प्रदेश में पंचकर्मा केन्द्रों को बढ़ावा देने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने शुक्रवार को सचिवालय में आयुष विभाग के अन्तर्गत प्रदेश में पंचकर्मा केन्द्रों को बढ़ावा दिए जाने के सम्बन्ध में बैठक की।
मुख्य सचिव ने कहा कि यह प्रदेश में आयुर्वेद को मजबूती दिए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए आयुर्वेद में पंचकर्मा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऋषिकेश और देहरादून में विश्वस्तरीय पंचकर्मा केन्द्र बनाए जाएं।
मुख्य सचिव ने कहा कि केरला आयुर्वेद को प्रदेश में बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के डॉक्टर्स सहित 100 प्रतिशत स्टाफ को प्रशिक्षण कराया जाए। डॉक्टर्स को प्रशिक्षण हेतु उच्च स्तरीय संस्थानों में भेजे जाने की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए सेमिनार भी आयोजित किए जाने की बात कही। कहा कि आयुर्वेदिक संस्थानों और आयुर्वेदिक चिकित्सकों को राज्य से जो भी सहायता चाहिए, उन्हें दी जाएगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि आयुर्वेदिक पद्यति उच्च स्तरीय होने के बावजूद प्रमाणों की कमी के कारण ज्यादा प्रयोग में नहीं ली जाती। उन्होंने कहा कि इसके लिए अनुसंधान और प्रलेखन की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। रिसर्च को बढ़ावा दिए जाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाए। उन्होंने कहा कि जानकारी और प्लेटफॉर्म न मिलने के कारण इस दिशा में किए गए कार्यों की किसी को जानकारी नहीं होती। उन्होंने इसके लिए ई-मैगजीन भी संचालित किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इसमें सभी के लिए शोध आदि प्रकाशित किए जाएं, ताकि इससे इस दिशा में किए जा रहे कार्यों की सभी को जानकारी हो सके। साथ ही, आमजन को जानकारी के लिए ई-पत्रिका, टीवी चैनल और रेडियो चैनल भी संचालित किए जा सकते हैं।
मुख्य सचिव ने आयुष विभाग को अपनी वेबसाइट भी अपग्रेड करने के निर्देश दिए। कहा कि अपनी वेबसाइट में बीमारी और उनके उपचार के साथ ही प्रदेश में उनसे सम्बन्धित कौन कौन सी सुविधाएं कहां कहां उपलब्ध हैं, सभी प्रकार की जानकारी उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने हाईपरटेंशन, डायबिटीज आदि जैसी आम बीमारियों के कारण एवं उपचार को भी इसमें शामिल किए जाने की बात कही।
मुख्य सचिव ने इस क्षेत्र में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे फर्जी डॉक्टर्स और संस्थानों को रोकने हेतु सिस्टम विकसित किए जाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता बनाए रखने के लिए संस्थानों को रजिस्टर किए जाने के साथ ही मान्यता पर भी कार्य करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर सचिव आयुष डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में कई बिन्दुओं पर बनी सहमति

