हर माह एक सप्ताह का मिलावटी के खिलाफ विशेष अभियान चलेगा, स्टाफ की कमी भी होगी दूर

जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों पर धामी सरकार का शिकंजा अब और कसेगा। त्योहारों के समय ही नहीं, बल्कि हर माह में एक सप्ताह खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के लिए विशेष अभियान चलेगा। इसके अलावा, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशाासन विभाग में स्टाफ की कमी को भी दूर किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को कतई बख्शा न जाए।

*हर महीने अभियान, हाट-मेलों पर खास ध्यान*
विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन बृहस्पतिवार को सरकार ने साफ किया कि खाद्य पदार्थों की जांच का काम तेजी से चल रहा है। इसकी गति और तेज की जाएगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि हाट-मेलों में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को खास तौर पर चेक किया जाएगा।

*खाद्य पदार्थों की जांच-दो वर्ष का हिसाब*

वर्ष 2023-24
-इस वर्ष में खाद्य पदार्थों के कुल 1627 नमूने लिए गए, जिसमें से 171 फेल हुए। इसके आधार पर 171 वाद पंजीकृत कराए गए।
वर्ष 2024-25
-इस वर्ष में खाद्य पदार्थों के 1684 नमूने लिए गए, जिसमें से 159 फेल हुए। इस आधार पर 159 वाद दायर किए गए।

प्रदेश में वर्तमान में 28 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कमी है। इन पदों पर नियुक्ति के लिए सरकार ने लोक सेवा आयोग को अधियाचन भेजा है। सरकार का कहना है कि आयोग से भर्ती प्रक्रिया में यदि देर होती है, तो प्रतिनियुक्ति के जरिये भी इन पदों को भरने का प्रयास किया जाएगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डाॅ धन सिंह रावत ने कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के खाली पदों को जल्द से जल्द भरने के लिए सरकार प्रयासरत है। उन्होंने यह भी बताया कि देहरादून में टेस्टिंग लैब का कार्य 31 मार्च 2026 तक पूरा हो जाएगा।

एलपीजी गैस की कालाबाजारी पर अब सीधे जेल, डीएम दून ने दिए निर्देश

जिलाधिकारी सविन बसंल ने ऋषिपर्णा सभागार कलेक्टेट में जनपद में एलपीजी गैस की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाए रखने के संबंध में आयल कंपनियों के पदाधिकारियों एवं गैस एजेंसी के संचालकों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में घरेलू एवं व्यवसायिक गैस आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जिला पूर्ति अधिकारी प्रतिदिन आपदा कन्ट्रोलरूम में आयल कम्पनियों के प्रतिनिधियों सहित प्रतिदिन 1 घंटा बैठकर वितरण/स्टॉक बैकलॉग की सूचना तथा एलपीजी गैस सम्बन्धी प्राप्त शिकायतों का निस्तारण करेंगे।

जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप एलपीजी गैस वितरण में प्रथम प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को दी जाए, जिससे आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि घरेलू गैस सिलेंडरों की होम डिलीवरी ओटीपी आधारित प्रणाली के माध्यम से सुनिश्चित की जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके। साथ ही निर्देशित किया कि आनलाईन साफ्टवेयर पर बुकिंग में व्यवधान आने पर गैस एजेंसी अपना सम्पर्क नम्बर तथा एजेंसी में मैन्यूवल बुकिंग करना सुनिश्चित करेंगे। एजेंसी संचालकों द्वारा बताया गया कि एक बार बुकिंग होने पर अगली बुकिंग 25 दिन के उपरान्त ही होगी। इसपर जिलाधिकारी ने कम्पनिंयों के पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि उपभोक्ताओं को बल्क एसएमएस के माध्यम से तथा एजेसियों पर सूचना हेतु जागरूकता फ्लैक्सी चस्पा करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी के निर्देश पर जिले में प्राकृतिक गैस/एलपीजी सिलेंडर से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या, सूचना अथवा शिकायत के त्वरित समाधान हेतु आपदा कन्ट्रोरूम में नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) स्थापित किया गया है। नागरिकों की सुविधा तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के उद्देश्य से यह कंट्रोल रूम सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। यदि किसी नागरिक को प्राकृतिक गैस या एलपीजी सिलेंडर से संबंधित कोई समस्या, सूचना अथवा शिकायत दर्ज करानी हो तो वह कंट्रोल रूम के दूरभाष नंबर 1077, 0135-2626066 एवं 0135-2726066 एवं वाट्सएप्प नम्बर 7534826066 पर संपर्क कर सकता है। प्राप्त सूचनाओं पर तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिलाधिकारी ने सभी नागरिकों से अपील की जाती है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें तथा अनावश्यक रूप से चिंतित न हों। उन्होंने नागरिकों को आश्वस्त किया कि ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता है तथा ईंधन का समझदारी से प्रयोग करें। जिला प्रशासन स्थिति पर निरंतर निगरानी बनाए हुए है। 72 के 72 गैस एजेंसियों के गोदाम अब जिला प्रशासन के रडार पर हैं।

