आज से मंदिर, होटल, रेस्टोरेंट, शाॅपिंग माॅल खोलने की मिली अनुमति

आज से धार्मिक गतिविधियां सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक शुरू होंगी। मंदिरों के बोर्ड, ट्रस्ट या प्रबंधन समितियां सैनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करवाएंगी। होटल और होम स्टे को खोलने की अनुमति भी दे दी गई है। इसके साथ रेस्टोरेंट और शापिंग मॉल भी सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक खुल सकेंगे। वहीं, देहरादून नगर निगम क्षेत्र और कंटोनमेंट जोन में किसी भी गतिविधि को शुरू करने की अनुमति शासन ने नहीं दी है।
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने होटल, रेस्टोरेंट, शापिंग मॉल और धार्मिक स्थल खोलने की अनुमति प्रदान कर दी है। प्रदेश सरकार ने इसके लिए गाइडलाइन जारी की है। जिलाधिकारी अपने अपने जिलों में इसके लिए अलग से दिशा-निर्देश जारी करने होंगे।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि आठ जून से प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट, शापिंग माल और धार्मिक गतिविधियों को शुरू करने की अनुमति प्रदान कर दी है। इसके लिए गाइडलाइन जारी की गई है। दिशानिर्देशों के तहत सभी जिले व्यवस्था बनाने के लिए कार्यवाही करेंगे।

होटल को खोलने की दी अनुमति
होटल, होम स्टे आदि सेवाओं को खोलने की अनुमति दे दी है। होटल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश हैं कि कोविड-19 के प्रति संवेदनशील 75 शहरों में से आने वालों की बुकिंग नहीं की जाएगी। देश के अन्य शहरों से आने वाले अतिथियों के लिए सात दिन तक के लिए बुकिंग होगी। होटल को जिला प्रशासन को प्रत्येक गेस्ट की सूचना देनी होगी। होटल प्रबंधन को प्रत्येक व्यक्ति से लिखकर लेना होगा कि वे पर्यटन स्थल या सार्वजनिक स्थल में नहीं जाएंगे। इसके लिए पर्यटन विभाग अलग से एसओपी जारी करेगा।

रेस्टोरेंट और शॉपिंग मॉल मालिकों को राहत
सरकार ने रेस्टोरेंट और शापिंग मॉल के मालिकों को राहत देते हुए सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक प्रतिष्ठान खोलने की अनुमति दे दी है। शापिंग मॉल मालिकों को लिखित में देना होगा कि एयर कंडिशनर चलाने के लिए सीपीडब्ल्यूडी के मानकों का पालन करेंगे। केवल पचास प्रतिशत दुकानें एक समय में खोली जाएंगी। जिला प्रशासन तय करेगा कि अधिकतम कितने लोग मॉल में एक समय में जा सकेंगे। इसके लिए अलग से एसओपी जारी की जाएगी। रेस्टोरेंट मालिकों को सामाजिक दूरी और सर्विस के दौरान टेबल की दूरी को लेकर भी व्यवस्था बनानी होगी।

धार्मिक स्थल खुलेंगे
धार्मिक स्थल सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक ही खुलेंगे। जिला प्रशासन मंदिरों के ट्रस्ट, बोर्ड और प्रबंधन समितियों से सलाह करने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या तय करेगा कि एस समय में कितने लोग मंदिर में आ सकते हैं।

देवस्थानम बोर्ड तय करेगा चारधाम यात्रा
प्रदेश सरकार ने चार धाम देवस्थानम बोर्ड को चार धाम यात्रा शुरू करने का जिम्मा सौंपा है। जारी गाइडलाइन के अनुसार बोर्ड प्रबंधन यात्रा को लेकर जिला प्रशासन और अन्य हक हकूकधारियों से चर्चा करेगा। आम सहमति बनने के बाद यात्रा शुरू की जाएगी। कितने श्रद्धालु यात्रा में आ सकते हैं, इसके लिए प्रोटोकॉल तय किया जाएगा। गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट निर्देश है कि कोरोना संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य सुरक्षा को मानकों का पूरी तरह से अनुपालन होगा। यात्रा शुरू करने से पहले उसका पूरी तरह से प्रचार किया जाएगा। इसके साथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए तय प्रावधानों के बारे भी जानकारी दी जाएगी। उड़ान योजना के तहत हेलीकॉप्टर से सवारी के लिए भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए सिविल एविएशन अलग से एसओपी जारी करेगा।

