सीएम ने पत्रकार कल्याण कोष एवं मुख्यमंत्री पत्रकार सम्मान पेंशन योजना को आयोजित समिति के प्रस्ताव को दिया अनुमोदन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पत्रकारों एवं उनके आश्रितों को आर्थिक सहायता हेतु पत्रकार कल्याण कोष एवं मुख्यमंत्री पत्रकार सम्मान पेंशन योजना हेतु आयोजित समिति के प्रस्ताव को अनुमोदन दिया है।

29 अप्रैल 2023 को समिति की बैठक में उत्तराखण्ड संकटग्रस्त पत्रकारों एवं उनके आश्रितों के लिए पत्रकार कल्याण कोष से प्राप्त आवेदन प्रकरणों पर समिति द्वारा मृतक 09 पत्रकारों के आश्रितों कुल 45 लाख रूपये की आर्थिक सहायता जिसमें प्रत्येक आश्रित परिवार को 5-5 लाख रूपये की आर्थिक सहायता देने के प्रस्ताव पर सहमति बनी थी, जिस पर मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदन दिया गया है। गम्भीर एवं असाध्य रोग से ग्रस्त पत्रकारों के चिकित्सा उपचार के लिए 05 पत्रकारों को कुल 20 लाख रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने एवं एक प्रकरण को मुख्यमंत्री राहत कोष से 72293 रूपये की आर्थिक सहायता देने के प्रस्ताव पर सहमति बनी थी, जिस पर मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदन दिया गया है।

‘‘मुख्यमंत्री पत्रकार सम्मान पेंशन योजना’’ के अन्तर्गत निर्धारित अहर्ता/पात्रता पूर्ण करने वाले 03 प्रकरणों पर पेंशन अनुमन्य किये जाने के प्रस्ताव पर समिति की सहमती बनी, जिस पर भी मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदन दिया गया है। समिति द्वारा नियामवली में उल्लिखित प्राविधानों के अन्तर्गत 06 प्रकरणों को अपूर्ण पाया गया। जिनके सबंध में पुनः एक बार अभिलेख प्रस्तुत करने का अवसर दिये जाने का सुझाव दिया गया। यदि आवेदकों द्वारा अभिलेख उपलब्ध कराये जाते हैं, तो इन प्रकरणों को आगामी बैठक में प्रस्तुत करने की सहमति बनी।

पत्रकार कल्याण कोष समिति की 29 अप्रैल 2023 को आयोजित बैठक में महानिदेशक सूचना/ सदस्य सचिव, पत्रकार कल्याण कोष समिति बंशीधर तिवारी, अपर निदेशक सूचना/सदस्य, पत्रकार कल्याण कोष समिति, रमेश पहाड़ी, सदस्य पत्रकार कल्याण कोष समिति, त्रिलोक चन्द्र भट्ट, सदस्य पत्रकार कल्याण कोष समिति, बीना उपाध्याय, सदस्य पत्रकार कल्याण कोष समिति एवं सहायक लेखाकर राकेश कुमार धीवान उपस्थित थे।

राज्य सरकार ने शासनादेश जारी कर लोकतंत्र सेनानियों के आश्रितों को पेंशन दी

उत्तराखंड में आपातकाल में जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को भी अब पेंशन मिलेगी। शासन ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है।

आपातकालीन अवधि 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच जेल गए लोकतंत्र सेनानियां को पहले सरकार 16 हजार रुपये प्रतिमाह देती थी। लोकतंत्र सेनानी सम्मान पेंशन की यह राशि बढ़ाकर अक्तूबर 2022 में 20 हजार कर दी गई थी।

अब सरकार ने तय किया है कि लोकतंत्र सेनानियों की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी या पति को भी इतनी ही राशि की लोकतंत्र सेनानी सम्मान पेंशन दी जाएगी।

