उच्च शिक्षा मंत्री के बयान को ओछी मानसिकता करार दिया

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने एलएसएम पीजी कॉलेज पिथौरागढ़ के साथ ही प्रदेश के सभी डिग्री कॉलेजों के स्टूडेंट्स को जरूरत के अनुरूप किताबें उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। हल्द्वानी में मीडिया से रूबरू मंत्री ने कहा कि जिला मुख्यालय के एक-एक कॉलेज में ई-लाइब्रेरी खोली जाएगी। स्टूडेंट्स देश-दुनिया की किताबें ऑनलाइन पढ़ सकेंगे।
गौलापार उच्च शिक्षा निदेशालय में पत्रकारों ने उच्च शिक्षा राज्य मंत्री से पिथौरागढ़ कॉलेज में चल रहे छात्र आंदोलन पर सवाल पूछा। जवाब में मंत्री ने कहा, पिथौरागढ़ कॉलेज में किताबों की कमी नहीं है। छह हजार छात्रसंख्या वाले कॉलेज में 1.10 लाख किताबें हैं। एक स्टूडेंट्स पर औसतन 18 पुस्तकें हैं। कॉलेज में 102 प्रोफेसर हैं। प्रदेश के किसी कॉलेज में इतने प्रोफेसर नहीं हैं। पुराने पाठ्यक्रम की किताबों पर मंत्री बोले, किताबें कभी पुरानी नहीं होती। मंत्री ने कहा, इसके बावजूद स्टूडेंट्स को और जरूरत महसूस होती है तो किताबें उपलब्ध कराई जाएगी। पिथौरागढ़ कॉलेज में डिजिटल लाइब्रेरी खोलने के लिए जितनी राशि की आवश्यकता हुई, 15 अगस्त से पहले दी जाएगी। जरूरत होने पर शिक्षक भी दिए जाएंगे। प्रदेश में छह कॉलेजों में प्राचार्य के पद रिक्त हैं, जिन्हें जल्द भरा जाएगा। कॉलेजों में मैदान, शौचालय, लैब बनवाकर नैक के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

वास्तविक स्टूडेंट्स को मिलेंगी किताबें
मंत्री ने कहा कि प्रदेश में 104 कॉलेज हैं। 57 कॉलेजों में रूसा के माध्यम से पुस्तकें देने समेत अन्य निर्माण कार्य हो रहे हैं। शेष कॉलेजों को 14 अगस्त तक पुस्तकों के लिए बजट दिया जाएगा। उन्होंने कहा, आइ कार्ड, 75 फीसद उपस्थिति वाले स्टूडेंट्स को ही किताबें दी जाएगी। राजनीति के लिए कॉलेज में दाखिला लेने वालों को किताबें नहीं मिलेंगी। गेस्ट फैकल्टी का कार्यकाल बढ़ेगा
मंत्री ने कहा, कॉलेजों में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो गया है। इसे 11 माह के लिए बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोग से प्रोफेसरों की नियुक्ति जारी है। खाली पदों के भरने तक 25 हजार रुपये मासिक में अस्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति होंगे। नियुक्ति का अधिकार प्राचार्य को दिया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर रिटायर्ड प्रोफेसर को बुलाया जाएगा।

दाखिले में लागू होगा सवर्ण आरक्षण
मंत्री ने कहा, कॉलेज प्रवेश में दस प्रतिशत सवर्ण आरक्षण का प्रावधान लागू होगा। जिन कॉलेजों की पहली सूची में सवर्ण आरक्षण का प्रावधान नहीं किया गया है, वहां बाद में आरक्षण के आधार पर सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

