धान खरीद के लिए 10 लाख मी.टन का निर्धारित किया लक्ष्य, बनाये जाएंगे 242 क्रय केन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने खरीफ खरीद सत्र 2020-21 के लिए धान क्रय सम्बन्धी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने इस वर्ष 242 धान क्रय केन्द्रों के माध्यम से 10 लाख मी0टन धान क्रय के लक्ष्य पर सहमति व्यक्त की। साथ ही सभी आवश्यक व्यवस्थाये सुनिश्चित करने के निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिये। सीएम ने इस वर्ष ए ग्रेड धान का मूल्य रूपये 1888 प्रति कुंतल तथा औसत धान का रूपये 1868 प्रति कुंतल निर्धारित किये जाने पर भी सहमति जतायी। उन्होंने आगामी 01 अक्टूबर से की जाने वाली धान क्रय के सम्बन्घ में सभी व्यवस्थायें ससमय सुनिश्चित करने को भी कहा।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि धान क्रय के सम्बन्ध में पिछले वर्ष की व्यवस्थाओं में यदि कोई कमी रह गई हो तो उसका संज्ञान लेकर उससे बेहतर व्यवस्थायें सुनिश्चित की जाये। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिये कि क्रय केन्द्रों पर किसानों को कोई परेशानी न हो इसका ध्यान रखा जाय। उन्होंने धान मूल्य का किसानों को अविलम्ब भुगतान की व्यवस्था बनाने को कहा। मुख्यमंत्री ने इस सम्बन्ध में सहकारिता विभाग को आवश्यक धनराशि व्यवस्था करने के साथ ही प्रबन्ध निदेशक मण्डी को भी आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। किसानो को बेहतर सुविधाये उपलब्ध हो इसके लिए किसानों का डाटा तैयार करने पर भी ध्यान देने के निर्देश भी दिये।

मेयर अनिता के प्रयासों से तीर्थनगरी में बनेंगे हाईटेक शौचालय

मेयर अनिता ममगाईं के प्रयासों की बदौलत जल्द ही ऋषिकेश में हाईटेक शौचालय बनने जा रहे है। यह हाईटेक शौचालय के प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को भी बल मिलेगा। मेयर अनिता ममगाईं के इस प्रयास को नगर के लोगों ने सराहना की है। इसके लिए नगर निगम ऋषिकेश के स्तर से जल्द ही निविदा प्रक्रिया शुरू होने जा रही हैं। मेयर अनिता ममगाई ने कहा कि अच्छे शौचालय देने का वाला वायदा उन्होंने चुनावी घोषणा पत्र में किया था। योजना को जमीनी धरातल पर लाने के लिए कार्य प्रारंभ हो गया है।

निगम की इस योजना को शहरी विकास निदेशालय ने स्वीकृति दी है। निगम ने निदेशालय को 229 सीट का प्रस्ताव दिया था जिसमें उन्होंने प्रथम चरण में 29 लाख रुपए रिलीज कर दिए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के मद के द्वारा यह धनराशि दी जा रही है। उन्होंने बताया कि निगम द्वारा सभी टॉयलेट का एक सर्वे करवाया गया। उस सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर निदेशालय से धनराशि की मांग की गई थी जिसपर निदेशालय की स्वीकृति की मुहर लग चुकी है।

कहा कि भीड़-भाड़ वाले इलाके में शौचालय नहीं होने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अब इस परेशानियों से लोगों को निजात मिलेगा। शौचालय पूरा हाइटेक बनेगा। इन्होंने बताया कि शौचालय के अंदर साफ-सफाई की पूरी व्यवस्था रहेगी एवं इनका निर्माण फाइव स्टार होटलों के टॉयलेट की तरह किया जाएगा।

भर्ती परीक्षाओं का आयोजन समयबद्धता के साथ करने के निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा की। उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं को निर्धारित टाईम टेबल में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोरोना के लिए जरूरी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए भर्ती परीक्षाओं का आयोजन समयबद्धता से किया जाए। इसमें किसी भी स्तर पर शिथिलता न की जाए। मुख्यमंत्री ने सचिवालय के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि विभागों से चयन आयोगों को अधियाचन भेजने में विलम्ब न हो, इसके लिए एक ऑनलाईन व्यवस्था बनाई जाए।

