रोजगार मेले में साक्षात्कार को पहुंचे अभ्यर्थियों को मंत्रियों ने शुभकामनाएं

सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी द्वारा उत्तराखण्ड राज्य के आईटी एवं अन्य क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवक एवं युवतियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने हेतु कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा (परिवहन, सूचना प्रौद्योगिकी, सुराज एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी) की अध्यक्षता तथा मुख्य अतिथि माननीय कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी (कृषि एवं कृषक कल्याण, सैनिक कल्याण) की उपस्थिति में IRDT Auditorium, Dehradun में रोजगार मेले का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा (परिवहन, सूचना प्रौद्योगिकी, सुराज एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी) द्वारा दीप प्रज्वलित कर रोजगार मेले का शुभारम्भ किया गया। तत्पश्चात मंत्री द्वारा रोजगार मेले में साक्षात्कार करने हेतु उपस्थित कम्पनियों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। मंत्री द्वारा अपने उद्बोधन भाषण में रोजगार मेले में प्रतिभाग करने वाले छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

रोजगार मेले में आईडीआईटी-ऐस्कल के उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं, भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों एवं अन्य युवक-युवतियों द्वारा प्रतिभाग किया। युवाओं के उत्साहपूर्ण प्रतिभाग के दृष्टिगत माननीय कैबिनेट मंत्री, सैनिक कल्याण द्वारा भविष्य में वृहत स्तर पर इस प्रकार के रोजगारोन्मुखी आयोजनों को निरंतर आयोजित किए जाने हेतु निर्देशित किया गया, जिससे राज्य की युवा शक्ति को भविष्य में भी रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें तथा प्रदेश से पलायन को रोका जा सके। इसके अतिरिक्त कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी द्वारा रोजगार मेले में प्रतिभाग करने वाले छात्र-छात्राओं में से कम्पनियों द्वारा चयनित प्रतिभागियों को नियुक्तिपत्र प्रदान किये एवं साक्षात्कार हेतु उपस्थित कम्पनियों के प्रतिनिधियों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

रोजगार मेले में लगभग 359 युवक-युवतियों द्वारा दिल्ली/एनसीआर एवं उत्तराखण्ड से आईटी एवं अन्य क्षेत्रों की 21 प्रतिष्ठित कम्पनियों के अंतर्गत रिक्त पदों पर प्रतिभाग किया गया, जिसमें से साक्षात्कार के उपरांत कम्पनियों द्वारा लगभग 195 युवक-युवतियों का चयन किया गया।

कार्यक्रम का संचालन आईडीआईटी CALC के नोडल अधिकारी द्वारा सफलतापूर्वक किया गया। इस अवसर पर आईटीडीए के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

शक्ति, भक्ति, साहस और सेवा के प्रतीक हैं बजरंग बलिः धामी

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को चकराता रोड़ स्थित, प्राचीन श्री हनुमान मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने भगवान बजरंगबली से प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हुए प्रदेश की उन्नति, विकास और जनकल्याण की कामना की।

उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान शक्ति, भक्ति, साहस और सेवा के प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें निस्वार्थ सेवा, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है। भगवान हनुमान की उपासना से भय, संकट और नकारात्मकता का नाश होता है तथा जीवन में साहस, ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार होता है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भगवान हनुमान के आदर्शों को अपनाकर समाज में एकता, सेवा और सहयोग की भावना को मजबूत करने का भी आह्वान किया है।

उत्तराखंड मॉडल से प्रभावित भाजपा ने पश्चिम बंगाल और असम के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया है यूसीसी

पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा को मिली प्रचंड जीत में ‘उत्तराखंड मॉडल’ की भी छाप नजर आती है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल और असम के घोषणा पत्र में, उत्तराखंड की तर्ज पर यूसीसी लागू करने का वादा किया था। जिसे मतदाताओं ने अपना समर्थन दे दिया है। इस तरह गंगोत्री (उत्तराखंड) से निकली यूसीसी की गंगा अब गंगा सागर ( पश्चिम बंगाल) तक पहुंचती नजर आ रही है।

समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी अब देश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। यूं तो ये मुद्दा आजादी के समय ही राष्ट्रीय विमर्श में छाया हुआ था, लेकिन इसे धरातल पर उतारने की पहल, 2022 के विधानसभा चुनाव के समय उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की। इसी क्रम में जनवरी 2025 से उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है। उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने के बाद भाजपा अब दूसरे राज्यों में भी इसे चुनावी एजेंडे के रूप में आगे बढ़ा रही है। इसी क्रम में बंगाल और असम के चुनावी घोषणा पत्र में यूसीसी को प्रमुखता से शामिल किया गया। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा ने यूसीसी को नागरिक समानता, महिला अधिकार जैसा व्यापक आधार देकर, मतदाताओं के बड़े वर्ग तक पहुंचा दिया है। खासकर शहरी वर्ग और महिला तथा युवा मतदाताओं के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा देखने को मिल रही है। राजनीतिक रूप से भाजपा इसे अपने बड़े वैचारिक एजेंडे के तौर पर देख रही है। पार्टी पहले ही अनुच्छेद 370 और राम मंदिर जैसे मुद्दों को पूरा कर चुकी है। अब यूसीसी को अगले बड़े राष्ट्रीय एजेंडे के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इस तरह असम और पश्चिम बंगाल में भाजपा को मिली जीत ने यूसीसी के उत्तराखंड मॉडल की कामयाबी पर मुहर लगा दी है। जो अगले साल उत्तराखंड में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों में भी निर्णायक साबित हो सकता है।

उत्तराखंड बना भाजपा का “मॉडल स्टेट”
उत्तराखंड आजाद भारत का का पहला राज्य है जहां यूसीसी लागू हुआ है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशन जैसे विषयों को एक समान कानूनी ढांचे में लाया गया। भाजपा लगातार इसे महिला अधिकार और समानता से जोड़कर प्रचारित कर रही है। उत्तराखंड के बाद गुजरात की भाजपा सरकार भी यूसीसी लागू करने की दिशा में काम शुरु कर चुकी है। गुजरात में यूसीसी पर गठित समिति अपनी रिपोर्ट वहां के को सौंप चुकी है। गुजरात का मसौदा काफी हद तक उत्तराखंड मॉडल पर ही आधारित है।

मुख्य सचिव ने की स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 की समीक्षा

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 की समीक्षा की। बैठक के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई एवं मुख्य सचिव द्वारा दिशा निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कम्पलीट मैकेनिज्म तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए शीघ्र कार्ययोजना प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत अधिकारियों को चारधाम यात्रा मार्गों एवं जनपदों के प्रवेश मार्गों पर ठोस अपशिष्ट के निस्तारण के लिए अतिरिक्त फंड्स उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चारधाम यात्रा मार्गों एवं चारों धामों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस अतिरिक्त फण्ड का उचित उपयोग किए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने पूरे प्रदेश सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट द्वारा उपचारित जल को ग़ैर पेयजल कार्यों में उपयोग किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जहाँ भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए हैं, उनसे उपचारित जल को आसपास के क्षेत्रों में ग़ैर पेयजल कार्यों में 100 प्रतिशत उपयोग में लाए जाने हेतु कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने प्रदेश के भीतर सभी कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट्स और वेस्ट टू एनर्जी प्लांट्स को शीघ्र तैयार कर संचालित किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम को भी शीघ्र से शीघ्र शुरू क्या जाए, ताकि डोर टू डोर कूड़ा उठान कार्य की निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