सड़क सुरक्षा कार्यों से संबंधित वार्षिक कार्ययोजना को ससमय पूर्ण किया जाएः सीएस

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य सड़क सुरक्षा कोष प्रबन्धन समिति की बैठक सम्पन्न हुयी। मुख्य सचिव ने सभी सम्बन्धित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा कार्यों से सम्बन्धित वार्षिक कार्ययोजना को ससमय पूर्ण कर लिया जाए।
मुख्य सचिव ने प्रत्येक जनपद में चिल्ड्रन ट्रेफिक पार्क स्थापित किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे बच्चों को यातायात से सम्बन्धित नियमों की जानकारी जीवन के शुरूआती समय से मिलेगी, जिससे बच्चे यातायात नियमों के प्रति जागरूक हो सकेंगे। उन्होंने बच्चों के पाठ्यक्रम में भी इससे सम्बन्धित अध्यायों को जोड़े जाने हेतु शिक्षा विभाग को निर्देश दिए। साथ ही, यातायात नियमों की जागरूकता हेतु लघु फिल्मों और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार प्रसार किया जाए।
मुख्य सचिव ने पुलिस विभाग को प्रदेशभर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हेतु मास्टर प्लान तैयार किए जाने के निर्देश भी दिए। कहा कि सीसीटीवी कैमरे चरणबद्ध तरीके से लगाए जाएंगे, जिसके लिए बजट प्रत्येक वर्ष निर्धारित किए जाएगा। उन्होंने यातायात पुलिस, परिवहन, खनन आदि सभी संबंधित विभागों को एएनपीआर कैमरों के लिए एक एकीकृत कार्ययोजना तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए सभी विभागों को शीघ्र कार्ययोजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकी, विशेष सचिव गृह रिद्धिम अग्रवाल, आईजी एवं निदेशक यातायात मुख्तार मोहसिन, अपर सचिव डॉ. अहमद इकबाल एवं विनीत कुमार सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम का सीएम ने किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय से परिवहन विभाग द्वारा तैयार किये गये ऑटोमैटिक नम्बर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम (ए.एन.पी.आर) का शुभारंभ किया। इससे प्रदेश के प्रमुख मार्गों में यातायात के नियमों के अनुपालन एवं कर अपवंचन संबंधी प्रकरणों की ऑनलाईन मॉनिटरिंग की सुविधा होगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यातायात के नियमों के पालन एवं सड़क सुरक्षा की दृष्टि से यह एक अच्छी शुरूआत है। ए.एन.पी.आर कैमरे लगने से लोग यातायात के नियमों का पालन भी करेंगे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि ए.एन.पी.आर कैमरे के बारे में लोगों को जागरूक किया जाए। इस कैमरे में अभी शुरुआती चरण में जो लोग यातायात के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनको चेतावनी के एस.एम.एस भेजे जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ए.एन.पी.आर कैमरे लगाने की जहां भी आवश्यकता पड़ रही है, स्थानों का चयन कर वहां इसकी सुविधा उपलब्ध कराई जाय। उन्होंने कहा कि ए.एन.पी.आर कैमरे लगने से जीएसटी एवं अन्य विभागों को भी मदद मिलेगी व कर चोरी की रोकथाम भी इससे संभव होगी। इससे जहां चेक पोस्टों पर जाम से निजात मिलेगी, आवागमन भी सरल होगा। इस व्यवस्था के प्रारम्भ होने से वाहन दुर्घटनाओं को रोकने में भी मदद मिलेगी।
सचिव परिवहन अरविन्द सिंह ह्यांकी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि मोटर यान अधिनियम, 1988 में संशोधन करते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वाहनों की इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग किये जाने की व्यवस्था की गई है। उत्तराखण्ड में राज्य की सीमा पर स्थापित सभी चौक पोस्टों को समाप्त कर दिया गया है। राज्य में इलैक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू करने हेतु प्रथम चरण में राज्य की सीमा पर ए०एन०पी०आर० स्थापित करने की योजना बनाई गयी जिसके लिये राज्य सड़क सुरक्षा कोष से रूपये 4.61 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है।
सचिव परिवहन ने जानकारी दी कि योजना के अन्तर्गत ए०एन०पी०आर० पोर्टल से प्राप्त डाटा को जीएसटी विभाग को उपलब्ध कराने हेतु इन्टीग्रेशन की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गयी है, जबकि अन्य विभागों खनन, आबकारी, पर्यटन, शहरी विकास, वन विभाग तथा पुलिस के साथ इन्टीग्रेशन किया जाना भी प्रस्तावित है ताकि एक ही माध्यम से प्राप्त डाटा का सभी सम्बन्धित विभागों द्वारा उपयोग किया जा सके। इस व्यवस्था को पूर्णतः आटोमेटेड बनाया गया है जिसके लिए ए०एन०पी०आर० कैमरे के लिए तैयार सॉफ्टवेयर का इन्टीग्रेशन वाहन पोर्टल एवं ई-चालान पोर्टल से किया गया है। इससे वाहन की नम्बर प्लेट के आधार पर चालान स्वतः जेनरेट हो सकेंगे, जिसमें मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा।
इस अवसर पर प्रमुख वन संरक्षक अनूप मलिक, आयुक्त राज्य कर डॉ. अहमद इकबाल, निदेशक आईटीडीए नितिका खण्डेलवाल एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

