नई शिक्षा नीति को सफल बनाने के लिए केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने समीक्षा की

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास में शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग एवं कौशल विकास की समीक्षा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, शासन के अधिकारी एवं सबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि उत्तराखण्ड में नई शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन एवं शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए निपुण भारत मिशन के तहत बच्चों को पढ़ने-लिखने, बोलने, व्याख्या करने एवं संख्यात्मकता ज्ञान बढ़ाने के लिए, डायट को भी इस ओर ध्यान देना होगा। शिक्षकों को इसके लिए बेहतर प्रशिक्षण देना होगा। बच्चों की प्रारंभिक बाल्यवस्था देखभाल और शिक्षा का पाठ्यक्रम को रोचक बनाया जाए। टेक्नोलॉजी के माध्यम से ईसीसीई के पाठ्यक्रम को कैसे और रोचक बनाया जा सकता है, इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। उत्तराखण्ड के लिए जो पाठ्यक्रम बनाया जा रहा है, इसमें एससीईआरटी के साथ ही एनसीईआरटी की मदद भी ली जा सकती है।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चों को नई-नई स्किल सीखने को मिले, इसके लिए भविष्य की आवश्यकताओं को देखकर स्किल डेवलपमेंट के कोर्स कराए जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में स्किल डेवलपमेंट का हब बनने की क्षमता है। राज्य के पास प्रतिभाओं की कमी नहीं है, इन प्रतिभाओं को आगे लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य में कौशल विकास से संबंधित जो भी विभाग और संस्थान प्रशिक्षण करवा रहे हैं, उन्हें सिंगल विंडो सिस्टम पर लाए जाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड को उत्कृष्ट राज्य बनाने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है। सभी विभागों को अगले 3 साल और आने वाले 10 सालों का रोडमैप बनाने के साथ ही बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में अपनी पर्फाेमेन्स देने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि केन्द्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा शिक्षा एवं कौशल विकास के लिए जो सुझाव दिये गये हैं, उनका सही तरीके से क्रियान्वयन किया जाए।
विद्यालयी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने बताया कि एनईपी-2020 के अंतर्गत उच्च शिक्षण संस्थानों में वर्तमान शैक्षणिक सत्र से प्रवेश शुरू कर दिये गये हैं। इसके लिये नई नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किये गये हैं। विभागीय मंत्री ने बताया कि नई नीति के क्रियान्वयन के लिये राज्य स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया साथ ही स्क्रीनिंग कमेटी और कैरिकुलम डिजाइन समिति गठित की गई। जिनकी विभिन्न स्तर पर कई दौर की बैठकों और पब्लिक डोमेन से मिले सुझावों के उपरांत बाद पाठ्यक्रम तैयार किया गया। जिसे सभी विश्वविद्यालयों की बीओएस, एकेडमिक काउंसिल और एग्जेक्युटिव कमेटी द्वारा अप्रूव्ड किया गया।
इस अवसर पर अधिकारियों द्वारा प्रस्तुतीकरण के माध्यम से शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में राज्य में की जा रही विभिन्न गतिविधियों का विस्तृत प्रजेन्टेशन दिया।
बैठक में सचिव उच्च शिक्षा शैलेश बगोली, सचिव शिक्षा रविनाथ रमन, सचिव कौशल विकास विजय कुमार यादव, महानिदेशक शिक्षा बंशीधर तिवारी एवं शासन एवं संबधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

