सीएनजी स्टेशनों की स्थापना से सीएनजी वाहनों की संख्या में होगी बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को गेल इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों के साथ नेचुरल गैस पाइप लाईन व सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन प्रोजक्ट की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नेचुरल गैस पाइप लाईन के विस्तार में यह ध्यान रखा जाए कि इससे देहरादून, हरिद्वार व ऋषिकेश के शहर व उसके आस पास के गांव भी पूर्ण रूप से कवर हो जाए। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को रोजगार सृजन हो सकता इसका भी पूरा आकलन किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना की प्रत्येक तीन माह में समीक्षा की जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गैस पाइप लाईन से लोगों को काफी सुविधा होगी जबकि सीएनजी स्टेशनों की स्थापना से सीएनजी वाहनों की संख्या भी बढ़ेगी तथा इससे वाहनों से होने वाले प्रदूषण से भी दूनवासियों का छुटकारा मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। राज्य के मैदानी क्षेत्रों में आबादी का दबाव निरन्तर बढ़ रहा है। उसी क्रम में आगे भी वाहनों एवं आबादी का दबाव बना रहेगा, इसका बेहतर रास्ता सीएनजी ही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर तथा देहरादून के बाद नैनीताल के साथ ही अन्य स्थानों में भी गैस पाइप लाइन का कार्य आरम्भ किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को गैस ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि गैस ईंधन कम खर्चीला तथा इको फ्रेन्डली है।

बैठक में अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि हरिद्वार-ऋषिकेश-देहरादून पाइपलाईन प्रोजेक्ट (एचआरडीपीएल) के तहत 1500 करोड़ रूपये की लागत से 3 लाख पीएनजी कनेकक्शन दिये जायेंगे व 50 सीएनजी स्टेशन बनाये जायेंगे। इससे मुख्यतः ऋषिकेश, डोईवाला, विकासनगर, देहरादून, चकराता कालसी व त्यूनी क्षेत्र लाभान्वित होंगे। एचआरडीपीएल प्रोजेक्ट के तहत टेंडर व जियोटेक्निकल, टोपोग्राफिकल एवं हाइड्रोलॉजिकल का कार्य गतिमान है।

देहरादून सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन गैस प्रोजक्ट के तहत चकराता, देहरादून, डोईवाला, कालसी, ऋषिकेश, त्यूनी व विकासनगर का लगभग 3088 वर्ग किमी क्षेत्र आच्छादित किया जायेगा, जिसकी लागत 1696 करोड़ रूपये है। इसकी डीपीआर स्वीकृत की जा चुकी है। इसके लिये अधिकारियों की नियुक्ति भी की गई है। शीघ्र ही इस योजना का कार्य आरम्भ कर दिया जाएगा।

