सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्वैच्छिक सेवानिवृति पर एक अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि स्वैच्छिक सेवानिवृति का अधिकार जीवन के अधिकार से बड़ा नहीं है। सरकार जनहित को ध्यान में रखते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृति की मांग ठुकरा सकती है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा व एस.अब्दुल नजीर की पीठ ने प्रदेश सरकार की अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने डाक्टरों की स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी स्वीकार करते हुए सेवानिवृत घोषित कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संशोधित फंडामेंटल रूल-56 की व्याख्या करते हुए कहा कि नियमों के तहत सरकार को स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी ठुकराने का अधिकार है। सरकार ने मानव जीवन की आवश्यकताओं और जनहित के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया है। डाक्टर मौलिक अधिकार के तहत सेवानिवृति के हक का दावा कर रहे हैं लेकिन ये अधिकार जीवन के अधिकार से बड़ा नहीं हो सकता। सेवानिवृति के अधिकार की व्याख्या सरकार द्वारा लोगों को स्वास्थ्य और पोषण उपलब्ध कराने के संवैधानिक दायित्व को साथ रख कर की जाएगी। रोजगार की आजादी, जनहित के आधीन है। नौकरी ज्वाइन करने के बाद इस अधिकार का दावा सिर्फ नियमों के मुताबिक ही किया जा सकता है।

स्वैच्छिक सेवानिवृति पर नियमों के मुताबिक ग्रेच्युटी, पेंशन आदि मिलता है, ऐसे ही जब कर्मचारी की सेवा की आवश्यकता होगी तो नियुक्ति अथारिटी को स्वैच्छिक सेवानिवृति अर्जी अस्वीकार करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि अगर इस तरह सभी डाक्टरों की सेवानिवृति की अनुमति दे दी जाएगी तो अव्यवस्था उत्पन्न हो जाएगी और सरकारी अस्पताल में कोई भी डाक्टर नहीं बचेगा।

कोर्ट ने कहा कि रूल 56 के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृति के नोटिस को तीन महीने बीतने पर सेवानिवृति स्वतरू प्रभावी नही होगी। नियुक्ति अथारिटी या तो नोटिस स्वीकार करेगी या फिर उसे अस्वीकार कर सकती है। कर्मचारी को स्वैच्छिक सेवानिवृति का संपूर्ण अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि पहले ही डॉक्टरों की कमी है। व्यवस्था को सक्षम वरिष्ठों के बगैर नहीं छोड़ा जा सकता। सरकारी अस्पताल में गरीब इलाज कराता है उन्हें खतरे में नहीं डाला सकता। भारत में सरकारी चिकित्सा सेवा गरीबों की जरूरतों को पूरा करती है अन्यथा इस धर्मार्थ कार्य का व्यवसायीकरण हो चुका है। इस स्थिति में लोगों को अच्छे डॉक्टरों की सेवा से वंचित नहीं किया जा सकता।

डॉक्टरों की कमी और इस पेशे के व्यवसायीकरण का ध्यान रखते हुए सरकार ने राज्य चिकित्सा सेवा की क्षमता बनाए रखने के लिए जो फैसला किया है वह नियम सम्मत है। संविधान के तहत हर व्यक्ति का मौलिक कर्तव्य है कि वह जीवित प्राणियों के प्रति दयालुता और मानवता रखे ताकि राष्ट्र लगातार ऊंचाइयों पर पहुंचे। सरकारी चिकित्सा सेवा से बड़े पैमाने पर कूच नहीं हो सकता जैसा इस मामले में दिखाई दे रहा है।

क्या था मामला
उत्तर प्रदेश में प्रांतीय मेडिकल सर्विस में वरिष्ठ पदों पर तैनात डा. अचल सिंह, डा. अजय कुमार तिवारी, डा. राजेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, डा. राजीव चौधरी ने स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी दी। जब सरकार ने उस पर आदेश नहीं किया तो डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में याचिका कर स्वैच्छिक सेवानिवृति मांगी जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। सरकार ने आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार का कहना था कि डॉक्टरों की कमी को देखते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी ठुकराई गई है।

