सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास कर रही

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य सरकार के कार्यकाल के तीन वर्ष पूर्ण होने पर सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तिका ‘‘विकास के तीन सालः बातें कम, काम ज्यादा’’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने सरकार को सहयोग देने के लिए प्रदेशवासियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास कर रही है। तीन वर्ष के दौरान अनेक बड़े निर्णय लिए गए। 4 मार्च को गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा की गई। यह हमारे दृष्टि पत्र में भी था। हमने जनता से किया गया वायदा पूरा किया। प्रदेश की जनता ने भी इसके पक्ष में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। हमारा दूसरा बड़ा निर्णय चारधाम देवस्थानम बोर्ड का गठन था। अब चारधाम यात्रा इसके तहत की जाएंगी।
हमने जनता से सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का वायदा किया था। हमने इसके लिए कड़े कदम उठाए, भ्रष्टाचार पर तीखा प्रहार किया। साबित किया कि सरकार ईमानदारी से भी चल सकती है। पारदर्शी शासन के लिए ई-आफिस, सीएम हेल्पलाईन, सीएम डैशबोर्ड की व्यवस्था की है। तीन साल में एक बड़ा निर्णय अटल आयुष्मान योजना शुरू करना रहा है। इसमें प्रदेश के सभी लोगों को शामिल किया। रैफर के प्रावधान को हटाया गया है। प्रदेश में पहली बार इन्वेस्टर्स समिट की गई। 1 लाख 24 हजार करोड़ के एमओयू किए गए। इनमें से 21 हजार करोड़ से अधिक का निवेश ग्राउन्ड हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बहुत से निर्णय लिए, जहां सुधार की गुंजाईश होती है, वहां सुधार भी किए जाते हैं।
ऑल वेदर रोड़, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट, एनएच, भारतमाला, टिहरी बांध, शहरी विकास, एयर कनेक्टीवीटी, जमरानी, सौंग, मसूरी पेयजल योजना आदि के रूप में डबल इंजन का प्रभाव देखा जा सकता है। केंद्र से 94 हजार करोड़ रूपए से अधिक के प्रोजेक्टों की स्वीकृति ली गई। पलायन को रोकने के लिए नहीं बल्कि रिवर्स पलायन के लिए ग्राम्य विकास और पलायन आयोग का गठन किया गया। उसने विस्तृत अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट दी। 13 डिस्ट्रिक्ट-13 डेस्टीनेशन, होम स्टे से स्थानीय लोगों की आजीविका के लिए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। ग्रोथ सेंटर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं। हम ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रहे हैं। सोलर और पिरूल एनर्जी नीति पर्वतीय क्षेत्र में काफी फायदेमंद होंगी। प्रदेश में एयर कनेक्टीवीटी का भी विस्तार हुआ है। देहरादून, देश के प्रमुख शहरों से जुड़ चुका है। चिन्यालीसौड़, गौचर भी हवाई सेवा से जुड़ चुके हैं। उड़ान के अंतर्गत हेली सेवा शुरू करने वाला उत्तराखण्ड पहला राज्य है। आर्गेनिक खेती में भी बड़ी पहल की गई है। साहसिक पर्यटन के लिए अलग से विभाग बनाया जा रहा है। साहसिक पर्यटन हमारे युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण क्षेत्र होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगे भी हम अपने विकास के एजेंडे पर आगे बढ़ते रहेंगे। सभी डिग्री कॉलेजों, आंगनबाड़ी केंद्रों को भवन और स्कूलों में फर्नीचर उपलब्ध करवाया जाएगा। कनेक्टीवीटी के लिए जहां भी पुलों की आवश्यकता होगी, बनाए जाएंगे। बालिका अनुपात में काफी सुधार आया है, इस पर और ध्यान दिया जाएगा। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चैहान, देहरादून मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक हरबंस कपूर, गणेश जोशी, मुन्ना सिंह चैहान, खजान दास, महानिदेशक सूचना डा.मेहरबान सिंह बिष्ट उपस्थित रहे।