डिजिटल बैंकिंग इकाइयों का उत्तराखंड को भी मिलेगा लाभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 75 जिलों में 75 डिजिटल बैंकिंग इकाइयों को राष्ट्र को समर्पित किया। इस दौरान उन्होंने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल बैंकिंग ने मानव जीवन को आसान बनाने का कार्य किया है। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर पीएम ने कहा, आज देश डिजिटल इंडिया के सामर्थ्य का फिर एक बार साक्षी बन रहा है। आज 75 डिजिटल बैंकिग यूनिट्स देश के 75 जिलों में धरातल पर उतर रही हैं। उन्होंने कहा, भारत के सामान्य मानवी के जीवन को आसान बनाने का जो अभियान देश में चल रहा है, डिजिटल बैंकिंग यूनिट्स उस दिशा में एक और बड़ा कदम है। ये ऐसी विशेष बैंकिंग व्यवस्था है, जो मिनिमम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से मैक्सिमम सेवाएं देने का काम करेगी। उन्होंने कहा, हम सामान्य मानवी के जीवन स्तर को बदलने का संकल्प लेकर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। हमारा संकल्प है, व्यवस्थाओं में सुधार का। पारदिर्शता लाने का और आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचने का।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, भाजपा सरकार ने दो चीजों पर एक साथ काम किया है। एक है, बैंकिग व्यवस्था को सुधारना, मजबूत करना और पारदर्शिता लाना और दूसरा काम वित्तीय समावेशन लाना। उन्होंने कहा, हमने बैंकिग सेवाओं को दूर-सुदूर में, घर-घर तक पहुंचाने को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी। आज भारत के 99ः से ज्यादा गांवों में पांच किमी के अंदर कोई न कोई बैंक ब्रांच, बैकिंग आउटलेट या बैंकिंग मित्र मौजूद हैं। आज देश में हर एक लाख वयस्क आबादी पर जितनी बैंक शाखाएं मौजूद हैं, वो जर्मनी, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से भी ज्यादा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, आईएमएफ ने हमारे डिजिटल बैंकिंग बुनियादी ढांचे के प्रयासों की सराहना की है। इसका श्रेय गरीबों, किसानों और मजदूर वर्ग को जाता है, जिन्होंने नई डिजिटल तकनीक को अपनाया और इसे अपने जीवन का हिस्सा बना लिया। उन्होंने कहा, जब हमने जन-धन अकाउंट की मुहिम शुरू की तब आवाजें उठीं कि गरीब बैंक खाते का क्या करेगा। यहां तक की इस फील्ड के कई एक्सपर्ट भी नहीं समझ पा रहे थे, इस अभियान का महत्व क्या है। लेकिन बैंक खाते की ताकत क्या होती है,ये आज पूरा देश देख रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, यूपीआई अपने तरह की दुनिया की पहली टेक्नोलॉजी है। आज भारत में आप इसे शहर से लेकर गांव तक शोरूम हो या सब्जी का ठेला हर जगह देख सकते हैं। डिजिटल बैंकिंग ने आज वित्तीय लेनदेन को पीछे छोड़ दिया है और खुद को सुशासन और बेहतर सेवा वितरण माध्यम के उदाहरण के रूप में स्थापित किया है। आज यह प्रणाली एमएसएमई और निजी संस्थानों के लिए विकास का इंजन बन गई है।

उत्तराखंड में नए शैक्षणिक सत्र के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का शुभारम्भ