आगरा की पूर्व मेयर बेबी राम मौर्य बनी उत्तराखंड की राज्यपाल

उत्तराखंड के सातवें राज्यपाल के रूप में उत्तर प्रदेश की बेबी राम मौर्य को नियुक्ति मिली है। बेबी राम मौर्य यूपी में भाजपा नेता होने के साथ ही वहां महिला आयोग से जुड़ी हुयी है। विदित हो कि बेबी राम मौर्य आगरा में वर्ष 1995 में मेयर रह चुकी है।

बेबी रानी मौर्य को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है। उत्तराखंड में केके पाल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद बेबी राम मौर्य को राज्यपाल बनाया गया। वहीं लगभग साढ़े तीन दशक बाद जम्मू एवं कश्मीर को राजनीतिज्ञ राज्यपाल मिला है। बिहार के मौजूदा राज्यपाल सत्यपाल मलिक को जम्मू एवं कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया है। चार राज्यपालों के राज्य बदलने के साथ ही तीन नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं। नए नियुक्त राज्यपालों में उत्तर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन, सत्यदेव नारायण आर्य और बेबी रानी मौर्य शामिल हैं।

वर्ष 1984 में जगमोहन के राज्यपाल बनने के बाद जम्मू एवं कश्मीर में कभी किसी राजनीतिज्ञ को राज्यपाल नियुक्त नहीं किया गया। आतंकवाद से ग्रस्त और कानून-व्यवस्था की समस्या से जूझ रहे राज्य में सेवानिवृत नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों को ही राज्यपाल नियुक्त किया जाता रहा है। 31 अगस्त को 10 साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे एनएन वोहरा पूर्व नौकरशाह हैं। साढ़े तीन दशक बाद राजनीतिज्ञ को राज्यपाल नियुक्त कर केंद्र सरकार ने राज्य में राजनीतिक प्रक्रिया को तेज करने का संकेत दिया है।

लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल्द ही जम्मू एवं कश्मीर में पंचायतों और स्थानीय निकायों का चुनाव कराने की घोषणा की थी। इससे निचले स्तर पर आम जनता को राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने का मौका मिलेगा। केंद्र की ओर से नियुक्त वार्ताकार पूर्व आइबी प्रमुख दिनेश्वर शर्मा पहले से राज्य में सभी वर्गो से संपर्क कर बातचीत का सिलसिला शुरू कर चुके हैं। उम्मीद की जा रही है कि सत्यपाल मलिक आतंकवाद और अलगाववाद से त्रस्त आम लोगों की आवाज को तवज्जो देंगे।

सत्यपाल मलिक की जगह अब उत्तर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन बिहार के राज्यपाल होंगे। वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नजदीकी माने जाते रहे हैं और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से पहले लखनऊ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। सत्यदेव नारायण आर्य को हरियाणा का नया राज्यपाल बनाया गया है। हरियाणा के मौजूदा राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को त्रिपुरा का राज्यपाल बनाया गया है और वहां के मौजूदा राज्यपाल तथागत राय को मेघालय भेज दिया गया है। जबकि मेघालय के मौजूदा राज्यपाल गंगा प्रसाद को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है।

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि गंगा में हुयी प्रवाहित

हर की पौड़ी गंगा में अटल जिंदाबाद के साथ हजारों की संख्या में पूर्व पीएम व भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि उनकी दत्तक पुत्री नमिता ने प्रवाहित की। इस दौरान स्व. अटल जी के परिजनों के अलावा गृह मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और सांसद रमेश पोखरियाल निशंक के साथ ही उत्तराखंड सरकार के मंत्री, पार्टी के कई बड़े नेता, कार्यकर्ता और साधु-संत उपस्थित थे।

