सीएस ने दी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की बधाई, की अपील

उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने देहरादून के भागीरथ पुरम में एमडीडीए द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पौधरोपण किया। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने अमलतास के पौधे का वृक्षारोपण किया।

इस अवसर पर हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने प्रदेशवासियों से विशेषकर युवाओं से वृक्षारोपण की अपील की है। कार्यक्रम के दौरान सीएस रतूड़ी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड का यह लोकपर्व विश्व एवं मानव जगत को पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली से खुशहाली का संदेश देता है।

मुख्य सचिव ने सभी लोगों से हरेला पर्व के अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम के तहत वृक्षारोपण करने तथा वृक्षारोपण की फोटो व जानकारी merilife.org पर अपलोड करने का अनुरोध किया है।

इस अवसर पर एमडीडीए के अधिकारी उपस्थित रहे।

सचिवालय में नागरिक सेना संपर्क कांफ्रेस का हुआ आयोजन


मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में सचिवालय में नागरिक सेना सम्पर्क कॉन्फ्रेस का आयोजन हुआ। बैठक में राज्य एवं सेना के मध्य के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। राज्य में वाइब्रेंट विलेज योजना की प्रभावी क्रियान्वयन पर विचार विमर्श किया गया। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने निर्देश दिए कि भारत सरकार के वाइब्रेंट विलेज तथा विकसित भारत मिशन के कार्याे को पूरा करने हेतु राज्य एवं सेना के प्रभावी समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इस दिशा में राज्य एवं सेना को समन्वित प्रयासों करने हैं।
बैठक में प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुधांशु, सचिव सचिन कुर्वे, सब एरिया कमाण्डर तथा जिलाधिकारी पिथौरागढ़, नैनीताल, पौड़ी व चंपावत वर्चुअल माध्यम से मौजूद रहे।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में सचिवालय में नागरिक सेना सम्पर्क कॉन्फ्रेस का आयोजन हुआ। बैठक में राज्य एवं सेना के मध्य के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। राज्य में वाइब्रेंट विलेज योजना की प्रभावी क्रियान्वयन पर विचार विमर्श किया गया। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने निर्देश दिए कि भारत सरकार के वाइब्रेंट विलेज तथा विकसित भारत मिशन के कार्याे को पूरा करने हेतु राज्य एवं सेना के प्रभावी समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इस दिशा में राज्य एवं सेना को समन्वित प्रयासों करने हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि जनपद पिथौरागढ़ के सीमांत गांव गुंजी में पर्यटन विभाग द्वारा शिवधाम का निर्माण किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने की एनएचएआई सदस्य के साथ बैठक

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से सचिवालय में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के सदस्य विकास चौहान ने मुलाकात कर राज्य में संचालित प्रोजेक्ट्स से सम्बन्धित मुद्दों पर बैठक की। बैठक के दौरान भूमि अधिग्रहण की क्षतिपूर्ति के त्वरित वितरण, अधिग्रहित भूमि के म्यूटेशन की प्रगति, भूमि अधिग्रहण में फॉरेस्ट क्लियरेंस के मामलों, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे, रूद्रपुर बाईपास, काशीपुर बाईपास, एनएच 119 के फोर लेन कोटद्वार बाईपास, रूड़की, रूद्रपुर, वसन्त विहार, नजीबाबाद में संचालित विभिन्न प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने एनएचएआई के सभी प्रोजेक्ट्स पर राज्य की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है ।
बैठक में प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुधांशु सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी मौजूद रहे।

फील्ड अधिकारियों के कुशल प्रबन्धन से राज्य में चारधाम यात्रा का पुनः सफलतापूर्वक संचालन जारीः राधा रतूड़ी

चारधाम यात्रा के साथ ही प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं हेतु एक फूलप्रूफ ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की स्थायी व्यवस्था विकसित करने हेतु मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने प्रतिष्ठित आईटी कन्सलटेन्सी कम्पनी की सहायता लेने के निर्देश चारधाम यात्रा प्रबन्धन से सम्बन्धित अधिकारियों को दिए हैं। सीएस ने यात्रा प्रबन्धन से जुड़े अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि चारधाम यात्रा के सुव्यवस्थित प्रबन्धन तथा स्थायी समाधान में टेक्नॉलजी ही सबसे अधिक सहायता कर सकती है। उन्होंने जल्द से जल्द इस आईटी कन्सलटेन्सी कम्पनी के साथ ही चारधाम यात्रा से जुड़े सभी हितधारकों जिनमें होटल व्यवसायी, टूर ऑपरेटर्स, पर्यटन से जुड़े लोग तथा प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से यह रजिस्ट्रेशन व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए हैं।