राजस्व प्राप्ति में वन क्षेत्र की योजनायें बनाई जाये-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सोमवार को सचिवालय में राजस्व वृद्धि के सम्बन्ध में संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने विभागों को राजस्व प्राप्ति के लिए निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्ययोजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने खनन विभाग एवं खनन कार्य में लगी एजेन्सीज जीएमवीएन, केएमवीएन एवं वन विकास निगम को सभी स्लॉट संचालित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने पारदर्शिता लाने हेतु ई-निविदा के माध्यम से आबंटन कर लगातार अनुश्रवण किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में 72 प्रतिशत वन क्षेत्र होने के कारण इसमें राजस्व प्राप्ति के लिए अत्यधिक सम्भावनाएं हैं। वनों से होने वाली आय को बढ़ाए जाने हेतु इमारती लकड़ी के व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में भी कार्य किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र में ईको टूरिज्म और जड़ी-बूटी के क्षेत्र में भी रोजगार सृजन की अत्यधिक सम्भावनाएं है। इस दिशा में लगातार कार्य किए जाने की आवश्यकता है।
मुख्य सचिव ने परिवहन विभाग को मोटर साईकिल दस्तों को अधिक से अधिक बढ़ावा दिए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि वाहनों की नीलामी ई-नीलामी के तहत की जाए। उन्होंने एएनपीआर कैमरों के लिए परिवहन विभाग, यातायात पुलिस, वन एवं खनन को एक एकीकृत तंत्र विकसित किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही, राज्य कर विभाग को खूफिया प्रणाली को और मजबूत किए जाने के निर्देश दिए। बिल लाओ ईनाम पाओ योजना को लगातार जारी रखा जाए, इससे आमजन में बिल जीएसटी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। उन्होंने आबकारी विभाग को भी निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त किए जाने हेतु तेजी से कार्य किए जाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, दिलीप जावलकर, अरविन्द सिंह ह्यांकी, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

कैंपा के तहत शोध कार्यों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ.एस.एस. संधु ने सोमवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड कैंपा की संचालन समिति की 7वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को उत्तराखण्ड कैंपा के अन्तर्गत शोध कार्यों पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा प्रदेश से सम्बन्धित विषयों और मुद्दों पर शोध किए जाने की आवश्यकता है जिससे प्रदेश और प्रदेशवासियों को लाभ मिल सके।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के लिए वनाग्नि एक बहुत बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि वनाग्नि को किस प्रकार से काबू किया जा सकता है, इस पर शोध किया जाए। इसी प्रकार फसलों को जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए शोध किए जा सकते हैं। जंगली सूअर, हाथी और बंदरों से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए किस प्रकार से बायो फेंसिंग कारगर साबित हो सकती है, इन विषयों पर शोध हमारी उच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को बायो फेंसिंग सेल गठित किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिकारी को इसका दायित्व दिया जाए।
मुख्य सचिव ने कार्यक्रम संचालन की वार्षिक योजना (एपीओ) को दिसंबर माह तक केंद्र सरकार को भिजवा दिए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए वार्षिक कैलेंडर तैयार किया जाए। समस्त कार्यों को निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत पूर्ण कर लिया जाए।
बैठक के दौरान बताया गया कि कार्यक्रम संचालन की वार्षिक योजना (एपीओ) के लिए 411.88 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। बैठक में उत्तराखण्ड कैंपा की संचालन समिति द्वारा संस्तुति प्रदान की गयी।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, पीसीसीएफ (हॉफ) अनूप मलिक, सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

