38वें राष्ट्रीय खेल को ग्रीन गेम्स की थीम पर आयोजित किया गयाः सीएम

उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेल को ग्रीन गेम्स की थीम पर आयोजित किया गया। ग्रीन गेम्स की कल्पना को पूरा करने के लिए महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज, रायपुर देहरादून से लगे क्षेत्र को खेल वन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस वन में 38वें राष्ट्रीय खेलों में 1600 मेडल विजेता खिलाड़ियों के नाम पर एक-एक पेड़ लगाया जाएगा। विकसित किए जा रहे खेल वन में पौधारोपण का शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नेे विजेता खिलाड़ियों के साथ किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन ग्रीन गेम्स की थीम पर किया गया है। उन्होंने कहा 1600 मेडल विजेता खिलाड़ियों के नाम पर 2.77 हेक्टेयर वन भूमि को खेल वन के रूप में विकसित की जायेगी। 38वें राष्ट्रीय खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के नाम पर यहां पर पौधारोपण किया जाएगा। उत्तराखंड की यादें, और खिलाड़ियों का परिश्रम इन पेड़ों के माध्यम से उन्हें हमेशा याद रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा खेल के साथ पर्यावरण का संरक्षण भी हमारे लिए जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 38वे राष्ट्रीय खेलो में पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा गया है। खेल आयोजनों में ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। रीसाइकिल बोतलों में ही पानी की व्यवस्था की गई है। स्पोर्ट्स कॉलेज, रायपुर में 2 मेगावाट का सोलर प्लांट भी स्थापित किया गया है। रीसाइकिल वेस्ट के प्रयोग से सजावट की चीजें बनाई गई है। साथ ही खेल परिसर में साफ सफाई का भी विशेष ध्यान रखा गया है।

इस अवसर पर भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष डॉ पी टी उषा, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, कमिश्नर गढ़वाल विनय शंकर पांडे, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

उत्तराखंडः अवस्थापना सुविधाओं की तारीफ, संवारने पर जोर

38 वें राष्ट्रीय खेलों के लिए उत्तराखंड में विकसित की गई अवस्थापना सुविधा की सराहना हो रही है। खिलाड़ी हों या उनके कोच, खेलों के लिए तैयार किए गए बुनियादी ढांचे को बेहतरीन बता रहे हैं। हालांकि उनका यह भी कहना है कि राष्ट्रीय खेलों के बाद इसे संवारने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उनका यह भी मानना है कि राष्ट्रीय खेलों के लिए बेहतर इंतजाम कर उत्तराखंड ने खेल भूमि बनने की दिशा में लंबी छलांग लगा दी है।

राष्ट्रीय खेलों का आयोजन उत्तराखंड में 28 जनवरी से शुरू हुआ है। इस महा आयोजन की तैयारी के लिए उत्तराखंड को बहुत कम समय मिला, लेकिन फिर भी बेहतर व्यवस्थाएं बना ली गईं। कुल 35 खेलों के लिए देहरादून समेत हरिद्वार, हल्द्वानी, पिथौरागढ़, रूद्रपुर समेत कई स्थानों पर युद्धस्तर पर काम करते हुए सुविधाएं जुटाई गईं। बेहतरीन उपकरण मंगवाए गए। देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज परिसर का राष्ट्रीय खेलों की वजह से कायाकल्प हो गया है। देशभर से आए खिलाड़ी और उनके कोच अवस्थापना सुविधाओं से संतुष्ट हैं, लेकिन इस आयोजन के बाद रख-रखाव के लिए ठोस व्यवस्था की पैरवी भी कर रहे हैं।

किसने क्या कहा

मैं सियोल एशियाई गेम्स में भारत की शूटिंग टीम का हिस्सा रही हूं। देश-विदेश में कई जगह शूटिंग रेंज देखने का मेरा अनुभव है। मैं कह सकती हूं कि त्रिशूल शूटिंग रेंज बेहतरीन है। इसकी देख-रेख के लिए अच्छे इंतजाम हो जाएं, तो यहां बडे़ खेल आयोजन हो सकेंगे।