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में उच्च शिक्षा में शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत भी उपस्थित रहे।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने देश में सबसे पहले राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने के लिए उत्तराखण्ड सरकार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखण्ड में उच्च शिक्षा में इसका शुभारम्भ किया गया है। बाल वाटिका से प्रारम्भिक शिक्षा में उत्तराखण्ड ने ही इसकी सबसे पहले शुरुआत की। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड विद्वानों की भूमि है। इस देवभूमि से नई शिक्षा नीति के बेहतर क्रियान्वयन के लिए अभी अनेक विचार आयेंगे। अब प्रयास करने होंगे कि आने वाले समय में शत प्रतिशत बच्चे बाल वाटिकाओं में प्रवेश करें। उन्होंने कहा कि किसी भी देश एवं समाज का विकास बेहतर शिक्षा से ही हो सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मानवीय जीवन के सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है। शिक्षा के साथ ही बच्चों के कौशल विकास, उनके व्यक्तित्व के विकास, भाषाई विकास एवं नैतिक मूल्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है। शिक्षा व्यक्ति की आत्मनिर्भरता से जुड़ी हुई है।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बच्चों को 3 साल से फार्मल एजुकेशन से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत बाल वाटिका शुरू की गई है, बाल वाटिका में 3 साल सीखने के बाद बच्चा पहली कक्षा में प्रवेश करेगा, तब उसकी उम्र 6 साल होगी। बच्चों को नवजात से उनकी 21-22 साल की उम्र तक बेहतर एवं गुणात्मक शिक्षा के लिए उत्तराखण्ड में 40 लाख बच्चों का टारगेट लेकर आगे बढ़ना होगा। स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकि शिक्षा,मेडिकल, पेरामेडिकल एवं अन्य को मिलाकर 35 लाख की व्यवस्था उत्तराखण्ड के पास पहले से ही है। उन्होंने कहा कि देश डिजिटल इंडिया की ओर तेजी से बढ़ा है। उच्च शिक्षा की दिशा में उत्तराखण्ड में जो नीति बन रही है, वह इस दिशा में बहुत बड़ा कदम है। प्रदेश के नौजवानों को विश्व की आवश्यकता के लिए तैयार कराना, यह उत्तराखण्ड के पास ताकत है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू किए जाने के की दिशा में, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रभावी एवं चरणबद्ध रूप से सकारात्मक कदम बढ़ाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में तैयार की गई नई शिक्षा नीति 21वीं सदी के नवीन, आधुनिक, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के नए आयाम खोलने वाली नीति है। इसे देश के ख्यातिलब्ध शिक्षाविदों द्वारा तैयार किया गया है और ये नए भारत की, नई उम्मीदों नई आवश्यकताओं की पूर्ति का सशक्त माध्यम है। यदि हम एक समृद्ध भविष्य चाहते हैं तो हमने अपने वर्तमान को सशक्त बनाना होगा, ठीक इसी प्रकार से यदि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को और भी अधिक प्रतिभाशाली बनाना चाहते हैं तो हमें उसके बचपन और उसकी शिक्षा पर आज से कार्य करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने सम्पूर्ण विश्व को ज्ञान देने का कार्य किया है। हमारे नालंदा और तक्षशिला जैसे अद्वितीय शिक्षा मंदिर पूरी दुनिया में कहीं नहीं थे और यहां से ज्ञान अर्जित करने वालों ने संपूर्ण मानवजाति को एक नई राह दिखाई। हमारे देश में मेधा की कभी कोई कमी नहीं रही और एक से एक विद्वानों और शिक्षाविदों ने भारत की बौद्धिक संपदा को विस्तार दिया। लेकिन कालांतर में आए विदेशी आक्रांताओं और शासकों ने हमारी शिक्षा व्यवस्था पर ही सबसे अधिक चोट की और इसको तहस-नहस कर दिया। उस दौर में व्यवस्थाएं ऐसी बना दी गईं जिसके बाद से पढ़ाई का अर्थ और लक्ष्य केवल और केवल नौकरी पाने तक सीमित हो कर रह गया। उन्होंने कहा कि 2025 में राज्य स्थापना की रजत जयंती मनाई जायेगी। तब तक हम बेस्ट प्रैक्टिस के तौर पर क्या कर सकते हैं, जो देश के लिए आदर्श बने इस दिशा में सभी विभागों को तेजी से कार्य करने होंगे।
सूबे के विद्यालयी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने राज्य में एनईपी-2020 लागू किये जाने का श्रेय विद्यालयी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों की मेहनत का नतीजा है कि आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया जा सका। डॉ रावत ने बताया कि एनईपी-2020 के अंतर्गत उच्च शिक्षण संस्थानों में वर्तमान शैक्षणिक सत्र से प्रवेश शुरू कर दिये गये हैं। इसके लिये नई नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किये गये हैं। विभागीय मंत्री ने बताया कि नई नीति के क्रियान्वयन के लिये राज्य स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया साथ ही स्क्रीनिंग कमेटी और कैरिकुलम डिजाइन समिति गठित की गई। जिनकी विभिन्न स्तर पर कई दौर की बैठकों और पब्लिक डोमेन से मिले सुझावों के उपरांत बाद पाठ्यक्रम तैयार किया गया। जिसे सभी विश्वविद्यालयों की बीओएस, एकेडमिक काउंसिल और एग्जेक्युटिव कमेटी द्वारा अप्रूव्ड किया गया। उन्होंने बताया कि नई नीति के तहत छात्र-छात्राओं को च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम का लाभ मिलेगा और अब वह अपने मनपसंद विषय और विश्वविद्यालय चुन सकेंगे। डॉ रावत ने बताया कि नए पाठ्यक्रम रिसर्च, इनोवेशन और इंटरप्रेन्योरशिप बेस्ड होंगे। इसमें रोबोटिक्स जैसे एडवांस कोर्स रखे गये हैं। उन्होंने बताया कि को-कैरिकुलम कोर्स के 6 सेमेस्टरों के प्रत्येक सेमेस्टर में भारतीय ज्ञान परम्परा, कम्युनिकेशन स्किल, इन्वायरमेंट, मैनेजमेंट पैराडाइज ऑफ भागवत गीता, योगा, विवेकानंद स्टडीज, पर्सनली डेवलपमेंट, रामचरितमानस, ट्रेडिशनल नॉलेज, वैदिक साइंस और वैदिक गणित जैसे कोर्स भी रखे गये हैं।
इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, विनोद चमोली, विनोद कण्डारी, मेयर सुनील उनियाल गामा, सचिव शैलेश बगोली, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

