ऋषिकेश में कुंभ मेला कंट्रोल रूम की बिल्डिंग को नया थाना बनाने के डीजीपी ने दिए संकेत

जी हां, कुंभ मेला के बाद ऋषिकेश में नया पुलिस थाना बनने जा रहा है, यह फैसला ऋषिकेश की आबादी को ध्यान में रखते हुए लिया जा रहा है। इसके संकेत आज पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड अशोक कुमार ने दिए। इसके लिए उन्हें सीओ आफिस के पास कुंभ मेला के मद्देनजर बनाई गए कंट्रोल रूम की बिल्डिंग को चुना है। उन्होंने बिल्डिंग का निरीक्षण करने के बाद कहा कि ऋषिकेश उनकी प्राथमिकता में पहले से ही है। इसलिए यहां की हर गतिविधि पर उनकी नजर रहती है। यहां एक नया पुलिस थाना बनाया जाना है, इसके लिए कंट्रोल रूम की बिल्डिंग बेहतर विकल्प है।

दरअसल आज डीजीपी का पदभार संभालने के बाद पहली दफा ऋषिकेश पहुंचे अशोक कुमार ने कुंभ मेला को लेकर जनता से जनसंवाद और सुझाव कार्यक्रय रखा। मौके पर नगर के व्यापारियों रवि जैन ने पार्किंग, स्टैंड पोस्ट को लेकर समस्या बताई। जिपंस विनोद चैहान ने नेपाली फार्म से सत्यनारायण वाले रूट पर पर्यटकों व श्रद्धालुओं पर गुलदार के आतंक को लेकर अपनी बात रखी। भाजपा नेता ज्योति सिंह सजवाण ने पुलिस सत्यापन, दीपक गौनियाल ने पुलिस की मदद को लेकर युवाओं की भागीदारी पर बात रखी। इन सभी बातों को डीजीपी की ओर से नोट भी किया गया तथा इसमें अमल करने के संकेत भी दिए गए।

गंगानगर में खुलेगी अस्थाई पुलिस चौकी
समाजसेवी व व्यापारी नेता पंकज गुप्ता ने गंगानगर में पुलिस चौकी खोलने की मांग रखी। इस सुझाव को अहम मानते हुए डीजीपी अशोक कुमार ने अस्थाई पुलिस चौकी गंगानगर और बैराज पुल के दोनों साइड खोलने की बात कही।

कांस्टेबल सुधीर सैनी को मिलेगा मेडल
पार्षद गुरविंद सिंह ने लाॅकडाउन के दौरान आईडीपीएल चौकी में तैनात कांस्टेबल सुधीर सैनी का मामला डीजीपी को बताया। कहा कि कांस्टेबल ने लोगों के पेट भरने को अपना निजी खर्च तक लगा दिया। इसके लिए बकायदा चैकी इंचार्ज को कांस्टेबल की गैरमौजूदगी में पार्षद की ओर से सम्मानित किया गया। वहीं, डीजीपी ने कांस्टेबल को मेडल देने की बात भी कही।

सुझाव देने को नंबर किया जारी
कुंभ मेला आईजी संजय गुंज्याल ने मेला को लेकर जनता के सुझाव के लिए उत्तराखंड पुलिस का एक व्हाट्सअप नंबर दिया। कहा कि 9411112945 पर अपने सुझाव दिए जा सकते है।

यह निर्णय भी लिए गए-
– डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि फरवरी अंत तक कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या देखते हुए ऋषिकेश, मुनिकीरेती, लक्ष्मणझूला में 100 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
– कोई भी स्नान कुंभ मेला के दौरान प्रतिबंधित नहीं होगा।
– मुनिकीरेती में पुलिसिंग बढ़ाई जाएगी।
– त्रिवेणी घाट में जल पुलिस की स्थाई चैकी बनाई जाएगी।

स्वर्गाश्रम ट्रस्ट के खिलाफ दो दिवसीय धरना शुरू

नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक के अध्यक्ष और सभासदों ट्रस्ट के खिलाफ दो दिवसीय धरना प्रदर्शन शुरू किया है। सभासदों का आरोप है कि वर्ष 2018 में ट्रस्ट के साथ हुए समझौते पर स्थानीय पदाधिकारी अमल करने को तैयार नहीं है।

दरअसल वर्ष 2018 में स्वर्गाश्रम जो नगर पंचायत और स्वर्गाश्रम ट्रस्ट के बीच कुछ बिंदुओं पर आपस में समझौता हुआ था। लेकिन 3 साल बीतने के बाद भी इन बिंदुओं पर स्वर्गाश्रम ट्रस्ट की ओर से कोई अमल नहीं किया गया है। इससे नाराज होकर नगर पंचायत के अध्यक्ष माधव अग्रवाल और सभासद जितेंद्र धाकड़ और सभासद नवीन राणा ने स्वर्गाश्रम ट्रस्ट के खिलाफ धरना प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है।