जिलाधिकारी ने समस्त उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने क्षेत्र के पुलिस क्षेत्राधिकारियों संग अपने-अपने क्षेत्रान्तर्गत अवस्थित गैस एजेंसियों का रेंडमली स्टॉक, वितरण, बैकलॉग की जांच करेंगे। एजेसियों पर गैस वितरण में अनियमितता एवं अवैध संग्रहण एवं बाहरी लोगों की संलिप्तता, अवैध रिफिलिंग पाए जाने पर सम्बन्धित गैस एजेंसियों को सील करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए सभी उप जिलाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रान्तर्गत होटल, व्यवसायिक संस्थानों के साथ बैठक कर लें। साथ ही निर्देशित किया कि घरेलू गैस का व्यवसायिक उपयोग पाए जाने पर जब्तीकरण की कार्यवाही करते हुए सम्बन्धित के विरूद्ध सख्त एक्शन लिया जाए।

उन्होंने समस्त उप जिलाधिकारियों तथा जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देशित किया कि घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग को रोकने के लिए नियमित छापेमारी अभियान चलाया जाए। यदि कहीं भी घरेलू गैस सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग पाया जाता है तो संबंधित सिलेंडर तत्काल जब्त करते हुए दोषियों के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 तथा बीएनएस के अंतर्गत निर्धारित प्राविधानों के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि व्यवसायिक गैस सिलेंडरों के वितरण में चिकित्सालयों तथा छात्रावासों को प्राथमिकता प्रदान की जाए, ताकि आवश्यक सेवाओं के संचालन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। साथ ही गैस आपूर्ति कंपनियों को निर्देश दिए गए कि जनपद की गैस एजेंसियों को मांग के अनुरूप समय पर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, जिससे वितरण व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके।

बैठक में जानकारी दी गई कि जनपद में वर्तमान में कुल 72 गैस एजेंसियां संचालित हैं, जिनके माध्यम से लगभग 7.81 लाख घरेलू उपभोक्ताओं तथा 19,624 व्यवसायिक उपभोक्ताओं को गैस आपूर्ति की जाती है। जनपद में गैस की आपूर्ति एचपीसीएल को भगवानपुर, बीपीसीएल को लंढौरा तथा इंडियन ऑयल कॉर्पाेरेशन को बादराबाद एवं लोनी गाजियाबाद से की जाती है।
बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के मिश्रा, नगर मजिस्टेªट प्रत्युष सिंह, उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरि, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी, जिला पूर्ति अधिकारी के.के. अग्रवाल, भारत पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन, इंडियन ऑयल कॉर्पाेरेशन लि0, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड तथा गैस एजेंसी एसोसिएशन के अध्यक्ष चमनलाल सहित संबंधित अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में अभी तक 21 हजार से ज्यादा बच्चों को मिल चुका है छात्रवृत्ति योजना का लाभ

प्रदेश के मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए धामी सरकार संवेदनशीलता से काम कर रही है। यही वजह है कि अभी तक प्रदेश के 21 हजार 743 बच्चों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत छात्रवृत्ति प्रदान की जा चुकी है। इसमें मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना में सबसे ज्यादा 17 हजार 852 मेधावी बच्चे लाभान्वित हुए हैं। धामी सरकार ने समस्त छात्रवृत्ति योजनाओं के पात्र मेधावी बच्चों में अभी तक 17 करोड़ 67 लाख 77 हजार तीन सौ की धनराशि वितरित की है।