वाजपेयी के दामाद रंजन भट्टाचार्य, पुत्री नमिता, नातिन निहारिका, भांजा सांसद अनूप मिश्रा और अन्य परिजन भी पहुंचे। यहां से सभी लोग दो हेलीकॉप्टर में अस्थि कलश के साथ हरिद्वार के भल्ला इंटर कॉलेज के मैदान पर उतरे। वर्ष 1996 में इसी मैदान पर अटल जी की जनसभा में हजारों लोग पहुंचे थे।

करीब पौने बारह बजे अस्थि कलश को फूलों से सजे सेना के ट्रक पर रखा गया। कलश के साथ परिजनों के अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, हरिद्वार के सांसद रमेश पोखरियाल निशंक भी ट्रक में सवार हुए।

हरिद्वार के भल्ला इंटर कॉलेज से विसर्जन स्थल हरकी पैड़ी तक चार किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब डेढ़ घंटे का वक्त लगा। यात्रा मायापुरी, ललतारौ पुल, कोतवाली, अपर रोड होते हुए करीब एक बजे हरकी पैड़ी पहुंची। इस दौरान लोग अस्थि कलश की एक झलक पाने को बेताब दिखे। सड़क पर उमड़े सैलाब के अलावा लोग घरों की छतों पर एकत्र होकर लगातार पुष्प वर्षा कर अपने प्रिय नेता को श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे थे।

अस्थि विसर्जन के लिए श्री गंगा सभा की ओर से पहले ही सभी तैयारियां कर ली गईं थीं। ठीक एक बजे वाजपेयी परिवार के पुरोहित पंडित अखिलेश त्रिपाठी और श्री गंगा सभा के आचार्य हरिओम जैवाल ने मंत्रोच्चारण के साथ कर्मकांड आरंभ किए। करीब 15 मिनट तक चली पूजा के बाद विधि विधान के साथ अस्थियां गंगा में प्रवाहित कर दी गईं।

अस्थि विसर्जन के मद्देनजर पुलिस ने हरकी पैड़ी क्षेत्र को जीरो जोन घोषित कर दिया था। प्रातरू कालीन गंगा आरती के बाद क्षेत्र में आम जन की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी। सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस के करीब एक हजार जवान तैनात किए गए थे।

नहीं हो रही कम गौहरीमाफी के लोगों की दुश्वारियां

गौहरीमाफी में नदी का जलस्तर कुछ कम हो गया है। जिस कारण लोग नदी में आर-पार आ जा रहे है। मगर, कई जगहों पर गहरे गड्ढों के कारण जोखिम अभी भी बरकरार है। मगर, इसके बावजूद यहां लोग जान जोखिम में डालकर राशन व सिलेंडर सिर पर रखकर पानी के बीच में ही आ जा रहे है।

शुक्रवार को गांव की तरफ आ रही नदी की धारा को पूरी तरह डायवर्ट कर दिया गया। इसका असर यह हुआ कि लोग पैदल नदी से आर-पार जा पा रहे हैं। लेकिन रपटे बहने व सड़के टूट जाने से वाहनों का आवागमन शुरू नहीं हो पाया। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता एसएस ममगाईं ने बताया कि जेसीबी से लगातार वर्क किया जा रहा है। फिलहाल गांव की तरफ आ रही नदी की धारा को डायवर्ट तो कर दिया गया है लेकिन यह अस्थायी उपाय है। अभी राहत कार्य जारी रहेंगे। जल्द ही तार-जाल भी डाले जाएंगे ताकि कटाव को रोका जा सके।

वहीं मौसम साफ रहने से लोगों को राहत जरूर मिली है लेकिन बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं। नदी का जलस्तर घटने से चारों तरफ बाढ़ के गहरे जख्म साफ दिखाई देने लगे हैं। सबसे ज्यादा नुकसान सड़के व खेतों को पहुंचा है। नदी का जलस्तर घटते ही लोग दैनिक जरूरत का सामान जुटाने निकल पड़े। सड़कें व रपटे टूटे होने की वजह से वाहनों का आवागमन अभी संभव नहीं है। लोगों ने सिर राशन व ईंधन सिर पर रख कर अपने घर तक पहुंचाया। बता दें कि बीते 16 दिन से बाढ़ में घिरे गौहरीमाफी के 300 परिवारों का तहसील से सड़क सम्पर्क पूरी तरह कटा हुआ है।