माया, शूटिंग कोच, पश्चिम बंगाल।

उत्तराखंड ने बहुत अच्छे इंतजाम किए हैं। तकनीकी क्षेत्र से जुड़े होने के कारण मैं कह सकता हूं कि अवस्थापना सुविधाएं विश्व स्तर की तैयार की गई हैं। जिस तरह से गुवाहाटी में राष्ट्रीय खेल होने के बाद वहां पर रख-रखाव बढ़िया से किया गया, अब वैसा ही यहां भी होना चाहिए।
आशीष शर्मा, टेक्निकल ऑफिसर मणिपुर टीम।
राष्ट्रीय खेलों के लिए उत्तराखंड ने अच्छी व्यवस्थाएं की हैं। उत्तराखंड के खिलाड़ियों को अब आगे बढ़ने में काफी मदद मिलेगी।
कुमालिका, खिलाड़ी आर्चरी, झारखंड।
मैैं एक खिलाड़ी भी रहा हूं और वर्तमान में कोच की जिम्मेदारी निभा रहा हूं। मेरा मानना है कि उत्तराखंड में खेल के लिए बहुत ही अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो गया है। इसका आने वाले दिनों में लाभ मिलेगा।

प्रियांक त्यागी, कोच आर्चरी टीम, यूपी।

रखरखाव पर उत्तराखंड गंभीर, कवायद जारी

राष्ट्रीय खेलों के बाद खेल अवस्थापना सुविधाओं के रखरखाव को लेकर उत्तराखंड गंभीर है। राष्ट्रीय खेल शुरू होने से पहले ही इस संबंध में कसरत शुरू कर दी गई थी। खेलों की व्यस्तता के बीच इस संबंध में लगातार कार्य किया जा रहा है। खेल विभाग अवस्थापना सुविधाओं के रखरखाव के लिए अकादमी का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। खेल निदेशक प्रशांत आर्या के अनुसार-इस संबंध में रोजाना बैठक की जा रही है। प्रस्ताव तैयार कर जल्द ही शासन को भेजा जाएगा।

देशभर से आए मेहमानों से अवस्थापना सुविधाओं को लेकर सराहना मिलने से उत्तराखंड उत्साहित है। हम चाहते हैं कि ना सिर्फ उत्तराखंड, बल्कि अन्य राज्यों की खेल प्रतिभाओं के विकास में भी हम मददगार साबित हों। अवस्थापना सुविधाओं के रखरखाव के लिए बेहतर इंतजाम किए जाएंगे।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

राष्ट्रीय खेलों में नया प्रयोग, ’मौली रोबोट’ लाया विजेताओं के लिए मेडल

राष्ट्रीय खेलों में यह मौका एथलेटिक्स इवेंट की मेडल सेरेमनी का था। खिलाड़ियों से लेकर दर्शकों की ठीक ठाक उपस्थिति थी। सभी उम्मीद कर रहे थे कि कुछ ही देर में होने वाली मेडल सेरेमनी परंपरागत रूप से ही आयोजित होंगी। मगर अगले पलों में मेडल सेरेमनी का पूरा रूप ही बदला हुआ था। रिमोट कंट्रोलर की कमांड से ’मौली रोबोट’ में हरकत शुरू हुई। वह एक ट्रे में मेडल लेकर विजेताओं के पास पहुंचा। अतिथियों ने मेडल उठाए और विजेताओं के गले में पहना दिए।

राष्ट्रीय खेलों में मेजबान उत्तराखंड ने रोबोटिक तकनीक से जुड़ी पहल कर सभी को सुखद अनुभूति से भर दिया। हालांकि एथलेटिक्स इवेंट को छोड़कर अन्य में परंपरागत रूप से ही मेडल सेरेमनी आयोजित की गई। यानी हाथ में ट्रे लेकर युवतियां ही विजेताओं के लिए मेडल लाई। एथलेटिक्स के करीब 40 इवेंट होने हैं। खेल निदेशक प्रशांत आर्या के अनुसार-एथलेटिक्स के अधिकतर इवेंट में मेडल सेरेमनी के दौरान ’मौली रोबोट’ का ही इस्तेमाल किया जाएगा।

उत्तराखंड पुलिस की ड्रोन टीम छायी

मौली रोबोट के विचार पर उत्तराखंड पुलिस की ड्रोन टीम ने एक प्राइवेट फर्म डीटाउन रोबोटिक्स के साथ मिलकर काम किया। ड्रोन टीम के विपिन कुमार, दीपांकर बिष्ट, प्रशांत चंद्र, दीपक बिष्ट, अभिषेक कुमार, प्रज्ज्वल रावत ने करीब डेढ़ महीने इस प्रोजेक्ट पर काम किया। मेडल सेरेमनी में जहां ’मौली रोबोट’ ने काम किया, वहीं डिस्कस के इवेंट के दौरान एक अन्य रोबोट ने सहयोग किया।
ओलंपियन मनीष रावत के अनुसार-मेडल सेरेमनी में रोबोट का इस्तेमाल उन्होंने पहली बार देखा है।

