टिहरी झील के चारों ओर रिंग रोड बनाने को लेकर सीएम ने ली बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में टिहरी झील के चारों ओर रिंग रोड बनाए जाने के सम्बन्ध में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने टिहरी झील के चारों ओर रिंग रोड निर्माण के कार्य को चरणबद्ध तरीके से पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। पहले चरण में पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र के चारों ओर की सड़क को विकसित किया जाए। उन्होंने पूरे क्षेत्र को भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि आने वाले समय में टिहरी और देहरादून टनल के माध्यम से जुड़ जाएंगे, जिससे दिल्ली से टिहरी मात्र साढ़े तीन घंटे में पहुँच सकेंगे, इससे राज्य में पर्यटन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से अधिक से अधिक विकसित कर प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए टिहरी झील के चारों ओर रिंग रोड एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि इस रिंग रोड को तैयार करने हेतु तेजी से कार्य किया जाए। सड़क के आसपास अधिक से अधिक व्यू पॉइन्ट विकसित किए जाएं। उन्होंने रिंग रोड के किनारे अधिक से अधिक पार्किंग क्षेत्र विकसित किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने रिंग रोड की शीघ्र फीजिबिलिटी स्टडी कराए जाने के निर्देश दिए। कहा कि भूमि अधिग्रहण की दिशा में शीघ्र कार्रवाई की जाए। उन्होंने रिंग रोड क्षेत्र में आने वाले गदेरों और नालों पर पुल बनाकर सड़क को छोटा रखे जाने के निर्देश भी दिये, पुलों के माध्यम से गदेरों और नालों के कारण पर्यटकों को झील से अधिक दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।

इस अवसर पर सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, अपर सचिव युगल किशोर पंत एवं विनीत कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

प्रदेश में अग्निशमन सेवाओं में सुधार के संबंध में अधिकारियों की हुई बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में प्रदेश में अग्निशमन सेवाओं में सुधार के सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में अग्निशमन सुविधाओं के विकास के लिए एक फुलप्रूफ योजना तैयार की जाए। उन्होंने प्रदेश में उपलब्ध अग्निशमन सेवाओं का गैप एनालिसिस कर इसे पूर्ण रूप से संतृप्त करने के लिए योजना तैयार किए जाने हेतु निर्देशित किया।

मुख्य सचिव ने कहा कि आवासीय भवनों को फायर स्टेशन के पास ही बनाया जाए। इससे अग्निशमन कर्मियों को भी सुविधा होगी, एक समय पर अधिक से अधिक कर्मी उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने कहा कि फायर एवं अन्य आवश्यक प्रशिक्षणों के लिए प्रदेश के भीतर ही व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। सेलाकुई फायर स्टेशन को प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने एडवांस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए ही नागपुर (महाराष्ट्र) के प्रशिक्षण केन्द्र भेजे जाने की बात भी कही।

मुख्य सचिव ने बाढ़, भूस्खलन, ध्वस्त संरचनाओं के लिए रेस्क्यू कोर्सेज पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने एसडीआरएफ और अग्निशमन सेवाओं के कार्यात्मक एकीकरण की बात भी कही। कहा कि फायर स्टेशनों को अपग्रेड किए जाने हेतु सम्पूर्ण कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने प्रदेशभर में आवश्यकतानुसार फायर स्टेशनों एवं फायर हाईड्रेंट की भी उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों के लिए वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल उपकरणों की व्यवस्था किए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, पुलिस महानिरीक्षक नीरू गर्ग एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक निवेदिता कुकरेती सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

जोशीमठ में ढलान स्थिरीकरण को लेकर मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को दिए निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में जोशीमठ में आपदा जोखिम न्यूनीकरण से सम्बन्धित होने वाले कार्यों के सम्बन्ध में बैठक ली।

मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को जोशीमठ में ढलान स्थिरीकरण, पेयजल, सीवरेज, जल निकासी आदि कार्यों की डीपीआर शीघ्र तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डीपीआर तैयार किए जाने से लेकर कार्य शुरू से पूर्ण होने तक की प्रत्येक कार्य की समयसीमा निर्धारित कर ली जाए। सभी कार्य समय से पूर्ण हों इसके लिए संबंधित विभागों के सचिवों द्वारा साप्ताहिक अनुश्रवण किया जाए। कहा कि वे स्वयं भी पाक्षिक रूप से कार्यों का अनुश्रवण करेंगे।