इस अवसर पर पंचायत अध्यक्ष माधव अग्रवाल ने कहा कि समझौते की बावत कई बार ट्रस्ट के पदाधिकारियों से वार्ता करने की कोशिश की गई, मगर ट्रस्ट के पदाधिकारी अपने अड़ियल रूख के चलते बात तक करने को तैयार नहीं है। ऐसे में मजबूर होकर पंचायत बोर्ड के सदस्यों ने ट्रस्ट के खिलाफ आंदोलन का रास्ता चुना है।

पंचायत अध्यक्ष माधव अग्रवाल ने बताया कि समझौते के तहत निम्न बिंदुओं पर सहमति बनी थी जो इस प्रकार हैं।

नगर पंचायत और स्वर्गाश्रम ट्रस्ट के मध्य चल रहे कूड़ा निस्तारण स्थल का विवाद समाप्त किया जाता है। पंचायत भवन कार्यालय के चारों ओर बाउंड्री वाल के अंदर की भूमि जो पूर्व में स्वर्गाश्रम ट्रस्ट के द्वारा ग्राम सभा को दी गई थी तब से निरंतर उक्त भूमि पर ग्राम सभा तत्पश्चात नगर पंचायत की देखरेख में है। उक्त भूमि नगर पंचायत को हस्तांतरित की जाएगी। प्याऊ के सामने सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। स्वर्गाश्रम गद्दी के समीप पार्किंग का गेट स्वर्गाश्रम शीघ्र हटा लेगा एवं पार्किंग निरूशुल्क की जाएगी। राजकीय इंटर कॉलेज की ओर हेरिटेज पथ का मुंह चैड़ा किया जाएगा। पाठ के मुख्य मार्ग पर स्थित खोला जाएगा। मेन रोड से गांव की ओर जाने वाले रास्ते का मौका मुआयना कर चैड़ा किया जाएगा। प्राचीन गद्दी के बराबर में पीछे की ओर स्थित यात्री विश्राम गृह को शीघ्र यात्रियों की सुविधा प्रारंभ किया जाएगा।

प्रबंधक जयेश झा का कहना है कि हमने यहां की आज के प्रदर्शन की जानकारी हम अपने ट्रस्ट के ट्रस्टीयों को अवगत करायेंगे।

प्रदर्शन करने वालों में अध्यक्ष माधव अग्रवाल, जितेंद्र धाकड़, सरोज देवी, नवीन राणा, पिंकी शर्मा, रामचंद्र जोशी, कोमल शर्मा, धर्म प्रसाद नौटियाल, विष्णु गुप्ता, गोपाल शर्मा, ऋषभ अग्रवाल, अनिल नेगी, विजय गुप्ता, मुरली शर्मा, विजेंद्र नेगी ने प्रमुख रूप से भाग लिया।

एसएसपी पौड़ी ने किया कोटद्वार के टाइल्स व्यापारी के घर हुई लूट का खुलासा

कोटद्वार। पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार में बीते 25 दिसंबर को चर्चित टाइल्स व्यापारी के घर लाखों रूपए व ज्वैलरी की डकैती व लूट का खुलासा कर दिया। पुलिस की कार्यशैली से खुश होकर डीजीपी अशोक कुमार ने टीम को 20 हजार रूपए का इनाम देने की घोषणा की है।

बतादें कि बीती 25 दिसंबर को शातिरों द्वारा सुबह सात बजे देवी रोड स्थित खुशी होटल के पीछे टाइल्स व्यवसाय प्रमोद प्रजापति के घर को निशाना बनाया गया था। पुलिस ने आरोपियों से दो लाख साठ हजार रूपए की नकदी के साथ सोने के सभी जेबरात लगभग चार लाख रुपये कीमत के और यूनियन बैंक की चैक बुक बरामद की हैं। पुलिस का कहना है इसमें लगभग साठ प्रतिशत लूट का सारा सामान बरामद कर लिया गया है।

