त्रिवेन्द्र बोले, वर्ष 2019 को रोजगार वर्ष के रूप में मना रही राज्य सरकार

त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देहरादून के परेड ग्राउण्ड में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में ध्वजारोहण किया। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों व उनके आश्रितों को शॉल भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने थाना मुनस्यारी को सर्वश्रेष्ठ थाना घोषित होने पर एसओ मुनस्यारी प्रदीप चौहान को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि वर्ष 2019 को रोजगार वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। सभी रिक्त सरकारी पदों पर समयबद्ध तरीके से भर्ती की जाएगी। इसकी मॉनिटरिंग के लिए कैबिनेट मंत्री की अध्यक्षता में टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। जो लोग पहले से संविदा में लगे हैं, उनके लिए अधिमान अंक की व्यवस्था की जाएगी। महिला उद्यमियांे को बढ़ावा देने के लिए ‘‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना’’ शुरू की जा रही है। इससे 20 हजार से अधिक महिलाओं को आजीविका का साधन मिलेगा। ‘‘मुख्यमंत्री प्रतिभा प्रोत्साहन योजना’’ के तहत टॉपर 25 बच्चों को सभी कोर्सेज में 50 प्रतिशत फीस की स्कॉलरशिप दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि ‘‘देश को जानो योजना’’ के तहत कक्षा 10 के टॉप 25 रैंकर्स को भारत भ्रमण कराया जाएगा। ये सभी बच्चे उत्तराखण्ड बोर्ड के होंगे। इनका एक भ्रमण हवाई जहाज से भी होगा। इससे बच्चों को भारत के विभिन्न प्रान्तों की संस्कृति, इतिहास, रहन सहन, खान-पान आदि के बारे में जानने का मौका मिलेगा। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति आश्रम पद्धति के विद्यार्थियों के भोजन भत्ते को 3000 रूपए प्रति माह से बढाकर 4500 रूपए प्रति माह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2020 तक प्रदेश की समस्त सहकारी समितियों को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग किसी भी समाज की अनमोल धरोहर होते हैं। उनका अनुभव व बुद्धिमत्ता परिवार, समाज व देश के लिए बहुत जरूरी होता है। बुजुर्गों की देखभाल हम सभी का परम दायित्व है।

सेना में भर्ती होने का मौका, अवसर को कॅरिअर में बदलें युवा

देश की सेना के अलग-अलग हिस्सों में भर्ती होने का सुनहरा मौका है। अगर आप भी 10वीं, 12वीं या ग्रेजुएट हैं तो इन भर्तियों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जानिए, अलग-अलग भर्तियों के बारे में।

टेक्निकल भर्ती का मौका
ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी चेन्नई में टेक्निकल पदों पर भर्ती के लिए आवेदन शुरू हो चुके हैं। इस भर्ती के लिए आवेदक की आयु 20 से 27 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा आवेदक का बीटेक या बीई पास होना जरूरी है। इसके तहत 189 पदों पर भर्ती होगी। सिविल इंजीनियरिंग के 50, मैकेनिकल के 16, इलेक्ट्रिकल के 24, एयरोनॉटिकल के 12, कंप्यूटर साइंस के 47, इलेक्ट्रॉनिक्स के 25, फाइबर ऑप्टिक्स के 8, प्रोडक्शन इंजीनियरिंग के तीन और आर्किटेक्चर के चार पदों पर यह भर्ती होगी। इसके लिए 22 अगस्त की रात 12 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

एलएलबी पास के लिए जैग एंट्री
सेना में एलएलबी पास युवाओं के लिए जैग एंट्री स्कीम के तहत आवेदन शुरू हो चुके हैं। इसके लिए आवेदक का एलएलबी पास होना अनिवार्य है। इसके अलावा आवेदक की आयु 01 जनवरी 2020 को 21 से 27 वर्ष होनी चाहिए। इसके तहत पांच पुरुष और तीन महिला की भर्ती होगी। शर्त यह भी है कि आवेदक अविवाहित हो। इन पदों के लिए 14 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