अन्य राज्यों के श्रद्धालु नहीं आयेंगे
प्रदेश सरकार के स्तर से जारी गाइडलाइन से स्पष्ट है कि चार धाम यात्रा और प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों में दर्शन के लिए केवल राज्य के नागरिकों को अनुमति होगी। प्रदेश के बाहर के लोगों को यात्रा और धार्मिक स्थलों में दर्शन की अनुमति नहीं होगी।

कोरोना संक्रमण के लगातार मिल रहे केस, प्रदेश में 824 एक्टिव केस

आज दोपहर तक कोरोना संक्रमण के 50 नए मामले सामने आए हैं। अब प्रदेश में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 1355 हो गया है। वहीं, जांच रिपोर्ट में 1118 सैंपल निगेटिव मिले हैं। जबकि 498 संक्रमित मरीजों को इलाज के बाद घर भेजा जा चुका है। अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत ने बताया कि अभी भी 824 एक्टिव केस हैं।
स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के अनुसार, आज देहरादून में 24, हरिद्वार में 32, पौड़ी में दो, टिहरी में आठ संक्रमित मामले में आए हैं। वहीं, देहरादून में शनिवार देर रात और रविवार सुबह दो कोरोना संक्रमित मरीज की मौत हो गई है। अब तक प्रदेश में 13 संक्रमित मरीजों की जान जा चुकी है।
वहीं, कोरोना संक्रमण की जांच के लिए लैब की सुविधा बढ़ने के बाद भी सैंपलिंग की रफ्तार घटने का अंदेशा जताया जा रहा है। तीन दिनों से प्रदेश में प्रतिदिन 500 से 600 सैंपल ही जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। इससे पहले एक दिन में एक हजार से अधिक सैंपल लिए जा रहे थे।
जबकि कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सरकार ने भी सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, आईआईपी देहरादून में लैब शुरू होने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने चंडीगढ़ निजी लैब के साथ सैंपल टेस्टिंग के लिए एमओयू किया है। अभी प्रदेश में पांच सरकारी लैब, एक निजी पैथोलॉजी लैब के साथ चंडीगढ़ की लैब सैंपल जांच अनुबंध हुआ है।
सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल का कहना है प्रदेश में प्रतिदिन लिए जा रहे सैंपलों का आकलन करने पर जांच में ठहराव सा आ गया है। देखा जा रहा है कि पिछले तीन दिनों में जांच के लिए भेजने जाने वाले सैंपलों की संख्या में कमी आई है। उन्होंने कहा कि इस समय प्रतिदिन 1200 से 1500 सैंपल जांच के लक्ष्य पर काम होना चाहिए।

आपदा संवेदनशील 225 गांवों का भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूर्ण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि राज्य के आपदा संवेदनशील गांवों से परिवारों के पुनर्वास का काम पूरी गम्भीरता से किया जा रहा है। वर्ष 2017 से पहले जहां 2 गांवों के 11 परिवारों का पुनर्वास किया गया था, वहीं वर्तमान सरकार के तीन वर्ष के अभी तक के कार्यकाल में 25 गांवों के 688 परिवारों का पुनर्वास किया गया है। वर्ष 2017 तक 2 गांवों के 11 परिवार, 2017-18 में 12 गांवों के 177 परिवार, 2018-19 में 6 गांवों के 151 परिवार और 2019-20 में 7 गांवों के 360 परिवारों का पुनर्वास किया गया है।
वर्ष 2017 तक राज्य सरकार द्वारा आपदा संवेदनशील गांवों से पुनर्वास के लिए 37 लाख 50 हजार रूपये आवंटित किए गए जबकि 2017 से 2020 तक तीन वर्षो में 29 करोड़ 12 लाख 53 हजार रूपये आवंटित किए गए। आपदा प्रभावित 395 गांवों को आपदा संवेदनशील ग्रामों के रूप में चिन्हित किया गया था, इनमें से 225 गांवों का भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण करा दिया गया है।

’उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट’
विश्व बैंक की सहायता से उत्तराखण्ड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट के अंतर्गत 84 पुलों का निर्माण कार्य और 15 मार्ग सुरक्षात्मक कार्य कराए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त 5 रिवर बैंक प्रोटेक्शन कार्य, यूएसडीएमए का भवन और जौलीग्रांट में एसडीआरएफ प्रशिक्षण सुविधा का निर्माण कार्य भी परियोजना के तहत किया जाना है। 840 करोङ रूपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए विश्व बैंक द्वारा ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। 29 अप्रैल 2019 से प्रभावी परियोजना की समाप्ति तिथि 31 मार्च 2022 निर्धारित है। विश्व बैंक के साथ प्रोजेक्ट का फंडिंग पैटर्न 80-20 प्रतिशत है। अभी तक परियोजना की 22 प्रतिशत भौतिक प्रगति हो चुकी है।

साप्ताहिक बंदी पर निगम कर्मचारियों के साथ जुटी रही महापौर

महापौर अनीता ममगाई ने रविवार को हो रही साप्ताहिक बंदी का लाभ उठाते हुए पूरे बाजार क्षेत्र को एक बार फिर से सैनेटाइज करवाया। बता दें कि शहर के व्यापारियों द्वारा महापौर से अनलॉक वन में बाजार में लोगों की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर सैनेटाइजेशन कराने का आग्रह किया गया था। जिस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए महापौर रविवार सुबह से ही मोर्चे पर डट गई। तमाम प्रमुख बाजारों और यहां पड़ने वाले आश्रमों और धर्मशालाओं में सैनेटाइजेशन कराया।
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए नगर निगम लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को शहर के तमाम प्रमुख बाजारों में सैनिटाइजर का छिड़काव किया गया। महापौर अनिता ममगाई की अगुवाई में नगर निगम अमले ने सैनिटाइजर टैंकर और फॉगिंग मशीनो के साथ मुख्य बाजार में छिड़काव किया। हरिद्वार रोड़, त्रिवेणी घाट बाजार, रेलवे रोड, मुखर्जी मार्ग, देहरादून मार्ग सहित विभिन्न बाजारों में निगम प्रशासन की ओर से सप्ताहिक अवकाश पर जोरदार तरीके से सैनेटाइजेशन कराया गया। महापौर ने दुकानों के बाहर सेनेटाइजर का छिड़काव की कमान खुद संभाली। क्षेत्रवासियों से घरों से बाहर न निकलने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील भी की।
महापौर अनीता ममगाई ने बताया कि वैश्विक महामारी को देखते हुए मार्च माह से ही निगम का फोकस सैनेटाइजेशन पर रहा है। लेकिन कुछ कपड़ों की दुकानों एवं अन्य व्यापारिक प्रतिषठानों में सेनेटाइजिंग मे दिक्कतें आ रही थी जिसे देख आज साप्ताहिक बंदी पर बाजारों को पूर्ण सैनेटाइजेशन कराया गया है। उन्होंने बताया कि अभियान के लिए उपजिलाधिकारी, सहायक नगर आयुक्त और सैनेट्री इंस्पेक्टर को आदेशित किया गया है कि अपनी निगरानी में यह कार्य पूर्ण करायें। महापौर के अनुसार अनलॉक वन में अब सरकार का ध्यान लोगों की परेशानियों को दूर करने के साथ अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पूरी तरह से बाजारों को खोलने पर है। आने वाले दिनों में शहर के बाजारों में भी लोगों की आवाजाही और बढ़ेगी जिसके लिए आज बाजारों को पूरी तरह से सैनेटाइजेशन कराया गया है। आगे भी यह अभियान समय-समय पर निरंतर जारी रहेगा। इस दौरान पार्षद गुरविंदर सिंह, राजपाल ठाकुर, पवन शर्मा, हितेंद्र पवार, राजेश भट्ट, संजय पंवार आदि मौजूद रहे।

