राज्य की न्याय पंचायतें ग्रोथ सेंटर के रूप में विकसित हो रहीः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय कार्यशाला व पोषण अभियान का शुभारंभ करते हुये कहा कि राज्य में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना व राष्ट्रीय पोषण अभियान के द्वारा महिला व बाल कुपोषण को समाप्त करने हेतु प्रभावी प्रयास किये जा रहे है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रकाशित कैलेण्डर व पोषण गीत का विमोचन किया।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय पोषण मिशन का उद्देश्य ठिगनापन, अल्पपोषण दूर करना व छोटे बच्चों, महिलाओं एवं किशोरियों में एनीमिया को कम करना है। इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं और तीन साल के कम आयु के बच्चों को शामिल किया जाएगा। योजना में आईसीडीएस कर्मचारियों तथा सामुदायिक पोषक कार्यकर्ताओं में कौशल व क्षमता में सुधार लाने के लिए निवेश किया जाएगा।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तराखण्ड के परम्परागत पर्वतीय खानपान पौष्टिक तत्वों से भरपूर है। हमारा स्थानीय अनाज, सब्जियॉं, वनों से मिलने वाले फल-फूल, वनस्पति अत्यन्त पौष्टिक है। हमारे बुर्जुगों ने खानपान की स्वास्थ्य वर्धक परम्पराओं को अपनाया था।

उन्होंने कहा कि कुपोषण को समाप्त करने के लिए सभी विभागों को मिलजुल कर कार्य करना होगा। आंगनबाड़ी केन्द्रों को बाल कुपोषण को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। कुपोषण को दूर करने व बिमारियों से बचाव में स्वच्छता का विशेष महत्व है। आमजन को स्वच्छता व टीकाकरण के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पोषण अभियान के प्रति आमजन विशेषकर महिलाओं को जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। हमें कुपोषण के प्रति जन अभियान चलाना होगा ताकि हम पूर्णतः स्वस्थ राज्य व देश बन सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 670 न्याय पंचायतों को ग्रोथ सेन्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें से 107 को चयन कर लिया गया है। गांव के आस-पास के स्थानीय उत्पादों का उत्पादन, प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिग, वैल्यू एडिशन आदि स्थानीय लोगों के माध्यम करवाने की मूल परिकल्पना पर आधारित न्याय पंचायतों को ग्रोथ सेन्टर के रूप विकसित किया जा रहा है। ग्रोथ सेन्टरों में महिला लाभार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि राज्य को कुपोषण मुक्त करने के लिये मुख्यमंत्री बाल पोषण अभियान आरम्भ किया गया है। समेकित बाल विकास सेवाओं के तहत टेक होम राशन अनुपूरक पोषाहार के रूप में वितरित किया जा रहा है। प्रत्येक माह की पांच तारीख को वजन एवं पोषण दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिस दिन समस्त लाभार्थियों को आंगनबाड़ी केन्द्र के माध्यम से पोषाहार वितरित किया जाता है।

हाईकोर्ट के इस फैसले से सांसद आदर्श गांव में बसे पांच सौ परिवारों को खतरा

नैनीताल हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की खंड पीठ ने ऊधमसिंह नगर की ग्राम पंचायत सरपुड़ा के बग्गाचौवन में रिजर्व फॉरेस्ट से चार माह में अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किये है। न्यायालय के इस आदेश के बाद सांसद आदर्श गांव बग्गाचौवन में बसे करीब पांच सौ परिवारों पर बेदखली का खतरा पैदा हो गया है।

शुक्रवार को न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की खंडपीठ ने ऊधमसिंह नगर के खटीमा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत सरपुड़ा निवासी होशियार चंद की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में होशियार चंद ने कहा है कि उनकी ग्राम पंचायत में बग्गाचौवन को मिला दिया गया। सरपुड़ा ग्राम पंचायत की आबादी 2116 तथा मतदाता 1365 हैं। 50 फीसद आबादी अनुसूचित जाति के लोगों की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत सरपुड़ा के विकास कार्यों व जनसुविधाएं बग्गाचौवन के लोगों को दी जा रही हैं। जिससे उनकी ग्राम पंचायत का विकास थम गया है।

