आपदा से निपटने की तैयारियों को लेकर सीएम ने की समीक्षा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत राज्य में आपदा से निपटने को लेकर सचेत नजर आ रहे हे। इसलिये समय-समय पर जिलों के जिलाधिकारियों से आपदा को लेकर तैयारियों की समीक्षा कर रहे है। मंगलवार को भी सीएम ने समीक्षा बैठक ली। वीडियों कान्फें्रसिंग के माध्यम से उन्होंने आपदा की तैयारियों की समीक्षा ली। उन्होंने कहा कि आपदा के निपटने में धन की कमी नहीं आनी चाहिए। उन्होंने आपदा प्रबंधन संबधी प्रशिक्षण सुनिश्चित कराने के सुझाव जिलाधिकारियों को दिए।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से विस्तृत जानकारी लेते हुये कहा कि प्रशासन को किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार रहना होगा। सभी आवश्यक प्रबंध पहले ही सुनिश्चित कर लिए जाये। आकस्मिक परिस्थितियों में कम्यूनिकेशन टूटना नहीं चाहिए। रेस्पान्स टाईम सबसे महत्वपूर्ण है। जल्द से जल्द घटना स्थल तक पहुंचना और प्रभावितों को राहत उपलब्ध करवाने की व्यवस्था हो। चिन्हित आश्रय स्थलों पर भोजन, पेयजल, कैरोसीन, दवाईयां व अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था सुनिश्चित हो। राशन की क्वालिटी समय-समय पर चौक कर ली जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अर्धसैन्य बलों के साथ भी समन्वय स्थापित किया जाए। सेना से भी आपदा की स्थिति में पूरा सहयोग मिलेगा। इस संबंध में सेना प्रमुख से उनकी बात हुई है। प्रचार माध्यमों से बाहर से आने वाले पर्यटकों को आगाह किया जाए कि वे नदियों के समीप न जाएं। कन्ट्रोल रूम 24 घंटे संचालित हों। मुख्यमंत्री ने ट्रैफिक प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

बैठक में सभी जिलाधिकारियों द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों में वैकल्पिक मार्ग चिन्हित किए गए हैं। वर्षा से बाधित होने वाले मार्गों को कम से कम समय में खोला जा सके, इसके लिए जेसीबी, क्रेन व मानव संसाधनों को संवेदनशील स्थानों पर पहले से ही तैनात किया जा रहा है। जगह-जगह बनाए जाने वाले आश्रय स्थलों पर भोजन, पेयजल, कैरोसीन, दवाईयां व अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों व कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। मॉक ड्रिल भी समस-समय पर आयोजित की जाती है।

ऋषिकेश में खुला देश का पहला सैक्स सीमन केंद्र

ऋषिकेश में अतिहिमीकृत वीर्य उत्पादन केंद्र का शिलान्यास शनिवार को हो गया। राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत देश का पहला सैक्स सोर्टेड सीमन उत्पादन प्रयोगशाला का शिलान्यास केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किया। इस प्रयोगशाला के द्वारा शर्तिया बछिया उत्पादन हो सकेगा। यानी कि बछिया पैदा करने की तकनीक विकसित हो सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन देशी नस्ल के गौ वंश का संरक्षण कर उनकी दुग्ध उत्पादकता को बढ़ाना है। ऋषिकेश में स्थापित की जा रही सीमन प्रयोगशाला की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पशुपालन के माध्यम से किसानों की आय वृद्धि के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। राज्य सरकार का प्रयास है कि वर्ष 2021 तक ऐसी व्यवस्था कर ली जाए जिससे हमारे गौवंश सड़कों पर आवारा न घूमें बल्कि किसानों की आजीविका के साथी बनें। बद्री नस्ल की गायों की दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने में कुछ सफलता प्राप्त हुई है। इसे और अधिक बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर का कन्वेंशन सेंटर स्थापित किया जाएगा। उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में लाने के गम्भीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। पीएमजीएसवाई में राज्य में लक्ष्य से 200 किमी अधिक सड़क का निर्माण किया गया है। पर्वतीय गर्वमेंट ई-मार्केट व बेस्ट फिल्म फ्रेंडली राज्य के रूप में भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया गया है। दुर्गम क्षेत्रों में इंटरनेट की उपलब्धता के लिए एयरोस्टेट बैलून का सफल परीक्षण किया गया है। उत्तराखण्ड पहला राज्य है जो इस तकनीक का उपयोग करने जा रहा है।

