बाहरी राज्यों से लौटे लोगों को राज्य में ही रोका जा सकता है…, इसकी रणनीति तैयार करे आयोग

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण के कारण हुए रिवर्स पलायन पर पलायन आयोग से अध्ययन रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों से गांव वापस लौटे उत्तराखंड वासियों को किस तरह राज्य में रोका जा सकता है, इसे लेकर रणनीति तैयार की जाए। सीएम ने मंगलवार को अपने आवास पर मंत्रिपरिषद के साथ देश में लॉकडाउन से पैदा परिस्थितियों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आपदा को अवसर के रूप में किस प्रकार बदला जाए हमें इस दिशा में गंभीरता से सोचना होगा। लॉकडाउन की स्थिति के लिए केंद्र सरकार की ओर से जारी होने वाले निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में कार्य योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। बदलते हालात में अर्थव्यवस्था को किस प्रकार मजबूती प्रदान की जाए, इसकी भी चुनौती है। उन्होंने कहा कि इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों को लौटे हैं।

ये लोग रिवर्स माइग्रेशन की ओर अग्रसर हों, इसके लिए पलायन आयोग एक अध्ययन रिपोर्ट तैयार करके पेश करे। आयोग इनसे वार्ता कर उनसे सुझाव भी प्राप्त करे। यहां लौटे लोगों को यहां पर बेहतर संसाधन एवं सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें रोका जा सकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम एवं लॉकडाउन के दौरान सरकार सामूहिक निर्णय लेगी। इस संबंध में कोई भी विभाग अपने स्तर से किसी भी प्रकार का आदेश निर्गत नहीं कर सकेगा।

कोरोना संक्रमण की रोकथाम में तैनात सभी लोगों के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष से 10 लाख की सम्मान निधि की व्यवस्था की गई है। इसके लिए एक कमेटी का गठन किया गया है जो इससे संबंधित प्रकरणों को देखेगी तथा किसी अनहोनी की स्थिति में उनके आश्रितों को यह धनराशि प्रदान करने की संस्तुति करेगी।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और वरिष्ठ पत्रकार सच्चिदानंद पैन्यूली का 92 साल की उम्र में निधन

टिहरी रियासत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सच्चिदानंद पैन्यूली पुत्र स्वर्गीय कृष्णानंद पैन्यूली का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने अपने ऋषिकेश स्थित निवास स्थान पर सुबह करीब 3 बजकर 40 मिनट पर अंतिम सांस ली।
रविवार को पूर्णानंद घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें मुखाग्नि उनके बेटे संपूर्णानंद पैन्यूली ने दी। बताते चले कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सच्चिदानंद पैन्यूली पिछले एक माह से बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती थे। ठीक एक महीने पहले 12 मार्च को उनकी पत्नी मनोरमा देवी का देहांत हो गया था। वर्तमान में वे ऋषिकेश के गंगानगर हनुमंत पुरम लेन नंबर छह में निवास कर रहे थे।
उनका मूल निवास स्थान छोल गांव बड़कोट टिहरी गढ़वाल में है। उनकी अंत्येष्टि में जिलाधिकारी देहरादून आशीष श्रीवास्तव, मेयर ऋषिकेश अनिता ममगाईं, सीओ ऋषिकेश वीरेंद्र सिंह रावत, सीओ नरेंद्र नगर प्रमोद शाह, मुनीकीरेती थाना अध्यक्ष रामकिशोर सकलानी शामिल रहे।