सरकार का ऐतिहासिक फैसला, प्रमोशन में अब आरक्षण नही चलेगा

उत्तराखंड में प्रमोशन से रोक हटाने के प्रदेश सरकार के फैसले के बाद परेड मैदान में जुटे जनरल ओबीसी कर्मचारियों ने एक दूसरे को रंग लगाकर होली मनाई। उन्होंने इसे आंदोलन की जीत करार दिया। लेकिन सरकार के इस फैसले से उत्तराखंड एससी-एसटी इंप्लाइज फेडरेशन भड़क गया है। फेडरेशन ने विरोध में आज सभी जिला मुख्यालयों पर सरकार का पुतला फूंकने का फैसला किया है। बुधवार को प्रमोशन से रोक हटने का आदेश जारी होने के बाद एससी-एसटी कर्मचारी जुट गए और उन्होंने एक सभा कर सरकार पर उनके हितों पर कुठाराघात करने का आरोप लगाया।
इससे पूर्व सचिवालय में उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी, प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र सिंह गुसांई, बीपी नौटियाल, ठाकुर प्रहलाद सिंह, अरुण पांडेय, राकेश जोशी निगम अधिकारी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुसांई, प्रदेश महामंत्री बीएस रावत समेत कई कर्मचारी नेताओं के साथ मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की वार्ता हुई। इस वार्ता में सहमति बनने के बाद कर्मचारी नेता परेड मैदान स्थित धरना स्थल पर पहुंचे जहां उन्होंने प्रमोशन से रोक हटने, पदोन्नति के आदेश जारी होने और कार्य बहिष्कार की अवधि अर्न लीव (उपार्जित अवकाश) में एडजस्ट होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बेमियादी हड़ताल को स्थगित किया जा रहा है। यदि कर्मचारियों पर दर्ज मुकदमे वापस न हुए और उनके खिलाफ कोई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई हुई फिर आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी ने सभी हड़ताली कर्मचारियों का आभार जताया और इसे कर्मचारियों के एकजुट संघर्ष की जीत करार दिया। इस दौरान हड़ताली कर्मचारियों ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर खुशी का इजहार किया। उन्होंने जमकर होली खेली। एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र सिंह गुसांई ने बताया कि हड़ताल के दौरान कर्मचारियो ंने होली नहीं मनाई थी। आज उन्होंने मांगें पूरी होने की खुशी में उन्होंने होली मनाई।

