चमोली में चार किमी अंदर तक की चीनी सैनिकों ने घुसपैठ

चमोली में चीनी सैनिकों के घुसने की जानकारी मिली हैं। हालांकि चमोली डीएम ने इस बार से इंकार किया है। उनका कहना है कि इस बारे में सेना ही बता सकती है। जानकारी के मुताबिक बाड़ाहोती क्षेत्र में चीनी सैनिक चार किमी अंदर तक घुस गये है।

विदित हो कि इससे पहले भी चीन सैनिकों ने 26 जुलाई को भारतीय सीमा में घुसपैठ की थी। चमोली के बाड़ाहोती क्षेत्र में करीब डेढ़ सौ से दो सौ चीनी सैनिक भारतीय सीमा में घुस आए थे। आइटीबीपी की अग्रिम चौकी रिमखिम पर तैनात जवानों से नियमित गश्त के दौरान उनका सामना हुआ था। आइटीबीपी जवानों के देखते ही चीनी सैनिकों का दल लौट गया था।

जोशीमठ से 105 किलोमीटर दूर चमोली में चीन से जुड़ी भारतीय सीमा घुसपैठ की दृष्टि से संवेदनशील मानी जाती है। विशेषकर 80 वर्ग किलोमीटर में फैला बाड़ाहोती चारागाह। यहां स्थानीय लोग अपने मवेश्यिों को लेकर आते हैं। जून के दूसरे सप्ताह में इस क्षेत्र में दो चीनी हेलीकॉप्टर देखे गए थे। घटना के बाद प्रशासन का एक दल क्षेत्र का जायजा लेने भी गया था। इसके बाद जुलाई माह 18 जुलाई को प्रशासन का 17 सदस्यीय दल सीमावर्ती क्षेत्र का जायजा लेने रवाना हुआ था, लेकिन भारी बारिश के कारण रास्ते क्षतिग्रस्त होने से टीम 18 जुलाई को वापस आ गई थी। गौरतलब है कि वर्ष में चार बार प्रशासन की टीम बाड़ाहोती का जायजा लेने जाती है।

इससे पहले वर्ष 2014 में भी यहां चीन का विमान देखा गया था। इसके बाद जुलाई 2016 में क्षेत्र के निरीक्षण को गई राजस्व टीम से चीनी सेना का सामना हुआ था। सैनिकों ने टीम को लौट जाने का इशारा भी किया। इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भी भेजी गई थी। वर्ष 2015 में चीनी सैनिकों द्वारा चरवाहों के खाद्यान्न को नष्ट करने की घटना भी सामने आई थी।

हाईकोर्ट के इस फैसले से सांसद आदर्श गांव में बसे पांच सौ परिवारों को खतरा

नैनीताल हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की खंड पीठ ने ऊधमसिंह नगर की ग्राम पंचायत सरपुड़ा के बग्गाचौवन में रिजर्व फॉरेस्ट से चार माह में अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किये है। न्यायालय के इस आदेश के बाद सांसद आदर्श गांव बग्गाचौवन में बसे करीब पांच सौ परिवारों पर बेदखली का खतरा पैदा हो गया है।

शुक्रवार को न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की खंडपीठ ने ऊधमसिंह नगर के खटीमा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत सरपुड़ा निवासी होशियार चंद की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में होशियार चंद ने कहा है कि उनकी ग्राम पंचायत में बग्गाचौवन को मिला दिया गया। सरपुड़ा ग्राम पंचायत की आबादी 2116 तथा मतदाता 1365 हैं। 50 फीसद आबादी अनुसूचित जाति के लोगों की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत सरपुड़ा के विकास कार्यों व जनसुविधाएं बग्गाचौवन के लोगों को दी जा रही हैं। जिससे उनकी ग्राम पंचायत का विकास थम गया है।

हाईकोर्ट ने ऊधमसिंह नगर जिले की ग्राम पंचायत सरपुड़ा के बग्गाचौवन में रिजर्व फॉरेस्ट से चार माह में अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के इस आदेश से सांसद आदर्श गांव बग्गाचौवन में बसे करीब पांच सौ परिवारों पर बेदखली का खतरा पैदा हो गया है। गांव को सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने सांसद आदर्श योजना के अंतर्गत गोद लिया है।

