सरकारी लैब में अभी 6133 सैंपलों की जांच जारी, तेजी से बढ़ रहे संक्रमित मरीज

प्रदेश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अभी तक सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों को ऑरेंज जोन में शामिल किया था। लेकिन अब लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए सरकार ने नैनीताल को ऑरेंज से हटाकर रेड जोन में शामिल कर दिया है। वहीं, ऊधमसिंह नगर को ग्रीन जोन में शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, नैनीताल में अब तक करीब 260 मामले सामने आ चुके हैं। ऊधमसिंह नगर में संक्रमित मरीजों की संख्या 82 हो गई है। वहीं इसके बाद अब 11 जिले ऑरेंज जोन में शामिल हैं।
प्रदेशभर में रविवार को 158 मरीजों में कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत ने इसकी पुष्टि की है। वहीं, दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की एक महिला डॉक्टर भी संक्रमित मिलीं हैं। दून मेडिकल कॉलेज के डिप्टी एमएस और कोरोना के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. एनएस खत्री ने जानकारी दी। इसके साथ ही अब प्रदेश में सक्रमित मरीजों का आंकड़ा 907 पहुंच गया है। 
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, आज देहरादून में 49, हरिद्वार में 17, नैनीताल में 31, टिहरी में तीन, अल्मोड़ा में 18, चंपावत में चार, पौड़ी में छह, ऊधमसिंह नगर में 20, चमोली में दो, उत्तरकाशी में सात और रुद्रप्रयाग में एक संक्रमित केस मिला है। अभी भी प्रदेश में 692 एक्टिव केस हैं। इसके साथ ही अब नैनीताल को रेड जोन में शामिल कर दिया है। जबकि ऊधमसिंह नगर को ग्रीन जोन में शामिल किया गया है। अपर सचिव युगल किशोर पंत ने बताया कि 102 मरीज ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं। चार सरकारी लैब में अभी 6133 सैंपलों की जांच चल रही है। इनकी रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है।
उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण अभी सामुदायिक फैलाव के फेज में नहीं आया है। जितने भी पॉजिटिव केस आए हैं, उनकी ट्रैवल हिस्ट्री और कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग जारी है। ज्यादातर मामले बाहर से लौटे प्रवासियों के संक्रमित होने के आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग संक्रमण से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। मीडिया के माध्यम से उन्होंने जनता से अपील की है कि आने वाले दिनों में और अधिक अनुशासन बनाए रखने की जरूरत है। कहा कि धीरे-धीरे बाजार के खुलने में ढील दे रहे हैं, लेकिन लोगों को दुकानों में भीड़ एकत्रित नहीं होने देनी है।

पालतू कुतिया की जबरन नसंबदी कराई, मुकदमा दर्ज

बीते शनिवार की देर रात प्रदीप पुत्र सुरेंद्र पुंडीर निवासी तपोवन ने मुनिकीरेती थाने में तहरीर दी। उन्होंने बताया कि उनकी पालतू कुतिया मौली दो वर्ष की है। एक अज्ञात महिला उसे बहला फुसला कर घर के प्रांगण से लेकर गई। उन्होंने आरोप लगाया कि गेस्ट हाउस विश्व चंदा की महिला ने उनसे गाली गलौज करते हुए पालतू कुतिया मौली को देने से मना कर दिया। महिला पर आरोप है कि उनकी मर्जी के बिना उक्त महिला ने मौली की नसबंदी भी करा ली।
तहरीर के आधार पर मुनिकीरेती पुलिस ने पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। थानाध्यक्ष राम किशोर सकलानी ने बताया कि आरोपी महिला अदिति हरियाणा की निवासी है, जो कर्मा एनिमल ट्रस्ट का संचालन कुछ समय से तपोवन में कर रही है। उन्होंने बताया कि महिला ने मौली को स्ट्रीट डॉग समझ कर उसकी नसबंदी कराना स्वीकार किया है। इस संबंध में राजकीय पशु चिकित्सक हरि सिंह बिष्ट ने नसबंदी की बात स्वीकारी है। पुलिस मौली की तलाश में जुट गई है। मामले की विवेचना भद्रकाली चैकी इंचार्ज उप निरीक्षक अंशुल अग्रवाल को सौंपी गई है।

