मुख्यमंत्री धामी ने नवनियुक्त कार्मिकों को पत्र लिखकर दी शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीते चार साल में सरकारी सेवा में चयनित हुए कार्मिकों को डिजिटल माध्यम से पत्र लिखकर, उन्हें उज्जवल भविष्य के लिए शुभकानाएं प्रेषित की है।

मुख्यमंत्री धामी ने पत्र में कहा है कि उत्तराखण्ड की जनता द्वारा उन्हें वर्ष 2022 में दूसरी बार मुख्य मुख्य सेवक का दायित्व सौंपा गया था। इस जनादेश की भावना के अनुसार कार्यभार ग्रहण करने के दिन से ही प्रदेश में बेरोजगारी की समस्या को समाप्त करने के लिए, सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती का व्यापक अभियान शुरु किया गया। इसके बाद बीते चार साल में राज्य सरकार द्वारा लगभग 30 हजार से अधिक युवाओं को राजकीय सेवक के रूप में नियुक्ति प्रदान की जा चुकी है, यह अभियान आगे भी जारी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पत्र में कहा है कि अब युवा अपनी शानदार प्रतिभा और कठोर मेहनत के आधार पर राजकीय सेवा में चयनित हो रहे हैं। इस योग्यतम चयन में जहाँ एक ओर युवाओं की मेहनत और प्रतिभा का योगदान है, वहीं राज्य सरकार के कठोर नकल विरोधी कानून के साथ ही निष्पक्ष, ईमानदार और पारदर्शी चयन प्रक्रिया ने भी युवा प्रतिभा को उचित सम्मान मिलना सुनिश्चित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि उत्तराखण्ड राज्य के राजकीय सेवक के रूप में चयन होना सभी कार्मिकों के परिवार के साथ ही राज्य सरकार के लिए भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है। उन्होंने चयनित कार्मिकों से निष्पक्ष एवं ईमानदार रहकर अपने राजकीय दायित्वों का निर्वहन करने की अपील करते हुए कहा है कि राजकीय सेवक के रूप में वो मानवीय मूल्यों के साथ आमजन की सेवा में हमेशा तत्पर रहें। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कई चयनित युवाओं से दूरभाष पर बात कर, उन्हें उत्साह पूर्वक जनसेवा में योगदान देने की भी अपील की है।

सरकारी सेवा के ज्वाइनिंग लेटर सौंपकर सीएम बोले, यह नियुक्ति पत्र नहीं, जनसेवा का संकल्प पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कुल 307 नव नियुक्त अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। जिसमें 243 चिकित्सा अधिकारियों, 42 फार्मासिस्ट, उद्यान विभाग के अन्तर्गत 22 प्रयोगशाला सहायकों एवं मशरूम पर्यवेक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह नियुक्ति पत्र केवल रोजगार का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश की सवा करोड़ जनता की सेवा का संकल्प पत्र है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण राज्य में स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में संकट की घड़ी में जनता की पहली उम्मीद स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्मिक ही होते हैं। उन्होंने नव नियुक्त चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों से कहा कि वे संवेदनशीलता, समर्पण और सेवा भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। आयुष्मान योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को उपचार का लाभ मिल रहा है। प्रदेश में अब तक 62 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड वितरित किए जा चुके हैं तथा लगभग 12 लाख मरीजों का 2200 करोड़ रुपये से अधिक का कैशलेस उपचार किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण और संचालन तेजी से किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 5 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जबकि 2 निर्माणाधीन हैं। इसके साथ ही 9 नर्सिंग कॉलेज और 3 नर्सिंग स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है तथा हल्द्वानी में आधुनिक कैंसर संस्थान का निर्माण प्रगति पर है। दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए टेलीमेडिसिन एवं हेली एंबुलेंस सेवाएं भी संचालित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कृषि एवं उद्यानिकी को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। कीवी, ड्रैगन फ्रूट, हाई डेंसिटी एप्पल, मशरूम उत्पादन तथा मधुमक्खी पालन जैसी उच्च मूल्य फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नव नियुक्त युवा प्रदेश को कृषि नवाचार और आधुनिक उद्यानिकी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सभी भर्ती प्रक्रियाएं पूर्ण पारदर्शिता से हो रही है। प्रदेश में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इसका परिणाम है कि पिछले साढ़े चार वर्षों में 32 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं।
कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उद्यान विभाग द्वारा अतिसघन सेब बागवानी, कीवी मिशन, ड्रैगन फ्रूट मिशन, मधुमक्खी पालन नीति तथा जाइका परियोजना जैसी विभिन्न योजनाओं का सफल संचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में मशरूम उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन किसानों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में उभर सकता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उनके सामाजिक एवं आर्थिक स्तर में गुणात्मक सुधार आएगा।

