सड़क सुरक्षा कार्यों से संबंधित वार्षिक कार्ययोजना को ससमय पूर्ण किया जाएः सीएस

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य सड़क सुरक्षा कोष प्रबन्धन समिति की बैठक सम्पन्न हुयी। मुख्य सचिव ने सभी सम्बन्धित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा कार्यों से सम्बन्धित वार्षिक कार्ययोजना को ससमय पूर्ण कर लिया जाए।
मुख्य सचिव ने प्रत्येक जनपद में चिल्ड्रन ट्रेफिक पार्क स्थापित किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे बच्चों को यातायात से सम्बन्धित नियमों की जानकारी जीवन के शुरूआती समय से मिलेगी, जिससे बच्चे यातायात नियमों के प्रति जागरूक हो सकेंगे। उन्होंने बच्चों के पाठ्यक्रम में भी इससे सम्बन्धित अध्यायों को जोड़े जाने हेतु शिक्षा विभाग को निर्देश दिए। साथ ही, यातायात नियमों की जागरूकता हेतु लघु फिल्मों और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार प्रसार किया जाए।
मुख्य सचिव ने पुलिस विभाग को प्रदेशभर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हेतु मास्टर प्लान तैयार किए जाने के निर्देश भी दिए। कहा कि सीसीटीवी कैमरे चरणबद्ध तरीके से लगाए जाएंगे, जिसके लिए बजट प्रत्येक वर्ष निर्धारित किए जाएगा। उन्होंने यातायात पुलिस, परिवहन, खनन आदि सभी संबंधित विभागों को एएनपीआर कैमरों के लिए एक एकीकृत कार्ययोजना तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए सभी विभागों को शीघ्र कार्ययोजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकी, विशेष सचिव गृह रिद्धिम अग्रवाल, आईजी एवं निदेशक यातायात मुख्तार मोहसिन, अपर सचिव डॉ. अहमद इकबाल एवं विनीत कुमार सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

आईजीओटी पोर्टल पर सभी विभाग को ऑनबोर्ड होने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने सचिवालय में मिशन कर्मयोगी के तहत् राजकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के ऑनलाइन प्रशिक्षण हेतु डॉ. आर. एस. टोलिया उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी द्वारा तैयार ट्रेनिंग मॉड्यूल का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर डॉ. आर. एस. टोलिया उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी के महानिदेशक श्री बी. पी. पाण्डेय भी उपस्थित थे।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को शीघ्र आईजीओटी पोर्टल पर ऑनबोर्ड किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि आईजीओटी पोर्टल पर ऑनबोर्ड होने के लिए सभी विभागों को नोडल अधिकारी शीघ्र नामित किए जाए। उन्होंने कहा कि सभी विभागों में क्षमता विकास के लिए कर्मियों को प्रशिक्षण की आवश्यकता है, जिसमें यह प्रशिक्षण मॉड्यूल बहुत ही लाभकारी होगा। उन्होंने कहा कि विभागों द्वारा अपने पूर्व में तैयार प्रशिक्षण सामग्रियों को भी शीघ्र इस पोर्टल पर अपलोड करवाया जाना चाहिए।
महानिदेशक डॉ. आर. एस. टोलिया उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी बी. पी. पाण्डेय ने बताया कि पोर्टल पर अभी तक 72 में से 36 विभाग ऑनबोर्ड हो गए हैं। इस ऑनलाइन पोर्टल पर कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध रहेगी, जिसे विभागीय कर्मी सरकारी ईमेल आईडी के माध्यम से ई-लर्निंग सामग्री प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि जिन विभागों के पास पहले से अपनी प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध है, इस पोर्टल पर अपलोड की जा सकेगी, ताकि सभी कर्मियों को आसानी से प्राप्त हो सके। पोर्टल पर अब तक 120 प्रशिक्षण मॉड्यूल अपलोड किए जा चुके हैं, अगले माह तक जिनकी संख्या लगभग 200 हो जायेगी।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव शैलेश बगोली, बृजेश कुमार संत एवं विशेष सचिव गृह रिद्धिम अग्रवाल सहित अन्य उच्चाधिकारी एवं विभागीय नोडल अधिकारी उपस्थित थे।

इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्रों को भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन कराया जाएः संधु