समान प्रकृति के पदों की एक ही परीक्षा हो
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि एक जैसी प्रकृति के पदों के लिए एक ही परीक्षा आयोजित की जाए। इससे परीक्षार्थियों के समय व धन की बचत होगी और भर्तियों में भी अनावश्यक विलम्ब नहीं होगा। राज्य लोक सेवा आयोग जब एक बार डीपीसी की तिथि निर्धारित कर देता है तो यह संबंधित अधिकारियों की अनुपलब्धता के कारण स्थगित नहीं होनी चाहिए।

अधियाचन पर चयन आयोग की आपत्तियों का जवाब अधिकतम तीन दिन में
चयन आयेग द्वारा की जाने वाली पृच्छाओं व आपत्तियों पर जवाब अधिकतम तीन दिनों में चला जाना चाहिए। कार्मिक विभाग प्रत्येक माह विभागों की भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा करे और विभागों व चयन आयोगों में समन्वय स्थापित करे।

लक्ष्य निर्धारित कर हो काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के कारण भर्ती प्रक्रियाओं में विलम्ब हुआ है। इसकी भरपाई अगले 6 माह में किस प्रकार की जा सकती है, इसकी कार्ययोजना बना ली जाए। टार्गेटेड तरीके से काम करते हुए चयन आयोगों के साथ ही शासन स्तर पर भी इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया जाए।

उत्तराखण्ड राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल (से.नि.) श्री आनंद सिंह रावत ने बताया कि वर्ष 2017 से वर्तमान तक राज्य लोक सेवा आयोग से 3047 पदों पर चयन किया गया। जबकि 1145 पदों पर चयन प्रक्रिया गतिमान है जो कि इस वित्तीय वर्ष में पूर्ण कर ली जाएगी। आयोग ने इस वर्ष विभिन्न पदों के लिए टाईम टैबल बना लिया है। इसके अनुसार चयन सुनिश्चित किया जा रहा है। वर्ष 2017 से वर्तमान तक डीपीसी द्वारा कुल 2647 पदों पर चयन किया गया है जबकि 219 पदों पर डीपीसी की प्रक्रिया गतिमान है।

उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष श्री एस.राजू ने बताया कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा वर्ष 2017 से 2020 तक कुल 6 हजार पदों पर चयन पूर्ण किया गया। जबकि 2014 से 2017 तक 801 पदों पर चयन किया गया था। वर्तमान में 9 परीक्षाएं कोविड-19 के संक्रमण के कारण लंबित हैं। इनमें से 7 परीक्षाएं अक्टूबर से दिसम्बर तक आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। चयन वर्ष 2019-20 व 2020-21 में लगभग 7200 पदों पर अधियाचन प्राप्त हुए हैं इनमें से लगभग 2500 पदों पर विज्ञापन प्रकाशित किया जा चुका है जबकि 4 हजार पदों पर विज्ञापन की कार्यवाही प्रगति पर है।

उत्तराखण्ड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष डा.डीएस रावत ने बताया कि 2017 से अभी तक कुल 1282 का चयन किया गया। बोर्ड को वर्तमान में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, चिकित्साधिकारी, एक्स-रे टेक्नीशियन, ईसीजी टेक्नीशियन, रेडियोग्राफिक्स, राजकीय मेडिकल कालेजों में विभिन्न तकनीशियन के पदों सहित कुल 1351 पदों के अधियाचन प्राप्त हैं। इन पर चयन प्रकियाएं निश्चित टाईमफ्रेम में पूरा कर लिया जाएगा।

अब घर में जैविक खाद बनाकर किचन गार्डन में करें उपयोगः अनिता

ऋषिकेश की प्रथम मेयर अनिता ममगाईं ने वेस्ट टू कंपोस्ट का तहसील स्थित सरकारी आवास में शुभारंभ किया। वेस्ट टू कंपोस्ट से कूड़ा निस्तारण में मदद मिलेगी। मेयर अनिता ने कहा कि यह एक नई शुरूआत है, इससे जैविक खाद बनेगी, जिसका इस्तेमाल लोग अपनी किचन गार्डन में कर सकेंगे।

नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वीरियाल ने अपने सरकारी निवास में एक पिट बनाई है। मेयर ने बताया कि यह काम नागरिक अपने घर में भी कर सकते हैं। मेयर अनिता ने बताया कि जल्द ही खाद बनाने वाली मशीन कंपोस्टर भी निगम लगाएगा। बताया कि निगम का लक्ष्य प्रत्येक वार्ड में कंपोस्ट पिट लगाना है। इसके लिए जमीनी धरातल पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इससे निगम लोगों को खाद के जरिए रोजगार उत्पन्न करने का अवसर प्रदान करेगा।

