पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान वर्दी में रहेंगेः एसएसपी

देहरादून जिले का चार्ज संभालते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अरुण मोहन जोशी ने थाना और चौकी प्रभारियों के खिलाफ कड़ा रूख अख्तियार किया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो थाना और चौकी प्रभारी घर बैठे ही काम कर रहा है, वह दूसरी जगह पोस्टिंग तलाश लें। इसके अलावा तिराहे, चौराहे से लेकर भीड़ वाले इलाकों में हर वक्त पुलिस फोर्स को तैनाती के निर्देश दिए।

राजधानी के एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने कार्यभार ग्रहण करने के दूसरे दिन थानेदारों के पेंच कसने शुरू कर दिए। रविवार को सभी थानेदारों को लिखित और मौखिक रूप से आदेश जारी किए गए कि घर से थाना-चौकी नहीं चल सकती है। उन्होंने ड्यूटी के दौरान वर्दी के साथ तैनात रहने के निर्देश दिए हैं। एसएसपी ने कहा कि राजधानी के कुछ थाना-चौकी इंचार्ज आरामतलब नौकरी कर रहे हैं। इनकी सूचना उनके पास पहले से मौजूद है। उन्होंने सभी इंचार्ज को थाना-चौकी से बाहर निकलकर गश्त, चेकिंग पर रहने के निर्देश दिए। शहर में पुलिस की मौजूदगी शत फीसद हो, इसके लिए ट्रैफिक और थाना पुलिस को समन्वय बनाकर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए।

थानेदारों और चौकी इंचार्ज की जीपीएस लोकेशन को भी अपडेट रखने के निर्देश दिए हैं। इसकी जिम्मेदारी एसपी सिटी श्वेता चौबे को सौंपी गई है। एसएसपी ने सीसीटीवी कैमरों और औचक निरीक्षण से भी मॉनिटरिग करने की बात कही। ताकि ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर आपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण लग सके।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने किया संगंध पौध केंद्र के लोगो का विमोचन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को सचिवालय में कृषि एवं उद्यान विभाग की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कृषि एवं उद्यान विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि सीएम डेशबोर्ड के अन्तर्गत विभिन्न क्षेत्रों में विभागों को प्रतिमाह जो लक्ष्य मिला है, वह लक्ष्य पूर्ण किया जाय। इसके लिए संबधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना जरूरी है। 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने के लिए हर संभव प्रयास किये जायें। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने संगंध पौध केन्द्र के लोगो का विमोचन भी किया।

कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि किसानों को जो मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किये जा रहे हैं, उनका सही इस्तेमाल हो। विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में इस बात का विशेष ध्यान दिया जाय कि किसानों को इसका लाभ हो। यह सुनिश्चित किया जाय कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा के लिए जो क्लेम हो रहें हैं, उनका भुगतान जल्द हो। लघु व सीमांत कृषकों तक कृषि यंत्रों की पहुंच हो, इसके लिए फार्म मशीनरी बैंक की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि एकीकृत कृषि को बढ़ावा दिया जाय। परम्परागत फसलों मण्डुवा, सॉवा, रामदाना, गहत के उत्पादन में कैसे वृद्धि की जा सकती है, इसके लिए प्रयास किये जाये। कृषकों को इसके लिए प्रोत्साहित भी किया जाय। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत लाभार्थियों के पंजीकरण की जानकारी भी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका भी आकलन किया जाए कि जमीनी स्तर पर कृषि एवं उद्यान के क्षेत्र में रोजगार की उपलब्धता क्या रही उन्होंने उद्यान विभाग में रिक्त पदों को भरने से पूर्व कृषि एवं उद्यान विभाग में कुल पदों की स्थिति की जानकारी करने के बाद सरप्लस पदों पर भर्ती की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अन्तर्गत लगभग 85 प्रतिशत लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है। परम्परागत कृषि योजना के तहत सभी 3900 कलस्टरों में कार्य शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्तर्गत इस वर्ष 69641 के क्लेम का भुगतान किया गया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 5.50 लाख कृषकों को 165.97 करोड़ रूपये का वितरण किया जा चुका है।

उद्यान विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि रेशम के उत्पादन व इससे बनने वाले उत्पादों के लिए ग्रोथ सेंटर विकसित किया जाए। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। कृषकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सचल दलों को मजबूत करना जरूरी है। कृषि व बागवानी को वन्यजीवों के नुकसान से बचाने के लिए कारगर उपाय तलाशे जाय। सगन्ध उत्पादों, औषधीय व औधनिक फसलों के उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि के प्रयास किये जाय।