10वीं, 12वीं पास के लिए यहां भर्ती का मौका
आर्मी रिक्रूटिंग ऑफिस अल्मोड़ा की ओर से बनबसा में सात से 13 सितंबर के बीच सेना भर्ती रैली होगी। रैली में अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के युवा हिस्सा ले सकते हैं। इसके लिए छह सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके तहत सोल्जर जनलर ड्यूटी, सोल्जर टेक्निकल, सोल्जर नर्सिंग असिस्टेंट, सोल्जर क्लर्क, सोल्जर ट्रेड्समैन के पदों पर भर्ती की जाएगी।
वहीं, आर्मी रिक्रूटिंग ऑफिस पिथौरागढ़ की ओर से बनबसा में ही 21 से 23 सितंबर के बीच भर्ती रैली का आयोजन किया जाएगा। इस रैली में पिथौरागढ़ और चंपावत के युवा हिस्सा ले सकते हैं। इसके लिए पांच सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सोल्जर जनरल ड्यूटी के लिए आयु 17.6 से 21 वर्ष होनी चाहिए। कम से कम 45 परसेंट अंकों के साथ 10वीं पास हो। सोल्जर टेक्निकल के लिए आयु 17.6 वर्ष से 23 वर्ष हो। 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और अंग्रेजी के साथ कम से कम 50 परसेंट अंक हों। सोल्जर नर्सिंग असिस्टेंट के लिए आयु 17.6 वर्ष से 23 वर्ष के बीच हो। 12वीं में फि जिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और अंग्रेजी के साथ कम से कम 50 परसेंट अंक हों। सोल्जर क्लर्क के लिए आवेदक के 12वीं में कम से कम 60 परसेंट अंक हों। सोल्जर ट्रेड्समैन के लिए कम से कम 33 परसेंट मार्क्स के साथ 10वीं पास होना जरूरी है।

भर्ती रैली की जानकारी यहां देखें: www.joinindianarmy.nic.in

मुख्यमंत्री की पहल पर उत्तराखंड को भी मिलेंगे मोबाइल पेट्रोल पंप

भविष्य में चार धाम यात्रा मार्गों के साथ ही राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को पेट्रोल-डीजल की किल्लत से नहीं जूझना पड़ेगा। इसके लिए मोबाइल पेट्रोल पंप (पेट्रोल-डीजल डिस्पेंसर) स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात के बात केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह संकेत दिए। उन्होंने कहा कि मोबाइल पेट्रोल पंप के लिए नियमावली तैयार हो रही है। इसके बाद यहां भी चारधाम समेत दूरस्थ क्षेत्रों के मार्गों पर ये सुविधा मिलने लगेगी।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में बताया कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से राज्य में पीएनजी व सीएनजी के विस्तार समेत विभिन्न मसलों पर वार्ता की गई थी। इस दौरान यात्रा मार्गों के साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित कराने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने यह भरोसा दिलाया कि ऑल वेदर रोड के निर्माण के दौरान तैयार डंपिंग जोन से मिलने वाली 60 हेक्टेयर भूमि पर भी मोबाइल पेट्रोल पंप समेत अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
केंद्रीय मंत्री ने देहरादून और हल्द्वानी में सीएनजी-पीएनजी के बारे में जानकारी ली और कहा कि इसके विस्तार में केंद्र सरकार हरसंभव मदद करेगी। केंद्रीय मंत्री ने हरिद्वार महाकुंभ के आयोजन में भी मदद का भरोसा भी दिलाया। उन्होंने महाकुंभ के दौरान हरिद्वार, ऋषिकेश व देहरादून में सीएनजी युक्त वाहन चलाने और इसके लिए 20-25 सीएनजी स्टेशन खोलने को कहा। उन्होंने कहा कि यह ग्रीन कुंभ के आयोजन को बड़ी पहल होगी। मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि हरिद्वार महाकुंभ के लिए मास्टर प्लान बनाया जा रहा है। उन्होंने हरिद्वार में सती घाट को विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री प्रधान ने चारधाम में अवस्थापना सुविधाओं के लिए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि गंगोत्री व यमुनोत्री में गैस अथोरिटी आफ इंडिया द्वारा नागरिक एवं अवस्थापना सुविधाओं के कार्य किए जाएंगे। केदारनाथ में ओएनजीसी के जरिये विभिन्न कार्य किए जाएंगे। उन्होंने कार्यों में तेजी लाने के लिए दोनों संस्थानों और राज्य के अधिकारियों के मध्य बेहतर समन्वय पर बल दिया।