मुख्यमंत्री ने सरकार के तीन वर्ष पूरे होने पर उपब्धियां बताई

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य सरकार के तीन वर्ष पूरे होने के अवसर पर सहयोग के लिए प्रदेशवासियों का आभार व्यक्त किया है। अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलनकारियों और मातृशक्ति को नमन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन साल पहले आप सभी के आशीर्वाद से जब हमने सरकार सम्भाली, यहाँ के नीति निर्माण में उत्तराखण्ड राज्य की मूल भावना का अभाव था। हमने आते ही दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा। हाल ही में गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र राज्य के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा। गैरसैंण को उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का निर्णय राज्य आंदोलनकारियों, माताओं-बहनों को समर्पित है।
हमने प्रदेश की महान जनता से कुछ वायदे किए थे। मैं आज पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि हमने इन तीन साल में ही 70 फीसदी वायदे पूरे कर दिए हैं। हम अपने सभी वायदों को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। हम काम में विश्वास करते हैं। हमारी सरकार के ये तीन साल, विकास के तीन साल रहे। हमारा ध्येय वाक्य रहा है, बातें कम -काम ज्यादा।
माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से हमारी सरकार के तीन साल में बहुत से ऐसे काम हुए हैं, जो कि पहले मुमकिन नहीं लग रहे थे। डबल इंजन का असर साफ-साफ देखा जा सकता है। केंद्र सरकार द्वारा लगभग एक लाख करोड़ रूपए की विभिन्न परियोजनाएं प्रदेश के लिए स्वीकृत हुई हैं। इनमें बहुत सी योजनाओं पर तेजी से काम भी चल रहा है। इनमें ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, चारधाम सड़क परियोजना ऑल वेदर रोड़, केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण, भारतमाला परियाजना, जमरानी बहुद्देशीय परियोजना, नमामि गंगे, देहरादून स्मार्ट सिटी आदि प्रमुख हैं।
पर्वतीय राज्य की अवधारणा से बने उत्तराखण्ड में पहली बार किसी सरकार ने पलायन को रोकने पर ही नहीं बल्कि रिवर्स पलायन पर सुनियोजित तरीके से काम शुरू किया है। एमएसएमई के केंद्र में पर्वतीय क्षेत्रों को रखा गया है। ग्रामीण विकास और पलायन आयोग का गठन किया गया। सीमांत तहसीलों के लिए मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना शुरू की है। राजकीय स्कूलों में वर्चुअल क्लासेज शुरू की गई हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में डाक्टरों की संख्या पहले से दोगुनी की गई। टेलीमेडिसीन और टेलीरेडियोलोजी भी फायदेमंद साबित हो रही हैं। ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य उपकेंद्रों का हैल्थ एंड वैलनैस सेंटर के रूप अग्रेडेशन कर रहे हैं। सभी 670 न्याय पंचायतों में क्लस्टर आधारित एप्रोच पर ग्रोथ सेंटर बनाए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण आर्थिकी मजबूत होगी। किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों को ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। होम स्टे की कन्सेप्ट को बहुप्रचारित किया जा रहा है। 13 डिस्ट्रिक्ट-13 डेस्टीनेशन से नए पर्यटन केंद्रों का विकास हो रहा है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 3900 जैविक क्लस्टरों में काम शुरू किया गया है। सौर ऊर्जा और पिरूल ऊर्जा नीति, ग्रामीण युवाओं की आजीविका में सहायक होगी। सड़क, रेल व एयर कनेक्टीवीटी में विस्तार किया जा रहा है। आल वेदर रोड़, भारतमाला परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना गेम चेंजर बनने जा रही हैं। एयर कनेक्टीवीटी पर विशेष जोर दिया गया है। 2022 तक सभी गांवों को सड़क से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। सौभाग्य योजना से घर-घर बिजली पहुंचा दी गई है। प्रदेश के 15.09 लाख परिवारां को ‘‘हर घर को नल से जल’’ दिलाने की योजना शुरू की है। तीन वर्षों में ये लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। जल संरक्षण और जल संवर्धन पर काफी काम शुरू किया गया है। ग्रेविटी वाली पेयजल योजनाओं पर हमारा फोकस है। हाल ही में उत्तराखण्ड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को भारत सरकार द्वारा सैद्धांतिक सहमति दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में उत्तराखण्ड ने विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय फलक पर उत्तराखण्ड अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहा है। तीन वर्षों में मिले पुरस्कार इस बात की पुष्टि करते हैं। हमारी सरकार ने राज्य में निवेश लाने के लिए पूरा होमवर्क करते हुए गम्भीरता से काम किया। राज्य गठन के बाद पहली बार बड़े स्तर पर इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया गय खुद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इसका उद्घाटन किया और स्पिरिचुएल इको जोन की कन्सेप्ट सामने रखी। पर्वतीय क्षेत्रों में निवेश के लिए पर्यटन, आयुष व वेलनेस, आईटी, सौर ऊर्जा सहित सर्विस सेक्टर पर विशेष फोकस किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्ष में हमारी सरकार ने राज्य हित को देखते हुए अनेक साहसिक निर्णय लिए हैं। देवस्थानम चारधाम बोर्ड का गठन और ट्रांसफर एक्ट सहित महत्वपूर्ण संस्थागत सुधार किए गए हैं। सुशासन और भ्रष्टाचार पर जीरो टाॅलरेंस हमारी नीति का प्रमुख आधार रहे हैं। हमने भ्रष्टाचाार और माफिया तत्वों को सत्ता के करीब भी नहीं फटकने दिया है। इन तीन वर्षों में राज्य के विकास की न सिर्फ दिशा तय हुई है बल्कि काम भी दिखने लगा है। हमने समाज के हर तबके का भी ध्यान रखा है। विकास का लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने का ईमानदारी से पूरा प्रयास किया है।
हमारे गांव फिर से समृद्धि के केंद्र बनें, इसके लिए हम दिन-रात काम कर रहे हैं। हमें आप सभी का भी मार्गदर्शन और सहयोग चाहिए। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आने वाले दो साल में उत्तराखण्ड में आप गैरसैण भावना को साकार होता देखेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में पूरा विश्व कोरोना वायरस से संघर्ष कर रहा है। उत्तराखंड को कोरोना के प्रभाव से मुक्त रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए गए हैं। कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है, बस सतर्कता बरतें। सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करें।

