कार करेंगे। उन्होंने बताया कि सूची में शामिल शमिल फर्जी बाबाओं को कुंभ, अर्द्वकुंभ और अन्य धार्मिक मेलों में सरकारी सुविधा न मिले, यह पहल भी होगी।
सूची में ये हैं फर्जी बाबा
आसाराम बापू, नारायण साई, इच्छाधारी भीमानंद, राधे मां, बाबा ओमानंद, निर्मल बाबा, रामपाल, गुरमीत राम रहीम, बाबा ओम नमरू शिवाय, स्वामी अच्युतानंद तीर्थ और योगी सत्यम।

अगले माह यात्रियों की संख्या में होगा इजाफा

केदारनाथ यात्रा के लिये आपदा के बाद अच्छी खबर है। बहुत कम समय में चार लाख से अधिक तीर्थ यात्रियों ने बाबा केदार के दर्शन कर दिये हैं। बाबा के दर्शन करने वाले तीर्थ यात्रियों का आकंडा चार लाख पार पहुंच चुका है।
16-17 जून 2013 को केदारनाथ में आई भीषण आपदा के बाद इस बार केदारनाथ आने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। बरसात के मौसम में भी यात्री बाबा के दर्शनों के लिये पहुंचे हैं, जिससे देश-विदेश में यात्रा को लेकर अच्छा संदेश गया है। मई माह में कपाट खुलने के बाद चार माह के समय में चार लाख से अधिक तीर्थ यात्री बाबा के दर्शनों को पहुंचे हैं। आगामी दो महीने में भी केदारघाटी के सभी होटल-लॉलों में एडवांस बुकिंग आ चुकी है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार पांच लाख से अधिक यात्री बाबा के दर्शनों के लिये पहुंचेंगे।
इधर, पुलिस अधीक्षक प्रहलाद नारायण मीणा ने बताया कि यह यात्रा सीजन यात्रा के दृष्टिकोण से बहुत अच्छा गुजर रहा है। आपदा के बाद यात्रा पटरी पर लौट चुकी हैं बहुत कम समय में चार लाख से अधिक तीर्थ यात्री बाबा के दर्शनों के लिये पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी दो माह की यात्रा के लिये भी एडवांस बुकिंग आ चुकी हैं। मौसम भी खुल रहा है। बरसात का सीजन समाप्त होने वाला है। ऐसे में अधिक यात्रियों के आने की उम्मीदे हैं। उन्होंने कहा कि यात्रियों को किसी भी प्रकार की दिक्कतें नहीं होने दी जाएंगी। यात्रियों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

कुमॉउ में नंदा देवी मेले की है अलग पहचान

कुमॉउ का प्रसिद्ध मॉं नंदा देवी मेले की आज विधिवत शुरुआत हो गई। यह मेला इस लिए भी खास है कि कुमॉउ में मां नन्दा देवी को अपनी आराध्य माना जाता है। मॉं नंदा देवी मंदिर में आज मॉं नंदा सुनंदा की मूर्तियों के लिए लाये गये कदली वृक्षों का पूजन किया गया। मौके पर चंद वंष के वंषज केसी बाबा पूर्व सांसद नैनीताल ने पूजा सम्पन्न कराई। प्रदेष के पर्यटन, सिंचाई व संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने भी पूजा कार्यक्रम में षिरकत की। मॉं नंदा देवी मेला समिति के अध्यक्ष मनोज वर्मा ने बताया कि मॉं नंदा देवी उत्तराखण्ड की अधिष्ठात्री देवी के रुप में पूज्य है। अल्मोड़ा मॉं नंदा देवी मेला ऐतिहासिक पहचान रखता है। मेले को भव्य बनाने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं।