गांव के आंतरिक मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। तिब्बती कालोंनी के पास सड़क व रपटा बह गया है। आनंदमयी स्कूल के पास टिहरी फार्म एक नंबर को जोड़ने वाला कांजवे और बारात घर के पास पुलिया व सड़क टूटी हुई है। कई खेत नदीं में समा गए है। कई घरों के भीतर व आंगन में मिट्टी व मलवा जमा हो गया है। वहीं एसडीआरएफ की टीम भी वापस लौट गई। ग्राम प्रधान सरिता रतूड़ी ने बताया कि मौसम साफ रहने से लोगों को राहत मिली है। लेकिन सड़कें टूटी हुई हैं। इनकी जल्द मरम्मत की जरूरत है, ताकि वाहनों की आवाजाही शुरू हो सके। उन्होंने बताया कि बिजली के 18 पोल बह गए हैं। हालांकि आपूर्ति बनाए रखने के लिए ऊर्जा निगम ने वैकल्पिक इंतजाम किए हैं।

अटल जी के जाने से एक युग का अंत हो गयाः नमो

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरूवार को निधन हो गया। भारत रत्न अटल जी का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली रहा कि हर कोई चाहे वह कोई भी राजनैतिक संगठन हो या फिर कोई आम नागरिक। सभी को उनके जाने का गहरा सदमा लगा है। उन्होंने दिल्ली स्थित एम्स में अंतिम सांसे ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के देहावसान से उत्तराखंड भी शोक में डूब गया। शासन ने सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। श्रद्धांजलि स्वरूप शुक्रवार राज्य में सरकारी कार्यालय व शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर कहा कि उनका जाना पिता के खोने जैसा है। मां भारती के सच्चे सपूत थे अटल जी। उनका विराट व्यक्तित्व था। अटल जी के जाने से एक युग का अंत हो गया है।

वाजपेयी के निधन पर प्रख्यात गायिका लता मंगेशकर ने कहा, मुझे ऐसा लगता है कि एक साधु पुरुष चला गया है। वह अच्छे लेखक और कवि थे। लोग उनका भाषण सुनने के लिए तरसते थे, वह एक सच्चे और अच्छे इंसान थे। उन्होंने कहा, वाजपेयी के निधन पर मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा।

वे पिछले दो महीने से ज्यादा समय से एम्स के बिस्तर पर थे और मौत से उनकी ‘ठनी’ हुई थी, हालांकि आज शाम पांच बजकर पांच मिनट पर उन्होंने अलग रास्ता चुना और ‘काल के कपाल पर लिखकर’ वे इस दुनिया से कूच कर गए। उनके खुद के शब्दों में ‘मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं’।

तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी अस्वस्थता के चलते लंबे समय से सार्वजनिक जीवन से दूर थे। वे डिमेंशिया नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। 2009 से ही वे व्हीलचेयर पर थे, देशवासियों ने उन्हें अंतिम बार 2015 में 27 मार्च को देखा, जब तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भारत माता के इस सच्चे सपूत को भारत रत्न से सम्मानित करने उनके आवास पर पहुंचे।

दो महीने पहले वाजपेयी की तबीयत और ज्यादा खराब हो गई। यूरिन में इन्फेक्शन के चलते 11 जून को उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी और देश की अलग-अलग पार्टियों के नेता और अनेक गणमान्य हस्तियां उनका हालचाल जानने पहुंचीं. उनके समर्थक लगातार उनकी सलामती की दुआ कर रहे थे, हालांकि कुदरत को शायद कुछ और मंजूर था।