दो बच्चे पैदा होने पर उचित समयान्तर के लिए जागरूकता अभियान जरूरी

मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत एवं महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री भारत सरकार स्मृति जुबिन ईरानी ने अधिकारियों के साथ महिला सशक्तिकरण, बाल विकास तथा तथा पोषण अभियान के संबंध में बैठक ली।

केन्द्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने कहा कि पोषण योजना, आगंनबाड़ी केन्द्रों में पेयजल व्यवस्था व टॉयलेट की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाय। अतिकुपोषित व कुपोषित बच्चों को उचित पौष्टाहार प्राप्त हो, जिससे वे सामान्य श्रेणी में आ सके। पौष्टिक आहार के लिए कलेण्डर बनाया जाय व इसे जनप्रतिनिधियों के साथ शेयर किया जाये। एनीमिया को रोकने के लिए टी-3 रणनीति पर ध्यान दिये जाने पर जोर दिया गया। दो बच्चों के पैदा होने के उचित समयान्तर हो इस दिशा में जागरूकता अभियान चलाया जाना जरूरी है, ताकि बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास सही हो।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जिन जनपदों में बाल लिंगानुपात कम है अधिकारी ऐसे जनपदों का भ्रमण कर और बैठक कर लिंगानुपात कम होने के कारणों का पता लगायें। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत राज्य व जिला स्तरीय समितियों की बैठक समय-समय पर आयोजित की जाय।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में चार वन स्टॉप स्टॉप सेंटर बन चुके हैं, शेष 09 सेंटर भी 15 अगस्त से पूर्व शुरू किये जायेंगे। स्पान्सर स्कीम के तहत लाभार्थियों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके, इसके लिए ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में वार्षिक आय की सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया गया। स्वधार गृह योजना के तहत मानसिक विक्षिप्त महिलाओं को आच्छादित करने का भी अनुरोध किया गया।

भारत की तीनों सेंनाएं आज हर मोर्चें पर अग्रिम स्थिति मेंः त्रिवेन्द्र

शौर्य दिवस के अवसर देहरादून के गांधी पार्क में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कारगिल शहीद स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित कर कारगिल शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की रक्षा के लिए हमारे जवानों ने हमेशा अदम्य साहस का परिचय दिया। उत्तराखण्ड के जवानों ने देश की रक्षा के लिए सभी युद्धों में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। भारत की थल सेना, वायु सेना व नौसेना आज हर मोर्चे पर अग्रिम स्थिति में है। देश को सुरक्षित रखने के लिए शास्त्रों का ज्ञान होना चाहिए वहीं देश की सीमाएं सुरक्षित रखने के लिए शस्त्रों से भी मजबूत होना जरूरी है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि सैनिकों व पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रदेश स्तर पर अपर मुख्य सचिव नोडल आफिसर होंगे। सैनिकों के लिए सचिवालय प्रवेश हेतु उनका सेना का पहचान पत्र मान्य होगा। उन्हें सचिवालय प्रवेश हेतु अलग से लाईन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। प्रत्येक जनपद में सैनिकों व पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए अपर जिलाधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाईन नम्बर 1905 पर कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, जब तक शिकायतकर्ता संतुष्ट न हो तब तक शिकायत का निस्तारण नहीं माना जायेगा। सीएम हेल्पलाईन नम्बर की प्रत्येक माह मुख्य सचिव समीक्षा करते हैं। समय-समय पर मुख्यमंत्री स्वयं इसकी समीक्षा करेंगे।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखण्ड में सैन्य धाम को पांचवें धाम की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि देहरादून में एक विशाल एवं भव्य शौर्य स्थल बनाया जायेगा। इस शौर्य स्थल में देश की रक्षा के लिए अपना बलिदान देने वाले सैनिकों का नाम होगा। यह शौर्य स्थल आधुनिक होगा व यहां पर अनेक प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शौर्य स्थल के लिए देहरादून में भूमि चिन्हित कर ली गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों व पूर्व सैनिकों को हर संभव मदद करेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने पदक विजेता सैन्य अधिकारियों, सैनिकों, सैनिकों के परिवारजनों व वीरनारियों को सम्मानित भी किया।

सीएम बोले, पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकने को आर्थिक स्थिति मजबूत करने के हो रहे प्रयास