हाईकोर्ट ने ऊधमसिंह नगर जिले की ग्राम पंचायत सरपुड़ा के बग्गाचौवन में रिजर्व फॉरेस्ट से चार माह में अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के इस आदेश से सांसद आदर्श गांव बग्गाचौवन में बसे करीब पांच सौ परिवारों पर बेदखली का खतरा पैदा हो गया है। गांव को सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने सांसद आदर्श योजना के अंतर्गत गोद लिया है।

शुक्रवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की खंडपीठ ने ऊधमसिंह नगर के खटीमा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत सरपुड़ा निवासी होशियार चंद की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में होशियार चंद ने कहा है कि उनकी ग्राम पंचायत में बग्गाचौवन को मिला दिया गया। सरपुड़ा ग्राम पंचायत की आबादी 2116 तथा मतदाता 1365 हैं। 50 फीसद आबादी अनुसूचित जाति के लोगों की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत सरपुड़ा के विकास कार्यों व जनसुविधाएं बग्गाचौवन के लोगों को दी जा रही हैं। जिससे उनकी ग्राम पंचायत का विकास थम गया है।

याचिका में कहा गया है कि इस वजह से मूल ग्रामीण सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। सड़क, खड़ंजा, शौचालय, स्कूल, वृद्धावस्था, विधवा पेंशन, राशन कार्ड आदि के लिए बजट सरपुड़ा के लिए मंजूर होता है, जबकि विकास बग्गाचौवन का होता है, लिहाजा बग्गाचौवन को ग्राम पंचायत सरपुड़ा से अलग कर दिया जाए। यहां के पांच सौ परिवारों ने रिजर्व फॉरेस्ट की 517 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा किया हुआ है। यह राजस्व भूमि भी नहीं है। खंडपीठ ने चार माह के भीतर रिजर्व फॉरेस्ट से अतिक्रमण हटाने के आदेश पारित किए।

सहकारी विकास परियोजना से 50 हजार किसानों को होगा फायदा

किसानों की आय दोगुनी करने में समेकित सहकारी विकास परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे राज्य के 50 हजार किसानों को फायदा होगा। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 3632 करोड़ रूपये की समेकित सहकारी विकास परियोजना को प्रदेश में लाया जा रहा है। एनसीडीसी द्वारा वित पोषित इस योजना में 80 प्रतिशत ऋण के रूप में जबकि 20 प्रतिशत अनुदान के रूप में होगा। इसमें कॉपरेटिव व कार्पोरेट में समन्वय पर भी बल दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य में जल्द ही राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा सहायतित राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना की शुरूआत की जायेगी। राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 3632 करोड़ रूपये की समेकित सहकारी विकास परियोजना को प्रदेश में लाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लक्ष्य को पूर्ण करने में यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। इस परियोजना को सफल बनाने में सहकारी, कृषि, उद्यान, मत्स्य, डेयरी व सम्बन्धित विभागों की अहम भूमिका होगी। इस परियोजना से प्रदेश के 50 हजार किसानों को फायदा होगा। इस परियोजना से कॉपरेटिव से कॉपरेटिव व कॉपरेटिव से कॉर्पोरेट के रास्ते खुलेंगे। इस परियोजना के लिए परियोजना निदेशालय बनाया जायेगा।

इस कार्यक्रम को आईसीडीपी योजना के तहत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) से वित्त पोषण में सहायता मिलेगी, जहां प्राविधानित राशि का 80 प्रतिशत ऋण एवं 20 प्रतिशत अनुदान के रूप में होगा। यह कार्यक्रम तीन चरणों में चलाया जायेगा। पहले चरण में बहुद्देशीय सहकारी समितियों एवं उनके जिलास्तरीय व शीर्ष निकाय, कृषि, उद्यान, जड़ी-बूटी, रेशम, सगंध पौध आदि का सहकारी सामूहिक खेती द्वारा वृहद उत्पादन, परिवहन, विपणन, दुग्ध विकास, पशुपालन व मतस्य पालन की विशेष त्रिस्तरीय सहकारी संस्थाओं की आवश्यकताओं को शामिल किया गया है।