सहायक प्रजनन तकनीकी अधिनियम 2021 एवं सरोगेसी रेगुलेशन एक्ट 2021 को राज्यों में लागू करने को लेकर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 मनसुख मंडविया की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय बोर्ड की बैठक में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों के साथ वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया। बैठक में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) क्लीनिकों और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) बैंकों को विनियमित और पर्यवेक्षण के दुरूपयोग को रोकने, प्रजनन स्वास्थ्य सहित विभिन्न बिन्दुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई। दोनों एक्ट को लेकर गठित राष्ट्रीय बोर्ड में स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत को भी सदस्य बनाया गया है, जो कि देशभर के अकेले स्वास्थ्य मंत्री हैं जिनको बोर्ड में बतौर सदस्य नामित किया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री एवं राष्ट्रीय बोर्ड के सदस्य डॉ0 धन सिंह रावत ने बताया कि सहयक प्रजनन तकनीकी अधिनियम 2021 एवं सरोगेसी रेगुलेशन एक्ट 2021 को लेकर आज केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय बोर्ड की बैठक हुई। जिसमें देशभर के स्वास्थ्य मंत्रियों एवं उच्चाधिकारियों ने प्रतिभाग किया। बैठक में एआरटी एवं सरोगेसी एक्ट के प्रावधानों को लेकर केरल उच्च न्यायालय एवं हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये आदेशों के अनुपालन पर चर्चा की गई। जिसमें सरोगेसी में प्रावधिन, उम्र, पात्रता एंव दंड के प्राविधानों को लेकर विचार-विमार्श किया। जिसमें स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने भी अपने सुझाव रखे। विभागीय मंत्री डॉ0 रावत ने बताया कि उत्तराखंड में राज्य स्तरीय एआरटी एवं सरोगेसी बोर्ड तथा राज्य स्तरीय अप्रोप्राइटी अथॉरिटी का गठन कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में एआरटी क्लीनिक एवं एआरटी बैंकों के लिये अबतक दो दर्जन से अधिक आवेदन प्राप्त हुये हैं। सभी प्रकार के आवेदनों पर पंजीकरण की प्रक्रिया गतिमान है। राष्ट्रीय बोर्ड से प्राप्त दिशा निर्देशों के उपरांत राज्य स्तरीय बोर्ड की बैठक आहूत कर प्राप्त आवेदनों पर निर्णय ले लिया जायेगा।

वर्चुअल बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 रावत के अलावा स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ0 विनीता शाह, संयुक्त सचिव एम0एस0 चैहान, निदेशक एनएचएम डॉ0 सरोज नैथानी, निदेशक स्वास्थ्य डॉ0 मीतू शाह, अपर निदेशक चिकित्सा उपचार डॉ0 अमलेश कुमार, संयुक्त निदेशक परिवार कल्याण सहित अन्य विभागीय अधिकारी ने भी प्रतिभाग किया।

मास्टर प्लान से नहीं होगी स्पेशलिस्ट डाॅक्टर्स की कमी

उत्तराखंड में अब स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की कमी को दूर करने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया गया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए सारी तैयारियां कर ली है। स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की कमी के कारण जहां पहाड़ों और ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को दिक्कत होती थी अब उन दिक्कतों को दूर कर लिया जाएगा।

सभी के स्वास्थ्य का ठीक से ध्यान रखा जाए इसके लिए नेशनल हेल्थ मिशन लगातार अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है। इसी के अंतर्गत 16 फरवरी को पहले चरण के इंटरव्यू किए जाने हैं। राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टर को अब राज्य सरकार की तरफ से वह तमाम सुविधाएं मिल सकेंगी जो उन्हें निजी क्षेत्र में मिलती है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की लगातार तैयारियों में जुटा हुआ था।

राज्य के स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने अवगत कराया कि लगातार पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की जा रही है। कई जगहों से हमें यह जानकारी मिली कि विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले मरीजों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. लेकिन अब राज्य सरकार विशेषज्ञों को तैनात करने की दिशा में काम कर रही है. डॉक्टर आर राजेश कुमार ने अवगत कराया कि स्वास्थ्य विभाग के पास ना तो दवाइयों की कमी है, ना सुविधाओं की कमी है और न ही अस्पतालों में मशीनों की कमी है। लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर ना होने से कई बार समस्या बढ़ जाती थी। इसे अब दुरुस्त कर लिया जाएगा।

राज्य का स्वास्थ्य विभाग एक नए मिशन के साथ तैयारियों में जुटा हुआ है ताकि प्रत्येक नागरिक को सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके।

कोरोनेशन अस्पताल में मेडिट्रीना हार्ट सेंटर का विधिवत शुभारम्भ

जिला कोरोनेशन अस्पताल देहरादून में पीपीपी मोड़ में संचालित मेडिट्रीना ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के हार्ट सेंटर में अब बच्चों की हार्ट सर्जरी सहित अन्य सभी कार्डियेक डिजीज का बेहतर उपचार मिल सकेगा। यही नहीं इस सेंटर में सीजीएचएस लाभार्थियों, आयुष्मान कार्ड धारकों व आरबीएसके योजना के अंतर्गत विशेष छूट के साथ लोगों का इलाज किया जायेगा।