उच्च शिक्षा मंत्री के बयान को बताया ओछी मानसिकता
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के पिथौरागढ़ में छात्रों के आंदोलन की जांच कराने के बयान को ओछी मानसकिता बताया है। गुरुवार को वह गैरसैण जाते समय रामनगर में रुके थे। एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से मुखातिब रावत ने कहा कि उच्च शिक्षा मंत्री को किताबें और शिक्षक की व्यवस्था करनी चाहिए, लेकिन वह आंदोलन को बाहरी बताकर उसमें राजनीति की आशंका जता रहे हैं। यह उच्च शिक्षा मंत्री का ओछा व छोटा बयान है। पूर्व सीएम ने कहा कि गैरसैंण में राजधानी की मांग के लिए धरना दे रहे पैंतीस आंदोलनकारियों पर सरकार ने मुकदमें करा दिए। आंदोलनकारियों ने अपनी गिरफ्तारी दी है। वह भी शुक्रवार को गैरसैंण पहुंचकर आंदोलनकारियों के समर्थन में अपनी गिरफ्तारी देंगे।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी एक दो दिन में गिरफ्तारी देने गैरसैंण जाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने कांग्रेस के गैरसैंण एजेंडे को ठप कर दिया। सचिवालय भवन सड़कें व आवासीय भवन का काम बंद है। कांग्रेस ने गैरसैंण में जमीन की खरीद फ रोख्त पर रोक लगाई थी। लेकिन भाजपा सरकार ने यह रोक हटा दी है। कहा कि कांग्रेस को। समस्याओं के लिए संघर्ष व लोंगों से संपर्क जीत दिलाएगा। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए युवा चेहरा नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। कहा 20 जुलाई तक स्थिति साफ हो जाएगा।

राजकीय सम्मान के साथ “श्रीमन” को अंतिम विदाई

प्रदेश सरकार में संसदीय कार्य एवं विधायी, वित्त और आबकारी मंत्री रहे दिवंगत प्रकाश पंत का पिथौरागढ़ जिले के रामेश्वर घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, केन्द्रीय मंत्री अश्वनि चैबे और प्रदेश की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य सहित कई राजनेताओं ने स्वर्गीय पंत के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इससे पहले उनका पार्थिव शरीर विशेष विमान से देहरादून से पिथौरागढ़ स्थित नैनी सैनी हवाई पट्टी लाया गया, जहां से पार्थिव शरीर को देव सिंह मैदान लाया गया। जहां आयोजित श्रद्धांजलि सभा स्थल पर अपने नेता को आखिरी विदाई देने के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। अंतिम दर्शन के लिए सुबह नौ बजे से ही देव सिंह मैदान में जनप्रतिनिधियों के साथ ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। जहां लोगों ने दिवंगत प्रकाश पंत को श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रकाश पंत के पार्थिव शरीर को देव सिंह मैदान से खड़कोट में उनके आवास पर ले जाया गया, जहां परिजनों ने उनके अंतिम दर्शन किये। इसके बाद उनके अवास से अंतिम यात्रा निकली गई। बेहद गमगीन माहौल में अंतिम यात्रा में पूरा शहर उमड़ पड़ा। लोग ‘‘प्रकाश पंत अमर रहे‘‘ के नारे लगाकर अपने प्रिय नेता को विदाई दे रहे थे। वहीं, जिला मुख्यालय के बाजार और शैक्षणिक संस्थान उनके शोक में बंद रहे। गौरतलब है कि कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत का बुधवार को अमेरिका में उपचार के दौरान देहांत हो गया था।

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जानिए कैसा था पंत का जीवन, क्यों हर किसी की यादों में जिंदा है प्रकाश पंत