एसएसपी पौड़ी पी रेणुका देवी ने बताया कि घटना के बाद से ही पुलिस की सात तेज तर्रार टीमें लगाई गई थी। जिसमें पुलिस ने 9 दिनों के लगातार अथक प्रयास से सोमवार को अभियोग में संलिप्त अभियुक्त राजकुमार छोटा पुत्र जयवीर व उसके चार साथियों को चरथावल क्षेत्र मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश से डकैती के माल सहित गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान अभियुक्त राजकुमार द्वारा बताया गया कि प्रवीण प्रजापति प्रमोद कुमार का करीबी रिश्तेदार है उसने ही हमें बताया कि वह काफी धनवान व्यक्ति है और अन्य जानकारियां भी दीं। प्रवीण प्रजापति द्वारा दी गई जानकारी के बाद 25 दिसंबर की सुबह कपिल कुमार उर्फ रावण, संदीप कुमार उर्फ पिंटू, संजीव कुमार उर्फ सोनू, धीरज, अंकित पुंडीर, प्रवीण प्रजापति ने मिलकर प्रमोद कुमार के घर में डकैती डालने रणनीति बनाई फिर हमने प्रमोद कुमार के घर में डकैती की घटना को अंजाम दिया। अभियुक्तगणों द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश व अन्यत्र भी लूट व डकैती की घटना को अंजाम दिये जाने की जानकारी प्रकाश में आई है। मुख्य अभियुक्तगण प्रवीण प्रजापति पुत्र चंद्रपाल व अंकित पुंडीर पुत्र प्रदीप की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। अभियुक्तो के अन्य अपराधिक इतिहास की जानकारी की जा रही है। घटना का खुलासा करने वाली पुलिस टीम का उत्साहवर्धन करने के लिए पुलिस महानिदेशक ने 20 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है।

उत्तराखंड हैं वास्तव में ईश्वर का घर

प्राचीन काल का मौलिक वातावरण, हिमालय की बुलंद चोटियां और अनेकानेक प्राणियों एवं वनस्पतियों का पर्यावास उत्तराखंड वास्तव में ईश्वर का घर है। यहां ऐसे कई मनोरम स्थल हैं जहां जाने की आकांक्षा दुनिया भर के लोगों के मन में है। कई जगहों के बारे में तो सैलानी बखूबी जानते हैं लेकिन शहरों की भीड़-भाड़ से दूर प्रकृति में गोद में छुपे कई ऐसे भी स्थल हैं जिनसे कम ही लोग वाकिफ हैं। हिल स्टेशन खिरसु ऐसी ही जगह है पौड़ी जिले में 1700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थल शांति की तलाश कर रहे लोगों के लिए बिल्कुल मुफीद है। इस छुपे नगीने तक पहुंचने के लिए पौड़ी शहर से 11 किलोमीटर उत्तर दिशा में जाना पड़ेगा।

सर्दियां आ चुकी हैं और यहां से बर्फ से भरे हिमालय के शिखरों का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। यहां के अछूते प्राकृतिक दृश्य शांतिमय वातावरण प्रदान करते हैं जहां आगंतुकों को बहुत तसल्ली मिलती है। शहरी जिंदगी की व्यस्तता से क्लांत पर्यटक यहां आध्यात्मिक सुकून और शरीर में नई ऊर्जा पाते हैं।

खिली धूप वाले दिन में आप साफ आकाश और चहचहाते पंछियों का दर्शन कर सकते हैं। चीड़, बांज, देवदार से ढके सुंदर पथ और उनके अगल-बगल हरियाली काई और दिलचस्प वनस्पतियां प्रत्येक इंसान में मौजूद भ्रमण-अनुरागी को चिंताओं से मुक्त कर देते हैं और उसे जीवन के वास्तविक अर्थ की खोज हेतु उन्मुख करते हैं। पहले खो जाने का ऐहसास और फिर अपनी आत्मा से जुड़ने का अनुभव व्यक्ति को छोटी-छोटी चीजों के महत्व के बारे में भी जागृत कर देता है। इस निराले शहर में आने वाला सैलानी प्रकृति के मध्य आनंद का पान करते हुए स्वयं को संपूर्ण अनुभव करता है।

कोविड-19 महामारी के इस दौर में ’वर्केशन’ शब्द भी लोकप्रिय हो रहा है, खासकर उत्तराखंड में। जो लोग प्राकृतिक सुषमा एवं शांति के संगम की तलाश में हैं, जहां पर दफ्तरी कार्य करने की उनकी क्षमता बढ़ जाए, उनके लिए खिरसु सही विकल्प है।

खिरसु की संभावनाओं और उत्तराखंड के अहम पर्यटन स्थल के तौर पर उसके विकास के बारे में उत्तराखंड पर्यटन के सचिव दिलीप जावलकर ने कहा, ’’उत्तराखंड में खिरसु जैसे बहुत से सुंदर स्थल हैं जिन पर अब तक पर्यटकों का अधिक ध्यान नहीं गया है। इस कोरोनाकाल में वर्केशन का ट्रैंड राज्य में फलफूल रहा है। हम इस आपदा को अवसर में बदलने के लिए निरंतर कार्यरत हैं तथा उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के लिए हम ऐसे और कई विकल्प पेश करते रहेंगे।’’