राज्य के 208 लोगों को मुख्यमंत्री ने सौंपे 148.85 मेगावाट की परियोजना के आवंटन पत्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हॉल में राज्य के 208 स्थानीय उद्यमियों को 600 करोड़ की 148.85 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाओं के आंवटन पत्र वितरित किये। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही 200 करोड़ की 52 मेगावाट की अन्य परियोजनायें भी स्थानीय विकासकर्ताओं को आवंटित की जायेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने सौर ऊर्जा पर्यावरण के अनुकूल है। इस प्रकार वे हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले भी बने हैं, उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से प्रति उद्यमी को औसतन 66.5 लाख की वार्षिक आय होगी, जबकि लगभग 850 लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष आयोजित इन्वेस्टर्स समिट में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रति लोगों में उत्साह देखा गया था। राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिये इन्वेस्टर्स समिट से पूर्व एक माह में 5 कैबिनेट बैठकें आयोजित कर 5 नीतियों में संशोधन के साथ ही 10 उद्योगों के अनुकूल नीतियाँ बनायी गई, जिसके सार्थक परिणाम आने लगे हैं। इसके तहत अब तक राज्य में लगभग 16,000 करोड़ से अधिक निवेश प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैकल्पिक ऊर्जा के विकास से हम राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। अभी राज्य को 1000 करोड़ की बिजली क्रय करनी पड़ रही है। राज्य में पिरूल से ऊर्जा उत्पादन की दिशा में कार्य शुरू हो गया है। इस दिशा में 21 विकासकर्ताओं को योजनायें आवंटित की जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने सौर ऊर्जा की परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी को भी सुखद बताया है। उनका कहना है कि हमारी शिक्षित महिलाओं का आर्थिक रूप से मजबूत होना राज्य व समाज के हित में है। राज्य की महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में हो इसके प्रयास किये जा रहे हैं।

आवंटित की गई सौर ऊर्जा परियोजनाओं के सम्बन्ध में सचिव ऊर्जा राधिका झा ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड सौर ऊर्जा नीति को संशोधित कर 05 मेगावॉट क्षमता के सोलर पावर प्लान्ट्स की स्थापना, प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में प्रदेश के मूलध्स्थायी निवासियों हेतु ही आरक्षित कर दी गयी थी। साथ ही पारम्परिक एवं नवीकरणीय तरीकों से ऊर्जा उत्पादन को उद्योग की श्रेणी में सम्मिलित करते हुये, इन परियोजनाओं के लिये उत्तराखण्ड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग की श्रेणी में सम्मिलित करते हुये इन परियोजनाओं के लिये उत्तराखण्ड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग नीति-2015 में प्रदत्त समस्त सुविधाएं भी अनुमन्य की गयी थी। उन्होंने बताया कि इस नीति के तहत आमंत्रित निविदा के सापेक्ष उक्त 208 अभ्यर्थियों को चयनित किया गया है।

इस अवसर पर जिन उद्यमियों को परियोजना आवंटन पत्र वितरित किये गये उनमें सीमा कौशिक पेटवाल, स्वपनिल जोशी, प्रियंका चौहान, पारूल गोयल, नीलम रावत, नीता कुमारी, स्वाति गुप्ता, विक्रम सिंह, महेश चन्द्र काण्डपाल, बसन्त बल्लभ कोठियाल, कैलाश चन्द्र भट्ट, जयराज सिंह परमार, प्रशान्त गंगवार सहित अन्य लोग शामिल रहे।