मुख्यमंत्री धामी के निर्देश थे कि राष्ट्रीय खेलों में तकनीकी पहल भी होनी चाहिए। इसलिए, रोबोटिक तकनीक की मदद लेकर यह प्रयोग किया गया। हैमर थ्रो, जेवलिन थ्रो, डिस्कस थ्रो जैसी एथलेटिक्स इवेंट में भी हम रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए मानव संसाधन पर निर्भरता कम कर रहे हैं।
– अमित सिन्हा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय खेल।

38 वें राष्ट्रीय खेल में खिलाड़ियों के बेहतरीन प्रदर्शन के अलावा कई अभिनव पहल भी पूरे देश को दिखाई दे रही है। तकनीकी पहल भी अब राष्ट्रीय खेलों के साथ जुड़ गई है। हमारी कोशिश ये ही है कि नई तकनीक का पूरा लाभ लेते हुए खेल विकास के लिए कार्य किया जाए।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

सीएम धामी ने किया भारतीय मानक ब्यूरो, मानक मेला का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित भारतीय मानक ब्यूरो के स्टैंडर्ड क्लब कार्निवाल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉल का निरीक्षण किया और पेप मार्क उत्पादों को खरीदने के लिए शपथ भी दिलाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो का स्टैंडर्ड्स क्लब, हमारे छात्रों को गुणवत्ता और मानकीकरण का महत्व समझाने के साथ-साथ उनमें रचनात्मकता, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उसका स्थान इस बात पर निर्भर करता है कि वहां बनने वाले उत्पाद और सेवाएं कितनी विश्वसनीय, टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाली हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, भारतीय मानक ब्यूरो पिछले 78 वर्षों से राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। भारतीय मानक ब्यूरो ने विभिन्न क्षेत्रों में मानकीकरण के माध्यम से भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा भी की है। ब्यूरो द्वारा स्थापित मानक हमारे उद्योगों, व्यापार और सेवाओं के प्रमाणीकरण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी जब हम कोई उत्पाद खरीदने जाते हैं, तो सबसे पहले यही देखते हैं कि उस उत्पाद पर आईएसआई मार्क है या नहीं। यदि आईएसआई मार्क होता है, तो हमें पूरा भरोसा हो जाता है कि ये उत्पाद गुणवत्ता और सुरक्षा के सभी मानकों पर खरा उतरेगा। ये अपने आप में भारतीय मानक ब्यूरो की विश्वसनीयता और उपभोक्ताओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि कोई भी मानक केवल तकनीकी दिशा-निर्देश या मापदंड नहीं होते, बल्कि वे हमारे देश के विकास और आत्मनिर्भरता की बुनियाद भी होते हैं। ये न केवल हमारे कार्यों की गुणवत्ता को सुनिश्चित करते हैं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन को भी किसी न किसी रूप में प्रभावित करते हैं।

विकसित हो रहा है मानकों का ईकोसिस्टम

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में मानकों के इकोसिस्टम का व्यापक विस्तार हुआ है, अब कृषि, सड़क परिवहन, स्वास्थ्य सहित लगभग सभी क्षेत्रों को समाहित कर रहा है। ये विस्तार सुनिश्चित करता है कि सभी क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता, सुरक्षा और दक्षता के मानक लागू हों, जिससे हमारे जीवनस्तर में सुधार हो और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सके। इसी तरह हमारे प्रदेश में भी भारतीय मानक ब्यूरो पीडब्ल्यूडी, एमडीडीए, यूपीसीएल और आपदा प्रबंधन विभाग के साथ समन्वय करते हुए, इन सभी को मानकीकरण की दिशा में जागरूक और सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

आत्मनिर्भर भारत में अहम योगदान

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना साकार हो रहा है। इस सपने को साकार करने में भारतीय मानक ब्यूरो की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री का उद्देश्य है कि भारतीय उत्पाद अपनी गुणवत्ता, नवाचार और विश्वसनीयता के लिए पूरे विश्व में एक मिसाल स्थापित करें। क्योंकि जब हम अपने उत्पादों को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करते हैं, तो हम न केवल उनकी गुणवत्ता का ध्यान रखते हैं, बल्कि अपने उद्योगों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए भी सशक्त आधार प्रदान करते हैं। इसी की ध्यान में रखते हुए हमारी प्रदेश सरकार भी निरंतर प्रयास कर रही है।