यह बात स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने कोरोनेशन अस्पताल देहरादून में मेडिट्रीना हार्ट सेंटर के उद्घाटन समारोह में कही। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश के हृदय रोगियों को देहरादून में ही हार्ट सर्जरी एवं अन्य कार्डिक डिजीज का बेहतर एवं सस्ता इलाज मिल सकेगा। डॉ0 रावत ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग एवं मेडिट्रीना ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के बीच स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनुमन्य दरों पर हृदय संबंधी रोगों का बेहतर उपचार का अनुबंध किया गया है। जहां पर बीपीएल कार्ड धारकों तथा छोटे बच्चों का हृदय संबंधी उपचार आरबीएसके योजना के तहत निःशुल्क किया जायेगा। इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने मेयर देहरादून सुनील उनियाल गामा व क्षेत्रीय विधायक खजान दास की मौजूदगी में मेडिट्रीना हार्ट सेंटर का रिबन काट कर विधिवत उद्घाटन किया। उन्होंने हाई सेंटर के ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू व कैथ लैब सहित सभी इकाईयों का भ्रमण कर बारीकी से अवलोकन किया। डॉ0 रावत ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिये प्रतिबद्ध है। जिसके तहत प्रत्येक सरकारी अस्पतालों में 265 पैथौलॉजी जांचे निःशुल्क कराई जा रही है तथा 429 दवाएं मुफ्त दी जा रही है। प्रत्येक जिला अस्पताल में डायलिसिस की निःशुल्क सेवाएं उपलब्ध है तथा डायबिटीज के रोगियों के लिये अस्पतालों में इंसुलिन के इंजेक्शन मुफ्त दिये जा रहे हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के लिये सभी जांचों एवं टीकाकरण के साथ जच्चा-बच्चा को खुशियों की सवारी योजना के तहत घर से अस्पताल व अस्पताल से घर पहुंचाने की व्यवस्था निःशुल्क दी जा रही है। दूर-दराज के क्षेत्रों के लिये आपातकालीन स्थिति में एयर एम्बुलेंस की सुविधा भी निःशुल्क उपलब्ध है। मेडिट्रीना ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के बोर्ड एडवाइजर सिद्धार्थ ढौंडियाल ने बताया कि कोरोनेशन अस्पताल में स्थापित मेडिट्रीना हार्ट सेंटर दक्षिण भारत के कोलम स्थित मेडिट्रीना ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल की एक इकाई है, जहां पर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा बच्चों से लेकर हर उम्र के लोगों की हार्ट सर्जरी तथा अन्य कार्डियेक डिजीज का बेहतर उपचार किया जाता है। उन्होंने कहा कि मेडिट्रीना ग्रुप देश के विभिन्न राज्यों सहित विदेशों में भी अपनी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है, जिसकी स्थापना विश्व विख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ0 एन0 प्रताप कुमार के द्वारा की गई है। हार्ट सेंटर पर वर्तमान में ओपीडी, ईसीजी, ईको, टीएमटी, एंजियोप्लास्टी, सर्जरी व आरबीएसके सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध है। जिनमें एएसडी क्लोजर, आईसीआर, बेंटल, कैबैग जैसी जटिल हार्ट सर्जरी की सुविधा भी शामिल हैं, जोकि राज्य के अन्य अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है। इन सुविधाओं का लाभ प्रदेश का कोई भी व्यक्ति आयुष्मान योजना के अंतर्गत ले सकता है। इस अवसर पर मेयर सुनील उनियाल गामा व क्षेत्रीय विधायक खजान दास ने स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों की जमकर प्रशंसा की।

कार्यक्रम में निगर निगम देहरादून के मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक राजपुर खजान दास, अपर सचिव स्वास्थ्य अमनदीप कौर, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ0 विनीता शाह, सीएमओ देहरादून डॉ0 मनोज उप्रेती, पीएमएस कोरोनेशन अस्पलात डॉ0 शिखा जंगपांगी, डॉ0 यू0एस0 कंडवाल, डॉ0 तुहीन कुमार, मेडिट्रीना ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के बोर्ड एडवाइजर सिद्धार्थ ढ़ौडियाल, सी.ओ.ओ. प्रवीन तिवारी, यूनिट इंचार्ज भावेश मोगा, कार्डिक सर्जन डॉ0 विकास सिंह, कार्डियोलॉजिस्ट डा0 इरफान, डॉ0 संदीप मालवीय, मनोज मिश्रा, पंकज शर्मा, कोमल सहित अस्पताल स्टॉफ व विभिन्न कॉलेजों के नर्सिंग छात्र-छात्राएं उपस्थित रही।