बेनामी संपत्तियों पर जल्द कानून लाने की तैयारी

राज्य सरकार जल्द ही बेनामी सम्पति का कानून लाएगी। बेनामी सम्पति को जब्त करने के लिए कठोर कानून बनाया जायेगा ताकि प्रदेश में कोई भी भ्रष्टाचारी पनप न सके। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को बालावाला स्थित एक स्थानीय फार्म में आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही।

उन्होंने कहा कि राज्य में जल्दी ही बेनामी सम्पत्ति पर कानून लाकर सभी बेनामी सम्पत्तियों को जब्त किया जाएगा। जब्त बेनामी सम्पत्ति का उपयोग स्कूल, अस्पताल आदि जनहित कार्यों में किया जाएगा।

गौरतलब है कि वर्ष 2006 में केंद्र सरकार ने बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन एक्ट बनाया था जिसके द्वारा बेनामी लेनदेन एक्ट, 1988 में संशोधन कर इसे और मजबूत बनाया गया। एक्ट के तहत बेनामी लेनदेन पर रोक है और बेनामी संपत्तियों को जब्त किया जा सकता है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सबको मिलकर लङना होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्ट्राचार के विरूद्ध हम सब को धर्मयुद्ध की तरह लड़ना होगा। किसी भ्रष्टाचारी को बर्दाश्त नही किया जाएगा चाहे वह कोई भी हो। हमने हमेशा प्रयत्न किया है कि हमारी सरकार अपनी संस्कृति को बढ़ाने वाली, विकास के लिए काम करने वाली तथा भ्रष्ट्राचार मुक्त सरकार हो। आज इस दिशा में हम काफी मजबूती से कार्य कर रहे है, आज हम पूर्ण विश्वास से यह कह सकते हैं कि हमारी सरकार पूर्ण भ्रष्ट्राचार मुक्त है। हमने भ्रष्ट्राचार को मिटाने हेतु कई कदम उठाये हैं। भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध कार्यवाही की गई है। हमने संकल्प लिया है कि हम हर क्षेत्र में भेदभाव रहित तथा भ्रष्ट्राचार मुक्त विकास करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने अनेक प्रोजेक्ट के रिवाईज एस्टीमेट बनवाकर करोङो रूपए बचाए।

’डेस्टिनेशन उत्तराखंड के केवल 10 माह में 16 हजार करोड़ का निवेश’
मुख्यमंत्री ने कहा कि डेस्टिनेशन उत्तराखंड के मात्र 10 माह में 16 हजार करोड़ रूपए का निवेश आ चुका है। इससे 40 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। राज्य बनने के 17 साल मे 40 हजार करोड़ का निवेश हुआ।वह भी तब जबकि औद्योगिक पैकेज में टैक्स छूट सहित तमाम तरह की सहूलियत दी गई, जबकि हमारी सरकार ने पहली बार डेस्टिनेशन उत्तराखंड का आयोजन किया। नई नीतियां बनाई गई। इसका परिणाम यह हुआ कि केवल 10 माह में 16 हजार करोड़ का निवेश आ चुका है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि विगत दो वर्षों में राज्य सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए कई अहम फैसले लिये हैं जिनमें पलायन रोकने, रोजगार उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य एवं पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में विशेष प्रयास किये गये हैं। उन्होंने कहा कि डोईवाला विधान सभा क्षेत्र में हमने अल्प समय में ही सीपैट, कोस्ट गार्ड भर्ती सेण्टर, हर्रावाला में जच्चा-बच्चा, कैंसर मल्टीस्पेशिलिटी अस्पताल का शिलान्यास किया है जिसका आने वाले समय में इस क्षेत्र के साथ ही पूरे प्रदेश को लाभ मिलेगा।

सीएम बोले, पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकने को आर्थिक स्थिति मजबूत करने के हो रहे प्रयास