पुलिस का बदमाशों को खौफ नही, दिनदहाड़े बंधक बनाकर कर दी डकैती

डोईवाला में हथियारों से लैस छह नकाबपोश बदमाशों ने शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के चचेरे भाई के घर पर धावा बोला। बदमाशों ने घर की मालकिन और घर पर काम करने वाली दो महिलाओं को बंधक बनाकर डकैती की। करीब डेढ़ घंटे इत्मीनान से लूटपाट करने के बाद बदमाश नगदी और कीमती आभूषण लेकर फरार हो गए। दिनदहाड़े हुई इस दुस्साहसिक घटना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली।
शहरी विकास मंत्री के चचेरे भाई और डोईवाला के प्रतिष्ठित व्यापारी शीशपाल अग्रवाल उर्फ कोली का घराट रोड पर आवास है। बताया जा रहा है कि व्यापारी अग्रवाल शनिवार को रोज की तरह घर से सुबह करीब 9 बजे डोईवाला चौक रेलवे रोड स्थित अपनी परचून की दुकान के लिए निकल गए। दोपहर करीब 12 बजे छह लोग खुद को व्यापारी का रिश्तेदार बताते हुए जबरन घर के अंदर घुस गए। उस वक्त घर पर व्यापारी की पत्नी ममता के अलावा दो नौकरानी लक्ष्मी और आरती मौजूद थीं। जब तक वह कुछ समझ पाती, असलहों से लैस बदमाशों ने तमंचे और चाकू की नोक पर रस्सी से हाथ-पैर बांधकर उन्हें बंधक बना दिया। महिलाओं को बंधक बनाने के बाद बदमाशों ने घर में दिवान बॉक्स, लॉकर, आलमारी आदि को खंगाला।
लूटपाट के बाद बदमाश नगदी और कीमती आभूषण लेकर फरार हो गए। बदमाशों के जाते ही महिलाओं के शोर-मचाने पर आस-पड़ोस के लोग पहुंचे और महिलाओं को बंधन मुक्त कराया। बदहवास घर की मालकिन और काम करने वाली महिलाओं ने बताया कि बदमाश नकाबपोश थे। उनके पास तमंचे और चाकू थे। सूचना पाकर फोरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना कर साक्ष्य जुटाने के प्रयास किए। एसएसपी दिलीप सिंह, एसपी देहात कमलेश उपाध्याय, सीओ डोईवाला अनिल शर्मा, सीओ ऋषिकेश डीसी ढौडियाल, कोतवाल राजेश शाह आदि मौके पर पहुंचे और बदमाशों की तलाश को कई जगहों पर चेकिंग की गई।