धामी की सौगात, अब स्कूल से ही मिलेंगे हर प्रकार के आवश्यक प्रमाण पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन द्वारा दिशा निर्देश जारी किए गए हैं कि राज्य के समस्त विद्यालयों में कक्षा 11 एवं 12 में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिभाग किये जाने की आवश्यकता के दृष्टिगत स्थायी निवास जाति एवं आय तथा अन्य आवश्यक प्रमाण-पत्र विद्यालय में ही उपलब्ध कराये जाएं।
इस संबंध में सचिव शैलेश बगोली ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा हैं कि छात्रों को आवश्यक प्रमाण-पत्र की आवश्यकता एवं इन प्रमाण-पत्रों को प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के दृष्टिगत राज्य के समस्त विद्यालयों में अपणों स्कूल, अपणू प्रमाण नामक पहल के तहत कक्षा 11 एवं 12 में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को स्थायी निवास, जाति एवं आय तथा अन्य आवश्यक प्रमाण-पत्र विद्यालय स्तर पर ही उपलब्ध कराये जाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने आदेश जारी किये हैं कि जनपद स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में मुख्य शिक्षा अधिकारी को सम्मिलित करते हुए समिति का गठन किया जाय। समिति द्वारा जनपद स्तर पर कक्षा 11 एवं 12 में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की संख्या का आकलन किया जायेगा। तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति से विद्यालय में भ्रमण करने वाली टीमों (पटवारी/लेखपाल/कानूनगो एवं सीएससी के डाटा एण्ट्री ऑपरेटर) का तिथिवार रोस्टर तैयार करवाया जायेगा। निवास स्थान, चरित्र, आय एवं पर्वतीय प्रमाण-पत्र एवं अन्य प्रमाण पत्र निर्गत किये जाने की प्रक्रिया हेतु टाइम फ्रेम का निर्धारण करते हुए कार्ययोजना तैयार की जायेगी। जनपद स्तर पर उक्त कार्यक्रम का साप्ताहिक अनुश्रवण एवं निगरानी की जायेगी।
तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में खण्ड शिक्षा अधिकारियों को सम्मिलित करते हुए समिति का गठन किया जाय। समिति द्वारा तैयार रोस्टर की सूचना से सम्बन्धित विद्यालयों को अवगत कराने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया जायेगा। प्रमाण-पत्रों हेतु आवश्यक दस्तावेजों की सूचना प्रधानाचार्याे, छात्र-छात्राओं, अभिभावकों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध करायी जायेगी। तहसील स्तर पर इस कार्यक्रम का दैनिक अनुश्रवण एवं निगरानी की जायेगी। कार्यवाही के पश्चात तहसीलदार स्तर से दैनिक निगरानी के अंतर्गत तिथिवार रोस्टर के अनुसार पटवारी/लेखपाल/कानूनगो एवं सीएससी के डाटा एण्ट्री ऑपरेटर की टीम द्वारा सम्बन्धित विद्यालय का भ्रमण किया जायेगा तथा प्रधानाचार्य से प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए प्रमाण-पत्र हेतु आवश्यक शुल्क/दस्तावेज, ऑनलाईन/ऑफलाईन माध्यम से तहसीलदार/उपजिलाधिकारी कार्यालयों को प्रेषित किये जायेंगे।
आवश्यक शुल्क/दस्तावेज प्राप्त होने के उपरान्त तहसीलदार/उपजिलाधिकारी कार्यालय द्वारा प्रमाण-पत्र निर्गत करते हुए उक्त प्रमाण-पत्र, छात्र-छात्राओं को वितरित किये जाने हेतु एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से सम्बन्धित विद्यालय के प्रधानाचार्य को उपलब्ध करा दिया जायेगा। जिला स्तरीय समिति द्वारा समस्त उप जिलाधिकारी, तहसीलदार तथा खण्ड शिक्षा अधिकारियों से समन्वय स्थापित करते हुए सम्पूर्ण कार्यवाही की प्रभावी मॉनिटरिंग की जायेगी एवं किसी प्रकार की समस्या/कठिनाई उत्पन्न होने पर समिति के स्तर से सम्बन्धित को तात्कालिकता के आधार पर यथावश्यक दिशा-निर्देश निर्गत किये जायेंगे।यह समस्त कार्यवाही अधिकतम दो माह के भीतर सम्पादित कराते हुए, प्रत्येक जनपद की साप्ताहिक सूचना, जिलाधिकारी द्वारा शासन को सलग्न प्रारूपानुसार अनिवार्य रूप से संप्रेषित कराया जाना सुनिश्चित करें।