प्रवासियों में तेजी से हो रही कोरोना की पुष्टि, एक दिन में 200 पाॅजीटिव केस मिले

राज्य में कोरोना को लेकर स्थिति विकट होने लगी है। हर दिन संक्रमितों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। कल राज्य में रेकार्ड 216 नए मरीजों के सामने आने के से राज्य सरकार के साथ ही आमजन की नींद उड़ गई है। सर्वाधिक पॉजिटिव संख्या 85 नैनीताल जिले की है, जबकि 68 मरीज देहरादून से हैं। अल्मोड़ा में 21, बागेश्वर व टिहरी में आठ-आठ, हरिद्वार, पौड़ी व ऊधमसिंहनगर में पांच-पांच, उत्तरकाशी में चार व रुद्रप्रयाग में छह नए मामले सामने आए हैं। संक्रमितों में अधिसंख्य महाराष्ट्र, गुरुग्राम, दिल्ली से लौटे प्रवासी हैं। अभी तक प्रदेश में कोरोना के 726 मामले आए हैं। जिनमें 105 स्वस्थ हो चुके हैं। वर्तमान में उत्तराखंड में 613 एक्टिव केस हैं। इसके अलावा तीन मरीज राज्य से बाहर चले गए हैं। कोरोना संक्रमित पांच मरीजों की मौत हो चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार को 1296 सैंपल की जांच रिपोर्ट मिली है। जिनमें 1080 की रिपोर्ट निगेटिव व 216 केस पॉजिटिव हैं। सर्वाधिक 85 नैनीताल जिले से हैं। 27 मई महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में प्रवासी ट्रेन से लालकुंआ पहुंचे थे। इनमें से 319 लोगों के सैंपल लिए गए हैं, आज पॉजिटिव आए 80 लोग इन्हीं में शामिल हैं। दिल्ली और गुरुगाम से लौटे दो-दो और रामपुर उप्र से लौटे एक शख्स भी कोरोना संक्रमित मिला। सभी संक्रमित रामनगर में क्वारंटाइन थे, अब उन्हें आइसोलेट किया जा रहा है। देहरादून में 68 मरीज देहरादून मिले।
इनमें बाहरी राज्यों से लौटे 34 लोगों को क्वारंटाइन सेंटरों में रखा गया है। जबकि 11 लोग पूर्व में ही दून मेडिकल कॉलेज के कोरोना संदिग्ध वार्ड में भर्ती हैं। ये निरंजनपुर सब्जी मंडी के संक्रमित मुनीम के संपर्क में आए हैं। सब्जी मंडी के आढ़ती के एक कर्मचारी की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। अन्य 22 संक्रमितों में एम्स ऋषिकेश का नर्सिंग ऑफिसर, लैब टेक्नीशियन, सिक्योरिटी गार्ड, वहां भर्ती दो भर्ती मरीज और लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी मसूरी का एक कर्मचारी, बैराज कॉलोनी निवासी पिता-पुत्र, ऋषिकेश में क्वारंटाइन नरेंद्रनगर निवासी युवक और विकासनगर क्षेत्र के लोग शामिल हैं। ये सभी लोग बाहर से आए हैं और बॉर्डर पर सैंपलिंग के बाद इन्हें क्वारंटाइन किया गया था।
जनपद अल्मोड़ा में 21 प्रवासी बीती 23 मई को मुम्बई से ट्रेन से लालकुआं पहुंचे थे। 24 मई को अल्मोड़ा पहुंचने पर इन्हें क्वारंटाइन किया गया था। इसके अलावा 24 मई को ही गुरुग्राम से लौटे एक युवक को बेस हॉस्पिटल में आइसोलेट किया गया था। इन सभी की रिपोर्ट पॉजिटिव है। टिहरी में मुंबई से लौटे आठ लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव है। हरिद्वार में कोरोना संक्रमित मिले पांचों लोग मुंबई से आए हैं।
ऊधमसिंहनगर में मिले कोरोना संक्रमित पांच युवक मुंबई से लौटे हैं, इनमें दो वहां नौकरी करते थे और एक फल बेचता था। रुद्रप्रयाग में कोरोना पॉजिटिव दो युवक 20 मई को दिल्ली से अपने निजी वाहन से यहां पहुंचे थे, इन्हें संस्थागत क्वारंटाइन किया गया था। पौड़ी में संक्रमित मिले पांच युवक गुरुग्राम और मुंबई से लौटे हैं।