शहरी विकास मंत्री अग्रवाल ने किया वात्सल्य डे-केयर का लोकार्पण

देहरादून में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत वात्सल्य डे-केयर (क्रेंच बिल्डिंग) का लोकार्पण कर जनता को समर्पित किया गया। क्रेंच बिल्डिंग का लोकार्पण वित्त व शहरी विकास मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल, गढ़वाल कमिश्नर सुशील कुमार, मेयर दून सुनील उनियाल गामा, जिलाधिकारी सोनिका द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
शनिवार को ईसी रोड स्थित वीरांगना तीलू रौतेली कामकाजी महिला छात्रावास परिसर पर कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस दौरान मंत्री डॉ अग्रवाल में वास्ते डे केयर का अवलोकन भी किया। मंत्री डा. अग्रवाल ने बताया कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत समूचे भारत के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने का कार्य प्रगति पर है। जिसके अंतर्गत राज्य में देहरादून शहर को स्मार्ट सिटी बनाने का तृतीय चरण में चयन हुआ है। डा. अग्रवाल ने बताया कि 27 परियोजनाएं प्रस्तावित थीं। जिसमें छह परियोजनाओं को पूर्व में ही पूर्ण कर जनता को समर्पित किया जा चुका है, अन्य परियोजनाओं पर कार्य गतिमान है।
डा. अग्रवाल ने बताया कि वात्सल्य डे-केयर (क्रेंच बिल्डिंग) का निर्माण तीलू रौतेली कामकाजी महिला छात्रावास परिसर में किया गया है। बताया कि यह कामकाजी महिलाओं के छोटे बच्चों (जिनकी उम्र एक से चार वर्ष है) की डे केयर के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त है। इसकी लागत 1.03 करोड़ रूपये है।
डा. अग्रवाल ने बताया कि क्रेंच बिल्डिंग बनाने का उद्देश्य सरकारी ओर गैर सरकारी विभागों के साथ ही निजी संस्थाओं में कार्यरत महिलाओं के छोटे बच्चों के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त डे केयर उपलब्ध कराना है। बताया कि इसमें 30 छोटे बच्चों के डे केयर की सुविधा आराम से की जा सकेगी।
डा. अग्रवाल ने बताया कि वात्सल्य डे-केयर (क्रेंच बिल्डिंग) में नर्सरी, शयन कक्ष, अध्ययन कक्ष, एक्टिविटी एवं खेलकूद कक्ष आदि की सुविधाएं हैं। बताया कि इसमें बाल विकास विभाग के विशेषज्ञों की देख रेख में कामकाजी महिलाओं के बच्चों का पालन-पोषण किया जाएगा। इससे कामकाजी महिलाएं अपने बच्चों की चिंता से मुक्त होकर कामकाज में पूरी तरह से ध्यान दे पाएंगी।

वात्सल्य डे-केयर (क्रेंच बिल्डिंग) में मिलेंगी यह सुविधाएं
वित्त व शहरी विकास मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि वात्सल्य डे-केयर (क्रेंच बिल्डिंग) में दस तरह की सुविधांए बच्चों को दी जाएंगी।
1. 01 वर्ष तक के बच्चों के लिए पालने/नर्सरी की सुविधा।
2. 01 वर्ष से ऊपर 03 वर्ष के बच्चों के लिए बंक बेड।
3. बच्चों के पढ़़ने के लिए अध्ययन कक्ष।
4. बच्चों के भौतिक एवं मानसिक विकास के लिए बिल्डिंग की दीवारों पर बच्चों के अनुरूप कलाकृतियां।
5. बच्चों के खेलने के लिए खिलौने व झूले।
6. संतुलित आहार के लिए किचन की सुविधा।
7. बच्चों के खेलकूद के लिए एक्टिविटी एरिया।
8. शौचालय, पानी और बिजली की उचित व्यवस्था।
9. वातानुकूलित एवं रोशनीयुक्त वातावरण।
10. सभी सुविधाएं बाल विकास विभाग के विशेषज्ञों द्वारा संचालित किए जाएंगे।