शुक्रवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की खंडपीठ ने ऊधमसिंह नगर के खटीमा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत सरपुड़ा निवासी होशियार चंद की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में होशियार चंद ने कहा है कि उनकी ग्राम पंचायत में बग्गाचौवन को मिला दिया गया। सरपुड़ा ग्राम पंचायत की आबादी 2116 तथा मतदाता 1365 हैं। 50 फीसद आबादी अनुसूचित जाति के लोगों की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत सरपुड़ा के विकास कार्यों व जनसुविधाएं बग्गाचौवन के लोगों को दी जा रही हैं। जिससे उनकी ग्राम पंचायत का विकास थम गया है।

याचिका में कहा गया है कि इस वजह से मूल ग्रामीण सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। सड़क, खड़ंजा, शौचालय, स्कूल, वृद्धावस्था, विधवा पेंशन, राशन कार्ड आदि के लिए बजट सरपुड़ा के लिए मंजूर होता है, जबकि विकास बग्गाचौवन का होता है, लिहाजा बग्गाचौवन को ग्राम पंचायत सरपुड़ा से अलग कर दिया जाए। यहां के पांच सौ परिवारों ने रिजर्व फॉरेस्ट की 517 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा किया हुआ है। यह राजस्व भूमि भी नहीं है। खंडपीठ ने चार माह के भीतर रिजर्व फॉरेस्ट से अतिक्रमण हटाने के आदेश पारित किए।

ग्रामीणों की एकता ने दिखाया रंग, बुजुर्ग को ले गये अस्पताल

यमकेश्वर प्रखंड के कसाण गांव में स्थिति इतनी दयनीय है कि यहां के स्थानीय ग्रामीण सड़क न होने के कारण किसी बीमार व्यक्ति को कुर्सी की पालकी बनाकर ले जाने को मजबूर है। पिछले एक दशक से यहां सड़क की समस्या बनी हुयी है। मगर, यहां सड़क का निर्माण न हो सका।

यमकेश्वर प्रखंड के डांडामंडल क्षेत्र में स्थित कसान गांव 11 वर्ष पूर्ण तब सुर्खियों में आया था जब यहां बादल फटने से कुछ घर जमींदोज हो गए थे। 14 अगस्त 2007 की रात यहां आई इस आपदा में 4 लोगों की मौत हो गई थी। इस गांव की पीड़ा का कोई हल नहीं निकल पाया है।

आपदा पीड़ित होने के बावजूद प्रभावित लोगों का विस्थापन नहीं हो पाया। जितने भी लोग यहां रह रहे हैं वह विपरीत हालत में भी गांव की अवधारणा को पूरा करने के साथ पलायन जैसी समस्या को चुनौती दे रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार गांव से मुख्य सड़क करीब 4 किलोमीटर दूर है। यहां तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है। किसी तरह से लोग आवागमन बनाए रखे हैं। विकट हालत तब हो जाते हैं जब गांव में कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाए। स्थानीय ग्रामीण सोहन ने बताया कि सोमवार को स्थानीय नागरिक देवेंद्र सिंह राणा की तबीयत खराब हो गई। आसपास क्षेत्र में पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। बीमार को चिकित्सालय तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी।

गांव वालों ने हिम्मत दिखाई कुर्सी में डंडे बांधकर उसे पालकी बनाया गया। इस कुर्सी में बीमार को बिठाकर किसी तरीके से पहाड़ी इलाके के ऊंचे-नीचे 4 किलोमीटर लंबे सफर किया गया। मुख्य मार्ग पर पहुंचने के बाद निजी वाहन के जरिए बीमार को ऋषिकेश चिकित्सालय लाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि जो लोग गांव में बसे हैं वह सड़क की मांग कर रहे हैं। मगर जो लोग गांव छोड़कर दिल्ली और अन्य जगह बस गए हैं। उनमें से कुछ लोग सड़क का यह कहकर विरोध कर रहे हैं कि सड़क हमारे खेतों से होकर नहीं जानी चाहिए।