आंगनबाडी व स्कूलों के मिडण्डे मील में भी शामिल होगा मिलेट्स

स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि वर्तमान समय में बेहत्तर स्वास्थ्य के लिये मोटा अनाज को अपने आहार में शामिल करना जरूरी हो गया है। इसके लिये प्रदेश में मोटे अनाजों की खेती को बढ़ावा देना होगा। मोटे अनाजों की बढ़ती मांग से जहां एक ओर नये रोजगार का सृजन होगा वहीं पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन में भी कमी आयेगी। राज्य सरकार शीघ्र ही आंगनबाडी केन्द्रों व स्कूलों के मिडडेमील में भी मोटे अनाजों को शामिल करेगी।

यह बात स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 रावत ने खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के तत्वाधान में शीशमबाडी ऋषिकेश में आयोजित आईवाईओएम 2023 ईट राइट मिलेट्स मेला के शुभारम्भ के मौके पर कही। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 को यूएनओ के आह्वान पर पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। जिसमें भारत की भूमिका अहम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्ताव पर ही यूएनओ ने वर्तमान वर्ष को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित किया है। उत्तराखंड मोटे अनाजों के उत्पादन का प्रमुख केन्द्र रहा हैए लिहाजा मोटे अनाजों के उत्पादन एवं प्रचार-प्रसार में हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
डॉ0 रावत ने कहा कि राज्य सरकार ने हाल ही में मंडवे की खेती को प्रोत्साहन देने के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य रूपये 25 से बढ़ाकर रूपये 35ण्50 कर दिया है। सहकारिता विभाग के अंतर्गत राज्य सहकारी समितियों के माध्यम से प्रदेशभर में सीधे किसानों से मंडवे का क्रय किया जा रहा हैए जोकि किसानों की आय दुगनी कराने में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। इसके अलावा झंगोराए चौलाईए चिणाए कुट्टू आदि मोटे अनाजों के पैदावार व प्रचारण्प्रसार पर भी सरकार कृषि विभाग के माध्यम से विशेष प्रोत्साहन दे रही है। उन्होंने मेले में आये विभिन्न होटलए रेस्ट्रो व स्वयं सेवी संगठनों के प्रतिनिधियों से मोटे अनाजों के पकवान को बढ़ावा देने का अह्वान किया तथा उनके द्वारा मौके पर तैयार मोटे अनाजों के विभिन्न व्यंजनों की सराहना की। मेले में विभिन्न स्कूलों से आये छात्रण्छात्राओं द्वारा मोटे अनाजों पर आधारित पेंटिंग्स एवं रंगोली का प्रदर्शन किया गया जिसका स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 रावत ने बारीकी से अवलोकन किया तथा छात्र-छात्राओं को बेहतर प्रदर्शन के लिये पुरस्कृत भी किया।
कार्यक्रम में अपर आयुक्त एफडीए अरूणेन्द्र सिंह चौहान ने विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुये बताया कि यह वर्ष का पहला मिलेट्स मेला है जिसको अंतर्राष्ट्रीय कैंडी कम्पनी सेंटर फ्रेश व लेमन ट्री द्वारा प्रायोजित किया गया। उन्होंने मेले में प्रतिभागिता के लिये रोटरी क्लब व प्रायोजक कम्पनी सहित देहरादूनए ऋषिकेश के होटलए रेस्ट्रा प्रतिनिधियों व विभिन्न स्वयं सहायता समूहों तथा एनजीओ का आभार जताया। प्रायोजक कंपनी के प्रतिनिधि प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिये वह आगे भी राज्य सरकार द्वारा आयोजित मेलों में हरसंभव अपना सहयोग प्रदान करते रहेंगे। मिलेट्स मेले में स्थानीय लोगों के साथ ही छात्र-छात्राओं ने मोटे अनाजों से बने विभिन्न पकवानों का जमकर लुत्फ उठाया। कार्यक्रम का संचालन विनय ध्यानी ने किया।