अच्छा प्रर्दशन करें तो निकायों को मिल सकती है 75 लाख की धनराशि

स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम में स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रथम तीन स्थान पाने वाले नगर निगम, नगर पालिका को क्रमशः 75, 50 एवं 25 लाख रूपये का पुरस्कार दिया जाएगा। यह घोषणा एक स्थानीय होटल में स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन तकनीकी एवं स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्याशाला में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यशाला उत्तराखण्ड में स्वच्छता कार्यक्रम के अभियान को मजबूती देगी। यह हमारे लक्ष्यों को पूर्ण करने में मददगार होगी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता कार्यक्रम के लिए मानसिंकता में बदलाव की आवश्यकता, आम व्यक्ति की जागरूकता एवं सहभागिता से यह लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। ठोस अपशिष्ठ एवं प्रबन्धन की दिशा में आधुनिक तकनीक और शोध की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी के माध्यम से हम बडा से बडा लक्ष्य प्राप्त कर सकते है। सरकारी स्तर पर स्वच्छता कार्यक्रम की महत्ता को दर्शाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता के प्रयासों को कर्मचारियों के वार्षिक प्रवृष्टि में अंकित किया जायेगा।
नगर विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि स्वच्छता कार्यक्रम में नवीन तकनीकी के प्रयोग हेतु स्थानीय निकायों को अपनी आमदनी बढाने के प्रयासों पर बल देना होगा। शहरी विकास मंत्री ने कहा कि मार्च 2018 तक शत-प्रतिशत शौचालय ओडीएफ, डोर-टू-डोर कलेक्शन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जायेगा। इसके अतिरिक्त शत-प्रतिशत एलईडी का लक्ष्य प्राप्त किया जायेगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम कि कार्य संस्कृति से अन्य नगर पालिका प्रभावित होती है। इसलिए नगर निगम की जिम्मदारी स्वच्छता के सन्दर्भ में अधिक है।
सचिव शहरी विकास राधिका झा ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वच्छता के कार्यक्रम को लेकर संवेदनशील है। जिलाधिकारियों को साप्ताहिक नगर आयुक्त एवं अधिशासी अधिकारियों, नगर निगम के साथ समीक्षा बैठक करने के निर्देश दिये गये है। राज्य स्तरीय कार्यशाला में स्वच्छता विषय पर शपथ ली गई एवं स्वच्छता कार्यक्रम की एक मार्गदर्शिका पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता विषय के इनोवेटिव टेक्नोलाॅजी के प्रयोग सम्बन्धी देशभर के विशेषज्ञों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी लगायी गयी है।

पुस्तकें हमारी मित्र, कभी साथ नही छोड़ती

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को नेशनल बुक ट्रस्ट तथा उच्च शिक्षा विभाग उत्तराखंड शासन द्वारा परेड ग्राउंड में आयोजित देहरादून पुस्तक मेले के शुभारंभ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। देहरादून पुस्तक मेले का शुभारंभ संयुक्त रुप से राज्यपाल डॉ कृष्णकांत पाल, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत तथा उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
उपस्थित छात्र छात्राओं तथा पाठको को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 दिवसीय पुस्तक मेला सभी छात्रों और पाठको के लिए एक अच्छा अवसर है। पुस्तकों के बिना हमारा जीवन अधूरा है। पुस्तके मात्र छपी सामग्री ही नहीं है बल्कि यह ज्ञान का स्रोत है। यदि हम पुस्तकों का महत्व समझें तो यह हमारे जीवन में सुख का आधार है। उन्होंने छात्रों से कहा कि यदि उन्हें दोस्ती करनी है तो पुस्तकों से करें। पुस्तके ऐसी मित्र है जो कभी साथ नहीं छोड़ती। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी पढ़ने की आदत पर विशेष बल देते हैं। आज आईटी, ई-लाइब्रेरी, डिजिटल बुक्स के लोकप्रिय होने से तकनीकी क्षेत्र में संक्रमण काल चल रहा है। हमारे समक्ष चुनौती है कि हमें डिजिटल भी होना है तथा पुस्तकों का महत्व बनाए रखना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम संकल्प ले सकते हैं कि एक घंटा धार्मिक, सांस्कृतिक, तकनीकी, विज्ञान, ललित कला आदि से संबंधित पुस्तकें पढ़ें। उन्होंने पंचायत स्तर पर पुस्तक मेले आयोजित करने की बात कही।

अगले साल के अंत तक पूरी हो जाएगी चार धाम सड़क परियोजना

केंद्रीय सड़क, परिवहन, राजमार्ग और जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उत्तराखंड में ‘चार धाम’ सड़क संपर्क परियोजना को सरकार 2018 के अंत तक पूरा कर लेगी। 12 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से जुड़े 10 प्रस्तावों को पर्यावरण मंजूरी भी मिल गई है।
उन्होंने बताया कि पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय ने परियोजना पर काम तेज कर दिया है। जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के एजेंडे में शीर्ष पर है। इस परियोजनाओं से जुड़े अन्य अटके प्रस्तावों को भी जल्द ही मंजूरी प्राप्त हो जाएगी। क्योंकि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय समेत विभिन्न मंत्रालयों के साथ बैठकें जारी हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह लोगों को सबसे बड़ा उपहार होगा। क्योंकि आस्था से जुड़ी चार धाम यात्रा लोगों के एजेंडे में शीर्ष पर रहती है। विदेश से भी बड़ी संख्या में लोग चार धाम यात्रा के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि 900 किमी के नए अलाइनमेंट पर राजमार्गो का निर्माण किया जा रहा है और सुरंगों का निर्माण भी तेज गति से हो रहा है। यह मार्ग सभी मौसम में खुले रहेंगे।
मालूम हो कि इसी महीने की शुरुआत में गडकरी ने आधारभूत ढांचे पर एक बैठक की अध्यक्षता की थी। इसमें उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों से मंजूरियों के अभाव में लटके चार धाम यात्रा के 18 प्रस्तावों में तेजी लाने का अनुरोध किया था। चार धाम परियोजना की आधारशिला पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी।