मुख्यमंत्री आवास स्थित सभागार में राज्य के विभिन्न विभागों, निगमों व संस्थानों के दायित्वधारियों की बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रदेश के समग्र विकास के लिये राज्य सरकार की ओर से की गई पहल को धरातल पर लाने में सभी को सहयोगी बनना होगा। सरकार की ओर से जनहित के लिये जो कार्यक्रम व लक्ष्य तय किये हैं उनका लाभ आम जनता तक पहुंचे इसके लिये हमें समेकित प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के साथ ही आर्थिक स्थिति की मजबूती के लिये कारगर प्रयास किये जा रहे हैं, इसके लिये पर्यटन के क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देकर इसे आर्थिकी का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। राज्य में सर्विस सेक्टर को बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्यटन, वेलनेस योगा व छोटे-छोटे कुटी उद्योगों से राज्य की आय में वृद्धि के प्रयास किये जा रहे हैं। आज हमारी प्रति व्यक्ति आय 1.90 लाख है, जो राष्ट्रीय औसत 1.30 लाख से अधिक है। पर्वतीय क्षेत्रों के पिछडेपन को दूर करने के लिये जिलों में भी प्रति व्यक्ति आये को बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं ताकि पूरे राज्य में विकास को गति मिल सके।

– छोटे किसानों को एक लाख तथा समूहों को 5 लाख तक ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वरोजगार के प्रति अधिक से अधिक लोग प्रेरित हों इसके लिए एग्रोबेस उद्योगों व आजीविका मिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

– राज्य की महिलायें विभिन्न स्वरोजगार की योजनाओं में भागीदारी निभा रही हैं। इस वर्ष महिलाओं ने केदारनाथ में 2 करोड़ का प्रसाद बिक्री किया। भोजन व्यवसाय में भी वे आगे आ रही हैं। ग्राम लाइट योजना भी महिला समूहों की आर्थिकी को मजबूत कर रही है।

– स्थानीय लोगों को विभिन्न कार्यों के ठेके के साथ ही छोटी ऊर्जा योजनायें आवंटित की गई हैं। कीड़ा जड़ी एवं नशामुक्त हेम्प की खेती के लाइसेंस दिये जा रहे हैं। इससे बंजर भूमि भी उपजाऊ होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच बद्री, पांच केदार, पांच प्रयाग यात्रा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में पर्वतीय क्षेत्रों में 600 करोड़ के सोलर ऊर्जा प्रोजेक्ट स्थानीय लोगों को आवंटित किये गये हैं। पहाड़ों के अनुकूल उद्योगों की भी स्थापना की जा रही है। इससे उन क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ ही पलायन को रोकने में मदद मिलेगी।

पैसा कमाने के लिए शराब बनाया जाना उत्तराखंड के लिए आत्महत्याः खंडूड़ी

देवप्रयाग के नजदीक और टिहरी में शराब के बॉटलिंग प्लांट को मंजूरी दिए जाने के फैसले के खिलाफ वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी भी उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि पैसा कमाने के लिए शराब बनाया जाना उत्तराखंड के लिए आत्महत्या जैसी बात है। देवप्रयाग से करीब 36 किलोमीटर दूर शराब के बॉटलिंग प्लांट को मंजूरी दी गई और वहां बॉटलिंग शुरू भी हो गई है। इसके अलावा टिहरी में भी एक कंपनी को बॉटलिंग प्लांट की अनुमति दी गई है।
हालांकि, ये फैसले पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए थे, लेकिन धरातल पर अब उतर रहे हैं। शराब के बॉटलिंग प्लांट को लेकर इन दिनों राज्य में सियासत गर्माई हुई है। प्रदेश में सत्तासीन भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस मसले पर एक-दूसरे पर आरोप मढ़ने में लगे हैं।
वहीं, अब वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी भी शराब के बॉटलिंग प्लांट के विरोध में उतर आए हैं। दिल्ली में जारी वक्तव्य में पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी ने कहा कि शराब से पहाड़ के जनमानस का नुकसान हो और वहां के लोग जमीन जायदाद बेचकर शराब पिएं, इसके वे सख्त खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसी की भी, उसे यह अधिकार कतई नहीं कि वह उत्तराखंड के मूलस्वरूप एवं देवभूमि के खिलाफ जाने का काम करे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब को सुविधा के रूप में रखा जाना चाहिए न कि आय कमाने के रूप में। उन्होंने कहा कि पैसा कमाने के लिए शराब बनाया जाना गलत है और उत्तराखंड के लिए तो यह आत्महत्या जैसी बात है।

