दूसरे राज्यों में फंसे लोगों ऐसे करे अप्लाई, कराये पंजीकरण

दूसरे राज्यों में फंसे उत्तराखंड के छात्रों, पर्यटकों, श्रद्धालुओं और अन्य नागरिकों की अब घर वापसी हो सकेगी। उत्तराखंड सरकार ने विभिन्न राज्यों में फंसे उत्तराखंड के लोगों के लिए लिंक जारी किया है।
इस लिंक पर क्लिक कर अप्लाई किया जा सकता है। इसमें अप्लाई करने वाले का पंजीकरण होगा और घर वापसी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 
ये हैं लिंक-https://dsclservices-in/uttarakhand-migrant-registration-php

मुख्य सचिव को सौंपी 21000 लोगों की सूची
कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने आज गुरुवार को मुख्य सचिव से मुलाकात की और उन्हें राज्य से बाहर फंसे 21 हजार लोगों की सूची सौंपी। उन्होंने बताया कांग्रेस द्वारा तैयार की गई एप के जरिए उन्हें यह जानकारी मिली है। 21 हजार लोगों ने उनसे संपर्क किया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, जोत सिंह बिष्ट, राजकुमार, विजय सारस्वत सहित आठ लोग इस प्रतिनिधि मंडल में शामिल थे।

कई राज्यों के लोग उत्तराखंड में भी
राज्य सरकार को इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय का आदेश मिल गया है। अब प्रदेश सरकार उसके अनुरूप आदेश जारी करेगी। शासन ने स्पष्ट किया है कि चरणबद्ध तरीके से अन्य राज्यों में फंसे उत्तराखंड के नागरिकों को सुरक्षित घर लाया जाएगा। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अन्य राज्यों में फंसे लोगों की सुरक्षित घर वापसी का जिम्मा राज्यों को सौंप दिया है।
राज्य तय करेंगे कि उनके यहां फंसे नागरिकों को कैसे वापस लाया जा सकता है। प्रदेश सरकार सभी राज्यों में फंसे नागरिकों की सूची तैयार करेगी, उसके बाद उन राज्यों के साथ वार्ता कर आने जाने की व्यवस्था बनाई जाएगी। उत्तराखंड में भी कई राज्यों के लोग फंसे हैं, वहां की राज्य सरकारों को भी अवगत करवाया जाएगा।

अब डिजिटल पेमेंट से करें मुख्यमंत्री राहत कोष में दान

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में शनिवार को कोविड -19 ( कोरोना राहत कार्यों) के लिए दानदाताओं द्वारा मुख्यमंत्री राहत कोष में धनराशि डिजिटल पेमेंट के माध्यम से ऑनलाइन जमा करने के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष की वेबसाइट cmrf.uk.gov.in का लोकार्पण किया। अब सभी दानदाता घर बैठे ही ऑनलाइन माध्यम से कोविड-19 राहत कार्यों के लिए अपना अमूल्य योगदान दे सकते हैं। NEFT या IMPS के द्वारा एवं अन्य माध्यमों के द्वारा दानराशि जमा करने की जानकारी भी cmrf.uk.gov.in वेबसाइट में उपलब्ध है। मुख्यमंत्री राहत कोष में UPI (Unified Payment Interface) cmrfuk@sbi.in के द्वारा या वेबसाइट cmrf.uk.gov.in में QR कोड को स्कैन करके पेटीएम, भीम एप, गूगल पे, फ़ोन पे इत्यादि डिजिटल माध्यमों से भी पेमेंट कर सकते हैं।
PAYTM एप के सर्च बॉक्स में Uttarakhand Mukhyamantri Rahat Kosh लिखकर डायरेक्ट paytm के माध्यम से भी दानराशि जमा की जा सकती है। मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा की जाने वाली दानराशि 80G के अन्तर्गत इनकमटैक्स में छूट के लिए पात्र हैं, दानदाता इस बेबसाइट में 80G रसीद के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं एवं मुख्यमंत्री राहत कोष से संबंधित अधिकारियों से भी संपर्क कर सकते हैं।यह वेबसाइट CM Office द्वारा NIC के माध्यम से बहुत कम समय में तैयार की गई है।
मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की है कि कोरोना राहत कार्यों में सहयोग देने के लिए cmrf.uk.gov.in website एवं सभी डिजिटल पेमेंट माध्यमों का उपयोग कर अधिक से अधिक दान देकर सहयोग करें। वेबसाइट उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री के आई०टी० सलाहकार रवींद्र दत्त, सचिव मुख्यमंत्री राधिका झा, एनआइसी उत्तराखंड के उपमहानिदेशक के नारायण, एनआईसी के प्रोजेक्टर कॉर्डिनेटर अरुण शर्मा उपस्थित थे।