कार्यक्रम में जिलाधिकारी टिहरी सौरभ गहरवार, सीएमओ, पंचायतीराज अधिकारी मुख्य कृषि अधिकारी एआर कॉपरेटिवए उपायुक्त एफडीएए औषधि नियंत्रकए जिला खाद्य अधिकारी बीज बचाओ अंदोलन के प्रणेता विजय जड़धारी सहित विभिन्न स्कूलों के छात्रण्छात्राएं व शिक्षक उपस्थित रहे।

मेडिकल कॉलेजों और विभागीय निर्माण कार्यों में तेजी लाने के दिये निर्देश

कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत विभिन्न मदों में स्वीकृत बजट को खर्च करने की धीमी गति पर विभागीय अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि अधिकारी माह फरवरी 2023 तक विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत राज्य व केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकृत बजट को शत-प्रतिशत खर्च करें। यदि किसी परियोजना में नियत समय पर बजट खर्च नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही अमल में लायी जायेगी। विभागीय मंत्री ने सचिव स्वास्थ्य एवं निदेशक चिकित्सा शिक्षा को एक सप्ताह के भीतर पिथौरागढ़ में स्वीकृत मेडिकल कॉलेज के स्थलीय निरीक्षण करने को कहा।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने आज स्वास्थ्य महानिदेशालय देहरादून में स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने वर्ष 2022-23 में स्वीकृत विभिन्न परियोजनाओं, निर्माण कार्यों के साथ ही मेडिकल उपकरण व दवा खरीद संबंधी बजट व्यय की विस्तृत समीक्षा की। डॉ0 रावत ने मेडिकल कॉलेजों एवं स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत बजट खर्च करने की धीमी गति पर संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई। विभागीय मंत्री ने कहा कि सभी अधिकारी विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत बजट को माह फरवरी 2023 तक शत-प्रतिशत खर्च करना सुनिश्चित करें। यदि किसी भी परियोजना का बजट नियत समय तक खर्च नहीं होता है और स्वीकृत धनराशि लैप्स होती है तो उसके जिम्मेदार अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी। बैठक में चिकित्सकीय उपकरण व दवा क्रय हेतु स्वीकृत बजट की भी विस्तार से समीक्षा की। डॉ0 रावत ने जिला चिकित्सालयों एवं मेडिकल कॉलेजों में सीटी स्कैन व एक्स-रे मशीनों की शीघ्र क्रय के निर्देश दिये। उन्होंने राजकीय मेडिकल कॉलेज पिथौरागढ़ के निर्माण हेतु टेंडर प्रक्रिया में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताई तथा विभागीय सचिव आर0 राजेश कुमार व निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ0 आशुतोष सयाना को मेडिकल कॉलेज का स्थलीय निरीक्षण कर शीघ्र निर्माण कार्य शुरू कराने के निर्देश दिये। बैठक में एनएचएम के अंतर्गत विभिन्न परियोजनाओं के तहत स्वीकृत धनराशि के व्यय की धीमी गति पर भी विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुये नियत समय पर बजट खर्च करने के निर्देश दिये। उन्होंने योजना के अंतर्गत विभिन्न जनपदों में स्वीकृत ट्रांजिस्ट हॉस्टल व सीसीबी के निर्माण कार्यों में भी तेजी लाने को कहा। इसके अलावा उन्होंने आईईसी के अंतर्गत योजनाओं के प्रचार-प्रसार व प्रशिक्षण के कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये। सूबे के मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्साकों की कमी पर चिंता जाहिर करते हुये विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को रेडियोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, कार्डियो एवं न्यूरो सर्जन की तैनाती के लिये प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिये।
बैठक में सचिव स्वास्थ्य आर0 राजेश, मेडिकल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 हेम चन्द्र, अपर सचिव अरूणेन्द्र चौहान, अमनदीप कौर, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ0 विनीता शाह, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ0 आशुतोष सयाना, निदेशक गढ़वाल मंडल डॉ0 बनकोटी, वित्त नियंत्रक चिकित्सा शिक्षा विवेक स्वरूप, परीक्षा नियंत्रक मेडिकल विवि प्रो0 विजय जुयाल, कुलसचिव डॉ0 एम0के0 पंत सहित स्वास्थ्य विभाग एवं एनएचएम के अधिकार मौजूद रहे।