अटल बिहारी वाजपेयी देश की सक्रिय राजनीति में पांच दशक से ज्यादा समय तक रहे। वे देश के पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री थे। उन्होंने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1952 में लड़ा, हालांकि पहली जीत उन्हें 1957 में मिली। तब से 2009 तक वे लगातार संसदीय राजनीति में बने रहे। 1977 में वे पहली बार मंत्री बने, जबकि 1996 में वे 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री भी रहे।

हालांकि 1998 में उन्हें एक बार फिर पीएम बनने का मौका मिला। उनकी ये सरकार भी सिर्फ 13 महीने चली लेकिन इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन के बहुमत वाली सरकार बनी और वाजपेयी ने पीएम के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया। वर्ष 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में वे लखनऊ से लोकसभा सदस्य चुने गए।

शहीदों को सलाम कर मनाया स्वतंत्रता दिवस

देशभर में आज स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है। देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में महापुरूषों के नक्शे कदम पर चलने का संकल्प लिया जा रहा है। महापुरूषों की झांकी के माध्यम से देश के लिये मर मिटने वालों को नमन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी लाल किले में तिरंगा फहराया। साथ ही देश की जनता को संबोधित किया।

पीएम ने कहा कि सभी भारतीयों को खाना, स्वास्थ्य, कनेक्टीविटी, कुशलता, स्वच्छता, सुरक्षा, जल मिले इसलिए वॉटर फॉर ऑल, सैनिटेशन फॉर ऑल, स्किल फॉर ऑल, हेल्थ पर ऑल, इंश्योरेंस फॉर ऑल, कनेक्टीविटी फॉर ऑल के मंत्र के साथ चलेंगे। उन्होंने आगे कहा कि देश में टैक्स न देने की हवा बनाई जा रही है, ईमानदार करदाताओं के टैक्स पर देश चलता है, डायरेक्ट टैक्स देने वालों की संख्या पौने सात करोड़ तक है।

प्रधानमंत्री बोले भारत को हमारे वैज्ञानिकों पर गर्व है, जो अपने शोध में उत्कृष्ट हैं और नवाचार में सबसे आगे हैं। आज मेरा सौभाग्य है कि इस पावन अवसर पर मुझे देश को एक और खुशखबरी देने का अवसर मिला है। साल 2022, यानि आजादी के 75वें वर्ष में और संभव हुआ तो उससे पहले ही, भारत अंतरिक्ष में तिरंगा लेकर जा रहा है। ऐसा करने वाल भारत चौथा देश बनेगा।

उन्होंने कहा, ‘मैं आज इस मंच से मेरी कुछ बहादुर बेटियों को खुशखबरी देना चाहता हूं। भारतीय सशक्त सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए नियुक्त महिला अधिकारियों को पुरुष समकक्ष अधिकारियों की तरह पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा स्थायी कमीशन देने की घोषणा करता हूं। अपनी उपलब्घ्धियों को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि हमने ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया, दिक्कतों के बावजूद जीएसटी लागू किया और सैनिकों के हित में वन रैंक वन पेंशन योजना लेकर आए। जन आरोग्घ्य योजना का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आगामी 25 सितंबर से देश में यह योजना लागू कर दी जाएगी। महिलाओं की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा कि खेत से लेकर खेल तक महिलाएं हमारा नाम ऊंचा कर रहीं हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में जय हिंद, भारत माता की जय व वंदे मातरम् के नारे लगाए।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने परेड ग्राउंड में तिरंगा फहराया और प्रदेश वासियों को बधाई दी। इस इस दौरान सीएम ने कहा कि उत्तराखंड वीरभूमि है। यहां हर परिवार से औसतन एक व्यक्ति सेना या सुरक्षा बलों में हैं। उत्तराखंड में पहले से ही शहादत की परंपरा रही है। वहीं सीएम ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए हैं। लोगों की सोच और कार्य संस्कृति बदली है। जो उत्तराखंड के विकास को गति देगी।