वनों को ग्रामीण आर्थिकी से जोङने की बङी पहल

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में पिरूल (चीड़ की पत्तियों) तथा अन्य प्रकार के बायोमास से विद्युत उत्पादन तथा ब्रिकेट इकाइयों की स्थापना हेतु 21 चयनित विकासकर्ताओं को परियोजना आवंटन पत्र प्रदान किये। उन्होंने नवोन्मेषी उद्यमियों का स्वागत करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण के लिये भी नई शुरूआत बताया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकना हमारी सबसे बड़ी चिन्ता है। राज्य निर्माण के बाद भी गांवों से हो रहा पलायन चिन्ता का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिरूल प्रकृति की देन है इसे व्यवस्थित कर ग्रीन एनर्जी में परिवर्तित करना हमारा उदेश्य है। पिरूल से ऊर्जा उत्पादन हेतु आज 21 उद्यमी आगे आए है। उन्हें भरोसा है कि इनकी संख्या शीघ्र ही 121 होगी। उन्होंने कहा कि इसमें राज्य को एनर्जी इंधन के साथ ही वनाग्नि को रोकने में मदद मिलेगी, जगंलों में हरियाली होगी तथा जैव विविधता की सुरक्षा होगी। उन्होंने कहा कि चीड़ से निकलने वाले लीसा से भी 43 प्रकार के उत्पाद बनाये जा सकते है। इसके लिए इंडोनेशिया से तकनीकि की जानकारी प्राप्त की जाएगी। इसका एक प्रोजेक्ट बैजनाथ में लगाया गया है। इससे भी वनाग्नि को रोकने में मदद मिलने के साथ ही हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के वनों से हर साल 6 लाख मीट्रिक टन पिरूल निकलता है। इसके अतिरिक्त अन्य बायोमास भी निकलता है। इस तरह पिरूल व अन्य बायोमास से बिजली उत्पादन का जो लक्ष्य हमने रखा है उसकी शुभ शुरुआत होने जा रही है। पिरूल से बिजली उत्पादन के लिए उरेडा एवं वन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। राज्य में विक्रिटिंग और बायो ऑयल संयंत्र स्थापित किए जाने हैं। इन संयंत्रों के स्थापित होने से पिरूल को प्रोसेस किया जाएगा व बिजली उत्पादन किया जा सकेगा। उरेडा द्वारा इसके लिए प्रस्ताव आमन्त्रित किए गए थे। अभी तक 21 प्रस्ताव जिसमें प्राप्त हुए जिनमें 20 प्रस्ताव पिरूल से विद्युत उत्पादन एवं एक प्रस्ताव पिरूल से ब्रिकेट बनाने के लिए शामिल है।

एक रूपया प्रति किलो से होगा भुगतान
पिरूल के जो सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं उन तक पिरूल की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए महिला समूहों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। जंगलों से पिरूल कलेक्शन करने के लिए महिला समूहों को एक रूपया प्रति किलो की दर से भुगतान किया जाएगा।

हाईकोर्टः सरकार चाहे तो खेल कोटे में दे सकती है आरक्षण

उच्च न्यायालय नैनीताल की तीन सदस्यीय पीठ ने सरकारी सेवा में खेल कोटे को निरस्त करने के मामले में फैसला सुनाते हुए सरकार को छूट दी है कि यदि सरकार चाहे तो सभी मापदंडो का अनुपालन करते हुए खेल कोटे में आरक्षण दे सकती है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन, न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने मंगलवार को यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

जानकारी के मुताबिक पिथौरागढ़ निवासी महेश सिंह नेगी व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड के सरकारी विभागों में नेशनल, इंटरनेशनल प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर चुके खिलाडियों का राजकीय सेवाओं में कोटा निरस्त किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से आग्रह किया था कि 20 दिसंबर 2011 को जारी विज्ञप्ति के तहत कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर उसे नियुक्ति दिलाई जाए।

तीन जजों की बैंच गठित की गई थी
उत्तराखंड टेक्निकल बोर्ड आफ एजुकेशन रूड़की के सचिव ने 20 दिसंबर 2011 को विज्ञापन जारी कर उत्तराखंड ग्रुप सी भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन मांगे थे। याचिकाकर्ता ने खेल कोटे में सामान्य श्रेणी में आवेदन किया था। याची को प्रवेश पत्र जारी कर लिखित परीक्षा में 28 दिसंबर 2012 को बुलाया गया। परीक्षा पास करने के बाद उसे 20 अप्रैल 2013 को टंकण परीक्षा के लिए बुलाया गया।

30 जुलाई 2013 को अंतिम परिणाम घोषित किया गया जिसमें याची का नाम 40वें नंबर पर था, लेकिन उन्हें नियुक्ति नहीं मिली। बाद में आरटीआई के तहत मिली जानकारी में पता लगा कि 14 अगस्त 2013 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने क्षैतिज आरक्षण में खेल कोटे को असंवैधानिक घोषित किया था। इसी तरह के अन्य मामले भी हाईकोर्ट के सामने पहुंचे थे। अलग अलग पीठों की राय अलग-अलग होने पर ही तीन जजों की बैंच गठित की गई।