अधिसूचना जारी, क्वारंटीन अवधि में रहने पर कर्मचारी को देना होगा वेतन

राज्य में कोरोना संदिग्ध कर्मचारियों को क्वारंटीन अवधि के दौरान 28 दिन का भुगतान युक्त अवकाश देना होगा। इस संबंध में राज्य सरकार के श्रम विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। श्रम विभाग के सचिव हरबंस सिंह चुघ ने अधिसूचना जारी होने की पुष्टि की। बता दें कि पिछली कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
यह आदेश प्रदेश में संचालित कारखानों, सभी दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों व उन व्यापारिक केंद्रों में जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं, पर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। महामारी अधिनियम 1897 की शक्तियों के तहत यह प्रावधान किया गया है। इसके तहत यदि कोई कर्मचारी या कर्मकार कोविड-19 महामारी में संदिग्ध होता है और उसे क्वारंटीन किया गया हो, उसका संस्थान या नियोजक 28 दिन का अवकाश मंजूर करेंगे और उसे इस अवधि का पूरा भुगतान किया जाएगा। लेकिन इस तरह के अवकाश की मंजूरी के लिए कर्मचारी को स्वस्थ होने के बाद अपने नियोजक या प्राधिकृत व्यक्ति को चिकित्सा प्रमाण पत्र देना होगा।
वहीं, सभी कारखानों, दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, अधिष्ठानों के सूचना पट्ट और मुख्य द्वार पर कोविड-19 महामारी की रोकथाम को लेकर केंद्र व राज्य सरकार द्वारा बताए गए सुरक्षा उपायों को प्रदर्शित करना होगा।

नियमों का उल्लंघन करने को लेकर दायर याचिका में हाईकोर्ट ने महाराज को दिया नोटिस

कोरोना संक्रमण के दायरे में आए कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को आज हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। उन्हें तीन हफ्ते के अंदर जवाब भी दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज द्वारा कोरोना वायरस से बचने के लिए जारी केंद्र सरकार की गाइड लाइन का उल्लंघन करने के मामले में एक याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई थी। इस पर आज सुनवाई हुई। इसके बाद कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकार के साथ ही मंत्री को भी नोटिस जारी किया।
हाईकोर्ट ने पूछा है कि जब आम लोगों पर क्वारंटीन के नियमों का उल्लंघन करने पर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है तो संवैधानिक पद पर बैठे लोगों के खिलाफ कार्यवाही अमल में क्यों नहीं लाई जा रही है। इसे लेकर हाईकोर्ट कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार व मंत्री को तीन हफ्ते के अंदर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में मंत्री सतपाल महाराज व उनकी पत्नी सहित उनके परिवार के पांच सदस्य, उनके कर्मचारी भी कोरोना संक्रमित मिले थे। संक्रमित पाए जाने से पहले महाराज कैबिनेट की बैठक में भी गए थे। बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत सभी कैबिनेट मंत्री, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और शासन के अन्य उच्च अधिकारी मौजूद थे। जिसके बाद एहतियात बरतते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, सुबोध उनियाल और हरक सिंह रावत ने सेल्फ क्वारंटीन में जाने का निर्णय लिया है। हालांकि कल देर रात को मुख्यमंत्री की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई है।