मुख्यमंत्री ने परेड ग्राउंड में तिरंगा फहराया और प्रदेश वासियों को बधाई दी। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड वीरभूमि है। यहां हर परिवार से औसतन एक व्यक्ति सेना या सुरक्षा बलों में हैं। उत्तराखंड में पहले से ही शहादत की परंपरा रही है। सीएम ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए हैं। लोगों की सोच और कार्य संस्कृति बदली है। जो उत्तराखंड के विकास को गति देगी। बताया कि राज्य की जीडीपी में छह प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई है और प्रति व्यक्ति आय 16 हजार से ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने कहा ग्रोथ सेंटर्स की स्थापना से गांवो में रोजगार बढ़ा है। अब तक 103 ग्रोथ सेंटर्स स्थापित किए जा चुके हैं। सरकार लगातार किसानों की आय को दोगुना करने के प्रयास कर रही है।

दो महीने में ऋषिकेश का तीसरा जवान हुआ सीमा पर शहीद

देश की सीमा पर उत्तराखंड से शहादत देने वाले कभी पीछे नहीं हटते। रविवार को भी उत्तराखंड का एक जवान शहीद हो गया। ऋषिकेश निवासी प्रदीप रावत सीमा पर बारूदी सुरंग में विस्फोट होने के बाद घायल हो गये थे। जिन्हें सैंन्य उपचार के लिये ले जाया गया। जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।

जानकारी के मुताबिक प्रदीप रावत (30 वर्ष) पुत्र कुंवर सिंह रावत निवासी अपर गंगानगर ऋषिकेश, गढ़वाल राइफल की चौथी बटालियन में तैनात थे। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में तैनात थे। रविवार दोपहर करीब 12 बजे एक सैन्य अभियान के दौरान सीमा पर दुश्मन की ओर से बिछाई गई बारूदी सुरंग के फट जाने से प्रदीप रावत गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें सैन्य वाहन से पहले नजदीकी अस्पताल और फिर हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया।

शाम करीब चार बजे हायर सेंटर पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शहीद प्रदीप रावत मूल रूप से बैराई गांव पट्टी दोगी टिहरी गढ़वाल के रहने वाले हैं। शहीद प्रदीप रावत के पिता कुंवर सिंह रावत सेना से रिटायर्ड हैं, वर्तमान में वह एम्स में कार्यरत है। शहीद प्रदीप रावत तीन बहनों के इकलौते भाई थे। करीब डेढ़ साल पहले ही प्रदीप रावत की शादी हुई थी। वह जनवरी में अपनी मैरिज एनिवर्सरी में छुट्टी आने वाले थे।1उनके चाचा वीर सिंह रावत ने बताया कि सेना के कमांोडग ऑफिसर ने उन्हें फोन पर उनके शहीद होने की जानकारी दी।

प्रदीप रावत की शहदात की सूचना के बाद घर पर कोहराम है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने शहीद के घर पर पहुंचकर उनके पिता कुंवर सिंह रावत को सांत्वना दी। पूर्व क्षेत्रीय सभासद बृजपाल राणा ने बताया कि आर्मी हेड क्वार्टर द्वारा शहीद के घर पर विधिवत सूचना दे दी गई है। सूचना के बाद से ही परिवार व आसपास के क्षेत्र में कोहराम मच गया है। परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। आस पास क्षेत्रों में दो महीने में तीसरी शहादत होने पर माहौल गमगीन है।

त्रिवेंद्र सरकार का अहम निर्णय, धर्मान्तरण पर होगी ये सजा

अब राज्य में जबरन धर्मान्तरण किया गया तो दंडात्मक कार्यवाही होगी। कैबिनेट ने इस नियमावली पर अपनी मोहर लगा दी है। त्रिवेंद्र सरकार की मौजूदगी में हुयी बुधवार को कैबिनेट की बैठक में धर्म स्वतंत्रता एक्ट पास किया गया। धर्म परिवर्तन के मामले में आरोपित व्यक्ति को दोषमुक्त साबित करने के लिए खुद प्रमाण देने होंगे।