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों के कल्याण के लिए पिछले चार सालों में पूर्ण समर्पण के साथ कार्य कर रही है। सरकार के प्रयासों से देश के 700 से अधिक कृषि वैज्ञानिक लैब से निकलकर जमीनी परीक्षण के लिए फील्ड लेवल तक पहुंचाए हैं। उन्होंने कहा कि पशुपालन, गाँव की आर्थिकी की रीढ़ है। हमारा देश पशुपालन में पहले पायदान में होने के बावजूद यहां उत्पादकता में कमी है। हमें वार्षिक वृद्धि दर के साथ-साथ उत्पादन बढ़ाने पर जोर देना है।

पौधरोपण के लिये सीएम ने चलाया फावड़ा

मिशन ऋषिपर्णा के अंतर्गत मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पौधरोपण के गड्ढे खोदे। उन्होंने कहा कि रिस्पना व कोसी के पुनर्जीवीकरण के लिये हरेला पर्व के दौरान एक दिन निर्धारित कर लाखों पौधे लगाये जायेंगे। पौध रोपण का यह कार्य सभी के सार्थक प्रयासों से सफल होगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि रिस्पना से ऋषिपर्णा सरकार का दीर्घकालिक एवं महत्वाकांक्षी अभियान है। इस मिशन में स्थानीय लोगों के अलावा विभिन्न सरकारी तथा गैरसरकारी संगठनों, संस्थाओं एवं अन्य प्रदेशों के लोगों का सहयोग भी मिल रहा है। रिस्पना एवं कोसी के पुनर्जीवीकरण के लिए हरेला पर्व के दौरान एक दिन निर्धारित कर 3.5 लाख पौधे लगाये जायेंगे। पौधरोपण का यह कार्य पूर्ण रूप से जन सहयोग से किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारम्भिक चरण में रिस्पना एवं कोसी नदी को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद अन्य जल स्रोतो को भी पुनर्जीवित किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पर्यावरण का संरक्षण, हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है। वर्ष-2018 में विश्व पर्यावरण दिवस की मेजबानी भारत कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने प्लास्टिक मुक्त भारत का जो आह्वाहन किया है, उसमें सबका सहयोग जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 31 जुलाई से उत्तराखण्ड में पॉलीथीन पूर्ण रूप से प्रतिबन्धित की जायेगी। सभी पॉलीथीन के थोक विक्रेताओं को इससे पूर्व पॉलीथीन का स्टॉक समाप्त करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि इससे एक सप्ताह पूर्व पूरे प्रदेश में पॉलीथीन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर व्यापक स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाया जायेगा। उत्तराखण्ड को पॉलीथीन मुक्त राज्य बनाने के लिए सामाजिक संगठनों के अलावा जन सहयोग आवश्यक है।

जिलाधिकारी एसए मुरूगेशन ने बताया कि लण्ढ़ौर शिखर फॉल से मोथरोवाला-दौड़वाला तक तक वृक्षारोपण के लिए 39 ब्लॉक बनाये गये हैं। सम्पूर्ण क्षेत्र में अनेक प्रजाति के पौध लगाये जायेंगे। इसमें 30 प्रतिशत फलदार वृक्ष लगाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि इस मिशन में सबका अच्छा सहयोग मिल रहा है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इसके उपरान्त मुख्यमंत्री आवास में भी वृक्षारोपण किया। उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लीची, अनार, अमरूद, आडू, प्लम, नाशपाती आदि फलदार पौधे रोपे।

