अब दसवीं पास करना हुआ आसान, सीबीएसई ने दी राहत

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के उत्तीर्ण होने का रास्ता आसान कर दिया है। बोर्ड ने दसवीं कक्षा में पास होने का मानदंड ही बदल दिया है। इस मानदंड के अनुसार विद्यार्थी अब आंतरिक व बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन को मिलाकर 33 फीसद अंक प्राप्त करने पर ही पास हो जाएंगे।

इससे पहले विद्यार्थियों को पास होने के लिए आंतरिक व बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में अलग-अलग 33 फीसद अंक प्राप्त करने होते थे। शैक्षणिक सत्र 2017-18 की दसवीं की बोर्ड परीक्षा में विभिन्न मूल्यांकन पृष्ठभूमि से आए परीक्षार्थियों की परिस्थतियों को देखते हुए सीबीएसई की परीक्षा समिति ने 16 फरवरी को हुई बैठक में यह फैसला लिया है। हालांकि, पास होने का यह मानदंड सिर्फ इसी सत्र की बोर्ड परीक्षा के लिए लागू रहेगा।

सीबीएसई अध्यक्ष अनिता करवल द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार वर्ष 2018 में परीक्षा दे रहे दसवीं के विद्यार्थियों के लिए यह बदलाव किया गया है। इसके तहत 20 अंक वाली आंतरिक परीक्षा व 80 अंक वाली विषय परीक्षा के अंकों को मिलाकर 33 फीसद अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी पास माने जाएंगे।

यह नियम पांचों मुख्य विषयों के लिए लागू होगा। अगर किसी विद्यार्थी ने अतिरिक्त विषय के तौर पर छठा या सातवां विषय भी लिया है, तो उन विषयों के पास होने का मानदंड भी अन्य पांचों विषयों की तरह ही रहेगा।

अब यूपी भी गुजरात मॉडल की राह पर

सीएम योगी के सत्ता संभाले एक साल पूरा होने जा रहा है, योगी सरकार ने गुजरात मॉडल की तर्ज पर यूपी में इंवेस्टर समिट आयोजित करते हुये देश और उससे बाहर के कारोबारिेयों को यूपी में निवेश करने का आमंत्रण दिया है।

दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति चीन सुस्ती के दौर से गुजर रहा है। लगातार 30 साल तक 10 फीसदी की विकास दर दर्ज करने वाले चीन को आर्थिक शक्ति बनाने में उसके कुछ प्रोविंसेस की अहम भूमिका रही है। देश की जीडीपी में इन राज्यों का सर्वाधिक योगदान भी है। खास बात यह है कि आर्थिक आंकड़ों को देखकर साफ है कि ये प्रोविंस चीन की सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं और इस घनी आबादी के सहारे ही चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में सफल हुआ है।

गुजरात मॉडल से उम्मीद

उत्तर प्रदेश में इवेस्टर समिट के लिए सजे मंच से एक के बाद एक शख्सियत और संभावित निवेशकों ने 2003 का वह मंजर याद दिलाया जब गुजरात की कमान संभालने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाइब्रेंट गुजरात की नींव रखी। लखनऊ के मंच पर दावा किया गया कि वायब्रेंट गुजरात समिट ने गुजरात में बड़े निवेश का रास्ता खोलते हुए गुजरात को कारोबार में देश का अग्रणी राज्य बना दिया। लिहाजा इसी तर्ज पर चलते हुए अब उत्तर प्रदेश को देश का अहम वाणिज्यिक क्षेत्र बनाया जाएगा। भारत में जनसंख्या के हिसाब से सर्वाधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश है। लिहाजा भारत के लिए चीन जैसी अर्थव्यवस्था को पकड़ने और उसे पछाड़ने के लिए जरूरी है कि भारत में भी आर्थिक विकास के केन्द्र में उत्तर प्रदेश को रखा जाए।

