ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे प्रोजेक्ट में सर्किल रेट बढ़ाने की मांग

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से आज दिल्ली में मुलाकात कर कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत ने उन्हें ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे प्रोजेक्ट के अंतर्गत श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र में परियोजना प्रभावितों को सर्किल रेट बढ़ाकर मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने रेलवे मंत्री से लारा कोर्ट के निर्णयों को लागू करने एवं प्रभावित परिवारों के सभी भाईयों को मुआवजा देने व श्रीनगर में अंशिक क्षतिग्रस्त मकानों को भी मुआवजा देने की मांग की। इसके साथ ही केन्द्रीय मंत्री से प्रदेश की ग्राम पंचायतों को भारत नेट प्रोजेक्ट से जोड़ने का भी आग्रह किया। जिस पर केन्द्र रेलवे मंत्री ने सकारात्मक रूख अपनाते हुये कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। इससे पहले कैबिनेट मंत्री डॉ0 रावत ने नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से शिष्टाचार मुलाकात की।
रावत ने केन्द्रीय रेलवे मंत्री से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना पर विस्तृत चर्चा कर परियोजना प्रभावितों की समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र में सर्किल रेट की दर बढ़ाकर नये सर्किल रेट पर परियोजना प्रभावितों को मुआवजा देने की मांग की। रावत ने बताया कि रेलवे परियोजना से प्रभावित लोग उचित मुआवजे से वंचित हैं। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री के समक्ष लारा कोर्ट के फैसलों के तहत प्रभावितों को मुआवजा देने की मांग भी रखी। इस दौरान रावत ने केन्द्रीय रेलवे मंत्री के समक्ष प्रभावित परिवार के एक ही व्यक्ति को मुआवजा देने का मुद्दा रखा, उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से परिवार के अन्य भाईयों को मुआवजा नहीं मिल पा रहा है, जिस पर रावत ने केन्द्रीय मंत्री से प्रभावित परिवार के सभी भाईयों को मुआवजा आवंटित करने की मांग की। श्रीनगर, स्वीत एवं अन्य जगहों पर आंशिक एवं पूर्ण क्षतिग्रस्त मकानों का मुआवजा दिये जाने की मांग भी केन्द्रीय मंत्री के समक्ष रखी साथ ही
उन्होंने केन्द्रीय मंत्री को उत्तराखंड प्रवास पर आने के लिये आमंत्रित किया। प्रदेश की पंचायतों को हाई स्पीड इंटरनेट से जोड़ने के लिये डॉ. रावत ने केन्द्रीय मंत्री से उत्तराखंड में भी भारत नेट प्रोजेक्ट शुरू करने की बात कही। रावत ने बताया कि केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सकारात्मक रूख अपनाते हुये रेलवे परियोजना से प्रभावितों की समस्याओं को दूर करने एवं उचित मुआवजा देने के लिये शीघ्र कार्यवाही करने का भरोसा दिया। इससे पहले कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत ने नव निर्वाचित उपराष्ट्रपति से शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर उन्होंने उपराष्ट्रपति को राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने की जानकारी दी और प्राथमिक स्तर पर बालवाटिका संचालित करने सहित भविष्य की योजनाओं से अवगत कराया।

