समीक्षा बैठक में मदन कौशिक को आया गुस्सा, अधिकारियों के न पहुंचने से स्थगित की बैठक

देहरादून। उत्तराखंड में अधिकारियों की मनमानी रुकने का नाम नहीं ले रही है। वह भी तब जब कुछ दिनों पहले मुख्य सचिव के द्वारा सभी विभागों के आला अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों का सम्मान करने को लेकर आदेश जारी की गए थे, मगर जनप्रतिनिधियों की छोड़ें उत्तराखंड के शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक के द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में कई विभागों के सचिव ना पहुंचने से शासकीय के प्रवक्ता मदन कौशिक ने कुंभ के दौरान होने वाले निर्माण कार्यों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक को स्थगित कर दिया।

जी हां मदन कौशिक ने बैठक को इसलिए स्थगित कर दिया क्योंकि ऊर्जा, पीडब्ल्यूडी, पेयजल जैसे विभागों के सचिव उनके द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में नहीं आए। इतना ही नहीं मदन कौशिक ने मुख्य सचिव को फोन कर फटकार लगाते हुए कहा उनका समीक्षा बैठक लेने का क्या औचित्य है जब सचिव उनकी बैठक में न हो। मुख्य सचिव को फोन पर मदन कौशिक ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने एक हफ्ते पहले बैठक का एजेंडा तय कर विभागों को भेज दिया था लेकिन विभागीय सचिव बैठक में नहीं पहुंचे। मदन कौशिक का कहना था कि जिस बैठक में सचिवों को मौजूद होना चाहिए उसमें विभागों कि छोटे अधिकारी भेजे गए हैं जिस वजह से वह बैठक नहीं ले पाएंगे। वही मदन कौशिक ने अधिकारियों को बैठक छोड़ने के बाद यह तक कह दिया कि यदि सचिव उनकी बैठक में नहीं आना चाहते हैं तो फिर वह बैठक नहीं ले पाएंगे और मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव की बैठक लें।

उत्तराखंड अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को देगा गंगाजल

उत्तराखंड सचिवालय में कैबिनेट मंत्री और शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि इस साल कोविड-19 के चलते इस कांवड़ यात्रा नहीं होगी। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार ने यात्रा को स्थगित करने का यह फैसला सामूहिक तौर पर लिया है। इसे ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करने के बाद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि राज्य सरकार अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को गंगा जल भेंट करेगी। जिसके बाद इन राज्यों की सरकारें भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए हरिद्वार से गंगा जल ले जाने सकेंगी। केवल हरिद्वार तक ही अनुमति होगी।

मदन कौशिक ने कुंभ 2021 के बारे में बताते हुए कहा कि पहले शाही स्नान से पहले स्थाई निर्माण कार्य पूरे कर दिए जांएगे। इसके लिए बजट की कोई कमी नहीं है।