लॉकडाउन में भी त्रिवेंद्र की टीम कर रही जन समस्याओं का त्वरित समाधान

गर्मियों में पानी की समस्या होना आम बात है लेकिन पानी की कमी से लोगों को परेशानी ना हो इसका समाधान जरूरी है। ऐसा ही एक वाकया आज रानीपोखरी क्षेत्र में देखने को मिला। जहां लो वोल्टेज के कारण लोगों के घरों में पानी नहीं आ रहा था। स्थानीय लोग अपनी समस्या को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर नितिन रावत से मिले। मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर ने तत्काल इस समस्या का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों से वार्ता की। अधिकारियों ने बताया कि लो वोल्टेज के कारण लोगों के घरों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। वहीं खराब हुई मोटर से उन्हें बहुत परेशानी हो रही है, जिस पर तत्काल नितिन सिंह रावत ने उच्च अधिकारियों से वार्ता कर खराब हुई मोटर के स्थान पर नई मोटर लगाने की व्यवस्था की और लो वोल्टेज की समस्या से निजात दिलाने के लिए एक हेवी वेट जनरेटर की व्यवस्था भी करवाई। जिससे आने वाले समय में पानी की समस्या ना उत्पन्न न हो।

नितिन सिंह रावत ने बताया कि दो-तीन दिन में यह व्यवस्था सुचारू रूप से हो जाएगी, लेकिन दो-तीन दिन में लोगों को पानी की परेशानी का सामना ना करना पड़े इसके लिए पर्याप्त मात्रा में जल संस्थान को टैंकरों से पानी सप्लाई करने के निर्देश दिए गए हैं। जिस पर उच्चाधिकारियों ने स्थानीय जल निगम को पर्याप्त मात्रा में टैंकर उपलब्ध कराने की बात कही है। मौके पर ही समस्या का समाधान होने से स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर का धन्यवाद दिया। जिस पर मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर नितिन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार लॉक डाउन में इस बात का ध्यान रख रही है कि आम जनता की परेशानियों को कैसे कम किया जाए। अमूमन गर्मियों में पानी की समस्या देखने को मिलती है, इसलिए मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में पानी की समस्या उत्पन्न ना हो इसके लिए सभी जिलों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।मुख्यमंत्री की टीम लगातार हर समस्या पर नजर रख रही है और जो समस्या उनके सामने लाई जा रही है उसका त्वरित समाधान किया जा रहा है।

गर्मियों के सीजन में पेयजल आपूर्ति की समुचित व्यवस्था की जाए

गर्मियों के सीजन को देखते हुए जनसाधारण को पेयजल आपूर्ति की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिन स्थानों व बस्तियों में पेयजल संकट रहता है, उन्हें चिन्हित कर पेयजल आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था भी कर ली जाए। यह निर्देश सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पेयजल निगम और जल संस्थान के अधिकारियों को बैठक के दौरान दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ’हर घर नल से जल’ योजना को समयबद्धता से पूरा किया जाना है। इसके लिये वर्कआउट कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि जल निगम और जल संस्थान समन्वय से कार्य करें। लोगों को गुणवत्तायुक्त पेयजल मिल सके, इसके लिए सुनियोजित तरीके से काम करते हुए कार्यकुशलता में सुधार लाया जाए। बैठक में सचिव पेयजल नितेश झा सहित पेयजल निगम और जल संस्थान के अधिकारी उपस्थित थे।