डीएम आपदा के दौरान तुरंत एक्शन लेः त्रिवेन्द्र

राज्य में अतिवृष्टि व ऑधी तूफान से हुयी क्षति के जानकारी मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावन ने ली। उन्होंने राज्य आपदा परिचालन केंद्र में डयूटी पर तैनात कर्मचारियों को फोन के माध्यम से जिलों की आपदा की जानकारी लेने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले तीन माह वर्षाकाल के दौरान विशेष सतर्कता की जरूरत है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को किसी भी प्रकार के आपदा के लिए सतर्क रहने एवं शीघ्र रिस्पांस देने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि जिला आपदा कंट्रोल रूम का भी लगातार निरीक्षण करते रहें। ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चिन्हित कर कार्यवाही करें।

जिलाधिकारियों को आपदा के दृष्टिगत निरन्तर जनप्रतिनिधियों के सम्पर्क में रहने के भी निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों की फोन नम्बर की लिस्ट भी अपडेट रखी जाए। ताकि किसी भी प्रकार की घटना होने पर शीघ्र सम्पर्क किया जा सके।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तरकाशी एवं पौड़ी में 28 मीमी की बारिश हुई है। जबकि देहरादून में 40 मीमी बारिश हुई। उत्तरकाशी जनपद के बड़कोट तहसील के गंगटाड़ी में एक बच्ची के बहने की सूचना मिली है। जबकि पौड़ी जनपद के चाकीसैंण तहसील के बुमोच में अतिवृष्टि से चार पशुओं की हानि हुई है। उन्होंने राज्य में बादल फटने संबंधी जानकारी होने से साफ इंकार किया। सीएम बोले राज्य में कोई बादल नहीं फटा है। इस तरह की सूचना का कोई औचित्य नहीं है।

फूलों की घाटी के दीदार को पहुंचे पर्यटक

फूलों की घाटी को पर्यटकों के लिये खोल दिया गया है। विश्व प्रसिद्ध यह घाटी में पर्यटकों की आमद हमेशा बनी रहती है। इस वर्ष फूलों की घाटी में जाने वाले पर्यटकों को रास्ते व घाटी में हिमखंड के दीदार कर रहे है। विदित है कि फूलों की घाटी में 500 से अधिक प्रजाति के फूल खिलते है।

फूलों की घाटी में 500 से अधिक प्रजाति के फूल खिलते है। 87.5 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली फूलों की घाटी में जैव विविधता का खजाना है। फूलों की घाटी में हर 15 दिनों में अलग रंग के फूल खिलते हैं। इसलिए इसलिए फूलों की घाटी में पर्यटक बार-बार आने आवाजाही करते हैं। फूलों की घाटी को दो अक्टूबर 2005 को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया था।

फूलों की घाटी की खोज 1931 में कॉमेट पर्वतारोहण के बाद ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रेक स्मिथ ने की थी। वे घाटी की सौन्दर्य से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने ही इस पर वैली ऑफ फ्लावर किताब लिख कर फूलों की घाटी का नामकरण किया। फूलों की घाटी नेशनल पार्क के वन क्षेत्राधिकारी वृजमोहन भारती ने बताया कि फूलों की घाटी पयर्टकों के लिए खोल दी गई है।

फूलों की घाटी के लिए घाघरिया से तीन किमी पैदल चलकर पहुंचा जा सकता है। फूलों की घाटी यात्रा का बेस केंप घाघरिया है। गोविंदघाट से 14 किमी पैदल चलकर घांघरिया पहुंचा जा सकता है। इसके बाद भी लोगों को फूलों की घाटी से उम्मीदें हैं। आपदा में फूलों की घाटी का पैदल रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया था। वर्ष 2017 में फूलो की घाटी मे रिकार्ड तोड़ पर्यटक आए थे। वन विभाग को पर्यटको की अच्छी खासी आमद बढ़ने से आय में इजाफा हुआ था।