प्रकाश पंत के बारे में अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि फार्मासिस्ट होने के बावजूद उन्होंने वित्त, संसदीय व विधायी कार्यों में महारथ हासिल की। वित्त विशेषज्ञ के तौर पर जीएसटी काउंसिल में उन्हें और उनके सुझावों को भरपूर तवज्जो दी गई। कहते हैं पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। ये पंक्तियां कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत पर सटीक बैठती हैं।
1977 में छात्र राजनीति में वह सक्रिय हुए और सैन्य विज्ञान परिषद में महासचिव चुने गए। पेशे से फार्मासिस्ट पंत ने 1984 में सरकारी सेवा को त्याग कर समाजसेवा के लिए सियासत का रास्ता चुना। 1988 में नगर पालिका परिषद पिथौरागढ़ के सदस्य चुने जाने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अविभाजित उत्तर प्रदेश में 1998 में वह विधान परिषद के सदस्य चुने गए और वहां भी अपने सवालों के जरिये छाप छोड़ी।
9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य का जन्म हुआ तो उन्हें अंतरिम विधानसभा के स्पीकर की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान उन्होंने अपने संसदीय ज्ञान और विधायी कौशल का बखूबी परिचय दिया। 2007 में भाजपा की सरकार में पंत संसदीय कार्य, विधायी, पेयजल, श्रम, निर्वाचन, पुनर्गठन व बाह्य सहायतित परियोजनाएं मंत्री के तौर पर अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।
इस दौरान भी उनके संसदीय ज्ञान और विधायी कौशल को हर किसी ने सराहा। भाजपा की मौजूदा सरकार में भी वह कैबिनेट मंत्री के रूप में संसदीय कार्य, विधायी, भाषा वित्त, आबकारी, पेयजल एवं स्वच्छता, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग का दायित्व देख रहे थे। इस कार्यकाल में तो वह वित्त के विशेषज्ञ के तौर पर उभरे, तो हर मोर्चे पर सरकार को संभालते भी आए। वित्त में उनकी महारथ को जीएसटी काउंसिल ने भी सराहा। काउंसिल में पंत को भरपूर तवज्जो दी गई और वित्त मंत्रियों के समूह में उन्हें भी शामिल किया गया। वित्त पर अपनी मजबूत पकड़ के साथ ही जीएसटी की बारीकियों की जानकारी के बूते उन्होंने कई सुझाव काउंसिल को दिए।
जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के मद्देनजर वार्षिक टर्नओवर की सीमा से संबंधित मसले को सुलझाने में उनकी अहम भूमिका रही। यही नहीं, जीएसटी के फायदों के बारे में व्यापारियों व कारोबारियों को समझाने और उनकी दिक्कतों को हल करने के चलते वह व्यापार व कारोबारी जगत से जुड़े लोगों में खासे लोकप्रिय थे। उनके संसदीय ज्ञान और विधायी कौशल का हर कोई मुरीद था। सत्ता पक्ष भी और विपक्ष भी। जब कभी सरकार किसी विषय पर कहीं भी उलझी तो उसे निकालने में वह संकटमोचक बनकर उभरे। प्रदेश हित को उन्होंने सर्वोपरि रखा और इसके लिए सदन और सदन के बाहर संघर्ष किया। मौजूदा विधानसभा के अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल कहते हैं कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से कैबिनेट मंत्री पंत का सहयोग मिलता रहा। उनके संसदीय ज्ञान को हमेशा याद रखा जाएगा।

चला गया उत्तराखंड की सियासत का महारथी

काबीना मंत्री प्रकाश पंत यानी मृदु व्यवहार, बेहद सरल, सौम्य और मुस्कराता चेहरा। पक्ष हो या विपक्ष समेत तमाम सियासी दलों के विधायक हों या अन्य नेता सभी को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सहयोग करने को हमेशा प्रकाश पंत तत्पर रहे। महज 59 साल की आयु में उत्तराखंड की सियासत का ये अजातशत्रु एकाएक गंभीर बीमारी के चंगुल में फंसकर सभी को छोड़कर चला गया। सत्तारूढ़ दल भाजपा के साथ ही विपक्षी दलों ने भी उनके निधन को राज्य के लिए सदमा बताया है। पंत की शख्सियत को बयां करते हुए कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन कहते हैं कि वह मेरे गुरु रहे हैं। मेरे पिता काजी मोईनुद्दीन भी उनका बहुत आदर करते थे। अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से ही प्रकाश पंत राज्य में भाजपा की सियासत का अहम हिस्सा रहे।