बच्चों ने मंगलगीत गाकर मनाया फूलदेई का त्योहार

सुख-समृद्धि का प्रतीक फूलदेई त्योहार उत्तराखंड की गढ़ कुंमाऊ संस्कृति की पहचान है। वसंत का ऋतु के आते ही बच्चों को इस त्योहार का खासा इंतजार रहता है। देहरादून में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बच्चों के साथ यह त्योहार मनाया और उनसे आशीर्वाद लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पौधरोपण भी किया। बच्चें हर घर-घर में फूलों की बारिश करते है और हर घर सुख-समृद्धि से भरपूर हो, ऐसी प्रभु से कामना करते है। इसी भावना के साथ बच्चे अपने गांवों के साथ-साथ आस-पास के गांव में जाकर घरों की दहजीज पर फूल गिराते हैं और उस घर के लिए मंगलमय कामना करते हैं।

साथ ही घर की गृहणी उनको फूल वर्षा के बदले चावल, गुड़ के साथ दक्षिणा के रूप में रुपए भी देती है। यह त्योहार आमतौर पर चैत्र पंचमी को आता है। इस दिन लोग गांवों में अपने घरों को साफ-सफाई कर लाल मिट्टी से सजाते हैं। फिर इसके बाद बच्चे इन घरों में विभिन्न प्रकार के फूलों की वर्षा कर गांव की उन्नति के गीत गाते हैं। फूलदेई त्योहार में बुरांस के फूल विशेष होते हैं। बच्चे एक दिन पहले ही जंगल जाकर बुरांस के फूल एकत्र करते हैं।
इसके साथ ही प्यूंली, हिलांश, सरसौं आदि के फूलों से सजी रिंगाल की टोकरियों को सिर पर रखकर बच्चे गीत गाते हुए आंगन-आंगन जाते हैं। फिर गांव के सार्वजनिक चैक में वसंत ऋतु के आगमन को लेकर गीत गाकर नृत्य करते हैं।

बर्फबारी और बारिश ने बढ़ाई परेशानी, ठंड लौटी

होली के दिन प्रदेश के कई इलाकों में चटख धूप खिली रही, लेकिन आज मौसम ने ऐसी करवट ली कि ठंड का अहसास हो गया। राजधानी देहरादून सहित मैदानी इलाकों में सुबह से बादल छाए रहे। वहीं, मंगलवार को कहीं-कहीं बारिश भी हुई है।
चमोली जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में आज तड़के बर्फबारी हुई और निचले क्षेत्रों में बारिश हुई। बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, रुद्रनाथ, घांघरिया के साथ ही अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने की सूचना है। फिर ठंड लौटी आई है। श्रीनगर क्षेत्र में बादल छाए हुए हैं। यहां तेज हवांए चल रही हैं।
नैनीताल हल्के बादल छाए हैं। पिथौरागढ़ में हल्के बादलों के साथ धूप खिली है। पंतनगर में बादलों के साथ सूरज की आंख मिचैली जारी हैं।