नवम्बर में आयोजित हो रही राष्ट्रीय स्तर की मास्टर्स खेल प्रतियोगिता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में मास्टर्स स्पोर्टस फाउण्डेशन के खेल पोस्टर का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के फिट इंडिया एवं खेलों इंडिया के विचार को धरातल पर उतारने के लिये 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को इससे जोड़ने के प्रयास होने चाहिए। इससे शारारिक स्वस्थता के प्रति समाज में जागरूकता का भी प्रसार होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा खेलों को बढ़ावा देने के लिये निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। इस दिशा में क्रिकेटर ऋषभ पन्त को ब्रांड अम्बेसडर बनाया गया है। ऐसे प्रयास खेलों और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के साथ ही मास्टर्स स्पोर्टस की गतिविधियों को बढ़ावा देकर खेलों को रोजगार और पर्यटन से भी जोड़ने में मददगार होंगे। उन्होंने मास्टर्स स्पोटर्स फाउण्डेशन सोसाइटी के प्रयासों की सराहना करते हुए अन्य संस्थानों से भी इस दिशा में सहभागी बनने की अपेक्षा की।
मास्टर्स स्पोटर्स सोसाइटी के अध्यक्ष विपिन बलूनी ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि सोसाइटी विगत दो वर्ष से लगातार मास्टर्स लेवल पर फुटबाल, बैडमिंटन, निशानेबाजी, बालीबॉल, बास्केटबॉल, एथेलेटिक्स समेत 10 विभिन्न खेलों में खिलाड़ियों को प्रोत्साहन दे रही है। इसके तहत जिला और राज्यस्तरीय प्रतियोगिताएं भी समय-समय पर आयोजित की जाती रही हैं। हमारी सोसाइटी द्वारा राज्यस्तरीय एथेलेटिक्स, फुटबॉल, निशानेबाजी बालीबाल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन का प्रदेशस्तरीय आयोजन कराया गया था जिसमें लगभग दो हजार खिलाडियों ने भाग लिया। इसी क्रम में फिट इंडिया मूवमेंट और खेलों को प्रोत्साहन देने की नीति के तहत सोसाइटी देहराइन में आगामी 11 से 13 नवम्बर तक राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतियोगिता का आयोजन कर रही है। इस प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों की टीमें भाग लेगी। जिसमें देशभर से 5 हजार खिलाड़ियों की भाग लेने की संभावना हैं।

सितम्बर से गंगा में फिर शुरु होगी राफ्टिंग

ऋषिकेश में राफ्टिंग का बेसब्री से इंतजार करने वाले लोगों के लिए एक सितंबर से तीर्थनगरी में राफ्टिंग के संचालन पर लगी रोक हट जाएगी। जिसके बाद आप एक बार फिर राफ्टिंग का लुत्फ उठा सकते है।
आपको बता दें कि यहां 280 राफ्टिंग कंपनियां हैं और 575 राफ्टों का संचालन उन कंपनियों के तहत किया जाता है। ऋषिकेश में क्लब हाउस से राम झूला तक की राफ्टिंग की जाती है जो कि 9 किलोमीटर की दूरी तय करती है और इसका प्रति व्यक्ति रेट 600 है। ब्रह्मपुरी से रामझूला तक भी 600 प्रति व्यक्ति रेट है और यह भी 9 किलोमीटर की दूरी तय करती है। शिवपुरी से राम झूला तक 15 किलोमीटर की दूरी के हजार रुपए हर एक व्यक्ति से चार्ज किए जाते हैं। शिवपुरी से मरीन ड्राइव तक 10 किलोमीटर की राफ्टिंग में हर व्यक्ति से 600 रुपए चार्ज किए जाते हैं।
कोडियाला से राम झूला तक 35 किलोमीटर की राफ्टिंग में 2500 चार्ज किए जाते हैं तो वहीं कोडियाला से शिवपुरी तक 20 किलोमीटर की राफ्टिंग में हर व्यक्ति से 1500 रुपए लिए जाते हैं। बता दें कि कोडियाला से राम झूला तक तकरीबन 35 किलोमीटर के रास्ते में गंगा के सबसे अधिक खतरनाक और रोमांचक रैपिड पड़ाव पड़ते हैं और पर्यटक इनका खूब आनंद लेते हैं। ऋषिकेश में गंगा घाटी के कोडियाला मुनिकीरेती इको जोन में 1 जुलाई से मानसून के चलते रिवर राफ्टिंग का संचालन नहीं हो रहा है।
राफ्टिंग एक्टिविटी 1 जुलाई से 31 अगस्त तक बंद रहती है। ऐसे में राफ्टिंग के शौकीनों को दो माह का लंबा इंतजार करना पड़ता है। इस साल सीजन में जुलाई तक 5 लाख से ज्यादा सैलानी ऋषिकेश में राफ्टिंग का लुत्फ उठा चुके हैं। इससे करीब 25 हजार से ज्यादा परिवारों की आजी​विका चल रही है। मगर अब बरसात के बाद नए सत्र में राफ्ट एक बार फिर से गंगा नदी में उतरेंगे और लंबे समय के बाद पर्यटक राफ्टिंग का मजा ऋषिकेश में ले सकते हैं।

जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिये समेकित प्रयासों की जरूरत-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित सभागार में आयोजित बोधिसत्व विचार श्रृंखला-बिन पानी सब सून विचार संगोष्ठी को सम्बोधित किया। संगोष्ठी में प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल रूप से विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बोधिसत्व विचार श्रृंखला के अंतर्गत बिन पानी सब सून के रूप में विचार श्रृंखला की यह 8वीं संगोष्ठी है। उन्होंने कहा कि पानी जीवन का आधार है। जल संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में समेकित प्रयासों की जरूरत बताते हुए मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र से जुडे विषय विशेषज्ञों एवं बुद्धिजीवियों के विचारों एवं सुझावों को राज्यहित में उपयोगी एवं व्यावहारिक बताया। उन्होंने कहा कि जल के महत्व, संवर्धन एवं संरक्षण से सम्बन्धित संगोष्ठी के मंथन से निकलने वाला अमृत राज्य की लगभग 17 छोटी-बड़ी नदियों का जल स्तर बढ़ाने के प्रयासों को फलीभूत करने वाला होगा।
मुख्यमंत्री नेे कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर और अधिक विषय विशेषज्ञों के सुझावों का लाभ लेने के लिये राज्य स्तर पर एक फोरम का गठन किया जायेगा। उन्होंने इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को जन जन का कार्यक्रम बनाने पर बल देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों की सफलता के लिये सरकार के साथ सभी को सहयोगी बनना होगा। ऐसे कार्यक्रमों का ज्ञान विज्ञान एवं अनुसंधान के माध्यम से आगे बढ़ाना होगा तभी हम अपनी विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ने में भी सफल हो पायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन संवर्धन की दिशा में राज्य में आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रति जनपद 75 अमृत सरोवर बनाये जा रहे हैं। इस प्रकार प्रदेश में कुल 1275 अमृत सरोवर तैयार किये जायेंगे।
संगोष्ठी में विषय विशेषज्ञों द्वारा दिये गये सुझावों के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बांज के जंगलों के विस्तार, बंजर जमीन को उपजाऊ बनाये जाने तथा चीड के प्रबंधन पर ध्यान दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि जल का बेहतर प्रबंधन से ही हम जल को बचा पायेंगे तथा नदियों के जल स्तर को बढ़ाने में सफल हो पायेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग की बैठक में उन्होंने हिमालयी राज्यों के लिये अलग नीति बनाये जाने की बात रखी है। राज्य की इकोनॉमी एवं इकोलॉजी का बेहतर समन्वय कर हम संसाधनों का बेहतर उपयोग कर पायेंगे। उन्होंने कहा कि हमें अपने व्यवहार में पानी बचाने की प्रवृत्ति को अपनाना होगा। प्रदेश में जल स्त्रोतों के चिन्हीकरण के साथ ही ग्राम इकाइयों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जायेगा।
इस अवसर पर पद्म कल्याण सिंह रावत ने गैर हिमानी नदियों को बचाने के लिये बांज व चौड़ी पत्ती के वृक्षों के रोपण पर ध्यान देने के साथ ही चीड़ का वैज्ञानिक प्रबंधन पर बल दिया। उनका सुझाव था कि होम स्टे योजना के तहत पहाड़ी शैली के भवनों के निर्माण के लिये चीड़ के पेड़ों के दोहन की व्यवस्था हो। बंजर खेतों को आबाद करने तथा बुग्यालों को बचाने की दिशा में भी पहल किये जाने का उनका सुझाव था।
पानी राखो आंदोलन के प्रणेता डॉ. सच्चिदानंद भारती ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में जल तलैया बनाने तथा धारे नोले के पुनर्जीवीकरण के लिये सरल व टिकाऊ तकनीकि पर ध्यान दिया जाए, जो लोगों को सहजता से जोड़ने का भी कार्य करें। उनका कहना था क धारे बचेंगे तो नदियां भी बचेंगी।
पर्यावरणविद राजेन्द्र सिंह बिष्ट ने सुझाव दिया कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, पानी के स्त्रोतों का चिन्हीकरण तथा जल संरक्षण के लिये ग्राम पंचायतों को जिम्मेदारी दी जाए। हेस्को के डॉ. विनोद खाती का कहना था कि खेत बंजर होने के कारण पहाड़ों में भूजल संरक्षण में कठिनाई आ रही है।
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ वाटर मैनेजमेंट भुवनेश्वर के डॉ. अशोक नायक, रिमोट सेंसिंग के डॉ प्रवीन, सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के निदेशक डॉ. प्रशांत राय, जल विज्ञान केन्द्र की सुश्री भक्ति देवी, डॉ रीमा, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी के डॉ. राजेश कुमार सिंह, नौला के श्री बिशन सिंह, कंसल्टेंट श्री भुवन जोशी, वाडिया इंस्टीट्यूट के डॉ. के. सी. सैन, एचएनबी गढ़वाल केन्द्रीय विश्व विद्यालय के प्रो. मोहन सिंह पंवार आदि ने भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे। इस अवसर पर श्री भुपेन्द्र बसेड़ा द्वारा पानी के महत्व को दर्शाने वाली कैच द वाटर-कैच द रेन गीत की भी प्रस्तुति दी गयी।
इस अवसर पर सचिव मुख्यमंत्री आर. मीनाक्षी सुंदरम भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने किया।