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि नये चिकित्सकों और फार्मासिस्ट की नियुक्ति होने से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों तक चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता हो और लोगों को अपने निकटतम क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ मिल सके। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी चिकित्सक पूरी कर्तव्यनिष्ठा के साथ जन सेवा के प्रति समर्पित रहेंगे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, सचिव सचिन कुर्वे, डाॅ. एस. एन. पाण्डेय एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

खिलाड़ियों के साथ खेल मैदान में उतरे मुख्यमंत्री धामी, क्रिकेट और फुटबॉल खेलकर बढ़ाया युवाओं का उत्साह

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज अपने पिथौरागढ़ जनपद भ्रमण कार्यक्रम के दौरान श्री सुरेन्द्र सिंह वल्दिया स्टेडियम पहुंचकर उच्चीकृत क्रिकेट मैदान का लोकार्पण किया तथा क्रिकेट मैदान को जनपदवासियों को समर्पित किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने क्रिकेट पिच पर स्वयं बल्लेबाजी करते हुए छह गेंदों का ओवर खेलकर पिच का औपचारिक उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री का खिलाड़ियों के साथ खेल मैदान में उत्साहपूर्ण और आत्मीय अंदाज देखने को मिला।

इसके उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वहां उपस्थित खिलाड़ियों एवं युवाओं से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने खिलाड़ियों के साथ फुटबॉल, हॉकी एवं अन्य खेल गतिविधियों में भी सहभागिता की। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल केवल शारीरिक विकास का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और टीम भावना विकसित करने का सशक्त माध्यम भी हैं।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने वहां उपस्थित समस्त युवाओं को नशे के खिलाफ शपथ भी दिलाई तथा उन्हें नशे से दूर रहकर अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने युवाओं से नशे के खिलाफ राज्य में चल रहे अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि खेल युवाओं को अनुशासन, स्वस्थ जीवनशैली एवं सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करते हैं। मुख्यमंत्री ने समस्त खिलाड़ियों को आशीर्वाद प्रदान किया तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 9 खिलाड़ियों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए खेलों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और उत्तराखंड को खेल के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं में अपार प्रतिभा एवं क्षमता है। खेल महाकुंभ जैसे आयोजनों से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को अपनी कुशलता प्रदर्शित करने का बेहतरीन मंच प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई खेल नीति के माध्यम से राज्य के उदीयमान खिलाड़ियों को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने तथा आधुनिक खेल सुविधाओं के विस्तार हेतु निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने पिथौरागढ़ सहित राज्य के विभिन्न जनपदों में खेलों के लिए बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य युवाओं को खेलों के माध्यम से सकारात्मक दिशा प्रदान करना तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि इस क्रिकेट मैदान में चारों ओर फ्लड लाइट की व्यवस्था की जाएगी।

इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, खेल प्रेमी एवं बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित रहे।

सचिव शिक्षा को सीएस ने मिले उत्तराखंड के विद्यालयों में डिजिटल पुस्तकालयों की व्यवस्था करने के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में शिक्षा विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने प्रदेश की सभी शासकीय विद्यालयों में सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाओं उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने सचिव शिक्षा को स्कूलों में बुक बैंक बनाये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन बुक बैंक्स में कक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत बुक्स को वापस रखा जा सकेगा एवं अगले सत्र में छात्रों को वितरित किया जा सकेगा। जो बुक्स खराब हो गई या बच्चे किसी भी कारण से वापस नहीं कर पाए एवं नई डिमांड के अनुरूप बुक्स छपवाई जाएं। इससे प्रत्येक वर्ष हज़ारों बुक्स छपवाने का करोड़ों का खर्च बचेगा।