हाउस ऑफ हिमालयाज

मुख्यमंत्री ने कहा आज हम अपने पारंपरिक उत्पादों, जैसे हस्तशिल्प, जैविक कृषि उत्पाद, औषधीय जड़ी-बूटियों और अन्य स्थानीय उत्पादों के लिए उच्च मानक स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं जिससे हमारे उत्पाद वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। इसी को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने श्हाउस ऑफ हिमालयाजश् नाम से एक अम्ब्रेला ब्रांड की स्थापना की है, जो हमारे स्थानीय उत्पादों को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो ने देशभर के 10,000 से अधिक स्कूलों में स्टैंडर्ड क्लब स्थापित किए हैं, जिनके माध्यम से बच्चों में मानकों के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है। साथ ही, ब्यूरो ने लगभग 100 प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के साथ डव्न् साइन किए हैं, जिनमें हमारे उत्तराखंड के चार प्रमुख संस्थान भी शामिल हैं। बीआईएस अब ग्राम पंचायत स्तर तक मानकों के महत्व को पहुंचा रहा है।

वन नेशन वन स्टैंडर्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि ष्भारतीय मानकष् न केवल अंतर्राष्ट्रीय मानकों के बराबर हों, बल्कि उनसे भी श्रेष्ठ बनें। उनके इसी संकल्प को साकार करने के लिए हमारी सरकार ठप्ै के साथ मिलकर राज्य में उच्चतम मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अगर हम गुणवत्ता को अपनी आदत बना लेंगे तो न केवल हम विश्व के सभी मानकों पर खरे उतरेंगे बल्कि एक समय ऐसा भी आएगा जब हमारे उत्पाद वैश्विक मानक तय करेंगे। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि ष्भारतीय मानकर ब्यूरोष् हमारे देश को वैश्विक मानकों की दौड़ में शीर्ष पर ले जाने के अपने महत्वपूर्ण कार्य को इसी प्रकार जारी रखेगा और हम सभी मिलकर ‘वन नेशन, वन स्टैंडर्ड’ की नीति को अपनाकर ‘गुणवत्ता सम्पन्न भारत’ का निर्माण सुनिश्चित करेंगे।

इस अवसर पर कैंट विधायक सविता कपूर, भारतीय मानक ब्यूरो के निदेशक उत्तराखंड सौरभ तिवारी, आयुक्त खाद्य हरिचंद्र सेमवाल, उप निदेशक बीआईएस स्नेहलता उपस्थित थे।

सीएम ने नेशनल गेम्स की तैयारियों की जानकारी लेकर खिलाड़ियों को परोसा भोजन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली से देहरादून आते ही रायपुर स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स स्टेडियम में 38वें राष्ट्रीय खेलों की विभिन्न व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने भोजन व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने खिलाड़ियों को भोजन परोसा और खिलाड़ियों के साथ बैठकर भोजन भी किया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न खेल स्पर्धाओं में भाग ले रहे अनेक राज्यों खिलाड़ियों से बात कर उनका हौंसला भी बढ़ाया। इस अवसर पर उन्होंने शूटिंग रेंज का अवलोकन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 38वें राष्ट्रीय खेलों की अच्छी शुरुआत हुई है राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी खिलाड़ी देवभूमि उत्तराखंड से अच्छा अनुभव लेकर जाएं। खिलाड़ियों और आगंतुकों को हर संभव सुविधा प्रदान करने के प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेल का अनुभव राज्य के लिए काफी कारगर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर राज्य के खिलाड़ियों को वहां के खानपान के हिसाब से भोजन व्यवस्था देने के प्रयास किए गए हैं।

मुख्यमंत्री राष्ट्रीय खेल की हर पल अपडेट अधिकारियों से ले रहें हैं और स्वयं विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं।

इस अवसर पर विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, खेल निदेशक प्रशांत आर्य, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून अजय सिंह मौजूद थे।

उत्तराखंड हरित पहल की ओर, राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेताओं के नाम पर रूद्राक्ष के 1600 पेड़ लगेंगे

महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के समीप स्थित वन विभाग की 2.77 हेक्टेयर जमीन को जल्द नई पहचान मिलने जा रही है। यह पहचान खेल वन के रूप में होगी। राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाले 1600 खिलाड़ियों के नाम से यहां पर रूद्राक्ष के पेड़ लगाए जाएंगे। राष्ट्रीय खेल सचिवालय की दस फरवरी को यहां पर बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर ग्रीन गेम्स का प्रभावी संदेश देने की तैयारी है।