पेट्रोल की बोतल लेकर बुजुर्ग चढ़ा एम्स की छत, दी आत्मदाह की धमकी

पिछले 51 दिनों से एम्स से निष्कासित कर्मचारियों के धरना प्रदर्शन ने सोमवार को नया मोड़ ले लिया। धरना का समर्थन कर रहे एक 56 वर्षीय बुजुर्ग एम्स की पांचवीं मंजिल की छत पर चढ़ गए और मांग पूरी न होने पर आत्महत्या की धमकी देने लगे। पुलिस ने किसी तरह उन्हें सात घंटे बाद नीचे उतारा। जहां 35 निष्कासित कर्मियों को पुनः आउटसोर्स में नियुक्ति देने के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ। वहीं पुलिस ने बुजुर्ग को शांतिभंग के आरोप में चालान काट कर एसडीएम के समक्ष पेश किया।

सोमवार को उस समय स्थानीय प्रशासन, एम्स प्रशासन और लोगों में हड़कंप मच गया। जब 56 वर्षीय दाताराम ममगाईं हाथ में पेट्रोल की बोतल लेकर एम्स की छत पर चढ़ गए। सुबह साढ़े छह बजे चढ़े बुजुर्ग दाताराम ने अपने पास किसी को फटकने तक नहींे दिया। इस बीच अनशनकारी कर्मचारी नीचे धरने पर बैठ गए। राज्यमंत्री भगतराम कोठारी के नेतृत्व में एम्स के उप निदेशक अंशुमन गुप्ता के साथ वार्ता हुई। मगर, वार्ता सफल नहीं हो सकी। इसके बाद मेयर अनिता ममगाई के नेतृत्व में पुनः बात करने की कोशिश की गई। मगर, वह भी बेनतीजा रही।

इसके बाद करीब डेढ़ बजे कोतवाल रितेश शाह पांचवी मंजिल की छत पर पहुंच गए और बड़ी ही चालाकी व सूझबूझ से काम लेते हुए बुजुर्ग दाताराम को पकड़ लिया। उन्होंने दाताराम के हाथ से पेट्रोल की बोतल छुड़ाई और नीचे ले आए। इसके बाद तीसरे वार्ता सुलेमान अहमद पद स्थापना एम्स के साथ की गई। इस बैठक में तहसीलदार रेखा आर्य भी मौजूद रही।

यहां निष्कासित 35 कर्मचारियों को पुनः आउटसोर्स से काम पर वापस रखने पर सहमति बन सकी। इसके बाद पुलिस दाताराम को करीब सवा दौ बजे कोतवाली ले गए। यहां दाताराम का शांतिभंग के आरोप में चालान कर एसडीएम प्रेमलाल के समक्ष पेश किया गया।

पिछले 16 माह में देश में 2 करोड रोजगार का हुआ सृजन

देश में लोकसभा चुनाव नजदीक हैं ऐसे में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के आंकड़े मोदी सरकार के आत्मविश्वास को और मजबूत कर सकते हैं। देश में पिछले 16 माह के दौरान (सितंबर 2017 से दिसंबर 2018 तक) करीब दो करोड़ रोजगार सृजित हुए हैं। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के पास उपलब्ध कंपनियों के ‘वेतन भुगतान’ संबंधी आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) तथा पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा चलाई जाने वाली विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने वाले लोगों की संख्या के आधार पर रोजगार को लेकर रिपोर्ट जारी करता है। ईएसआईसी के वेतन भुगतान से जुड़े आंकड़े भी इनमें से एक हैं जिन्हें सीएसओ अपनी रिपोर्ट में जारी करता है।