ये कंपनियां देंगी योगदान

यूपी इंवेस्टर्स समिट के मंच से बोलते हुए देश के बड़े उद्योगपतियों ने अगले कुछ वर्षों में हजारों करोड़ के निवेश के साथ-साथ राज्य में लाखों नए रोजगार पैदा करने का दावा किया है। इनमें यदि राज्य के सबसे बड़े निवेशक आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों में 25,000 करोड़ रुपये का निवेश का दावा किया तो देश के सबसे बड़े कारोबारी मुकेश अंबानी ने तीन साल में 10,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एक लाख से अधिक नौकरियां देने का दावा किया। वहीं समिट में शिरकत कर रहे अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी ने अगले कुछ वर्षों के दौरान राज्य में अपनी कंपनियों के विस्तार के लिए कुल 45,000 करोड़ रुपये के निवेश का दावा किया है।

इनके अलावा कई क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों ने उत्तर प्रदेश के इवेस्टर समिट के दौरान राज्य में बड़े निवेश का ऐलान किया है। उल्लेखनीय है कि महज डेयरी सेक्टर में नीदरलैंड समेत यूरोप की कंपनियों ने लगभग 500 समझौते करते हुए हजारों करोड़ के निवेश का खाका पेश किया है।

सीएम ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं का दर्द किया बयां

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं का दर्द बयां करते हुये कहा कि राज्य कीं स्वास्थ्य सेवाओं में अभी बहुत कमियां है। जिस कारण दूरस्त क्षेत्रों में समय पर उपचार न मिल पाने के कारण जच्चा-बच्चा दम तोड़ देते है। हमें इनके प्रति अपनी संवेदना जगानी होगी।

एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं संतोषजनक नहीं। उन्होंने कहा कि दून या किसी अन्य बड़े शहर को देख आपको लगेगा कि सब अच्छा है, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों के लिये भी सरकार उतनी ही जवाबदेह है।

उत्तरकाशी के जखोल गांव और नैनीताल के ओखलखंडा का उदाहरण देते सीएम बोले वहां अब भी महिलाएं सुरक्षित प्रसव की अवधारणा से कोसो दूर हैं। समय से उपचार न मिलने के कारण जच्चा-बच्चा दम तोड़ देते हैं। दुरुह क्षेत्र में रहने वाले इन लोगों के प्रति हमारी संवेदना जागनी चाहिए। हमें दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर इनकी पीड़ा हरनी है।

त्रिवेन्द्र ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का सरकार प्रयास कर रही है और इसमें आप सबका सहयोग चाहिये। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र के व्यवसायिक पक्ष पर बोलते कहा कि डाक्टर जब कमाई के पीछे भागता है तो वह कसाई के समान हो जाता है।

सेना प्रमुख को क्यों होनी लगी चिंता, कौन है बदरूद्दीन अजमल

सेना प्रमुख बिपिन रावत के बांग्लादेशी नागरिकों की असम में घुसपैठ और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट पर दिए गए बयान से राजनीतिक बवाल मच गया है। सेना प्रमुख ने कहा कि जितनी तेजी से देश में बीजेपी का विस्तार नहीं हुआ उतनी तेजी से असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ बढ़ी है, जो चिंता की बात है।

बता दें कि अजमल के जबरदस्त उभार के पीछे उनकी अपनी सियासी सूझबूझ के अलावा हालात का भी अच्छा-खासा योगदान है। एआइयूडीएफ 2005 में गठित की गई थी, उसी साल सुप्रीम कोर्ट ने विवादास्पद अवैध आप्रवासी (ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारण) कानून (आइएमडीटी) को रद्द कर दिया था।

इसके लिए सर्बानंद सोनोवाल(असम के सीएम) ने उस वक्त ऑल असम स्टुडेंट्स यूनियन के नेता के तौर पर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी, जिसके बाद अदालत का यह फैसला आया था। आइएमडीटी कानून ने अवैध आप्रवासियों की पहचान की जिम्मेदारी न्यायाधिकरणों पर डाल दी थी और संदिग्ध लोगों की नागरिकता को साबित करने का भार शिकायत करने वालों पर डाल दिया था। अप्रवासी मुसलमान मानते हैं कि केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार का बनाया गया यह कानून उन्हें उत्पीड़न से बचाने वाला था।

असम में पैदा हुए और मुंबई में कपड़ों, रियल एस्टेट, चमड़ा, हेल्थकेयर, शिक्षा और इत्र का विशाल कारोबार चलाने वाले अजमल का कारोबार भारत के अलावा यूपीई, बांग्लादेश, सिंगापुर आदि देशों में फैला है। अजमल पर वंशवादी सियासत के भी आरोप लगते आए हैं। उनके दो बेटे अब्दुल रहमान अजमल और अब्दुल रहीम अजमल व भाई सिराजुद्दीन राजनीति से जुड़े हैं।