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र की सामान्य निकाय को बैठक आयोजित हुई। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड भूस्खलन की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील होने के कारण इस भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र की महत्ता बहुत अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि यूएलएमएमसी को इस स्तर का केंद्र बनाना है कि यह केंद्र सिर्फ प्रदेश ही नहीं बल्कि देश व विश्व के लिए कार्य करे।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रथम चरण में यह केंद्र प्रदेश में जहां से भी भूस्खलन और भू-धंसाव की शिकायतें आ रही हैं, उन क्षेत्रों में जाकर अध्ययन शुरू करे। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों को इन क्षेत्रों में शोध कार्य के लिए प्रोत्साहित किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में किए जा रहे अध्ययन कार्यों में आसपास के इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्रों को भी शामिल किया जाए, इससे छात्र इस क्षेत्र में प्रयोगात्मक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही स्थानीय लोगों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के अन्य संस्थानों से आपसी तालमेल के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी भूस्खलन क्षेत्र के ट्रीटमेंट के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजनाएं तैयार की जाएं। मुख्य सचिव ने भूस्खलन जोन के ट्रीटमेंट के लिए बायो इंजीनियरिंग सॉल्यूशन पर अधिक ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए बायो इंजीनियरिंग सेल बनाई जा सकती है।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सचिव रंजीत कुमार सिन्हा, दीपेन्द्र कुमार चौधरी, अपर सचिव रंजना राजगुरु एवं निदेशक यूएलएमएमसी डॉ. शांतनु सरकार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

आमजन को यातायात नियमों का पालन करने के लिए करें जागरूकः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में सचिवालय में एकीकृत महानगर यातायात प्राधिकरण की बैठक सम्पन्न हुई। मुख्य सचिव ने पुलिस और परिवहन विभाग से यातायात नियमों का कठोरता से पालन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क पर चलने वाला प्रत्येक व्यक्ति जब यातायात नियमों का पालन करने लगेगा, ट्रैफिक जाम से निजात मिलने लगेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए आमजन को यातायात नियमों के पालन करने हेतु जागरूक किया जाए। छोटी छोटी वीडियो क्लिप्स के माध्यम से सोशल मीडिया और सड़कों के किनारे और ट्रैफिक सिग्नल के आसपास स्क्रीन पर जागरूकता वीडियो चलाए जाएं। मुख्य सचिव ने महानिदेशक सूचना को इस सम्बन्ध में वीडियो बनाए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने सभी सम्बन्धित विभागों को अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक उपायों पर कार्य किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि यातायात पुलिस और परिवहन विभाग को मिलजुलकर ऑटो, ई रिक्शा आदि के लिए पार्किंग के साथ ही, ई-रिक्शा और ऑटो स्टॉप आदि निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए। फुटपाथ एवं सड़कों से अतिक्रमण शीघ्र हटाया जाए। यातायात नियम तोड़ने और नो पार्किंग में गाड़ी लगाने वालों पर लगातार चालान किए जाएं। मुख्य सचिव ने उपाध्यक्ष एमडीडीए को शहर में साइनेज आदि लगाकर यातायात नियमों की जानकारी उपलब्ध कराए जाने की बात भी कही। उन्होंने शहरों में फुटपाथों की मरम्मत के लिए अलग से बजट हेड बनाए जाने हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया।
बैठक के दौरान एसएसपी देहरादून दिलीप सिंह कुंवर ने बताया कि नियमों के पालन न करने पर वाहन चालकों पर सीसीटीवी के साथ ही ड्रोन के माध्यम से भी चालान किए जा रहे हैं। उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी द्वारा बताया गया कि स्कूल बसों की पार्किंग स्कूल परिसर में ही करने और स्कूल की छुट्टी के बाद खेल के मैदानों को पार्किंग के रूप में प्रयोग करने हेतु विभिन्न स्कूलों से लगातार बातचीत चल रही है। इसमें विभिन्न स्कूलों ने सकारात्मक रूख अपनाया है, और हर सम्भव सहयोग के लिए तैयार हैं। मॉल्स आदि को अपनी खुद की पार्किंग का पूर्णतः प्रयोग किए जाने हेतु कहा गया है, साथ ही पार्किंग फुल है अथवा पार्किंग कितनी भरी है इसकी जानकारी देने हेतु मॉल के बाहर सड़क पर डिस्प्ले के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराए जाने के लिए भी कहा गया है। बैठक में बताया गया कि नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा लगातार अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की जा रही है।
इस अवसर पर सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकि एवं एस.एन. पाण्डेय, जिलाधिकारी देहरादून सोनिका, प्रबन्ध निदेशक उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पाेरेशन जितेन्द्र त्यागी, मुख्य नगर आयुक्त मनुज गोयल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