मुख्यमंत्री आवास स्थित सभागार में राज्य के विभिन्न विभागों, निगमों व संस्थानों के दायित्वधारियों की बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रदेश के समग्र विकास के लिये राज्य सरकार की ओर से की गई पहल को धरातल पर लाने में सभी को सहयोगी बनना होगा। सरकार की ओर से जनहित के लिये जो कार्यक्रम व लक्ष्य तय किये हैं उनका लाभ आम जनता तक पहुंचे इसके लिये हमें समेकित प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के साथ ही आर्थिक स्थिति की मजबूती के लिये कारगर प्रयास किये जा रहे हैं, इसके लिये पर्यटन के क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देकर इसे आर्थिकी का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। राज्य में सर्विस सेक्टर को बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्यटन, वेलनेस योगा व छोटे-छोटे कुटी उद्योगों से राज्य की आय में वृद्धि के प्रयास किये जा रहे हैं। आज हमारी प्रति व्यक्ति आय 1.90 लाख है, जो राष्ट्रीय औसत 1.30 लाख से अधिक है। पर्वतीय क्षेत्रों के पिछडेपन को दूर करने के लिये जिलों में भी प्रति व्यक्ति आये को बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं ताकि पूरे राज्य में विकास को गति मिल सके।

– छोटे किसानों को एक लाख तथा समूहों को 5 लाख तक ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वरोजगार के प्रति अधिक से अधिक लोग प्रेरित हों इसके लिए एग्रोबेस उद्योगों व आजीविका मिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

– राज्य की महिलायें विभिन्न स्वरोजगार की योजनाओं में भागीदारी निभा रही हैं। इस वर्ष महिलाओं ने केदारनाथ में 2 करोड़ का प्रसाद बिक्री किया। भोजन व्यवसाय में भी वे आगे आ रही हैं। ग्राम लाइट योजना भी महिला समूहों की आर्थिकी को मजबूत कर रही है।

– स्थानीय लोगों को विभिन्न कार्यों के ठेके के साथ ही छोटी ऊर्जा योजनायें आवंटित की गई हैं। कीड़ा जड़ी एवं नशामुक्त हेम्प की खेती के लाइसेंस दिये जा रहे हैं। इससे बंजर भूमि भी उपजाऊ होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच बद्री, पांच केदार, पांच प्रयाग यात्रा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में पर्वतीय क्षेत्रों में 600 करोड़ के सोलर ऊर्जा प्रोजेक्ट स्थानीय लोगों को आवंटित किये गये हैं। पहाड़ों के अनुकूल उद्योगों की भी स्थापना की जा रही है। इससे उन क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ ही पलायन को रोकने में मदद मिलेगी।