त्रिवेंद्र सरकार ने बीते मार्च माह में गैरसैंण विधानसभा सत्र में उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता विधेयक को पारित कराने के बाद उसे एक्ट की शक्ल दी थी। अब उक्त एक्ट की नियमावली पर मंत्रिमंडल की मुहर लग गई। सचिवालय में बुधवार को मंत्रिमंडल के फैसलों को काबीना मंत्री प्रकाश पंत ने ब्रीफ किया। उन्होंने बताया कि धर्म स्वतंत्रता एक्ट की नियमावली बनने के बाद इसका क्रियान्वयन सुनिश्चित हो जाएगा। अब धर्म परिवर्तन के इच्छुक व्यक्ति को पहले अपने स्थायी निवास स्थल क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी। जिला मजिस्ट्रेट ऐसी सूचनाओं की 15 दिन के भीतर जांच कराएगा।

सात दिन में होगी जांच

इस जांच में यह भी देखा जाएगा कि धर्म परिवर्तन जबरन, प्रलोभन, उत्पीडन या कपटपूर्ण अथवा विवाह के जरिये किया जा रहा है अथवा नहीं। बिना सूचना के किसी ने भी धर्म परिवर्तन किया तो ऐसे मामलों की जांच होगी। जिला मजिस्ट्रेट ऐसे मामलों में सात दिन के भीतर जांच कराएंगे। सरकार ने नियमावली में यह प्रावधान भी किया है कि प्रत्येक जिलाधिकारी को हर महीने की दस तारीख तक पिछले माह के दौरान ऐसे मामलों की रिपोर्ट सरकार को देनी होगी।

यह है सजा का प्रावधान

यदि धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से विवाह किया गया तो उस धर्म परिवर्तन को अमान्य घोषित किया जाएगा। धर्म परिवर्तन के लिए जिला मजिस्ट्रेट या कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक माह पहले शपथपत्र देना होगा। धर्म परिवर्तन के लिए समारोह की भी पूर्व सूचना देनी होगी। सूचना नहीं देने की स्थिति में इसे अमान्य करार दिया जाएगा। धर्म स्वतंत्रता कानून का उल्लंघन होने की स्थिति में तीन माह से एक वर्ष की सजा होगी। अनुसूचित जाति-जनजाति के मामले में यह छह माह से दो वर्ष होगी।
धर्म परिवर्तन के एवज में किसी तरह का दान या अंशदान लेन-देन का मामला सामने आया तो जांच के बाद ऐसी राशि जब्त की जाएगी। साथ ही इसके लिए दोषी संस्था, व्यक्ति अथवा पुजारी को दंडित किया जाएगा। जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में जेल जाने का प्रावधान भी किया गया है।

आखिर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह क्यों भड़क उठे? जाने क्या है सच