इस अवसर पर सचिव नितेश कुमार झा, रणवीर सिंह चौहान एवं डॉ अहमद इकबाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मन की बात कार्यक्रम से मिलती है आगे बढ़ने की प्रेरणाः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मोथरोवाला, देहरादून में बड़ी संख्या में उपस्थित स्थानीय लोगों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के 133वें संस्करण को सुना।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मन की बात कार्यक्रम देशवासियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री समाज के विभिन्न वर्गों के प्रेरक कार्यों, नवाचारों, स्टार्टअप, स्वच्छता, आत्मनिर्भर भारत, पर्यावरण संरक्षण एवं लोक संस्कृति से जुड़े विषयों को प्रभावी रूप से सामने रखते हैं, जिससे लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मन की बात कार्यक्रम ने आमजन के प्रयासों को एक मंच प्रदान किया है। इससे देश के कोने-कोने में हो रहे उत्कृष्ट कार्यों को पहचान मिल रही है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का वातावरण बन रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम अनवरत रूप से निरंतर जारी है, जो करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणादायक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेहनत, परिश्रम और काम करने वाले लोगों को अवश्य फल मिलता है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत का मान, सम्मान, स्वाभिमान प्रत्येक क्षेत्र में बड़ रहा है। भारत बड़ी आर्थिक शक्ति बनकर उभरा है। हमारा देश विज्ञान, रक्षा, ए.आई के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। आज हम रक्षा उपकरणों, हथियारों का अन्य देशों को निर्यात भी करते हैं, जो आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राज्य निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। देश के सीमांत क्षेत्रों में भी अब रोड, रेल और आधुनिक सुविधाएं पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा उत्तराखंड, विकसित भारत के संकल्प में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री का उत्तराखंड से विशेष लगाव है। बाबा केदार की भूमि से प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया था, जिस संकल्प पर राज्य सरकार निरंतर आगे कार्य कर रही है और अब इसके परिणाम भी सामने आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार का संकल्प है कि हम उत्तराखंड की संस्कृति, आस्था और साधना को हमेशा संरक्षित रखें। राज्य सरकार, देवभूमि के दैवत्व को हमेशा अमर रखने का काम करेगी। राज्य सरकार ने सख्त दंगारोधी कानून, धर्मांतरण कानून, नकल विरोधी कानून, जैसे कई कानून लागू किए हैं जो अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन रहा है। उन्होंने कहा जहां डबल इंजन की सरकार है वहां विकास दुगनी रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है।

इस अवसर पर विधायक विनोद चमोली, दायित्वधारी प्रताप सिंह पंवार, सरिता डंगवाल, मोहित शर्मा एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

फरियादियों की समस्या जानते हुए सीएम धामी ने अधिकांश का किया मौके पर निस्तारण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेशभर से आए नागरिकों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने आमजन से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया तथा कई प्रकरणों का मौके पर ही समाधान किया।

मुख्यमंत्री ने सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आर्थिक सहायता से संबंधित विभिन्न मामलों पर त्वरित कार्यवाही के निर्देश देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि समस्याओं के समाधान में अनावश्यक विलंब न हो तथा प्रत्येक प्रकरण की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य शासन-प्रशासन को आमजन के प्रति संवेदनशील, जवाबदेह एवं पारदर्शी बनाना है, ताकि जनता को त्वरित राहत मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुनवाई सरकार और जनता के बीच संवाद का सशक्त माध्यम है, जिससे न केवल समस्याओं का त्वरित समाधान होता है, बल्कि शासन की कार्यप्रणाली में भी निरंतर सुधार होता है।

इस अवसर पर उत्तराखंड फिल्म टेलीविजन एंड रेडियो एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने राज्य में प्रभावी एवं दूरदर्शी फिल्म नीति लागू किए जाने पर मुख्यमंत्री को अभिनंदन पत्र सौंपते हुए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नई फिल्म नीति से उत्तराखंड फिल्म निर्माण के क्षेत्र में एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभर रहा है, जिससे स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों एवं युवाओं को नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

जन जागरण अभियान समिति के तत्वाधान में विभिन्न विद्यालयों की छात्राओं ने राज्य सरकार द्वारा संचालित 15 उत्कृष्ट योजनाओं पर आधारित आकर्षक पोस्टर तैयार कर मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए। छात्राओं ने इन योजनाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को मिल रहे लाभ के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने छात्राओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियां न केवल विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाती हैं, बल्कि उन्हें समाज और शासन से जुड़े विषयों के प्रति संवेदनशील भी बनाती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, महिला सशक्तिकरण एवं युवा विकास के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है और भविष्य में भी जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।