1. राज्य सरकार आगामी कुंभ मेले के सफल आयोजन हेतु प्रयासरत है। कुंभ का आयोजन निर्धारित समय अवधि में संपन्न हो इसके लिए सभी अखाड़ों की भी सहमति है।
2. कुंभ की व्यवस्थाओं के अंतर्गत किए जा रहे स्थाई प्रकृति के कार्यों को निर्धारित अवधि में पूर्ण करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हरिद्वार को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों, पुलों आदि के निर्माण, पुनर्निर्माण के कार्य प्रगति पर है।
3. राज्य सरकार सभी 13 अखाड़ों को उनके स्तर पर श्रद्धालुओं के लिए की जाने वाली आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु कुंभ मेला प्रयाग की भांति यथासंभव आर्थिक सहयोग दिए जाने पर विचार कर रही है। इससे अखाड़ों को जन सुविधाओं व मूलभूत सुविधाओं के विकास में सुविधा होगी। कार्यदायी संस्था का भी निर्धारण शीघ्र किया जायेगा
4. जिन अखाड़ों के पास अपनी भूमि उपलब्ध होगी, उन्हीं को अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु धनराशि उपलब्ध करायी जायेगी। अखाड़ों के अधीन होने वाले कार्यों के लिये कार्यदायी संस्था का भी निर्धारण शीघ्र किया जायेगा।
5. श्रावण माह में हरिद्वार में आयोजित होने वाले कांवड़ मेले को कोविड-19 के दृष्टिगत स्थगित किया जा रहा है, इस संबंध में यूपी, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व हिमाचल के मुख्यमंत्रियों से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की वार्ता हुई है। सभी ने वर्तमान संकट को ध्यान में रखते हुए इसके लिये सहमति जतायी है।
6. कांवड़ के दृष्टिगत पड़ोसी राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उप राज्यपालों एवं मंत्रिगणों के माध्यम से उनके प्रदेशों को गंगाजल उपलब्ध कराने का अभिनव प्रयास राज्य सरकार द्वारा किया जायेगा।
7. गंगाजल के लिये हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं को उनके समीप के प्रमुख मंदिरों में गंगा जल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। प्रदेश सरकार द्वारा पीतल के बड़े कलशों में हर की पैड़ी से गंगा जल भरकर संबंधित प्रदेशों को उपलब्ध कराया जायेगा।
8. कुंभ मेले के स्थायी प्रकृति के कार्यों की व्यापक समीक्षा के लिये मुख्यमंत्री द्वारा नगर विकास मंत्री, सचिव शहरी विकास एवं मेलाधिकारी की समिति गठित की है। समिति द्वारा कार्यों की नियमित समीक्षा की जायेगी। कुंभ के अंतर्गत किये जाने वाले अस्थायी निर्माण कार्यों के सम्बन्ध में भी शीघ्र निर्णय लिया जायेगा।
9. गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी छड़ी यात्रा का संचालन किया जायेगा। इसमें सीमित लोगों द्वारा प्रतिभाग किया जायेगा। यह यात्रा उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक एकता की प्रतीक है। परम्परानुसार जूना अखाड़े से पवित्र छड़ी यमुनोत्री, गंगोत्री होते हुए केदारनाथ और बदरीनाथ जाती है। बदरीनाथ से यह छड़ी कुमाऊं मंडल के विभिन्न तीर्थ स्थलों से होते हुए वापस जूना अखाड़ा हरिद्वार पहुंचेगी और माया देवी मंदिर में प्रतिष्ठित की जाती है।
10. हरिद्वार में चूंकि प्रति माह कोई न कोई आयोजन होता रहता है अतः अवस्थापना सुविधाओं के विकास से इसमें सुविधा होगी। हरिद्वार में आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों व आयोजनों में भले ही सीमित संख्या में श्रद्धालु आयें लेकिन आते जरूर हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों 15वें राज्य वित्त आयोग से अधिक हिस्सेदारी देने का निर्णय

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की बैठक हुई। जिसमें कई प्रस्तावों पर निर्णय लिया गया। इसकी जानकारी शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने दी।