आईसीडीपी के माध्यम से उत्तराखण्ड राज्य के विकास के कार्यक्रम की विशिष्टता के दृष्टिगत परियोजना इस प्रकार तैयार की गई है कि मूल्य श्रृंखला में ‘खेतों से लेकर बाजार तक’ चुनौतियों को पहचाना जा सके और उनका उचित निदान किया जा सके। किसानों की छोटी-छोटी जोत को शामिल कर संयुक्त सहकारी खेती के माध्यम से वृहद स्तर पर फसलों की खेती में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा। सहकारी संस्थाओं एवं निगमित निकायों (कॉर्पोरेट) के संयुक्त उद्यम द्वारा उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने, बाजार पहुंच में सक्षम होने व किसानों को फसल मूल्य अधिक प्राप्त होने में कारगर साबित होगी। इस परियोजना द्वारा शीर्ष निकायों यूसीएफ, यूसीबी, और नव निर्मित पीसीयू को संरचनात्मक व प्रभावी रूप से मजबूत करने की व्यवस्था की गई है।

कॉबेर्ट पार्क में तैनात रहे अफसरों की संपत्ति की होगी जांच

कोर्ट ने कार्बेट के ढिकाला जोन में जिप्सियों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है और अमानगढ़ व धुलवा रेंज को भी पार्क में शामिल करने के आदेश दिए हैं।

उच्च न्यायालय ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत मामले में सख्त रूख अपनाते हुए जांच सीबीआइ की वन्य जीव शाखा से कराने की संस्तुति दी है। कोर्ट ने कार्बेट के ढिकाला जोन में जिप्सियों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है और अमानगढ़ व धुलवा रेंज को भी पार्क में शामिल करने के आदेश दिए हैं।

मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने सीटीआर के बफर जोन से गुर्जरों की बेदखली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बाघों की सुरक्षा के लिए अस्थाई रूप से पार्क में स्पेशल टाइगर फोर्स का गठन हो चुका है, जिसमें पूर्व सैनिकों की नियुक्ति की जा रही है।

कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फोर्स में 40 साल से कम आयु के पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दी जाए। सुनवाई के दौरान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव ने बताया कि पार्क में मरे नौ बाघों में छह की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है। इन छह बाघों के बिसरे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा चुके हैं, मगर इस मामले में विरोधाभासी बयानों से नाराज कोर्ट ने सभी बाघों की बिसरा रिपोर्ट बुधवार को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

पेशी के बहाने पिकनिक मनाने न आएं अधिकारी

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अफसरों पर तल्ख टिप्पणी की। कहा कि कोर्ट में पेशी के बहाने अधिकारी पिकनिक मनाने आते हैं। यह गंभीर है। खंडपीठ ने अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह से कहा है कि वह अदालत के आदेशों के अनुपालन में सहयोग करें। वहीं वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते व प्रो. बीएल साह द्वारा सीटीआर पर किए गए शोध पर आधारित रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए और इन शोधों को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश दिए। सीटीआर से लगे सुंदरखाल गांव को हटाने के आदेश भी कोर्ट ने दिए हैं। इसके साथ ही रिसॉर्ट से छुड़ाए गए बीमार हाथियों की जांच व उनका उपचार कराने का आदेश देते हुए बीमारों हाथियों को अन्य से अलग रखने के निर्देश दिए।

ग्रामीणों की एकता ने दिखाया रंग, बुजुर्ग को ले गये अस्पताल

यमकेश्वर प्रखंड के कसाण गांव में स्थिति इतनी दयनीय है कि यहां के स्थानीय ग्रामीण सड़क न होने के कारण किसी बीमार व्यक्ति को कुर्सी की पालकी बनाकर ले जाने को मजबूर है। पिछले एक दशक से यहां सड़क की समस्या बनी हुयी है। मगर, यहां सड़क का निर्माण न हो सका।