प्रदेश में मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना के साथ ही डॉ शिवानंद नौटियाल स्मृति छात्रवृत्ति योजना, श्रीदेव सुमन राज्य योग्यता छात्रवृत्ति योजना, राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कोर छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है। इसके अलावा, प्रदेश से बाहर के सैनिक स्कूल में पढ़ रहे मेधावी छात्रों को भी धामी सरकार छात्रवृत्ति का लाभ प्रदान कर रही है।
विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने सदन में बताया कि मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना में छह से 12 वीं तक के मेधावी बच्चों को 600 से लेकर 1200 रूपये तक की छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। श्रीदेव सुमन राज्य योग्यता छात्रवृत्ति योजना में अभी तक 3289 मेधावी बच्चें लाभान्वित हुए हैं, जबकि डॉ शिवानंद नौटियाल स्मृति छात्रवृत्ति योजना में अभी तक 527 बच्चों को छात्रवृत्ति मिली हैं।

उत्तराखंड में खाद्य एवं रसद व्यवस्था की सतत निगरानी को अधिकारियों की हुई तैनाती

वैश्विक परिदृश्य में उत्पन्न वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने खाद्य एवं रसद आपूर्ति की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखण्ड राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र (SEOC), देहरादून में विभिन्न अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की तैनाती तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेशों तक की गई है।

राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन अधिकारियों और विशेषज्ञों की तैनाती का उद्देश्य प्रदेश में खाद्य एवं आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता, आपूर्ति व्यवस्था तथा वितरण प्रणाली की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही खाद्य एवं रसद से संबंधित सूचनाओं का नियमित संकलन, उनका विश्लेषण तथा विभिन्न विभागों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

निर्धारित रोस्टर के अनुसार तैनात अधिकारी एवं विशेषज्ञ उत्तराखण्ड राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र में नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। वे प्रतिदिन खाद्य एवं रसद की स्थिति की समीक्षा करेंगे, आवश्यक सूचनाओं का संकलन एवं विश्लेषण करेंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के साथ समन्वय स्थापित करते हुए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी परिस्थिति में खाद्यान्न, एलपीजी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए तथा स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में खाद्य एवं आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर्याप्त है और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार सभी व्यवस्थाओं पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

राज्य सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से प्रदेश में खाद्य एवं रसद आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी तथा किसी भी संभावित आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने में सहूलियत मिलेगी।

राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान सीएम धामी ने रखा विकास कार्यों का लेखा जोखा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराडीसैंण) में स्थित विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए सरकार की उपलब्धियों, नीतियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के साथ उत्तराखंड को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत देवभूमि के देवी-देवताओं, देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों और उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आंदोलनकारियों के त्याग और संघर्ष के कारण ही आज उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है।

*गैरसैंण उम्मीदों का प्रतीक*
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए गैरसैंण केवल भौगोलिक स्थान नहीं बल्कि ये पहाड़ की आकांक्षाओं, उम्मीदों और स्वाभिमान का प्रतीक है। गैरसैंण उस संकल्प का प्रतीक है जिसके लिए उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन चला था। इसलिए सरकार ने अपने कार्यकाल में न केवल गैरसैंण को अपने हृदय में बसाए रखा, बल्कि ये भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि हमारी सरकार की प्रत्येक रीति और नीति में गैरसैंण की छाप हो।

*अटल जी के सपने को साकार करने का संकल्प*
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के गठन का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को जाता है, जिन्होंने इस राज्य की नींव रखी। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में राज्य को नई दिशा और गति मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में बाबा केदार की पावन धरा से कहा था कि “21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने में जुटी है।

*ऐतिहासिक बजट: विकास का रोडमैप*
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस बार प्रस्तुत बजट कई मायनों में ऐतिहासिक है। यह वर्तमान विधानसभा का अंतिम पूर्णकालिक बजट होने के साथ-साथ राज्य के आगामी विकास की दिशा तय करने वाला दस्तावेज भी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट का आकार 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं है, बल्कि राज्य के सवा करोड़ लोगों की आकांक्षाओं और उम्मीदों का प्रतिबिंब है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में मातृशक्ति के सम्मान, युवाओं के उत्थान, किसानों के कल्याण, विज्ञान एवं नवाचार के विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पर्यटन के विस्तार जैसे सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास का प्रयास किया गया है।

*विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रतिबद्धता*
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार केवल घोषणाएं नहीं करती बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा भी करती है। उन्होंने बताया कि मुख्यसेवक के रूप में की गई 3885 घोषणाओं में से 2408 घोषणाओं को धरातल पर उतारा जा चुका है और शेष पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं बल्कि उन्हें परिणामों में बदलना है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

*आर्थिक प्रगति में तेजी*
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य की जीएसडीपी में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और प्रति व्यक्ति आय में लगभग 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य बजट का आकार भी 60 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसके साथ ही निवेश, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

*रोजगार और उद्योगों को बढ़ावा*
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार ने रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 30 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्य में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं और स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर लगभग 1750 हो गई है। उन्होंने कहा कि पर्यटन, होटल और होमस्टे क्षेत्र में भी तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। हेली सेवाओं और हेलीपोर्ट की संख्या बढ़ने से भी पर्यटन और कनेक्टिविटी को नई गति मिली है।

*नकल माफिया और भ्रष्टाचार पर सख्ती*
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य में नकल माफिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, जिसके बाद भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामलों में आईएएस और पीसीएस स्तर के अधिकारियों सहित 200 से अधिक लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

*समान नागरिक संहिता और ऐतिहासिक निर्णय*
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की गई है। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से महिलाओं को समान अधिकार मिले हैं और समाज में समानता तथा न्याय की भावना को मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए सख्त भू-कानून और धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे कदम भी उठाए हैं।

*इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में बड़ा निवेश*
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में लगभग दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न विकास परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सड़क, रेल, रोपवे और हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए कई परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना और कई रोपवे परियोजनाएं राज्य के विकास को नई गति देंगी।

*किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए योजनाएं*
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। किसानों को तीन लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है और कृषि उपकरणों पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं और प्रदेश की करीब 1 लाख 70 हजार महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं। युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं लागू की गई हैं।

*पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा*
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए धार्मिक, साहसिक, ईको-टूरिज्म और वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि केदारखंड और मानसखंड मंदिरों के विकास, शीतकालीन यात्रा, फिल्म पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से राज्य की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रही है।

*विकसित उत्तराखंड का लक्ष्य*
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करते हुए उत्तराखंड का समग्र और सतत विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार का “विकल्प रहित संकल्प” है कि अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचे, युवाओं को रोजगार मिले, किसानों की आय बढ़े और उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनता के सहयोग और सरकार की प्रतिबद्धता के बल पर उत्तराखंड आने वाले वर्षों में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों के साथ की घरेलू गैस को लेकर समीक्षा बैठक

मध्यपूर्व के देशों में उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनज़र प्रदेश में एलपीजी एवं ईंधन आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने भराडीसैंण में उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में सभी जिलों के जिलाधिकारी तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। साथ ही इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर और अन्य संबंधित अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता है और किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अफवाहों पर कड़ी नजर रखी जाए और किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था को प्रभावित न होने दिया जाए।

*जिलों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश*

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखें। उन्होंने कहा कि किसी भी असामाजिक तत्व द्वारा अफवाह फैलाने या माहौल खराब करने की कोशिश की जाती है तो उसके खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए।

*गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर सख्ती*

बैठक में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और डायवर्जन पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए गए। इसके लिए जिलों में नियमित रूप से छापेमारी अभियान चलाने को कहा गया है।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) गठित की जाए। यह टीम गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी या अवैध स्टॉकिंग करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करेगी।

*ऑयल कंपनियों से निरंतर समन्वय बनाए रखने को कहा*

मुख्य सचिव ने जिलों में कार्यरत ऑयल कंपनियों और गैस एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित समस्या की जानकारी तुरंत राज्य स्तर पर साझा की जाए ताकि समय रहते समाधान किया जा सके।

*घरेलू गैस की पर्याप्त उपलब्धता*

बैठक में इंडियन ऑयल के स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर कृष्ण कुमार गुप्ता और स्वर्ण सिंह ने जानकारी दी कि राज्य में घरेलू गैस सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में गैस आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी भी प्रकार की कमी नहीं है।
अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही अफवाहों पर नियंत्रण रखना आवश्यक है।

*अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता*

बैठक में निर्णय लिया गया कि वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को की जाएगी। फिलहाल होटल, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को व्यवसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति सीमित रखी जाएगी ताकि आवश्यक सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा न आए।

*कंट्रोल रूम सक्रिय रखने के निर्देश*

मुख्य सचिव ने राज्य स्तरीय आपदा कंट्रोल रूम और जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम को सक्रिय रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही जिलाधिकारी और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के आयुक्त को निर्देश दिए गए कि वे प्रतिदिन प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से गैस सिलेंडरों की उपलब्धता और आपूर्ति की जानकारी जनता तक पहुंचाएं।

*अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई*

मुख्य सचिव ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व गैस सिलेंडरों की कमी को लेकर अफवाह फैलाने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

*बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद*

बैठक में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एल. फैनई, सचिव गृह शैलेश बगौली, सचिव/आयुक्त खाद्य आनंद स्वरूप तथा महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा इंडियन ऑयल के स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर कृष्ण कुमार गुप्ता सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

खेलभूमि उत्तराखंड में जमीनी स्तर पर सुविधाओं के विस्तार के लिए ठोस कदम

38 वें राष्ट्रीय खेलों के भव्य आयोजन के बाद प्रदेश की धामी सरकार जमीनी स्तर पर खेल सुविधाओं के और विस्तार में जुट गई है। इस क्रम में प्रदेश के हर ब्लाक में अब मिनी स्टेडियमों का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को बजट सत्र के तीसरे दिन सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हर ब्लाक में मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में प्रावधान किया गया है।
वर्ष 2025 में उत्तराखंड ने न सिर्फ 38 वें राष्ट्रीय खेलों की सफल मेजबानी की थी, बल्कि 103 पदक जीतकर इस स्तर के आयोजन में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी किया था। इस आयोजन ने उत्तराखंड को खेलभूमि के रूप में भी पहचान दी।

इस आयोजन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का आधारभूत खेल ढांचा विकसित किया गया। लेगेसी पॉलिसी बनाकर सरकार ने इस खेल ढांचे का इस्तेमाल एकेडमी के तौर पर करने का निर्णय लिया है। ताकि खेल प्रतिभाओं को उचित प्रशिक्षण प्राप्त हो सके। इस संबंध में शासन स्तर पर कार्यवाही चल रही है।

अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में हर ब्लाक में मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए प्रावधान कर दिए जाने को भी अहम माना जा रहा है। बुधवार को प्रश्नकाल में जब खेल मंत्री रेखा आर्या पर्वतीय क्षेत्रों में खेल मैदान और मिनी स्टेडियम से संबंधित सवाल का जवाब दे रही थीं, तब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन को यह अहम जानकारी दी। खेल मंत्री रेखा आर्या के अनुसार-पर्वतीय क्षेत्र में मिनी स्टेडियम के लिए 1.18 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है। इसके निर्माण के लिए एक करोड़ 70 लाख रूपये दिए जाने का प्रावधान है।

उत्तराखंड में देवभूमि परिवार आईडी में मुखिया के तौर पर परिवार की वरिष्ठतम महिला सदस्य का नाम होगा

कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक पारदर्शी तरीके से सहायता पहुँचाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने मंगलवार को “देवभूमि परिवार विधेयक- 2026” को सदन पटल पर रख दिया है। इस विधेयक के कानून बन जाने पर प्रदेश में
एकीकृत और सत्यापित परिवार-आधारित डेटाबेस “देवभूमि परिवार” की स्थापना हो सकेगी। विधेयक का उद्देश्य विभिन्न विभागों में बिखरे लाभार्थी डेटा को एक मंच पर लाकर योजनाओं के संचालन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समन्वित बनाना है। देवभूमि परिवार आईडी में मुखिया के तौर पर परिवार की 18 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला सदस्य का नाम दर्ज होगा।