उनके जीवन पर एक नजर ….
– 29 मार्च 1929 को जन्मे डॉ. सच्चिदानंद पैन्यूली स्नातक की पढ़ाई के बाद टिहरी रिसायत में प्रथम बार 25 जुलाई 1946 को शहीद सुमन के शहीदी दिवस पर गिरफ्तार हुए।
– टिहरी जेल से बड़े भाई पूर्व सांसद व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिपूर्णानंद पैन्युली को फरार कराने के षड्यंत्र में गिरफ्तार किए गए। 13 दिसंबर 1946 को स्वयं भी फरार हो गए।
-अपने पैतृक गांव छोल बडकोट में अस्पताल के लिए ढाई एकड़ भूमि दान की। यहां अस्पताल बनने के बाद 13 जुलाई 1988 को तत्कालीन रक्षामंत्री केसी पंत ने उद्घाटन किया।
– सन 1951 में आचार्य विनोबा भावे से प्रेरित होकर भूदान यज्ञ में सक्रिय भूमिका निभाई।
– भारत छोड़ो आंदोलन के दिवस पर नौ अगस्त 2008 को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने डॉ. सच्चिदानंद पैन्यूली को सम्मानित किया गया।
– पत्रकारिता के लिए ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी ने 25 फरवरी 2017 को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की मानद उपाधि से सम्मानित किया।

गैस खरीदने के लिए केन्द्र सरकार उज्ज्वला कनेक्शन धारकों के अकांउट में धनराशि भेजी

लॉकडाउन के कारण केंद्र सरकार ने उज्ज्वला कनेक्शन धारकों को तीन महीने फ्री में गैस सिलेंडर देने की घोषणा की है। जिला देहरादून में अभी तक 3330 लोगों के खाते में आईओसी कंपनी (इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन) की ओर से सिलेंडर खरीदने के लिए धनराशि पहुंचा दी गई है।
अभी तक उज्ज्वला के तहत 2780 बुकिंग हो चुकी है, जिसमें से 2450 लोगों को गैस सिलेंडर मिल चुका है। केंद्र सरकार उज्ज्वला कनेक्शन धारकों को तीन महीने अप्रैल, मई और जून फ्री में सिलेंडर उपलब्ध करा रही है। इसके तहत आईओसी कंपनी सिलेंडर धारकों के खाते में पहले धनराशि पहुंचा रही है।
देहरादून जिले में इसकी शुरुआत हो चुकी है। जिले में उज्ज्वला के तहत कुल 17980 कनेक्शन धारक हैं। इनमें से 14870 उपभोक्ताओं के खाते में धनराशि पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आईओसी के मुताबिक 3330 उपभोक्ताओं के खातों में पैसा डिलीवर हो चुका है। इनमें से अभी तक 2780 उपभोक्ताओं ने गैस की बुकिंग की है। जिसमें से 2450 उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर मिल भी चुका है। अन्य लोगों को भी गैस की डिलीवरी की जा रही है।
वहीं, लॉकडाउन के दौरान पिछले 15 दिनों में जिला प्रशासन एक लाख 14 हजार से ज्यादा लोगों तक मदद पहुंचा चुका है। इस दौरान जहां करीब एक लाख लोगों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया गया, वहीं करीब 14 हजार लोगों को अन्नपूर्णा किट वितरित की गई।
जिलाधिकारी डॉ आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि 27 मार्च को जिला प्रशासन ने भोजन और राशन वितरण शुरू किया था। इसमें शहर की तमाम सामाजिक संस्थाएं, संगठन और दानदाता सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि रोजाना करीब पांच से 10 हजार लोगों को पका हुआ खाना दिया जा रहा है। वहीं करीब एक हजार लोगों को राशन की अन्नपूर्णा किट वितरित की जा रही है।

मुख्यमंत्री की पहल पर संशोधित हुआ आदेश, अब भत्तों में भी 30 प्रतिशत की होगी कटौती