सीएम ने देश का पहला जैव ईंधन विमान को किया फ्लैग ऑफ

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देश के पहले जैव ईंधन से उड़ने वाले स्पाइस जेट विमान का फ्लैग ऑफ जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर किया। इसके बाद विमान ने दिल्ली के लिये अपनी उड़ान भरी।

यह बायोफ्यूल जैट्रोफा के तेल एवं हाइड्रोजन के मिश्रण से बनाया गया है। इसके लिए आईआईपी में प्लांट लगाया गया है। संस्थान में बायोजेट फ्यूल तैयार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ से बायोफ्यूल डेवलपमेंट अथॉरिटी के जरिये जैट्रोफा का बीज खरीदा गया है। इससे पूर्व जैव ईंधन से चलने वाले इस स्पाइस जेट का परीक्षण भी किया था। बताया गया कि अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में कमर्शियल विमान पहले से ही जैव ईंधन से उड़ान भर चुके हैं।

जैव ईंधन से उड़ान भरने वाले स्पाइस जेट के फ्लैग ऑफ के अवसर पर महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्या, आईआईपी के निदेशक अंजन कुमार रे, स्पाइस जेट से जीपी गुप्ता, कैप्टन सतीश चन्द्र पाण्डे व आईआईपी के वैज्ञानिक उपस्थित थे।

आखिर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह क्यों भड़क उठे? जाने क्या है सच

भोपालपानी बड़ासी पुल निर्माण कार्य को देखकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह को गुस्सा आ गया। उन्होंने निर्माणाधीन पुल की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुये विभागीय अधिकारियों को फटकार लगाई। साथ ही लोक निर्माण विभाग को तत्काल जांच के आदेश दिए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को देहरादून में रायपुर – थानौ मार्ग के मध्य निर्माणधीन सौंडा-सरौली, बडासी भोपालपानी (मत्स्य पालन) विभाग के समीप बन रहे पुल का काफी मौके पर स्थलीय निरीक्षण किया। भोपालपानी के पुल की सड़क खस्ता हालत के साथ पुल की दीवारें दीवारों में पड़ी दरारों को देखकर गुस्से में नजर आए। उन्होंने मौके पर मौजूद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों व कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों को कड़ी फटकार लगाई व प्रमुख अभियन्ता लोक निर्माण विभाग को मामले की तत्काल जांच के आदेश दिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि क्या उनके ऊपर निर्माण कार्य को शीघ्र समाप्त करने का कोई दवाब था। इस प्रकार की घटनाओं में संलिप्त अधिकारी, कार्मिक व ठेकेदार सख्त कार्यवाही से बच नही सकते। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यो में किसी भी प्रकार की लापरवाही व गुणवता में गिरावट बर्दाश्त नही की जाएगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस दौरान उपस्थित स्थानीय जनप्रतिनिधियों व लोगो से भी पुल व सड़कों की गुणवत्ता से संबंधित स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। मालूम चला कि पुल के ऊपर सड़क के घटिया निर्माण कार्य को छिपाने के लिए कार्यदाई संस्था के ठेकेदार द्वारा जेसीबी से सड़क की खुदाई कर दी गई थी। जिसको देखकर मुख्यमंत्री भी गुस्से में नजर आए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने रायपुर-थानो मार्ग पर सौंडा सरौली पुल का भी विस्तृत स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यो की अद्यतन जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों को सौंडा सरौली पुल को समय पूरा करने तथा निर्माण कार्यो की गुणवता बनाए रखने के निर्देश भी दिए। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि उक्त पुल का निर्माण कार्य आगामी 30 सितम्बर तक पूरा कर लिया जाएगा।

विश्व के टॉप-10 में दून का चिड़ियाघर

देहरादून का चिड़ियाघर न सिर्फ देश, बल्कि विश्वभर में खूब चमक बिखेर रहा है। सोशल साइट फेसबुक के ऑफीशियल पेज पर सक्रिय दुनिया के 181 चिड़ियाघरों की रैंकिंग में उसे टॉप टेन में जगह मिली है, जबकि देश में वह पहले स्थान पर है। नेचर पार्क की तर्ज पर विकसित हो रहे देहरादून जू ने यह अहम उपलब्धि महज 45 दिन के अंतराल में हासिल की है।