मुख्य सचिव ने क्लस्टर विद्यालयों में कक्षा कक्षों एवं हॉस्टल आदि के भवन निर्माण कार्यों में तेज़ी लाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए नाबार्ड से फंडिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सभी विद्यालयों में बिजली पानी के साथ ही शौचालय आदि की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शौचालयों की साफ़-सफाई का एक स्थायी समाधान निकाले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यालयों में शौचालयों की सफाई व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने हेतु मैकेनिज्म तैयार किए जाने के निर्देश दिए, इसके लिए अलग से फंडिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने विद्यालयों में डिजिटल पुस्तकालयों की व्यवस्था भी किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल पुस्तकालयों से विद्यार्थियों को अधिक से अधिक पुस्तकों को पढ़ने और ज्ञान अर्जित करने का अवसर प्राप्त होगा।

इस अवसर पर सचिव रविनाथ रमन एवं निदेशक माध्यममिक शिक्षा डॉ. मुकुल कुमार सती सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

ब्रिडकुल करेगा रोपवे के लिए रेगुलेटरी बॉडी का कार्यः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रदेश में रोपवे निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विभिन्न रोपवे प्रोजेक्ट्स की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने रोपवे प्रोजेक्ट के लिए नियामक प्राधिकरण के रूप में ब्रिडकुल को मजबूत किए जाने के निर्देश दिए। इसके रोल और रेस्पोंसिबिलिटी का ड्राफ्ट शीघ्र तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने जागेश्वर धाम योजना में रोपवे प्रोजेक्ट को शामिल किए जाने भी निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने रोपवे बनाने के लिए प्राथमिकता तय करने हेतु उपसमिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव नियोजन की अध्यक्षता में सचिव पर्यटन, सचिव आवास, सचिव लोक निर्माण विभाग एवं नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण को उपसमिति में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि यह उपसमिति प्रदेश में बनाए जाने वाले रोपवे की प्राथमिकता तय करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी शहर में बनने वाले रोपवे में किन स्थानों को शामिल किया जाना है, किनको नहीं, इसको लेकर शहर की आवश्यकता के अनुरूप पर्यटन विभाग एवं स्थानीय प्रशासन को तय करना होगा

मुख्य सचिव ने मसूरी रोपवे की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने मसूरी रोपवे के लोअर टर्मिनल के पास सार्वजनिक सड़क मार्ग से सम्बन्धित मामले को अगले तीन दिन में निस्तारण कर निर्धारित समय सीमा के अंदर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने हेमकुंड साहिब और केदारनाथ रोपवे की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा की केदारनाथ रोपवे के लिए लोजिस्टिक्स ड्राई रन करते हुए असुरक्षित स्थानों का चिन्हीकरण एवं सुधारीकरण कार्य तत्काल शुरू कराया जाए। उन्होंने कुंड ब्रिज और नई बाई पास को शीघ्र पूर्ण कराये जाने के निर्देश दिए। कहा कि जहाँ भी नए ब्रिज और बाई पास की आवश्यकता है उसका समय से सर्वे एवं निर्माण आदि का कार्य भी साथ साथ किया जाए।

मुख्य सचिव ने केदारनाथ रोपवे के लोअर टर्मिनल में पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पार्किंग के लिए भूमि चिन्हीकरण एवं भूमि हस्तांतरण आदि की प्रक्रिया को भी साथ -साथ शुरू किया जाए। उन्होंने हेमकुंड और केदारनाथ रोपवे निर्माण कार्य का पर्ट चार्ट तैयार कर उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कार्यों को समय से पूर्ण कराने के लिए पर्टचार्ट का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

