ड्राइवर भाई इस मुसीबत में ऐसा व्यवहार मत करो हमारे भाईयों के साथ!

पंजाब के भटिंडा से 18 प्रवासियों को लेकर पहंुची जीएमओयू बस के ड्राइवर ने उन्हें दुगड्डा में उतार दिया। इससे उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि बाद में पुलिस ने जीएमओयू की दूसरी बस की व्यवस्था की और कुछ प्रवासियों को पौखाल के लिए रवाना किए। जबकि कुछ टैक्सी बुक कर घरों के लिए रवाना हुए।
पौखाल क्षेत्र के मुंडगांव के युवाओं ने पुलिस को बताया कि लॉकडाउन के चलते वे भटिंडा में फंस गए थे। उन्होंने गांव आने के लिए प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर आवेदन किया था। उन्हें बीती 16 मई को भटिंडा से देहरादून लाया गया। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद शासन की ओर से उन्हें अगले दिन बसों से पौड़ी लाया गया। जहां फिर से स्वास्थ्य जांच के बाद दुगड्डा ब्लॉक के पौखाल क्षेत्र के 18 लोगों को जीएमओयू की बस से रवाना किया गया, लेकिन बस ड्राइवर उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने के बजाय दुगड्डा में ही छोड़कर चला गया।
कई मिन्नतें करने के बावजूद ड्राइवर ने उनकी नही सुनी। जिससे दुगड्डा जाने के लिए उन्हें काफी परेशानी हुई। उन्होंने बताया कि जिनके पास पैसे थे, वे टैक्सियां बुक कराकर अपने घर चले गए, लेकिन जिनके पास पैसे नहीं थे, उन्होंने किसी माध्यम से पुलिस को इसकी सूचना दिलवाई। दुगड्डा चैकी इंचार्ज ओमप्रकाश ने तत्काल मदद करते हुए दूसरी बस की व्यवस्था कर प्रवासियों के लिए व्यवस्था की।

सीएम पोर्टल में शिकायत करने से डाॅक्टर नाराज, मरीज को कर दिया डिस्चार्ज

अल्मोड़ा जिला अस्पताल में भर्ती आयुष्मान कार्डधारक मरीज ने बाजार की दवाइयां लिखने पर सीएम पोर्टल पर शिकायत कर दी। जिसकी जांच शुरू होने पर मरीज का इलाज कर रहे वरिष्ठ फिजीशियन नाराज हो गए और सोमवार सुबह मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। जबकि सूत्रों के अनुसार, मरीज डिस्चार्ज की हालत में नही था।
मामला गर्माने के बाद अस्पताल प्रशासन ने चिकित्सक को लिखित रूप से चेतावनी दी और भविष्य में सभी डॉक्टरों को बाहर की दवाएं नहीं लिखने के निर्देश दिए हैं। हवालबाग ब्लॉक के पाखुड़ा गांव निवासी रमेश सिंह (56) लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार है। बीती नौ मई को उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉ. पीएस टाकुली रमेश का इलाज कर रहे थे।
मरीज के गुर्दे खराब होने के साथ ही उसे शुगर और सेफ्टीसीमिया आदि बीमारियां हैं। मरीज की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। मरीज की देखरेख में जुटे परिजनों के साथ ही हीरा ढुंगरी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया कि आयुष्मान कार्ड धारक होने के बावजूद डॉ. टाकुली बाजार की दवाएं लिख रहे थे।
रविवार को उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल में डाॅक्टर की शिकायत कर दी। शिकायत दर्ज होने के बाद रविवार रात को ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पूछताछ शुरू कर दी। इससे नाराज डॉक्टर ने अगली सुबह अस्पताल पहुंचते ही सबसे पहले गंभीर बीमार मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर बाहर बैठा दिया। मजबूरी में परिजन मरीज को घर ले गए जबकि उसकी हालत नाजुक बनी है। राजेंद्र सिंह ने पत्रकारों को बताया कि इस संबंध में दोबारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर मरीज को बाहर करने की भी शिकायत दर्ज करा दी है।
जिला अस्पताल अल्मोड़ा के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ.आरसी पंत ने मीडिया को बताया कि जिला अस्पताल में नौ मई से भर्ती किए रमेश सिंह की हालत काफी गंभीर थी। उन्हें डिस्चार्ज करने की जानकारी मिलने के बाद डॉ. पीएस टाकुली से जानकारी ली गई है और भविष्य में रोगियों के लिए बाजार की दवाएं नहीं लिखने के भी निर्देश दिए गए हैं। यदि रमेश सिंह के परिजन जिला अस्पताल में रमेश का इलाज कराना चाहते हैं तो उसे इलाज दिया जाएगा। पूर्व में बाजार से खरीदी गई दवाओं का भुगतान भी दिलाया जाएगा। मामले में लिखित शिकायत मिलने पर जांच भी कराई जाएगी।