खिरसु में वर्केशन सुविधाओं एवं पर्यटकों के आगमन के बारे में पौड़ी जिले के पर्यटन विकास अधिकारी कुशल सिंह नेगी ने कहा, ’’खिरसु पौड़ी के बाहरी क्षेत्र में स्थित है, यह वास्तव में सैलानियों के लिए एक छुपा हुआ खजाना है। सरकार द्वारा पर्यटन संबंधी प्रतिबंध हटा दिए जाने के बाद से पर्यटकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। किसी भी राज्य का खालिस स्थानीय खानपान भी वह कारक होता है जो विभिन्न इलाकों के सैलानियों को आकर्षित करता है। इसी तथ्य के फलस्वरूप हमारे खिरसु में बासा होमस्टे की स्थापना हुई है जिसे यहां की स्थानीय महिलाओं द्वारा चलाया जाता है। वे अतिथियों को अत्यंत सुस्वादु भोजन परोसती हैं और लोक कथाएं भी सुनाती हैं। ऐसे कुछ अन्य प्रोजेक्ट भी निर्माणाधीन हैं जैसे बासा होमस्टे 2, हंटर हाउस और फिशरी होमस्टे।

सैर-सपाटे के लिए नजदीकी स्थल

ज्वाल्पा देवी मंदिरः यह प्रसिद्ध मंदिर है जो पौड़ी-कोटद्वार मार्ग पर स्थित है, पर्यटकों के बीच यह जगह खूब जानीमानी है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां शुद्ध हृदय से की गई प्रार्थनाएं अवश्य फलीभूत होती हैं। यह मंदिर पूरे साल भर खुला रहता है। हर साल नवरात्रों में यहां एक बड़ा धार्मिक मेला लगता है जिसमें पूरे क्षेत्र भर से लोग आते हैं। यहां बिना खर्च के कई विवाह भी सम्पन्न किए जाते हैं।

घंडीयाल देवता मंदिरः घंडियाल देवता का प्राचीन मंदिर स्थानीय भक्तों के बीच प्रसिद्ध है। इन्हें रक्षक देव भी कहा जाता है और मान्यता है कि ये देवता अभिमन्यु का अवतार हैं जो कि भगवान शिव के उपासक थे। घंडियाल मेला इस मंदिर का बहुत बड़ा आकर्षण है। यह 9 दिन 9 रात तक चलता है। आसपास के इलाकों में रहने वाले श्रद्धालु उच्च धार्मिक जज्बे के साथ इस मेले में भाग लेते हैं और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

खिरसु से आगे पर्यटकों के लिए घूमने वाले स्थल

श्रीनगरः यह शहर राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर अलकनंदा नदी के किनारे पर स्थित है। किसी जमाने में यह शहर गढ़वाल के राजाओं की राजधानी हुआ करता था, इस क्षेत्र में राज्य के विस्तार के लिए श्रीनगर की बहुत अहमियत थी। आज यहां गढ़वाल विश्वविद्यालय का केन्द्र है। इस क्षेत्र का यह सबसे बड़ा नगर है।

देवलगढ़ः खिरसु से श्रीनगर की दिशा में यह 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह गढ़वाल साम्राज्य की प्रमुख गढ़ राजधानियों में से एक है। यह साम्राज्य कितना समृद्ध हुआ करता था इसकी बानगी यहां आकर देखने को मिलती है। राज राजेश्वरी मंदिर और गौरी देवी मंदिर इस इलाके के मुख्य आकर्षण हैं।

उल्कागढ़ीः खिरसु (चैबट्टाखाल) से तीन किलोमीटर के फासले पर है उल्कागढ़ी। इसे एक छोटे मंदिर, उल्केशवरी मंदिर के लिए जाना जाता है तथा गढ़वाल साम्राज्य के बहुत से ढांचे भी इस इलाके में देखने को मिल जाएंगे।

पौड़ीः पौड़ी गढ़वाल का जिला मुख्यालय और गढ़वाल मंडल के आयुक्त का मुख्यालय भी यहां स्थित है। खिरसु से यह 20 किलोमीटर और श्रीनगर से 32 किलोमीटर है। पौड़ी के खूबसूरत हिल स्टेशन में औपनिवेशिक वास्तुशिल्प की शैली में कई टूरिस्ट बंगलो बने हुए हैं। यहां ठहरने के लिए आपको कई प्राइवेट होटल मिल जाएंगे। इस शहर में एक बड़ा बाजार भी है जहां से शॉपिंग के शौकीन आसपास के गांवों के निवासियों द्वारा बनाई गई स्थानीय वस्तुएं खरीद सकते हैं।