भाजपा सरकार के राज में व्यवसायी कर रहे आत्महत्या

प्रदेश की भाजपा सरकार के राज में राज्य के व्यवसायी कर्ज में डूबे है, कर्ज न चुका पाने से उनके सामने कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। नतीजतन वह आत्महत्या कर रहे है। सरकार भी उनकी कोई सुध नहीं ले रही है। यह बात पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पत्रकार वार्ता के दौरान कही।

कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि देहरादून के ट्रांसपोर्टर बलवंत भट्ट की आत्महत्या को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। इससे पहले ट्रांसपोर्टर प्रकाश पाण्डेय की आत्महत्या से भी सरकार ने सबक नहीं लिया।

उन्होंने कहा कि सरकार किसानों और ट्रांसपोर्टरों को हतोत्साहित कर रही है। सरकार को मृतकों के ऋणों के समायोजन का रास्ता निकालना चाहिए। उन्हें केंद्रीय बजट को लेकर पीएम मोदी पर हमला बोला।

कहा कि देश के लिए मोदी ने झुनझुना दिया है। बजट में उत्तराखंड को कुछ नहीं मिला। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुधार पर भी केंद्र गंभीर नहीं है। केंद्र सरकार ने मनरेगा और पीएमजीएसवाई के धन में बढ़ोत्तरी नहीं की। ऐसे में गांव की तस्वीर कैसे बदलेगी।

कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में भी यही हाल है। इसमें भी दो हजार करोड़ की कमी कर दी गई। स्वच्छ भारत अभियान का बजट भी मोदी ने नहीं बढ़ाया। इसी तरह ग्रामीण पेयजल मिशन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के बजट में भी बढोत्तरी नहीं की गई।

सपा प्रवक्ता का कहना, लोस चुनाव में मोदी का विकल्प अखिलेश

लोकसभा चुनाव होने में अभी चौदह महीने रह गये है। उधर, कांग्रेस ने राहुल गांधी के चेहरे को आगे करके चुनाव में उतरने के लिए कदम बढ़ा दिया है। कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि देश में मोदी का विकल्प राहुल गांधी हैं और देश की जनता राहुल को प्रधानमंत्री देखना चाहती है।

सुरजेवाला की इस बात से कांग्रेस को एनसीपी का समर्थन मिला है। तो वहीं, दूसरे विपक्षी दलों में अलग-अलग राय दी है। समाजवादी पार्टी राहुल के बजाय अखिलेश यादव को मोदी का विकल्प बता रही है। आरजेडी कांग्रेस के फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं है, लेकिन मोदी के मुकाबले राहुल की राजनीति के साथ खड़े होने की बात कह रही है।

एनसीपी के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने कहा- बेशक मौजूदा समय में राहुल गांधी ही मोदी का विकल्प हैं। कांग्रेस की राय से मैं पूरी तरह सहमत हूं. गुजरात विधानसभा चुनाव और राजस्थान के उपचुनाव के नतीजों से साफ हो गया है कि राहुल गांधी में नेतृत्व करने की क्षमता है। जिस तरह से राहुल गांधी ने अपनी राजनीति से बीजेपी को मात देनी शुरू की है। उससे साफ है कि 2019 का चुनाव विपक्ष की तरफ से मोदी के मुकाबले राहुल गांधी ही विकल्प होंगे।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि ये जनता तय करेगी कि मोदी का विकल्प कौन है? कांग्रेस पार्टी के नेता अपने नेता की बात कर रहे हैं। ये उनकी राय होगी। जबकि सपा मानती है कि गांव और गरीब की बात करने वाले अखिलेश यादव बड़ा विकल्प हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में अखिलेश यादव ने विकास का वैकल्पिक मॉडल दिया है। इतना ही नहीं अखिलेश ओबीसी और किसान परिवार से निकले हैं उनके दर्द को समझते हैं। ऐसे में मोदी के सामने सबसे बेहतर विकल्प अखिलेश होंगे।