लाॅकडाउन में आपसी रंजिस भारी पड़ी मासूम पर, मौत

ऋषिकेश कोतवाली क्षेत्र में दो पक्षों के बीच हुई पत्थरबाजी में सात माह के मासूम बच्चे की मौत हो गई। मासूम के पिता की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने दो पक्षों के चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, शिवाजी नगर गली नंबर 38 निवासी विजय पुत्र महेश चंद शर्मा ने कोतवाली में तहरीर दी है। उन्होंने बताया कि बीते शुक्रवार की रात करीब आठ बजे शिवाजी नगर की गली नंबर 36 में दो पक्षों के बीच पुरानी रंजिश के तहत पत्थरबाजी चल रही थी। उस वक्त उनकी पत्नी अपनी गोद में सात माह के बच्चे को लेकर मार्ग से गुजर रही थी। इसी दौरान एक पत्थर गोद में बच्चे के लग गया। आननफानन में वह बच्चे को लेकर राजकीय चिकित्सालय गए। यहां चिकित्सकों ने बच्चे को जौलीग्रांट अस्पताल रेफर कर दिया। जौलीग्रांट अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
वहीं, पुलिस ने तहरीर के आधार पर राजेंद्र पुत्र जगपाल निवासी गली नंबर 38 शिवाजी नगर, कुशाल व राहुल दोनों पुत्र संजय निवासी बापू ग्राम गली नंबर एक आईडीपीएल और रोहित उर्फ राजा पुत्र राजेंद्र निवासी बी ब्लॉक जहांगीरपुरी दिल्ली के खिलाफ गैर इरादातन हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है।

मुख्यमंत्री से मुलाकात कर होटल व्यापारियों ने कराया अपनी समस्या से अवगत

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से होटल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भेंट की। उन्होंने कहा कोविड-19 की वजह से राज्य में पर्यटन एवं अन्य लोगों के आवागमन न होने से होटल संचालकों एवं होटल एसोसिएशन को काफी समस्यायों का सामना करना पड़ रहा है। होटलों में कार्य करने वाले कर्मचारियों को वेतन देने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। उत्तराखंड में पर्यटन कि दृष्टि से यह सबसे महत्वपूर्ण समय है, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस अवसर पर होटल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष विभिन्न समस्याएं रखीं।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि होटल एसोसिएशन की प्रमुख समस्यायों को गंभीरता से लिया जाएगा और उनका समाधान करने का हर संभव प्रयास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि ग्रीन जोन वाले जनपदों विभिन्न गतिविधियों में तेजी लाई जाए, ताकि अर्थव्यवस्था में कुछ सुधार हो सके।

इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा अनिल गोयल, होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप सहानी, सेक्रेट्री संजय अग्रवाल, प्रदीप कर्णवाल, आशीष गोयल आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री से साधा संपर्क, स्पेशल ट्रेन से चलानेे की मांग