लैंसडाउनरू देश भर के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सबसे लंबे इतिहास वाला एक हिल स्टेशन है। यह हिल स्टेशन मोटर मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा है। यहां आकर आप शहर की भागमभाग जीवन से आराम मिल सकता है। लैंसडाउन में लंबे सप्ताहांत के ब्रेक के लिए पर्यटक आकर आनंद ले सकते हैं।

जैविक खेती से दिवोली गांव के खेत लहलहा रहे, ग्रामीणों की मेहनत हो रही सफल

पौड़ी गढ़वाल। कोरोना काल के दौरान प्रवासी बड़ी संख्या में गांवों को लौटे। इसी प्रकार पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लॉक के ग्रामसभा शीला तल्ला के दिवोली गांव में भी बड़ी संख्या में प्रवासी गांव लौटे। ग्रामसभा में करीब 50 से अधिक प्रवासी गांव पहुंचे हैं। ये सभी दिल्ली, मुंबई और दुबई में नौकरी करते थे, परिवार भी साथ था। लेकिन, अब सभी गांव आ गए हैं।

कोरोना महामारी के इस दौर में पौड़ी जनपद के विभिन्न गांवों में बड़ी संख्या में प्रवासी घर लौटे हैं। घर लौट कर रोजगार न होने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट था, ऐसे में उत्तराखंड सरकार द्वारा शुरू की गई तमाम योजनाओं ने इनके संकट को कम करने का काम किया। सरकारी मद्द और प्रवासियों के कुछ कर गुजरने के हौंसले ने गांव में रहकर ही काम करने की एक नई राह दिखाई। वहीं कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्होंने बिना सरकारी मद्द के जैविक खेती, मशरूम उत्पादन, कृषि बागवानी कर स्वरोजगार के क्षेत्र में नई शुरूआत की और आज उसमें सफल होते हुए दिखाई दे रहे हैं।

स्वरोजगार से जुड़े युवाओं ने बंजर खेतों को किया आबाद
कोरोना महामारी में बदली हुई परिस्थितियों में पौड़ी जनपद के बीरोंखाल ब्लॉक के ग्रामसभा शीला तल्ला के दिवोली गांव में भी बड़ी संख्या में प्रवासी घर लौटे। कुछ के घर सलामत थे तो कुछ के घर खंडहर बन चुके थे। ऐसे में गांव के अपने परिचितों के यहा शरण ली। कोरोना संकट को खत्म न होता देख प्रवासियों ने गांव में रहकर ही स्वरोजगार करने की राह चुनी। लेकिन करें क्या जिससे उनकी आर्थिकी मजबूत हो। ऐसे में दिवोली गांव के रहने वाले और न्यूज नेशन चैनल के पत्रकार धनंजय ढौडियाल ग्रामीणों की मद्द को आगे आये। धनंजय ने स्वरोजगार को बढ़ावा देने में जुटे अधिकारियों से बातचीत की। धंनजय के निवेदन पर बीडियो आशा राम पंत, पौड़ी तकनीकी संस्थान के विवेकानंद कोठारी, ग्राम विकास अधिकारी और पटवारी दिवोली गांव पहुंचे जहां उन्होंने स्थानीय लोगों को जैविक खेती, बागवनी और मशरूम उत्पादन के लिये प्रोत्साहित किया। जैविक खेती, पर्यटन के लिए प्रवासियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं और कई युवाओं ने इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। बैंक से ऋण दिलाने के लिए पत्रावलियां तैयार करने के साथ ही सरकार की ओर से दी जाने वाली विभिन्न योजनाओं की जानकारियां भी अधिकारी प्रवासियों को उपलब्ध करा रहे हैं। ग्राम विकास से जुड़े अधिकारी सभी प्रवासियों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। साथ ही सरकार की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दे रहे हैं।

दिवोली में जैविक फसलों ने जगाई नई उम्मीद
दिवोली गांव में प्रवासी और ग्रामीण लोंगों ने मिलकर जैविक खेती पर काम करना शुरू किया। पत्रकार धंनजय ढौडियाल की पहल से जनार्धन नौंगाई, श्याम सुंदर नौंगाई, गीताराम नौंगाई, बिलोचन ढौंडियाल, शेखरानंद ढौडियाल, सुबोध नौंगाई, मोहित ढौंडियाल, सुनील ढौंडियाल, मोहन ढौंडियाल, देवेन्द्र ने मिलकर जैविक खेती की शुरूआत की। ग्रामीणों ने देवली गांव में पानी के निकट के बंजर खेतों में मेहनत शुरू की। आज उस मेहनत का फल मिलता हुआ दिखाई दे रहा है। यह खेत फसलों से लहलहा उठे हैं। आज इन खेतों में मटर सहित कई सब्यिजां उग रही हैं।