ऋषिकेश पुलिस ने कोरोना से मृत महिला का कराया दाह संस्कार

राज्य में कोरोना से शुक्रवार की देर रात हुई दूसरी मौत के बाद शनिवार शाम मृतका का अंतिम संस्कार पुलिस ने कराया। मृतका की चिता को मुखाग्नि उनके पति ने दी। कोरोना वायरस (पॉजिटिव) एवं कैंसर से पीड़ित महिला की मृत्यु के पश्चात, पुलिस व प्रशासन द्वारा सुरक्षा के समस्त उपाय व पीपीई किट पहनकर अंतिम संस्कार कराया गया।

शनिवार को कोतवाली पुलिस व प्रशासन के द्वारा करोना संक्रमण से बचाव करते हुए उत्त मृतक महिला का अंतिम संस्कार चंद्रेश्वर नगर स्थित मुक्तिधाम में कराया गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के पूरे स्थान को सैनिटाइज करवाया गया।

एक ही दिन में नैनीताल से 55 और पूरे प्रदेश में 91 मामले कोरोना पाॅजीटिव

प्रदेश में आज एक ही दिन में 91 कोरोना मरीज सामने आये है। अब राज्य में कुल मरीजों की संख्या 244 हो गई है। वहीं अब राज्य में कोई भी जिला कोरोना संक्रमण से अछूता नहीं रह गया है।
अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत ने बताया कि प्रदेश में आज 91 नए कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं। एम्स ऋषिकेश में हुई एक कोरोना मरीज की मौत के बारे में स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि उसकी मौत कोरोना से नहीं हुई है। उसकी मौत एसोफैगस कैंसर से हुई है। शनिवार को चंपावत में सात, देहरादून में नौ, हरिद्वार में दो, नैनीताल में 57, अल्मोड़ा में तीन, पिथौराढ़ में दो, उत्तरकाशी में तीन, ऊधमसिंह नगर में तीन, रुद्रप्रयाग में तीन और पौड़ी जिले में दो नए मामले सामने आए हैं।
यह पहली बार है जब राज्य में एक साथ 91 केस सामने आए हैं। इन मामलों के आने के बाद अब राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या 244 हो गई है। रुड़की के आदर्श नगर निवासी 54 वर्षीय व्यक्ति में आज कोरोना की पुष्टि हुई है। ये मुंबई से हरिद्वार में आए थे। अब हरिद्वार जनपद में अब एक्टिव केस छह हो गए हैं। ये सभी रुड़की क्षेत्र से आए हैं। सभी प्रवासी हैं। इससे पहले सात मामले आए थे जो कि सभी ठीक हो चुके थे। लेकिन नए मामले आने से लोगों की चिंता बढ़ने लगी है।

डीएम ने घर-घर जांच करने के निर्देश दिए
देहरादून जिले में कोरोना के मामले बढ़ने पर प्रशासन अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों के स्वास्थ्य का पता लगाने के लिए घर-घर जाएगा। जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में प्रवासियों के आने के बाद कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब ब्लड प्रेशर, शुगर, सांस, दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं को बचाया जाएगा। ऐसे मरीजों का सर्वे कर डाटा तैयार किया जाएगा। जिससे उन्हें कोरोना संक्रमण से बचाया जा सके।
उन्होंने बताया कि आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर इनका डाटा एकत्र करेंगी। फोन के माध्यम से भी संपर्क कर उनकी तबीयत, डॉक्टर के पास कब गए? अब क्या स्थिति है? कोरोना संक्रमण के कोई लक्षण तो नहीं जैसे सवाल पूछकर रिपोर्ट तैयार करेंगी। डीएम ने बताया कि अभी तक क्वारंटीन लोगों की निगरानी की जा रही थी। लेकिन, अब ऐसे लोगों को भी निगरानी की जाएगी, जो बीमार चल रहे हैं। 