यूं तो दुनियाभर में चिड़ियाघरों की संख्या हजारों में है, मगर फेसबुक के ऑफीशियल पेज पर 181 ही सक्रिय हैं। इनमें इसी साल पांच जून को शामिल हुआ देहरादून जू भी है। देहरादून जू के निदेशक पीके पात्रो के अनुसार फेसबुक के लाइक एलीजर सॉफ्टवेयर के जरिये यह रैंकिंग तय की जाती है। इसमें सभी चिड़ियाघर अपनी गतिविधियां इस पेज पर शेयर करते हैं। फिर लाइक, पोस्ट, कमेंट और प्रत्येक जू पर लोगों के ठहराव जैसे बिंदुओं के आधार पर सॉफ्टवेयर के जरिये इनकी रैंकिंग तय की जाती है, जो लाइक एलीजर पर देखी जा सकती है। इस रैंकिंग के ताजा आंकड़ों ने देहरादून जू को भी खिलखिलाने का मौका दे दिया। यह बताता है कि न सिर्फ देश, बल्कि विदेशों में भी देहरादून जू को लोग खासा पसंद कर रहे हैं।

देहरादून में मसूरी मार्ग पर मालसी में वर्ष 1976 में 25 हेक्टेयर क्षेत्र में वन चेतना केंद्र की स्थापना की गई। बाद में वहां हिरणों की कुछ प्रजातियां रखी गईं और नाम दिया गया मालसी डीयर पार्क। धीरे-धीरे यहां रेसक्यू किए जाने वाले पशु-पक्षी भी रखे जाने लगे और फिर शुरू हुई इसके उच्चीकरण की कवायद। 2012 में इस पार्क को मिनी जू का दर्जा मिला और 2015 में यह देहरादून जू बना।

सालभर में साढ़े छह लाख पर्यटक
नेचर पार्क की तर्ज पर विकसित हो रहे देहरादून जू में 350 पशु-पक्षी मौजूद हैं। इसके साथ ही वहां एक्वेरियम, फन पार्क कैक्टस पार्क सैलानियों के आकर्षण का केंद्र हैं। देहरादून जू के निदेशक पीके पात्रो के मुताबिक सैलानियों की संख्या हर साल बढ़ रही है। 2014-15 में यहां 2.10 लाख पर्यटक आए, जबकि 2015-16 में 3.20 लाख, 2016-17 में 4.30 लाख और 2017-18 में 6.50 लाख।

जल्द सुनाई देगी टाइगर की दहाड़
देहरादून जू में जल्द ही टाइगर की दहाड़ सुनाई देगी। इसके अलावा भालू, हाइना, घड़ियाल समेत अन्य वन्यजीव भी इसकी शोभा बढ़ाएंगे। जू के निदेशक पात्रो के मुताबिक इन जानवरों को देश के विभिन्न चिड़ियाघरों से लाया जाएगा। इस संबंध में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को प्रस्ताव भेजा गया है।

पूर्व विधायक शहजाद की बसपा में वापसी के कुछ दिन बाद ही हुआ निष्कासन, जानिए वजह क्या रही?

पूर्व विधायक मोहम्मद शहजाद को कुछ दिन पूर्व बसपा ने अपने पाले में ले लिया था। फिर आखिर ऐसा भी क्या हुआ जो उन्हें कुछ दिन के भीतर ही पार्टी से निष्कासित होना पड़ा। कारण मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत रहे। जी हां, दरअसल पूर्व विधायक ने अपने बेटे की शादी में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को जो बुलाया था। बस पार्टी को यही बात नागवर गुजरी और मोहम्मद शहजाद को पार्टी से निष्कासित कर दिया।

रविवार को शिवालिकनगर स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में प्रदेश महासचिव नत्थू सिंह, सतीश कुमार सिंह, सूरजमल व जिलाध्यक्ष राजेश कुमार ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक शहजाद ने पार्टी का भरोसा तोड़ा है।