वर्तमान में राज्य के अलग-अलग विभाग अपनी-अपनी योजनाओं के लिए अलग लाभार्थी डेटाबेस का उपयोग करते हैं। इसके कारण कई बार लाभार्थी आंकड़ों का दोहराव, पुनः सत्यापन की जटिल प्रक्रियाएँ और विभागों के बीच समन्वय की कमी जैसी समस्याएँ सामने आती हैं। इससे न केवल प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त भार पड़ता है, बल्कि योजनाओं के आकलन और प्रभावी क्रियान्वयन में भी बाधाएँ उत्पन्न होती हैं।
अब इस विधेयक के माध्यम से राज्य में एक एकीकृत परिवार-स्तरीय डेटा भंडार स्थापित किया जाएगा, जो विभिन्न विभागों और एजेंसियों के लिए लाभार्थी संबंधी सूचनाओं का एक विश्वसनीय स्रोत (Single Source of Truth) के रूप में कार्य करेगा। इससे योजनाओं का बेहतर लक्ष्योन्मुखी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सहायता अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सकेगी।
इसके साथ ही, इस डेटा प्रणाली के प्रभावी प्रबंधन, संरक्षण और संरचनात्मक सुधारों के लिए एक उपयुक्त संस्थागत तंत्र का भी गठन किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत विभागों के बीच सुरक्षित और विनियमित डेटा आदान-प्रदान की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी, जिससे योजनाओं के बेहतर लक्षित वितरण और समन्वय को मजबूती मिलेगी।
यह पूरी व्यवस्था डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 (DPDP Act 2023) के प्रावधानों के अनुरूप संचालित की जाएगी, ताकि नागरिकों के डेटा का उपयोग सहमति, पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ सुनिश्चित किया जा सके।

*देवभूमि परिवार विधेयक- 2026” सुशासन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और उत्तराखंड के नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सकेगा।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री*

*ये विधेयक भी प्रस्तुत किए गए*
उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक – 2026
उत्तराखंड दुकान और स्थापन (रोजगार विनियमन और सेवा शर्त) (संशोधन) विधेयक – 2026
उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश लोक सेवा (शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित और पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1993) (संशोधन) विधेयक 2026
उत्तराखंड जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2026
उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026
उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम, विधेयक, 2026
उत्तराखंड भाषा संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2026
उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026
उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) विधेयक, 2026

वर्दीधारी पदों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को भराड़ीसैंण में अग्निवीर सैनिकों के रूप में भर्ती होने वाले कैडेट्स के साथ संवाद किया। संवाद के दौरान कैडेट्स ने मुख्यमंत्री से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका मुख्यमंत्री ने सहजता से उत्तर दिया।

संवाद के दौरान शंकर सिंह राणा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि सैनिक पुत्र होने के कारण आपने सैनिकों के जीवन और गतिविधियों को नजदीक से देखा है, क्या आपका मन सेना में जाने का नहीं हुआ? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना में जाना अन्य सेवाओं की अपेक्षा अत्यंत सम्माननीय माना जाता है। उन्होंने कहा कि वे अपने जीवन को भी एक सैनिक के जीवन की तरह अनुशासित और समर्पित मानकर कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि अपने पिताजी के साथ रहते हुए उन्होंने सेना के अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को करीब से देखा है। जिस प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ हमारे सैनिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं, उसी भावना से वे प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में उत्तराखण्ड की देवतुल्य जनता की सेवा करने का प्रयास करते हैं।

हिमांशु रौतेला ने प्रश्न किया कि प्रदेश के मुखिया होने के नाते आप अपने परिवार को कैसे समय दे पाते हैं? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई व्यक्ति राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय होता है तो उसकी जिम्मेदारियां बहुत बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में प्रदेश के सभी लोग उनका परिवार हैं और सभी गांव उनके अपने गांव हैं।

ओ.पी. कण्डारी ने पूछा कि जब हम अग्निवीर के रूप में अपनी सेवा पूरी कर वापस आएंगे, उसके बाद सरकार हमारे रोजगार के लिए क्या व्यवस्था कर रही है? मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्दीधारी पदों पर अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की है। इसके अतिरिक्त केन्द्र सरकार द्वारा भी अनेक क्षेत्रों में अग्निवीरों को अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर अग्निवीर के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