उत्तराखंड के विधायकों का 30 प्रतिशत वेतन के साथ ही उनके भत्ते में भी कटौती होगी। यह पैसा कोरोना महामारी से लड़ने के लिए बने कोविड-19 फंड में जाएगा। विधायकों के वेतन व भत्तों से यह कटौती एक अप्रैल से 31 मार्च 2021 तक होगी। इस संबंध में सचिव विधायी एवं संसदीय कार्य प्रेम सिंह खिमाल ने आदेश जारी किए हैं। कोरोना के खिलाफ जारी जंग में आगे लड़ाई के लिए आवश्यक फंड जुटाने को प्रदेश मंत्रिमंडल ने पिछले दिनों बैठक करके विधायकों, मंत्रियों व मुख्यमंत्री के वेतन से 30 फीसदी कटौती का निर्णय लिया था। जिसमें संशोधन करते हुए सरकार ने शासनादेश जारी कर दिया है।
इसके तहत अब विधायकों, मंत्रियों व मुख्यमंत्री को मिलने वाले भत्तों में भी 30 फीसदी की कटौती की जाएगी। कैबिनेट ने अधिनियम की धारा 24 में संशोधन को मंजूरी देते हुए वेतन व भत्तों में कटौती के प्रस्ताव पर मुहर लगाई। विदित हो कि कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय के बाद यह संशय था कि एक साल के लिए विधायक के सिर्फ वेतन से 30 फीसदी की कटौती होगी या फिर इसमें भत्ते भी शामिल होंगे। प्रदेश में एक विधायक को 30 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। इस हिसाब से यदि प्रदेश सरकार के नौ मंत्री व राज्य मंत्रियों को छोड़ दें तो बाकी 62 विधानसभा सदस्यों के 30 हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन के हिसाब से एक साल की सहयोग निधि 66 लाख 96 हजार रुपये बैठती है। यदि इसमें मंत्रियों और राज्य मंत्रियों की राशि को जोड़ दें तो इसमें कुछ और इजाफा हो जाता है। लेकिन, आदेश में निर्वाचन क्षेत्र भत्ता व सचिव भत्ता में भी 30 प्रतिशत की कटौती करने का उल्लेख किया गया है।

पार्थिव शरीर को पैतृक गांव ले जाने से नहीं रोका जा सकता
लॉकडाउन के दौरान पार्थिव देह (डेड बॉडी) को पैतृक गांव ले जाने से नहीं रोका जा सकता है। पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) अशोक कुमार ने इस संबंध में सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने आगाह भी किया कि मेडिकल इमरजेंसी के मामलों में परमिशन देने में हीलाहवाली या लापरवाही करने से कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए पुलिस भी परोक्ष रूप से जिम्मेदार होगी।

कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को लाॅकडाउन में हो रही समस्याओं की दी जानकारी

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से उनके आवास में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भेंट की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न जनसमस्याओं के संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा की तथा कोरोना संक्रमण से बचाव में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा इस संबंध में सहयोग का आश्वासन भी मुख्यमंत्री को दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी के सहयोग एवं व्यापक जागरूकता तथा दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर हम इस संकट का सामना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन की स्थिति में आम जनता को कोई कठिनाई न हो इसके लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। फसल कटाई के लिए किसानों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी इसमें सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखने के साथ ही मास्क की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेश के स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से भी मास्क तैयार कर वितरण की व्यवस्था की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खाद्यान्न सहित अन्य आवश्यक सामग्री की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। प्रदेश के 13 लाख कार्ड धारकों को 15 किलो राशन के अलावा 5 किलो प्रति यूनिट अतिरिक्त राशन उपलब्ध कराए जाने के साथ ही 3 माह का राशन अग्रिम दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉक डाउन के कारण प्रदेश में फंसे पर्यटकों एवं अन्य लोगों के साथ ही कोरोना के दृष्टिगत क्वॉरेंटाइन में रखे गए लोगों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इस अवसर पर महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, पूर्व दायित्व धारी अजय सिंह, पूर्व विधायक राजकुमार आदि उपस्थित थे।