राहुल पर विचार

आरजेपी के प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि कांग्रेस के साथ हमारी सकारात्मक सोच है, लेकिन लोकतंत्र में सामूहिक फैसला होना चाहिए। 2019 के लिए राहुल के नाम को आगे बढ़ाती है तो विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में मोदी की तुलना में राहुल की राजनीति भारत की आत्मा के ज्यादा करीब है। मोदी जहां विध्वंस की राजनीति करते हैं तो राहुल सर्वसमाज को लेकर चलने वाली राजनीति करते हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि देश में नरेंद्र मोदी का विकल्प सिर्फ कांग्रेस प्रेसिडेंट राहुल गांधी हैं। देश में आज दो मॉडल्स हैं। एक है मोदी मॉडल है वो दिन में छह बार कपड़े बदलते हैं, वो देश से ज्यादा अपने कपड़ों को अहमियत देते हैं। जबकि दूसरा, राहुल मॉडल है, वो सादगी से रहते हैं और अपनी बात साफ-साफ कहते हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की लहर चलने वाली है और देश की जनता राहुल गांधी को पीएम के रूप में देखना चाहती है।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस उसी तर्ज पर चल रही है, जो 2014 के लोकसभा चुनाव से एक साल पहले बीजेपी ने 2013 से ही नरेंद्र मोदी को पीएम के चेहरे के तौर पर पेश किया था। इसके बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए के साथ कई सहयोगी दल साथ आए थे। इनमें राम विलास पासवान की लोजपा, उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा और अनुप्रिया पटेल की अपना दल सहित कई सहयोगी दल जुड़े थे। इसके अलावा कई नेताओं ने कांग्रेस सहित कई पार्टी से नाता तोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। कांग्रेस उसी तर्ज पर अब राहुल के नाम को आगे बढ़ाने में जुटी है।

त्रिवेन्द्र ने खिर्सू को पर्यटन मानचित्र पर उतारने का दिया भरोसा

खिर्सू शरदोत्सव के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने राज्यों के डाक्टरों व नर्सों की कमी को जल्द पूरा करने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सरकार गंभीरता से अध्ययन कर रही है। राज्य के सभी अस्पतालों में अगले दो माह के भीतर डॉक्टरों को नियुक्त कर दिया जायेगा। उन्होंने खिर्सू को पर्यटन मानचित्र पर उतारने वाली बात भी कही।

सोमवार को विकास खंड खिर्सू मुख्यालय में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खिर्सू शरदोत्सव का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भ्रष्टाचार पर दृढ़ता से कार्य कर रही है। प्रदेश में तबादला व्यवसाय पर पूरी तरह रोक लगा दी है। भ्रष्टाचार में लिप्त 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 14 लोगों को जेल भेज दिया गया है।

रावत ने कहा कि 12 हजार करोड़ से ऑलवेदर रोड, 16 हजार करोड़ से रेल लाइन व 13 हजार करोड़ से प्रदेश की सीमाओं पर भारत माला योजना के तहत सड़कों का निर्माण कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि आईआईटी मुंबई के छात्रों व शिक्षकों ने डिवाइस तैयार की है जिसमें एनसीआरटी का पाठ्यक्रम तैयार है। जिसका शुभारंभ प्रदेश में अनाथ बच्चों की शिक्षा से स्मार्ट क्लास के रूम में किया जाएगा।
जनपद पौड़ी में जीआइसी खिर्सू से इस योजना का शुभारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में जल्द ही पिरुल से डीजल व तारपिन का तैल तैयार करने जा रही है। लोगों से सरकार पांच से सात रुपये किलो पिरुल खरीदेगी। जो जंगलों को आग से बचाने, पर्यावरण संरक्षण व लोगों की आय में वृद्धि करने में सहायक होगी। मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि खिर्सू को पर्यटन मानचित्र में उभारने के लिए विशेषज्ञों से राय-शुमारी कर ठोस पहल की जाएगी।

चौबट्टा में जल्द ही सहकारी बैंक खोला जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि एनआईटी उत्तराखंड का निर्माण सुमाड़ी व जलेथा में 500 करोड़ की लागत से किया जाएगा। किसान कल्याण योजना के तहत जनपद पौड़ी में 25 हजार किसानों को लाभांवित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री पहाड़ में शराब आंदोलन के दौरान महिलाओं पर दर्ज मुकदमें वापस लिए जाने का आदेश दे चुके हैं। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के 300 किसानों को पं. दीनदयाल उपाध्याय किसान कल्याण योजना के चौक भी वितरित किए