ईएसआईसी अपने पास पंजीकृत लोगों को स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा सेवायें उपलब्ध कराता है। इसमें वे सभी प्रतिष्ठान शामिल होते हैं जिसमें 20 या अधिक कर्मचारी काम करते हैं तथा जिनका वेतन 21,000 रुपये तक है। ईएसआईसी की इस योजना से सितंबर 2017 से दिसंबर 2018 तक 1.96 करोड़ नये अंशधारक इस योजना से जुड़े। वहीं ईपीएफओ के आंकड़ों से पता चलता है कि संगठित क्षेत्र में दिसंबर 2018 में 7.16 लाख रोजगार सृजित हुए जो एक साल पहले इसी महीने में 2.37 लाख के मुकाबले लगभग तीन गुना है।
इसके अनुसार सितंबर 2017 से दिसंबर 2018 तक 72.38 लाख लोग ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े। ईपीएफओ के दायरे में वे सभी कंपनियां आती हैं जहां 20 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। जिन कर्मचारियों का वेतन 15,000 रुपये मासिक तक है, वे अनिवार्य रूप से योजना के दायरे में आते हैं।
इसी अवधि में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से जुड़ने वाले अंशधारकों की संख्या 9,66,381 रही। एनपीएस के अंतर्गत केंद्रीय तथा राज्य सरकार के कर्मचारी आते हैं। आम लोग भी इसे स्वेच्छा से अपना सकते हैं। इसमें कहा गया है कि मौजूदा रिपोर्ट संगठित क्षेत्र में रोजगार के बारे में जानकारी देती है और समग्र रूप से रोजगार का आकलन नहीं करती है।

अब उत्तराखंड में भी सवर्णों को मिलेगा आरक्षण

अपर मुख्य सचिव,कार्मिक एवं सतर्कता, राधा रतूड़ी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा संविधान संशोधन के उपरान्त आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसी क्रम में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा भी 5 फरवरी, 2019 को ‘‘उत्तराखण्ड लोक सेवा (आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिये आरक्षण) अध्यादेश 2019’’ लागू कर दिया गया है।
इस प्रकार केन्द्र सरकार तथा गुजरात सरकार के बाद उत्तराखण्ड देश में दूसरा राज्य है, जहां उक्त आरक्षण लागू किया गया है। प्रदेश के बेरोजगार शिक्षित युवाओं के लिये यह अच्छी खबर है, जिसके अन्तर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग भी आरक्षण का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि यह अध्यादेश समस्त विभागों, उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग तथा अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को प्रेषित किया गया है, ताकि इस पर तत्काल अधियाचन एवं विज्ञप्ति जारी की जाये तथा अधिक से अधिक बेरोजगार नौजवानों को शीघ्र रोजगार प्राप्त हो सके।
इसके तहत लोक सेवाओं और पदों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के पक्ष में उत्तराखण्ड राज्य के उन स्थायी निवासियों को आरक्षण प्राप्त होगा, जो अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और सामाजिक तथा शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षण की मौजूदा योजना के अन्तर्गत सम्मिलित नहीं है।
ऐसे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के व्यक्ति जिनके परिवारों की सभी स्रोतों से कुल वार्षिक आय रु 8 लाख से कम हो आरक्षण के इस प्रयोजन के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो में चिन्हित हैं। परिवार, की आय में सभी स्रोतों से अर्थात् वेतन, कृषि, व्यवसाय, पेशा आदि से प्राप्त आय सम्मिलित होगी। उक्त आय लाभार्थी द्वारा आवेदन के वर्ष से पूर्व वित्तीय वर्ष के लिए आय होगी।

सहकारिता सबका साथ सबका विकास के विचार को साकार करने में मददगारः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि केन्द्र सरकार ने पिरूल को मनरेगा से जोडने की सैद्धान्तिक सहमति प्रदान कर दी है। उत्तराखण्ड को यह प्रोजेक्ट के रूप में उपलब्ध होगा। राज्य में अब पिरूल बेरोजगारी दूर करने तथा आय के संसाधनों में वृद्धि में भी मददगार होगा। इससे 143 प्रकार के आइटम तैयार किये जा सकते है। सहकारिता से भी इससे संबंधित योजनाओं को जोड़ा जायेगा।

