सभी जिलों के डीएम मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की नियमित समीक्षा करेंः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास से प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर मानसून की स्थिति, चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा, आपदा प्रबन्धन, जन-जन के द्वार कार्यक्रम, सत्यापन अभियान, गड्ढा मुक्त सड़के जैसे विभिन्न विषयों पर दिशा निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के दृष्टिगत सतर्कता बढ़ाते हुए आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा जाए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने फोन चालू रखें और किसी भी परिस्थिति में संपर्क से बाहर न रहें। किसी भी तरह की अनहोनी से निपटने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं एवं तैयारियां सुनिश्चित की जाएं, ताकि मानसून के दौरान आमजन को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मानसून के दौरान आपदा अथवा अत्यधिक वर्षा के कारण जहां-जहां सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, मार्ग अवरुद्ध या टूटे हैं तथा ड्रेनेज सिस्टम में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न हुई है, उनका जिलाधिकारी स्तर पर विस्तृत विवरण तैयार किया जाए। उन्होंने कहा ऐसे स्थानों का चिन्हीकरण कर मानसून समाप्त होते ही क्षतिग्रस्त सड़कों, मार्गों एवं ड्रेनेज व्यवस्था के पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मानसून समाप्त होते ही प्रदेशभर की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का अभियान शुरू किया जाए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि अपने-अपने जिलों में सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करते हुए समिति गठित करें और कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मानसून समाप्त होने के बाद 15 अक्टूबर तक किसी भी स्थिति में प्रदेश की सभी सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम में मानसून के बाद और तेजी लाई जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों एवं ग्रामों में अभी तक इन शिविरों का आयोजन नहीं हुआ है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कैंप आयोजित कर अधिक से अधिक लोगों को सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये शिविर महज औपचारिकता नहीं, बल्कि आमजन की सुविधा और उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान का माध्यम हैं।

मुख्यमंत्री ने 1905 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने राज्यभर में चल रहे सत्यापन अभियान में भी तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं में अपात्र लोगों का चिन्हीकरण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके। उन्होंने राज्य में स्टेट सेक्टर फिजिकल वेरिफिकेशन में भी तेजी लाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत राज्यभर में 5 वर्ष की अवधि पूर्ण कर चुकी एवं खराब स्थिति वाली सड़कों को चिन्हित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी सड़कों की स्थिति का आकलन कर उनके डामरीकरण एवं सुधार के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही, आवश्यकता के अनुसार इन सड़कों को लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाए। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर एवं सुगम सड़क सुविधा सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री घोषणाओं के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों में तेजी लाते हुए उन्हें प्राथमिकता के आधार पर धरातल पर उतारने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि घोषणाओं से संबंधित कार्यों की नियमित समीक्षा एवं मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि विकास कार्य समयबद्ध रूप से पूर्ण हो सकें और उनका लाभ आमजन तक पहुंच सके।

मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा के बाद स्वच्छता अभियान में और तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने नशे के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाते हुए अवैध नशीले पदार्थों की बिक्री एवं तस्करी पर कड़ी कार्रवाई करने तथा ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को कृषि, बागवानी एवं पशुपालन से जुड़ी योजनाओं पर विशेष ध्यान देते हुए अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को इनसे जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का लाभ समयबद्ध एवं प्रभावी तरीके से किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों तक पहुंचाया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिल सके।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, वर्चुअल माध्यम से आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत, गढ़वाल आनंद स्वरूप, आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती, गढ़वाल राजीव स्वरूप, एवं सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक मौजद रहे।

सीएम धामी बोले, आज के विद्यार्थी ही भविष्य में उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में आयोजित मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इसी के साथ विद्यालयी छात्र छात्राओं के बीच होने वाली मेरे सपनों का उत्तराखण्ड एक विकसित राज्य हेतु मेरा दृष्टिकोण विषय की निबंध प्रतियोगिता का शुभारंभ हो गया है।

आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस निबंध प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के 140 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही इन चयनित छात्र- छात्राओं का नीट, जेईई, क्लेट, सेट जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग सहित एवं अन्य आवश्यक शुल्कों का वहन भी राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के 2828 सरकारी / गैर सरकारी स्कूलों के 11 एवं 12 वीं के 3 लाख से अधिक छात्र- छात्राओं ने वर्चुअल तरीके से प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं ने खेलों को बढ़ावा देने, सप्ताह में चार दिन खेल पीरियड आयोजित करने, विद्यालयों में मिल रहे विभिन्न अवसरों को और बढ़ाने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड को अग्रणी बनाने, राज्य में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने सहित विभिन्न सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने छात्रों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए स्वयं नोट किया और अधिकारियों को इनके अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र-छात्राओं द्वारा दिए गए सुझावों को सरकार की नीतियों में भी शामिल किया जाएगा।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र-छात्राएं देश का वर्तमान और भविष्य हैं। उन्होंने कहा विद्यार्थियों को अपने सपनों को साकार करने की ओर आगे बढ़ना चाहिए। परीक्षा में नंबरों से ज्यादा विषयों की समझ होना जरूरी है। जीवन में संस्कार और अनुशासन अपनाने से सफलता अवश्य मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा छात्र छात्राओं को पढ़ने के तरीके को बदलने की आवश्यकता है। पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि भविष्य संवारने के रास्ते के तौर पर देखना होगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र व छात्राओं को अपने जीवन में लीडर बनकर आगे बढ़ना है। लीडर वो होता है जो अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ काम करता है। उन्होंने कहा अपने काम, समाज के प्रति संवेदना, और कार्य के प्रति लगन किसी के नाम को भी अमर बना सकती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता स्वयं आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने में है। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में उपयोग करते हुए समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने और चुनौतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा हमें अपने जीवन में संकल्प लेना चाहिए और उस संकल्प में कोई विकल्प नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा जब हम बिना विकल्प के संकल्प लेते हैं तो हमें और तेजी से सफलता मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा आज के विद्यार्थी ही भविष्य के उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे।

मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग तभी करें, जब उसकी वास्तव में आवश्यकता हो। उन्होंने कहा कि एआई हमारे लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग के कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि किसी भी विषय पर सबसे पहले अपने विवेक, बुद्धि और सोचने की क्षमता का उपयोग करें तथा गुरुजनों के मार्गदर्शन और अनुभव से सीखें, इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर एआई की सहायता लें। उन्होंने कहा कि तकनीक हमारी सहयोगी होनी चाहिए, हमारी सोचने और सीखने की क्षमता का विकल्प नहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को भी बढ़ावा देना जरूरी है। उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के साथ ही खेलों के प्रति युवाओं और समाज में नई जागरूकता पैदा हुई है। अब हमारे छात्र खेलों में भी अपना भविष्य देख रहे हैं और विभिन्न खेल विधाओं में आगे बढ़ने के लिए निरंतर मेहनत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना भी लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे विद्यार्थियों की सोच, उनकी आकांक्षाओं और भविष्य को लेकर उनके मन में चल रहे विचारों से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि उनके घर में स्वयं जैन अल्फा और जैन जी हैं, इसलिए वे नई पीढ़ी की सोच, उनकी रुचियों और भविष्य को लेकर उनकी आकांक्षाओं को करीब से समझते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के लिए संवाद का रास्ता हमेशा खुला है। विद्यार्थी अपनी समस्याओं, सुझावों और विचारों को खुलकर साझा कर सकते हैं। सरकार युवाओं की बात सुनने और उनके सुझावों पर विचार करने के लिए हमेशा तत्पर है। उन्होंने कहा कि निरंतर संवाद से ही बेहतर समझ और बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है।

इस अवसर पर मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोंडे, गोविंद राम जायसवाल, राहुल अग्रवाल, रिया अग्रवाल एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

सीएम ने किया क्षत्रिय जागरण स्मारिका का विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड क्षत्रिय कल्याण समिति, देहरादून की वेबसाइट एवं क्षत्रिय जागरण स्मारिका का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने क्षत्रिय कल्याण समिति के सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह समिति, समाज को जागरूक करने और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने समिति द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने से प्रदेश को नई दिशा दी जा सकती है। उन्होंने युवाओं से भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी करते हुए उत्तराखण्ड के विकास में अपना योगदान देने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के सर्वांगीण विकास में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों से समाज में बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने, उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने तथा विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों में संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों की भावना विकसित करना भी आवश्यक है, ताकि वे समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दे सकें।