बसपा पदाधिकारियों ने कहा कि पूर्व विधायक ने पार्टी को गुमराह करने का काम किया है। वे भाजपा के संपर्क में बने रहे। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती से पूर्व की गलतियों की माफी मांगी थी, जिसके बाद उन्हें पार्टी में शामिल किया गया था। पूर्व विधायक को चार साल में तीसरी बार निष्कासित करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक की अभी भी भाजपा से नजदीकी है।

उन्होंने कहा कि शहजाद ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनके सरकार के सहयोगियों को अपने यहां पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत बुलाया। यह पार्टी के साथ विश्वासघात है। वे पार्टी को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। इसे नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है। इस दौरान पूर्व विधायक हरिदास भी मौजूद रहे।

अपने निष्कासन के सवाल पर पूर्व विधायक मोहम्मद शहजाद ने कहा कि उन्होंने कोई ऐसा कार्य नहीं किया जो बसपा के हितों के विपरीत हो। वे 25 जून को बसपा में फिर से शामिल हुए थे। इस बीच कौन सा चुनाव हुआ, जिसमें उन्होंने पार्टी के विपरीत काम किया है, यह बसपा बताए। उन्होंने कहा कि जल्द ही वे प्रेसवार्ता कर आरोपों का जवाब देंगे।

मनोरंजन से भरपूर रेडियो चैनल उत्तराखंड में हुआ लांच

रेड एफएम 93.5 रेडियो चैनल का शुभारंभ मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किया। यह रेडियो चैनल राज्य का पहला रेडियो चैनल है। यह रेडियो चैनल राज्य में 24 घंटे लोगों को मनोरंजन प्रदान करेगा। साथ ही कई सामाजिक मुद्दों पर भी प्रकाश डालेगा।

देहरादून के कौलागढ़ रोड स्थित साउथ एशिया एफएम लिमिटेड के कार्यालय से रेड एफएम 93.5 रेडियो चैनल का बुधवार को शुभारंभ हो गया। मुख्यमंत्री ने राज्य के पहले इस निजी रेडियो चैनल का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने रेडियो चैनल की टीम को बधाई व शुभकामना देते हुए कहा कि रेड एफएम 93.5 का उत्तराखण्ड व देहरादून में पहला रेडियो स्टेशन है।

उन्होंने उम्मीद जतायी कि रेड एफएम 93.5 मनोरंजन के साथ-साथ, विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सामाजिक चेतना लाने में अहम भूमिका निभायेगा। साथ ही राज्य में जनकल्याणकारी योजनाओं व नीतियों को लोगों तक पहुंचाने में कारगार सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय स्तर पर एफएम रेडियो चैनल से उत्तराखण्ड की रमणीय, सौन्दर्य, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक विशेषताएं और अधिक उजागर होंगी। रेडियो चैनल की शुरूआत से राज्य के ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं, जो रोचक तरीके से रेडियो पर प्रस्तुतिकरण दे सकते हैं, के लिए नये अवसर मिलेंगे।

विदित हो कि इस रेडियो स्टेशनक की फ्रीक्वेंसी 48 किलोमीटर तक की रहेगी। शुरूआती दौर में देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, मंसूरी और विकासनगर के अलावा कई अन्य शहरों को इसका लाभ मिलेगा। यह रेडियों चैनल पांच आरजे की टीम वाला है। जिसे लीड आरजे काव्य करेंगे।

22 जुलाई को ढाई लाख पौधे रोपने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मिशन रिस्पना से ऋषिपर्णा के लिये स्थानीय लोगों से जनसहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि इसी माह 22 जुलाई के दिन रिस्पना के उद्गम से मोथरोवाला तक एक ही दिन में 2.5 लाख से अधिक अनेक प्रजाति जैसे फलदार वृक्ष, चारा प्रजाति के व जल संरक्षण करने वाले पौधे रोपे जाएंगे।