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य से बाहर फंसे उत्तराखंड के लोगों को वापस राज्य में लाने की तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि संबंधित राज्यों से समन्वय बनाते हुए सुनियोजित तरीके से सारी व्यवस्था की जाए। इसमें पूरी सावधानी के साथ व्यक्तिगत दूरी, मास्क, सेनेटाइजेशन आदि मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। जिन लोगों को वापस लाया जाना है, कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत उनकी समुचित स्क्रीनिंग की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही सारी कार्यवाही हो। राज्य में आने पर यदि होम क्वारेंटाईन किया जाता है तो यह भी सुनिश्चित किया जाए कि होम क्वारेंटाईन का सख्ती से पालन हो। इसके लिये आवश्यक होने पर ग्राम प्रधानों को कुछ अधिकार दिये जा सकते हैं।
सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि अभी तक 87 हजार लोगों ने वापस आने के लिए अपना पंजीकरण कराया है। इनमें अधिकांश लोग पर्वतीय जिलों के हैं। बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल कुमार रतूङी, सचिव अमित नेगी, नितेश झा, राधिका झा भी उपस्थित रहे।

स्पेशल ट्रेन से वापस लाये जायेंगे उत्तराखंडी
उत्तराखण्ड से बाहर फंसे राज्य के लोगों को वापस लाने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से विभिन्न मार्गो पर 12 स्पेशल ट्रेन चलाने का अनुरोध किया है। इनमें दिल्ली से देहरादून, दिल्ली से हल्द्वानी, चंडीगढ़ से देहरादून, लखनऊ से देहरादून, लखनऊ से हल्द्वानी, जयपुर से देहरादून, जयपुर से हल्द्वानी, मुम्बई से देहरादून, मुम्बई से हल्द्वानी, भोपाल से देहरादून, बैंगलोर से देहरादून और अहमदाबाद से देहरादून के लिए अनुरोध किया गया है। राज्य से बाहर फंसे उत्तराखंड के लोगों को वापस राज्य में लाये जाने के संबंध में बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री से बात कर यह अनुरोध किया है।

एम्स का स्टाफ अब अधिग्रहित होटलों में ठहराया जायेगा

ऋषिकेश एम्स में भर्ती कोरोना पॉजिटिव महिला की मौत के बाद नगर निगम प्रशासन सहित जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है। हालांकि महिला की मौत ब्रेन हैमरेज से हुई है। शुक्रवार सुबह आनन फानन में मेयर अनिता ममगाईं ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की और ताजा हालातों पर चर्चा की।
इस दौरान ऋषिकेश नगर निगम प्रशासन ने एम्स हॉस्पिटल के चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के रहने के लिए शहर के तमाम प्रमुख होटलों को अधिग्रहण करने का निर्णय लिया है। तेजी से बदल रहे हालातों को देखते हुए शहर के होटलों को क्वारंटीन सेंटर बनाए जाने की कवायद तेज कर दी गई है। शुक्रवार को बैठक में ऋषिकेश के होटलों को क्वारंटीन सेंटर बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण परिस्थितियां रोज बदल रही हैं। माना जा रहा कि आने वाले कुछ दिन और चुनौती भरे हैं। इनसे निपटने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। लॉकडाउन के चलते पर्यटकों की आवाजाही रुकी हुई है। सभी होटल खाली हैं। प्रशासन अपनी तरफ से ज्यादा से ज्यादा क्वारंटीन सेंटर बनाकर उन्हें आरक्षित रखना चाहता है। निगम आज से ही इन होटल को सैनिटाइजेशन करने का कार्य शुरू कर देगा।
बैठक में नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वींरियाल, उपजिलाधिकारी प्रेमलाल, आईएएस अधिकारी अपूर्वा पांडेय, पुलिस उपाधीक्षक वीरेंद्र रावत, तहसीलदार रेखा आर्य, कोतवाली प्रभारी रितेश शाह, मौजूद थे।