बैठक के दौरान बताया गया कि केदारनाथ रोपवे का एग्रीमेंट साइन हो चुका है, एलओए जारी हो चुका है। बताया गया कि प्रोजेक्ट का लिडार सर्वे पूर्ण हो गया है, तकनीकी सर्वे गतिमान है। स्टेशन एवं टावर्स के लिए विस्तृत टोपोग्राफी सर्वे गतिमान है। हेमकुंट साहिब का एलओए जारी हो चुका है, भूमि सर्वेक्षण का कार्य गतिमान है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, सहित संबंधित विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखण्ड बनेगा भारतीय ज्ञान विज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केंद्रः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उच्च स्तरीय बैठक कर ऋषिकुल, हरिद्वार में श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के समग्र विकास और विस्तार की योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में संस्थान को भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड केवल आस्था और अध्यात्म की भूमि नहीं, बल्कि ऋषियों, ज्ञान और वैज्ञानिक चिंतन की भी भूमि रही है। ऋषिकुल, हरिद्वार में इस महत्वपूर्ण संस्थान को नई पहचान देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान का कार्य जल्द शुरू किया जाए। कुंभ शुरू होने से पहले यह कार्य पूर्ण किया जाए। पर्यटन विभाग इसमें नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु को निर्देश दिये कि इस संस्थान के कार्यों की नियमित प्रगति के लिए संबंधित विभागीय सचिवों के साथ पाक्षिक बैठकें की जाएं। इसमें विकास के साथ विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। राज्य के सभी जनपदों की लोक कला पर आधारित गतिविधियां भी इसमें शामिल की जाएं।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि संस्थान में वैदिक गणित, वेदों में निहित विज्ञान, उपनिषदों का दर्शन, भारतीय तर्कशास्त्र, पर्यावरण विज्ञान तथा जीवन मूल्यों पर आधारित शोध और अध्ययन की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित और त्रिकोणमिति जैसे महत्वपूर्ण गणितीय सिद्धांत दिए हैं। आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और वराहमिहिर जैसे महान विद्वानों के योगदान को शोध और शिक्षा से जोड़ा जाए। बैठक में संस्थान में खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान, कृषि विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर विशेष अध्ययन केंद्र स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन भारत में धातु विज्ञान, जल प्रबंधन, जैविक खेती और मौसम आधारित कृषि ज्ञान अत्यंत विकसित था, जिसे आधुनिक अनुसंधान से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में वेदों और उपनिषदों में वर्णित नैतिक शिक्षा, अनुशासन, कर्तव्यबोध और मानवीय मूल्यों को समाज तक पहुंचाना आवश्यक है। यह संस्थान शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्र निर्माण का भी केंद्र बने। उन्होंने कहा कि संस्थान में डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण केंद्र, आधुनिक पुस्तकालय, शोध प्रयोगशालाएं, संगोष्ठी केंद्र, ई-लर्निंग सुविधाओं की व्यवस्था भी की जाए।

बैठक के दौरान संस्थान में भारतीय विद्या शाखाओं के गहन अध्ययन को प्रोत्साहित करने के साथ ही पर्यटन, आयुर्वेद ज्योतिष और योग शिक्षा के रूप में विकसित करने पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में जानकारी दी गई कि ज्ञान, योग, ध्यान और भारतीय अध्यात्म की समृद्ध परंपराओं को संस्थान में वैश्विक केन्द्र के रूप में स्थापित किया जायेगा। जिसमें शैक्षणिक क्षेत्र के श्रुति केन्द्र में वेद, उपनिषद और शास्त्रीय ज्ञान की परंपरा, दर्शन केन्द्र में भारतीय दर्शन और चेतना के गहन विचार, आयु केन्द्र में आयुर्वेद और समग्र स्वास्थ्य विज्ञान के माध्यम से जीवन का संतुलन, विज्ञान केन्द्र में भारतीय ज्ञान प्रणालियों और पारंपरिक विज्ञान की विरासत और कला केन्द्र में भारतीय कला, संस्कृति एवं सौन्दर्य परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में विकसित किया जायेगा।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, डॉ. आर.मीनाक्षी सुदंरम, सचिव धीराज गर्ब्याल, दीपक कुमार, डॉ. आर. राजेश कुमार, रंजना राजगुरू, उपाध्यक्ष हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण सोनिका, अपर सचिव बंशीधर तिवारी एवं वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित मौजूद थे।