रमजानः लॉकडाउन के नियमों का हर हाल में करना होगा पालन

रमजान के महीने में भी पुलिस के सामने कोरोना संक्रमण से बचाव को लागू लॉकडाउन के नियमों का पालन कराने के लिए एसपी सिटी श्वेता चैबे ने मुस्लिम धर्म गुरुओं से समन्वय बनाने के निर्देश पुलिस उपाधीक्षकों को दिए हैं। रमजान का महीना 24 अप्रैल से शुरु होने जा रहा है। लॉकडाउन के चलते पूजा स्थलों, धार्मिक जमाव, धार्मिक सभाओं आदि को पूर्णता प्रतिबंधित किया गया है। ऐसे में पुलिस अधीक्षक नगर श्वेता चैबे ने बैठक की। उन्होंने बताया कि रमजान में लॉकडाउन के दृष्टिगत गृह मंत्रालय के दिशा निर्देशों का अनुपालन कड़ाई से कराए जाने की जरूरत है।

रमजान शुरू होने से पहले ही मुस्लिम धर्मगुरुओं को विश्वास में लेकर पूरी व्यवस्था बना ली जाय, ताकि किसी तरह की दिक्कत न आए। सीओ सिटी शेखर सुयाल, सीओ पटेनगर अनुज कुमार, सीओ मसूरी नरेंद्र पंत, सीओ नेहरू कालोनी पल्लवी त्यागी और सीओ डालनवाला विवेक कुमार मौजूद रहे। 

इन बातों का रखना होगा ध्यान…
-रमजान के मद्देनजर अपने-प्रत्येक थाना स्तर पर धर्मगुरुओं के साथ सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए पीस कमेटी की बैठक आयोजित कर ली जाए। धर्मगुरुओं और गणमान्य व्यक्तियों से लॉकडाउन के दृष्टिगत सभी आवश्यक दिशा निर्देशों का पालन कराने को पेरित किया जाए।  
-अपने-अपने क्षेत्रों में लॉकडाउन के दिशा- निर्देशों का भली-भांति प्रचार-प्रसार करा दिया जाए।
-रमजान में सहरी और इफ्तार के समय किसी भी प्रकार के खाने पीने का सामान लेने के लिए घरों के बाहर ना जाएं। बहुत ही जरूरी हो तो सुबह सात से दोपहर एक बजे तक आवश्यक खाद्य सामग्री सामाजिक दूरी बनाते हुए खरीद कर रख लें।
-उपयोगी खाद्यान्न सामग्री हेतु आवश्यक रूप से होम डिलीवरी कराने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए।
-शहरी और रोजा इफ्तार घर वालों के साथ रह कर ही करें।  आस-पड़ोस रिश्तेदारों के साथ कहीं पर भी सार्वजनिक रूप से एकत्रित होकर इफ्तार पार्टी करने की इजाजत नहीं होगी। 
-कोरोना संक्रमण के फैलने के दृष्टिगत मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ना पहले ही मना है। रमजान माह में भी नमाज घर में ही पढ़ी जाएगी। किसी भी वक्त की नमाज के लिए आस-पड़ोस के लोगों को इकट्ठा होकर नमाज पढ़ना प्रतिबंधित है। लोगों को तरावीह और नमाज अपने-अपने घरों में ही पढ़ने हेतु बताया जाए। 
-सभी क्षेत्राधिकारियों को अपने अपने सर्किल में भ्रमण कर सोशल डिस्टेंस का पालन पूर्ण रूप से कराने और जरूरतमंदों को सभी प्रकार का राशन वितरण करने संबंधी कार्य को सुचारू रूप से चलाया जाए।