सीएम ने फ्लैग आफ कर थैक्यू मोदी जी फॉर जी-20 इन उत्तराखंड मैराथन को किया रवाना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोगीवाला में आयोजित मैराथन ‘‘थैंक्यू मोदी जी फॉर जी-20 इन उत्तराखण्ड’’ का फ्लैग ऑफ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उत्तराखण्ड के लिए गर्व का विषय है कि, राज्य को जी-20 की तीन बैठकें मिली हैं। इसमें से एक बैठक का रामनगर में सफल आयोजन किया जा चुका है। उत्तराखण्ड को जी-20 की तीन बैठकें मिलने पर मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर भारत का मान-सम्मान एवं स्वाभिमान बढ़ा है। भारत तेजी से विश्व गुरू बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस वर्ष जी-20 की अध्यक्षता भारत मिली है, इसकी बैठकें देश में अलग-अलग स्थानों पर आयोजित की जा रही है। अपनी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का यह हमारे पास अच्छा अवसर है। उन्होंने कहा कि देश आजादी के अमृत काल में प्रवेश कर चुका है। आने वाले 25 साल देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम संकल्प नये उत्तराखण्ड के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों में लाने के लिए सबको एकजुट होकर आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के साथ ही हमें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना है। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि 2025 तक देवभूमि उत्तराखण्ड को ड्रग्स फ्री बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।

इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक सुभाष भट्ट, जिलाध्यक्ष भाजपा ऋषिकेश रविन्द्र राणा, कुलपति सुभारती विश्वविद्यालय प्रो. यशवर्द्धन एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