कोविड-19 से सम्बन्धित बाॅर्डर पर काॅरन्टीन किए जाने सम्बन्धी मा0 उच्च न्यायालय के निर्देशों के क्रम में होने वाले व्यवस्थागत, संस्थागत समस्या की जानकारी न्यायालय को दी जाएगी।
15वें राज्य वित्त आयोग के अनुदान धनराशि का निकायों में वितरण दरों में परिवर्तन किया गया है। ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत में 35ः30ः35 को बदल कर क्रमशः 75ः10ः15 किया जाएगा। कुल 852 करोड़ रूपए की धनराशि में से 575 करोड़ रूपए पंचायती राज एवं 278 करोड़ शहरी निकाय को दिया जाएगा।
उत्तराखण्ड जोत चकबन्दी नियमावली 2020 को मंजूरी दी गयी। इसके अन्तर्गत नाम, परिभाषा, नोटिस भेजना, अधिसूचना जारी करना, इत्यादि को स्पष्ट किया गया है।
पेयजल संस्थान के प्रबन्ध निदेशक पद की चयन प्रक्रिया में वार्षिक प्रविष्टि के लिए समय सीमा 8 वर्ष की जगह 5 वर्ष की गयी।
मदिरा दुकानों के बन्द रहने की अवधि में फुटकर अनुज्ञापी के पिछले वित्त वर्ष मार्च माह में 10 दिन के नुकसान 34 करोड़ एवं 1 अप्रैल से 3 मई के बीच 195 करोड़ रूपए का भार सरकार वहन करेगा।
मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना लागू की गयी। इसके अन्तर्गत केन्द्र सरकार के बीच फण्ड के गैप की भरपाई राज्य सरकार करेगी। बीज क्रय हेतु अन्य निगमों के अतिरिक्त कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर, टिहरी भरसार विश्वविद्यालय एवं आईसीएआर के लिए अनुमति दी गयी।
राज्य वन्यजीव अवैध शिकार अपराध रोकथाम के लिए 14 पदों का सृजन किया गया। यह पद विभागीय पद होगा।
स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों के लिए बिना अवकाश 5 वर्ष की अनुपस्थिति पर सेवा समाप्त की जाएगी।
सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग में लोक सेवा आयोग के माध्यम से सूचना अधिकारी के पद पर हिन्दी विषय की अनिवार्यता समाप्त की गयी।
सार्वजनिक वाहन व्यवसायियों के परमिट नवीनीकरण की फीस के छूट के अन्तर्गत 14 करोड़ 23 लाख की भरपाइ्र सरकार द्वारा की जाएगी। एवं रोड टैक्स में 3 माह की छूट के पश्चात 63 करोड़ 28 लाख रूपए की भरपाई राज्य सरकार करेगी।
सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय शिक्षा अभियान के एकीकरण के बाद समग्र शिक्षा अभियान चलेगा। जहां पहले कुल 2677 पद थे। अब पदों की संख्या 1959 हो जाएगी।
पर्यटन विभाग के अन्तर्गत होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा को संरक्षण देने के लिए पानी पर लिए जाने वाले बिल जल मूल्य कर वृद्धि को 15 प्रतिशत को 9 प्रतिशत लिया जाएगा। इससे 1 करोड़ 87 लाख का व्यय भार राज्य सरकार पर होगा।
श्रम सुधार के अन्तर्गत उद्योगों द्वारा श्रमिकों को दिया जाने वाला मार्च माह का बोनस जो नवम्बर 2020 में देना था, अब इसे 31 मार्च 2021 तक दिया जा सकता है। जो उद्योग फायदे में होंगे उन्हें 8.33 प्रतिशत बोनस देना होगा। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के लिए कैबिनेट मंत्री हरक सिंह एवं मदन कौशिक की समिति बनायी गयी।
पर्यटन औद्योगिक ईकाइयों में कार्यरत् आॅटो रिक्शा चालक इत्यादि को एकमुश्त एक हजार रूपए खाते में दी जाएगी। इससे 25 करोड़ का अधिभार राज्य सरकार पर पड़ेगा।
वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना, दीनदयाल होम-स्टे योजना में अपै्रल से जून तक ऋण ब्याज पर छूट दी गयी।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति की अवधि को एक वर्ष का विस्तार दिया गया जिस पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
आबकारी होटल, रेस्टोरेंट बार शुल्क में 3 माह की छूट दी गयी।
नवीनीकरण, पंजीकरण शुल्क में 1 वर्ष की छूट दी गयी।