कपाट खोलने की तिथियां बदली, देश-दुनिया को राष्ट्रधर्म के अनुपालन का दिया संदेश

श्री बदरीनाथ व केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि परिवर्तित की गई है। जिसका धर्माचार्यो और धर्म विशेषज्ञों ने स्वागत किया है। वहीं, केदारनाथ के कपाट खुलने की नई तिथि आज घोषित होगी। धर्म मर्मज्ञों का कहना है कि पहले कभी भी ऐसी परिस्थितियां नहीं आई, जब बदरीनाथ व केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि बदलनी पड़ी हो। बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी और केदारनाथ के रावल भीमा शंकर लिंग ने भी राजाज्ञा के अनुसार क्वारंटाइन रहना स्वीकार कर देश-दुनिया को राष्ट्रधर्म के अनुपालन का संदेश दिया है। बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल कहते हैं कि आपातकाल में राजधर्म ही सब धर्मों में श्रेष्ठ है। ऐसे में बदरीनाथ के कपाट खोलने की तिथि परिवर्तित किया जाना राजधर्म के पालन के साथ ही धर्मग्रंथों के हिसाब से भी उचित है। कहा कि शीतकाल में भगवान नारायण के धाम में देवपूजा का विधान है। देवताओं की ओर से स्वयं देवर्षि नारद भगवान नारायण की पूजा करते हैं। कपाट खुलने के बाद नर पूजा का विधान है। लेकिन, देश में कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन से हर व्यक्ति घरों में ही रह रहा है। ऐसे में हक-हकूकधारी, श्रद्धालु व स्थानीय लोगों के बिना कपाट खोलने से नर पूजा के मायने नहीं रह जाते। कहा कि कई प्रांतों से गुजरकर आए मुख्य पुजारी ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी भी नियमानुसार स्वास्थ्य परीक्षण करा चुके हैं। साथ ही उन्होंने लॉकडाउन के नियमों का पालन कर क्वारंटाइन को स्वीकार किया। यह अनुकरणीय पहल है।
धर्माधिकारी ने कहा कि टिहरी के राजा को ’’बोलांदा बदरी’’ माना गया है। ऐसे में राजा का निर्णय स्वयं नारायण का निर्णय है और यह प्रजा के हित में भी है। बदरीनाथ पूर्व धर्माधिकारी जगदंबा प्रसाद सती का कहना है कि संकटकाल के दौरान राजधर्म में ही सारे धर्म लीन हो जाते हैं। इन दिनों कोरोना महामारी के चलते देश में महाभय का वातावरण है। ऐसे में राजधर्म का पालन कर तिथि आगे बढ़ाने का निर्णय धर्मसंगत है। कहा कि जनता से ही जनार्दन की शोभा है और वर्तमान परिस्थितियां जनार्दन के दर पर जाने से जनता को रोकती हैं।