मेयर अनिता ने बताया कि योजना में रूचि रखने वाले प्रत्येक नागरिक को निगम निगम की ओर से मदद की जाएगी। निगम आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वीरियाल ने बताया कि कम्पोस्ट पिट 76 फीट लंबी व छह फीट चैड़ी है। इसमें पांच हजार किलो गीला कूड़ा डाल सकते हैं। दो महीने में ढाई हजार किलो तक ऑर्गेनिक खाद बनेगी।
कंपोस्ट इंजीनियर रोहित के मुताबिक अगर कोई घर में कंपोस्ट पिट बनवाना चाहता है तो उसका खर्चा 4 से 5 हजार के बीच में आता है। यह ऑर्गेनिक खाद नर्सरी में 8 से 10 रुपया और ऑनलाइन 50 से 100 किलो तक बिक रही है, जिससे रोजगार भी उत्पन्न होगा।

जनता से किए 85 फीसदी वायदे पूरे किए, स्वरोजगार पर फोकसः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीवों से फसलों की सुरक्षा के लिए व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही है। इसमें 4 वानर रेस्क्यू स्ेंटरों की स्थापना, 125 किमी जंगली सूअर रोधी दीवार, 50 किमी सोलर फेंसिंग, 13 किमी हाथी रोधी दीवार, 250 किमी हाथी रोधी खाईयों का निर्माण शामिल है। महिला पौधालयों की स्थापना पर भी काम किया जा रहा है जिसमें कि लगभग 20 हजार महिलाओं को रोजगार सम्भावित है। एक वैश्विक स्तर का साईंस कॉलेज और प्रदेश के 5 हजार स्कूलों में हिमालय इको क्लबों की स्थापना की कार्ययोजना भी बनाई गई है।

रोजगार
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल पर वर्चुअल प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि अपै्रल 2017 से सितम्बर 2020 तक विभिन्न विभागों के अंतर्गत कुल 7 लाख 12 हजार से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया गया। इनमें से नियमित रोजगार लगभग 16 हजार, आउटसोर्स-अनुबंधात्मक रोजगार लगभग 1 लाख 15 हजार और स्वयं उद्यमिताध्प्राईवेट निवेश से प्रदानध्निर्माणाधीन परियोजनाओं से रोजगार लगभग 5 लाख 80 हजार है।
उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा की गई भर्तियों की बात की जाए तो इसके माध्यम से वर्ष 2014 से 2017 तक कुल 08 परीक्षाएं आयेजित की गईं जिनमें 801 पदों पर चयन पूर्ण किया गया। जबकि वर्ष 2017 से 2020 तक कुल 59 परीक्षाएं आयोजित की गईं जिनमें 6000 पदों पर चयन पूर्ण किया गया। वर्तमान में उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में 7200 पदों पर अधियाचन-भर्ती प्रक्रिया गतिमान है। मनरेगा में प्रति वर्ष 6 लाख लोगों को रोजगार दिया जाता है। कोविड के दौरान इसमें अतिरिक्त रोजगार दिया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में 84 हजार अतिरिक्त परिवारों (2 लाख अतिरिक्त श्रमिकों) को रोजगार दिया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में 170 करोड़ रूपए अतिरिक्त व्यय किए गए हैं। आगामी तीन माह में कैम्पा के अंतर्गत 40 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की कार्ययोजना है। युवाओं और प्रदेश में लौटे प्रवासियों के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की गई। एमएसएमई के तहत इसमें ऋण और अनुदान की व्यवस्था की गई है। इसमें लगभग 150 प्रकार के काम शामिल किए गए हैं।