हरदा के विरोध को समझ रही जनता
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सेवा का अधिकार आयोग के भवन के उद्घाटन के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में बॉटलिंग प्लांट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत को आड़े हाथ लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले तो ये लाइसेंस हमने नहीं दिए। देवप्रयाग को लेकर गलत ढंग से प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बॉटलिंग प्लांट देवप्रयाग से 40 किमी और राष्ट्रीय राजमार्ग से 10 किमी अंदर है। उन्होंने कहा कि इसका जो विरोध किया गया, वह पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किया और उनके कार्यकाल में ही ये लाइसेंस दिए गए थे। उन्होंने कहा कि हरीश रावत क्यों विरोध कर रहे हैं, जनता इसे समझ रही है।

बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती और उद्योगों के विकास पर जोरः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने संतुलित, समावेशी और विकासपरक बजट पेश करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट, मजबूत देश के लिए मजबूत नागरिक की संकल्पना को दर्शाता है। लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने की रूपरेखा रखी गई है। आम जन के कल्याण की योजनाओं के साथ-साथ देश में इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती और उद्योगों के विकास पर जोर दिया गया है। पांच साल में बुनियादी सुविधाओं पर 100 लाख करोड़ खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में गांव, गरीब और किसान के कल्याण पर खास ध्यान दिया गया है। हर घर शौचालय व हर व्यक्ति को घर के बाद अब हर घर नल का लक्ष्य रखा गया है। 45 लाख रुपए तक के घर पर ब्याज में 3.5 लाख रुपए की छूट का प्रावधान कर मध्यम वर्ग को राहत दी गई है।
‘‘यह टीम इंडिया का बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘‘सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास’’ के संकल्प को पूरा करने वाला बजट है। किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं, कारीगरों व छोटे उद्यमियों सभी का ध्यान रखने वाला बजट है। इसमें ‘मजबूत देश के लिए मजबूत नागरिक’ पर विशेष बल दिया गया है। वर्तमान में क्रय शक्ति समानता के आधार पर दुनिया की तीन ट्रिलियन डॉलर की तीसरी सबसे बड़ी भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे ले जाना वाला बजट है। इसमें रोजगार सृजन के लिए निवेश को प्रोत्साहित किया गया है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में 17 आईकानिक टूरिस्ट डेस्टीनेशन विकसित किए जाएंगे। इससे निश्चित रूप पर्यटन को मजबूती मिलेगी। आम आदमी के साथ ही उद्योगों को बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास जोर दे रहे हैं। नए औद्योगिक कोरिडोर बनाने का लक्ष्य रखा है, उड़ान से छोटे शहरों को हवाई सफर से जोड़ा है। वन नेशन वन ग्रिड व इलेक्ट्रीक वाहनों पर टैक्स छूट स्वागत योग्य है।
छोटे उद्यमियों का विशेष ध्यान रखा गया है। पीएम कर्मयोगी मानधन योजना से छोटे दुकानदारों को पेंशन का फायदा दिया जाएगा। एमएसएमई से ज्यादा रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। एमएसएमई के लिए अलग पोर्टल बनाया गया है, छोटे मंझोले उद्योगों के लिए 59 मिनट में लोन पास की व्यवस्था की जा रही है। उच्च शिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता सुधारने पर पर भी फोकस किया गया है। राष्ट्रीय रिसर्च फाउंडेशन बनाने से क्वालिटी रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर योजना के केंद्र बिंदु में गांव, गरीब और किसान हैं। 2022 तक पीएम आवास योजना के तहत 1.95 करोड़ जरूरतमंदों को घर देने का लक्ष्य है, पिछले पांच साल में 1.5 करोड़ घर बनाए गए। हर गांव में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था की जाएगी। पीएमजीएसवाई के तहत 1.25 लाख किलोमाटर सड़कों का निर्माण और अपग्रेडेशन का लक्ष्य रखा गया है। बांस, शहद और खादी पर आधारित 100 नए क्लस्टर बनाए जा रहे हैं। जीरो बजट फार्मिंग व अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने की पहल खास तौर पर उल्लेखनीय है। 10 हजार नए फार्मर-प्रोड्यूसर संगठन बनाए जाएंगे। एग्रो रूरल इंडस्ट्री सेक्टर में 75 हजार स्किल्ड एंटरप्रन्योर्स तैयार किए जाएंगे। नारी तू नारायणी के भाव को चरितार्थ करते हुए मुद्रा योजना से प्रत्येक महिला को 1 लाख तक का लोन का प्रावधान किया गया है। महिला एसएचजी को जनधन अकाउंट से पांच हजार रुपए तक ओवरड्राफ्ट की सुविधा दी गई है।

कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में विस सत्र को सफल बनाने पर दिया जोर