हिमाद्रि आइस रिंक की प्रथम वर्षगांठ कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में आयोजित हिमाद्रि आइस रिंक के जीर्णाेद्धार की प्रथम वर्षगांठ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों एवं सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए हिमाद्रि आइस रिंक की प्रथम वर्षगांठ पर शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड हॉकी आइस टीम की जर्सी व पे और प्ले पोर्टल का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की एकमात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर की आइस रिंक “हिमाद्रि” केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है, जो खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में स्थापित जीपे आइस रिंक में सर्वप्रथम साउथ एशियन विंटर गेम्स का आयोजन किया गया था, लेकिन बाद के वर्षों में विभिन्न कारणों से इसका सुचारु संचालन एवं रखरखाव नहीं हो पाने के कारण इसे बंद करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि आइस रिंक की बदहाल स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने इसे पुनः संचालित करने का संकल्प लिया और लगभग साढ़े 8 करोड़ रुपये की लागत से पिछले वर्ष इसी दिन इसका जीर्णाेद्धार कर इसे पुनः खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को समर्पित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके संचालन के लिए एक मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित कर हरित ऊर्जा को भी बढ़ावा दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के सामूहिक प्रयासों के परिणामस्वरूप आज यह आइस रिंक एक बार फिर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन का केंद्र बन रही है। उन्होंने बताया कि बीते एक वर्ष के दौरान यहां नेशनल आइस स्केटिंग चौंपियनशिप, एशियन ट्रॉफी, राष्ट्रीय आइस हॉकी लीग तथा महिला एवं बालक वर्ग की राष्ट्रीय टीमों के प्रशिक्षण शिविरों का सफल आयोजन किया गया। साथ ही वर्तमान में विभिन्न राज्यों के खिलाड़ी यहां स्केटिंग एवं आइस हॉकी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय आइस हॉकी टीम का प्रशिक्षण शिविर भी इसी आइस रिंक में आयोजित किया गया। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि पिछले वर्ष अगस्त माह में भारत ने पहली बार “एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी” की सफल मेजबानी की, जिसमें एशिया के 11 देशों के 200 से अधिक खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें भी उस ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनने का अवसर प्राप्त हुआ था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में आइस स्केटिंग और आइस हॉकी के प्रति बढ़ते आकर्षण को देखते हुए आने वाले समय में भारत शीतकालीन खेलों में एक मजबूत शक्ति के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “खेलो इंडिया” और “फिट इंडिया मूवमेंट” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से देश में खेल संस्कृति को प्रोत्साहन मिला है और आज भारत खेलों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार उत्तराखंड में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन से उत्तराखंड को “देवभूमि” के साथ-साथ “खेलभूमि” के रूप में नई पहचान मिली है। इन राष्ट्रीय खेलों में राज्य के खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना विकसित करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि इसी दिशा में शीघ्र ही राज्य के आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियों की स्थापना के लिए ‘स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान’ लागू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत प्रतिवर्ष 920 विश्वस्तरीय एथलीटों और 1000 अन्य खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में उत्तराखंड के पहले खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना के लिए भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेलों के समग्र विकास और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नई खेल नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेताओं को सरकारी नौकरी की सुविधा प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने खेल मंत्री रेखा आर्य से यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि खिलाड़ियों से संबंधित योजनाओं और प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो।

उन्होंने कहा कि आवासीय स्पोर्ट्स कॉलेजों में अध्ययनरत खिलाड़ियों को निःशुल्क प्रशिक्षण के साथ खेल छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त ‘मुख्यमंत्री खेल विकास निधि’, ‘मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना’, ‘मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी योजना’ तथा ‘खेल किट योजना’ के माध्यम से प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेलों को राष्ट्र निर्माण और युवा सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम मानते हुए उत्तराखंड को खेलों के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के खिलाड़ी अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर उत्तराखंड का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करते रहेंगे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, विधायक उमेश शर्मा काऊ, विशेष सचिव अमित सिन्हा, खेल विभाग के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में खिलाड़ी एवं खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