इस अवसर पर आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर सचिव जे.सी कांडपाल, अपर आयुक्त गढ़वाल उत्तम सिंह चौहान एवं मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी मौजूद थे।

सचिव आवास व राज्य संपत्ति ने लिया अयोध्या अतिथि गृह निर्माण स्थल का किया विस्तृत जायजा

देश की धार्मिक राजधानी अयोध्या में उत्तराखंड सरकार ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है। अयोध्या-फैजाबाद हाईवे पर प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह अब हकीकत का रूप लेता दिख रहा है। लगभग 54,000 (चव्वन हजार) वर्ग फीट क्षेत्र में बनने वाला यह विशाल परिसर उत्तराखंड से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक भरोसेमंद ठिकाना बनेगा। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार के स्थल निरीक्षण के बाद परियोजना के क्रियान्वयन ने रफ्तार पकड़ ली है, जिससे साफ है कि सरकार इस योजना को लेकर पूरी गंभीरता से आगे बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के पीछे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्पष्ट सोच और परिणामोन्मुख कार्यशैली दिखाई देती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धार्मिक पर्यटन को आर्थिक विकास से जोड़ने की जो रणनीति बनाई है, यह परियोजना उसी की एक मजबूत कड़ी है। चारधाम यात्रा को बेहतर प्रबंधन और सुविधाओं से जोड़ने के बाद अब सरकार अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों पर भी उत्तराखंड की पहचान स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि परियोजना गुणवत्ता, आधुनिकता और तय समयसीमा के मानकों पर खरी उतरे। सचिव आवास-राज्य संपित्त जल्द मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर उन्हें विस्तृत कार्ययोजना रिपोर्ट सौंपेंगें। निरीक्षण के दौरान प्रोजेक्ट मैनेजर पेयजल निगम राकेश चन्द्र तिवारी, राज्य संपत्ति विभाग से डॉ विनीता सिंह, वरिष्ठ व्यवस्था अधिकारी मुन्ना सिंह सहित संबधित अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

रणनीतिक लोकेशन, आसान पहुंच
प्रस्तावित अतिथि गृह की लोकेशन इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है। श्रीराम मंदिर से करीब 6.60 किलोमीटर और फैजाबाद शहर से 6.40 किलोमीटर की दूरी इसे अत्यंत सुविधाजनक बनाती है। अयोध्या एयरपोर्ट से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी इसे देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए भी सुलभ बनाती है। वहीं लखनऊ, वाराणसी और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों से सीधा संपर्क इसे धार्मिक पर्यटन का अहम केंद्र बना सकता है। देहरादून और नई दिल्ली से आने वाले यात्रियों के लिए भी यह एक प्रमुख पड़ाव होगा।

आम श्रद्धालुओं को बड़ी राहत
इस परियोजना की खासियत यह है कि इसे केवल वीआईपी सुविधाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। आम श्रद्धालुओं के लिए किफायती दरों पर ठहरने की व्यवस्था इस योजना को जन-हितैषी बनाती है। चारधाम यात्रा की तर्ज पर यहां भी उत्तराखंड के श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित आवास मिलेगा। इससे अयोध्या यात्रा के दौरान ठहरने की समस्या काफी हद तक कम होगी और यात्रा अधिक सुगम बनेगी।

सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित होगा परिसर
सरकार की योजना इस अतिथि गृह को केवल ठहरने तक सीमित रखने की नहीं है, बल्कि इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के केंद्र के रूप में विकसित करने की है। यहां लोक कला, लोक संगीत, पारंपरिक उत्सव और सरस मेले जैसे आयोजन किए जाएंगे। इससे उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर मंच मिलेगा। साथ ही विवाह समारोह और अन्य सामाजिक आयोजनों के लिए भी यह परिसर उपयोगी साबित होगा, जिससे राजस्व के नए अवसर भी बनेंगे।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
अयोध्या में तेजी से बढ़ते धार्मिक पर्यटन के बीच यह परियोजना उत्तराखंड के लिए आर्थिक दृष्टि से भी लाभकारी साबित हो सकती है। लाखों श्रद्धालुओं के बीच उत्तराखंड की मौजूदगी इस अतिथि गृह के माध्यम से और मजबूत होगी। यह पहल “धार्मिक पर्यटन” और “संस्कृति कनेक्ट” के मॉडल को आगे बढ़ाते हुए राज्य के पर्यटन उद्योग को अप्रत्यक्ष रूप से नई गति देगी।

गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर
स्थल निरीक्षण के दौरान सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता और समय सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना उत्तराखंड की छवि से जुड़ी है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है।

ड्रीम प्रोजेक्ट से बनेगा सांस्कृतिक सेतु – डॉ. आर. राजेश कुमार
डॉ. आर. राजेश कुमार के अनुसार अयोध्या में बनने वाला उत्तराखंड राज्य अतिथि गृह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच और प्रभावी कार्ययोजना का सशक्त उदाहरण है। यह परियोजना न केवल श्रद्धालुओं के लिए राहत लेकर आएगी, बल्कि उत्तराखंड को देश के धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर नई मजबूती के साथ स्थापित करेगी। यह अतिथि गृह केवल एक इमारत नहीं बल्कि उत्तराखंड और अयोध्या के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम करेगा। यहां श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ-साथ उत्तराखंड की परंपराओं और संस्कृति को भी राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री आवास में हिमालयी राज्यों से समन्वय और नीति निर्धारण परिषद की हुई बैठक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास में हिमालयी राज्यों के मध्य आपसी समन्वय को सुदृढ़ करने, साझा चुनौतियों के समाधान हिमालयी राज्यों से समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद की प्रथम बैठक आयोजित की गई। बैठक के लिए समेकित रणनीति तैयार करने तथा क्षेत्रीय विकास को गति देने के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी राज्यों की भौगोलिक, पर्यावरणीय एवं सामाजिक परिस्थितियाँ समान होने के कारण आपसी सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान से प्रभावी नीति निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि जिन हिमालयी राज्यों में विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे कार्य हुए हैं, उन कार्यों का विस्तृत अध्ययन बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में राज्य में अपनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इकॉनोमी और ईकोलॉजी में समन्वय के साथ मानव जीवन स्तर को बेहतर बनाना हमारा मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड प्राकृति सम्पन्नता एवं जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। हिमालय और औषधियों के संरक्षण के क्षेत्र में राज्य में कार्य करने की अपार संभावनाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। जल स्रोंतों के पुनर्जीवीकरण की दिशा में अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय और पर्यावरण सरंक्षण के क्षेत्र में जो संस्थान अच्छा कार्य कर रहे हैं, उनका भी निरंतर सहयोग लिया जाए। हिमालयी राज्यों की विभिन्न चुनौतियों के समाधान के लिए हिमालयी राज्यों के विशेषज्ञों के साथ बैठक समय-समय पर बैठकों और विचार गोष्ठियों का आयोजन भी किया जाए। बैठक के दौरान जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, पर्यटन, जैव विविधता संरक्षण, जल स्रोतों के संरक्षण तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बैठक में जो भी सुझाव प्राप्त हुए हैं, उस दिशा में तेजी से काम आगे बढ़ाये जायेंगे।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि हिमालयी राज्यों की चुनौतियों को दूर करने के लिए हिमालयी राज्य कैसे एकीकृत रूप में कार्य कर सकते हैं, इस दिशा में प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी को हिमालय से फायदा होगा। हिमालय के संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में कार्य करने के लिए हमें इस क्षेत्र में कार्य करने वाले राष्ट्रीय संस्थानों का भी नियमित सहयोग लेना होगा।