उत्तराखंड विधानसभा के कल 24 जून से आरंभ हो रहे सत्र के सिलसिले में आज विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आयोजित की गई। इसमें तय किया गया कि संसदीय कार्य मंत्री रहे दिवंगत प्रकाश पंत को सत्र के पहले दिन सोमवार को श्रद्धांजलि दी जाएगी। 25 जून को होने वाले विधायी कार्यों के लिए 24 जून को दुबारा कार्य समिति की बैठक करके एजेंडा तय किया जाएगा। विधानभवन में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधान सभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चैहान, कार्यकारी संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक, नेता प्रतिपक्ष इन्दिरा हृदयेश, गोविंद सिंह कुंजवाल, प्रीतम सिंह आदि मौजूद रहे।
वहीं, कल से आरंभ हो रहे विधानसभा सत्र की अवधि को लेकर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि महज दो दिन का सत्र सरकार ने खानापूर्ति के लिए ही आहूत किया है, क्योंकि छह माह के भीतर सत्र बुलाने की बाध्यता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का कहना है कि सरकार के मंत्री सदन में जबाब देने से बचना चाहते हैं वहीं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विपक्ष की आपत्ति को खारिज किया है। उनका कहना है कि फिलहाल कोई बिजनेस नहीं है। जो विधेयक हैं, वे अभी पाइप लाइन में हैं। लिहाजा, सदन को अनावश्यक नहीं बढ़ाया जा सकता। यह बात विपक्ष भी जानता है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने सदन के सुचारू संचालन में विपक्ष का सहयोग मिलने की उम्मीद भी जताई।

केन्द्र सरकार जागरुकता के लिए मीडिया संस्थानों को करेगी पुरस्कृत

सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने आशा व्यक्त की है कि इस वर्ष 21 जून को योग दिवस पर बड़ी संख्या में लोग भाग लेंगे। आज नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में जावडेकर ने कहा कि योग भारत की अपनी विरासत है साथ ही यह अच्छे स्वास्थ्य के लिए विश्व को उपहार भी है। प्रकाश जावडेकर ने कहा कि इस वर्ष योग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न मीडिया संस्थानों को पुरस्कृत किया जायेगा।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर झारखण्ड के रांची में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसमें लगभग तीस हजार लोगों के भाग लेने की आशा है। इसमें योग संगठन और योग गुरूओं के अलावा राज्य की जानी-मानी हस्तियां भी शामिल होंगी।

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एम्स में स्थानीयता के हिसाब से आरक्षण का प्रावधान नहींः स्वास्थ्य मंत्रालय

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में स्थानीय लोगों को नौकरियों में 70 प्रतिशत आरक्षण की दलील को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स प्रशासन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया है कि भारत सरकार के अधीन संचालित होने वाले ऑटोनामस संस्थानों में स्थानीयता के हिसाब से आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह नियम एम्स ऋषिकेश पर भी लागू होता है। करीब तीन महीने पहले आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारियों को एम्स से निकाल दिया गया था। इसके बाद करीब 45 निष्कासित कर्मियों ने क्रमिक धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

इस मामले में काफी सियासी दखल भी सामने आई। एम्स प्रशासन ने निष्कासन के पीछे तर्क दिया कि अनुबंध के मुताबिक सभी कर्मचारियों ने लिखित सहमति दी थी कि स्थायी नियुक्ति होने के बाद अस्थाई पद पर नियुक्त कर्मियों को निकाला जा सकेगा।

उक्त अनुबंधों के अनुसार ही कर्मचारियों को संस्थान से कार्यमुक्त किया गया। इसी क्रम में स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने एम्स की नौकरियों में 70 फीसदी स्थानीय लोगों को आरक्षण देने का मुद्दा उठाया। इस मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी ज्ञापन सौंपा गया था।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने स्पष्ट किया था कि नियमों के विपरीत जाकर वे नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था नहीं दे सकते हैं। निष्कासित कर्मचारियों के समर्थन में मेयर अनिता ममगाईं और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल ने भी एम्स निदेशक से वार्ता की थी।

इसी क्रम में सहमति बनी कि एम्स की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजकर स्थानीयता के आधार पर आरक्षण जारी करने की अनुमति मांगी जाएगी। उक्त प्रस्ताव पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स को स्पष्ट किया है कि डिपार्टमेंट आफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) की गाइडलाइन के अनुसार क्षेत्रीय या राज्य के आधार पर ऑटोनॉमस संस्थानों में आरक्षण की कोई नियमावली नहीं है।