चारधाम यात्रा में फील्ड पर काम कर रहे अधिकारियों को यात्रा प्रबन्धन में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानते हुए मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने आज स्वयं ऋषिकेश स्थित यात्रा रजिस्ट्रेशन ऑफिस तथा ट्रांजिट कैम्प पहुंचकर सभी अधिकारियों विशेषकर फील्ड पर कार्य करने वाले कनिष्ठ अधिकारियों से यात्रा प्रबन्धन हेतु बनने वाली एसओपी के लिए उनके सुझाव मांगे।

सीएस राधा रतूड़ी ने कहा कि चारधाम यात्रा प्रबन्धन से जुड़े सभी अधिकारियों विशेषरूप से फील्ड अधिकारियों के कुशल प्रबन्धन से राज्य में चारधाम यात्रा आरम्भ में कुछ चुनौतियों के बाद पुनः सुचारू, सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है। वर्तमान में ऋषिकेश हरिद्वार के हॉलडिंग प्वाइंट में लगभग 3000 श्रद्धालु मौजूद हैं, जिन्हें धामों में भेजा जा रहा है। चारधाम से सभी श्रद्धालु यात्रा के पश्चात सकुशल वापस लौट रहे हैं। यात्रा मार्ग एवं धामों में सभी व्यवस्थाएं सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं। इसलिए हरिद्वार से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पुनः आरम्भ किया जा रहा है।

भविष्य में श्रद्धालुओं की निरन्तर बढ़ती संख्या के समाधान हेतु मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने चारधाम यात्रा से सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारियों को नए ठहराव स्थलों को चिहिन्त करने के साथ ही वहाँ पर पार्किंग स्थलों को विकसित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल्द ही धनराशि भी जारी कर दी जाएगी। सीएस ने यात्रा मार्ग पर वाहनों की कैरिंग कैपिसिटी व पार्किंग स्थलों का सही आकलन जल्द बनाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कैरिंग कैपिसिटी के अनुसार ही नियमों का सख्ती से पालन करवाना आवश्यक है। इसके साथ ही सीएस ने ट्रिप कार्ड व्यवस्था का भी कड़ाई से पालन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने भविष्य में चारधाम यात्रा के सफल संचालन हेतु नेशनल टूर ऑपरेटर्स का भी सहयोग लेने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सीएस ने देश के अन्य राज्यों के ऐसे जिले जहां से सबसे अधिक यात्री चार धाम पर आते हैं, उनके जिलाधिकारियों एवं जिला प्रशासन से भी समन्वय एवं संवाद के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने ऋषिकेश स्थित यात्रा रजिस्ट्रेशन ऑफिस एवं ट्रांजिट कैम्प पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया तथा सम्बन्धित अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डेय, जिलाधिकारी देहरादून, टिहरी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक टिहरी तथा चारधाम यात्रा से सम्बन्धित अधिकारी मौजूद रहे।