हिमालयी राज्यों से समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद के सदस्य एवं विधायक किशोर उपाध्याय ने कहा कि हिमालय एवं मध्य हिमालय क्षेत्र की अद्यतन वैज्ञानिक एवं पारिस्थितिकि स्थिति का अध्ययन होना चाहिए। हिमालयी नदियों के जल स्तर और प्रवाह का आंकलन करना भी जरूरी है। सदस्य एवं पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी ने कहा कि हिमालयी राज्यों को संगठित रूप से कार्य कर हिमालयी से संबंधित सभी सम्पदाओं और लोगों की आजीविका को बढ़ाने की दिशा में प्रयास करने होंगे। आचार्य डॉ. प्रशांत ने कहा कि हिमालयी राज्यों के लिए ज्वाइंट टास्क फोर्स बननी चाहिए। हिमालयी राज्यों की चुनौतियां लगभग एक जैसे होती हैं, इनके लिए मिलकर बेहमर नीति निर्धारण की दिशा में कार्य होने चाहिए। डॉ. जी.एस. रावत ने कहा कि प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य होने चाहिए। पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने कहा कि बुग्यालों का संरक्षण बहुत जरूरी है। जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में राज्य में अनेक संभावनाएं हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव डॉ. आर.मीनाक्षी सुदंरम, सचिव शैलेश बगौली, यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

चारधाम यात्रा की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी, सोशल मीडिया पर हर समय निगरानी

चारधाम यात्रा के संबंध में भ्रामक एवं तथ्यहीन वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में उत्तराखंड पुलिस द्वारा सख्त कार्रवाई की गई है। इस क्रम में थाना सोनप्रयाग में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर विधिक कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।

उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि चारधाम यात्रा पूरी तरह से सुचारू रूप से संचालित हो रही है तथा श्रद्धालु व्यवस्थित ढंग से दर्शन कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही भ्रामक एवं अप्रमाणित सूचनाएं न केवल जनमानस में भ्रम उत्पन्न करती हैं, बल्कि यात्रा व्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर सकती हैं।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, 4-5 अन्य संदिग्ध वीडियो की भी पुलिस टीम द्वारा गहन जांच की जा रही है। जांच के उपरांत दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखंड पुलिस द्वारा यह भी अवगत कराया गया है कि चारधाम यात्रा के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की 24Û7 निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सूचना का समय रहते संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अप्रमाणित अथवा भ्रामक जानकारी को साझा करने से बचें तथा केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर ही विश्वास करें। अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखंडः प्रधानमंत्री ने फिर व्यक्त की बाबा केदार में अटूट श्रद्धा

केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर बाबा केदार में अपनी गहन आस्था प्रकट की है। प्रधानमंत्री ने देर शाम सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बाबा केदार की धरती पर पूर्व में बिताए पलों की भावुक तस्वीरों को जारी किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पूर्व के केदारनाथ प्रवास की स्मृतियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर तस्वीरों के माध्यम से साझा की हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा इन तस्वीरों को साझा करना उस आध्यात्मिक संबंध की अभिव्यक्ति है, जो भगवान शिव के इस ज्योतिर्लिंग और इस तपोभूमि से जुड़ा हुआ है। केदारनाथ धाम, जहां भक्ति, तप और श्रद्धा का संगम होता है, वहीं से प्रधानमंत्री का यह भावपूर्ण संदेश करोड़ों श्रद्धालुओं के हृदय को स्पर्श कर रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो प्रधानमंत्री का यह संवाद करोड़ों देशवासियों के मार्गदर्शन के साथ ही चारधाम यात्रा को आत्मिक जागरण यात्रा के रूप में भी स्थापित करता है।
बाबा केदार के धाम में गूंजता “हर हर महादेव” का उद्घोष, प्रधानमंत्री की इस श्रद्धाभिव्यक्ति के साथ और अधिक भावपूर्ण हो उठा है, और देशभर के श्रद्धालुओं में भक्ति का उत्साह नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है।
इससे पूर्व के अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने चारधाम यात्रा को भारत की सांस्कृतिक एकात्मता का आधार बताया था। उन्होंने तीर्थयात्रियों से ‘डिजिटल उपवास’ रखते हुए आत्मिक शांति का अनुभव करने और पांच संकल्प स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सेवा, ‘वोकल फॉर लोकल’ तथा अनुशासन का पालन करने का आग्रह किया।