पशुपालन और पंतजलि गो मूत्र और साइलेज का कारोबार करेंगे

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक बैठक में पतंजलि संस्था के साथ प्रस्तावित ’सहयोग’ कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की। इस अवसर पर वन मंत्री डाॅ.हरक सिंह रावत तथा पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने विभागों को निर्देश दिये कि जिन बिन्दुओं पर सहमति बनी है उनके क्रियान्वयन हेतु सभी पक्षो पर विचार कर विस्तृत एम.ओ.यू. तैयार कर अग्रिम कार्यवाही की जाए। उन्होंने जड़ी-बूटी उत्पादन विपणन को प्रोत्साहित करने के लिये सिंगल विण्डो सिस्टम की आवश्यकता बताई। जड़ी-बूटी खेती को किसानों के लिये लाभकारी बनाना होगा। जड़ी बूटियों के लिये बीज और नर्सरी उपलब्ध कराना जरूरी है। गांवों में पर्यटन और आयुष गतिविधियों पर आधारित रोजगार के अवसर उत्पन्न करने जरूरी है। पशुपालन और औद्यानिकी को क्लस्टर्स में योजनाबद्ध तरीके से बढ़ाना होगा। उन्होंने पतंजलि द्वारा इस दिशा में सकारात्मक सहयोग पर संतोष व्यक्त करते हुए बाबा रामदेव एवं आचार्य बालकृष्ण को धन्यवाद भी दिया।
बैठक में उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के शोधार्थियों हेतु पतंजलि द्वारा लैब सुविधाएं उपलब्ध कराने पर सहमति बनी। पतंजलि संस्था लैब कार्यों के लिये शीघ्र ही ’आइटमाइज्ड’ दरें उपलब्ध करायेगी, जो बाजार दरो से कम होगी। उत्तराखण्ड के किसानों से मोटे अनाज के क्रय हेतु पतंजलि को क्लस्टरवार विपणन हेतु उपलब्ध अनाज उत्पादन का विवरण उपलब्ध कराया जायेगा। इसके साथ ही पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में पतंजलि किसी एक ग्राम या क्लस्टर में कान्ट्रैक्ट फार्मिंग भी शुरू करेगी। पतंजलि को राज्य सरकार उपलब्ध जड़ी बूटियों की सूची तथा उनके बीज की उपलब्धता का विवरण देगी। पतंजलि द्वारा जडी बूटियों के लिये शीघ्र ही न्यूनतम क्रय मूल्य घोषित किया जायेगा।
पतंजलि मुनिकीरेती में वन विभाग के डाॅ.सुशीला तिवारी हर्बल गार्डेन को माॅडल हर्बल गार्डेन एवं नर्सरी में विकसित करेगा। इस हर्बल गार्डेन को पर्यटक आकर्षण का केन्द्र भी बनाया जायेगा। पशुपालन विभाग के पास गो-मूत्र उपलब्ध है जबकि पतंजलि के पास साइलेज (पशुचारा) की उपलब्धता है। दोनो परस्पर विनियम की शर्तें निर्धारित करते हुए गो-मूत्र एवं साइलेज का आदान प्रदान करेंगे। अगले तीन माह के लिये पशुपालन विभाग द्वारा 1073 मीट्रिक टन साइलेज की मांग की गई। पशुपालन विभाग द्वारा टेस्टिंग प्रक्रिया के रूप में पतंजलि को दूध आपूर्ति भी की जा रही है। शीघ्र ही 12000 लीटर दूध की आपूर्ति प्रारम्भ की जायेगी। इसके साथ ही चंपावत में नरियाल गांव में बद्री गाय संवर्द्धन योजना को भी पतंजलि द्वारा संचालित किया जायेगा। पर्यटन विभाग द्वारा प्रस्ताव दिया गया कि राज्य में ऐसे 12 गांवों में जहां ए.डी.बी. द्वारा अवस्थापना सुविधाएं विकसित की जा रही है वहां स्थानीय लोगों को पतंजलि के माध्यम से पंचकर्म, योग आदि में प्रशिक्षित कर पर्यटक केन्द्र विकसित किया जा सकता है। इसी प्रकार बंद पडे टूरिस्ट सेंटरों में से कुछ सेंटर पतंजलि पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में ले सकता है। पतंजलि संस्था द्वारा हरिद्वार जनपद के सभी आंगनबाडी केन्द्रों पर हाईजीन सुविधाएं विकसित करने हेतु सहमति दी गई। बैठक में सहकारिता, एरोमैटिक प्लांट, मधुमक्खी पालन, जड़ी बूटी पादप डाक्यूमेंटेशन आदि विषयों पर भी चर्चा हुई।