विदेशियों ने कहा 1 बजे तक हम स्वतंत्र, तो फिर पुलिस ने क्या किया, पढ़िए पूरी खबर

टिहरी जिले की तपोवन चैकी पुलिस ने लॉकडाउन के दौरान घूम रहे विदेशी सैलानियों को अनोखे अंदाज में सजा दी। कोरोना संक्रमण से लोग बचे रहें, इसके लिए पुलिस कई बार सख्ती तो कई बार अलग-अलग अंदाज में लोगों को समझा रही है। तपोवन पुलिस ने बेवजह घूम रहे विदेशी सैलानियों से कोरे कागज पर 500 बार लिखवाया कि लॉकडाउन के दौरान उनसे गलती हुई है।
तपोवन चैकी प्रभारी उप निरीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि शनिवार को उन्होंने पुलिसकर्मियों के साथ नीम बीच से लेकर साईं घाट तक गश्त की। इस दौरान 10 विदेशी नागरिक गंगा किनारे चहल-कदमी करते हुए दिखाई दिए।
इस दौरान विदेशियों से बेवजह घूमने का कारण पूछा तो बोले एक बजे तक स्वतंत्र घूम सकते हैं। पुलिस ने बताया कि रिलैक्सेशन पीरियड केवल जरूरत का सामान खरीदने के लिए है, गंगा किनारे स्नान करने, ध्यान करने या चहल-कदमी करने के लिए नहीं है। पुलिस ने विदेशी नागरिकों से नियमों का उल्लंघन होने पर कोरे कागज पर 500 बार लिखवाया कि उनसे गलती हो गई।

अवैध मार्गों पर एसएसबी ने जवान दिन-रात कर रहे निगरानी

नेपाल के रास्ते भारत में कोरोना संक्रमितों को भेजने की साजिश की खुफिया रिपोर्ट के बाद प्रशासन, पुलिस व एसएसबी अलर्ट हो गई है। सशस्त्र सीमा बल यानी एसएसबी ने भारत-नेपाल सीमा पर चैकसी बढ़ा दी है। दोनों देशों के मध्य आवाजाही के सात मार्ग वैध हैं, परंतु एक दर्जन से अधिक संदिग्ध रास्तों से अवैध आवाजाही का संभावना रहती है। ऐसे रास्तों पर एसएसबी के जवान दिन-रात निगरानी में लग गए हैं। पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी वीके जोगदंडे के मुताबिक भारत-नेपाल सीमा 30 अप्रैल तक सील कर दी गई है।
उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के कालापानी से लेकर पंचेश्वर तक भारत और नेपाल की लंबी सीमा है। इस सीमा के भीतर झूलाघाट, ड्यौड़ा, जौलजीवी, बलुवाकोट, धारचूला, ऐलागाड़ और उच्च हिमालय में गब्र्याग में भारत-नेपाल के बीच वैध मार्ग हैं। दोनों देशों के बीच आवाजाही के लिए झूला पुल बने हैं। मध्य अवैध तरीके से टायर ट्यूब से नदी पार की जाती है। झूलाघाट से पंचेश्वर के मध्य तो दस स्थानों पर नेपाल की तरफ से नावें चलती हैं। इनमें पांच स्थानों पर नेपाल सरकार ने मान्यता दे रखी है और पांच स्थल अवैध हैं। नेपाल सरकार ने जिन स्थानों पर मान्यता दी है, भारत उसमें भी सहमत नहीं रहा है। लॉकडाउन के बाद दोनों देशों के बीच नाव से आवाजाही बंद है।
नेपाल से भारत में प्रवेश करने के लिए केवल काली नदी पार करनी है। काली नदी का जलस्तर अधिक होने तथा इसका प्रवाह तेज होने से इसे तैर कर पार करना काफी कठिन है। हालांकि तल्लाबगड़ से लेकर पंचेश्वर तक कुछ स्थानों पर तैराकी में पारंगत लोग नदी को तैर कर पार कर लेते हैं। अवैध कार्यों के लिए टायर ट्यूब का सहारा लिया जाता है। यहां तक कि टायर ट्यूब के सहारे सामान भी पार किया जाता है। इसमें भारत और नेपाल दोनों देशों के लोग शामिल रहते हैं। ऐसे में किसी के भी नेपाल से भारत में प्रवेश करना सरल है। आमतौर पर अप्रैल में गर्मी बढने से ग्लेशियरों के पिघलने से नदी का जलस्तर बढ़ जाता था। इस वर्ष मौसम अधिक गर्म नहीं है। जिससे ग्लेशियरों के नहीं पिघलने से नदी का जलस्तर उस तेजी के साथ नहीं बढ़ा है। जिले में भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसएसबी के पास है। सीमा पर एसएसबी की बीओपी चैकियां हैं। इसके अलावा सीमा पर झूलाघाट, अस्कोट, जौलजीवी, बलुवाकोट, धारचूला और पांगला थाने हैं। खुफिया सूचना के बाद एसएसबी और पुलिस सतर्क है। सीमा पर अभी सभी स्थानों पर सड़क नहीं है, जिसका फायदा उठाया जा सकता है।