जल जीवन मिशन के तहत चल रहे प्रोजेक्ट्स को 2024 जून तक पूर्ण करने के निर्देश

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने वर्तमान में जल जीवन मिशन के तहत संचालित सभी प्रोजेक्ट्स को जून 2024 तक पूर्ण करने की डेडलाइन सम्बन्धित अधिकारियों को दी है। सीएस ने सभी 13 जिलों में शत् प्रतिशत एफएचटीसी (फंक्शनल हाउसहॉल्ड टेप कनेक्शन) कवरेज पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विशेषरूप से स्कूलों में पेयजल, बेसिन के साथ ही शौचालयों में जलापूर्ति के सौ फीसदी लक्ष्य को पूरा करने की डेडलाइन भी अधिकारियों को दिए हैं। मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने देहरादून तथा टिहरी जनपदों में 500 गांवों को स्वच्छ सुजल ग्राम बनाने के पायलट प्रोजेक्ट पर तत्परता एवं गम्भीरता से कार्य करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत सहभागी स्प्रिंग शेड प्रबन्धन (जल स्रोत संरक्षण/पुर्नजीवीकरण ) तथा जल आपूर्ति योजनाओं की दीर्घकालीन सत्तता के माध्यम से देहरादून एवं टिहरी जनपदों के 500 गांवों को मॉडल वॉश विलेज बनाना है। सीएस ने जल जीवन मिशन के प्रोजेक्ट्स की थर्ड पार्टी मॉनिटरिंग को भी टाइमबाउण्ड करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने जल जीवन मिशन (एसडब्ल्यूएसएम तथा डीडब्ल्यूएसएम ) के कर्मचारियों के मूल्यांकन के आधार पर वेतन वृद्धि के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के तहत जल जीवन मिशन की चतुर्थ शीर्ष समिति की बैठक सचिवालय में सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य में जल जीवन मिशन के अपडेट के बारे में बताया गया कि उत्तराखण्ड में एफएचटीसी (फंक्शनल हाउसहॉल्ड टेप कनेक्शन) कवरेज 92.75 प्रतिशत है। राज्य के पांच जिलों में एफएचटीसी कवरेज 99 प्रतिशत से अधिक है। चार जिलों में 90 से 99 प्रतिशत है तथा अन्य चार जिलों में 80 से 90 प्रतिशत है।

बैठक में सचिव अरविन्द सिंह हयांकी, अपर सचिव डा0 अहमद इकबाल, नितिन भदौरिया एवं अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने वन व पशुपालन विभाग के अधिकारियों संग की बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु ने सचिवालय में वन एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा की। मुख्य सचिव ने कहा कि बन्दरों और जंगली सुअरों के द्वारा प्रदेश में खेती को अत्यधिक नुकसान हो रहा है। इसके लिए बन्दरों की संख्या को सीमित करने हेतु बन्दरों का बन्ध्याकरण किया जाए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि बन्दरों के बन्ध्याकरण के लिए बन्दर बन्ध्याकरण केंद्रों की संख्या बढ़ायी जाए। इसके लिए पशुपालन विभाग द्वारा पशुचिकित्सकों एवं अन्य सहायक स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव ने फसलों को जंगली सुअरों से होने वाले नुकसान की रोकथाम के लिए भी योजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि होगा।
इस अवसर पर मुख्य सचिव ने पिरूल से ईंधन के रूप में प्रयोग होने वाले पैलेट्स तैयार करने और ईको पार्क योजना की प्रगति की जानकारी भी ली। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं की निरन्तर मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, वन विभाग प्रमुख (हॉफ) अनूप मलिक एवं सचिव पशुपालन डॉ. बीवीआरसी पुरूषोत्तम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

राज्य गंगा समिति की हुई बैठक, स्ट्रेचवाईज समितियों के गठन के मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य गंगा समिति की बैठक आयोजित हुयी। मुख्य सचिव ने गंगा के अंतर्गत स्ट्रेचवाईज समितियों का गठन किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आमजन का अभियान बनाने के लिए इन समितियों में स्थानीय बुद्धिजीवी एवं गंगा की स्वच्छता के लिए गम्भीर लोगों को शामिल किया जाए। कहा कि इससे लगातार निगरानी रखी जा सकेगी। उन्होंने जिलाधिकारियों को अच्छा कार्य करने के लिए चिन्हित कर सम्मानित भी किया जाए।
मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा ’स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन बोर्ड’ में भी अधिक से अधिक आमजन की भागीदारी सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गंगा में दूषित पानी सीधे न जाए, इसके लिए एसटीपी को नदियों से दूर बनाकर उसके पानी को कृषि कार्यों में प्रयोग किया जाए। इसके लिए एक स्थान पर बड़ा प्लांट लगाने के बजाए विभिन्न स्थानों पर छोटे-छोटे प्लांट लगाए जाने चाहिए। उन्होंने एसटीपी का वार्षिक सोशल ऑडिट किए जाने के भी निर्देश दिए। कहा कि सोशल ऑडिट के लिए किसी एक एजेन्सी को कार्य देने के बजाए विभिन्न एजेंसियों को इसमें शामिल किया जाए।
मुख्य सचिव ने घने वनीकरण पर भी फोकस किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि नदियों के किनारे जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि शुरूआती वर्षों में इससे उत्पादन कम मिलता पर परन्तु 2-3 वर्षों के बाद इसमें उत्पादन बढ़ना शुरू होता है और इसके अच्छे मूल्य मिलने से शीघ्र ही यह खेती लाभदायक हो जाती है। उन्होंने कहा कि शुरूआती 2-3 वर्षों के लिए किसानों को सपोर्ट देने के लिए कोई योजना संचालित की जा सकती है।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकी, सचिन कुर्वे, उदयराज, अपर सचिव शहरी विकास नवनीत पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी एवं राज्य गंगा समिति से सम्बन्धित अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि सहित जनपदों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने की हंस फाउंडेशन द्वारा किये जा रहे विभिन्न कार्यों की दी जानकारी