इस मौके पर भाजपा प्रवक्ता विनय गोयल सहित स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के पदाधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिये, जन आरोग्य अभियान’ में तेजी लाने के दिये निर्देश

राज्य स्तरीय जन आरोग्य अभियान के अंतर्गत मार्च 2023 तक प्रदेश भर के 18 लाख लोगों के स्वास्थ्य जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान में तेजी लाने के लिये विभागीय अधिकारियों को ठोस निर्देश गये गये हैं साथ ही ऐसे जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को विशेष हिदायत दी गई है जहाँ अभियान की रफ्तार बेहद सुस्त है। अभियान के तहत अभी तक 4 लाख लोगों की एनसीडी स्क्रीनिंग (स्वास्थ्य परीक्षण) की जा चुकी है।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि राज्य स्तरीय ‘जन आरोग्य अभियान’ की सफलता को देखते हुये इस अभियान के तहत मार्च 2023 तक प्रदेश भर के 18 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को अभियान में तेजी लाने के ठोस निर्देश दे दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि कुछ जनपदों में जन आरोग्य अभियान की रफ्तार बेहद धीमी है जिसमें तेजी लाने के लिये सम्बंधित सीएमओ को जरूरी निर्देश दिये गये हैं। विभागीय मंत्री ने कहा कि अब तक प्रदेश भर में जन आरोग्य अभियान के तहत 483682 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। जिसमें अल्मोड़ा जनपद में 45101, बागेश्वर में 19297, चमोली में 33614, चंपावत में 21499, देहरादून में 52144, हरिद्वार में 87535, नैनीताल में 54823, पौड़ी में 22255, पिथौरागढ़ में 15720, रुद्रप्रयाग में 17487, टिहरी गढ़वाल में 13863, ऊधमसिंह नगर में 84898 और उत्तरकाशी में 15446 लोगों की एनसीडी स्क्रीनिंग की गई है।
रावत ने बताया कि जन स्वास्थ्य अभियान के अंतर्गत 285956 लोगों की सामान्य स्वास्थ्य जांच जबकि 221109 लोगों का रक्तचाप (बीपी) परीक्षण, 165093 लोगों की शुगर (डायबिटीज) जांच, 202550 लोगों का ओरल कैंसर स्क्रीनिंग, 112002 महिलाओं के स्तन कैंसर स्क्रीनिंग, 168884 नेत्र परीक्षण, 155520 लोगों की टीबी जांच और 163549 लोगों को तम्बाकू मुक्त अभियान के प्रति जागरूक किया गया।
रावत ने बताया कि इसके अलावा अभियान में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा लोगों के आयुष्मान कार्ड और आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ आईडी कार्ड भी बनाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान में प्रदेश भर के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर तैनात 940 सीएचओ को जिम्मेदारी सौंपी गई है जो गांव गांव जाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर अभियान को सफल बनाने में जुटे हैं। रावत ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को आरोग्य उत्तराखंड बनने के लिये संकल्पित है। उन्होंने लोगों से अपना स्वास्थ्य परीक्षण करा कर जन आरोग्य अभियान का लाभ उठाने की अपील भी की।