दिल्ली से दून ढाई घंटे में पहुंचे सीएम धामी, बोले ये है नए भारत की तेज रफ्तार

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली दौरे के बाद सड़क मार्ग से लौटते हुए दिल्ली देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से देहरादून का सफर महज करीब ढाई घंटे में पूरा किया, जो पहले की तुलना में बेहद कम समय है।

मुख्यमंत्री धामी ने इस दौरान केंद्र सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में देश में जिस गति से सड़क और परिवहन सुविधाओं का विकास हो रहा है, यह उसी का परिणाम है। अब उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों को भी इसका सीधा लाभ मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि दिल्लीदृदेहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर न केवल यात्रा समय को कम कर रहा है, बल्कि पर्यटन, निवेश और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। इससे चारधाम यात्रा समेत राज्य के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच और अधिक सुगम होगी।

मुख्यमंत्री ने इसे नए भारत की नई रफ्तार बताते हुए कहा कि इस तरह की परियोजनाएं उत्तराखंड के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

दूरभाष पर वार्ता कर सीएम धामी ने उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा के मेधावियों का बढ़ाया हौसला

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद्, रामनगर (नैनीताल) द्वारा घोषित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा परिणामों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों से दूरभाष पर वार्ता कर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हाईस्कूल परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले क्रमशः एम.पी. हिन्दू इंटर कॉलेज, रामनगर (नैनीताल) के अक्षत गोपाल, एस.वी.एम. इंटर कॉलेज, चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी) के इशांत कोठारी, जी.बी. पंत राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, खैरना (नैनीताल) की भूमिका तथा विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, मंडलसेरा (बागेश्वर) के योगेश जोशी से फोन पर संवाद कर उनकी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाली सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज बागेश्वर की गीतिका पंत, भंजूराम अमर इंटर कॉलेज, भूरारानी (उधमसिंह नगर) की सुशीला मेंदीरत्ता, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, आवास विकास ऋषिकेश के आर्यन तथा सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, मायापुर (हरिद्वार) की वंशिका से भी दूरभाष पर वार्ता कर उन्हें बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों की यह उपलब्धि उनके परिश्रम, अनुशासन एवं समर्पण का परिणाम है। उन्होंने अभिभावकों एवं शिक्षकों के योगदान की भी सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन से ही छात्र-छात्राएं इस प्रकार की सफलता प्राप्त कर पाते हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहकर निरंतर आगे बढ़ें तथा राज्य एवं देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है तथा मेधावी विद्यार्थियों को हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

दीक्षांत समारोह वर्षों के अनुशासित प्रयासों और त्याग की परिणति के साथ समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भीः सीपी राधाकृष्णन

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। ऋषिकेश को चिंतन और उपचार का वैश्विक केंद्र होने के साथ-साथ हिमालय का प्रवेश द्वार के रूप में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा वातावरण दीक्षांत समारोह की गंभीरता को और भी गहरा कर देता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह न केवल वर्षों के अनुशासित प्रयासों और त्याग की परिणति है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातकों से समर्पण और उद्देश्य की भावना के साथ अपने पेशेवर कर्तव्यों को निभाने का आग्रह किया।

कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों पर विचार करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सतत नवाचार और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने भारत के व्यापक टीकाकरण अभियान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 14 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीके लगाए गए, जिससे स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच सुनिश्चित हुई। उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने लाभ के लिए नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए टीके विकसित किए हैं।

उपराष्ट्रपति ने भारत की वैक्सीन मैत्री पहल के माध्यम से वैश्विक जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया, जिसके तहत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘‘वसुधैव कुटुंबकम’’ की भावना को दर्शाती है और एक दयालु और जिम्मेदार वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करती है।

स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में देश भर में स्थापित नए एम्स संस्थानों ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच को मजबूत किया है, उन्होंने कहा कि सुशासन लोगों की जरूरतों को समझने और उनकी सेवा करने में निहित है।