धामी सरकार के निर्देश पर शासन ने जारी किया वेतनवृद्धि का आदेश

वेतनवृद्धि की लम्बी लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के 368 संविदा कार्मिकों की वर्षों पुरानी मुराद पूरी हो गई है। कॉलेज की स्थापना से लेकर अब तक अल्प वेतन में काम कर रहे कार्मियों ने इसका श्रेय धामी सरकार को दिया। कार्मिकों का कहना है कि वेतनवृद्धि को लेकर उनकी मांग को मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने तवज्जो दी और वर्षों पुरानी समान कार्य-समान वेतन की मांग को अमलीजामा पहनाया।
राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर गढ़वाल में स्थापना के समय से ही विभिन्न श्रेणी के शिक्षणेत्तर पदों पर तात्कालिक आवश्यकता के अनुसार संविदा, दैनिक एवं नियत वेतनमान के आधार पर तैनात कार्मिक अल्प मानदेय पर कार्य करते आ रहे थे। जबकि उन्हीं के समकक्ष उपनल के माध्यम से तैनात कार्मिक उनसे दुगने मानदेय पर कार्य कर रहे थे। जिसको लेकर मेडिकल कॉलेज के अल्प मानदेय प्राप्त कार्मिकों में शासन व कॉलेज प्रशासन के विरूद्ध काफी असंतोष व्याप्त था। इसका खामियाजा स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत को भी अपने विधानसभा चुनाव के दौरान कार्मिकों के विरोध के रूप में भुगतना पड़ा। मामला संज्ञान में आने पर मुख्यमंत्री ने विभागीय मंत्री को कॉलेज प्रशासन द्वारा मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव शासन को भेजने को कहा। शासन द्वारा प्रस्ताव को कैबिनेट में रखा गया तथा राज्य कैबिनेट के द्वारा कार्मिकों की वर्षों पुरानी उपनल कार्मिकों के समान मानदेय दिये जाने की मांग पर मुहर लगा दी गई। आखिरकार कैबिनेट की स्वीकृति के उपरांत चिकित्सा शिक्षा विभाग ने वर्षों से प्रशासनिक अधिकारी, नर्सिंग अधिकारी, लैब टेक्नीशियन सहित 38 विभिन्न श्रेणी के पदों पर संविदा, दैनिक व नियत वेतनमान पर तैनात कार्मिकों का वेतनमान उपनल कार्मिकों के समान बढ़ाने का शासनादेश जारी कर दिया। शासनादेश जारी होते ही मेडिकल कॉलेज के अल्प वेतनभोगी कार्मिकों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त करते हुये आपस में मिठाईयां बांटकर खुशी जाहिर की।

उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने 824 स्वास्थ्य महिला कार्यकर्ता का रिजल्ट जारी

स्वास्थ्य विभाग में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के 824 पदों पर उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने अंतिम रिजल्ट जारी कर दिया है।
रोजगार सृजन की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार की ओर से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गत दिनों स्वास्थ्य विभाग में 824 स्वास्थ्य कार्यकर्ता महिला के पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया उत्तराखंड चिकित्सा चयन बोर्ड के स्तर से प्रारंभ की गयी थी। अब इस परीक्षा का अंतिम रिजल्ट जारी कर दिया गया है। 824 पदों पर अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है। इन महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के मिलने से उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई ऊर्जा प्रदान होगी। दरअसल, राज्य के पर्वतीय जिलों में पैरामेडिकल स्टाफ की भी निरंतर कमी बनी हुई थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी सफल अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के सेवाओं में आने से अस्पतालों में स्टाफ की कमी दूर होने के साथ ही आमजन को भी काफी राहत मिलेगी। स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि विभाग की ओर से तमाम रिक्त पदों पर भर्ती के निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने सभी सफल अभ्यर्थियों को अपनी शुभकामनाएं प्रदान की हैं। स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार के मुताबिक महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रिक्त पदों पर नई भर्ती से पर्वतीय क्षेत्रों में निश्चित रूप से स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ होंगी।