यमकेश्वर प्रखंड के डांडामंडल क्षेत्र में स्थित कसान गांव 11 वर्ष पूर्ण तब सुर्खियों में आया था जब यहां बादल फटने से कुछ घर जमींदोज हो गए थे। 14 अगस्त 2007 की रात यहां आई इस आपदा में 4 लोगों की मौत हो गई थी। इस गांव की पीड़ा का कोई हल नहीं निकल पाया है।

आपदा पीड़ित होने के बावजूद प्रभावित लोगों का विस्थापन नहीं हो पाया। जितने भी लोग यहां रह रहे हैं वह विपरीत हालत में भी गांव की अवधारणा को पूरा करने के साथ पलायन जैसी समस्या को चुनौती दे रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार गांव से मुख्य सड़क करीब 4 किलोमीटर दूर है। यहां तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है। किसी तरह से लोग आवागमन बनाए रखे हैं। विकट हालत तब हो जाते हैं जब गांव में कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाए। स्थानीय ग्रामीण सोहन ने बताया कि सोमवार को स्थानीय नागरिक देवेंद्र सिंह राणा की तबीयत खराब हो गई। आसपास क्षेत्र में पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। बीमार को चिकित्सालय तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी।

गांव वालों ने हिम्मत दिखाई कुर्सी में डंडे बांधकर उसे पालकी बनाया गया। इस कुर्सी में बीमार को बिठाकर किसी तरीके से पहाड़ी इलाके के ऊंचे-नीचे 4 किलोमीटर लंबे सफर किया गया। मुख्य मार्ग पर पहुंचने के बाद निजी वाहन के जरिए बीमार को ऋषिकेश चिकित्सालय लाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि जो लोग गांव में बसे हैं वह सड़क की मांग कर रहे हैं। मगर जो लोग गांव छोड़कर दिल्ली और अन्य जगह बस गए हैं। उनमें से कुछ लोग सड़क का यह कहकर विरोध कर रहे हैं कि सड़क हमारे खेतों से होकर नहीं जानी चाहिए।

खनन व्यापारी ने लाइसेंसी बंदूक से खुद को उतारा मौत के घाट

लाइसेंसी बंदूक से एक खनन व्यापारी ने खुद को गोली मार ली। घटना के बाद से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।

नैनीताल जिले के लांलकुआ के गोरापड़ाव निवासी चंचल सिंह राठौर (50 वर्ष) पुत्र कैप्टन योगा सिंह ने रविवार दोपहर घर बाहर खलियान में अपनी लाइसेंसी दोनली बंदूक से कनपटी में गोली मार दी। इसके बाद वह जमीन पर गिर पड़े। मकान की दीवार खून के छीटे से रंग गई। गोली की आवाज सुनकर जबतक परिजन बाहर आते चंचल दम तोड़ चुके थे। चंचल द्वारा खुद को गोली मारने का पूरा प्रकरण उसके घर मे लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। मौके पर पहुची मंडी पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पा रहा है।

चंचल के पिता आर्मी रिटायर्ड है, जबकि उसका बेटा भी सेना में तैनात है। दूसरा बेटा हैदराबाद में पढ़ाई कर रहा है। चंचल के पास चार डंपर है। उसकी मौत से घर में कोहराम मचा है।

कुछ दिन पहले लगाये थे सीसीटीवी कैमरे

मृतक चंचल के छोटे भाई शेखर ने बताया कि बड़ा भाई पिछले कई दिनों से डरा-सहमा रहता था। वो अक्सर कहता था कि कोई उसे मार देगा, जिसके चलते पांच दिन पहले घर में कैमरे भी लगाए गए। आज सुबह मेन रोड पर मोबाइल रिचार्ज की दुकान चलाने वाले पंकज से भी उसने यही बात दोहराई। ठीक 12 बजे घर के आंगन में उसने खुद को गोली मार ली।

इंग्लैंड में जॉब करता है छोटा भाई

मृतक चंचल तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। दूसरे नंबर का भाई हीरा राठौर इंग्लैंड में जॉब करता है, जबकि सबसे छोटा शेखर भी खनन कारोबारी है। तीनों भाइयों के मकान आपस में सटे है। सुबह शेखर चंचल से मिलने भी गया था। उस समय वो सामान्य था।