रितेश पंवार ने मुख्यमंत्री से पूछा कि आपकी पहचान “धाकड़ धामी” के रूप में क्यों बनी? मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि का व्यवहार जनता के साथ सदैव सौम्य होना चाहिए। हालांकि राज्यहित और जनहित में कई बार कठोर और साहसिक निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है तथा दंगा रोधी कानून भी लागू किया गया है। पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार ने जन अपेक्षाओं और प्रदेशहित में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।

अमन सेमवाल ने पूछा कि आपके चेहरे पर हमेशा मुस्कान का क्या राज है? मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें कार्य करने की ऊर्जा और प्रेरणा प्रदेश की जनता के आशीर्वाद से मिलती है। उन्होंने कहा कि सरकार जन अपेक्षाओं के अनुरूप प्रदेश के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और आज अनेक क्षेत्रों में उत्तराखण्ड देश में अग्रणी स्थान पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनभावनाओं के अनुरूप राज्य के विकास को नई गति देने के लिए पूरे संकल्प और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

इस अवसर पर अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सैनिक सीमांत और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा करते हैं। देवभूमि उत्तराखण्ड की विशेषता है कि यहां लगभग हर परिवार से कोई न कोई सदस्य सेना या अर्द्धसैन्य बलों में सेवाएं दे रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना तेजी से आत्मनिर्भर बन रही है। रक्षा क्षेत्र में भारत का निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है और भारतीय सेना वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और सक्षम सेना के रूप में स्थापित हुई है। सेना में निरंतर आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। देहरादून में भव्य सैन्यधाम का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें राज्य के वीर बलिदानियों की गौरवगाथाएं और स्मृतियां संजोई जाएंगी। उन्होंने कहा कि वे पूर्व सैनिकों को अपने अभिभावक के रूप में देखते हैं।

इस अवसर पर यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल (सेनि.), पूर्व सैनिकगण तथा अग्निवीर उपस्थित थे।

प्रदेश में सात हजार किमी से अधिक सड़कें हुईं गड्डा मुक्त

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूसरे कार्यकाल के बीते चार साल में प्रदेश में 819 पंचायत भवनों का निर्माण पुननिर्माण किया गया है।
प्रदेश में पंचायत भवनों की संख्या 5867 है। इसमें से 1134 पंचायत भवन लंबे समय से जीर्णशीर्ण चल रहे थे। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचायतीराज विभाग को अभियान चलाकर जीर्ण- शीर्ण भवनों का पुनर्निमाण करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गत चार वर्ष में विभाग ने 819 पंचायत भवनों का निर्माण- पुननिर्माण कर लिया है। शेष भवनों पर भी कार्य किया जा रहा है। मंगलवार को विभागीय मंत्री सतपाल महाराज ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी सदन के सामने रखी।

*7 हजार किमी से अधिक सड़कें गड्डा मुक्त*
प्रदेश में लोकनिर्माण विभाग नवंबर के प्रथम सप्ताह तक सात हजार से अधिक किमी सडकों को गड्डा मुक्त कर चुका है। सदन में विभाग की ओर से प्रस्तुत जानकारी के अनुसार प्रदेश की सड़कों को गड्डा मुक्त करने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के क्रम में विभाग ने वर्ष 2025-26 में मानसून काल से पूर्व 3134 किमी लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त किया। जबकि मानसून के बाद 10 नवंबर 2025 तक 4149.17 किमी लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त किया। इस दौरान अकेले हरिद्वार जनपद में 313 किमी से अधिक लंबी सड़कों को गड्डामुक्त किया गया।

*रोपवे परियोजनाओं पर काम तेज*

प्रदेश में विभिन्न तीर्थ स्थलों को रोपवे से जोड़ने की प्रक्रिया गतिमान है। पर्यटन मंत्री ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि विभाग ने कद्दूखाल से सुरकंडा देवी मंदिर के लिए पीपीपी मोड़ में रोपवे का संचालन शुरु कर दिया है। इसके अलावा जनपद चम्पावत में ठुलीगाड़ से पूर्णागिरी रोपवे भी पीपीपी मोड में निर्माणाधीन है। साथ ही जनपद उत्तरकाशी में जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक के लिए भी रोपवे पीपीपी मोड में विकसित किया जा रहा है। साथ ही साथ गौरीकुंड से केदारनाथ धाम, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिए भी रोपवे निर्माण की प्रक्रिया गतिमान है।