एम्स ऋषिकेश की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान नैदानिक देखभाल, शैक्षणिक क्षमता, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता के क्षेत्र में उत्कृष्टता का एक आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से टेलीमेडिसिन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा को अस्पताल परिसरों से आगे बढ़कर दूरस्थ और कम सुविधा प्राप्त आबादी तक पहुंचना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने हेली एम्बुलेंस सेवाओं और चार धाम यात्रा के दौरान तथा दूरस्थ क्षेत्रों में दवा वितरण के लिए ड्रोन के उपयोग जैसी नवोन्मेषी स्वास्थ्य सेवाओं की भी प्रशंसा की और इन्हें स्वास्थ्य सेवा वितरण में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का प्रभावी समाधान बताया।

उपराष्ट्रपति ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सहित क्षेत्र में अवसंरचना के तीव्र विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने समावेशी विकास को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार लाने के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार के प्रयासों की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक जिम्मेदारी है और राष्ट्र निर्माण में चिकित्सा पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले डॉक्टरों से निवारक देखभाल, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से योगदान देने और सहानुभूति, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों का पालन करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखण्ड में हार्दिक स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि उनके मार्गदर्शन से युवा चिकित्सकों को राष्ट्रसेवा की नई ऊर्जा एवं दिशा प्राप्त होगी।

राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की साधना, समर्पण और सेवा भाव का उत्सव है तथा यह वह महत्वपूर्ण क्षण है, जब वर्षों की कठिन मेहनत एक नई जिम्मेदारी में परिवर्तित होती है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता में माता-पिता के त्याग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और राष्ट्र की अपेक्षाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में चिकित्सा का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक अनुसंधान पद्धतियाँ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बना रही हैं। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश इस दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जो स्वास्थ्य तंत्र को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है।

राज्यपाल ने युवा चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता का क्षेत्र है। मरीज केवल उपचार ही नहीं, बल्कि विश्वास और आशा लेकर चिकित्सक के पास आता है। ऐसे में चिकित्सकों का व्यवहार, सहानुभूति और समर्पण ही मरीज को सुरक्षा और विश्वास प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अभी भी चुनौतीपूर्ण है और उन्होंने युवा चिकित्सकों से अपेक्षा है कि वे इन चुनौतियों को अवसर में परिवर्तित करते हुए दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा प्रदान करें तथा समाज में विश्वास का संचार करें। उन्होंने आह्वान किया कि वे अपने जीवन में नैतिकता, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों को सर्वाेपरि रखें तथा रोगी के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह अवसर विद्यार्थियों के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है और चिकित्सा क्षेत्र में उनका योगदान समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड की जनता की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने उपराष्ट्रपति के सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, जनसेवा के प्रति समर्पण और प्रेरणादायी जीवन यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन युवा चिकित्सकों के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है, जिसे निष्ठा, संवेदनशीलता और करुणा के साथ निभाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित एम्स ऋषिकेश आज प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रक्षक संस्थान के रूप में स्थापित हो चुका है। यहां कैंसर उपचार, न्यूरोसर्जरी, रोबोटिक सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। साथ ही, हेली एम्बुलेंस सेवा राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊधमसिंह नगर में एम्स ऋषिकेश के सैटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे कुमाऊं क्षेत्र की जनता को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, टेलीमेडिसिन नेटवर्क का विस्तार, जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाइयों की उपलब्धता तथा निःशुल्क पैथोलॉजिकल जांच जैसी योजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

समारोह केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उपाधि प्राप्त कर रहे डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा पेशा केवल करियर नहीं, बल्कि मानव सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है। उन्होंने मरीजों के विश्वास को बनाए रखने और हर परिस्थिति में उनके हित को सर्वाेपरि रखने का आह्वान किया, साथ ही नैतिकता और ईमानदारी को अपने कार्य का आधार बनाने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर हो रहे बदलावों के बीच डॉक्टरों के लिए आजीवन सीखते रहना आवश्यक है, ताकि बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही, मरीजों के साथ प्रभावी संवाद को भी उन्होंने अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे विश्वास और उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट, एम्स ऋषिकेश के अध्यक्ष प्रो. राज बहादुर, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, डीन (अकादमिक) प्रो. सौरभ, संकाय सदस्यों, छात्रों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित कई गणमान्य लोगों ने प्रतिभाग किया।