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प्रदेश भाजपा के दिग्गजों में शुमार होने के बावजूद प्रकाश पंत ने पार्टी के भीतर भी और बाहर विपक्षी दलों के साथ भी राजनीतिक द्वेष-विदेश से दूरी बनाए रखी। भाजपा की वर्ष 2007 में बगैर बहुमत के सत्ता में वापसी के दौरान राजनीतिक अनिश्चितता के दौर रहा हो या वर्ष 2017 में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलने के दौरान मुख्यमंत्री पद के लिए भी उनका नाम उछला, लेकिन पंत ने खुद को पद के विवाद से भी दूर रखा।
उनके इस व्यवहार को भी पार्टी के भीतर सम्मान की नजर से देखा जाता रहा है। पंत की खासियत ये भी रही कि उन्होंने मेहनत से जुटाए ज्ञान को बांटने में दलीय आग्रह को दूर रखा। इस वजह से विपक्षी दलों के विधायक भी उनके प्रशंसक रहे। पहले स्पीकर और फिर विधायी व संसदीय कार्यमंत्री रहते हुए विधायी ज्ञान में जो महारत हासिल की, उसे सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों से भी उन्होंने साझा किया। इसी वजह से कांग्रेस के विधायक काजी निजामुद्दीन उनके निधन को संसदीय लोकतंत्र के लिए गहरा आघात करार दिया। उन्होंने कहा कि पंत के सानिध्य में घंटों बैठकर उन्होंने विधायी ज्ञान हासिल किया। उनके पिता व अंतरिम सरकार में विधायक रहे काजी मोईनुद्दीन ने पंत को खास इज्जत दी। उनके कहने पर ही उन्होंने प्रकाश पंत से बतौर गुरु संसदीय ज्ञान हासिल किया।
पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भावुक टिप्पणी की कि प्रकाश पंत के निधन की खबर ने तन-मन दोनों को तोड़कर रख दिया। उत्तराखंड की राजनीति का अजातशत्रु चला गया। परिजनों व तुम्हारे चाहने वालों के लिए सांत्वना के शब्द ढूंढकर भी नहीं मिल पा रहे हैं।

उत्कृष्ट विधायक चुने गए थे प्रकाश पंत
काबीना मंत्री प्रकाश पंत को वर्ष 2008 में उत्कृष्ट विधायक के पुरस्कार से भी नवाजा गया था। उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार की शुरुआत उक्त वर्ष से हुई थी। गंभीर बीमारी के चलते काबीना मंत्री प्रकाश पंत के असामयिक निधन से उत्तराखंड की सियासत में लंबे समय तक रिक्तता महसूस की जाएगी। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद अंतरिम सरकार के पहले स्पीकर रहने के बाद उन्हें भाजपा की सरकारों में सात वर्ष तक विधायी एवं संसदीय कार्यमंत्री रहने का मौका मिला। वर्ष 2007 में प्रदेश की भाजपा सरकार और फिर 2017 में वर्तमान भाजपा सरकार में वह विधायी एवं संसदीय कार्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाले हुए थे। उत्तराखंड में अभी तक यह जिम्मेदारी सबसे ज्यादा संभालने का रिकार्ड उन्हीं के नाम है। उन्होंने लगातार दूसरी बार वित्त मंत्री का प्रभार भी संभाला।

राष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में याद रहेंगे पंत
कैबिनेट में वित्त मंत्री प्रकाश पंत राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज भी थे। पंत ने कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर मेडल प्राप्त किए हैं। निशानेबाजी के शौकीन पंत अपने व्यस्त कार्यक्रम में से भी शूटिंग के लिए समय निकाल ही लेते थे। उत्तराखंड के लोकप्रिय नेता प्रकाश पंत का बुधवार को गंभीर बीमारी के चलते निधन हो गया। राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले प्रकाश पंत राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी थे। पंत ने वर्ष 2004 में कोयम्बटूर में हुई जीबी मावलंकर शूटिंग प्रतियोगिता में लक्ष्य को सटीक भेदते हुए रजत पदक पर निशाना लगाया था।
इस प्रतियोगिता में प्रकाश पंत ने वेटरन वर्ग में एमपी-एमएलए कोटे से प्रतिभाग किया था। इसके अलावा 2004 में ही देहरादून में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पंत ने स्वर्ण पदक पर निशाना साधा था। उत्तरांचल राज्य रायफल संघ के महासचिव शूटर सुभाष राणा ने बताया कि संघ द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में वह लगातार हिस्सा लेते रहते थे। इसके अलावा जब भी वह फ्री रहते थे, ऐकेडमी में निशानेबाजी करने आते थे। उन्होंने उत्तरांचल राज्य रायफल संघ की ओर से प्रकाश पंत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