विभागों में रिक्त चल रहे पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

प्रदेश में बेरोजगारों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विभिन्न विभागों में रिक्त चल रहे पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने राज्य लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ चयन सेवा आयोग और विभागों के बीच समन्वय बनाने और समयबद्ध भर्ती कराने के लिए भर्ती कैलेंडर बनाने के निर्देश दिए। कार्मिक विभाग नियमित रूप से इस कैलेंडर का परीक्षण करेगा। बैठक में यह बात सामने आई कि विभागों में डीपीसी न होने का एक बड़ा कारण कर्मचारियों की वार्षिक चरित्र पंजिका (एसीआर) का समय से पूरा न होना है। इस पर मुख्यमंत्री ने समय से कर्मचारियों की एसीआर न लिखने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के भी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिवालय में प्रदेश के सरकारी महकमों में रिक्त चल रहे पदों पर भर्ती प्रक्रिया की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया विवाद रहित और पारदर्शिता के साथ की जाए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कहा कि आयोग को भेजे जाने वाले अधियाचन व सेवा नियमावली स्पष्ट रखी जाएं ताकि मामले न्यायालय में न जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दस प्रतिशत आर्थिक आरक्षण को शामिल करने के लिए विभागों को जो अधियाचन वापस भेजे गए हैं, उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कार्यवाही की जाए। लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल (सेनि) आनंद सिंह रावत ने बताया कि आयोग स्तर पर 852 पदों पर भर्ती प्रक्रिया और 3080 पदों पर डीपीसी की प्रक्रिया चल रही है। 883 पदों पर आवश्यक संशोधन के लिए विभागों को वापस भेजा गया है।
उत्तराखंड अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के अध्यक्ष एस राजू ने कहा कि आयोग ने 3177 पद अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के माध्यम से भरने के लिए चिह्नित किए हैं। इनमें 2564 पद तकनीकी अर्हता व 613 पद गैर तकनीकी अर्हता के हैं। अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी ने कहा कि अभी तक कुल 32 विभागों ने रिक्त पदों के संबंध में जानकारी दी है। इन विभागों में लगभग 18 हजार पद रिक्त हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने इन पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू कराने के निर्देश दिए।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, सचिव शैलेश बगोली, नीतेश झा, डॉ. भूपिंदर कौर औलख, हरबंस सिंह चुघ, सुशील कुमार, लोक सेवा आयोग के सचिव राजेंद्र कुमार और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के सचिव संतोष बडोनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

समाज में महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाना समय की जरूरतः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देहरादून की शहरी बस्ती चीड़ोवाली-कंडोली में उत्तराखण्ड महिला समेकित विकास योजना के अन्तर्गत कामन फेसिलिटी सेन्टर के अधीन संचालित द्विवर्षीय महिला कौशल प्रशिक्षण केन्द्र का शुभारम्भ किया। इस प्रशिक्षण केन्द्र में 120 स्थानीय महिलाओं को जूट व सूती बैग बनाने आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाना समय की जरूरत है। यदि महिलायें मजबूत हुई तो परिवार, समाज व देश मजबूत होगा। उन्होंने महिला व पुरूषों को समाज के विकास की गाड़ी के दो पहिए बताते हुए कहा कि दोनों सशक्त होंगे तो निश्चित रूप में समाज में बदलाव आयेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेती आदि के संसाधनों की सुविधा के साथ ही जीविका के साधनों का विकल्प रहता है, जिसका शहरी क्षेत्रों में अभाव रहता है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में जमीन आदि की कमी के कारण यह सुविधायें नहीं उपलब्ध हो पाती हैं। इसके लिये जरूरी है कि शहरों की गरीबों को दूर करने के लिये यहां की महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाय, कौशल विकास के जरिये हम वेस्ट को बेस्ट में बदल सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिये राज्य सरकार द्वारा प्रभावी पहल की जा रही है। उद्यमिता के क्षेत्र में महिलायें 5 हजार तक ओवर ड्राफ्ट ले सकती हैं। महिला समूओं को एग्रोबेस उद्यम के लिये 5 लाख तक शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। हमारा उद्देश्य महिलाओं को दिये गये ऋण के सदुपयोग करने वाला बनाना है। ग्राम लाइट योजना व देव भूमि प्रसाद योजना महिलाओं को आर्थिक स्वावलम्बन की राह दिखा रही है। महिला समूह पहाड़ी भोजन भी तैयार कर रही है। पौड़ी में आयोजित कैबिनेट बैठक में उन्हीं के द्वारा तैयार किया गया भोजन परोसा गया। कम लागत में सबको खाना खिलाने का यह अच्छा प्रयास रहा। इससे एक प्रकार की उद्यमिता भी विकसित हुई है। यह सब हुनरमंद होने का ही परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष केदारनाथ में महिला समूहों ने 2 करोड़ का प्रसाद बिक्री किया। प्रदेश के 625 मन्दिरों में देवभूमि प्रसाद योजना का शुभारम्भ किया जा रहा है। मंशादेवी, बदरीनाथ, जागेश्वर, बागेश्वर से भी इसकी शुरूआत हो गयी है, इसका परिणाम है कि आज चैलाई 55 रू. किलो बिक रहा है। उन्होंने महिलाओं से उत्पादों की बेहतर पैकिंग पर ध्यान देने को कहा। इसमें लोगों का आकर्षण उत्पादों के प्रति बढ़ता है। यदि हम छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देंगे तो अपने उत्पादों की बिक्री में भी मदद मिलेगी। उन्होंने महिलाओं से पुष्प उत्पादन, धूप-अगरबत्ती बनाने की दिशा में भी आगे आने को कहा। पर्यावरण अनुकूल सामग्री के उत्पादन से उसकी मांग देश व दुनिया में बढ़ेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कामन फेसिलिटी सेन्टर व प्रशिक्षण केन्द्र का भी निरीक्षण किया तथा प्रशिक्षार्थी महिलाओं से भी संवाद किया। मुख्यमंत्री ने परियर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया। क्षेत्रीय विद्यायक गणेश जोशी ने कहा कि इस प्रकार की पहल महिलाओं के आर्थिक उन्नयन में मददगार होती है, उन्होंने कहा कि महिलाओं की मजबूती समाज की मजबूती से जुड़ी है। महिलाओं को स्वालम्बी बनाने के लिये उन्हें प्रशिक्षित करने की भी उन्होंने जरूरत बतायी। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि महिला समेकित विकास योजना के तहत जानकी देवी एजुकेशन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा इस प्रशिक्षण केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। पालीथीन के स्थान पर जूट व सूती व फाइबर से बने विभिन्न उत्पादों व अन्य सामग्री का प्रशिक्षण एवं निर्माण यहां पर महिलाओं द्वारा किया जायेगा। इस अवसर पर निदेशक महिला एवं बाल विकास झरना कमठान, संस्था के चेयरमैन संजय जोशी, सचिव कविता चतुर्वदी और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलायें आदि उपस्थित थे।