संस्थागत क्वारंटीन से 500 लोगों को घर भेजा, आज राज्य में 62 मामले आएं

प्रदेशभर में आज कोरोना संक्रमण के 62 मामले सामने आए हैं। अब राज्य में कुल संक्रमित मामलों की संख्या 1215 हो गई है। जबकि 309 मरीज ठीक हो चुके हैं। आज नैनीताल में चार, अल्मोड़ा में पांच, चमोली व चंपावत में तीन, देहरादून में 23, हरिद्वार व पौड़ी में एक, रुद्रप्रयाग में 14 और टिहरी में आठ संक्रमित मरीज मिले हैं।
बात देहरादून की करें तो दून अस्पताल में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे है। अस्पताल के स्टाफ में लगातार तीन दिन से कोरोना के केस सामने आ रहे हैं। आज यहां चार मामले सामने आए। जिसमें अस्पताल की दो स्टाफ नर्स, एक इलेक्ट्रिशियन व अस्पताल में भर्ती एक गर्भवती महिला में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। स्टेट कॉर्डिनेटर एनएस खत्री ने इन मामलों की पुष्टि की है। अब प्रदेश में कोरोना संक्रमण के कुल 1156 मामले हो गए हैं।
प्रदेश में बाहरी क्षेत्रों से आने वाले 33 हजार से अधिक लोगों को संस्थागत क्वारंटीन किया गया है। लगभग पांच सौ लोगों की संस्थागत क्वारंटीन की अवधि पूरी होने के बाद 14 दिन के होम क्वारंटीन में भेजा गया है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार चार जून को प्रदेश में 33 हजार 942 लोग संस्थागत क्वारंटीन में रह रहे थे। वहीं, आज लगभग पांच सौ लोगों को सात दिन की अवधि पूरी होने के पर घर भेजा गया है। ये अब 14 दिन तक अपने घर में क्वारंटीन रहेंगे।
बता दें कि रेड जोन से आने और जाने के लिए पास बनाना अनिवार्य है। जबकि ऑरेंज जोन में एक जिले से दूसरे जिले में जाने के लिए सिर्फ ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। ऑनलाइन पंजीकरण ही पास माना जाएगा और उन्हें संस्थागत क्वारंटीन में नहीं रहना होगा।

मुख्यमंत्री ने कंटेनमेंट जोन पर सख्ती से नजर रखने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज देर सांय सीएम आवास में आयोजित बैठक में देहरादून में कोविड-19 के संक्रमण की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि देहरादून के लिए फुल प्रूफ प्लान तैयार किया जाए। शनिवार व रविवार दो दिन देहरादून के बंद रहने के दौरान व्यापक सेनेटाईजेशन करवाना सुनिश्चित किया जाए। फिजिकल डिस्टेंस को बनाए रखने के लिए ज्यादा भीड़ भाड़ वाली जगहों पर अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं। कंटेनमेंट जोन पर सख्ती से नजर रखी जाए। यथासंभव टेस्टिंग बढाई जाये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पेशेंट केयर मेनेजमेन्ट पर सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। कोरोना संक्रमण के प्रति संवेदनशील वृद्ध जनों, गम्भीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों पर विशेष ध्यान देना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमितों की कान्टेक्ट ट्रेसिंग में लीकेज न हो। चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को संक्रमण से सुरक्षा सुनिश्चित हो। जहां भी फिजीकल डिस्टेंसिंग, मास्क की अनिवार्यता व अन्य मानकों का उल्लंघन हो वहां सख्त कार्रवाई की जाए। आमजन की जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जाए।
बैठक में विधायक खजानदास, मेयर सुनील उनियाल गामा, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, सचिव अमित नेगी, नितेश झा, आयुक्त गढवाल रविनाथ रमन, शैलेश बगोली, नगर आयुक्त विनय शंकर पाण्डे, डीएम आशीष श्रीवास्तव व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

पर्यावरण की सुरक्षा होगी तो प्राकृतिक आपदाओं से मिलेगा छुटकाराः महापौर अनिता ममगाईं

विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ नगर निगम प्रशासन ने निगम जनसंघ के संस्थापक दीनदयाल उपाध्याय पार्क में पौधारोपण किया। महापौर अनिता ममगाई की अगुवाई में आज सुबह निगम पार्षदों ने निगम वाटिका में विभिन्न फलदार और औषधीय पौधे रोंपे। इस अवसर पर महापौर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के अभाव में पृथ्वी कई रूप में प्रभावित हो रही है। पृथ्वी का प्रभावित होना जन जीवन के लिए घातक सिद्ध होने लगा है। जिसका ज्वलंत उदाहरण जल संकट के रूप में देखने को मिल रहा है। यदि पृथ्वी पर जल संकट गहराता रहा तो मानव सहित सभी जीव जंतु खतरे में पड़ जाएंगे। जल के अभाव में सुरक्षित जीवन की कल्पना यथोचित नहीं होगा। अर्थात हमें पृथ्वी पर पेड़ पौधों की संख्या बढ़ानी होगी और पर्यावरण की सुदृढ़ता कर कार्य करने होंगे।
महापौर ममगाई ने कहा कि दुनिया और देशभर में कोविड-19 के कहर के कारण मचे हाहाकार के बीच इससे निपटने के लिए लगाये गये देशव्यापी लॉकडाउन ने इंसान को जहां बंदिशों में रखा। वहीं प्रकृति को फिर से सजने और संवरने का मौका मिला है। लॉकडाउन प्रकृति के लिए नायाब तोहफे की तरह आया जिसमें विभिन्न प्रकार के प्रदूषण पर लगी रोक ने पयार्वरण को खुद से खुद को ठीक करने का मौका दिया। उन्होंने पौधारोपण कार्यक्रम में मौजूद सभी से पर्यावरण पहरी के तौर पर कार्य करने का आह्वान भी किया। इस दौरान पार्षद विजय बडोनी, विजेंद्र मोगा, सुजीत यादव, विपिन कुकरेती, हर्ष गवाढ़ी, शिवम गर्ग, सफाई निरीक्षक अभिषेक मल्होत्रा, हवलदार नरेश खैरवाल, राजेंद्र बाल्मीकि, मुकेश खैरवाल आदि शामिल थे।

क्वारंटीन सेंटर में किसी प्रकार की कोई लापरवाही न बरतें अधिकरीः डीएम मंगेश घिल्डियाल

कोरोना वायरस को लेकर जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने वीडियों कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के उप जिलाधिकारियों एवं प्रभारी चिकिसा अधिकारियो की बैठक ली। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए जब तक कोरोना की जांच रिपोर्ट नही आ जाती तब तक क्वारंटीन सेंटर में रखे व्यक्ति को घर जाने की अनुमति किसी भी दशा में न दी जाए। जिलाधिकारी ने कहा, कन्टेनमेंट जोन में किसी भी तरह का आवागम नही होगा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया की यदि कन्टेनमेंट जोन में केन्द्र सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन का उलंघन पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि कन्टेनमेंट जोन एक गंभीर विषय है, इसमे किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नही होगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि कन्टेनमेंट जोन का औचक निरीक्षण किया जाएगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। वही कल से कन्टेनमेंट जोन पर लगाये गए बैरियर की फोटो अनिवार्य रूप से उपलब्ध करने के निर्देश दिए है। जिलाधिकारी ने प्रभारी चिकित्साधिरारियो को कन्टेनमेंट जोन में प्रत्येक परिवार का दैनिक रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है।

जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया की कोरोना पाॅजीटिव व्यक्ति के संपर्क में आये व्यक्तियो (कांटेक्ट ट्रेसिंग से) उन व्यक्तियो को अनिवार्य रूप से संस्थागत क्वारंटीन किये जाने के निर्देश दिए है। कोरोना महामारी आपदा के दौरान तमाम व्यवस्थाओ हेतु तहसील स्तर पर प्रयाप्त धनराशि की उपलब्धता के बावजूद लंबित बीजकांे के भुगतान न किये जाने पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। प्रभारी चिकिसाधिकारियो को स्पष्ट निर्देश दिए की कोरोना के लक्षण वाले व्यक्ति को कौन सी दवाई देनी है कौन सी नही, इस हेतु हेल्थ टीमों को नियमित रूप से प्रशिक्षित करने के निर्देश भी दिए है।