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु की अध्यक्षता में हंस फाउंडेशन के सहयोग से उत्तराखण्ड में चल रही विभिन्न योजनाओं के संचालन हेतु संचालन समिति की 9वीं बैठक संपन्न हुई। इस अवसर पर हंस फाउंडेशन की ओर से प्रदेश में किए जा रहे विभिन्न कार्यों की जानकारी दी गई।

मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग से प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को दृष्टि से ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित कर हंस फाउंडेशन के सहयोग से मेडिकल मोबाइल यूनिट संचालित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जंगलों को आग से बचाने के लिए पिरूल का निस्तारण आवश्यक है। उन्होंने स्कूलों में मिड-डे मील के लिए रसोई गैस के विकल्प के रूप में पिरूल का उपयोग में हंस फाउंडेशन से सहयोग के अपेक्षा की। कहा कि इस रोजगार से जुड़े लोगों को एक बाजार भी मिलेगा। साथ ही, जंगलों को आग से बचाया जा सकेगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बीआरसी और सीआरसी के साथ ही कौशल विकास के क्षेत्र में क्षमता निर्माण में हंस फाउंडेशन सहयोग कर सकता है। साथ ही आजीविका के क्षेत्र में हंस फाउंडेशन द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहयोग प्रदान कर सकता है। उन्होंने प्रदेश के विकास में राज्य सरकार की ओर से हंस फाउंडेशन को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

हंस फाउंडेशन के सीईओ संदीप कपूर ने बताया कि हंस फाउंडेशन की ओर से प्रदेशभर के 1235 दूरस्थ गांवों में 52 मेडिकल मोबाइल यूनिट संचालित की जा रही हैं। हंस उद्यमिता मिशन के तहत राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं में उद्यमियों को तकनीकी सहायता, बिजनेस प्लान और ऋण स्वीकृति ने सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगोली, दीपेन्द्र कुमार चौधरी, डॉ. आर. राजेश कुमार, हरिचंद सेमवाल एवं अपर सचिव सी. रविशंकर सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

समिति की एक भी बैठक आयोजित ना करने पर भट्ट ने लिखा सीएस को पत्र

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर पत्रकारों को सम्मानित करने के लिए गठित राज्यस्तरीय ‘‘स्व. रामप्रसाद बहुगुणा स्मृति पुरस्कार चयन समिति’’ के सदस्य साहित्यकार त्रिलोक चन्द्र भट्ट ने समिति की बैठक बुलाकर प्राप्त आवेदनों में से यथाशीघ्र पात्र पत्रकारों का चयन करवाने की मांग की है।
उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव जो राज्यस्तरीय इस पुरस्कार चयन समिति के अध्यक्ष भी हैं को भेजे पत्र में समिति के सदस्य भट्ट ने कहा है कि उत्तराखण्ड शासन द्वारा गत वर्ष 01 जून, 2022 के कार्यालय ज्ञाप द्वारा स्व. रामप्रसाद बहुगुणा जी की स्मृति में 30 मई को पत्रकारिता दिवस के अवसर पर विभिन्न श्रेणियों के पत्रकारों को राज्यस्तरीय पत्रकारिता पुरस्कार प्रदान करने लिए ‘‘स्व. रामप्रसाद बहुगुणा स्मृति पुरस्कार चयन समिति’’ में तीन गैर सरकारी सदस्य नामित किये थे। लेकिन अभी तक समिति की एक भी बैठक नहीं हुई है। भट्ट ने कहा है कि हिंदी पत्रकारिता दिवस में करीब दो महिने का ही अल्प समय शेष है। अतः यथाशीघ्र समिति की बैठक बुलाकर प्राप्त आवेदनों में से पात्र पत्रकारों का चयन करवाया जाना चाहिये।
गौरतलब है कि पुरस्कार योजना में हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर 30 मई को मुख्यमंत्री द्वारा राज्य के एक वरिष्ठ पत्रकार, एक प्रौढ़ पत्रकार और एक युवा पत्रकार को प्रतीक चिन्ह सहित क्रमशः 2 लाख 51 हजार, 1 लाख 51 हजार, और 1 लाख 25 हजार रूपये का के नकद पुरस्कार से सम्मानित किये जाने का प्रावधान किया गया है। इससे पूर्व यह राशि मात्र 51 हजार रूपये थी। जबकि पत्रकारिता पुरस्कार उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के बाद अब तक केवल एक ही बार प्रदान किये गये हैं।