इस अवसर पर विधायक सुरेश सिंह चौहान, दिगंबर सिंह नेगी, गोविंद बिष्ट, सोहन सिंह नेगी, आशा असवाल, धनपाल रावत, किशन भंडारी मौजूद रहे।

स्वतंत्रता दिवस पर अपने घरों में तिरंगा फहराने का सीएम ने किया आवाहन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित हर घर तिरंगा यात्रा कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्वतंत्रता दिवस पर अपने-अपने घरों में तिरंगा फहराने और राष्ट्रभक्ति की ज्वाला को सदैव प्रज्वलित रखने का आवाह्न किया।

मुख्यमंत्री ने घंटाघर स्थित उत्तराखण्ड आन्दोलन के महान नायक स्व. इन्द्रमणी बडोनी एवं भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री, गांधी पार्क से घंटाघर तक हजारों लोगों के साथ तिरंगा यात्रा में भी शामिल हुए। 
 
मुख्यमंत्री ने कहा तिरंगा यात्रा, राष्ट्र गौरव का उत्सव है। तिरंगा, करोड़ों भारतवासियों के स्वाभिमान का प्रतीक है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं वीर जवानों ने तिरंगे पर कभी कोई आंच नहीं आने दी। हमारा संकल्प है कि भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहेंगे।उन्होंने कहा राष्ट्रभक्ति की भावना देवभूमि के कण-कण में बसी है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत, महाशक्ति के रूप में आगे बढ़ रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़ रही है। मेक इन इंडिया, डिजिटल क्रांति, स्वदेशी तकनीक से भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।आज हम  दुनिया को अनेकों क्षेत्र में नई दिशा दिखा रहे हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारतीय सेना का मनोबल बढ़ा है। सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर से भारत ने पूरी दुनिया को अपनी ताकत दिखाई। देश, रक्षा क्षेत्र में निर्यातक बन रहा है। उन्होंने कहा हमारा राज्य देवभूमि के साथ वीरभूमि भी है। उत्तराखंड की मिट्टी ने देश को अनगिनत वीर सैनिक दिए हैं।  हर दूसरे परिवार का बेटा सीमा पर रक्षा के लिए तैनात रहता है। राज्य सरकार अपने वीर जवानों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। 

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार, प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी और हवाई कनेक्टिविटी जैसी सुविधाओं को मजबूत कर रही है। 30 से अधिक क्षेत्रों में विशिष्ट नीतियों के माध्यम से राज्य में विकास का रोडमैप तैयार किया गया है। डबल इंजन की सरकार के प्रयासों से उत्तराखंड विकास की ऊंचाइयों को छू रहा है। राज्य की अर्थव्यवस्था कई गुना बढ़ चुकी है, पिछले एक वर्ष में राज्य की जीएसडीपी में 7.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। राज्य की प्रतिव्यक्ति आय में भी 41 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं। स्टार्टअप्स की संख्या भी 1750 से अधिक हो चुकी है। राज्य में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है साथ ही सतत विकास के लक्ष्यों को पूरा करने में राज्य ने  देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि देवभूमि के मूल स्वरूप के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में कड़ा धर्मांतरण विरोधी कानून, कठोर दंगा रोधी कानून, देश में सबसे पहले  समान नागरिक संहिता का कानून लागू किया है।प्रदेश में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाया गया है। साथ ही बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले 250 से अधिक अवैध मदरसों पर कार्रवाई कर उन्हें बंद किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में करीब 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को कब्जे से मुक्त किया है। भ्रष्टाचारियों पर कड़ी कार्यवाही की गई है। सख्त नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद बिना किसी धांधली के पिछले करीब पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली है। राज्य में युवाओं को श्नौकरी देने वालाश् बनाने के मकसद से युवाओं को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, होम-स्टे, पर्यटन नीति जैसी कई योजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सौरभ बहुगुणा, खजान दास, विधायक उमेश शर्मा काऊ, विनोद चमोली, सविता कपूर, मेयर सौरभ थपलियाल, महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल, महामंत्री कुंदन परिहार, दीप्ति रावत एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