महाविद्यालयों में अगले सत्र से शैक्षणिक कलेंडर लागू

रायपुर, मालदेवता में राजकीय महाविद्यालय रायपुर के नव निर्मित भवन व शौर्य दीवार के लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने यहां इसी सत्र से स्नातकोतर महाविद्यालय के रूप में उच्चीकृत करने की घोषणा की। इस सत्र से यहॉं कला संकाय की कक्षाएं प्रारम्भ होंगी। अगले सत्र से यहॉ ग्रेजुएशन में संस्कृत की कक्षाएॅं भी शुरू की जाएॅगी। मुख्यमंत्री ने कॉलेज के लिए 04 अतिरिक्त कक्षा कक्ष की घोषणा भी की। इस अवसर पर कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि उच्च शिक्षा और कॉलेज स्तरीय हों। शिक्षकों की भर्ती शीघ््रा की जाएगी। आने वाले समय में फैकल्टी की समस्या दूर होगी। उन्होंने छात्रछात्राओं का आहवाहन किया कि वे बहुआयामी शिक्षा के प्रति प्रयत्न करें। सिर्फ किताबी ज्ञान और डिग्री पर ध्यान न दें। जिंदगी का लक्ष्य स्पष्ट रखे और उसे पाने का प्रयास करें। उन्होंने गॉंवों से हो रहे पलायन को रोकने और न्याय पंचायत स्तर पर स्वरोजगार के अवसर उत्पन्न करने की योजना भी साझा की। उन्होंने कहा कि हर न्याय पंचायत पर 100150 महिलाओं को स्वरोजगार दे कर न्याय पंचायत को ग्रोथ सेंटर बना सकते है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मालदेवता में पीजी कॉलेज खुलने से स्थानीय स्तर पर विकास को गति मिलेगी। आसपास के विद्यार्थियों विशेषकर छात्राओं का उच्च शिक्षा के अवसर मिलेंगे। इससे पूर्व त्रिवेन्द्र ने कार्यक्रम स्थल पर ही उपस्थित जनसमूह के साथ रेडियो में प्रसारित प्रधानमंत्री के ‘‘मन की बात’’ कार्यक्रम सुना। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पिछले चार महीनो में सरकार द्वारा ठोस आधारभूत कार्य किए गए है। सरकार राज्य को ग्रामीण क्षेत्र में पूरी तरह ओडीएफ बनाने के बाद अब शहरी क्षेत्र को ओडीफ बनाने की ओर अग्रसर है। उच्च शिक्षा मंत्री डा0 धन सिंह रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशो पर शैक्षणिक कैलेण्डर घोषित कर दिया गया है। अगले सत्र से शैक्षणिक कैलेण्डर लागू कर दिया जाएगा। अब कॉलेजो में 180 दिन कक्षाएं चलेगी। 30 दिन के भीतर परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए जाएगे। 877 अस्सिटेंट प्रोफेसरो की नियुक्ति के सम्बन्ध में विज्ञप्ति जारी कर दी गई है। स्मार्ट कलासेज व ई लाइब्रेरी की योजनाएं भी अगले कुछ महीनों में धरातल लाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि राजकीय महाविद्यालय रायपुर का निर्माण, राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा 1762.04 वर्ग मी0 क्षेत्रफल में 4.90 करोड़ रूपये की लागत से किया गया है। इसमें प्रधानाचार्य कक्ष, लाइब्रेरी, आईटीसी लैब जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध है। महाविद्यालय भवन की मानचित्र संरचना भूकम्परोधी तकनीक पर आधारित है।

हाईकमान सुलझा पायेगा मदन कौशिक और सतपाल महाराज के समर्थकों में मारपीट का मामला!

हरिद्वार का घटनाक्रम अब भाजपा हाईकमान के दरवाजे पर आ गया है। हाईकमान अब मामले में दोनों मंत्रियों के बीच सुलह करवायेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है। दो कैबिनेट मंत्रियों के समर्थकों के सार्वजनिक रूप से आमने-सामने आ जाने से भाजपा की किरकिरी हो रही है। वहीं अनुशासित पार्टी की छवि को भी इस घटनाक्रम से नुकसान पहुंचा है। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बाद मंत्रिमंडल में नंबर दो की हैसियत के मंत्री हैं। इसी साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव के जरिये महाराज ने राज्य की राजनीति में कदम रखा। उत्तराखंड में भाजपा की भारी भरकम जीत के बाद वह भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे, हालांकि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उन पर पुराने पार्टी कार्यकर्ता त्रिवेंद्र सिंह रावत को तरजीह दी।
वहीं, हरिद्वार के विधायक मदन कौशिक भी भाजपा के कद्दावर नेताओं में शामिल हैं। विधानसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज करते आ रहे कौशिक की छवि तेजतर्रार नेता की है। कौशिक के कद का अंदाजा इस बात ये लगाया जा सकता है कि उन्हें प्रदेश सरकार के प्रवक्ता की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है।
गुरुवार को हुए टकराव के बाद जिस तरह पार्टी नेता और विधायक साफ तौर पर दो खेमों में बंटे नजर आए, उससे यह भी स्पष्ट हो गया कि चिंगारी काफी वक्त से सुलग रही थी और मौका सामने आते ही इसने असंतोष की आग कर रूप ले लिया। हालांकि, अब प्रदेश नेतृत्व इस असहज स्थिति से निबटने के लिए आगे आ गया है। इससे समझा जा रहा है कि जल्द इस प्रकरण का पटाक्षेप हो जाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष ने बताया हादसा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने हरिद्वार की घटना को महज एक हादसा बताया है। कहाकि यह दो मंत्रियों के बीच टकराव जैसी कोई बात नहीं है। दरअसल, हरिद्वार में जलभराव को लेकर स्थानीय जनता में आक्रोश था। प्रशासन अगर आश्रम प्रबंधन से इस सिलसिले में पूछ लेता, तो यह नौबत आती ही नहीं।
उन्होंने कहा कि यह मामला सतपाल महाराज के आश्रम के लोगों और नगर निगम कर्मचारियों के बीच का है। इसे बेवजह राजनैतिक रूप से तूल नहीं देना चाहिए। मैंने दोनों मंत्रियों से इस संबंध में बात की है। परिवार का मामला है, जल्द सुलझा लिया जाएगा।