सीएम ने किया पुस्तक प्राचीन व वर्तमान टिहरी का विमोचन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भवानी प्रताव सिंह द्वारा संपादित पुस्तक प्राचीन एवं वर्तमान टिहरी का विमोचन किया। टिहरी महोत्सव कार्यक्रम में पहुंच सीएम में 31 करोड़ 95 लाख रूपये की विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण किया।

विधानसभा क्षेत्र टिहरी गढ़वाल के विकासखण्ड जाखणीधार के आवासीय भवनों हेतु एक करोड 57 लाख रूपये के निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया गया। विकासखण्ड जाखणीधार के कार्यालय भवन हेतु एक करोड़ आठ लाख 55 हजार रूपये के निर्माण कार्य का लोकार्पण किया। इसके अलावा जिन निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया गया। उनमें केन्द्रीय वित्त पोषित योजना ’स्वदेश दर्शन’ के अन्तर्गत कोटी में निर्मित टूरिस्ट पाथवे, पार्किंग, व्यू प्वाइंट, फ्लोटिंग हट तथा सर्विस सेटअप, चम्बा में मल्टी लेवल कार एवं बस पार्किंग एवं सिराई में ईको लॉज, मल्टीपरपस हॉल तथा यूटिलिटी भवन शामिल है।

मुख्यमंत्री ने भवानी प्रताप सिंह द्वारा सम्पादित पुराना दरबार ट्रस्ट की पुस्तक ’प्राचीन एवं वर्तमान टिहरी’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ज्ञान सिंह नेगी को पेंशन का चैक देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने अपने सम्बोधन में कहा कि 16 मई को टिहरी झील में कैबिनेट कराने का जो निर्णय लिया, यह निर्णय भविष्य में पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखण्ड को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलायेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन को और अधिक बढ़ावा देने के लिये ’13 डिस्ट्रिक्ट 13 न्यू डेस्टिनेशन’ की सरकार की परिकल्पना है। जिसमें टिहरी जिले में टिहरी झील को शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से टिहरी झील में बड़ा पोटेंशियल दिखता है। इस तरह के आयोजनों से वैश्विक स्तर पर टिहरी झील एक प्रमुख डेस्टिनेशन के रूप में उभर कर आयेगा। वेलनेस, योगा टूरिज्म, एडवेंचर, फिल्म आदि के क्षेत्र में यहां अपार संभावनाएं है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में टिहरी झील राज्य में युवाओं को आर्थिक एवं आध्यात्मिक रूप से भी मजबूत करेगी। उत्तराखण्ड का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को उत्तराखण्ड आने के लिये आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को उत्तराखण्ड को प्रकृति द्वारा दी गई इस देन को समझना होगा।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिये जाने से पर्यटन राज्य की रोजी रोटी का जरिया बनेगा। उन्होंने कहा कि टिहरी महोत्सव के आयोजन से देश व विदेशीयों के लिये टिहरी झील आकर्षण का केन्द्र बनेगी। फ्लोटिंग हट्स यह कि विशिष्ट पहचान है। वॉटर स्पोर्ट्स, पैराग्लाइडिंग, ट्रेकिंग एवं अन्य गतिविधियां टिहरी में पर्यटन के क्षेत्र में नया आयाम स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि पर्यटक स्थलों पर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना जरूरी है।