सीएम ने तीलू रौतेली और आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार की सम्मान राशि में की बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में आयोजित तीलू रौतेली एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रदेश की 13 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार तथा 35 आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री पुरस्कार से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने पुरस्कार प्राप्त करने वाली सभी महिलाओं एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीलू रौतेली जयंती उत्तराखंड के इतिहास और नारी शक्ति के स्वाभिमान के लिए गौरवशाली अवसर है। वीरांगना तीलू रौतेली अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और नारी शक्ति की अमर प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड वीरों के साथ-साथ वीरांगनाओं की भूमि भी रही है और जब भी वीरांगनाओं के साहस एवं पराक्रम की चर्चा होगी, तीलू रौतेली जी का नाम गर्व और सम्मान के साथ लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीलू रौतेली जी का जीवन स्वाभिमान, साहस और नारी शक्ति का प्रेरणादायी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की बेटियों ने सदैव अपनी प्रतिभा, साहस और सामर्थ्य से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। आज सम्मानित की गई महिलाएं भी प्रदेश की अन्य मातृशक्ति और बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। महिलाओं के लिए संसद एवं विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और लखपति दीदी जैसी पहल महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार भी मातृशक्ति के सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य में महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जिसने समान नागरिक संहिता लागू की। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना, उद्यमिता विकास कार्यक्रम तथा महिला स्वयं सहायता समूहों को ब्याज मुक्त ऋण जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में तीलू रौतेली पुरस्कार की सम्मान राशि को 31 हजार रुपये से बढ़ाकर 51 हजार रुपये किया था। अब राज्य सरकार ने तीलू रौतेली पुरस्कार की सम्मान राशि को 51 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार रुपये करने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार की सम्मान राशि भी 51 हजार रुपये से बढ़ाकर 61 हजार रुपये की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि केवल पुरस्कार राशि में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि प्रदेश की मातृशक्ति के सेवा, समर्पण और योगदान के प्रति सरकार के सम्मान का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के प्रारंभिक विकास, पोषण, स्वास्थ्य और संस्कारों में आंगनबाड़ी केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि की है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 7,500 रुपये से बढ़ाकर 9,300 रुपये, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 4,500 रुपये से बढ़ाकर 6,250 रुपये तथा सहायिकाओं का मानदेय 3,550 रुपये से बढ़ाकर 5,250 रुपये किया गया है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर के पद पर पदोन्नति का प्रावधान भी किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बेटियों के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और स्वरोजगार तक हर स्तर पर उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि राज्य की मातृशक्ति को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जब उत्तराखंड की बहनें और बेटियां सशक्त होंगी, तभी प्रदेश को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प को पूर्ण किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तीकरण के लिए सरकार निरंतर कार्य करती रहेगी। उन्होंने पुरस्कार प्राप्त करने वाली सभी महिलाओं एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या, खजान दास, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक उमेश शर्मा काऊ, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह, सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास चन्द्रेश कुमार, निदेशक बंशीलाल राणा एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम धामी ने 9 लाख 87 हजार 17 पेंशन लाभार्थियों के खाते में डाली 146 करोड़ 32 लाख की पेंशन राशि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समाज कल्याण विभाग के अन्तर्गत 9लाख 87हजार 17 विभिन्न पेंशन लाभार्थियों को कुल ₹ 146 करोड़ 32 लाख 50 हज़ार की पेंशन राशि का डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया। यह भुगतान जुलाई माह 2026 की पेंशन का किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पेंशन राशि का समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से सीधे लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरण किया जा रहा है, जिससे पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का सीधे लाभ मिल रहा है। सरकार का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज का कमजोर वर्ग, सरकार के परिवार का हिस्सा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि पेंशन के लिए किसी बुजुर्ग माता-पिता, विधवा बहन या दिव्यांग भाई को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। हमारा संकल्प प्रत्येक पात्र नागरिक को सम्मानपूर्वक, समय पर और बिना किसी परेशानी के उसका अधिकार पहुँचाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना के साथ उत्तराखंड को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। राज्य का विकास समाज के प्रत्येक वर्ग के विकास से ही संभव है।

समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा कि समाज कल्याण विभाग द्वारा माह जुलाई-2026 की पेंशन किश्त का भुगतान किया गया है। इस माह विभिन्न पेंशन योजनाओं के 9लाख 87 हजार 17 लाभार्थियों को पेंशन धनराशि का भुगतान किया गया। उक्त लाभार्थियों में ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय सामजिक सहायता कार्यक्रम (छै।च्) के 2.15 लाख पेंशनर भी सम्मिलित हैं जिन्हें वर्तमान में ैछ। स्पर्श नामक नवीन प्रणाली से भुगतान किया जा रहा है।

गौरतलब है कि जुलाई 2026 में विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत कुल 9,87,017 लाभार्थियों को पेंशन का लाभ दिया गया। इसके लिए कुल 146.32 करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की गई। इसके अंतर्गत वृद्धावस्था पेंशन के कुल 6,15,628 लाभार्थियों को 1,500 रुपये प्रतिमाह की दर से 92.34 करोड़ रुपये की पेंशन वितरित की गई। वहीं विधवा पेंशन के 2,36,983 लाभार्थियों को 1,500 रुपये प्रतिमाह की दर से 35.54 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई।

दिव्यांग पेंशन के 89,128 लाभार्थियों को 1,500 रुपये की दर से 13.36 करोड़ रुपये, किसान पेंशन के 27,288 लाभार्थियों को 1,200 रुपये की दर से 3.2 करोड़ रुपये तथा परित्यक्ता पेंशन के 8,284 लाभार्थियों को 1,200 रुपये की दर से 99.408 लाख रुपये वितरित किए गए। इसके अलावा भरण-पोषण अनुदान के 7,383 लाभार्थियों को 700 रुपये की दर से 51.68 लाख रुपये, तीलू रौतेली पेंशन के 2,196 लाभार्थियों को 1,200 रुपये की दर से 26.35 लाख रुपये तथा बौना पेंशन के 127 लाभार्थियों को 1,200 रुपये की दर से 1.524 लाख रुपये की धनराशि वितरित की गई।

इस अवसर पर सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अद्दांकी, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया, अपर सचिव सुन्दरलाल सेमवाल, निदेशक संजय कुमार, अपर निदेशक योगेंद्र रावत, संयुक्त निदेशक जी.आर नौटियाल, गोवर्धन सिंह एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी गौलापार के निर्माण कार्यों की समीक्षा की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष आज मुख्यमंत्री आवास में खेल विभाग द्वारा उत्तराखंड क्रीड़ा विश्वविद्यालय, गौलापार (नैनीताल) के निर्माण कार्यों की विस्तृत प्रगति प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुतीकरण के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में विकसित की जा रही खेल अवसंरचना, शैक्षणिक भवनों, प्रशिक्षण सुविधाओं, छात्रावासों, खेल विज्ञान केंद्र, अनुसंधान सुविधाओं तथा अन्य निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी गई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय के सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किए जाएँ तथा गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि उत्तराखंड के खेल भविष्य को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण संस्थान है, इसलिए प्रत्येक निर्माण कार्य उच्च मानकों के अनुरूप और दीर्घकालिक उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार राज्य को खेल उत्कृष्टता के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए एक व्यापक और दूरदर्शी रणनीति पर कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उत्तराखंड स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का विकास राज्य की नई खेल नीति, खेल विजन और लिगेसी प्लान के अनुरूप किया जाए, ताकि यह संस्थान खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, खेल वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए विश्वस्तरीय अवसर उपलब्ध करा सके।

उन्होंने कहा कि स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएँ, अंतरराष्ट्रीय मानकों के खेल मैदान, इनडोर एवं आउटडोर खेल परिसरों, स्पोर्ट्स साइंस एवं स्पोर्ट्स मेडिसिन सुविधाओं, उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्रों तथा खेल प्रबंधन और खेल अनुसंधान से संबंधित उन्नत व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका कहना था कि यह विश्वविद्यालय उत्तराखंड के युवाओं को खेल शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को पहचानने, उन्हें प्रशिक्षित करने और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने हेतु निरंतर कार्य कर रही है। राज्य में आधुनिक खेल अवसंरचना के विकास, जिला और ब्लॉक स्तर तक खेल सुविधाओं के विस्तार, प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, उपकरण, पोषण और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में अनेक पहलें की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की खेल नीति का उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि खेल संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाना, युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करना तथा खेलों को शिक्षा, कौशल और रोजगार से जोड़ना है। इसी दृष्टिकोण के अंतर्गत खेल विजन और लिगेसी प्लान के माध्यम से दीर्घकालिक खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे उत्तराखंड आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सके।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विश्वविद्यालय परियोजना की नियमित समीक्षा करने, निर्माण कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, तकनीकी मानकों का कठोर अनुपालन करने तथा समयबद्ध प्रगति के लिए प्रभावी समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा तथा खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