दानवीरों में अब चमोली की देवकी भंडारी का भी होगा जिक्रः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि चमोली जनपद की गौचर निवासिनी देवकी भंडारी ने अपने नाम को चरितार्थ किया है। उन्होंने वैश्विक संकट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पीएम केयर फंड में 10 लाख रुपए की अपनी सारी पूंजी देकर जरूरतमंदों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। इस भरत भूमि में दानवीर कर्ण और राजा बलि की दानवीरता की कहानियाँ हमने सिर्फ किताबों में पढ़ी थी लेकिन आज साक्षात देख भी ली है। निस्वार्थ भाव से सब कुछ त्याग और दान देने की हमारी भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करते हुए देवकी ने अकेले होकर भी पूरे भारतवर्ष को अपना परिवार समझा और हमारे सामने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया। नारी शक्ति के रूप में हम सबके लिए बहुत बड़ी प्रेरणा हैं। कोरोना से लड़ने के लिए ऐसा हर एक प्रयास इस जंग को मजबूत करेगा।

वहीं, एसोसिएशन ऑफ फार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्चरर्स, रानीपुर, हरिद्वार के अध्यक्ष संदीप जैन ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 7,51,000 (सात लाख इक्यावन हजार) का चेक भेंट किया। इसके साथ ही, संजीवनी यूए सिविल सर्विसेज उत्तराखण्ड की अध्यक्षा निपुनिका सिंह ने भी मुख्यमंत्री राहत कोष में दो लाख रूपये का चेक भेंट किया।

एक दिन के वेतन का चेक सौंपा
उत्तराखंड वन विकास निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक दिन के वेतन के योगदान के रूप में 25,72,548 रुपए का चेक दिया है। यह चेक वन मंत्री हरक सिंह रावत एवं प्रबंध निदेशक मोनिष मल्लिक ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सौंपा। उन्होंने पीएम केयर्स फंड के लिए भी पांच लाख रुपए का चेक मुख्यमंत्री को सौंपा।

इसी क्रम में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल गोयल ने भी मुख्यमंत्री राहत कोष में एक लाख दो हजार रुपए का चेक दिया। इससे पूर्व भी उन्होंने मुख्यमंत्री राहत कोष में एक लाख रुपए का चेक दिया था।

शाक्य बौद्ध समुदाय ने 23 लाख की राशि दी
शाक्य बौद्ध समुदाय ने मुख्यमंत्री राहत कोष में कुल 23 लाख रूपये की राशि दी गई है। शाक्य बौद्ध समुदाय की ओर से आध्यात्मिक नेता एचएच शाक्यृत्जीन, एचएच रत्ना वज्र शाक्य और एचएच ज्ञान वज्र शाक्य ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को उक्त राशि के चेक भेंट किए। कुल 23 लाख रूपये की राशि में से एचएच शाक्यृत्जीन, एचएच रत्ना वज्र शाक्य और एचएच ज्ञान वज्र शाक्य द्वारा 3 लाख रूपये, डोलमा फोड्रांग द्वारा 3 लाख रूपये, न्गोर पाल एवाम चोडान द्वारा 3 लाख रूपये, शाक्य कालेज द्वारा 3 लाख रूपये, द ग्रेट शाक्य मोनलाम फाउंडेशन द्वारा 5 लाख रूपये, शाक्य ननरी द्वारा 3 लाख रूपये और शाक्य सेंटर द्वारा 3 लाख रूपये का अंशदान किया गया है।