सरकार ने ऋषिकेश में अवस्थापना विकास के लिए 1600 करोड रुपये मांगे

धर्म एवं योग नगरी ऋषिकेश को पूर्णरूप से सुविधा सम्पन्न बनाये जाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री की पहल पर ऋषिकेश नगर के एकीकृत शहरी अवस्थापना विकास परियोजना हेतु वित्तीय मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा यूरोपीय वित्तपोषण संस्था को 160 मीलियन यूरो की सहायता हेतु प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। परियोजना की कुल लागत लगभग 200 मीलियन यूरो (लगभग रू0 1600 करोड़) है। परियोजना हेतु भारत सरकार व राज्य सरकार का वित्तीय अनुपात 80ः20 प्रस्तावित है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखण्ड में इन्फ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व विकास हो रहा है। ऋषिकेश में एकीकृत शहरी अवस्थापना विकास परियोजना से विश्व में योग नगरी के रूप में विख्यात ऋषिकेश नगर में स्थानीय नागरिकों एवं पर्यटकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
परियोजना के अंतर्गत चौबीसों घंटे पेयजल आपूर्ति प्रणाली, पेयजल मीटर वर्षाजल प्रबन्धन व बाद सुरक्षा, सार्वजनिक स्वच्छता सुविधाएं, स्मार्ट शहरी स्थल, परिधान व सामान कक्ष, प्रतीक्षालय, घाट और व्यापारिक स्थल का विकास, सड़के और यातायात प्रबंधन भूमिगत उपयोगिता नालिका नागरिक सुरक्षा और सुविधाओं हेतु विकसित एकीकृत नियंत्रण व आदेश केन्द्र, स्मार्ट स्तम्भ व ऊर्जा बचत हेतु उपकरणों की स्थापना, परिवहन केंद्र, बस टर्मिनल और पार्किंग इत्यादि के कार्य किए जायेंगे।
प्रत्येक वर्ष ऋषिकेश में लाखों पर्यटकों का आवागमन धार्मिक एवं साहसिक पर्यटन गतिविधियों के लिए किया जाता है। ऐसे में अतिरिक्त सुविधाओं को विकसित किए जाने के दृष्टिगत विकास कार्य किए जाने की आवश्यकता है। यातायात संकुलन से होने वाली परेशानी को कम करने के उद्देश्य से ऊंचे पथों का निर्माण किया जायेगा।
परियोजना के पूर्ण होने पर नागरिक जीवनशैली व जीवन योग्यता मानकों में वृद्धि होगी, स्थानीयों के व्यापारिक व आजीविका स्तर में सुधार होगा, नागरिकों व पर्यटकों को बेहतर पेयजल एवं स्वच्छता सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी, जीविकोपार्जन गतिविधियों में वृद्धि होगी, यातायात में सरलता होगी तथा पर्यटकों को उच्चस्तरीय सुविधाएं प्राप्त हो सकेगी।