कमेटी बनाकर विभाग ट्रेफिक कन्जेशन को कम करने के लिए प्रत्येक सप्ताह करेंगे बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने देहरादून में यातायात संकुलन को कम करने हेतु सभी सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने कहा कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सभी सम्बन्धित विभागों की एक कमेटी बनायी जाए, जो ट्रेफिक कन्जेशन को कम करने के लिए प्रत्येक सप्ताह बैठक आयोजित करेगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि शहर के यातायात संकुलन कम करने की दिशा में लगातार अनुश्रवण प्रणाली की देखरेख के लिए यूनिफाइड मेट्रोपोलिटन ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी पाक्षिक रूप से बैठक आयोजित कराएगी। उन्होंने कहा कि यातायात संकुलन को कम करने के लिए आमजन का पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर विश्वास जगाना आवश्यक है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जाए। साथ ही वाहनों की टाइमिंग भी सुनिश्चित किया जाए। अधिक से अधिक तकनीक का प्रयोग करते हुए प्रत्येक बस स्टॉप पर अगली आने वाली बस के पहुंचने का समय भी प्रदर्शित किया जाना चाहिए। कहा कि इसके लिए शीघ्र से शीघ्र शहर के भीतर ट्रांसपोर्ट सिस्टम को सुनियोजित तरीके से मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि यातायात संकुलन को कम करने के लिए तीन ई इंजीनियरिंग, इन्फोर्समेंट और एजुकेशन पर फोकस किए जाने की आवश्यकता है। जहां पर इंजीनियरिंग से यातायात में सुधार हो सकता है, तुरंत शुरू किया जाए। यातायात संकुलन को रोकने के लिए नियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। नो पार्किंग एरिया में गाड़ी पार्क करने वालों पर अधिक से अधिक चालान किए जाएं। इसके लिए ड्रोन कैमरों का अधिक से अधिक प्रयोग किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि शहर में स्कूल बसों से लगने वाले जाम को कम करने के लिए प्रत्येक स्कूल में जाकर वहां की परिस्थितियों के अनुसार अलग प्लान तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फील्ड पर यातायात कंट्रोल के लिए ट्रेफिक पुलिस काम कर रही है। ट्रेफिक को सुधारने के लिए सबसे अच्छा फीडबैक इन्हीं से मिल सकता है। इसके लिए ट्रेफिक फीडबैक सिस्टम विकसित किया जाए। आमजन में यातायात संकुलन को कम करने के लिए शिक्षित किए जाने की अत्यधिक आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए लघु फिल्मों के माध्यम से प्रचार प्रसार विशेषकर स्कूली बच्चों में अधिक से अधिक शिक्षित किए जाने की दिशा में कार्य किया जाए।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकी, प्रबन्ध निदेशक उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कारपोरेशन जितेन्द्र त्यागी, निदेशक यातायात मुख्तार मोहसिन, जिलाधिकारी देहरादून सोनिका, एसएसपी देहरादून दिलीप सिंह कुंवर, मुख्य नगर अधिकारी मनुज गोयल, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी एवं एसपी ट्रैफिक अक्षय प्रह्लाद कोण्डे सहित अन्य सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।