दिवोली गांव के बिलोचन ढौंडियाल बताते हैं कि गांव मे स्थायी रोजगार बढ़ाने की जरूरत है। गांव में रोजगार के लिए पर्यटन, जैविक खेती जैसी योजनाओं को बढ़ावा देना होगा। उत्तराखंड में अपार संभावनाएं हैं। कहा कि सभी प्रवासी गांव में जैविक खेती, पर्यटन, बागवानी, फलोत्पादन के लिए काफी उत्साहित हैं। जल्द गांव में प्रवासी नया जीवन शुरू करेंगे।

मंत्री ने सचिव को लिखा पत्र, कार्रवाई के दिए निर्देश

सहकारिता, उच्च शिक्षा, दुग्ध विकास एवं प्रोटोकाॅल मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सड़को की समीक्षा बैठक ली। जिसमें नए मोटर मार्गों की प्रगति के साथ ही पुरानी सड़कों के मरम्मत एवं डामरीकरण की धीमी गति पर विभागीय अधिकारियों से नाराजगी व्यक्त की। यही नहीं उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को बैठक से वापस भेजते हुए सचिव लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही के निर्देश भी दिये।

विधानसभा सत्र के भोजनावकाश के दौरान डाॅ. रावत ने अपने कार्यालय कक्ष में लोक निर्माण विभाग एवं पीएमजेएसवाई के अंतर्गत निर्माणाधीन एवं पुरानी सड़कों के मरम्मत एवं डामरीकरण की धीमी प्रगति को लेकर अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। बैठक के दौरान डाॅ. रावत द्वारा लोनिवि के अधिकारियों से देघाट-समैया-जगतपुरी-बूंगीधार मोटर मार्ग, बूंगीधार-बीरू की धुनी-नक्चुलाखाल मोटर मार्ग, उफरैंखाल-सराईखेत मोटर मार्ग एवं चैखाल-उफरैंखाल मोटर मार्गों के मरम्मत एवं डामरीकरण की प्रगति रिपोर्ट जाननी चाही तो विभागीय अधिकारी बगलें झांकने लगे। जिस पर डा. रावत ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए बैठक से चले जाने के निर्देश दिये।

उनका कहना था कि उक्त सड़कों के संदर्भ में इससे पूर्व भी दो बैठकें हो चुकी है जिसमें स्वयं विभागीय सचिव आर.के. सुधांशु भी मौजूद थे। इसके बावजूद उक्त सड़कों के मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो पाया। जिस पर उन्होंने सचिव लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिये।

बैठक में पीएमजेएसवाई के अंतर्गत आने वाले पुलों एवं मोटर मार्गों की भी समीक्षा की गई। जिनमें ईडा-नौगांव मोटर मार्ग सौंठी बैंड तक मिलाने एवं थलीसैण-जखोला मोटर मार्ग पर आ रहे राजकीय महाविद्यालय थलीसैण के खेल मैदान की सुरक्षा के लिए सुरक्षा दीवार लगाने के निर्देश दिये। इसके अलावा उन्होंने चाकीसैण-जाख मोटर मार्ग को पीएमजेएसवाई से लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित करने के निर्देश अधिकारियों को दिये गये। वहीं माजरामहादेव -नौलीसैण मोटर मार्ग, समैया-बसोला मोटर मार्ग के डामरीकरण एवं सौन्दर-ऐंठी मोटर मार्ग पर पुल के डीपीआर बनाने निर्देश भी अधिकारियों को दिये।

बैठक में पीएमजेएसवाई के अधिकारियों ने बताया कि उनके पास सड़कों के मरम्मत हेतु बजट की भारी कमी है जिसके लिए राज्य सरकार को अलग से व्यवस्था करनी होगी।

बैठक में प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग हरिओम शर्मा, मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग पौड़ी अयाज अहमद, मुख्य अभियंता पीएमजेएसवाई के.पी. उप्रेती, अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग पौड़ी राजेश चंद्र शर्मा, अधिशासी अभियंता पाबौं दिनेश मोहन गुप्ता, अधिशासी अभियंता श्रीनगर प्रत्यूष कुमार, अधिशासी अभियंता बैजरों आदर्श गोपाल सिंह, अधिशासी अभियंता पीएमजेएसवाई महेन्द्र सिंह, सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी श्रीनगर मुकेश सकलानी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।