प्रशासन की लापरवाही आई सामने
ऋषिकेश में 13 मई को दिल्ली से लौटने वाली महिला बैंक कर्मी को क्वारंटाइन न करने के मामले में प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आयी है। महिला में कोरोना वायरस की पुष्टि होने के बाद प्रशासन सकते में आ गया है। जिसके बाद हीरालाल मार्ग स्थित यूको बैंक को प्रशासन ने 14 दिनों के लिए सील कर दिया है। साथ ही सभी कर्मचारियों को होम क्वारंटाइन किया गया है। प्रशासन ने पुलिस और मेडिकल टीम की सहायता से कोरोना संक्रमित पाये गए दोनों लोगों के निवास स्थान को हॉटस्पॉट घोषित कर सील कर दिया है। रेड जोन से ऋषिकेश लौटने के बाद भी महिला को क्वारंटाइन नहीं किया गया। वहीं, महिला बैंक कर्मी के दिल्ली से लौटने के बावजूद होम क्वारंटाइन न करने को लेकर स्थानीय लोग अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

कोरोना से बचना है तो भीड़-भाड़ वाले स्थानों में जाने से बचें, जानिए क्यों है जरुरी

कोरोना वायरस आने के बाद सब एक दूसरे से उचित दुरी बना कर रख रहे है। लोगों से कहा जा रहा है कि दूर-दूर रहो. कम से कम एक या दो मीटर की दूरी। लेकिन अब एक अध्ययन में सामने आया है कि कोरोना से बचने के लिए दो मीटर की दूरी नाकाफी है. क्योंकि इंसान की लार की बूंदें कम गति वाली हवा में भी कुछ नहीं तो छह मीटर तक ट्रैवल तो करती ही हैं।
ये अध्ययन अमेरिकन इंस्टिट्यूट ऑफ फिजिक्स के तहत फिजिक्स ऑफ फ्लुइड्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें कहा गया है कि जब हवा की गति जीरो थी, तब लार की बूंदों ने दो मीटर से ज्यादा ट्रैवल नहीं किया। जो कि सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के लिए एकदम सही है। लेकिन जब हवा चार किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है, तब ये बूंदें छह मीटर तक ट्रैवल कर लेती हैं।
लार की बूंदों पर ये स्टडी रिसर्चर्स तालिब डीबौक और दिमित्रिस ड्रक्कैकिस ने की है। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के ई-मेल के जवाब में ड्रक्कैकिस ने लिखा है कि ‘चार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवा के एक झोंके से भी ये बूंदें पांच सेकंड्स के अंदर छह मीटर तक ट्रैवल कर जाती हैं। इसलिए दो मीटर की दूरी काफी नहीं है। भीड़ वाले इलाके काफी ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।’
लार की बूंदों पर स्टडी करने के लिए रिसर्चर्स ने कम्प्यूटेशनल फ्लुइड्स डायनेमिक्स का इस्तेमाल किया गया है। इस स्टडी में ये देखा गया कि खांसते हुए आदमी के मुंह से निकलने वाली लार की हर बूंद किस तरह मूव करती है। उमस का उस बूंद पर क्या प्रभाव होता है। बूंदों का आपस में और हवा के साथ कैसा बर्ताव रहता है, और किस तरह ये बूंदें लिक्विड से गैस बनकर हवा होती हैं।
स्टडी में रिसर्चर्स ने ये कहा है कि उन्होंने ये पता लगाने की पूरी कोशिश की है कि सर्दी और बसंत के मौसम का इन बूंदों पर क्या प्रभाव होता है। ड्रक्कैकिस कहते हैं, ‘हमें बूंदो के वाष्पीकरण को अभी और गहराई से समझना है। अलग-अलग वातावरण को लेकर भी स्टडी करनी है। काम अभी चल ही रहा है। इनडोर वातारवरण में बूंद का बर्ताव कैसा होगा, ये जानना बहुत जरूरी है।
वैज्ञानिक कह रहे हैं कि अभी अलग-अलग वातावरण के हिसाब से स्टडी करना बाकी है। लेकिन ये स्टडी सोशल डिस्टेंसिंग के सुझाव के लिहाज से समझना और होना बेहद जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, ऑड-ईवन की व्यवस्था हुई समाप्त