पैसा कमाने के लिए शराब बनाया जाना उत्तराखंड के लिए आत्महत्याः खंडूड़ी

देवप्रयाग के नजदीक और टिहरी में शराब के बॉटलिंग प्लांट को मंजूरी दिए जाने के फैसले के खिलाफ वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी भी उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि पैसा कमाने के लिए शराब बनाया जाना उत्तराखंड के लिए आत्महत्या जैसी बात है। देवप्रयाग से करीब 36 किलोमीटर दूर शराब के बॉटलिंग प्लांट को मंजूरी दी गई और वहां बॉटलिंग शुरू भी हो गई है। इसके अलावा टिहरी में भी एक कंपनी को बॉटलिंग प्लांट की अनुमति दी गई है।
हालांकि, ये फैसले पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए थे, लेकिन धरातल पर अब उतर रहे हैं। शराब के बॉटलिंग प्लांट को लेकर इन दिनों राज्य में सियासत गर्माई हुई है। प्रदेश में सत्तासीन भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस मसले पर एक-दूसरे पर आरोप मढ़ने में लगे हैं।
वहीं, अब वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी भी शराब के बॉटलिंग प्लांट के विरोध में उतर आए हैं। दिल्ली में जारी वक्तव्य में पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी ने कहा कि शराब से पहाड़ के जनमानस का नुकसान हो और वहां के लोग जमीन जायदाद बेचकर शराब पिएं, इसके वे सख्त खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसी की भी, उसे यह अधिकार कतई नहीं कि वह उत्तराखंड के मूलस्वरूप एवं देवभूमि के खिलाफ जाने का काम करे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब को सुविधा के रूप में रखा जाना चाहिए न कि आय कमाने के रूप में। उन्होंने कहा कि पैसा कमाने के लिए शराब बनाया जाना गलत है और उत्तराखंड के लिए तो यह आत्महत्या जैसी बात है।