38वें राष्ट्रीय खेलों की थीम ग्रीन गेम्स की रखी गई है। उत्तराखंड सरकार ने हरित पहल करते हुए राष्ट्रीय खेलों में कई कदम ऐसे उठाए हैं, जिनकी पूरे देश में चर्चा हो रही है। इस क्रम में पदक विजेता खिलाड़ियों के सम्मान में उनके नाम से पौधा रोपने का कार्यक्रम भी शामिल है। राष्ट्रीय खेलों के उद्घाटन समारोह में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड सरकार की हरित पहल की सराहना की थी।

खेल वन जिस जगह पर विकसित किया जाना है, उसे आज-कल तैयार किया जा रहा है। दस फरवरी को यहां पर आयोजित कार्यक्रम में खेल वन का शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। आज-कल इस पूरे इलाके की तारबाड़ की जा रही है, ताकि जब यहां पर पेड़ लगा दिए जाएं, तो उसकी सुरक्षा भी हो सके।

चौंपियन हमें प्रेरित करते हैं
खेल वन के लिए जो बड़ा बोर्ड तैयार कराया जा रहा है, उसमें यह लाइनें खास तौर पर उकेरी जा रही है-चौंपियनस इंस्पायर अस, दियर लेगेसी ब्लूम्स इन एवरी ट्री वी प्लांट। राष्ट्रीय खेल सचिवालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित सिन्हा का कहना है कि यहां लगाए जाने वाले हर पेड़ से हमारी स्मृतियों में विजेताओं का सुनहरा प्रदर्शन ताजा रहेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से हम ग्रीन गेम्स की थीम पर राष्ट्रीय खेलों का सफलतापूर्वक आयोजन कर रहे हैं। हमने हरित पहल करते हुए कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे दूर-दूर तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश जाएगा। खेल वन इस कड़ी में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री।

उत्तराखंडः राष्ट्रीय खेलों में खिलाड़ियों को पसंद आ रही रही फैन पार्क और मौली संवाद पहल

राष्ट्रीय खेलों के सबसे प्रमुख केंद्र महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में फैन पार्क और कॉन्क्लेव प्वाइंट आस-पास ही हैं। एक जगह खिलाड़ियों की थकान मिटाने के इंतजाम हैं, तो दूसरी जगह मोटिवेशन की वो धारा है, जो नए खिलाड़ियों को राह दिखाने वाली है। अपने मैच खत्म हो जाने या फिर खाली समय में खिलाड़ी दोनों ही जगह मौजूद दिख रहे हैं। चाहे वो फैन पार्क हो या फिर मौली संवाद कान्क्लेव खिलाड़ी दोनों ही पहल को पसंद भी कर रहे हैं।

फैन पार्क में खिलाड़ियों का धूम धड़क्का
शूटिंग के मैच खत्म होने के बाद फैन पार्क पहुंची छत्तीसगढ़ की श्रुति यादव वहां बज रहे गिटार की धुन को इन्ज्वॉय करती दिखीं। बातचीत में श्रुति ने कहा-उत्तराखंड के इंतजाम अच्छे हैं। वह बताती हैं-छत्तीसगढ़ की शूटिंग टीम पहली बार नेशनल खेल रही हैं। फैन पार्क की पहल को वह अच्छा बताती हैं। वैसे, फैन पार्क में हर समय गिटार की मधुर धुन ही नहीं है, डीजे का धूम धड़क्का भी है, जिसमें खिलाड़ी और उनके साथ आए लोग नाच-झूम रहे हैं। मैच देखने के लिए आने वाले खेल प्रेमियों के लिए भी यहां एंट्री है।

मौली संवाद में खिलाड़ी जान रहे अहम बातें
नेशनल स्पोर्ट्स विजन कॉन्क्लेव में 30 सत्रों की श्रृंखला 12 फरवरी तक चलनी हैं। इस कॉन्क्लेव को राष्ट्रीय खेल के शुभंकर मौली से जोड़ते हुए मौली संवाद नाम दिया गया है। यहां पर खिलाड़ियों को खेल विकास और उससे जुड़ी तमाम अन्य बातों की जानकारी देने की व्यवस्था की गई है। 50 विशेषज्ञों का पैनल तैयार है। जानी मानी एथलीट रह चुकीं अंजू बॉबी जार्ज और भारतीय हॉकी की कप्तान रानी रामपाल और संग्राम सिंह के टिप्स से इस सीरीज का आगाज हो चुका है। खिलाड़ियों को मोटिवेशन सपोर्ट, मेडिकल, न्यूट्रिशन, इंजरी से उबरनेे, डोपिंग समेत तमाम अन्य बिंदुओं पर टिप्स देने के लिए रोजाना सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। पंजाब की वुशु टीम के खिलाड़ी हरप्रीत व शिवम ने कहा-यह आयोजन खिलाड़ियों की बेहतरी से जुड़ा है।