सेना प्रमुख बोले, जम्मू में शांति को राजनीतिक हस्तक्षेप आवश्यक

एक साक्षात्कार में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने स्पष्ट कहा है कि सैन्य ऑपरेशन के अलावा राजनीतिक पहल भी जम्मू कश्मीर में शांति व्यवस्था बनाने के लिये जरूरी है। उन्होंने कहा कि सेना आतंकवाद से निपटने को पूरी तरह तैयार है और वह अपना काम कर रही है, परंतु इसके अलावा राजनीतिक पहल से भी शांति कायम की जानी चाहिये।

रविवार को सेना प्रमुख ने कहा कि एक साल पहले जब उन्होंने पद संभाला था, उसकी तुलना में आज हालात बेहतर हुए हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया कि सेना आतंकवाद से सख्ती से निपटने की अपनी नीति पर चलती रहेगी। जनरल रावत ने कहा कि राजनीतिक पहल और दूसरे सभी उपाय साथ-साथ चलने चाहिए। जब हम सभी मिलकर काम करेंगे तभी कश्मीर में शांति की स्थापना की जा सकती है। हमें राजनीतिक-सैन्य नजरिया अपनाने की जरूरत है।

पिछले साल अक्टूबर में सरकार ने आइबी के पूर्व प्रमुख दिनेश्वर शर्मा को जम्मू-कश्मीर में सभी पक्षों से बातचीत करने के लिए अपना वार्ताकार नियुक्त किया था। इस पर आर्मी चीफ ने कहा कि जब सरकार ने अपनी ओर से वार्ताकार नियुक्त किया था, तो इसका एक मकसद था। वह सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर कश्मीर के लोगों तक अपनी बात पहुंचाएंगे। वे देखेंगे कि लोगों की शिकायतें क्या हैं, जिन्हें राजनीतिक स्तर से सुलझाया जा सकता है।

जनरल रावत ने कहा कि कश्मीर मसले को सुलझाने के प्रयासों में सेना केवल एक हिस्सा है। हमारा मकसद आतंकियों को रोकना और कट्टरपंथ के रास्ते जा रहे लोगों को बचाकर शांति के रास्ते पर लाना है। कुछ स्थानीय युवाओं को कट्टरता के रास्ते पर ले जाने की कोशिश हो रही है और वे आतंकी संगठनों में शामिल हो रहे हैं। इससे निपटने के लिए सेना आतंकी सगठनों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

देश को इमरजेंसी से छुड़ाने का श्रेय आरएसएस को जाता है- केटी थॉमस

सुप्रीम कोर्ट से रिटायर्ड न्यायधीश केटी थॉमस ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस को भारतीयों की रक्षा का सच्चा हितैषी कहा है। रिटायर्ड न्यायधीश ने आरएसएस को संविधान व सेना के बाद तीसरा सच्चा देश की रक्षा करने वाला बताया है। उन्होंने यह बात केरल के कोट्टायम में आरएसएस के एक ट्रेनिंग कैंप को संबोधित करते हुए कही।

केटी थॉमस ने कहा कि अगर किसी संस्था को इमरजेंसी के बाद देश को स्वतंत्र कराने का श्रेय दिया जा सकता है तो वह है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। कोई पूछता है कि देश के लोग सुरक्षित क्यों हैं तो मैं कहना चाहूंगा कि यहां संविधान है, लोकतंत्र है, सेना है और किस्मत से आरएसएस है। इतना ही नहीं, देश को इमरजेंसी के चंगुल से छुड़ाने का श्रेय भी आरएसएस को जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि इमरजेंसी के खिलाफ संघ का मजबूत और सुसंगठित काम तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक भी पहुंचा। वह समझ गईं कि इमरजेंसी को लंबे समय तक नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि संविधान में पंथनिरपेक्षता को परिभाषित नहीं किया गया है।