मुख्य सचिव ने कहा कि जोशीमठ क्षेत्र में रेट्रोफिटिंग का कार्य करने हेतु कंसल्टेंट और विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। उन्होंने देश के सबसे अच्छे कंसल्टेंट और विशेषज्ञों को शामिल किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि कार्यों को तेजी से पूर्ण करने के साथ ही गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। औली रोप-वे में कराए जाने वाले कार्यों पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोपवे कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया जा रहा है, इसके लिए उन्होंने प्रदेश में रोप-वे सेल विकसित किए जाने के भी निर्देश दिए। प्रदेश में रोप-वे सिस्टम को मजबूत किए जाने हेतु रोपवे सेल को भी मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा एवं डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य उच्चाधिकारी एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चमोली जनपद से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

रिवर एंड स्प्रिंग रिजूवनेशन के लिए बनाई जा रही अथॉरिटी को चेक डैम तैयार करने में शामिल करेंः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में वर्षा जल संग्रहण के संबंध में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में वर्षा काल में अत्यधिक वर्षा होती है, परन्तु बाकी समय पर पानी की समस्या रहती है। रिवर एंड स्प्रिंग रिजूवनेशन के लिए बनाई जा रही अथॉरिटी अथवा एजेंसी के उद्देश्यों में अधिकतम संख्या में चेक डैम तैयार किए जाने को शामिल किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि वर्षा जल को चेक डैम आदि के माध्यम से रोक कर जल संग्रहण किया जा सकता है, जिससे वर्षभर पानी की उपलब्धता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि जल स्रोत से उत्तराखण्ड की सीमा तक सभी नदियों का मास्टर प्लान तैयार किया जाए। साथ ही राज्य जल संरक्षण की योजना तैयार की जाए, जिस पर चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल की कमी को दूर करने में यह प्रदेश की 70 प्रतिशत से अधिक वन भूमि महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे प्रदेश के अधिकतम भूभाग के जल स्रोत रिचार्ज होंगे। उन्होंने कहा कि योजनाओं के मूल्यांकन का एक मैकेनिज्म विकसित किया जाए। योजनाओं के अनुश्रवण के लिए डैशबोर्ड भी तैयार किया जाए।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी एवं जलागम प्रबंधन से नीना ग्रेवाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मंत्री अग्रवाल ने आईडीपीएल में कटी बिजली कनेक्शन को जोड़ने के दिए निर्देश

आईडीपीएल में निवासरत लोगों के घरों की बिजली काटे जाने का प्रकरण क्षेत्रीय विधायक व मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल के समक्ष पंहुचा। मंत्री डॉ अग्रवाल ने मौके से मुख्य सचिव डॉ एसएस संधू से दूरभाष पर वार्ता की और निर्देशित करते हुये कहा कि इस दिनों गर्मी और डेंगू जैसी बीमारियों का प्रकोप चल रहा है, कहा कि मानवीय आधार पर आईडीपीएल के घरों में बिजली के कनेक्शन उपलब्ध कराएं जाए, जिससे पानी भी उपलब्ध हो सके। बता दें कि आईडीपीएल के संदर्भ में पूर्व में भी डॉ अग्रवाल ने मुख्यमंत्री जी से समाधान निकालने को कहा था।

आज आईडीपीएल के निवासियों ने जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा के नेतृत्व में मुलाकात की। उन्होंने कहा कि बीते दिनों से बिजली के कनेक्शन काटे गए हैं। जिससे बिजली सहित पानी की दिक्कतें भी पैदा हो गयी हैं।

मंत्री डॉ अग्रवाल ने त्वरित संज्ञान लेकर मौके से ही मुख्य सचिव डॉ एस एस संधू को दूरभाष पर निर्देश दिए। कहा कि आईडीपीएल में मानवीय आधार पर बिजली कनेक्शन जल्द जोड़ा जाए। जिससे गर्मी और डेंगू जैसी बीमारी से राहत मिले। साथ ही पानी की समस्या भी दूर हो। इसके बाद आईडीपीएल के लोगों ने मंत्री डॉ अग्रवाल को धन्यवाद ज्ञापन भी दिया।

आभार प्रकट करने वालों में जिलाध्यक्ष रवींद्र राणा, मण्डल अध्यक्ष व आईडीपीएल निवासी सुरेंद्र कुमार, वायुराज सिंह, विकास तेवतिया, तनु तेवतिया, गीता मित्तल, निर्मला उनियाल, अजित वशिष्ठ, पुनिता भंडारी, राजेश कोठियाल आदि उपस्थित रहे।