चार जगह और संचालित हो रहे फैन पार्क
राष्ट्रीय खेलों में भाग ले रहे खिलाड़ियों के मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार, हल्द्वानी व रूद्रपुर में भी फैन पार्क संचालित किए जा रहे हैं। इन तीनों ही जगहों पर राष्ट्रीय खेल आयोजित किए जा रहे हैं। नैनीताल में कोई खेल इवेंट नहीं होनी है, लेकिन पर्यटन नगरी में राष्ट्रीय खेल के प्रचार की दृष्टि से वहां भी फैन पार्क चलाया जा रहा है।

कॉन्क्लेव में 12 को आएंगी मुक्केबाज निखत जरीन
कॉन्क्लेव में 12 फरवरी को भारतीय स्टार मुक्केबाज निखत जरीन आएंगी। इसके अलावा, जानी मानी एथलीट रह चुकी अश्विनी नचप्पा, चक दे इंडिया फेम पूर्व हॉकी खिलाड़ी मीर रंजन नेगी समेत कई विशेषज्ञों केे भी कॉन्क्लेव में कार्यक्रम तय किए गए हैं। देहरादून में यह कॉन्क्लेव 12 फरवरी तक आयोजित की जाएगी। 11 फरवरी को एक दिन हल्द्वानी में भी कॉन्क्लेव आयोजित की जाएगी।

राष्ट्रीय खेलों में खिलाड़ी अपना बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके मनोरंजन और ज्ञानवर्धन के लिए भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ताकि उन्हें हर लिहाज से एक अच्छा वातावरण मिले और वह खेलों में आगे बढ़ सकें।
-नीरज गुप्ता, नोडल अधिकारी, गेम्स ऑपरेशन।

हमारी कोशिश है कि देशभर से आए खिलाड़ी देवभूमि उत्तराखंड से बहुत अच्छे अनुभव लेकर के जाएं। इसी अनुरूप तमाम तरह की व्यवस्था की गई हैं। हम चाहते हैं कि राष्ट्रीय खेल सभी खिलाड़ियों के विकास में सहायक साबित हों।
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री।

नेशनल गेम्स के बड़े मंच से तीन विषय और उत्तराखंड को बड़ी शाबासी

मंगलवार को यह बड़ा मंच राष्ट्रीय खेलों का था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेल विकास से जुड़ी कई अहम बातें कीं। मगर तीन ऐसे विषय भी उठाए, जिनमें उत्तराखंड के विशेष प्रयास हैं। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के इन प्रयासों को नए सिरे से रेखांकित करते हुए धामी सरकार की खुलकर सराहना की और शाबासी दी। यह तीन विषय थे-यूसीसी, शीतकालीन यात्रा और प्लास्टिक मुक्त अभियान।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना के बाद धामी सरकार के प्रयास देश-दुनिया तक और प्रभावी ढंग से पहुंचे हैं। एक दिन पहले उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी का प्रधानमंत्री ने खास तौर पर जिक्र किया। खेल और यूसीसी में सबको साथ लेकर चलने की अंतर्निहित भावना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिलचस्प ढंग से जोड़ा।

हाल ही में शीतकालीन यात्रा के लिए जिस तरह से धामी सरकार ने पहल की है, उसे प्रधानमंत्री के पूर्ण समर्थन के खास मायने रहे। उत्तराखंड की स्थानीय आर्थिकी के व्यापक हितों के लिए शुरू की गई शीतकालीन यात्रा के संबंध में प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य अहम रहा कि वह खुद इस यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं। पिछले दिनों अपने दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री से भेंट कर उन्हें शीतकालीन यात्रा पर आने के लिए आमंत्रित भी किया था। यात्रा की ब्रांडिंग कर प्रधानमंत्री राज्य सरकार के प्रयासों को भी गति दे गए।

राष्ट्रीय खेलों की ग्रीन गेम्स की थीम पर प्रधानमंत्री प्रभावित नजर आए। ई-वेस्ट से पदक निर्माण, विजेता खिलाड़ियों के स्तर पर पौधरोपण जैसी पहल पर प्रधानमंत्री खूब बोले। उन्होंने इसके साथ ही, धामी सरकार के प्लास्टिक मुक्ति के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी खुलकर सराहा।