एम्स ने सेटेलाइट सेंटर के लिए चयनित भूमि पर कब्जा लिया

एम्स ऋषिकेश को राज्य सरकार की ओर से कुमाऊं मंडल में सेटेलाईट सेंटर निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण कर ली गई है। एम्स जल्द यहां सुपरस्पेशलिटी अस्पताल का निर्माण शुरू करेगा।
कुमाऊं सेंटर ऑफ एम्स ऋषिकेश के लिए मंगलवार को राज्य सरकार की ओर से भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इस दौरान एम्स के अधिकारियों ने सेटेलाइट सेंटर के लिए चयनित भूमि पर कब्जा ले लिया है। इसके लिए एम्स के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता की अगुवाई में संस्थान के अधिकारी उप निदेशक प्रशासन ले. कर्नल अच्युत रंजन मुखर्जी, अधिशासी अभियंता अजय गुप्ता व जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल मौके पर मौजूद रहे। गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा कुमाऊं मंडल के किच्छा, उधमसिंहनगर में एम्स के सेटेलाईट सेंटर के लिए 100 एकड़ भूमि हस्तांतरित की गई है। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने बताया कि उक्त हस्तांतरित भूमि पर एम्स एक से डेढ़ वर्ष में टर्सरी केयर सेंटर स्थापित करेगा।
कुमाऊं सेंटर ऑफ एम्स ऋषिकेश में सभी प्रकार की सुपरस्पेशलिटी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि संस्थान की प्राथमिकता रहेगी कि कुमाऊं मंडल के लोगों को सभी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाएं, जिससे उन्हें इलाज के लिए ऋषिकेश तक की दूरी तय नहीं करनी पड़े।

शहीद के घर पहुंचे सीएम, दी श्रद्धांजली

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 1984 में सियाचिन में ऑपरेशन मेघदूत के दौरान शहीद हुए लांसनायक चन्द्रशेखर हर्बाेला के पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। शहीद चंद्रशेखर हर्बाेला का पार्थिव शरीर 38 वर्ष के पश्चात बुधवार को उनके आवास पहुँचने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी एवं महिला सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्या ने श्रद्धा सुमन अर्पित किये।
बुधवार को जैसे ही शहीद चन्द्रशेखर हर्बाेला का पार्थिव शरीर डहरिया स्थित उनके आवास पर पहुँचा, पूरा क्षेत्र देश भक्ति नारों से गुंजायमान हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद चन्द्रशेखर के बलिदान को हमेशा याद रखा जायेगा। उन्होंने कहा देश के लिए बलिदान देने वाले उत्तराखण्ड के सैनिकों की स्मृति में सैन्य धाम की स्थापना की जा रही है। शहीद चन्द्रशेखर की स्मृतियों को भी सैन्य धाम में संजोया जायेगा।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सरकार शहीद के परिवार के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़ी है। सरकार द्वारा शोक संतृप्त परिवार की हर सम्भव सहायता की जाएगी।
पुष्प चक्र अर्पित करने के पश्चात शहीद चन्द्रशेखर का पार्थिव शरीर चित्रशिला घाट रानीबाग के लिए रवाना हुआ, जहां शहीद को पूरे राजकीय सम्मान व आर्मी बैण्ड की धुन के साथ भावभीनी विदाई दी गई। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में लोगों द्वारा नम आंखों से शहीद को श्रद्धांजलि दी गई।

विभागीय सचिव को जनगणना कराने के निर्देश

आज दो वर्षों से स्थगित 2021 की जनगणना के आरंभ को लेकर कैबिनेट मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने विभागीय सचिव के साथ समीक्षा बैठक की।
बुधवार को विधानसभा स्थित कार्यालय पर कैबिनेट मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने जनगणना एवं पुनर्गठन के सचिव चंद्रेश यादव के साथ समीक्षा बैठक की। डॉ अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 2011 के बाद 2021 में जनगणना की जानी थी। मगर कोविड-19 के चलते जनगणना नहीं की जा सकी।
मंत्री डॉ अग्रवाल ने कहा कि जनगणना निदेशालय भारत सरकार के द्वारा जनगणना के संबंध में जो भी निर्देश दिए गए हैं, उन निर्देशों का यथा अनुपालन करते हुए इस वर्ष जनगणना आरंभ की जाए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के दिए गए निर्देशों के अनुसार आगामी जनगणना की जाए साथ ही पूरी कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र उनके समक्ष प्रस्तुत की जाए।
इस मौके पर सचिव जनगणना एवं पुनर्गठन चंद्रेश यादव ने बताया कि संभवतया माह अगस्त के बाद जनगणना शुरू की जाएगी। बता दें कि 2021 में कोरोना के चलते जनगणना नहीं हो पाई थी। तभी से दो वर्ष से जनगणना स्थगित चल रही है।