हरिद्वार की घटना से प्रदेश की राजनीति में भूचाल आने के संकेत!

हरिद्वार की घटना से प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बवाल हो गया है। दो कैबिनेट मंत्रियों के समर्थकों में जमकर लाठी और डंडे चले। जिसमें नगर निगम के मेयर मनोज गर्ग को गंभीर चोटें आयी है। दूसरी, ओर भाजपा के चार विधायक खुलकर सतपाल महाराज के समर्थन में आ गये है। जिसे मदन कौशिक को घेरने की राजनीति के रुप में देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस प्रकरण से पूर्व मुख्यमंत्री निशंक और सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत के बीच और खाई पट सकती है।
आरोप है कि अतिक्रमण हटाने को गई टीम पर कार्रवाई के दौरान कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के समर्थकों ने मेयर मनोज गर्ग और नगर निगम हरिद्वार के कर्मचारियों पर हमला कर दिया है। जानकारी के अनुसार बारिश के कारण खन्ना नगर में जलभराव हो रहा था। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के प्रेमनगर आश्रम के ठीक बराबर में पॉश कालोनी खन्ना नगर स्थित है। सुबह हुई बारिश के दौरान हरिद्वार की सड़कें जलमग्न हो गईं। खन्ना नगर में भी जलभराव हो गया। जलभराव की स्थिति का जायजा लेने मेयर मनोज गर्ग मौके पर पहुंचे तो वहां मौजूद भीड़ का आरोप था कि प्रेमनगर आश्रम के अतिक्रमण के चलते ही कालोनी में जलभराव की नौबत आ रही है। आरोप है कि आश्रम की ओर से नाले पर भी कब्जा किया गया है। इससे पानी की निकासी रुक गई है।
मौके पर नगर निगम की टीम जैसे ही आश्रम के अतिक्रमण को तोड़ने लगी तो आश्रम के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। मेयर गर्ग के साथ शहरी विकास मंत्री मंत्री मदन कौशिक के समर्थक मौजूद थे। देखते ही देखते दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। आरोप है कि आश्रम से सतपाल महाराज के समर्थक डंडे लेकर आए और उन्होंने मेयर के साथ ही नगर निगम कर्मचारियों और कौशिक समर्थकों पर हमला बोल दिया। इससे मेयर को चोट आई है। उन्हें किसी तरह बचाकर अस्पताल पहुंचाया गया।
इस दौरान कौशिक के समर्थकों ने जेसीबी चला कर अतिक्रमण तुड़वा दिया। इससे गुस्साए महाराज समर्थकों ने पथराव किया तो जवाब में दोनों ओर से पत्थर बाजी हुई। इसमें दोनों पक्ष से करीब आधा दर्जन लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस दौरान पुलिस को लाठियां फटकारकर किसी तरह स्थित नियंत्रित करनी पड़ी। मंत्री मदन कौशिक के समर्थक महाराज के समर्थकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर वहां प्रदर्शन करने लगे। प्रशासन और पुलिस की टीम दोनों पक्षों को समझाने में जुटी रही। उधर, नगर निगम ने सतपाल महाराज के आश्रम के गेट पर बाहर कूड़ा डाल दिया है।