प्रदेश सरकार ने आठ शहरों में निजी वाहनों के संचालन के लिए बनाई ऑड-ईवन (सम-विषम) की व्यवस्था को आज समाप्त कर दिया है। बतातें चले कि व्यावहारिक दिक्कतों के कारण व्यवस्था शुरू होने से पहले ही सरकार को अपना फैसला पलटना पड़ा। नई व्यवस्था के तहत अब पहले की तरह सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक वाहनों की आवाजाही हो सकती है।
केंद्र सरकार की लॉकडाउन चार को लेकर जारी गाइडलाइन पर राज्य सरकार ने प्रदेश के आठ निगम क्षेत्र जिनमें देहरादून, ऋषिकेश, रुद्रपुर, काशीपुर, हरिद्वार, कोटद्वार, रुड़की और हल्द्वानी शामिल थे, में निजी वाहनों की आवाजाही ऑड-ईवन नंबर प्लेट के आधार पर करने का निर्णय लिया था।
सरकार ने यह निर्णय इन शहरों में वाहनों की भीड़ कम करने के सोशल डिस्टेंसिंग को कड़ाई से लागू करने के लिए किया था। हालांकि माल वाहक वाहनों, आवश्यक सेवाओं में लगे वाहनों एवं अन्य राज्यों से अनुमति प्राप्त अधिकृत वाहनों पर यह नियम लागू नहीं किया था।
निजी चैपहिया वाहनों में चालक के अतिरिक्त तीन अन्य व्यक्तियों के बैठने की अनुमति थी। सूत्रों के अनुसार अधिकांश जिलों से व्यवस्था बनाने में आ रही दिक्कतों को लेकर शासन को अवगत करवाया गया था। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसका त्वरित संज्ञान लेकर अब वाहनों के लिए लागू की गई ऑड-ईवन की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया। शासन की ओर से बताया गया कि इस व्यवस्था से लोगों को हो रही व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