अधिकारियों को यू-सेट परीक्षा तिथि घोषित करने के निर्देश

प्रदेश में राज्य पात्रता परीक्षा (यू-सेट) शीघ्र आयोजित की जायेगी। यू-सेट के आयोजन के लिये कुमाऊं विश्वविद्यालय के अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं, शीघ्र ही परीक्षा तिथि घोषित कर दी जायेगी। इस परीक्षा को पास करने पर प्रदेशभर के युवाओं की प्रोफेसर बनने की राह और भी आसान हो जायेगी।
सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि प्रदेश में शीघ्र ही राज्य पात्रता परीक्षा (यू-सेट) आयोजित की जायेगी। उन्होंने बताया कि कुमाऊं विश्वविद्यालय को इस परीक्षा का आयोजन करना है, लिहाजा विश्वविद्यालय प्रशासन को परीक्षा तिथि जल्द घोषित करने के निर्देश दे दिये गये हैं। विभागीय मंत्री डा. रावत ने बताया कि यू-सेट के आयोजन के लिये विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जरूरी दिशा-निर्देश मांगे गये थे, जिस पर यूजीसी की अनुमति मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि परीक्षा को पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित करने हेतु विश्वविद्यालय प्रशासन को ठोस कार्ययोजना बनाने को कहा गया है। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश में लम्बे अंतराल के बाद यू-सेट की परीक्षा आयोजित होने जा रही है लिहाजा इस परीक्षा में प्रदेशभर के हजारों छात्र-छात्राएं सम्मिलित होंगी, परीक्षा के सफल आयोजन को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को सभी औचारिकताएं समय पर पूरे करने को कहा गया है। डॉ. रावत ने उम्मीद जताते हुये कहा कि यू-सेट के सफल प्रतिभागियों राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की राह आसान हो जायेगी। उन्होंने कहा कि यू-सेट में वही कामन विषय शामिल हैं जो मुख्यतः कालेजों में संचालित हैं। जिसमें प्रमुख रूप से हिंदी, इंग्लिश, सोशियल साइंस, हिस्ट्री, ज्योग्राफी, सोशियोलॉजी, फिजिकल एजूकेशन, बायोलॉजी, फिजिक्स, कैमिस्ट्री, इकोनॉमिक्स, कॉमर्स आदि विषय शामिल है।

’क्या है सेट’
स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट (सेट) सहायक प्राध्यापक की नौकरी के लिए अनिवार्य है। इस परीक्षा को पास करने के बाद सीधे तौर पर सहायक प्राध्यापक पद के लिए आवेदन किया जा सकता है। यदि यह नहीं हो तो पीएचडी व नेट होना जरूरी है।

पुनर्निर्माण कार्यों को लेकर मुख्यमंत्री से मिले वरिष्ठ अधिकारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में प्रधानमंत्री कार्यालय में उपसचिव मंगेश घिल्डियाल तथा विशेष कार्याधिकारी श्री केदारनाथ बद्रीनाथ रिडेवलपमेंट वर्क्स भाष्कर खुल्बे ने भेंट की। केदारनाथ एवं बद्रीनाथ में संचालित कार्यों के निरीक्षण के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री से केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों एवं बद्रीनाथ में मास्टर प्लान के तहत संचालित कार्यों के संबंध में चर्चा की। मंगेश घिल्डियाल ने मुख्यमंत्री को बताया कि केदारनाथ एवं बद्रीनाथ में संचालित कार्यों में हाल ही में मौसम की खराबी के कारण निर्माण कार्यों में कुछ व्यवधान जरूर रहा किन्तु अब मौसम अनुकूल होने के बाद कार्यों में तेजी आयी है। इस अवसर पर जागेश्वर धाम के मास्टर प्लान के साथ ही मानसखण्ड मंदिर माला परियोजना पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षा एवं बर्फबारी के बावजूद बडी संख्या में यात्री चार धामों के दर्शन हेतु आ रहे हैं। यात्रा व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित किये जाने के लिये यात्रा मार्गों पर आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में श्री बद्रीनाथ एवं श्री केदारनाथ में पुनर्निर्माण के कार्य तेजी से चल रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत रात-दिन कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विश्व प्रसिद्ध चारधाम की तर्ज पर कुमाऊं में मानसखण्ड मंदिर माला परियोजना प्रारंभ की गयी है। इसके तहत जागेश्वर धाम का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इस परियोजना के तहत कुँमाऊ मण्डल के महत्वपूर्ण पौराणिक/ऐतिहासिक स्थलों को सर्किट से परस्पर जोड़कर लोकप्रियता प्रदान की जायेगी ताकि देश-विदेश से तीर्थयात्री/पर्यटकों को यहाँ आने हेतु आकर्षित किया जा सके और उनकी यात्रा सुगम बनायी जा सके।
इस अवसर पर श्री केदारनाथ उत्थान चेरिटेबल ट्रस्ट के विशेष कार्याधिकारी सतीश बहुगुणा भी उपस्थित थे।