एम्स कर्मियों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य की जांच शुरू
टिहरी जिले में कोरोना संक्रमण के प्रवेश को रोकने के लिए सीआरटी (सिटी रिस्पांस टीम) ने एम्स कर्मियों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य की जांच शुरू कर दी है। सभी की थर्मल स्क्रीनिंग और सामान्य परीक्षण किए जा रहे हैं। इस दौरान सभी को होम क्वारंटीन रहने के विशेष निर्देश भी दिए गए। बीते दिनों सीआरटी की टीम ने ढालवाला, मुनिकीरेती और तपोवन क्षेत्र से एम्स में कार्य करने वाले 40 कर्मियों को चिह्नित किया था।
तहसीलदार मंजू राजपूत के नेतृत्व में सीआरटी ने इन एम्स कर्मियों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य की जांच शुरू की। स्वास्थ्य विभाग फकोट के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. जगदीश जोशी ने बताया कि निश्चित अंतराल पर लगातार इन सभी के स्वास्थ्य की पुनरू जांच की जाएगी। पालिका के अधिशासी अधिकारी और सीआरटी के नोडल अधिकारी बद्री प्रसाद भट्ट ने बताया कि होम क्वारंटीन के दौरान केवल एम्स में कार्यरत कर्मी ही घर से बाहर ड्यूटी के लिए आवाजाही कर सकेगा। इस मौके पर सीआरटी के प्रभारी रूपेश भट्ट, अनूप सकलानी, जाबिर अली, विकास सेमवाल आदि उपस्थित रहे।

दूसरे राज्यों में फंसे लोगों ऐसे करे अप्लाई, कराये पंजीकरण

दूसरे राज्यों में फंसे उत्तराखंड के छात्रों, पर्यटकों, श्रद्धालुओं और अन्य नागरिकों की अब घर वापसी हो सकेगी। उत्तराखंड सरकार ने विभिन्न राज्यों में फंसे उत्तराखंड के लोगों के लिए लिंक जारी किया है।
इस लिंक पर क्लिक कर अप्लाई किया जा सकता है। इसमें अप्लाई करने वाले का पंजीकरण होगा और घर वापसी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 
ये हैं लिंक-https://dsclservices-in/uttarakhand-migrant-registration-php

मुख्य सचिव को सौंपी 21000 लोगों की सूची
कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने आज गुरुवार को मुख्य सचिव से मुलाकात की और उन्हें राज्य से बाहर फंसे 21 हजार लोगों की सूची सौंपी। उन्होंने बताया कांग्रेस द्वारा तैयार की गई एप के जरिए उन्हें यह जानकारी मिली है। 21 हजार लोगों ने उनसे संपर्क किया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, जोत सिंह बिष्ट, राजकुमार, विजय सारस्वत सहित आठ लोग इस प्रतिनिधि मंडल में शामिल थे।

कई राज्यों के लोग उत्तराखंड में भी
राज्य सरकार को इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय का आदेश मिल गया है। अब प्रदेश सरकार उसके अनुरूप आदेश जारी करेगी। शासन ने स्पष्ट किया है कि चरणबद्ध तरीके से अन्य राज्यों में फंसे उत्तराखंड के नागरिकों को सुरक्षित घर लाया जाएगा। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अन्य राज्यों में फंसे लोगों की सुरक्षित घर वापसी का जिम्मा राज्यों को सौंप दिया है।
राज्य तय करेंगे कि उनके यहां फंसे नागरिकों को कैसे वापस लाया जा सकता है। प्रदेश सरकार सभी राज्यों में फंसे नागरिकों की सूची तैयार करेगी, उसके बाद उन राज्यों के साथ वार्ता कर आने जाने की व्यवस्था बनाई जाएगी। उत्तराखंड में भी कई राज्यों के लोग फंसे हैं, वहां की राज्य सरकारों को भी अवगत करवाया जाएगा।

एम्स ऋषिकेश में एक दिन में तीन मरीज कोरोना पॉजीटिव, अब तक चार

एम्स के जनसंपर्क अधिकार हरीश मोहन थपलियाल ने मंगलवार शाम को अपडेट देते हुए बताया कि एम्स में कोरोना वायरस के दो नए मरीज सामने आए है, जिनमें पुष्टि हुई हैं। मंगलवार को तीन केस हुए है। बताया कि अब तक कुल चार केस सामने आए है।

अपडेट्स
एम्स अस्पताल (गैर कोविड क्षेत्र) में मंगलवार शाम कोविड 19 के दो और सकारात्मक मामले सामने आए।

1 – 26 वर्षीय जनरल सर्जरी वार्ड में एक महिला स्टाफ नर्स है। जिसमें सोमवार को रोग के लक्षण पाए गए। जो दो दिन पूर्व तक ड्यूटी पर कार्यरत थी व एम्स के पास एक रूममेट के साथ रहती है।