राष्ट्रीय खेल से मिली सौगात, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए मजबूत होगा दावा

38 वें राष्ट्रीय खेलों के लिए दून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में तैयार हो रही शूटिंग रेंज का आने वाले दिनों में जलवा कायम होने जा रहा है। टारगेट क्षमता के मामले में दिल्ली व भोपाल के बाद देश की तीसरे नंबर की यह शूटिंग रेंज बनने जा रही है। इस शूटिंग रेंज में 160 टारगेट स्थापित किए जा रहे हैं। इस शूटिंग रेंज की बदौलत उत्तराखंड आने वाले दिनों में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शूटिंग स्पर्धाओं के लिए मजबूत दावेदार बनकर उभर सकता है।

राष्ट्रीय खेलों में शूटिंग स्पर्धा के मुकाबले महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज देहरादून में होने हैं। इसके लिए शूटिंग रेंज का काम लगभग तैयार हो गया है। दस और 25 मीटर रेंज के 60-60 टारगेट यहां स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि 50 मीटर रेंज के 40 टारगेट हैं। देश भर में सबसे बड़ी शूटिंग रेंज की बात करें, तो मोटे तौर पर दो ही नाम सामने आते हैं। एक दिल्ली की डा करनी सिंह शूटिंग रेंज और दूसरी भोपाल की एमपी शूटिंग रेंज। इनमें दिल्ली की शूटिंग रेंज में हर स्पर्धा के लिए 80-80 टारगेट की क्षमता है, जबकि भोपाल के मामले में टारगेट क्षमता 60-60 है।

भारतीय शूटिंग टीम के असिस्टेंट कोच अरूण सिंह के अनुसार देश के तमाम दूसरे स्थानों में शूटिंग रेंज की सुविधाएं तो हैं, लेकिन उनकी क्षमता दिल्ली व भोपाल की तरह नहीं है। अब देहरादून भी शूटिंग रेंज की टारगेट क्षमता के मामले में दिल्ली, भोपाल के बराबर में खड़ा होने जा रहा है। यह स्थिति उत्तराखंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। तमाम राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाएं उत्तराखंड में अब सफलतापूर्वक कराई जा सकती हैं।

25 मीटर रेंज में दिल्ली से आगे निकल सकता है दून

दिल्ली की डा करनी सिंह शूटिंग रेंज में 25 मीटर की स्पर्धा के लिए 60 टारगेट की क्षमता है। 38 वें राष्ट्रीय खेलों में दून की शूटिंग रेंज में भी इस स्पर्धा के लिए 60 टारगेट फिक्स किए जा रहे हैं, लेकिन इस रेंज की संपूर्ण क्षमता 65 टारगेट की हैं। यानी दून की इस शूटिंग रेंज में आने वाले दिनों में यदि आवश्यकता पड़ती है, तो 65 टारगेट फिक्स किए जा सकते हैं। भारतीय शूटिंग टीम के असिस्टेंट कोच अरूण सिंह के अनुसार-पेरिस ओलंपिक में जिन टारगेट का प्रयोग हुआ था, उसी मानक वाले टारगेट यहां फिक्स किए जा रहे हैं। इससे सौ फीसदी सटीक स्कोरिंग संभव हो पाएगी।

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न सिर्फ शूटिंग, बल्कि अन्य खेलों में भी मजबूत आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है। राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से देवभूमि की एक पहचान खेल भूमि के रूप में भी बनेगी। हमारे खिलाड़ी दुनिया में और चमकेंगे। साथ ही, हम बड़ी स्पर्धाओं को आयोजित करने में भी सक्षम साबित होंगे।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

राष्ट्रीय खेलः जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस से लेकर हेली एंबुलेंस तक की व्यवस्था रहेगी उपलब्ध

38 वें राष्ट्रीय खेल के दौरान खिलाड़ियों और मेहमानों को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए 141 टीमों का गठन किया गया है। 28 जनवरी से लेकर 14 फरवरी तक यह टीमें अलर्ट मोड में रहेंगी। इस दौरान जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस से लेकर हेली एंबुलेंस तक की सुविधा तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने बड़े स्तर पर राष्ट्रीय खेलों की तैयारियां की हैं। स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार के अनुसार-राज्य स्तर पर राज्य नोडल अधिकारी, उप नोडल अधिकारी व सह नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं। जनपद स्तर पर जिला नोडल अधिकारी मुख्य चिकित्साधिकारी और सह नोडल अधिकारी अपर मुख्य चिकित्साधिकारी बनाए गए हैं। एंबुलेंस हेतु जिला स्तरीय नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि महाराणा प्रताप स्टेडियम, रायपुर, देहरादून के धनवन्तरी ब्लॉक में 10 बैडेड अस्पताल खिलाड़ियों हेतु संचालित किया जाएगा। इसी तरह, आईजीआईसीएस स्टेडियम, गोला पार हल्द्वानी में दो बैडेट अस्पताल संचालित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त मात्रा में औषधियां, उपकरण क्रय किए जा रहे हैं।