भोपालपानी बड़ासी पुल निर्माण कार्य को देखकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह को गुस्सा आ गया। उन्होंने निर्माणाधीन पुल की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुये विभागीय अधिकारियों को फटकार लगाई। साथ ही लोक निर्माण विभाग को तत्काल जांच के आदेश दिए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को देहरादून में रायपुर – थानौ मार्ग के मध्य निर्माणधीन सौंडा-सरौली, बडासी भोपालपानी (मत्स्य पालन) विभाग के समीप बन रहे पुल का काफी मौके पर स्थलीय निरीक्षण किया। भोपालपानी के पुल की सड़क खस्ता हालत के साथ पुल की दीवारें दीवारों में पड़ी दरारों को देखकर गुस्से में नजर आए। उन्होंने मौके पर मौजूद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों व कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों को कड़ी फटकार लगाई व प्रमुख अभियन्ता लोक निर्माण विभाग को मामले की तत्काल जांच के आदेश दिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि क्या उनके ऊपर निर्माण कार्य को शीघ्र समाप्त करने का कोई दवाब था। इस प्रकार की घटनाओं में संलिप्त अधिकारी, कार्मिक व ठेकेदार सख्त कार्यवाही से बच नही सकते। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यो में किसी भी प्रकार की लापरवाही व गुणवता में गिरावट बर्दाश्त नही की जाएगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस दौरान उपस्थित स्थानीय जनप्रतिनिधियों व लोगो से भी पुल व सड़कों की गुणवत्ता से संबंधित स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। मालूम चला कि पुल के ऊपर सड़क के घटिया निर्माण कार्य को छिपाने के लिए कार्यदाई संस्था के ठेकेदार द्वारा जेसीबी से सड़क की खुदाई कर दी गई थी। जिसको देखकर मुख्यमंत्री भी गुस्से में नजर आए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने रायपुर-थानो मार्ग पर सौंडा सरौली पुल का भी विस्तृत स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यो की अद्यतन जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों को सौंडा सरौली पुल को समय पूरा करने तथा निर्माण कार्यो की गुणवता बनाए रखने के निर्देश भी दिए। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि उक्त पुल का निर्माण कार्य आगामी 30 सितम्बर तक पूरा कर लिया जाएगा।

पौधारोपण कार्यक्रम को सफल बनाने में आमजन की भूमिका अहमः त्रिवेन्द्र

देवभूमि उत्तराखंड पर्यावरण को सुरक्षित करने में अपनी भूमिका बखूबी तरह से निभा रहा है। राज्य में विभिन्न जगहों पर हरेला महोत्सव के अंतर्गत पौधारोपण कार्यक्रम चलाये जा रहे है। आपसी जन सहभागिता के कुछ भी काम सफल नहीं होता। इसलिये उन्होंने सभी नागरिकों से उत्तराखंड को हरा-भरा बनाये रखने में सहयोग करने की अपील की।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार को भोगपुर (बागी) के कुआंखाला मे उत्तराखंड वन विभाग के तत्वधान में वह विभिन्न सामाजिक संगठनों, विद्यालयो के स्कूली छात्र छात्राओं के साथ थानों रेंज मे वृहद पौधारोपण कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष चिदानंद स्वामी, पर्यावरणविद् हैस्को के संस्थापक डॉ अनिल जोशी के साथ बेलपत्री, चंदन, रुद्राक्ष, पीपल आदि के पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण का आव्हान भी किया। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष मुनि स्वामी चिदानंद ने कहा कि वृक्षों से मनुष्य का प्राचीन समय से नाता रहा है। इसलिए इनकी रक्षा करना हमारा धर्म भी है। उन्होंने कहा कि पेड़ पौधे प्रकृति के बीच संतुलन बनाने के साथ हमारे प्राण तत्व भी है।

पर्यावरणविद् हैस्को के संस्थापक डॉक्टर अनिल जोशी ने कहा कि पेड़ पौधे सुरक्षित रहेंगे। तभी हमारा जीवन व पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। ग्लेशियर भी सुरक्षित रहेंगे।

प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड जयराज सिंह ने कहा कि विभाग पूरे प्रदेश में पौधारोपण कार्यक्रम को बढ़ावा दे रहा है। वन संरक्षक राहुल सिंह, प्रभारी डीएफओ भारत भूषण मर्तोलिया, थानों रेंज अधिकारी डॉक्टर उदय नंद गौड ने भी पौधारोपण का आह्वान किया। पौधरोपण कार्यक्रम में श्री गुरु रामराय विद्यालय भोगपुर, चार्ल्स बेन स्कूल, दून भवानी इंटरनेशनल विद्यालय, राजकीय इंटर कॉलेज रानीपोखरी, आर्यन पब्लिक स्कूल, शिशु विद्या मंदिर व इको टास्क फोर्स के जवानों ने भी पौधारोपण कार्यक्रम में शिरकत की।