हरदा के विरोध को समझ रही जनता
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सेवा का अधिकार आयोग के भवन के उद्घाटन के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में बॉटलिंग प्लांट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत को आड़े हाथ लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले तो ये लाइसेंस हमने नहीं दिए। देवप्रयाग को लेकर गलत ढंग से प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बॉटलिंग प्लांट देवप्रयाग से 40 किमी और राष्ट्रीय राजमार्ग से 10 किमी अंदर है। उन्होंने कहा कि इसका जो विरोध किया गया, वह पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किया और उनके कार्यकाल में ही ये लाइसेंस दिए गए थे। उन्होंने कहा कि हरीश रावत क्यों विरोध कर रहे हैं, जनता इसे समझ रही है।

टिहरी के नैनबाग में भी शराब की बॉटलिंग करने की तैयारी

देवप्रयाग के निकटवर्ती इलाके डडुवा भंडाली के बाद अब टिहरी जिले के ही नैनबाग में भी शराब की बॉटलिंग करने की तैयारी की जा रही है। हाइलैंड बॉटलस नाम के इस प्लांट को स्थापित करने की अनुमति मिल चुकी है। अब केवल बॉटलिंग की अनुमति मिलनी बाकी है। इसके वजूद में आने के बाद टिहरी जिले में यह दूसरा बॉटलिंग प्लांट होगा।
डडुआ भंडाली में बॉटलिंग प्लांट लगाने की अनुमति वर्ष 2016 में दी गई थी और इसी साल जून में प्लांट में बॉटलिंग का लाइसेंस जारी किया गया। यहां बॉटलिंग की गई शराब की पहली खेप बाजार में पहुंचने पर यह बात सार्वजनिक हुई। स्थानीय लोग बॉटलिंग प्लांट का विरोध कर रहे हैं। इस बीच, इसी जिले के जौनपुर ब्लाक के नैनबाग में एक और बॉटलिंग प्लांट स्थापित करने की तैयारी का पता चला है।
आबकारी विभाग के सूत्रों के अनुसार हाइलैंड बाटलस के नाम इस प्लांट को स्थापित करने की प्रक्रिया भी वर्ष 2016 में शुरू की गई थी। अगस्त 2018 में यहां प्लांट स्थापित करने की अनुमति दे दी गई थी, लेकिन अभी बॉटलिंग का लाइसेंस नहीं दिया गया है। संपर्क करने पर जिला आबकारी अधिकारी रेखा जुयाल भट्ट ने पुष्टि की कि नैनबाग में बॉटलिंग प्लांट की स्थापना के लिए अनुमति दी गई है, लेकिन अभी बॉटलिंग की अनुमति नहीं दी गई है।

एसडीएम ने किया प्लांट का निरीक्षण
एसडीएम अनुराधा पाल ने बुधवार को डडुवा भंडाली पहुंचकर बॉटलिंग प्लांट का निरीक्षण किया। प्लांट के दस्तावेजों के का अवलोकन करने साथ ही प्लांट में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी जुटाई। प्लांट में काम कर रहे स्थानीय लोगों से सुविधाओं के बारे में जानकारी जुटाई। एसडीएम ने बताया कि प्लांट के दस्तावेज सही पाए गए हैं। यहां पर बॉटलिंग की गई शराब का एक बैच की पिछले महीने बाजार में आपूर्ति की गई।

बीयर और मिनरल वाटर प्लांट तैयार
डडुवा भंडाली में एक ही कैंपस में तीन फैक्ट्री खोलने की तैयारी है। बॉटलिंग प्लांट के अलावा यहां पर एक बीयर प्लांट और एक मिनरल वाटर प्लांट भी बनाया गया है। हालांकि, बीयर और मिनरल वाटर प्लांट अभी संचालित नहीं हो रहे हैं। बॉटलिंग प्लांट की अनुमति मिल गई है, लेकिन यहां बीयर बनाने के लिए लाइसेंस नहीं दिया गया है। बताया गया कि बॉटलिंग प्लांट संचालकों ने बीयर प्लांट और मिनरल वाटर प्लांट बनाने के लिए भी वर्ष 2016 में आवेदन कर दिया था, लेकिन अभी इनका लाइसेंस नहीं मिल पाया है।