निर्यात को सुगम बनाने के लिए लॉजिस्टिक सुधार में उत्तराखंड के आगे बढ़े कदम

निर्यात को सुगम बनाने के लिए लॉजिस्टिक सुधार में उत्तराखंड के कदम आगे बढ़ रहे हैं। रैंकिंग में उत्तराखंड सर्वश्रेष्ठ राज्यों की श्रेणी में शामिल हुआ है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी लीड-2022 की रैंकिंग में राज्य को एक्चीवर श्रेणी मिली है। इस श्रेणी में कुल छह राज्य हैं। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लॉजिस्टिक सुविधाओं सड़क, रेल, टर्मिनल, वेयर हाउस का अवस्थापना विकास में उत्तराखंड तेजी से काम कर रहा है। इसके अलावा ऊधमसिंह नगर के पंतनगर में इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) स्थापित किया गया। हरिद्वार में भी आईसीडी बनाने की प्रक्रिया चल रही है। वर्ष 2021 की लॉजिस्टिक रैंकिंग में उत्तराखंड को इंटीकेटर की श्रेणी मिली थी। लॉजिस्टिक अवस्थापना विकास में सुधार कर उत्तराखंड ने 2022 की रैंकिंग में सर्वश्रेष्ठ राज्यों की श्रेणी में स्थान हासिल किया है।
उद्योग निदेशक सुधीर चंद्र नौटियाल ने बताया कि केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से हर साल लॉजिस्टिक क्षेत्र में किए गए सुधार के आधार पर राज्यों की रैंकिंग की जाती है। इसमें अलग-अलग मानकों पर सर्वे करने के बाद ही रैंकिंग दी जाती है। बृहस्पतिवार को मंत्रालय से जारी रैंकिंग में उत्तराखंड को एक्चीवर श्रेणी हासिल हुई है। इस श्रेणी में उत्तराखंड समेत हरियाणा, हिमाचल, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
सचिव उद्योग डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने कहा लॉजिस्टिक रैंकिंग में उत्तराखंड का सर्वश्रेष्ठ राज्यों की श्रेणी में शामिल होना बड़ी उपलब्धि है। सरकार की ओर से सड़क, रेल समेत अन्य कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है। इसके अलावा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार ने लॉजिस्टिक नीति को मंजूरी दी है। इससे आने वाले समय में लॉजिस्टिक क्षेत्र में और अधिक बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा।

वैली ऑफ वर्ड्स में पहली बार सूचना और संस्कृति विभाग भी होंगे सहयोगी

आगामी 12-13 नवंबर को देहरादून में वैली ऑफ वर्ड्स का छठा संस्करण आयोजित किया जाएगा। यह पहला अवसर है जब उत्तराखंड सरकार के सूचना एवं संस्कृति विभाग भी इस आयोजन में सहयोगी होंगे। वैली ऑफ वर्ड्स में इस बार 100 लेखक, 40 सेशन और 10 किताबों का विमोचन आकर्षण होगा।
उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में विशेष प्रमुख सचिव सूचना अभिनव कुमार एवं सेवानिवृत्त आईएएस संजीव चोपड़ा ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैली ऑफ वर्ड्स का शुभारंभ उत्तराखंड के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह करेंगे जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहेंगे। 13 नवंबर को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उन्होंने बताया कि बीते 5 वर्षों से लगातार यह आयोजन देहरादून में हो रहा है। इस बार मुख्यमंत्री की सहमति के बाद उत्तराखंड सरकार भी इसमें भागीदार है। उन्होंने कहा कि वैली ऑफ वर्ड्स के दौरान उत्तराखंड की फिल्म नीति को लेकर भी चर्चा होगी। वर्तमान में इस नीति को लेकर सुझाव आमंत्रित किये गए हैं। विशेष प्रमुख सचिव अभिनव कुमार ने कहा कि एक दो माह के अंदर फिल्म नीति को फाइनल कर लिया जाएगा। अभी तक आउटडोर शूटिंग पर ही फोकस होता था लेकिन अब प्रयास है कि फिल्म से जुड़ा हर पहलू मसलन लेखन, फोटोग्राफी, सिनेमेटोग्राफी इत्यादि यहीं पर हो।
वैली ऑफ वर्ड्स के दौरान विभिन्न गतिविधियां जैसे नृत्य प्रस्तुति, मंत्रणा कार्यक्रम भी होंगे। उन्होंने कहा कि हमारा पूरा प्रयास है कि देहरादून के वैली ऑफ वर्ड्स को जल्द से जल्द देश के सर्वश्रेष्ठ लिटरेचर फेस्टिवल के तौर पर पहचान मिले। इसके अलावा इस कार्यक्रम के दौरान रूसी एवं इसरायली किताबों पर भी चर्चा की जाएगी।