कंट्रोल रूम से मुख्यमंत्री ले रहे राहत और बचाव कार्यो का फीडबैक

मुख्यमंत्री के कैम्प कार्यालय में बेहतर समन्वय के लिए केन्द्रीकृत कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहां से मुख्यमंत्री, आवश्यकतानुसार कोविड-19 के लिए स्थापित सभी जिला कंट्रोल रूम और राज्य कंट्रोल रूम से फीडबैक प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने फोन पर राज्य के विधायकगणों से बात कर उनके क्षेत्रों में कोरोना वायरस के संक्रमण की स्थिति और बचाव हेतु प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री ने विधायकगणों को अपने क्षेत्र में लगातार सम्पर्क बनाए रख कर लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करने और लॉकडाऊन में घर पर ही रहने के लिये प्रेरित करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें लोगों सतर्क और सावधान करने के साथ ही उनकी आवश्यकताओं का भी ध्यान रखना है। कोई भी गरीब भूखा न रहे। बाहर से आए लोगों पर लगातार नजर रखनी है। क्वारेंटाईन किए गए लोगों में से कोई इसका उल्लंघन करता है तो तुरंत प्रशासन को जानकारी दें। अगर किसी को खांसी, जुकाम, बुखार जैसी समस्या हो तो स्वास्थ्य विभाग को सूचित करे ताकि उचित इलाज हो सके। विधायकगण अपने समर्थकों व कार्यकर्ताओं को भी प्रेरित करें। हमारे पास केवल और केवल यही एक समाधान है कि हम सामाजिक दूरी बनाकर रखें। हम सोशल डिस्टेंस बनाकर रखें। इसका स्वयं भी पालन करें और औरों को भी इसका पालन करने हेतु जागरूक करें।

वहीं, सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में संत निरंकारी मंडल के जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को कोरोना महामारी हेतु सहायता राशि के रूप में 50 लाख रूपये का चेक सौंपा। इस मौके पर हरभजन सिंह ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर संत निरंकारी मिशन के प्रदेश में स्थित सभी सत्संग भवनों को आइसोलेशन के लिए प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संत निरंकारी मिशन कोरोना वायरस से लड़ाई में प्रदेश सरकार की हर सम्भव सहायता करेगा। उन्होंने कहा कि मिशन द्वारा जरूरतमंदों को राशन, सेनेटाइजर, मास्क इत्यादि भी वितरित की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने छुपने वाले और छुपाने वाले दोनों पर सख्त एक्शन लेने के निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर रात्रि 9 बजे अपने आवास में दीपक प्रकाशित किए। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को भी उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि कोरोना वायरस से संघर्ष में इससे अवश्य ही हम सभी का उत्साह बढ़ेगा। पूरे देश ने जिस संयम और एकजुटता का परिचय दिया है, वह प्रेरणादायक है। हम अपने आत्मबल की शक्ति से कोरोना वायरस के खिलाफ लङाई में जरूर जीतेंगे। बस हमें निराश नहीं होना है, धैर्य और संयम बनाए रखना है, घर पर रहना है, सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखनी है और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करना है।

वहीं, दिनभर के घटनाक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा है कि कोरोना वायरस को रोकने में प्रशासनिक कार्यवाही का विरोध करने वालों पर डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के तहत कङी कार्रवाई की जाएगी। क्वारेंटाईन किए गए लोग अगर छुपते हैं या कोई उन्हें छुपाते हैं तो छुपने वाले व छुपाने वाले दोनों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी जानकारी मिली है कि कुछ लोगों ने सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया है। उन्हें सख्त हिदायत दी जाती है कि सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने पर चार गुना वसूली की जाएगी। कुछ छिटपुट जगहों पर लोग अफवाहो के बहकावे में भी आए हैं। प्रदेशवासियों से अनुरोध है अफवाहो में न आएं और केवल सरकारी प्रामाणिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें। स्वास्थ्य विभाग समय समय पर गाइडलाइन जारी करता है जिसे मीडिया के माध्यम से आमजन तक पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी लोग कोरोना वायरस से लङाई में जुटे हैं। कुछ लोगों को इनकी तपस्या को बेकार करने नहीं दिया जाएगा।