ईको पार्क को लेकर डीएम और डीएफओ के साथ मुख्य सचिव ने की बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में ईको पार्क के सम्बन्ध में जिलाधिकारियों एवं डीएफओ के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश का अधिकतम भूभाग वन क्षेत्र होने के कारण यह प्रदेश की आर्थिकी में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हमें इकोलॉजी का ध्यान रखते हुए प्रदेश के लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराना है। ईको पार्क तैयार कर स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान किया जा सकता है।
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों से जनपदों के प्रस्तावों की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। कहा कि सीजन में प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों में क्षमता से अधिक पर्यटक आ रहे हैं। आसपास के खूबसूरत स्थलों को ईको टूरिज्म की दृष्टि से विकसित कर पर्यटकों को इन पर्यटन स्थलों की ओर मोड़ने की आवश्यकता है। इससे इन नए पर्यटन स्थलों के आसपास रोजगार के अवसर बनेंगे। उन्होंने चारधाम यात्रा मार्ग के आसपास अधिक से अधिक ईको पार्क विकसित किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि उधमसिंह नगर कुमांऊ क्षेत्र का द्वार है, इसके आसपास बहुत सी वाटर बॉडीज हैं, जिन्हें बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए विकसित कर आर्थिकी से जोड़ा जा सकता है।
मुख्य सचिव ने ईको पार्क विकसित करने में कम से कम कंक्रीट और स्टील का प्रयोग करने के निर्देश भी दिए। कहा कि अधिक से अधिक लकड़ी और बांस का प्रयोग किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि सभी कार्य समय से पूर्ण हो इसके लिए प्रत्येक स्तर की समय सीमा निर्धारित की जाए। प्रोजेक्ट्स की लगातार मॉनिटरिंग की जाए। वन विभाग से सम्बन्धित प्रस्तावों को वन विभाग को शीघ्र भेजे जाएं।
सभी जिलाधिकारियों ने अपने अपने जनपदों के प्रस्तावों पर विस्तार से जानकारी दी। जिलाधिकारियों द्वारा बताया गया कि अधिकतर प्रस्तावों में डीपीआर तैयार हो चुकी है। कुछ योजनाओं में कार्य प्रारम्भ भी हो चुका है।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, वन प्रमुख (हॉफ) अनूप मलिक एवं एसीईओ यूटीडीबी युगल किशोर पंत सहित सभी जनपदों से जिलाधिकारी एवं डीएफओ एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

यातायात संकुलन को कम करने को हर प्रकार के कदम उठाए जाने की आवश्यकताः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में देहरादून में यातायात संकुलन को कम करने को लेकर यूनिफाइड मेट्रोपोलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (यूएमटीए) की बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि देहरादून की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। यातायात संकुलन को कम करने के लिए हर प्रकार के छोटे से लेकर बड़े और महत्त्वपूर्ण कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि यातायात संकुलन को कम करने के लिए सार्वजनिक यातायात व्यवस्था को मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि हमें इस स्तर की यातायात व्यवस्था आमजन को देनी है कि यात्री को शहर के एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक जाने में मात्र 200 से 300 मीटर से अधिक पैदल न चलना पड़े और वाहन बदलने पर 5 से 7 मिनट्स से अधिक का इंतजार न करना पड़े। इसके साथ ही अन्य बिंदुओं पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यातायात संकुलन के मुख्य स्थानों को चिन्हित कर उन तिराहों और चौराहों के सुधारीकरण का कार्य किया जाए।

मुख्य सचिव ने यातायात संकुलन कम करने के लिए प्रवर्तन को सख्ती से लागू करने पर जोर देते हुए कहा कि पार्किंग सुविधाओं को बढ़ाए जाने और नो पार्किंग ज़ोन में वाहन खड़ा करने पर अधिक से अधिक चालान किए जाने से काफी हद तक यातायात संकुलन को कम किया जा सकता है। उचित स्थान और उपयोगिता के अनुसार अंडर पास और फुट ओवर ब्रिज, एलिवेटेड रोड, रोप-वे और पीआरटी जैसी सेवाओं को कहां कहां शुरू किया जा सकता है, इस पर योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि बाईपास सड़कों के निर्माण से भी काफी हद तक यातायात दबाव कम किया जा सकता है।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकी, जिलाधिकारी देहरादून सोनिका, प्रबन्ध निदेशक उत्तराखण्ड मैट्रो रेल जितेन्द्र त्यागी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सरकारी कर्मचारियों को बैंक कॉरपोरेट सैलरी पैकेज दिए जाने के संबंध में हुआ प्रस्तुतीकरण

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु के समक्ष सचिवालय में प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को बैंक कॉरपोरेट सैलरी पैकेज दिए जाने के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया गया।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को भी बैंकों द्वारा कॉरपोरेट सैलरी पैकेज दिए जाने के लिए बैंकों के साथ अनुबंध किए जाएं। अच्छे पैकेज देने वाले बैंकों के साथ शीघ्र से शीघ्र अनुबंध किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को दिए जाने वाले सामान्य बीमा योजना के तहत दिए जाने वाले लाभों को भी वर्तमान की आवश्यकताओं के अनुसार अपडेट किए जाने की आवश्यकता है। इस दिशा में भी शीघ्र कार्य किए जाने की आवश्यकता है।