जीएमओयू की बसें दौड़ेंगी कंडी रोड, रामनगर व कोटद्वार के बीच सफर होगा आधा


देहरादून। कोटद्वार से लेकर रामनगर तक की जनता के लिए अच्छी खबर है। कोटद्वार-रामनगर जाने वाले कंडी मार्ग पर जीएमओयू की बस का संचालन फिर से किया जाएगा। यह फैसला को वन मंत्री हरक सिंह रावत ने वन मुख्यालय में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में लिया।

कंडी मार्ग पाखरों-मोरघट्टी-कालागढ़-रामनगर के बीच अब गढ़वाल मोटर्स ऑनर्स यूनियन लिमिटेड (जीएमओयू) की बस सेवा शुरू होगी। शुक्रवार को वन मुख्यालय में वन मंत्री हरक सिंह की बैठक में यह फैसला किया गया। इस मार्ग के शुरू होने पर कोटद्वार और रामनगर के बीच दूरी आधी रह जाएगी।

वन मुख्यालय में इस सड़क पर जीएमओयू की बसों के संचालन का फैसला होने के बाद मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग की ओर से कांर्बेट पार्क प्रशासन से भी बस संचालन की अनुमति का आदेश जारी करने का निर्देश जारी किया। पहले इस रूट पर जीएमओयू की बस का संचालन होता था। हाईकोर्ट के आदेश पर बसों का संचालन रोक दिया गया।

वन मंत्री हरक सिंह के मुताबिक हाईकोर्ट ने निजी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई थी। जीएमओयू की बसें सार्वजनिक परिवहन का हिस्सा हैं। इसके बावजूद इन बसों के संचालन पर अधिकारियों ने रोक लगाई। इस रूट से रामनगर और कोटद्वार के बीच करीब 80 किलोमीटर का ही फासला रह जाता है। यूपी होते हुए जाने पर यह रूट 160 किलोमीटर का है।

निजी वाहनों को अनुमति नहीं

निजी वाहन से इस रूट का इस्तेमाल करने के लिए अभी अनुमति की जरूरत पड़ेगी। वन मंत्री के मुताबिक इस रूट पर बस संचालन होने पर सामान्य यात्रियों का सबसे अधिक राहत मिलेगी। पर्यटकों के लिए पाखरों से अब जिप्सियों का संचालन किया जा रहा है। अब तक 15 जिप्सियों का पंजीकरण भी हो चुका है।

कोटद्वार-कांडा-ढिकाला रूट को भी मंजूरी, 25 से संचालन शुरू

कोटद्वार से कांडा होते हुए कार्बेट के ढिकाला जोन तक अब आसानी से पहुंचा जा सकेगा। यह रूट भूस्खलन के कारण वन क्षेत्र में आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया था। हरक सिंह के मुताबिक कार्बेट फाउंडेशन से मिले फंड से इस रूट की मरम्मत कराई गई। अब यह मार्ग आवाजाही के लिए खोला जाएगा। 25 दिसंबर को खुद वे इस रूट पर परिवहन संचालन का शुभारंभ करेंगे।

एसडीएम यमकेश्वर ने की तीर्थनगरी की प्रतिभाओं की सराहना

वल्र्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में हिस्सा लेने वाले चित्रकार राजेश चन्द्र व अमरजीत सिंह राणा को उप जिलाधिकारी यमकेश्वर मनीष कुमार सिंह ने लक्ष्मण झूला स्थित कैंप कार्यलय में पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया।

बता दें कि हाल ही में चित्रकार राजेश चंद्र की अगुवाई में तीर्थनगरी के कलाकारों ने वल्र्ड बुक ऑफ रिकार्ड के प्रदर्शनी में हिस्सा लिया था। इस प्रदर्शनी को विश्व की सबसे बड़ी ऑनलाइन क्रिएटिव इवेंट के खिताब वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड यूनाइटेड किंगडम से मिला। उप जिलाधिकारी ने राजेश चंद्र, अमरजीत, मानसी, सानिया व सागर को शुभकामनाएं प्रेषित कर आगे भी इसी तरह राज्य व देश का नाम रोशन करने की शुभकामनाएं दी। बताया कि हमारा राज्य प्रतिभाओ से भरा हुआ है बस जरूरत है तो उन्हें पहचानने की।

इस मौके पर मनीष कुमार सिंह, राजेश चन्द्र, चंद्रप्रकाश भारती व अमरजीत सिंह राणा मौजूद रहे।