साल 2002 में हुए रिटायर
थॉमस 1996 में सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त हुए थे और 2002 में रिटायर हुए। इन दिनों वह कोट्टायम जिले के मुत्ताबलम में रह रहे हैं। 2007 में उन्हें न्यायिक सेवाओं में बेहतरीन कार्य करने के लिए पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। थॉमस उस समय सुर्खियों में आए जब उनकी अध्यक्षता वाली बेंच ने राजीव गांधी हत्याकांड में दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।

शोध की जिम्मेदारी हमारे विश्वविद्यालयों की: त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में कृषि विभाग द्वारा आयोजित किसानों की आय दोगुना करने संबन्धी कार्यशाला का उद्घाटन किया। उद्यान और कृषि विभाग की मृदा स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं के कार्यों का एकीकरण मुख्यमंत्री ने उद्यान और कृषि विभाग द्वारा अलग-अलग प्रदान किये जा रहे मृदा स्वास्थ्य कार्डों की व्यवस्था समाप्त करने के निर्देश देते हुए दोनों विभागों की प्रयोगशालाओं को एकीकृत रूप में कार्य करने को कहा।

अब किसान किसी भी लैब से कृषि अथवा औद्यौनिकी के लिये सॉयल हेल्थ कार्ड ले सकेंगे। वर्तमान में कृषि विभाग की प्रत्येक जनपद में एक सॉयल हेल्थ लैब है तथा उद्यान विभाग की दो प्रयोगशाला कुमाऊं मण्डल तथा गढवाल मण्डल में स्थापित है। अब कृषकों को कृषि अथवा औद्यौनिकी किसी भी कार्य हेतु सभी 15 प्रयोगशालाओं की सुविधा मिल सकेगी। अफसर फार्म और फार्मर तक पहुंचे। सीएम किसानों की आय दोगुनी करने संबन्धी कार्यशाला के आयोजन का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तय समयसीमा के भीतर जनपद, ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर तक भी ऐसी गोष्ठियां आयोजित की जाय। कृषि और उद्यान विभाग के अधिकारी किसानों के साथ प्रतिमाह मीटिंग करें।

‘‘ऑफिस में बैठकर नही, खेतों तक जाकर खेती होगी। अफसर फार्म और फार्मर तक पहुंचें’’ मुख्यमंत्री ने कहा। मुख्यमंत्री ने नई तकनीकि को बढ़ावा देने के लिये विश्वविद्यालयों तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

‘‘प्रयोग और शोध की जिम्मेदारी हमारे विश्वविद्यालयों की है’’ मुख्यमंत्री ने कहा। ऐसे निजी उच्च शिक्षण संस्थान जहां कृषि की पढ़ाई होती है उनका भी उपयोग किया जाय। आर्गेनिक खेती को बढावा दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में दस विकासखण्डों को आर्गेनिक खेती के लिये चिन्हित किया गया है। आर्गेनिक खाद के उत्पादन के वर्तमान पारंपरिक तरीके में समय लगता है।

किसानों को नई तकनीकि और प्रक्रियाओं के प्रति प्रोत्साहित किया जाना चाहिये। प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केन्द्रों को इस दिशा में आगे आना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘‘लैब’’ और ‘‘लैण्ड’’ दोनों के ही विशेषज्ञ कार्यशाला में बैठे हैं। किसानेां की आय दोगुना करना, उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समृद्ध करने के लिये ठोस कार्ययोजना बनाकर मिशनरी भाव से काम करना होगा। सिर्फ योजनाएं बनाना काफी नहीं है। लोगों तक जाकर उनको जानकारी देना तथा उनकी मदद करना भी बहुत जरूरी है।

कृषि विभाग ने तैयार की है विस्तृत कार्ययोजना कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में सचिव कृषि डी.सेंथिल पाण्डियन द्वारा एक प्रस्तुतिकरण दिया गया। पाण्डियन ने बताया कि कृषि और औद्यानिकी के क्षेत्र में सेक्टरवार विशेषज्ञ समितियों का गठन कर प्रारंभिक रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इससे मधुमक्खी पालन, आर्गेनिक फार्मिंग, मृदा परीक्षण एवं प्रबंधन, कृषि विपणन, फलफूल, सब्जी, मशरूम उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज चेन, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, भेड़ एवं बकरी पालन, मत्स्य पालन आदि क्षेत्र सम्मिलित है।