सोमवार को देर सांय मुख्यमंत्री आवास में जिला सहकारी बैंको एवं भेषज संघो के नव निर्वाचित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं संचालकगणों के स्वागत समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि पिरूल हमारी आर्थिकी मजबूती का प्रमुख आधार बन सकता है। इस सम्बन्ध में उन्होंने कुछ दिन पूर्व केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री से पिरूल एकत्रीकरण कार्य को मनरेगा से जोडने का अनुरोध किया था। अब केन्द्र सरकार द्वारा इसकी सैद्धान्तिक सहमति प्रदान कर दी है। यह राज्य के लिये बेरोजगारी को दूर करने, आय के साधन बढाने में भी गेम चेन्जर साबित होगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि ग्रामीण जनजीवन में बदलाव लाने के साथ ही ग्रामीण आर्थिकी को मजबूती के लिये सहकारिता एक बडा माध्यम है। स्वरोजगार के लिये विभिन्न रोजगार परक कार्यक्रमों के लिये अधिक से अधिक धनराशि उपलब्ध कराने के प्रयास किये जाये। ब्याज की कम दर होने से यह समाज में बदलाव का भी माध्यम बन सकता है। इसके लिये सहकारिता से जुडे लोगों को आम आदमी के पास जाना होगा। उसे अपने साथ जोडना होगा। योजनाओं की जानकारी आम आदमी तक पहुचानी होगी।

उन्होंने कहा कि सहकारिता से जुडे लोग कोपरेटिव द्वारा पं.दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता ऋण योजना के तहत ऋण लेने वालों की स्थितिका भी जायजा लिया जाय कि क्या उन्हें इससे कितना फायदा हुआ। इससे अधिक से अधिक लोग इसके प्रति आकर्षित होंगे तथा अधिक से अधिक लोगों को इसका फायदा मिल सकेगा। इस योजना के तहत अब तक 03 लाख लोगों को ऋण दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ट्राउट मछली पालन, अंगूरा ऊन केे कलस्टर तैयार किये जाये। यह भी आर्थिकी को मजबूती प्रदान करेगा। इस प्रकार सहकारिता सबका साथ सबका विकास के विचार को साकार करने में भी मददगार साबित हो सकेगी। हमें सहकारिता को समाज की बेहतरी के लिये आम आदमी से जोडना होगा।
इस अवसर पर सहकारिता राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सहकारिता को जनता से जोडने के लिये निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। सहकारिता को भ्रष्टाचार से मुक्त करने की दिशा में भी हमारे प्रयास जारी है।

चीनी मिल में एथनॉल प्लांट को पीपीपी मोड में शुरू करने की योजना

चीनी मिल में प्रस्तावित एथनॉल प्लांट को पीपीपी मोड पर संचालित किया जाएगा। साथ ही चीनी मिल पर किसानों के बकाया गन्ना मूल्यों का भी भुगतान जल्द किया जाएगा। यह बात मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पेराई सत्र के शुभारंभ के दौरान डोईवाला में कहीं।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने डोईवाला शुगर मिल के पेराई सत्र 2018-19 का पूजा अर्चना और नारियल फोड़कर शुभारंभ किया। उन्होंने क्रेन कॅरियर में गन्ने की पुली डाली। मुख्यमंत्री ने गन्ना आपूर्ति के लिए सबसे पहले पहुंचे किसान अय्यूब अली और काबुल सिंह को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना और चीनी उद्योग की बेहतरी के लिए सरकार ठोस कदम उठा रही है।

डोईवाला शुगर मिल ने इस बार 32 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य निर्धारित किया है। शुगर मिल के अधिशासी निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि शुगर मिल के पास डोईवाला गन्ना समिति के पांच, देहरादून के 19, रुड़की के 18, ज्वालापुर के पांच और हिमाचल प्रदेश के पावंटा साहिब के चार गन्ना क्रय केंद्र हैं।