बारिश और ठंड से परेशान हो रहे लोग
अभी बारिश और ठंड लोगों को और सता सकती है। आईआईटी के वैज्ञानिकों के अनुसार हरिद्वार जिले में 12 से 14 मार्च के बीच ओलावृष्टि और गरज के साथ कुल 47 मिमी बरसात होने की संभावना है। अधिकतम तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान आठ से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। आईआईटी के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केंद्र के अनुसार अधिकतम सापेक्षिक आर्द्रता 80-90 प्रतिशत और न्यूनतम सापेक्षिक आर्द्रता 40 से 50 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है।

ओलावृष्टि और गरज के साथ बारिश की संभावना
11 मार्च को उत्तर-पश्चिम तथा 12-14 मार्च को दक्षिण-पूर्व दिशा से छह से 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। वहीं पौड़ी गढ़वाल जनपद में 12-14 मार्च के बीच कुल 38 मिमी बरसात होने की संभावना है। देहरादून जनपद में 12-14 मार्च के बीच ओलावृष्टि और गरज के साथ कुल 60 मिमी बरसात होने की संभावना है। उन्होंने सलाह दी है कि किसान 14 मार्च तक सिंचाई, कीटनाशकों के छिड़काव तथा उर्वरकों के उपयोग को रोक दें।
निचले, गहरे स्तर के खेतों से पानी की अत्यधिक मात्रा को निकालने के लिए जल निकास की उचित व्यवस्था करें। साथ ही दुधारू पशुओं को संतुलित आहार दें। ओलावृष्टि व बरसात के पूर्वानुमान को देखते हुए पशुधन को खुले में न छोड़ें।

विपिन कैंथोला के स्वागत में उमड़े भाजपा कार्यकर्ता

भारतीय जनता पार्टी कोटद्वार मंडल के कार्यकर्ताओं ने विपिन कैंथोला को प्रदेश प्रवक्ता बनाये जाने और उनके प्रथम बार कोटद्वार आने पर स्वागत किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि अब कोटद्वार का प्रतिनिधित्व भाजपा प्रदेश संगठन में भी होगा।
स्वागत कार्यक्रम में गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल ने कहा कि विपिन कैंथोला के प्रदेश प्रवक्ता बनने पर सभी कार्यकर्ता खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। भाजपा नगर अध्यक्ष सुनील गोयल ने कहा कि विपिन कैंथोला के प्रदेश प्रवक्ता बनने से सभी कार्यकर्ताओं को सम्मान मिला है इसके लिए कार्यकर्ताओं ने प्रदेश नेतृत्व का आभार भी जताया। प्रदेश प्रवक्ता बनाये जाने विपिन कैंथोला ने कहा कि संगठन ने जो विश्वास उन पर जताया है, वह उस पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन की हर कार्यकर्ता पर नजर है। जो अच्छा काम कर रहा है यह न सोचे कि उसे दायित्व नही मिला। समय आने पर कल्पना से अधिक भाजपा संगठन ही कार्यकर्ता को सम्मान देता है। इस दौरान उन्होंने सभी का आभार जताते हुए कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिले, यह भाजपा कार्यकर्ता का दायित्व है। इसके लिए सभी को अपने स्तर से प्रयास करने चाहिये।
इस अवसर पर जिला मंत्री मंजू जखमोला, नगर मंडल उपाध्यक्ष पंकज भाटिया, धर्मवीर गुसाईं, मनोज बिष्ट, अभिलाषा भारद्वाज, अनिता आर्य, लता बलूनी, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष शशी नैनवाल, मुन्ना लाल मिश्रा, सेवक राम, देवेंद्र कैंथोला, सुरेंद्र बिजलवान, अंकित शर्मा, अमिताभ अग्रवाल, कुलदीप रावत, पार्षद सौरभ नौडियाल आदि कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कुशल कार्यशैली से कैंथोला ने पाया मुकाम, बने प्रदेश प्रवक्ता