बैठक में बताया गया कि बैंकों द्वारा कॉरपोरेट सैलरी पैकेज के तहत व्यवसायिक संस्थानों के कर्मचारियों को दिए जाने वाले लाभ प्रदेश लगभग 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को नहीं मिल रहे हैं। बैंकों के साथ सरकार के अनुबंध के बाद ये लाभ सभी कर्मचारियों को मिलने लगेंगे। इसमें 30 से 50 लाख के सामान्य बीमा जिसमें दुर्घटना में मृत्यु, पूर्ण अथवा आंशिक विकलांगता के साथ ही आश्रित बच्चों की उच्च शिक्षा और बेटियों की शादी भी शामिल है। कुछ बैंक इस पैकेज के तहत् 6.50 लाख तक का मुफ्त जीवन बीमा की सुविधा भी दे रहे हैं। इसके साथ ही ओवरड्राफ्ट की सुविधा के साथ ही विभिन्न प्रकार के ऋण में प्रोसेसिंग फीस में छूट भी दी जा रही है।

इस अवसर पर सचिव एसएन पाण्डेय, अपर सचिव डॉ. अहमद इकबाल, अरुणेंद्र चौहान एवं ललित मोहन रयाल भी उपस्थित थे।

सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर मुख्य सचिव ने ली जिलाधिकारियों की वर्चुअल बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सोमवार को सचिवालय में सरकारी संपत्तियों से अतिक्रमण हटाए जाने के सम्बन्ध में सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को सरकारी भूमि को अतिक्रमण से बचाने के लिए उसका चिन्हांकन किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि सरकारी भूमि के चिन्हांकन के साथ ही भूमि के रिकॉर्ड ठीक करने के लिए भी अलग से टीम लगाई जाए। उन्होंने कहा कि जिस सरकारी भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं है, उस भूमि को सुरक्षित रखने के लिए सीमांकन आदि का कार्य पूर्ण करा लिया जाए। जिन भूमियों पर अतिक्रमण हो चुका है, उन्हें खाली करवाया जाए, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अतिक्रमण फिर से न हो सके। भूमियों पर अतिक्रमण न हो इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि भूमि किसके नाम दर्ज है, यह देखने के लिए पिछले 60, 70 या 80 वर्षों के रिकॉर्ड की भी जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही भूमि का रिकॉर्ड के लिए पोर्टल तैयार हो जाएगा। आगे से इसी पोर्टल पर भूमि की सम्पूर्ण जानकारी अपलोड की जाएगी।

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों से सरकारी भूमि के चिन्हांकन में आ रही समस्याओं के सम्बन्ध में भी जानकारी ली एवं इनके निराकरण के लिए सुझाव भी मांगे। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण से बचाने के लिए डिजिटल मैप तैयार किए जाएं। फोटो एवं वीडियो के माध्यम से लगातार अतिक्रमण रोकने के प्रयास किए जाएं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु एवं अपर सचिव नितिन भदौरिया सहित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

पशुओं में होनी वाली लंपी बीमारी को लेकर मुख्य सचिव ने की बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में प्रदेश में पशुओं में होने वाली लंपी बीमारी के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि लंपी बीमारी से लड़ने के लिए सभी सम्बन्धित विभागों को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को साप्ताहिक समीक्षा करने के निर्देश दिए। कहा कि पूरे प्रदेश को सैचुरेट करने के लिए प्रदेशभर में टीकाकरण अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि बीमारी फैलाने वाले कीटाणुओं को मारने हेतु सघन फॉगिंग अभियान चलाए जाएं। मुख्य सचिव ने बीमारी से अधिक प्रभावित जनपदों द्वारा टीकाकरण और दवाओं के छिड़काव पर अधिक ध्यान दिए जाने हेतु निर्देशित किया। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को वैक्सीन और दवाओं आदि की पर्याप्त मात्रा की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही मुख्य सचिव ने प्रदेश में नवीन गौसदनों की स्थापना की प्रगति की भी समीक्षा की। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को गौसदनों के लिए शीघ्र भूमि चिन्हित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन जनपदों ने भूमि चिन्हीकरण कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं, शीघ्र विज्ञापन जारी कर इच्छुकों से आवेदन मांगे जाने की प्रक्रिया भी पूर्ण कर लें। मुख्य सचिव ने सड़कों में घूम रहे लावारिस पशुओं को शीघ्र गौसदनों में भेजे जाने के साथ ही गौशालाओं की क्षमता बढ़ाए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।