अधिक से अधिक वेंडर्स को प्रोत्साहित करने को पीएम स्वनिधि योजना का किया जाए प्रचारः सीएस

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने पीएम स्वनिधि योजना की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने पीएम स्वनिधि योजना के अन्तर्गत राज्य के 25 हजार स्ट्रीट वेंडर्स को ऋण उपलब्ध कराने के लक्ष्य को निर्धारित समय सीमा में हासिल करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि अधिक से अधिक वेंडर्स को प्रोत्साहित करने के लिए योजना का प्रचार प्रसार किया जाए। क्षेत्रों में कैंप आयोजित कर प्रलेखन आदि का कार्य पूर्ण कराए जाएं।

मुख्य सचिव ने एसएलबीसी को बैंकों को भी अस्वीकृत आवेदनों के तेजी से निस्तारण के निर्देश देते हुए कहा कि बैंक वेंडर द्वारा पहले अंश के 10 हजार जमा करने के बाद दूसरे और तीसरे अंश के 20 हजार और 50 हजार के आवेदनों की स्वीकृति में देरी न लगाएं।

इस अवसर पर सचिव दीपेन्द्र कुमार चौधरी, अपर सचिव शहरी विकास नवनीत पाण्डे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

पर्यटन गतिविधियां अधिक से अधिक संचालित करने पर जोर

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने गुरुवार को सचिवालय में पर्यटन को बढ़ावा देने के सम्बन्ध में पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक ली। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन से सम्बन्धित अधिक से अधिक गतिविधियां शामिल करने हेतु संभावनाएं तलाशी जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड भौगोलिक दृष्टिकोण से जलक्रीड़ा और हवाई क्रीड़ाओं के लिए अत्यधिक उपयुक्त है, जो रोजगार सृजन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्य सचिव ने कहा कि पौड़ी के रांसी स्टेडियम सहित पिथौरागढ़ और टिहरी में स्थित अत्यधिक ऊंचाई में स्थित खेल के मैदानों को हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग ग्राउंड के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने प्रदेश में उपलब्ध भूमि खंड के अनुरूप छोटे बड़े गोल्फ कोर्स विकसित किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक संभव गतिविधियों को शामिल किया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न स्थानों में रस्सी से बंधे हुए गर्म गैस के गुब्बारों के माध्यम से हवाई दृश्यों को दिखाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर के दर्शन बंधे गैस के गुब्बारों के माध्यम से कराए जाने की संभावनाएं भी तलाशी जाएं। उन्होंने कहा कि हिमालय दर्शन योजना को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाए। साथ ही, हाईएंड टूरिस्ट के लिए ब्रेकफास्ट योजना को अधिक से अधिक स्थानों से संचालित किए जाने हेतु प्रयास किए जाएं।
मुख्य सचिव ने कहा कि खेल विभाग के माध्यम से साहसिक खेलों के लिए प्रामाणिक पाठ्यक्रम की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि इस क्षेत्र में अधिक से अधिक प्रशिक्षित युवा आ सकें। पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी जमीन को लीज पर देने के लिए पॉलिसी में बदलाव की आवश्यकता है तो की जानी चाहिए, ताकि लोगों को पर्यटन गतिविधियों से जुड़ने में आसानी हो।
इस अवसर पर सचिव सचिव कुर्वे, अपर सचिव पर्यटन और नागरिक उड्डयन सी. रविशंकर सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