वाल्मीकी समाज ने किया वित्त मंत्री डा. अग्रवाल का पगड़ी पहनाकर सम्मान

त्रिकालदर्शी भगवान वाल्मीकि जी की जयंती के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें क्षेत्रीय विधायक व मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस मौके पर मंत्री डॉ अग्रवाल को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। साथ ही शोभायात्रा के कलाकार और सेवादारों को मंत्री डॉ अग्रवाल ने सम्मानित किया।

शुक्रवार को वाल्मीकि नगर में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री डॉ अग्रवाल ने कहा कि आदि ग्रंथ के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की सीख एवं विचार आज भी प्रासंगिक हैं। महर्षि वाल्मीकि ने भारत वर्ष ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व को अपने विचारों से सही दिशा दिखाई। महर्षि वाल्मीकि के विचारों पर चलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार सामाजिक समरसता के साथ समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिये काम कर रही है।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा आदि ग्रंथ रामायण के माध्यम से समाज को विविधता में एकता, विश्वास के साथ रिश्तों का निर्वहन, हर परिस्थिति में मर्यादित जीवन जीना, हर व्यक्ति के प्रति दया व प्रेम की भावना रखना एवं सबके प्रति एक समान व सम्मानजनक व्यवहार रखने की सीख समाज को दी।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के उदगार हमारे जीवन के लिये विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। जिनमें जननी व जन्मभूमि को स्वर्ग से बढ़कर समझना, इच्छाशक्ति से हर काम संभव है, दुनिया में दुर्लभ कुछ भी नहीं, अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है और दुरूख व विपदा जीवन में कभी भी आ सकते हैं।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि अगर हमें देश व प्रदेश के सुनहरे भविष्य का निर्माण करना है तो महर्षि बाल्मीकि जैसी महान विभूतियों द्वारा रचित ग्रंथों को पढ़ना और समझना होगा।

इस मौके पर मण्डल अध्यक्ष दिनेश सती, व्यापारी नेता प्रतीक कालिया, पार्षद शिव कुमार गौतम, पार्षद मीनाक्षी बिरला, कार्यक्रम आयोजक रविन्द्र बिरला, जगावर सिंह, मण्डल महामंत्री सुमित पंवार, जयंत शर्मा, उपाध्यक्ष राकेश चंद, संजीव सिलस्वाल, नंद किशोर जाटव, युवा मोर्चा अध्यक्ष नितिन सक्सेना, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दीपक भारद्वाज, संजीव पाल, रजनी रावत, राधे जाटव, राकेश चवारिया, सेवा राम, कुलदीप जाटव, महिपाल सिंह, प्रवीण कालरा, सत्यपाल, सुलेखा वाल्मीकि, सोनम, पूनम देवी आदि उपस्थित रहे।

भाजपा विधायक के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा, दी तहरीर

कालाढूंगी विधानसभा सीट से भाजपा के वयोवृद्ध विधायक की एक बार फिर से जबान फिसलने पर स्थानीय लोगों का गुस्सा फूटा हैं। लोगों ने कोतवाली ऋषिकेश में विधायक के खिलाफ तहरीर दी।

पूर्व सभासद व कांग्रेस नेता रवि कुमा जैन के नेतृत्व में स्थानीय लोग कोतवाली पहुंचे। यहां रवि कुमार जैन ने पुलिस को तहरीर दी। बताया कि भाजपा विधायक वंशीधर भगत ने एक कार्यक्रम के दौरान हिंदू देवी और देवताओं पर अभद्र टिप्पणी की है। इससे हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने भाजपा विधायक वंशीधर भगत के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

तहरीर देने वालों में व्यापारी नेता ललित मोहन मिश्र, मधु जोशी, अभिषेक शर्मा, विनीत कुमार जैन, पार्षद देवेंद्र प्रजापति, विजय लक्ष्मी शर्मा, हिमांशु भाटी, राहुल शर्मा, एकांत गोयल, योगेश कुमार पाल, बृजभूषण बहुगुणा, आनंद कर्णवाल, राहुल पांडे, लोकपाल कैंतुरा आदि उपस्थित रहे।