अस्पताल में अव्यवस्था और गंदगी को लेकर स्वास्थ्य सचिव ने जताई नाराजगी

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने मसूरी उप जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। स्वास्थ्य सचिव द्वारा उप जिला चिकित्सालय में अवयवस्था और गंदगी देखकर जमकर संबधित अधिकारियों को फटकार लगाई व अस्पताल में नियुक्त डाक्टर और कर्मचारियों की अनुस्थिति पर सीएमएस से जबाब तलब किया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को अस्पताल में तैनात डॉक्टर ओर कर्मचारियों को बिना सीएमओं के अनुमति के अवकाश न जाने के निर्देश दिये।
स्वास्थ्य सचिव द्वारा अस्पताल में एमरजैंसी रूम, डॉक्टर कक्ष, आईसीयू, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड एक्स-रे आदि की सुविधा को जांच किया गया। इस मौके पर उन्होंने डीजी हेल्थ उत्तराखंड को फोन पर निर्देश दिए कि वह तत्काल मसूरी में रहकर मसूरी के उप जिला चिकित्सालय की सभी कमियों को दूर कर अस्पताल में स्टाफ की कमियों को दूर करे। वह साफ सफाई को लेकर भी विशेष प्रबंध किया। उन्होंने अस्पताल में पैरामेडिकल और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की कमी को दूर करने को लेकर भी सीएमओ देहरादून को निर्देश दिए गए।
स्वास्थ्य सचिव डॉ राजेश कुमार ने कहा कि उनके द्वारा लगातार उत्तराखंड के विभिन्न अस्पतालों का समय-समय पर निरीक्षण कर वहां की कमियों को दूर करने की कोशिश की जाती है जिससे कि प्रदेश की जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा हाल में ही जिला रुद्रप्रयाग और चमोली जिले का स्वास्थ सुविधाएं और अस्पतालों का निरीक्षण किया गया। अस्पताल में पैरामेडिकल और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की कमियां को देखते हुए प्रदेश को 800 से ज्यादा नर्स मिलने जा रही है जिसका लाभ प्रदेश की जनता को मिलेगा। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा मसूरी के उप जिला चिकित्सालय का निरीक्षण किया गया जहां पर उनको कई खामियां भी मिली है मैं अस्पताल को व्यवस्थित तरीके से कैसे संचालित किया जाए जिसको लेकर भी कार्य योजना तैयार की जाएगी।
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि मसूरी के उप जिला चिकित्सालय को लेकर उनके द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों को तलब किया गया है और जल्द बैठक कर अस्पताल को संचालित करने में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिये व स्वास्थ्य सुविधाओं को व्यवस्थित किए जाने को लेकर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मसूरी के उप जिला चिकित्सालय में स्टाफ की कमी तो है ही परंतु अस्पताल मे तैनात है वह भी रेगुलर तरीके से अपनी ड्यूटी नहीं आ रहा है जो चिंता का विषय है। जिसको लेकर जल्द एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि मसूरी के अस्पताल में तैनात डॉक्टरों में सात डाक्टर पीएचडी करने के लिए गए हैं। वह उन डॉक्टरों की भरपाई को लेकर भी काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अस्पताल को बेहतर किए जाने को लेकर अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन, एक्स-रे, आईसीयू की सुविधा आईसीयू उपलब्ध है जिनको व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिये भी कार्य योजना तैयार की जायेगी। उन्होने कह कि अस्पताल में एमआरआई की सुविधा भी उपलब्ध कराई जायेगी।
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि जोशीमठ की आपदा को लेकर सरकार सभी प्रभावित लोगों की बेहतर मदद कर रही है वहीं स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड पर है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा रोटेशन बेसिस में 26 डॉक्टरों की तैनाती की गई है। वह दो मनोविज्ञानी चिकित्सक भी जोशीमठ में तैनात किये गए है जिससे कि आपदा में मानसिक रूप से ग्रस्त लोगो की काउंसलिंग किया जा सके। वही डायरेक्टर गढ़वाल को जोशीमठ पर नियुक्त कर दिया गया है जो लगातार जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर स्वास्थ सुविधाओं का बेहतर कर रहे है। उन्होंने कहा कि जोशीमठ में सभी प्रकार की दवाइयां उपलब्ध है व जिला प्रशासन के संपर्क में है और अगर किसी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाओं में दिक्कत होगी तो तत्काल दिक्कतों का निवारण किया जाएगा।
सचिव डॉ राजेश कुमार ने कहा ऐसा लग रहा है कि मसूरी में तैनात डॉक्टर ओम ओनरशिप की भूमिका नहीं निभा रहे हैं जो दुर्भाग्यपूर्ण है उन्होंने कहा कि कोई भी अस्पताल को चलाने के लिए वहां पर तैनात अधिकारियों को अपनी अहम भूमिका निभानी चाहिए जिससे कि सीमित संसाधनों में बेहतर तरीके से अस्पताल को चलाया जा सके और लोगो को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं उपलब्ध हो सके।