आयुर्वेद पर आधारित मुख्य सचिव ने किया छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में उत्तराखंड के पीएमएचएस चिकित्सा अधिकारीयों के लिए आम जनमानस के इलाज हेतु आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए 06 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। मुख्य सचिव ने आयुर्वेद पद्धति के महत्व पर विशेष बल देते हुए कहा कि प्राचीन समय से ही आयुर्वेद द्वारा चिकित्सा सुविधा दी जा रही है। आज के समय में आयुर्वेद व ऐलोपैथी पद्धति को आपस में तालमेल बनाकर आम जनमानस को चिकित्सकीय इलाज दे कर बेहतर इलाज किया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने प्रशिक्षुओं को बताया कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में योग और आयुर्वेद महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आयुर्वेद रोगों के इलाज के बजाय रोकथाम पर अधिक बल देता है। योग और आयुर्वेद के अनुरूप जीवन शैली अपनाकर हम अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं। इस दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि आयुर्वेद स्वस्थ जीवन शैली का आधार है, जो तनाव मुक्त जीवन जीने को बढ़ावा देता है। अवसाद (डिप्रेशन) को कम करने के लिये आयुर्वेद में मौजूद चिकित्सकीय इलाज को अपनाकर स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।

मुख्य सचिव द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम में Practical Training on Ayurveda For PMHS Medical Officers of Uttarakhand To Promote Wellness Concept उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय तथा एच0एन0बी0 उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय द्वारा बनाये गये प्रशिक्षण मॉड्यूल का विमोचन किया गया।

कार्यक्रम में सचिव स्वास्थ्य डा0 आर0 राजेश कुमार, सचिव आयुष डा0 पंकज कुमार पाण्डे, कुलपति एच0एन0बी0 उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय प्रो0 हेमचन्द पाण्डे, कुलपति उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय प्रो0 सुनील कुमार जोशी, स्वास्थ्य महानिदेशक डा0 विनीता शाह, एन0एच0एम0 निदेशक डा0 सरोज नैथानी, डा0 अजय कुमार नगरकर, प्रो0 अनूप कुमार गक्खड, प्रो0 पंकज कुमार शर्मा, प्रो0 डी0 सी0 सिंह, डा0 दीपक कुमार सेमवाल, डा0 आशुतोष चौहान, चन्द्रमोहन पैन्युली, डा0 राजीव कुरेले, डा0 एच एम0 चन्दोला, डा0 नन्द किशोर दाधिच, डा0 अमित तमादड्डी आदि मौजूद रहे।

चारधाम यात्रा मार्ग के संबंध में विभागीय अधिकारियों की हुई बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने चारधाम यात्रा मार्ग के सम्बन्ध में सचिव, सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय अलका उपाध्याय, लोक निर्माण विभाग, एनएचआईडीसीएल, बीआरओ एवं सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की।
मुख्य सचिव ने सचिव सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से राष्ट्रीय राजमार्गों को शीघ्र दुरुस्त किए जाने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा मार्ग में स्थित विभिन्न बॉटल नेक को शीघ्र से शीघ्र ठीक कराया जाए। उन्होंने कहा कि जो भी सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं, उन्हें तेजी से काम कर शीघ्र पूर्ण किया जाए। उन्होंने चम्पावत बाईपास और पिथौरागढ़ बाईपास के सम्बन्ध में जिलाधिकारियों को साप्ताहिक बैठक कर तेजी से कार्य किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने बीआरओ को उत्तरकाशी में धरासू बैंड का कार्य 2 या 3 शिफ्ट में करते हुए अगले मई माह के अंत तक पूर्ण किए जाने के भी निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों से फंड्स की परवाह न करते हुए प्रदेश में सड़क सुरक्षा के कार्यों को प्राथमिकता पर लेते हुए शीघ्र पूर्ण किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि पहली बार सड़क सुरक्षा के लिए क्रैश बैरियर और ब्लैक स्पॉट सुधारीकरण जैसे कार्यों के लिए 300 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि अगले 3, 4 माह में प्राथमिकता निर्धारित करते हुए ज्यादा से ज्यादा क्रैश बैरियर, साईनेज आदि लगाते हुए ब्लैक स्पॉट का सुधारीकरण किया जाए।
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को सड़क दुर्घटनाओं में मृत और घायलों को दिए जाने वाले मुआवजे के लंबित प्रकरणों को शीघ्र निस्तारित किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये सभी जिलाधिकारियों की नैतिक जिम्मेदारी है कि दुर्घटनाओं का मुआवजा दुर्घटना के 2, 3 दिनों में वितरित कर दिया जाए।
इस अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सचिव सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय अलका उपाध्याय, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकि सहित सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