पंत को याद कर जब भावुक हो गए सीएम त्रिवेंद्र
प्रकाश पंत के असामयिक निधन से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत उस समय भावुक हो गए, जब उन्होंने पंत के साथ बिताए 30 साल की स्मृतियों का जिक्र किया। एक वीडियो में मुख्यमंत्री ने पंत की स्मृतियों को मीडिया से साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह महज 40 साल की छोटी उम्र में अपनी काबिलियत के बूते वे पहली अंतरिम विधानसभा के अध्यक्ष बने। फरवरी में बजट सत्र के दौरान बजट भाषण पढ़ते हुए जब पंत बेसुध हुए, उस वक्त का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि उन्हें इसके बाद दिल्ली में संजय गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया।
टेस्ट के नतीजे आने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने मुझे बताया कि प्रकाश पंत को एडवांस स्टेज का कैंसर है, जो बहुत रेयर किस्म का है। बहुत चिंता हुई। जब उन्हें उपचार के लिए अमेरिका ले जाया जा रहा था तो एक रात पहले मैंने उनसे रात 11 बजे अस्पताल में मुलाकात की। तब प्रकाश पंत ने मुझे कहा, मैं अमेरिका से स्वस्थ होकर लौटूंगा। आज उनके निधन की सूचना मिली। ये बयां करते करते मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का गला रुंध गया और आंखों से आंसू छलक आए।

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ठीक होकर आने का वादा किया था, लेकिन साथ छोड़ दिया- मुख्यमंत्री

पर्वतारोहियों की तलाश को रवाना हुई एसडीआरएफ की टीम

मुनस्यारी (पिथौरागढ़) से नंदा देवी ईस्ट 7434 मीटर की ऊंची चोटी फतह करने गए छह विदेशी पर्वतारोहियों सहित एक भारतीय लापता हो गया हैं। यह दल नंदा देवी फतह को 13 मई को रवाना हुआ था। वहीं, लापता होने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और तहसील प्रशासन ने राजस्व दल और एसडीआरएफ की टीम को मौके के लिए रवाना कर दिया है।

मैसर्स हिमालयन रन एवं ट्रेक लिमिटेड नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित इस पर्वतारोहण अभियान में ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका और आस्ट्रेलिया के सात पर्वतारोही शामिल हैं। जिसमें टीम लीटर इंग्लैंड के मार्टिन मैक्रन हैं। दल में जॉन मैक्लॉरेन, रूपर्ट ह्रवेल, रिचर्ड पायने निवासी यूके, रूथ मैक्क्रेन निवासी आस्ट्रेलिया, एंथोनी सूडेकम, रोनाल्ट बरमेल निवासी यूएसए और चेतन पांडेय भारतीय पर्वतारोहण संस्थान के लाइजन ऑफिसर शामिल हैं। दल 13 मई को मुनस्यारी से रवाना हुआ। दल को शनिवार एक जून को मुनस्यारी लौटना था।

जानकारी के मुताबिक दल के सदस्य जब 6000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर थे तब से लापता हैं। जिसकी सूचना जिला प्रशासन को दे दी गई है। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और मुनस्यारी तहसील प्रशासन सक्रिय हो गए हैं। जिलाधिकारी डॉ. वीके जोगदंडे ने मुनस्यारी तहसील प्रशासन को निर्देश जारी कर दिए हैं। एसडीएम मुनस्यारी आरसी गौतम ने राजस्व दल व आपदा प्रबंधन दल को मौके पर जाने के लिए भेज दिया है।

तीर्थनगरी पहुंचे क्रिकेटर उन्मुक्त चंद, बोले सीनियर टीम में वर्ल्डकप जिताना है सपना

द स्काई आफ द लिमिट पुस्तक को लांच करने ऋषिकेश पहुंचे क्रिकेटर उन्मुक्त चंद ने प्रशंसकों ने खुलकर वार्ता की। उन्होंने बताया कि पुस्तक में उन्होंने अपनी यात्रा वृत्तांत का जिक्र किया है।

क्रिकेटर उन्मुक्त चंद ने अपने प्रशंसकों से बातचीत की और खुद के साइन की हुई किताब प्रशंसकों को दी। उन्होंने बताया कि 2012 के अंडर-19 वर्ल्ड कप से पूर्व उन्होंने इस पुस्तक का 80 फीसदी हिस्सा लिख दिया था। बाकी हिस्सा वर्ल्ड कप जीतने के बाद लिखा। इस दौरान प्रशंसकों ने उनकी पुस्तक को खरीदा।