वन विभागीय अधिकारियों को सीएम की फटकार, दिए ये निर्देश

राज्य में बढ़ते तापमान व गर्म हवाओं के चलते वन आग की ज्वाला में धधक रहे है। वनों के इस तरह जलने से आबादी क्षेत्र में रह रहे लोगों में भी दहशत है। वनों में आग बढ़ने पर आबादी क्षेत्र में आने का खतरा बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को वगाग्नि पर ठोस व प्रभावपूर्ण कदम उठाने के निर्देश दिए है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने वन विभाग के अधिकारियों को आडे़ हाथों लेते हुए उनसे पूछा कि उन्होंने क्या तैयारी की थी ? अगर तैयारी पूरी थी तो परिणाम क्यों नहीं मिला ? मुख्यमंत्री ने वन विभाग के नोडल अधिकारी वीपी गुप्ता और डीएफओ पौड़ी को फटकार लगाते हुए कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को भी हिदायत दी कि अपने जनपदों में वनाग्नि की घटनाओं की जवाबदेही उन्हीं की होगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रभागीय वनाधिकारी की परफॉर्मेंस एप्रेजल रिर्पोट में वनाग्नि की रोकथाम के प्रयासों तथा उनके परिणामों को भी दर्ज किया जाय। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जिलाधिकारियों और वन विभाग, स्थानीय समुदायों को अपने साथ जोड़ें। स्थानीय लोगों की मदद के साथ, वनों की प्रभावी सुरक्षा की जा सकती है।

मुख्यमंत्री ने वनाग्नि की रोकथाम के लिये कुल प्रावधानित बजट 12 करोड़ 37 लाख का 50 प्रतिशत ही जारी किये जाने पर भी सख्त नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने वन विभाग को फटकार लगाते हुए कहा कि, ‘‘आग अभी लगी है, आप पैसा कब के लिये बचा रहे हैं।’’ उन्होंने शेष राशि तत्काल जनपदों देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलाधिकारी आपदा प्रबंधन तंत्र तथा आपदा प्रबंधन मद में उपलब्ध धनराशि का भी समुचित प्रयोग करें। सभी जनपदों में आपाद प्रबंधन मद में पांच-पांच करोड़ की धनराशि दी गई है जिसकी 10 प्रतिशत राशि से उपकरण क्रय किये जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनों की आग सिर्फ वन विभाग की समस्या नहीं है। अन्तरविभागीय समन्वय कर इससे पूरी क्षमता के साथ लड़ा जाय।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग वर्षा काल का इंतजार न करे और अभी से अपने प्रयासों को तेज करे। जिन जनपदों में एक्टिव फायर की रिपोर्ट नहीं है, उन्हें भी सजग रहने की जरूरत है।
वनाग्नि की घटनाओं में सम्बन्धित नोडल अधिकारी ने बताया कि अभी तक कुल 776 घटनाएं दर्ज हुई है, जिनमें 1271 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है। 40 मास्टर कंट्रोल रूम स्थापित किये गये है।

हाईकोर्ट ने दिया निकाय चुनावों पर बड़ा फैसला

राज्य सरकार की ओर से निकायों के परिसीमन व सीमा विस्तार को लेकर जारी अधिसूचना को निरस्त करने संबंधी एकलपीठ के आदेश को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने निरस्त कर दिया। इससे अब राज्य में नगर निकाय चुनावों को लेकर रास्ता साफ हो गया है।

विदित हो कि हल्द्वानी, पिथौरागढ़ के दौला, खटीमा, टनकपुर, डोइवाला, रुद्रपुर, काशीपुर, भवाली, भीमताल, कोटद्वार, ऋषिकेश समेत 17 निकायों के सीमा विस्तार की अधिसूचना को अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी गई थी। इन याचिकाओं में कहा गया था कि सीमा विस्तार से संबंधित जारी अधिसूचना राज्यपाल की ओर से जारी होनी चाहिए थी। लेकिन, इसे शहरी विकास सचिव द्वारा जारी किया गया था। जो संविधान का उल्लंघन है। पिछले दिनों एकलपीठ ने इन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए सरकार की परिसीमन संबधी अधिसूचना को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया था।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर व सीएससी परेश त्रिपाठी ने जिरह की। उन्होंने कहा कि राज्यपाल और राज्य सरकार को एक ही परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए, अलग-अलग नहीं। राज्य सरकार के स्तर पर परिसीमन को लेकर जो कवायद की गई, वह राज्यपाल के नाम पर की गई। एकलपीठ ने संविधान में निहित व्यवस्था की व्याख्या सही नहीं की, लिहाजा फैसले को निरस्त किया जाए। खंडपीठ ने सरकार की दलीलों से सहमत होते हुए एकलपीठ का फैसला निरस्त कर दिया और सरकार की कवायद को संवैधानिक करार दिया।