विश्व स्तर का हो उत्तराखण्ड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने बुधवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने सचिव आपदा को सेंटर की स्थापना में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि यह सेंटर विश्व स्तर का बनाया जाना है।
मुख्य सचिव ने कहा कि हिमालयी राज्यों में भूस्खलन बहुत बड़ी समस्या है, परन्तु राष्ट्रीय स्तर में भी भूस्खलन से सम्बन्धित अध्ययन, शोध और न्यूनीकरण के लिए समर्पित कोई संस्थान उपलब्ध नहीं है। इस क्षेत्र में उत्तराखण्ड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर सिर्फ अन्य राज्यों को ही नहीं बल्कि देश-विदेश में सेवा उपलब्ध कराने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्य सचिव ने कहा कि इस सेंटर के कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विश्व स्तरीय विशेषज्ञता पर फोकस किया जाए। इस सेंटर में सम्बन्धित क्षेत्र से प्रोफेशनल्स को ही तैनात किया जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए सम्बन्धित क्षेत्र में कार्य कर रहे नेशनल और इंटरनेशनल संस्थानों में कार्य कर रहे प्रोफेशनल्स से संपर्क किया जाए।
मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर शीघ्र ऑपरेशनल किए जाने हेतु प्रत्येक स्तर की तिथियां निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए। इस अवसर पर सचिव आपदा डॉ. रंजीत सिन्हा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