पदक विजेताओं को सम्मानित कर बोले सीएम, राज्य के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया उत्तराखंड का गौरव

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में ग्लासगो, स्कॉटलैंड में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर उत्तराखंड का गौरव बढ़ाने वाले खिलाड़ियों और उनके प्रशिक्षकों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सभी पदक विजेताओं, प्रशिक्षकों एवं उनके परिजनों का अभिनंदन करते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों की उपलब्धियाँ पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय हैं।

सम्मानित होने वालों में पैरा एथलीट शुभम जुयाल (रजत पदक विजेता, रुड़की), जूडो खिलाड़ी उन्नति शर्मा (कांस्य पदक विजेता, देहरादून), शुभम जुयाल के प्रशिक्षक राकेश सिंह रावत (पौड़ी), उन्नति शर्मा के प्रशिक्षक सतीश चन्द्र शर्मा तथा पुनेश कुमार सिंह (देहरादून), भारतीय बॉक्सिंग टीम के प्रशिक्षक खीमानन्द बेलवाल (हल्द्वानी) शामिल रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य और देश का सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की सफलता के पीछे उनके प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और वर्षों की सतत साधना होती है, इसलिए प्रशिक्षकों का सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल और खिलाड़ियों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का उद्देश्य उत्तराखंड को देश के अग्रणी खेल राज्यों में स्थापित करना है। इसी दृष्टि से राज्य में आधुनिक खेल अवसंरचना विकसित की जा रही है, जिला और ब्लॉक स्तर पर खेल सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, उपकरण, पोषण और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए खेल नीति को और अधिक प्रभावी बनाया है। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आकर्षक पुरस्कार राशि, सरकारी सेवाओं में अवसर, छात्रवृत्ति तथा विशेष प्रशिक्षण सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। महिला खिलाड़ियों, दिव्यांग खिलाड़ियों और ग्रामीण क्षेत्रों की उभरती प्रतिभाओं को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि राज्य के प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की युवा शक्ति में अपार संभावनाएँ हैं और सरकार खेलों को रोजगार, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास से जोड़ते हुए आगे बढ़ रही है। खेल विश्वविद्यालय, खेल अकादमियों के सुदृढ़ीकरण, प्रशिक्षकों के क्षमता विकास तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाले खिलाड़ी और उनके प्रशिक्षक आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे तथा उत्तराखंड के अनेक युवा खेलों के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे। मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है और उत्तराखंड की खेल प्रतिभाओं को वैश्विक मंच तक पहुँचाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करती रहेगी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा व खेल विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड सरकार वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के संकल्प को आगे बढ़ा रहीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद द्वारा आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने बिच्छू घास (नेटल फाइबर) से निर्मित पारंपरिक वस्त्र खरीदकर स्थानीय उत्पादों और शिल्पकारों को प्रोत्साहन दिया तथा उत्कृष्ट बुनकरों एवं हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह दिवस उन समर्पित बुनकरों और शिल्पकारों के सम्मान का प्रतीक है, जो अपनी कला, परिश्रम और कौशल से देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के कारीगर केवल वस्त्र या उत्पाद नहीं बनाते, बल्कि उनमें प्रदेश की संस्कृति, लोकजीवन और परंपराओं की आत्मा भी समाहित होती है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की बुनाई और हस्तशिल्प परंपरा अपनी विशिष्टता, गुणवत्ता और विविधता के कारण देश-विदेश में पहचान बना रही है। हर्षिल की ऊनी शॉल, मुनस्यारी और धारचूला की थुलमा, अल्मोड़ा की ट्वीड, छिनका की पंखी, रंगवाली पिछौड़ा, रिंगाल शिल्प तथा बिच्छू घास से बने उत्पाद राज्य की समृद्ध लोक विरासत के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि इन पारंपरिक उत्पादों की मांग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ जैसे अभियान देश के स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को नई पहचान दिला रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वयं विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्तराखंड के पारंपरिक परिधान और हस्तशिल्प उत्पादों को धारण कर राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों की प्रभावी ब्रांडिंग और विपणन किया जाए, तो राज्य के बुनकरों और शिल्पकारों की प्रतिभा विश्व स्तर पर और अधिक स्थापित होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत अब तक 278 बुनकरों और शिल्पियों को लगभग चार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण तथा एक करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी प्रदान की जा चुकी है, जिससे लगभग 834 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और समग्र हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के माध्यम से आधुनिक मशीनें, डिजाइन, प्रशिक्षण, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और विपणन सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के बुनकरों को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने, वरिष्ठ शिल्पकारों को शिल्पकार पेंशन योजना के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने तथा उत्कृष्ट कारीगरों को ‘उत्तराखंड राज्य शिल्प रत्न’ सहित विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित करने की दिशा में भी प्रभावी कार्य किया जा रहा है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से उत्तराखंड के हस्तशिल्प उत्पादों को देश और विदेश के बाजारों तक पहुँचाने के प्रयास भी लगातार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के अनेक पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग मिलने से उत्तराखंड की ब्रांड पहचान और अधिक मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हुए कहा कि जब भी कोई वस्तु खरीदी जाए, तो उसके स्थानीय विकल्प पर अवश्य विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि हथकरघा या हस्तशिल्प का कोई उत्पाद खरीदना केवल एक वस्तु खरीदना नहीं, बल्कि किसी बुनकर परिवार की आजीविका, किसी शिल्पकार के स्वाभिमान और अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी, विधायक सविता कपूर, सचिव विनय शंकर पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में बुनकर, हस्तशिल्पी, उद्यमी एवं महिला शिल्पकार उपस्थित रहे।