श्रद्धालुओं की सुविधाओं में न रहे कमी, सीएम ने दिए ये निर्देश

श्री केदारनाथ धाम पहुंच कर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पूजा-अर्चना की। उन्होंने केदारनाथ में चल रहे पुननिर्माण कार्यों के साथ मंदाकिनी नदी के समीप घाटों के निर्माण कार्याें का जायजा भी लिया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिये सभी व्यवस्थायें सुचारू रूप से चलाने के निर्देश भी दिये। इस दौरान उन्होंने दस बैड वाले अस्पताल का उद्धाटन भी किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि इस बार चारधाम दर्शन हेतु रिकार्ड श्रद्धालु पहुंच रहे है। श्री केदारनाथ में अब तक ढाई लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके है। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं के बीच जाकर उनसे बातचीत कर व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी हासिल की।

इससे पूर्व, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने श्री बद्रीनाथ धाम पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना के साथ ही भगवान श्री बद्री विशाल के दर्शन किये। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने भगवान बद्री विशाल से राज्य की जनता की सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री ने सरकार के विकास-योजनाओं को जनता के सामने रखा

ऊधमसिंह नगर में सात करोड़ 60 लाख 41 हजार की लागत से निर्मित शक्तिफार्म से तीन पानी तक के मार्ग के शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य के विकास पर फोकस डाला। उन्होंने सरकारी की योजनाओं को जनता के सामने रखा।

मंगलवार को मुख्यमंत्री शक्तिफार्म (टैगोर नगर), उधमसिंहनगर के दुर्गा पूजा मंदिर प्रांगण में सात करोड़ 60 लाख 41 हजार रूपये की लागत के शक्तिफार्म से तीनपानी मार्ग का शिलान्यास किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने भूमि विनियमितीकरण वर्ग-4, वर्ग-8, वर्ग-20 की भूमि की विनियमितीकरण कर 24 पात्र लोगों को भूमिधारी अधिकार प्रदान किये।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा विभाग के राजस्व में बढ़ोत्तरी हुयी है, आने वाले साल में ऊर्जा से 300 करोड रूपये का मुनाफा कमायेंगे। रोडवेज को घाटे से उबारने के उपाय किये जा रहे है। इस वर्ष सरकार को खनन से 400 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, अगले वर्ष इसे बढ़ाकर 800 करोड़ किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का अगला फोकस रोजगार सृजन पर रहेगा। इसके लिए ब्लॉक व जिला स्तर पर गोष्ठियां आयोजित की जायेंगी। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत व सुझाव 1905 नम्बर पर दर्ज करा सकते हैं। पिछले दिनों आई अतिवृष्टि से जिन किसानों की फसल नष्ट हुई है, उन्हें दो माह के भीतर मुआवजे का भुगतान कर दिया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील भी की जिनकी भूमि का विनियमितीकरण किया जाना है, वह 19 अगस्त, 2018 तक करा लें। भूमि का विनियमितीकरण वर्ष 2000 के सर्किल रेट पर किया जा रहा है, उसके बाद यह वर्तमान सर्किल रेट पर किया जायेगा। उन्हांेने कहा कि ग्राम गोठा व बग्घा मे वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव शीघ्र बनाये, ताकि वहां सड़क निर्माण कराया जा सके। कार्यो में पारदर्शिता लाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा ई-टेंडरिंग से कार्य आवंटित किये जा रहे है। शराब के ठेकों का ई-टेंडरिंग कराने से 11 गुना तक बढे़ हुए टेंडर प्राप्त हुए है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने सिरसा से शक्तिफार्म तक 13 किमी की सड़क बनाने, सूखी नदी में पुल निर्माण, गोठा में दो किमी की सड़क निर्माण, सितारगंज मे बस अड्डा निर्माण तथा शक्तिफार्म मंे 108 इमरजेंसी सेवा चलाने की घोषणा की।