क्रिकेटर को गढ़वाल महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राजे नेगी, रोटरी क्लब सेंटर के अध्यक्ष दीपक तायल, समाज सेवी राधे साहनी ने पुष्प गुच्छ और प्रदेश की लोकभाषा की पहली वर्णमाला पुस्तक एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर स्वागत किया।

सपना है सीनियर वर्ल्ड कप जीतने का
क्रिकेटर उन्मुक्त चंद ने बताया कि मात्र 19 वर्ष की आयु में उनके नाम अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने का खिताब बतौर कप्तान के रूप में दर्ज हुआ है। यह उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए यादगार लम्हा रहेगा। उनका सपना अंडर-19 की तरह भारत की सीनियर क्रिकेट टीम का नेतृत्व करना और कप जीतना है। उनमुक्त ने कहा कि उत्तराखंड से मेरा जुड़ाव पुराना है। मुझे जब भी समय मिलता है। मैं उत्तराखंड आकर अपनी थकान मिटाता हूं। पहाड़ की वादियों में आकर बहुत सुकून मिलता हैं।

लोक गायिका कबूतरी देवी को नहीं मिल सका हैलीकॉप्टर, हो गयी मौत

उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक गायिका कबूतरी देवी का शनिवार को समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण निधन हो गया। निधन के वक्त पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में भर्ती थी और उन्हें देहरादून में इलाज के लिये हैलीकॉप्टर से ले जाने का इंतजार किया जाता रहा। मगर, हैलीकॉप्टर की सुविधा नहीं मिल पाने से उनका निधन हो गया।

पिथौरागढ़ जिले के क्वीतड़ गांव की रहने वाली कबूतरी देवी प्रदेश की जानी मानी लोक गायिका थीं। गायन की कई विधाओं में माहिर लोक गायिका राज्य की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन देश भर में कर चुकी हैं। 70 वर्ष की हो चुकी कबूतरी देवी का स्वास्थ शुक्रवार को अचानक खराब हो गया। परिजन उन्हें जिला चिकित्सालय लाए। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एसएस कुंवर ने उनके स्वास्थ की जांच की। जांच के बाद उन्होंने बताया कि कबूतरी देवी का ब्लड प्रेशर कम है और उनका हॉर्ट कमजोर हो रहा है।

उपचार के बाद हालत में हल्का सुधार होने के बाद उन्हें हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया है। इस दौरान नगर के तमाम लोगों ने जिला चिकित्सालय पहुंचकर उनका हालचाल जाना। परिजन उन्हें हेलीकॉप्टर से देहरादून ले जाने का प्रयास कर रहे थे। शक्रवार सायं उन्हें हैलीकॉप्टर से देहरादून ले जाना था। शाम को हैलीकॉप्टर नही आया। शनिवार सुबह भी हेलीकॉप्टर नहीं पहुंचा और उनकी अस्पताल में ही मौत हो गई।

शनिवार सुबह छह बजे कबूतरी देवी को देहरादून ले जाने के लिए जिला अस्पताल से चार किमी दूर नैनीसैनी हवाई पट्टी पहुंचाया गया। जहां पर लगभग तीन घंटे प्रतीक्षा करने के बाद भी हेलीकॉप्टर नही पहुंचा। इस बीच कबूतरी देवी की तबीयत खराब हो गई और उन्हें वापस जिला अस्पताल लाया गया। जहां आईसीयू में रखा गया। बाद में चिकित्सको ने उनका परीक्षण करने के बाद मृत घोषित कर दिया।

सूचना मिलते ही लोग अस्पताल में जुटने लगे है। प्रशासन की ओर से एसडीएम नायब तहसीलदार पहुंचे। वहीं, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। लोगों का कहना था कि यदि समय रहते हेलीकॉप्टर की व्यवस्था हो जाती तो कबूतरी देवी की जान बच सकती थी।

अब कैलाश मानसरोवर यात्रा की जा सकेगी

भारत और चीन के बीच तनाव की लगातार खबर आती रही हैं, लेकिन आज एक ऐसी खबर आई जो दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और रिश्तों को बहाल करने की दिशा में थोड़ा योगदान कर सकती है।

चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सिक्किम की ओर से जाने वाले नाथू-ला मार्ग को फिर से बहाल करने की पुष्टि की है। पिछले साल इस रास्ते से मानसरोवर यात्रा नहीं हो सकी थी। तब चीन ने इस मार्ग से सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने की बात कही थी।

शुक्रवार को केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने लोकसभा को इस फैसले की जानकारी दी। 4 महीने चलने वाली मानसरोवर यात्रा जून से शुरू होती है। सिक्किम के नाथु-ला दर्रे के अलावा उत्तराखंड का लिपुलेख पास भी मानसरोवर यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

पिछले साल दोनों देशों की सेनाओं के बीच जारी डोकलाम गतिरोध के चलते चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए अनुमति देने से मना कर दिया। जिससे इस रास्ते से यात्रा नहीं हो सकी थी। तब चीन ने कहा था कि भारत पहले डोकलाम से सेना हटाए तब कोई फैसला लिया जाएगा।

पिछले साल चीनी सेना के भूटान के दावे वाले डोकलाम इलाके में घुस आने पर भारतीय फौज ने हस्तक्षेप किया था। पिछले साल 16 जून को शुरू हुआ यह गतिरोध 73 दिन तक चला। चीनी सेना के डोकलाम में घुस आने से भारत को पूर्वोत्तर के राज्यों से जोड़ने वाले चिकन नेक (संकरे गलियारे) की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया था, लेकिन दोनों सेनाओं के बीच लंबी कूटनीतिक प्रयासों के बाद 28 अगस्त को पीछे हट गई थीं।

विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने लोकसभा को दिए अपने लिखित बयान में बताया कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दिसंबर 2017 में चीनी समकक्ष से हुई मुलाकात के दौरान इस मुद्दे को उठाया था। चीन ने इस मार्ग से यात्रा बहाल करने की बात मान ली थी।

तीन जिलों में बाल लिगांनुपात में कमी आने पर सीएम चिंतित

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने ’बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ‘ साइकिल रैली का हरी झण्डी दिखाकर शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि यह साइकिल यात्रा नहीं है वरन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का एक जन जागरूकता कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 21 जनवरी 2015 हरियाणा से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरूआत की। जिसके सकारात्मक परिणाम आज हमारे सामने है। इस अभियान के बाद हरियाणा में लिंगानुपात में तेजी से सुधार हुआ है। उन्होंने कहा प्रदेश एवं समाज के विकास के लिए महिलाओं को पुरूषों के समान अधिकार मिलना जरूरी है। महिलाओं के विकास के बिना पूर्ण विकसित समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़, हरिद्वार एवं चम्पावत जिलों में बाल लिगांनुपात में कमी आने पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल लिगांनुपात को बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाने होंगे। उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प है जिसके लिये व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर हमें उनके इस सपने को साकार करना होगा। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्य के नेतृत्व में रेसकोर्स से हरकी पैड़ी तक 55 किमी की इस जागरूकता अभियान में 120 लोगों द्वारा साइकिल यात्रा की जा रही है, जिसमें 30 महिलाएं भी शामिल है। राज्य मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ एवं महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य से पूर्ण सुरक्षा के साथ साइकिल यात्रा की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस साइकिल यात्रा के माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का व्यापक स्तर पर जन संदेश पहुंचाना है। इस जागरूकता साइकिल रैली में अन्तर्राष्ट्रीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी एकता बिष्ट, मिस उत्तराखण्ड नेहा राज एवं एथलीट हरेन्द्र ने भी प्रतिभाग किया।