22 जुलाई को होने वाले पौधरोपण, सामाजिक संगठनों, संस्थाओं व जन सहयोग से किये जायेंगे। कोसी नदी पर 1.5 लाख से अधिक पौधे लगाये जायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारम्भिक चरण में रिस्पना एवं कोसी नदी को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा गया। इसके बाद अन्य नदियों को भी पुनर्जीवित किया जायेगा। आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए जल संरक्षण की दिशा में विशेष प्रयासों की जरूरत है। इसके लिए सरकारी संस्थानों में रेन वाटर हॉर्वेस्टिंग की व्यवस्था की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि जो लोग 22 जुलाई को रिस्पना नदी पर पौधरोपण नहीं कर पायेंगे व लोग ‘‘मेरा वृक्ष मेरी याद’’ के भाव से अपने घरों या उसके आसपास एक पौधा अवश्य लगाएं। जल संरक्षण के लिए पौधरोपण करना जरूरी है। हमें जो जल स्रोत सूख गये हैं, उन्हें पुनर्जीवित करना होगा। देहरादून को पूर्ण ग्रेविटी का पानी उपलब्ध कराने के लिए मार्च 2020 तक सौंग बांध बनाने का लक्ष्य रखा गया है। जून 2019 तक सूर्यधार जल विद्युत परियोजना को पूर्ण करने का प्रयास किया जायेगा।

लोक गायिका कबूतरी देवी को नहीं मिल सका हैलीकॉप्टर, हो गयी मौत

उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक गायिका कबूतरी देवी का शनिवार को समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण निधन हो गया। निधन के वक्त पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में भर्ती थी और उन्हें देहरादून में इलाज के लिये हैलीकॉप्टर से ले जाने का इंतजार किया जाता रहा। मगर, हैलीकॉप्टर की सुविधा नहीं मिल पाने से उनका निधन हो गया।

पिथौरागढ़ जिले के क्वीतड़ गांव की रहने वाली कबूतरी देवी प्रदेश की जानी मानी लोक गायिका थीं। गायन की कई विधाओं में माहिर लोक गायिका राज्य की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन देश भर में कर चुकी हैं। 70 वर्ष की हो चुकी कबूतरी देवी का स्वास्थ शुक्रवार को अचानक खराब हो गया। परिजन उन्हें जिला चिकित्सालय लाए। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एसएस कुंवर ने उनके स्वास्थ की जांच की। जांच के बाद उन्होंने बताया कि कबूतरी देवी का ब्लड प्रेशर कम है और उनका हॉर्ट कमजोर हो रहा है।

उपचार के बाद हालत में हल्का सुधार होने के बाद उन्हें हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया है। इस दौरान नगर के तमाम लोगों ने जिला चिकित्सालय पहुंचकर उनका हालचाल जाना। परिजन उन्हें हेलीकॉप्टर से देहरादून ले जाने का प्रयास कर रहे थे। शक्रवार सायं उन्हें हैलीकॉप्टर से देहरादून ले जाना था। शाम को हैलीकॉप्टर नही आया। शनिवार सुबह भी हेलीकॉप्टर नहीं पहुंचा और उनकी अस्पताल में ही मौत हो गई।

शनिवार सुबह छह बजे कबूतरी देवी को देहरादून ले जाने के लिए जिला अस्पताल से चार किमी दूर नैनीसैनी हवाई पट्टी पहुंचाया गया। जहां पर लगभग तीन घंटे प्रतीक्षा करने के बाद भी हेलीकॉप्टर नही पहुंचा। इस बीच कबूतरी देवी की तबीयत खराब हो गई और उन्हें वापस जिला अस्पताल लाया गया। जहां आईसीयू में रखा गया। बाद में चिकित्सको ने उनका परीक्षण करने के बाद मृत घोषित कर दिया।

सूचना मिलते ही लोग अस्पताल में जुटने लगे है। प्रशासन की ओर से एसडीएम नायब तहसीलदार पहुंचे। वहीं, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। लोगों का कहना था कि यदि समय रहते हेलीकॉप्टर की व्यवस्था हो जाती तो कबूतरी देवी की जान बच सकती थी।