सरकार ने सदन मे दिया जवाब कृषि को उद्योग का दर्जा नहीं


देहरादून।
बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में गन्‍ना भुगतान, गैरसैंण आदि मुद्दे छाए रहे। विपक्ष ने गैरसैंण में सत्र चालने को लेकर सरकार को घेरा। विधानसभा सत्र के दूसरे दिन-प्रश्नकाल के दौरान गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर सरकार ने कहा अगर चीनी मिले गन्ना किसानों का बकाया नहीं करेगी तो हमारे पास अन्य अधिकार है। अल्पसूचित प्रश्न में सबसे पहले विकासनगर विधायक प्रीतम सिंह ने 19 अप्रैल को गुम्मा हिमाचल में हुई बस दुर्घटना को सदन में उठाया। जिस के जवाब में सरकार ने नकार दिया। धनौलटी विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने सूबे में पेयजल की समस्या को सदन में रखा। नत्थी ग में तारांकित प्रश्नों को रखा गया। इसमें 9 प्रश्नों में गन्ना का मुद्दा हावी रहा। अतारांकित प्रश्न में कुल 11 सवाल लिए गए। इनमें भी गन्ना और पेयजल के सवालों की संख्या अधिक रही। धनौल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार के कृषि को उद्योग का दर्जा दिए जाने के सवाल पर सरकार से दिए उत्तर पर उलझे कृषि मंत्री। कृषि मंत्री ने जवाब दिया उद्योग और कृषि दोनों अलग अर्थव्यवस्था हैं। कृषि क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में सब्सिडी दी जाती है। इसलिए कृषि को उद्योग का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
नियम 58 के तहत नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सदन के पारित संकल्प के तहत गैरसैंण में सत्र आयोजित नहीं किया गया। आज तक भी ये जानकारी नहीं दी है कि गैरसैंण स्थाई राजधानी होगी या अस्थाई होगी। बयान आए कि वहां सुविधाएं नही हैं, जबकि वहां सभी सुविधाएं हैं। ये साफ करता हैं कि सरकार की मंशा नहीं वह सत्र करने की। सरकार ने गैरसैंण में विकास के लिए सरकार ने क्या प्रवधान किए इसका भी उल्लेख नहीं है। सरकार ये भी स्‍पष्‍ट करे की सरकार गैरसैंण में कभी सत्र होगा भी की नहीं। कुंजवाल ने कहा कि सदन में पारित संकल्प पर भी फैसला नहीं ले पा रही सरकार। गैरसैंण में टेंट में भी सत्र चला। निर्माणाधीन भवन में भी सत्र चला, लेकिन अब सरकार वहां जाना नहीं चाहती। सदन पारित प्रस्ताव की अवमानना हुई है। संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि गैरसैंण राज्य के लिए हमारी आस्था से जुड़ा है। वही यह भी सही है सदन नियमों के तहत चलता है। पूर्ववर्ती सरकार ने गैरसैंण में सत्र तो आयोजित किये, लेकिन वह विकास नहीं कर पाई। सत्र केवल सदन परिसर में ही हो सकता हैं। उन्‍होंने नियम 3 ब का हवाला दिया। कहा इसके लिए नियमों में बदलाव करना होगा।
चारधाम यात्रा के दौरान पूरे सिस्टम को गैरसैंण ले जाना तर्कसंगत नहीं है। गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि गैरसैंण में जो विधानसभा परिसर बना है, वो नियमों के तहत बनाया गया है। जब गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाए की रिपोर्ट सदन में रक्खी गई तो उसे फाड़ दिया गया था। वहीं प्रकाश पंत में कहा पूर्ववर्ती सरकार ने 5 साल तक इस मुद्दे पर कोई निर्णय नही लिया। कांग्रेस ने वाकआउट किया।