इस समय राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता देंः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोविड-19 के दृष्टिगत सभी जिलाधिकारियों को जनपद की परिस्थिति के अनुकूल आम आदमी की समस्याओं के समाधान में मानवीय व व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने पर ध्यान देने को कहा है। उन्होंने कहा कि शादी विवाह में दूल्हा और दुल्हन दोनों के पक्षों की व्यावहारिकता देखें। ऐसे प्रकरण अंतर्जनपदीय भी हो सकते हैं। विवाह के लिए केन्द्र सरकार के सामाजिक दूरी व अन्य निर्देशों का अनुपालन करते हुए अनुमति प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जो लोग अपनी रिश्तेदारी आदि वजह से लॉक डाउन में फंस गए हैं उनका स्वास्थ्य परीक्षण करते हुए ग्रीन कैटेगरी के जनपदों में जाने की अनुमति प्रदान की जाए। यही नहीं जिन लोगों को क्वॉरेंटाइन में रखे हुए 14 दिन पूरे हो गए हैं उन्हें 15वें दिन स्वास्थ्य परीक्षण के बाद यथा स्थान भेजने की व्यवस्था कर दी जाए।
मुख्यमंत्री आवास में शासन के उच्चाधिकारियों के साथ सभी जिलाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोविड-19 के दृष्टिगत इससे संबंधित बचाव एवं राहत कार्यों की समीक्षा एवं भारत सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन के संबंध में व्यापक चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि काश्तकारों के व्यापक हित में आम व लींची के सीजन के दृष्टिगत इसे क्रय करने हेतु आने वाले ठेकेदारों को भी आवश्यक चिकित्सा सुरक्षा जांच के बाद आवागमन की सुविधा प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि मटर की खेती करने वाले किसानों के हित में फ्रोजन मटर की प्रोसेसिंग करने वाले उद्योगों को भी प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री ने गर्मी व सर्दी के मौसम में प्रदेश के सीमांत जनपदों उत्तरकाशी, चमोली व पिथौरागढ़ में माइग्रेट होने वाले लोगों के आवागमन, पशुओं को चारा-पानी, गर्मी के दृष्टिगत पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉक डाउन के कारण प्रदेश में हजारों लोगों ने रिवर्स माइग्रेशन किया है, लॉक डाउन के बाद भी इनकी संख्या और बढ़ सकती है इसके लिए एक प्रोफॉर्मा तैयार किया गया है जिसमें उनकी दक्षता आदि का पूरा विवरण तैयार किया जाना है। इसके लिए 30 हजार आवेदन भेजे जा चुके हैं। यह प्रक्रिया भविष्य की योजना तैयार करने में मददगार हो सकेगी। जिला अधिकारी अपने जनपदों में इसका भी ध्यान रखें। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान के लिए अधिक से अधिक लोगों को प्रोत्साहित करने की भी अपेक्षा की। इस धनराशि से जनकल्याण के कार्यों में बड़ी मदद मिल सकती है। उन्होंने जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो भी निर्देश राज्य सरकार द्वारा कोविड-19 के दृष्टिगत राहत एवं बचाव कार्यों के संबंध में जारी किए जा रहे हैं उनका पालन गंभीरता के साथ सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सभी जिलाधिकारियों से जनपद में मेडिकल स्टाफ की तैनाती के साथ ही उनके प्रशिक्षण पर ध्यान देने को कहा ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप कृषि व खेती से संबंधित कार्यों को सुचारू रूप से संचालन की व्यवस्था की जाए। माइग्रेट लेबरों के हित में उद्योगों से समन्वय कर उनकी आवश्यकता के दृष्टिगत उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि माइग्रेट कैम्पों में नियमित रूप से हेल्थ चेकिंग व उनके मनोबल को बढ़ाने के भी प्रयास किए जाएं।
कहा कि आवश्यक सामान लेकर जाने वाले ट्रक ड्राइवरों को कतिपय जनपदों में 14 दिन के लिए क्वॉरेंटाइन किए जाने की बात भी सामने आ रही है, ऐसे ड्राइवरों के स्वास्थ्य की जांच कर उन्हें जाने दिया जाए। उन्होंने वितरित की जा रही सामग्री की एकाउंटिंग पर भी ध्यान देने को कहा। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को कोविड-19 के दृष्टिगत वन विभाग के जिन कर्मचारियों की तैनाती की गई है उन्हें वनाग्नि के बचाव आदि कार्यों के दृष्टिगत कार्यमुक्त कर दें, इनके स्थान पर पीआरडी स्वयं सेवकों की तैनाती की जाए ।
अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कहा कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्ग, चारधाम सड़क परियोजना, कुंभ मेले से संबंधित कार्य, पुलों, नाबार्ड, लोनिवि, राज्य योजना व जिला योजना से संबंधित 75 प्रतिशत प्रगति वाले निर्माण कार्य किए जाने हैं, इसका परिचालन मानकों के अनुरूप किया जाना है। उन्होंने निर्माण कार्यों के मजदूरों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही इसका साप्ताहिक अनुश्रवण किए जाने तथा कार्य स्थल पर अथॉरिटी इंजीनियर, जे.ई. की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा, इसकी व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी इनकी रहेगी।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव उद्योग मनीषा पंवार, सचिव स्वास्थ्य नितेश झा, सचिव वित्त अमित नेगी, सचिव शहरी विकास शैलेश बगोली, सचिव पेयजल अरविंद ह्यांकी, सचिव कृषि आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव खाद्य सुशील कुमार एवं पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी ने उनके स्तर पर की जाने वाली व्यवस्थाओं पर जिलाधिकारियों से चर्चा की। जिलाधिकारियों ने अपनी समस्याओं से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

देहरादून में लागू हुआ नो मास्क नो फ्यूल

देहरादून में कोरोना के खिलाफ जंग में पेट्रोल पंप संचालक भी आगे आए है। पंप संचालकों ने पेट्रोल पंपों पर आने वाले प्रत्येक नागरिक के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। मास्क न पहनने वाले को पेट्रोल नहीं दिया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक पेट्रोल पंपों पर नो मास्क, नो फ्यूल के बैनर व पोस्टर भी चिपकाए गए हैं। कोरोना के संक्रमण को रोका जा सके, इसके लिए राज्य सरकार ने प्रत्येक सार्वजनिक स्थान पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। देहरादून पेट्रोल पंप एसोसिएशन के मीडिया प्रवक्ता विवेक गोयल ने कहा कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए एसोसिएशन ने यह निर्णय लिया है। कहा कि अब जो भी पेट्रोल पंपों पर बिना मास्क के आएगा, उसे पेट्रोल डीजल नहीं दिया जाएगा।