सीएम ने देश का पहला जैव ईंधन विमान को किया फ्लैग ऑफ

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देश के पहले जैव ईंधन से उड़ने वाले स्पाइस जेट विमान का फ्लैग ऑफ जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर किया। इसके बाद विमान ने दिल्ली के लिये अपनी उड़ान भरी।

यह बायोफ्यूल जैट्रोफा के तेल एवं हाइड्रोजन के मिश्रण से बनाया गया है। इसके लिए आईआईपी में प्लांट लगाया गया है। संस्थान में बायोजेट फ्यूल तैयार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ से बायोफ्यूल डेवलपमेंट अथॉरिटी के जरिये जैट्रोफा का बीज खरीदा गया है। इससे पूर्व जैव ईंधन से चलने वाले इस स्पाइस जेट का परीक्षण भी किया था। बताया गया कि अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में कमर्शियल विमान पहले से ही जैव ईंधन से उड़ान भर चुके हैं।

जैव ईंधन से उड़ान भरने वाले स्पाइस जेट के फ्लैग ऑफ के अवसर पर महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्या, आईआईपी के निदेशक अंजन कुमार रे, स्पाइस जेट से जीपी गुप्ता, कैप्टन सतीश चन्द्र पाण्डे व आईआईपी के वैज्ञानिक उपस्थित थे।

महिलाओं ने बांधा सीएम की कलाई में रक्षा सूत्र

राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाओं ने मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हॉल में उपस्थित होकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को रक्षा सूत्र बांधा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामना देते हुये तोहफे भी दिये।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि समय एवं देशकाल परिस्थिति के अनुसार महिलाओं द्वारा रक्षा सूत्र बांधे गये हैं। भाई-बहनों के इस रक्षा सूत्र के त्यौहार के अलावा प्राचीन समय में भी जब राजा युद्ध के लिए जाते थे तो उनकी रक्षा के लिए उनकी पत्नियों द्वारा रक्षा सूत्र बांधा जाता था। आज भी जब हमारे सैनिक देश की रक्षा के लिए सीमाओं पर जाते हैं तब भी उनके कष्ट निवारण के लिए बेटियों द्वारा रक्षा सूत्र बांधा जाता है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि रक्षाबन्धन भावनात्मक रूप से जुडा हुआ पर्व है। इस त्यौहार से आपसी संबंध भी मजबूत होते है। मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि एवं स्वस्थ दीर्घायु की कामना ईश्वर से की है।

इसके उपरान्त मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने बालावाला स्थित एक स्थानीय वैडिंग में आयोजित रक्षाबंधन समारोह में प्रतिभाग किया। यहां भी भारी संख्या में स्थानीय महिलाओं ने मुख्यमंत्री की कलाई में रक्षा सूत्र बांधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे त्यौहारों में संस्कार होता है तथा वे हमारे रिश्तों को भी मजबूत बनाते हैं।

गढ़वाल और कुमांऊ के बीच एक और रेल सेवा शुरू

उत्तराखंड की जनता के लिये एक अच्छी खबर है। केंद्र सरकार व रेल मंत्री की पहल राज्य को एक और रेला सेवा मिल गयी है। शनिवार को काठगोदाम से देहरादून रूट पर एक और रेल सेवा का शुभारंभ किया गया। नैनी-दून जनशताब्दी एक्सप्रेस नाम से रेल सेवा शुरू की गयी। मुख्यमंत्री ने इसके लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व रेल मंत्री पीयूष गोयल का राज्य की जनता की ओर से धन्यवाद जताया है।

मुख्यमंत्री ने नैनी-दून जनशताब्दी एक्सप्रेस रेल सेवा पर खुशी जाहिर करते हुए कहा है कि ‘‘अटल जी ने बनाया-मोदी जी संवारेंगे’’ के वादे को पूरा करते हुए प्रधानमंत्री ने हमेशा उत्तराखण्ड को प्राथमिकता दी। प्रदेश में शुरू किए गए प्लास्टिक इंजीनियरिंग संस्थान ‘सीपैट’ में कोर्स कर हमारे युवाओं को 100 प्रतिशत प्लेसमेंट मिलेगा।

ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर व साईबर सिक्योरिटी सेंटर की स्थापना से हमारे युवा ड्रोन एप्लीकेशन व साईबर सिक्योरिटी के कोर्स कर रोजगार प्राप्त कर सकेंगे। प्रदेश के लिए स्वीकृत की गई 1500 करोड़ की जैविक खेती की योजना, किसानों की आय को दोगुना करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

उड़ान योजना के तहत हेलीकाप्टर सेवाओं से कनेक्टीवीटी बढ़ेगी। जिससे निवेश के लिए उद्यमी आकर्षित होंगे। जन औषधि केंद्रों के माध्यम से जनसामान्य को सस्ती दवाईयां उपलब्ध हो रही हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन के लिए देहरादून का चयन किए जाने से पूरे विश्व का ध्यान देवभूमि उत्तराखण्ड की योग परम्परा की ओर गया।

ऋषिकेश के दोहरे हत्याकांड का आरोपी सेवादार को कोर्ट ने दी सजा ए मौत

पिछले वर्ष नेपाली मूल की दो बच्चियों को मौत के घाट उतारने वाले सरदार परवान सिंह को अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। वहीं परवान सिंह पर साठ हजार रूपये का जुर्माना भी लगाया है। जिसमें से तीस हजार रूपये पीड़ित परिवार को दिये जाएंगे।

अदालत ने राहत कोष से भी इस परिवार को एक लाख रुपये देने के आदेश दिए हैं। मासूम बच्ची की मुट्ठी से मिले दोषी के दाढ़ी के बाल उसे सजा दिलाने में अहम सुबूत बने। पोक्सो की विशेष न्यायाधीश रमा पांडे की अदालत ने करीब सालभर के भीतर मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया। दोषी दरिंदा तब ऋषिकेश के श्यामपुर स्थित गुरूद्वारे में सेवादार था।

पिछले साल 15 जून, 2017 को ऋषिकेश के निकटवर्ती क्षेत्र श्यामपुर में यह घटना सामने आई थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक परवान सिंह यहां एक गुरूद्वारे में सेवादार था। वह परिसर में ही रहता था। गुरूद्वारे के पिछले हिस्से में बने कमरे में एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ किराये पर रहती थी। वह आसपास के घरों में साफ-सफाई कर परिवार का गुजर बसर करती थी। 15 जून की सुबह महिला रोज की तरह अपने काम पर चली गई।

घर पर उसकी 13 और तीन साल की बेटियां अकेली थी। उसका आठ साल का बेटा रिश्तेदार के घर गया हुआ था। इसी दौरान सेवादार परवान सिंह उनके कमरे में गया और बड़ी बेटी के साथ दुष्कर्म की कोशिश करने लगा। लेकिन विरोध के चलते वह नाकाम रहा। इस पर उसने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने उसकी तीन साल की छोटी बहन के साथ पहले दुष्कर्म किया और फिर उसे भी गला घोंटकर मौत के घाट उतार दिया।

कुछ देर बाद पुलिस ने आरोपित सेवादार को गिरफ्तार कर लिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तीन वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इसके बाद फॉरेंसिक जांच में आरोपित के सीमेन और दाढ़ी के बालों के नमूने की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। दुष्कर्म के दौरान बचाव में छटपटाहट के वक्त आरोपित की दाढ़ी के कुछ बाल बच्ची की मुट्ठी में फंस गए थे। इन्हें ही फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था।

पोक्सो की विशेष न्यायाधीश रमा पांडे की अदालत में मामले की सुनवाई चली। अभियोजन पक्ष की तरफ से 14 गवाह पेश किए गए। अदालत ने तीन रोज पहले सेवादार परवान सिंह को दुष्कर्म और हत्या का दोषी करार दिया था।

गुरूवार को अदालत ने उसे हत्या में मौत और पोक्सो एक्ट में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों ही अपराधों पर उस पर तीस-तीस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। विशेष लोक अभियोजक भरत सिंह नेगी ने बताया कि अदालत ने इसे रेयर ऑफ द रेयरेस्ट माना।