चिंतन शिविर के बिंदुओं पर मुख्य सचिव ने की चर्चा

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस संधु ने सोमवार को सचिवालय में 22-23 नवंबर, 2022 को आयोजित चिंतन शिविर के बिंदुओं पर चर्चा की। मुख्य सचिव ने प्रदेशभर के शहरों में सेंट्रल प्लाजा और यूनिटी मॉल की तर्ज पर सिटी पार्क विकसित किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों को विकसित कर इनमें वाहनों की एंट्री प्रतिबंधित करते हुए शहरों में इनका प्रावधान किया जाए। यह सोशल इंटरेक्शन के लिए भी आवश्यक है।
मुख्य सचिव ने कहा कि मलिन बस्तियों की समस्या को कम करने के लिए किराया आधारित आवास मॉडल पर शीघ्र कार्य किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा दिए जाने के साथ ही सड़कों के लेवल को फिक्स्ड किए जाने की भी बात की। उन्होंने कहा कि सड़कों पर बार बार काम जोन से सड़कों की ऊंचाई लगातार बढ़ते जाने से घरों के लिए ड्रेनेज की समस्या आती है, इसके लिए सड़कों को स्क्रैब करके ही पुनः कार्य कराए जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि शहरों में साइकिल ट्रैक भी विकसित किए जाने पर तेजी से कार्य किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाए जाने हेतु विभिन्न कदम उठाए जाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि आईटी का प्रयोग करके वर्ल्ड क्लास स्तर के लेक्चर्स के माध्यम से छात्र छात्राओं को शिक्षित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सभी स्कूलों में ड्राइव चलाकर इसकी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। उन्होंने प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों में ऑनलाइन शिक्षण की व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही सभी जनपदों में पुस्तकालयों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में एक समिति बनाए जाने के भी निर्देश दिए। यह समिति विभिन्न विभागों और स्कूलों के एसेट (भवनों और मैदानों) को स्कूलों और कार्यालयों की छुट्टी के बाद कैसे कैसे प्रयोग कर सकते हैं इस सम्बन्ध में निर्णय ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि स्कूल और कॉलेजों के प्ले ग्राउंड और पार्किंग को स्कूल की छुट्टी के बाद खुले रखे जाने चाहिए ताकि उनका आसपास के युवा खेल और पार्क के रूप में घूमने के लिए प्रयोग कर सकें।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, सचिव श्री शैलेश बगोली, श्री अरविन्द सिंह ह्यांकी, श्री रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, श्री विजय कुमार यादव उपाध्यक्ष एमडीडीए श्री बंशीधर तिवारी एवं अपर सचिव श्री रोहित मीणा सहित अन्य सभी विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने की सरकार के एक वर्ष होने पर घोषणाओं की समीक्षा

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा की गई घोषणाओं के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को मुख्यमंत्री घोषणाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन घोषणाओं पर तत्काल कार्य शुरू किया जा सकता है, उन पर शीघ्र कार्य शुरू किया जाए, जिन घोषणाओं के पूर्ण करने के लिए पॉलिसी बनाए जाने की आवश्यकता है, अगले 10 दिनों में पॉलिसी ड्राफ्ट तैयार कर लिया जाए।
मुख्य सचिव ने सभी घोषणाओं के पूर्ण होने की समयावधि निर्धारित कर लिए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को किराए में 50 प्रतिशत छूट के लिए सम्बन्धित विभाग पॉलिसी तैयार कर लें। उन्होंने लैब ऑन व्हील योजना के तहत जनपदों को मोबाइल लैब उपलब्ध कराए जाने के निर्देश सम्बन्धित विभागों को दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि बाल क्रीड़ा स्थलों की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने हेतु जो भी मास्टर प्लान बनाए जा रहे हैं, उन सभी मास्टर प्लानों में प्ले ग्राउंड्स की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए स्कूल और कॉलेजों के ग्राउंड्स को प्रयोग किए जाने के लिए स्कूल कॉलेज प्रबंधन से वार्ता की जाए, प्ले ग्राउंड्स की मेंटेनेंस राशि सरकार द्वारा व्यय की जाएगी। मुख्य सचिव ने सभी घोषणाओं के पूर्ण किए जाने के लिए समय सीमा निर्धारित किए जाने के निर्देश देते हेतु लगातार मॉनिटरिंग किए जाने की बात कही।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, अरविन्द सिंह ह्यांकी, सचिन कुर्वे, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, रविनाथ रमन, डॉ. आर. राजेश कुमारी एवं दीपेंद्र कुमार चौधरी सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।