देश के घर-घर में फहराता तिरंगा दुनिया को एक भारत श्रेष्ठ भारत का संदेश दे रहा-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानियों, सैन्य और अर्धसैन्य बलों के शहीद जवानों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि आज जो हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं वह स्वतंत्रता सेनानियों और शहीद जवानों के त्याग और बलिदान का प्रतिफल है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के सभी अमर शहीदों और आंदोलनकारियों को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हम अमृत महोत्सव मना रहे हैं। महान स्वतंत्रता सेनानियों और शहीद वीर जवानों को समर्पित अमृत महोत्सव, नए भारत, आत्मनिर्भर भारत का भी संकल्प है। देश के घर-घर में फहराता तिरंगा दुनिया को एक भारत श्रेष्ठ भारत का संदेश दे रहा है। किसान का सम्मान हो, गरीब का कल्याण हों, युवा को अवसर हो, महिलाओं का उत्थान हो, तकनीक में नवाचार हो, विश्व पटल पर भारत की मजबूत पहचान हो, इतिहास की समस्याओं का स्थायी समाधान हो, ये सब प्रधानमंत्री जी की दृढ इच्छाशक्ति और दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है। कोविड महामारी का जिस तरह से हमने सामना किया, उसकी पूरे विश्व में सराहना हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का उत्तराखण्ड से विशेष लगाव किसी से छुपा नहीं है। पिछले आठ वर्षों में केन्द्र सरकार द्वारा 1 लाख 50 हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। श्री केदारपुरी का पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री जी के विजन, नेतृत्व एवं संकल्प का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान पर भी काम हो रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। टनकपुर-बागेश्वर रेललाईन और डोइवाला से गंगोत्री-यमुनोत्री रेललाइन के सर्वे की भारत सरकार द्वारा सहमति दी गई है। केदारनाथ, बदरीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री के साथ ही टनकपुर-पिथौरागढ़ की सड़क कनेक्टीवीटी में सुधार के लिए चारधाम ऑलवेदर सड़क परियोजना पर काफी कुछ काम किया जा चुका है। दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड बनने से दिल्ली से देहरादून केवल 2 घंटे में जा सकेंगे। केंद्र सरकार से पौंटा साहिब-देहरादून, बनबसा-कंचनपुर, भानियावाला-ऋषिकेश, काठगोदाम-लालकुंआ-हल्द्वानी बाईपास और रूद्रपुर बाईपास परियोजनाओं की महत्वपूर्ण सौगात मिली हैं। जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जा रहा है। ऊधमसिंहनगर में ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट विकसित किया जा रहा है। जल जीवन मिशन में ’’हर घर नल से जल’’ के अंतर्गत राज्य के ग्रामीण क्षेत्र के 7 लाख से अधिक परिवारों को कनेक्शन दिये जा चुके हैं। भारत सरकार द्वारा स्वीकृत ‘उत्तराखण्ड इंटिग्रेटेड हार्टिकल्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’ हॉर्टीकल्चर में मील का पत्थर साबित होगा। 38 छोटे नगरों में पेयजल के लिए 1600 करोड़ रूपए की उत्तराखण्ड अर्बन वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट’ महत्वपूर्ण पेयजल योजनाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जमरानी बांध बहुद्देशीय परियोजना से नैनीताल व ऊधमसिंहनगर के तराई क्षेत्र लाभान्वित होंगे। सौंग बांध परियोजना से देहरादून में वर्ष 2053 तक अनुमानित आबादी के लिए पेयजल आपूर्ति उपलब्ध हो सकेगी। 300 मेगावाट की लखवाड़ बहुद्देशीय परियोजना के लिये निविदा भी आमंत्रित कर दी गई हैं। 1930 करोड़ रूपए से टिहरी लेक डेवलपमेंट का काम किया जा रहा है। अमृत योजना अन्तर्गत 7 शहरों में सीवरेज, पेयजल, ड्रेनेज, पार्क आदि के लिये 593 करोड़ रूपए की योजनाओं पर काम चल रहा है। ऊधमसिंहनगर में एम्स का सैटेलाईट सेंटर बनने से एक बड़ी आबादी को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार, उत्तराखण्ड के चहुमुखी विकास के लिए समर्पित भाव से जुटी है। लोगों को योजनाओं का लाभ मिले और उनकी समस्याओं का समाधान हो, इसके लिए सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि पर खास तौर पर फोकस किया गया है। अपणि सरकार पोर्टल, ई-केबिनेट, ई-ऑफिस, सीएम हेल्पलाईन, सेवा का अधिकार और ट्रांसफर एक्ट की पारदर्शी व्यवस्था के चलते कार्यसंस्कृति में गुणात्मक सुधार हुआ है। अब प्रदेश का कोई भी व्यक्ति 1064 पर शिकायत कर भ्रष्टाचार को समाप्त करने में योगदान कर सकता है। हमने अपने वादे के अनुसार समान नागरिक संहिता के लिये समिति का गठन कर दिया है।समिति की तीन बैठकें भी हो चुकी हैं। हम गरीब परिवारों को तीन सिलेण्डर मुफ्त उपलब्ध करवाने जा रहे हैं। इसके लिये बजट में प्रावधान भी किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम सर्किट में आने वाले सभी मंदिरों और गुरूद्वारों में भौतिक ढांचे और परिवहन सुविधाओं के विस्तार की हमारी योजना है। हम कुमाऊं के पौराणिक मंदिरों के लिये मानसखण्ड मंदिर माला मिशन पर भी काम कर रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में रोपवे नेटवर्क निर्माण के लिये पर्वत माला परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। सर्फेस पार्किंग के साथ ही मल्टीस्टोरी पार्किंग, केविटी पार्किंग व टनल पार्किंग भी विकसित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि ही नहीं, वीरभूमि भी है। देहरादून में भव्य सैन्य धाम की स्थापना की जा रही है। हमारी सरकार, शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित कर रही है। उत्तराखण्ड राज्य के वीरता पदक से सम्मानित सैनिकों को देय एकमुश्त अनुदान में वृद्धि की गई है। स्वतंत्रता सेनानियों और उनकी विधवाओं की पेंशन को बढ़ाने के साथ ही उत्तराखण्ड से द्वितीय विश्व युद्ध की वीरांगना एवं वेटरन की पेंशन में भी वृद्धि की गई है। हमने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन में भी वृद्धि की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के युवाओं को देश से बाहर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाने के लिये राज्य में विदेश रोजगार प्रकोष्ठ के गठन की स्वीकृति दी है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिये राज्य में 4457 को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केन्द्रों में बाल वाटिकायें प्रारम्भ हो चुकी है। ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केन्द्रीय स्टूडियो तथा राज्य के समस्त 13 जनपदों के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लास रूम की स्थापना की जा चुकी है। उच्च शिक्षण संस्थानों में रिसर्च और स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के उद्देश्य सेस्टार्ट-अप पॉलिसी लागू की गयी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने राज्य में निशुल्क जांच योजना प्रारम्भ की है। इसके तहत मरीजों को 207 प्रकार की पैथेलॉजिकल जांचों की निशुल्क सुविधा मिल रही है।आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना में 47 लाख 83 हजार से अधिक लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। आयुष्मान योजना के अंतर्गत अब तक 5 लाख 40 हजार से अधिक मरीज मुफ्त में उपचार करा चुके हैं। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के उपचार पर अब तक 919 करोड़ से अधिक का व्यय किया जा चुका है। प्रधानमंत्री जी के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान को आगे बढ़ाते हुए हमने मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना की शुरूआत की है। आंगनबाड़ी बहनों और आशा बहनों के मानदेय में बढ़ोतरी की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों के विकास को समर्पित है। सीमांत तहसीलों के लिए मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना शुरू की है। मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना भी प्रारम्भ की गई है। वोकल फॉर लोकल पर आधारित ‘एक जनपद दो उत्पाद’ योजना से स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे, वहीं स्थानीय उत्पादों को विश्वस्तरीय पहचान मिलेगी। राज्य में समयबद्ध रूप से निवेश प्रस्तावों का ऑनलाईन निस्तारण किया जा रहा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में हम एचीवर्स की श्रेणी में आ गये हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेल और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए नई खेल नीति लाई गई है। स्पोर्ट्स कॉलेज रायपुर को अंतराष्ट्रीय स्तर का स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय बनाने हेतु प्रयास किये जा रहे हैं। उभरते खिलाड़ियां को प्रोत्साहित करने के लिये मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन खेल छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत प्रत्येक जनपद के 150 बालक और 150 बालिकाओं को खेल छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण स्तर पर ओपन जिम के लिये 10 करोड़ रूपए का बजट में प्राविधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि होम स्टे योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। अभी तक 4060 होमस्टे पंजीकृत किये जा चुके हैं। ट्रैकिंग मार्गां पर भी होम स्टे को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। 16 ईको टूरिज्म डेस्टीनेशन विकसित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों व जलस्त्रोतों को पुनर्जीवित करने की पहल बड़े स्तर पर की गई है। प्रत्येक जिले में वर्षा जल संचय के लिए झीलें विकसित की जा रही हैं। अमृत महोत्सव के तहत राज्य में 1250 अमृत सरोवर बनाये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत पांच वर्षों में प्रदेश में जैविक कृषि के क्षेत्र में निरंतर वृद्धि हुई है। 4485 जैविक क्लस्टर संचालित हैं। जैविक उत्पादों के विपणन के लिये जैविक आउटलेट भी स्थापित किये जा रहे हैं। हमारी सरकार, किसानों को तीन लाख रूपए और महिला स्वयं सहायता समूहों को पांच लाख रूपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध करा रही है।जिन किसान भाईयों के पास कृषि उपकरण नहीं हैं, उनके लिए ‘‘फार्म मशीनरी बैंक’’ योजना शुरू की है। इसके लिए 80 फीसदी तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। गोवंश की सुरक्षा और संरक्षण के लिये हमारी सरकार ने गौ सदनों की स्थापना के लिये बजट प्राविधान को इस वर्ष छः गुना कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 120 मेगावाट की व्यासी जल विद्युत परियोजना का निर्माण पूर्ण कर उत्पादन प्रारम्भ किया जा चुका है। पिछले वर्षों में उत्तराखण्ड ने विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। तमाम सामाजिक-आर्थिक सूचकांकों में हम देश के अग्रणी राज्यों में हैं सतत् विकास लक्ष्य सूचकांक में वर्ष 2018 में हम 10वें स्थान पर थे और अब हमारा स्थान चौथा हो गया है। इन्स्पायर अवार्ड हेतु नामांकन में विद्यालयवार प्रतियोगिता के आधार पर पूरे देश में उत्तराखण्ड प्रथम स्थान पर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार अन्त्योदय की भावना के अनुरूप विकास का लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है। आने वाले तीन वर्षों में उत्तराखण्ड को प्रत्येक क्षेत्र में आदर्श राज्य बनाने के लिये हमारी सरकार विकल्प रहित संकल्प के साथ काम कर रही है।