यमकेश्वर एक्सप्रेस के नाम से विद्यालय का हुआ लोकार्पण

विश्व प्रसिद्ध लक्ष्मणझूला तक अब यमकेश्वर एक्सप्रेस पहुंच गई है, मजेदार बात यह है कि यह एक्सप्रेस सिर्फ स्कूली बच्चों के लिए ही है। इसमें बच्चों का न सिर्फ मनोरंजन हो सकेगा, बल्कि शिक्षा भी मिलेगी। जी हां, लक्ष्मणझूला क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय का चार लाख रूपए की विधायक निधि से जीणोद्धार किया गया है, इसे यमकेश्वर एक्सप्रेस का नाम दिया गया है, जिसे आज भाजपा विधायक रितु खंडूरी ने लोकार्पित किया है।

इस स्कूल में अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए मनोरंजन का भी ध्यान रखा गया। इसके लिए बकायदा स्कूल की दीवारों को एक ट्रेन का रूप दिया गया है, जो बाहर से बड़ा ही आकर्षण का केंद्र है। इस कक्ष में बैठने पर बच्चों को एक पल के लिए यह तो एहसास जरूर होगा कि वह किसी ट्रेन के भीतर बैठे हों।

विधायक रितु खंडूरी ने लोकार्पण अवसर पर कहा कि यह एक्सप्रेस को वह पूरे यमकेश्वर में घुमाने वाली हैं, यह अब रूकने वाली नहीं है। इस दौरान पूर्व नपां अध्यक्ष शकुंतला राजपूत, मनीष राजपूत, सभासद जितेंद्र सिंह धाकड़ नवीन राणा, विधायक प्रतिनिधि अश्वनी गुप्ता आदि मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने किया ऋषिकेश में जानकी झूला पुल का लोकार्पण


मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गंगा नदी पर टिहरी से पौड़ी को जोड़ने वाले जानकी झूला पुल का लोकार्पण किया। मुनिकीरेती गंगा नदी में निर्मित यह झूला पुल 48.85 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ है। इसकी लंबाई 346 मीटर है, यह पैदल के साथ दोपहिया वाहनों के लिए भी उपलब्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही ऋषिकेश में अभिनव कला वाला ग्लास युक्त बजरंग पुल का भी लोकार्पण किया जायेगा। यह पुल भी डोबरा-चांठी की भांति देश व दुनिया के लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनेगा। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही सिंगटाली एवं बीन नदी पर भी एकेश्वर क्षेत्र के लिये पुल का निर्माण किया जायेगा। योजनाओं के निर्माण के लिये पूरी एकमुश्त धनराशि स्वीकृत की जा रही है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य में पिछले साढ़े तीन साल में 250 से अधिक पुलों के निर्माण का रिकार्ड बना है। इन पुलों में सीमांत क्षेत्रों में बनने वाले पुल भी शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रदेश में परम्परा से हटकर कार्य करना आरम्भ किया है। अब योजनाओं के निर्माण के लिये 2-4 करोड़ स्वीकृत करने के बजाय योजना की लागत का पूरा बजट तथा एक साल में अधिकतम व्यय होने वाली पूरी धनराशि स्वीकृत की जा रही है। डोबरा चांठी पुल के लिये 88 करोड़ एकमुश्त स्वीकृत होने का ही परिणाम रहा कि आज यह पुल बनकर जनता को समर्पित कर दिया गया है। हमारी सोच लक्ष्य पूरा करने की है।

14 वर्ष की लंबी यात्रा के बाद बना जानकी झूला पुल
कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि 14 वर्ष के लंबी यात्रा के बाद आज जानकी पुल का मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा लोकार्पण किया। इस पुल लोकार्पण केवल आवागमन का ही माध्यम नहीं है। नौजवानों को रोजगार की संभावनाओं को बलवती बनाना भी है। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश विविध विविधताओं को समेटे हुए है।

जानकी सेतु लोगों के विश्वास, आस्था एवं सपनों को यथार्थ करने का प्रतीक
विधायक ऋतु खण्डूड़ी ने कहा कि जानकी सेतु ऋषिकेश एवं यमकेश्वर क्षेत्र के लिए विश्वास, आस्था एवं सपनों को यथार्थ करने का प्रतीक है। यह पुल उत्तराखण्ड में आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केन्द्र एवं सुविधाजनक होगा।

इस अवसर पर पालिकाध्यक्ष रोशन रतूड़ी, मेयर ऋषिकेश अनिता मंमगाई, गढ़वाल मण्डल विकास निगम के उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार सिंघल, सचिव लोक निर्माण विभाग आरके सुधांशु, जिलाधिकारी टिहरी इवा आशीष श्रीवास्तव, एसएसपी टिहरी डॉ. वाईएस रावत आदि उपस्थित रहे।