सरकार विभिन्न विभागों में कार्यरत अस्थाई कर्मचारियों को नियमित न करेः हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने 2013 की नियमितीकरण नियमावली के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुये निर्देश दिए है कि इस नियमावली के अनुसार विभागों, निगम, परिषद व अन्य सरकारी उपक्रमों में कार्यरत अस्थाई कर्मियों को नियमित न करें।

नैनीताल जिला मुख्यालय के समीपवर्ती सौड़ बगड़ गांव निवासी नरेंद्र सिंह बिष्टड्ढ व अन्य ने याचिका दायर कर कहा था कि वह इंजीनियरिंग से डिप्लोमा होल्डर हैं और सरकार के अधीन अवर अभियंता पद पर नियुक्ति पाने की पूर्ण अर्हता रखते हैं। याचिका में नरेंद्र ने 2013 की नियमितीकरण नियमावली को भी चुनौती दी है।

इसमें कहा गया है कि यह नियमावली सुप्रीम कोर्ट के उमा देवी व एमएल केसरी से संबंधित मामले में दिए गए निर्णय के विपरीत है। सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को दरकिनार कर विभाग, निगम, परिषदों समेत अन्य सरकारी उपक्रमों में अस्थायी कार्मिकों को बिना चयन प्रक्रिया के नियमित कर रही है, जो पूरी तरह नियम विरुद्ध है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता भगवत सिंह मेहरा ने कोर्ट को बताया कि हाल ही में उद्यान विभाग ने चाय विकास बोर्ड के अस्थायी कर्मियों को इस नियमावली के तहत नियमितीकरण की कार्रवाई आरंभ की है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद नियमितीकरण नियमावली-2013 के क्रियान्वयन पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी।

अल्प समय में एम्स ऋषिकेश ने किये नये कीर्तिमान हासिलः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एम्स में एनाटॉमिकल सोसाइटी आफ इंडिया की ओर से आयोजित 66वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्धाटन किया। इस दौरान उन्होंने एम्स द्वारा दी जा रही बेहतर स्वास्थ्य सेवा की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस अधिवेशन से यहां अध्ययनरत भावी चिकित्सकों को लाभ मिलेगा। इस दौरान नेटकॉम-66 की पुस्तिका का विमोचन भी किया।

सोमवार को आयोजित नॉटकाम के 66वें अधिवेशन में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि एम्स में आयोजित इस सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों व विदेश से आए एनाटॉमी के विशेषज्ञ अपने अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे। जो आने वाले समय में चिकित्सा सेवाओं की बेहतरी के लिए मजबूत आयाम बनेगा। जो छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं, उनको इन विशेषज्ञों से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

उन्होंने आशा व्यक्त करते हुये कहा इस सम्मेलन से भावी चिकित्सकों को लाभ मिलेगा। एनॉटोमी विभाग एम्स ऋषिकेश में चिकित्सा से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिये जा रहे हैं। यह प्रसन्नता का विषय है कि इस सम्मेलन में चिकित्सा से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर 400 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि एम्स ऋषिकेश में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के साथ चिकित्सा से सम्बंधित अनेक कोर्स संचालित किये जा रहे हैं। एम्स ऋषिकेश तेजी से प्रगति कर रहा है। जिसके परिणामस्वरूप एम्स दिल्ली पर 30 प्रतिशत का दबाव कम हुआ है। वर्तमान में एम्स में मरीजों के लिए 900 बेड की उपलब्धता है। उन्होंने आशा व्यक्त कि एम्स से प्रशिक्षण लेकर यहां के छात्र देश भर में जाकर एम्स का नाम रोशन करेंगे। इस अवसर पर विधायक खजान दास, एम्स निदेशक प्रो. रविकान्त, प्रो. सुरेखा किशोर, प्रो. विजेन्द्र सिंह, प्रो. सुरजीत घटक, प्रो. जीएस लोंगिया आदि उपस्थित थे।