सीएम बोले, मैकेनाइज्ड हैंड वाॅश मशीन सार्वजनिक स्थलों के लिए उपयोगी

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के समक्ष शुक्रवार को वैज्ञानिक शाबिर अहमद ने मैकेनाइज्ड हैंड वॉश मशीन का डेमो दिया। उन्होंने कहा कि यह मशीन कोविड-19 के दृष्टिगत बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। इस मशीन से नल एवं साबुन को छुए बिना हाथ धोया जा सकता है। इस मशीन में पानी एवं साबुन का कंट्रोल पांवो से किया जाता है। मशीन में दो पेडल हैं जिनसे आवश्यकतानुसार पानी एवं साबुन का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसकी औसतन लागत लगभग 9,500 रुपए है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि यह हैंडवाश मशीन सार्वजनिक स्थलों के लिए कारगर साबित होगी। कोविड-19 पर नियंत्रण में भी यह मशीन उपयोगी सिद्ध होगी।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और वरिष्ठ पत्रकार सच्चिदानंद पैन्यूली का 92 साल की उम्र में निधन

टिहरी रियासत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सच्चिदानंद पैन्यूली पुत्र स्वर्गीय कृष्णानंद पैन्यूली का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने अपने ऋषिकेश स्थित निवास स्थान पर सुबह करीब 3 बजकर 40 मिनट पर अंतिम सांस ली।
रविवार को पूर्णानंद घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें मुखाग्नि उनके बेटे संपूर्णानंद पैन्यूली ने दी। बताते चले कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सच्चिदानंद पैन्यूली पिछले एक माह से बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती थे। ठीक एक महीने पहले 12 मार्च को उनकी पत्नी मनोरमा देवी का देहांत हो गया था। वर्तमान में वे ऋषिकेश के गंगानगर हनुमंत पुरम लेन नंबर छह में निवास कर रहे थे।
उनका मूल निवास स्थान छोल गांव बड़कोट टिहरी गढ़वाल में है। उनकी अंत्येष्टि में जिलाधिकारी देहरादून आशीष श्रीवास्तव, मेयर ऋषिकेश अनिता ममगाईं, सीओ ऋषिकेश वीरेंद्र सिंह रावत, सीओ नरेंद्र नगर प्रमोद शाह, मुनीकीरेती थाना अध्यक्ष रामकिशोर सकलानी शामिल रहे।

उनके जीवन पर एक नजर ….
– 29 मार्च 1929 को जन्मे डॉ. सच्चिदानंद पैन्यूली स्नातक की पढ़ाई के बाद टिहरी रिसायत में प्रथम बार 25 जुलाई 1946 को शहीद सुमन के शहीदी दिवस पर गिरफ्तार हुए।
– टिहरी जेल से बड़े भाई पूर्व सांसद व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिपूर्णानंद पैन्युली को फरार कराने के षड्यंत्र में गिरफ्तार किए गए। 13 दिसंबर 1946 को स्वयं भी फरार हो गए।
-अपने पैतृक गांव छोल बडकोट में अस्पताल के लिए ढाई एकड़ भूमि दान की। यहां अस्पताल बनने के बाद 13 जुलाई 1988 को तत्कालीन रक्षामंत्री केसी पंत ने उद्घाटन किया।
– सन 1951 में आचार्य विनोबा भावे से प्रेरित होकर भूदान यज्ञ में सक्रिय भूमिका निभाई।
– भारत छोड़ो आंदोलन के दिवस पर नौ अगस्त 2008 को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने डॉ. सच्चिदानंद पैन्यूली को सम्मानित किया गया।
– पत्रकारिता के लिए ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी ने 25 फरवरी 2017 को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की मानद उपाधि से सम्मानित किया।

गैस खरीदने के लिए केन्द्र सरकार उज्ज्वला कनेक्शन धारकों के अकांउट में धनराशि भेजी