सचिवालय में हुई कौशल विकास एवं रोजगार से संबंधित योजनाओं की समीक्षा बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में कौशल विकास एवं रोजगार से संबंधित योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कौशल विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, रोजगार एवं प्लेसमेंट की स्थिति तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योगों की वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाए। साथ ही युवाओं की रुचि एवं स्थानीय रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने तथा प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने को कहा गया।

मुख्य सचिव ने कहा कि कौशल विकास से संबंधित सभी विभाग एक प्लेटफॉर्म पर काम करें, ताकि युवाओं को सुविधा मिल सके। उन्होंने प्रदेश को स्किल हब बनाने के लिए सचिव, कौशल विकास को सेतु आयोग की राय लेते हुए तथा सभी स्टैक होल्डर को शामिल करते हुए एक डैशबोर्ड तैयार किए जाने के निर्देश दिये।

सचिव कौशल विकास एवं सेवायोजन सी. रविशंकर ने बताया कि समग्र कौशल विकास के लिए स्कूल, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा के सहयोग से उद्योगों के मानकों के अनुसार आईटीआई को अपग्रेड किया जाना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 119 आईटीआई क्रियाशील है। नब्बे आईटीआई को पोर्टल पर मैप किया जा चुका है। टाटा टेक्नोलॉजीज, आईटीआई में शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग कोर्स के लिए शुरू कर दिया है।

सचिव ने बताया कि युवाओं को विदेश में नौकरी पाने के लिए स्कील इण्डिया इंटरनेशनल सेंटर में वैश्विक मानकों के अनुसार प्रशिक्षण, भाषा ज्ञान और अन्य जरूरी दक्षता प्रदान करने के लिए तीन एजेंसियों से बात की गई है। उन्होंने बताया कि रोजगार प्रयाग पोर्टल पर निजी नियोक्ताओं का भी पंजीकरण किया जा रहा है। अब तक कुल 162 नियोक्ताओं को पोर्टल पर जोड़ा जा चुका है, युवाओं को रोजगार दिया जा

बैठक में सेवायोजन विभाग के उच्चाधिकारी भी उपस्थित रहे।