भारतीय जनता पार्टी ने मीडिया से संबंधित अहम दायित्वो की घोषणा की है। जिनमे प्रदेश की नई टीम में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता जैसे अहम पद पर युवा नेता बिपिन कैंथोला को जिम्मेदारी दी गईं। बताते चले कि बिपिन कैंथोला ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजनीतिक पारी की शुरुआत की। कई जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए उन्होंने युवा मोर्चा में जिले से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कार्य किया। युवा मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और जम्मू कश्मीर जैसे संवेदनशील प्रदेश में सह प्रभारी बनकर बिपिन कैंथोला ने अपने कुशल रणनीति का परिचय दिया।

वही भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया समन्यवक व राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी के साथ लंबे समय से जुड़े हुए है। उत्तराखंड में अनिल बलूनी के बेहद करीबीयो में बिपिन की गिनती होती है। ऐसा देखा जाता है कि बलूनी की गैरमौजूदगी में उनके जनहित कार्यो में सक्रिय रहते हैं।

उत्तराखंड में जश्न का माहौल, मुख्यमंत्री के कार्यो की हो रही प्रशंसा

गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने के बाद मुख्यमंत्री ने एक ओर मास्टर स्ट्रोक से विपक्ष को धराशायी कर दिया। सरकार ने सत्र को आगे बढ़ाते हुए भराड़ीसैंण में 26 मार्च को बजट पास करवाने का निर्णय लिया है।
कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में सात मार्च तक सदन को जारी रखने का फैसला लिया गया, लेकिन इस दौरान बजट पर सामान्य चर्चा सात मार्च को ही होगी। बजट पास कराने के लिए इसी सत्र में सदन 25 से 27 मार्च तक भराड़ीसैंण में ही चलेगा। 25 मार्च को विभागों के बजट पर चर्चा होगी। विपक्ष के कटौती प्रस्ताव इसी दिन स्वीकार किए जाएंगे। 26 मार्च को विभागों के बजट पर चर्चा होने के बाद उन्हें स्वीकृत किया जाएगा।
इससे पहले कार्यमंत्रणा समिति ने सात मार्च तक बजट पारित करने का फैसला किया था। इस पर विपक्ष ने खासा हो हल्ला मचाया था और बजट सत्र बढ़ाने की मांग की थी। इसके बाद इस पर भी विचार हुआ कि होली के बाद दो दिन का सत्र देहरादून में आयोजित कर लिया जाए। लेकिन इसमें तकनीकी अड़चन रही। सरकार बजट पास कराए बिना सत्र को समाप्त नहीं कर सकती थी। देहरादून में बजट पास कराने का मतलब होता कि सरकार को भराड़ीसैंण का सत्र समाप्त करना पड़ता और देहरादून में अलग से सत्र आयोजित करना पड़ता। कार्य संचालन नियमावली में स्थान और समय दोनों को लेकर सत्र की घोषणा की व्यवस्था है।

भराड़ीसैंण में जश्न का माहौल
मौसम की आंखमिचैली के बीच सरकार पर ग्रीष्मकालीन राजधानी का जश्न हावी रहा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल समेत भाजपा विधायकों ने जमकर गुलाल खेला। ढोल व दमाऊ की थाप पर जमकर नाच किया। इस दौरान स्थानीय लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। वहीं, गैरसैंण के आसपास की महिलाओं ने झोड़ा चांचरी नृत्य से अपनी खुशी का इजहार किया। तो विधायकों ने स्थानीय लोगों के साथ ढोल की थाप पर पांव थिरकाए। इन सब से दूर रहे विपक्ष ने सदन में प्रश्न काल नहीं चलने दिया और सरकार को नियमों व परंपराओं में बांधे रखने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार देर शाम ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा की थी, जिसका असर पूरे उत्तराखंड में देखने को मिल रहा है। आंदोलनकारियों की गैर मौजूदगी में जगह-जगह चेकिंग से भी लोगों को रियायत मिली। भराड़ीसैंण के विधानमंडल भवन के सामने ढोल दमाऊ की थाप के बीच जश्न का माहौल बन गया। गैरसैंण के आसपास गांव गवाड़ तल्ला, सिलंगी, सिमटी समेत अन्य गांवों से आई महिलाएं जश्न में शामिल हुई।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत यहां पहुंचे तो जोश और उत्साह बढ़ गया। महिलाओं ने मुख्यमंत्री व भाजपा विधायकों का स्वागत किया। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत का भी इसी तरह स्वागत हुआ। उत्साह का आलम ये रहा कि नेता फूल मालाओं से लदे सदन में पहुंच गए।
इसके उलट विपक्ष खामोश, जश्न से दूर रहते हुए बैकफुट पर दिखाई दिया।

सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेजें थपथपा कर किया सम्मान
सत्र शुरू होने के कुछ देर बाद नेता सदन त्रिवेंद्र सिंह रावत सदन में पहुंचे तो सत्ता पक्ष के विधायकों ने मेजें थपथपा कर उनका सम्मान किया। सामान्य रूप से नेता सदन के पहुंचने को सत्ता पक्ष के विधायक खामोशी से स्वीकार करते रहे हैं। मुख्यमंत्री भी कुछ समय तक ही सदन में रहे।

जनभावनाओं का मुख्यमंत्री ने किया सम्मान, गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित

उत्तराखंड बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक बड़ी घोषणा की। लंबे समय से चले आ रहे कयासों के बीच मुख्यमंत्री ने गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक ही मास्टर स्ट्रोक से विपक्ष को चारो खाने चित कर दिया। इस घोषणा के साथ ही प्रदेश में अब दो राजधानियां हो जाएंगी।
मुख्यमंत्री के इस कार्ड की भनक सरकार ने भराड़ीसैंण में पहुंचे विपक्ष को और अन्य आंदोलनकारी संगठनों तक को नहीं लगने दी। बीते दिनों ही कैबिनेट में इस पर चर्चा हुई थी, लेकिन मंत्रियों को साफ हिदायत दे दी गई थी कि किसी को इसकी भनक नहीं लगने दी जाए। सदन में घोषणा होने के साथ ही गैरसैंण में जश्न का माहौल शुरू हो गया। सत्ता पक्ष के विधायक लोगों से फूल मालाएं स्वीकार करते हुए दिखाई दिए।
वहीं, गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का भाजपा का यह चुनावी संकल्प था। उसने चुनाव संकल्प पत्र में इस मुद्दे को शामिल किया था। आम तौर पर सत्तारूढ़ दल के लिए चैथा साल चुनावी घोषणाओं को पूरा करने का साल होता है। प्रदेश में भाजपा सरकार तीन साल पूरे होने जा रहे हैं। इससे पहले ही सरकार ने यह एतिहासिक फैसला लिया है।
उत्तराखंड में राजधानी का मुद्दा जनभावनाओं से जुड़ा है। राज्य गठन के बाद से ही प्रदेश में पहाड़ की राजधानी पहाड़ में बनाए जाने को लेकर आवाज उठती रही हैं। राज्य आंदोलन के समय से ही गैरसैंण को जनाकांक्षाओं की राजधानी का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि कांग्रेस और भाजपा की सरकारें गैरसैंण को खारिज नहीं कर पाई।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जब गैरसैंण में विधानमंडल भवन बनाया तब उन पर भी राजधानी घोषित करने का दबाव बना था। लेकिन उन्होंने घोषणा नहीं की। राजनीतिक आंदोलन से जुड़ा एक वर्ग गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की वकालत करता है।