लॉकडाउन के कारण केंद्र सरकार ने उज्ज्वला कनेक्शन धारकों को तीन महीने फ्री में गैस सिलेंडर देने की घोषणा की है। जिला देहरादून में अभी तक 3330 लोगों के खाते में आईओसी कंपनी (इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन) की ओर से सिलेंडर खरीदने के लिए धनराशि पहुंचा दी गई है।
अभी तक उज्ज्वला के तहत 2780 बुकिंग हो चुकी है, जिसमें से 2450 लोगों को गैस सिलेंडर मिल चुका है। केंद्र सरकार उज्ज्वला कनेक्शन धारकों को तीन महीने अप्रैल, मई और जून फ्री में सिलेंडर उपलब्ध करा रही है। इसके तहत आईओसी कंपनी सिलेंडर धारकों के खाते में पहले धनराशि पहुंचा रही है।
देहरादून जिले में इसकी शुरुआत हो चुकी है। जिले में उज्ज्वला के तहत कुल 17980 कनेक्शन धारक हैं। इनमें से 14870 उपभोक्ताओं के खाते में धनराशि पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आईओसी के मुताबिक 3330 उपभोक्ताओं के खातों में पैसा डिलीवर हो चुका है। इनमें से अभी तक 2780 उपभोक्ताओं ने गैस की बुकिंग की है। जिसमें से 2450 उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर मिल भी चुका है। अन्य लोगों को भी गैस की डिलीवरी की जा रही है।
वहीं, लॉकडाउन के दौरान पिछले 15 दिनों में जिला प्रशासन एक लाख 14 हजार से ज्यादा लोगों तक मदद पहुंचा चुका है। इस दौरान जहां करीब एक लाख लोगों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया गया, वहीं करीब 14 हजार लोगों को अन्नपूर्णा किट वितरित की गई।
जिलाधिकारी डॉ आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि 27 मार्च को जिला प्रशासन ने भोजन और राशन वितरण शुरू किया था। इसमें शहर की तमाम सामाजिक संस्थाएं, संगठन और दानदाता सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि रोजाना करीब पांच से 10 हजार लोगों को पका हुआ खाना दिया जा रहा है। वहीं करीब एक हजार लोगों को राशन की अन्नपूर्णा किट वितरित की जा रही है।

मुख्यमंत्री की पहल पर संशोधित हुआ आदेश, अब भत्तों में भी 30 प्रतिशत की होगी कटौती

उत्तराखंड के विधायकों का 30 प्रतिशत वेतन के साथ ही उनके भत्ते में भी कटौती होगी। यह पैसा कोरोना महामारी से लड़ने के लिए बने कोविड-19 फंड में जाएगा। विधायकों के वेतन व भत्तों से यह कटौती एक अप्रैल से 31 मार्च 2021 तक होगी। इस संबंध में सचिव विधायी एवं संसदीय कार्य प्रेम सिंह खिमाल ने आदेश जारी किए हैं। कोरोना के खिलाफ जारी जंग में आगे लड़ाई के लिए आवश्यक फंड जुटाने को प्रदेश मंत्रिमंडल ने पिछले दिनों बैठक करके विधायकों, मंत्रियों व मुख्यमंत्री के वेतन से 30 फीसदी कटौती का निर्णय लिया था। जिसमें संशोधन करते हुए सरकार ने शासनादेश जारी कर दिया है।
इसके तहत अब विधायकों, मंत्रियों व मुख्यमंत्री को मिलने वाले भत्तों में भी 30 फीसदी की कटौती की जाएगी। कैबिनेट ने अधिनियम की धारा 24 में संशोधन को मंजूरी देते हुए वेतन व भत्तों में कटौती के प्रस्ताव पर मुहर लगाई। विदित हो कि कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय के बाद यह संशय था कि एक साल के लिए विधायक के सिर्फ वेतन से 30 फीसदी की कटौती होगी या फिर इसमें भत्ते भी शामिल होंगे। प्रदेश में एक विधायक को 30 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। इस हिसाब से यदि प्रदेश सरकार के नौ मंत्री व राज्य मंत्रियों को छोड़ दें तो बाकी 62 विधानसभा सदस्यों के 30 हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन के हिसाब से एक साल की सहयोग निधि 66 लाख 96 हजार रुपये बैठती है। यदि इसमें मंत्रियों और राज्य मंत्रियों की राशि को जोड़ दें तो इसमें कुछ और इजाफा हो जाता है। लेकिन, आदेश में निर्वाचन क्षेत्र भत्ता व सचिव भत्ता में भी 30 प्रतिशत की कटौती करने का उल्लेख किया गया है।

पार्थिव शरीर को पैतृक गांव ले जाने से नहीं रोका जा सकता
लॉकडाउन के दौरान पार्थिव देह (डेड बॉडी) को पैतृक गांव ले जाने से नहीं रोका जा सकता है। पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) अशोक कुमार ने इस संबंध में सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने आगाह भी किया कि मेडिकल इमरजेंसी के मामलों में परमिशन देने में हीलाहवाली या लापरवाही करने से कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए पुलिस भी परोक्ष रूप से जिम्मेदार होगी।