गांव में बनाये जा रहे क्वारेंटाईन सेंटरों की साफ-सफाई के लिए 5-5 हजार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और जिलाधिकारियों के साथ प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि होम क्वारेंटाईन का उल्लंघन करने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। ग्राम स्तर पर कार्यरत प्रधानों, आशा कार्यकत्रियों, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा की जाने वाली शिकायतों को गम्भीरता से लिया जाए। मुख्यमंत्री, वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और जिलाधिकारियों के साथ प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मास्क, सेनेटाईजेशन, फिजीकल डिस्टेंस आदि बातों को लेकर निरंतर लोगों को जागरूक किए जाने की जरूरत है। सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, मीडिया व समाज के अन्य प्रबुद्धजनों के साथ संवाद कायम रखें। जो लोग भी उत्तराखण्ड आना चाहते हैं, उन्हें लाया जाना है। बाहर से घर लौटने वाले लोगों को मनोवैज्ञानिक रूप से सशक्त भी रखना है और उन्हें व्यस्त भी रखना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में बनाए जा रहे क्वारेंटाईन सेंटरों की उचित साफ सफाई के लिए ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समितियों को एनएचएम से 5-5 हजार रूपए दिए जा रहे हैं।
प्रधान, ग्रामीण समाज का महत्वपूर्ण अंग होते हैं। इसे देखते हुए प्रधानों को जिम्मेदारी दी गई है। परंतु इसका मतलब ये नहीं है कि उन्हें अकेले इस काम को देखना है। ग्राम स्तर के प्रशासनिक कर्मचारियों को उनके नेतृत्व में काम करना है। प्रधानों का जो भी व्यय होता है, उसकी प्रतिपूर्ति प्राथमिकता से की जाए।
मुख्यमत्री ने कहा कि इन दिनों में पॉजिटिव केस पहले की अपेक्षा अधिक बढ़े है, परंतु हमारी तैयारी बेहतर है। पेशेन्ट केयर का हमारा रिकार्ड बेहतर रहा है। अभी तक बेहतर तरीके से जिम्मेदारी का निर्वहन किया है। अब नई चुनौती आई है। इस चुनौती पर व्यावहारिकता और कुशलता के साथ खरा उतरना है। कोरोना से लम्बी लड़ाई है। इसके लिए हमें मनोवैज्ञानिक रूप से भी तैयार रहना है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का सहयोग लें। हर वार्ड में चार-पांच लोगों की एक टीम हो। लोगों की आजीविका के लिए भी योजनाओं पर काम करना है। किसानों को बीज उपलब्ध करवाए जाएं। इसी प्रकार केंद्र व राज्य सरकार ने जो योजनाएं घोषित की हैं, उनसे लोग, लाभान्वित हों, यह सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि जो भी लोग बाहर से अपने घरों को आ रहे हैं, उन पर सतत निगरानी रखनी है। इसमें जिलाधिकारी ग्रामीण स्तर के स्वास्थ्य कर्मियों का उपयोग करें। आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जरूरी जांच की जाएं। एक-एक केस को ट्रेस करना है। और उनका हेल्थ चैकअप किया जाए। बीआरटी को सक्रिय रखा जाए। कॉल सेंटर के माध्यम से भी आने वाले लोगों से लगातार सम्पर्क रखा जाता है। रेड जोन से आने वालों को इंन्स्टीट्यूशनल क्वारेंटाईन में रखा जाना है। अच्छी प्रतिष्ठा वाले एनजीओ का भी सहयोग लिया जा सकता है। जिस प्रकार गांवों में प्रधानों का सहयोग लिया जा रहा है, उसी प्रकार शहरी क्षेत्रों में स्थानीय निकायों को भी अधिकृत किया जाएगा। पार्षदों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी ने कहा कि क्वारेंटाईन का उल्लंघन करने वालों, सार्वजनिक स्थानों पर मास्क न पहनने वालों, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने वालों पर कार्रवाई की जानी है। हमें लोगों का समझाना भी है और जो न समझे उस पर कार्रवाई की जानी है।
सचिव स्वास्थ्य, नीतेश झा ने प्रदेश में कोविड-19 की अपडेटेड स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि बाहर से लोगों के आने के बाद पॉजिटिव केस बढ़ रहे हैं। अभी तक 120 पॉजिटिव केस हो चुके हैं, इनमें से 53 रिकवर हो चुके हैं। 66 एक्टीव केस हैं। अभी जितने भी केस हैं, उनमें कोई भी गम्भीर नहीं है। उन्होंने बताया कि हमारे पास आईसीयू बैड, वेंटिलेटर, पीपीई किट, एन 95 मास्क, अस्पताल/फेसिलिटी सेंटर की पर्याप्त संख्या में व्यवस्था है।
सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि प्रदेश में वापस आने के लिए अभी तक 2 लाख 33 हजार से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। लगभग 1 लाख 29 हजार लोग वापस आ चुके हैं। अभी तक 10 ट्रेनें आ चुकी हैं। और 2 ट्रेनें मार्ग में हैं। निर्धारित एसओपी के अनुसार सारी चेकिंग की प्रक्रिया की जाती है। जिलाधिकारियों को आने वाले लोगों का पूरा विवरण उपलब्ध करवाया जाता है।