प्रदेश की 70 फीसदी जनता गैरसैंण में स्थायी राजधानी चाहती है। राज्य गठन से पहले यूपी की मुलायम सरकार की गठित कौशिक समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा था। वही उक्रांद ने 27 साल पहले गैरसैंण में राजधानी का शिलान्यास किया था।
बजट सत्र शुरू होने से पहले ही बदरीनाथ और कर्णप्रयाग के विधायकों ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने के संकेत दे दिए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया था कि पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में इस संकल्प को शामिल किया है। सरकार गठन के तीन साल हो चुके हैं। अब घोषणा का समय आ गया है। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया था।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने का संकल्प लिया था। इस संकल्प को आज पूरा कर दिया गया है। समय के साथ गैरसैंण में बुनियादी ढांचे का विकास होगा और ये राजधानी के रूप में विकसित होगी।
बदरीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री और भाजपा संगठन का आभारी हूं कि उन्होंने पहाड़ की जनाकांक्षाओं के प्रतीक गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया है। इससे पहाड़ के विकास को मजबूती मिलेगी।
उधर, गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने पर भाजपाइयों ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया। बुधवार को भाजपा महानगर कार्यालय में मेयर सुनील उनियाल गामा, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सुशीला बलूनी समेत पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई।
वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सुशीला बलूनी ने कहा कि सरकार का निर्णय बेहद सराहनीय है। सरकार का यह निर्णय शहीद आंदोलनकारियों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि है। मेयर सुनील उनियाल गामा ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर प्रदेशवासियों को बड़ा तोहफा दिया है। भाजपा ने इसे अपने चुनावी घोषणापत्र में भी शामिल किया था। जिसे आज पूरा कर लिया है।

कुंभ की व्यवस्थाएं अलौकिक और दिव्य बनाने की तैयारी

वर्ष 2021 में आयोजित हो रहे हरिद्वार महाकुंभ को प्रदेश सरकार भव्य और ग्रीन कुंभ परिकल्पना के आधार पर आयोजित करेगी। इस परिकल्पना को साकार करने के लिए सरकार ने बजट में 1205 करोड़ रुपये खर्च करना तय किया है। महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 450 करोड़ के स्थायी और एक हजार रुपये के अस्थायी कार्य किए जाएंगे।
सरकार की कोशिश है कि महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालु चारधाम की यात्रा भी कर पाए। इसके लिए चारधाम और ऑलवेदर रोड को महाकुंभ से पहले पूरा करने का सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है। कुंभ के लिए सरकार अलग से सुरक्षा व्यवस्था के तहत 60.12 करोड़ रुपये भी खर्च करेगी।
वहीं, महाकुंभ के आयोजन के लिए सरकार ने केंद्र से भी पांच हजार करोड़ की अलग से मांग की है। अभी तक सरकार ने कुंभ के कार्यों के लिए 250 करोड़ का बजट जारी किया है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के मुताबिक महाकुंभ के लिए केंद्र से सहायता जल्द मिलने की उम्मीद है।

सरकार का अनुमान है कि महाकुंभ में करीब 10 करोड़ श्रद्धालु आएंगे। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से सरकार ने भीड़ नियंत्रण पर भी फोकस किया है। सुरक्षा व्यवस्था पर 60 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी। प्रदेश सरकार ने बजट में जनवरी 2021 में प्रस्तावित कुंभ मेले के लिए पुलिस विभाग के लिए 60.12 करोड़ का प्रावधान किया है। हालांकि कुंभ मेले को छोड़कर पुलिस आधुनिकीकरण और जेलों के उद्धार को कुल 174.33 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे पुलिस महकमे में थाना और नई चैकियों के भवनों के निर्माण होने की उम्मीद जगी है।
सरकार ने बजट में प्रस्तावित कुंभ मेले में बेहतर व्यवस्थाओं और पुलिस आधुनिकीकरण के संकल्प को दोहराया है। कहा गया कि जनसहभागिता से शांति बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और पर्यटन गतिविधियों को सुचारु बनाने को पुलिस विभाग का निरंतर आधुनिकीकरण किया जा रहा है।