 2- एक अन्य सकारात्मक मामला गैस्ट्रोलॉजी में उपचाराधीन व यूरोलॉजी वार्ड में भर्ती 56 वर्षीया महिला रोगी का तीमारदार है। संस्थान ने इन दोनों रोगियों के बाबत आवश्यक कार्यवाही शुरू कर दी है।

एम्स में भर्ती नैनीताल निवासी महिला पर कोरोना की पुष्टि

तीर्थनगरी ऋषिकेश में कोरोना का दूसरा पॉजीटिव मरीज सामने आया है। यह मामला भी एम्स ऋषिकेश से ही आया है। 22 अप्रैल से एम्स ऋषिकेश में भर्ती 56 वर्षीय नैनीताल निवासी महिला पर कोरोना पॉजीटिव की पुष्टि हुई है। वहीं, तीन दिन के भीतर दूसरा मामला सामने आने के बाद एम्स में कार्यरत कर्मियों में हड़कंप मच गया।

एम्स के संकायाध्यक्ष (अस्पताल प्रशासन) प्रो. यूबी मिश्रा ने बताया कि नैनीताल निवासी 56 वर्षीया महिला बीती 22 अप्रैल को एम्स ऋषिकेश में भर्ती हुई थी। जिसे ब्रेन स्ट्रोक की शिकायत थी। यह महिला नैनीताल के स्वामी विवेकानंद अस्पताल में भर्ती थी, जहां इसका स्ट्रोक का उपचार चल रहा था। वहां से महिला श्रीराम मूर्ति हॉस्पिटल बरेली रेफर किया गया था। श्रीराममूर्ति अस्पताल से महिला 22 को एम्स ऋषिकेश के लिए रेफर किया गया था।

उन्होंने बताया कि उक्त दोनों अस्पतालों से प्राप्त रिपोर्ट में महिला रोगी का कोविड 19 का टेस्ट भी हुआ था, लेकिन वहा महिला की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। एम्स में भर्ती इस महिला को 27 अप्रैल को फीवर आया था,जिसके कारण इसका संस्थान में कोविड 19 का टेस्ट किया गया। जिसकी रिपोर्ट मंगलवार (आज) पॉजीटिव आई है। अब महिला को अस्पताल में ही आइसोलेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

नर्सिंग अफसर में मिला कोरोना का संक्रमण, एम्स ऋषिकेश में हड़कंप

रविवार को उत्तराखंड में कोरोना वायरस संक्रमण के तीन नए मामले सामने आए। ऋषिकेश एम्स के यूरोलॉजी आईपीडी में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर और दून मेडिकल कॉलेज में भर्ती प्रसूता महिला में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। दून की आजाद कॉलोनी निवासी संक्रमित महिला ने एक दिन पहले ही बच्चे को जन्म दिया है।
वहीं, तीसरा संक्रमित मरीज पॉजिटिव महिला का पति बताया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 51 हो गई है। इसमें 28 मरीज ठीक हो चुके हैं।

बता दें कि एम्स ऋषिकेश के यूरोलॉजी विभाग की आईपीडी में कार्यरत बापू ग्राम निवासी 28 वर्ष के नर्सिंग ऑफिसर कोरोना संक्रमित मिले हैं। 24 अप्रैल को नर्सिंग ऑफिसर में खांसी जुकाम के लक्षण आए थे। तबीयत खराब होने पर 25 अप्रैल को एम्स में सैंपल की जांच कराई गई, जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई है।

वहीं, दून मेडिकल कॉलेज में प्रसव के लिए भर्ती आजाद कॉलोनी निवासी 32 वर्ष की महिला में भी कोरोना का संक्रमण मिला है। महिला का प्रसव कोविड 19 की गाइड लाइन के अनुसार पर्याप्त सुरक्षा प्रबंधन के बीच कराया गया। जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। दोनों को आइसोलेशन में रखा गया है।  अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत ने बताया कि नर्सिंग ऑफिसर और महिला और उसके पति में संक्रमण की वजह का पता किया जा रहा है। तीनों मरीजों के संपर्क में आए सभी लोगों की मेडिकल जांच कर उन्हें क्वारंटीन किया जाएगा।