डॉ टम्टा कुमाऊं और डॉ नेगी गढ़वाल के नोडल अफसर

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार के अनुसार-डॉ० तरूण टम्टा, प्रमुख अधीक्षक, जिला चिकित्सालय, नैनीताल को कुमाऊं मंडल का नोडल अधिकारी नामित किया गया है। डॉ टम्टा ने स्पोर्ट्स मेडिसन में शिक्षा प्राप्त की है। निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, गढ़वाल मंडल पौड़ी गढ़वाल के स्तर पर डॉ केएस नेगी को गढ़वाल मंडल का नोडल अधिकारी नामित किया गया है। नोडल अफसरों को स्थलीय निरीक्षण करने के लिए कहा गया है।

इस तरह की हैं विभाग की तैयारियां

1-प्राइमरी हेल्थ केयर, सेकेंड्री हेल्थकेयर व टर्रसियरी हेल्थ केयर के नोडल अधिकारी और सह नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। सेकेंड्री हेल्थ केयर, जो जिला चिकित्सालय है, उनमें चिकित्सा विशेषज्ञ जैसे-न्यूरो, कार्डिक, हैड इंजरी एवं स्पाइन इंजरी को उक्त अवधियों में ऑन-कॉल (24Û7) रखे गए हैं।

2-प्रत्येक जिला चिकित्सालय में 03 ऑन कॉल (24Û7) एंबुलेंस मय आवश्यक औषधि सहित तैनात है। खेल स्पर्धा में भाग लेने वाले खिलाड़ियों के रहने के स्थान के निकटतम चिकित्सा ईकाईयों में ऑन-कॉल (24Û7) टीमें तैनात की गई हैं। प्रत्येक जनपद में सूचीबद्ध चिकित्सालयों की व्यवस्था की गई है।

3-प्रत्येक खेल व शिफ्ट में एक टीम बनाई गई है, जिसमें डॉक्टर-01, नर्सिंग स्टॉफ-02, फिजियोथेरेपिस्ट-02(महिला/पुरुष) व वार्ड ब्वाय-01 को टीम में रखा गया है और 01 टीम को स्टैंड बाय रखा गया है।

4-सभी खेल स्थलों में 01-एएलएस एंड 01-बीएलएस एंबुलेंस की तैनाती चिकित्सकीय दल के साथ की गई है। 01 बीएलएस एंबुलेंस को स्टैंड बाय रखा गया है।

5-प्रत्येक जिला चिकित्सालय में 03 ऑन-कॉल (24Û7) एंबुलेंस मय आवश्यक औषधि सहित तैनात है। खेल स्पर्धा में भाग लेने वाले खिलाड़ियों के रहने के स्थान के निकटतम चिकित्सा इकाईयों में ऑन-कॉल (24Û7) टीमें तैनात की गई है।

तैयारियों का ये भी लेखा-जोखा

150 डॉक्टर, 300 नर्सिंग स्टॉफ, 25 फिजियोथेरेपिस्ट, 30 फार्मासिस्ट व 50 वार्ड ब्वाय तैनात किए गए हैं।

115 एंबुलेंस राष्ट्रीय खेलों के दौरान तैनात रहेंगी। ये एंबुलेंस विभागीय और 108 सेवा की हैं।

05 बैड एम्स ऋषिकेश के ट्रामा विभाग में दिनांक 28 जनवरी 2025 से दिनांक 14 फरवरी 2025 तक) रिजर्व रहेंगे। आवश्यकता पड़ने पर एयरलिफ्ट की सुविधा हेली एंबुलेंस के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।

50 चिकित्साधिकारियों को एम्स ऋषिकेश में कैपेसिटी बिल्डिंग हेतु प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। यह चिकित्साधिकारी समस्त जनपद के हैं।
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“राष्ट्रीय खेल हमारे राज्य के लिए गौरव का क्षण है। खिलाड़ियों और मेहमानों को उच्चतम स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना हमारी प्राथमिकता है। हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखा गया है।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री