लुक आउट नोटिस जारी होने के बाद भी नहीं मिल रहा सुराग

पंचकुला की विशेष सीबीआई कोर्ट में जहां राम रहीम के खिलाफ हत्या के दो मामलों में सुनवाई चल रही है, वहीं हरियाणा पुलिस की टीम बिहार पुलिस के साथ मिलकर नेपाल बॉर्डर के जिलों में हनीप्रीत की तलाश में दबिश दे रही है। इस संबंध में सीमा से लगे सात जिलों में अलर्ट भी जारी किया गया है।
गुरमीत राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत को पुलिस शिद्दत से तलाश कर रही है। जिसके चलते हरियाणा पुलिस की टीम बिहार पुलिस के साथ मिलकर नेपाल की सीमा से लगे इलाकों में छापेमारी कर रही है। यही नहीं नेपाल से लगे बिहार के सात जिलों में पुलिस ने हनीप्रीत को लेकर अलर्ट भी जारी किया है।
इससे पहले हरियाणा पुलिस के हाथ उस वक्त बड़ी कामयाबी लगी, जब पुलिस ने हनीप्रीत के विश्वास पात्र ड्राइवर प्रदीप को राजस्थान के लक्ष्मणगढ़ इलाके से गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस के मुताबिक ड्राइवर प्रदीप पिछले कई दिनों से सालासर में छिपा हुआ था।
पुलिस हनीप्रीत तक पहुंचने के लिए डेरा सच्चा सौदा की मैनेजिंग कमेटी की चेयरपर्सन विपासना इंन्सा को जरिया बनाना चाहती है। रोहतक जेल में 20 साल की सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम का जो भी राजदार रहा है, पुलिस की अब उस पर पैनी नजर है।
गौरतलब है कि विपासना इन्सां और हनीप्रीत इन्सां के बीच छत्तीस का आंकड़ा माना जाता है। एक तरफ जहां हनीप्रीत ने खुद को गुरमीत राम रहीम की असली वारिस होने का ऐलान कर डाला था। वहीं गुरमीत के जेल जाने के बाद से विपासना कहती आ रही है कि हनीप्रीत का डेरा सच्चा सौदा से कोई लेना देना नहीं है। ना ही उसकी कोई हिस्सेदारी है।
साफ है कि डेरे के मालिकाना हक को लेकर विवाद है। खुद विपासना भी नहीं चाहती कि हनीप्रीत का अब डेरे में कोई दखल हो। इसी खींचतान के बीच हनीप्रीत को ढूंढना पुलिस के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक विपासना के फोन पर 25 अगस्त की रात को हनीप्रीत की एक कॉल आई थी। इसमें हनीप्रीत की लोकेशन राजस्थान के बाड़मेर में थी। हनीप्रीत को सार्वजनिक तौर आखिरी बार रोहतक में देखा गया था। वहां वो डेरे के एक अनुयायी के घर पर ही एक घंटे तक रुकी थी। उसकी कार आखिरी बार हिसार रोड पर जाती देखी गई थी।
उसके बाद से ही हनीप्रीत की कोई भनक तक पुलिस को नहीं लग सकी है। पुलिस पर सरकार का दबाव है कि वो जल्दी से जल्दी देशद्रोह के मामले में वांछित हनीप्रीत और आदित्य इन्सां को पकड़ कर कोर्ट मे पेश करे।

माउंटेन रेजीमेंट के हवाले होगी उत्तराखंड की सीमाएं

भारतीय सीमाओं में चीन की लगातार घुसपैठ की खबरों के बीच अब सेना भी उत्तराखंड में सैन्य क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत सेना सूबे में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ ही यहां अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी) तैनात करने की तैयारी कर रही है। साथ ही हैवी फायरिंग रेंज बनाने को भूमि भी तलाशी जा रही है। अब सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने राज्य में माउंटेन रेजीमेंट की स्थापना की बात कही है।
दून पहुंचे थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि उत्तराखंड की सरहद, देश की किसी भी अन्य सीमा से कम या ज्यादा संवेदनशील नहीं है। हमारे पास यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त ताकत है कि यहां कोई घुसपैठ न हो। हम राज्य में माउंटेन रेजीमेंट स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं और इसके लिए काम चल रहा है।
माउंटेन रेजीमेंट की खासियत
विशेषज्ञ माउंटेन रेजीमेंट की खासियत शत्रु पर सीधे प्रहार की होती है। इसके जवान अत्याधुनिक हथियारों से लैस होते हैं। इसमें उन्हीं जवानों को लिया जाता है जो लंबे वक्त तक पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में रहने के आदी होते हैं। इनको खास तरह की ट्रेनिंग दी जाती है। ये चीते की तरह फुर्तीले और सबसे कम वक्त में सबसे तेज तरीके से किसी भी आपरेशन को अंजाम देने में सक्षम होते हैं।