स्वास्थ्य सचिव के संवदेनशील अधिकारी होने का विभाग को मिल रहा लाभ

प्रदेश के सुदूर इलाकों में दवाईयों को पहुंचाने हेतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से राज्य के दूरस्थ जनपदों में निवास कर रहे लाभार्थियों को कम से कम समय में वैक्सीन उपलब्ध कराने हेतु अनोखी पहल सफल साबित हुई। प्रदेश के भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देनजर दवाओं, टीकों को समयबद्ध तरीके से पहुंचाने हेतु स्वास्थ्य विभाग उत्तराखंड ने ड्रोन टेक्नोलॉजी का सफल ट्रायल पूर्ण कर लिया है।
सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग कर देहरादून से सीमांत जनपद उत्तरकाशी तक महज 40 मिनट में वैक्सीन की डोज को सफलतापूर्वक पहुंचाया गया। प्रतिरक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत ड्रोन द्वारा डिप्थीरिया टिटनेस (डी.पी.टी.) व पेंटा की 400 डोज मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय उत्तरकाशी पहुंचाई गई है। अमूमन सड़क मार्ग से 5-6 घंटे का समय लगता है।
डॉ. आर. राजेश कुमार ने यह भी अवगत कराया कि इस सफलतापूर्वक परीक्षण के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत द्वारा आगामी दिनों में प्रदेश के सूदूर इलाकों में ड्रोन के माध्यम से कोविड वैक्सीन को पहुंचाए जाने हेतु कार्य का शुभारंभ किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग तथा इनफोरमेशन टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एजेंसी (आई.टी.डी.ए.) के सहयोग से दवाईयों को पहुंचाया गया है।
डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि प्रदेश में दवाईयों या वैक्सीन को पहुंचाने हेतु सड़क मार्ग का उपयोग किया जाता है, जिसमें काफी समय लगता है व कभी-कभी आपदा के कारण भी दवाई पहुंचाने में परेशानी होती है। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि दवाई वितरण में किसी भी प्रकार की देरी न हो और समयपर सभी चिकित्सा इकाइयों तथा ऐसे स्थानों, गावों में जहां सड़क मार्ग की सुविधा नही है वहां भी दवाईयां, वैक्सीन उपलब्ध हो। निकट भविष्य में दुर्घटनाग्रस्त, आपदा या अन्य किसी विकट स्थिति पर समयान्तर्गत प्राथमिक उपचार की दवाईयां तथा अन्य सामाग्री पहुंचाने में ड्रोन टेक्नोलॉजी की सुविधा मील का पत्थर साबित होगी।
सचिव महोदय द्वारा बताया गया कि कोविड के दृष्टिगत भी ड्रोन टेक्नोलॉजी काफी कारगर साबित होगी। हम प्रदेश के सभी चिकित्सा इकाइयों में वैक्सीन की उपलब्धता बनाए रखेंगे ताकि पात्र लाभार्थियों का टीकाकरण सुलभ तरीके से पूर्ण हो।