गैरसैंण, उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी
गैरसैंण को उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया गया। इसकी विधिवत अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। अब गैरसैण में राजधानी के अनुरूप आवश्यक सुविधाओं के विकास की कार्ययोजना बनाई जा रही है। भविष्य की आवश्यकताओं, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की दृष्टि से चारधाम देवस्थानम बोर्ड का गठन किया गया है। इसमें तीर्थ पुरोहित और पण्डा समाज के लोगों के हक हकूक और हितों को सुरक्षित रखा गया है। अटल आयुष्मान योजना में राज्य के सभी परिवारों को 5 लाख रूपए वार्षिक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा देने वाला उत्तराखण्ड, देश का पहला राज्य है। अभी 2 लाख 5 हजार मरीजों को योजना में निशुल्क उपचार मिला है। जिस पर 180 करोड़ रूपए से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। नेशनल पोर्टेबिलिटी की सुविधा देते हुए देशभर के 22 हजार से अधिक अस्पताल इसमें सूचीबद्ध हैं।

कार्यसंस्कृति में सुधार
ई-कैबिनेट, ई-ऑफिस, सीएम डैश बोर्ड उत्कर्ष, सीएम हेल्पलाईन 1905, सेवा का अधिकार और ट्रांसफर एक्ट की पारदर्शी व्यवस्था के चलते कार्यसंस्कृति में गुणात्मक सुधार हुआ है। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस सरकार की प्रमुख नीति है। इन्वेस्टर्स समिट के बाद पहले चरण में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है। अगले डेढ़ वर्ष में इसे 40 हजार करोड़ तक करने का लक्ष्य रखा गया है।

रिवर्स पलायन पर सुनियोजित प्रयास
पर्वतीय राज्य की अवधारणा से बने उत्तराखण्ड में पहली बार किसी सरकार ने रिवर्स पलायन पर सुनियोजित तरीके से काम शुरू किया है। एमएसएमई के केंद्र में पर्वतीय क्षेत्रों को रखा गया है। सभी न्याय पंचायतों में क्लस्टर आधारित एप्रोच पर ग्रोथ सेंटर बनाए जा रहे हैं। 100 से अधिक ग्रोथ सेंटरों को मंजूरी भी दी जा चुकी है। बहुत से ग्रोथ सेंटर शुरू भी हो चुके हैं। हर गांव में बिजली पहुंचाई गई है। किसानों को तीन लाख रूपए और महिला स्वयं सहायता समूहों को पांच लाख रूपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के गन्ना किसानों को अवशेष गन्ना मूल्य का शत प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित किया गया है।

नए पर्यटन केद्रो का विकास
13 डिस्ट्रिक्ट-13 न्यू डेस्टीनेशन से नए पर्यटन केंद्रों का विकास हो रहा है। होम स्टे योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। विभिन्न रोपवे प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। जलसंरक्षण और जलसंवर्धन पर काफी काम किया गया है। प्रदेश की नदियों, झीलों, तालाबों और जलस्त्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए व्यापक जनअभियान शुरू किया गया है।

डबल इंजन का असर
डबल इंजन का असर साफ-साफ देखा जा सकता है। केंद्र सरकार द्वारा लगभग एक लाख करोड़ रूपए की विभिन्न परियोजनाएं प्रदेश के लिए स्वीकृत हुई हैं। बहुत सी योजनाओं पर तेजी से काम भी चल रहा है। इनमें ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, चारधाम सड़क परियोजनाघ्, केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण, भारतमाला परियोजना, जमरानी बहुद्देशीय परियोजना, नमामि गंगे, भारत नेट फेज -2 परियोजना, एयर कनेक्टीवीटी पर किया जा रहा काम मुख्य है। उत्तराखण्ड पहला राज्य है जहां उड़ान योजना में हेली सेवा प्रारम्भ की गई है। श्री बदरीनाथ धाम का भी मास्टर प्लान बनाया गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
पिछले लगभग साढ़े तीन वर्षों में उत्तराखण्ड ने विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। नीति आयोग द्वारा जारी ‘‘भारत नवाचार सूचकांक 2019’’ में पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों की श्रेणी में उत्तराखण्ड सर्वश्रेष्ठ तीन राज्यों में शामिल है। राज्य को 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट घोषित किया गया। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड को सात पुरस्कार मिले हैं। ‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ अभियान में ऊधमसिंह नगर जिले को देश के सर्वश्रेष्ठ 10 जिलों में चुना गया। उत्तराखंड को खाद्यान्न उत्पादन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दूसरी बार कृषि कर्मण प्रशंसा पुरस्कार दिया गया। जैविक इंडिया अवार्ड 2018 के साथ ही मनरेगा में देशभर में सर्वाधिक 16 राष्ट्रीय पुरस्कार राज्य को मिले। मातृत्व मृत्यु दर में सर्वाधिक कमी के लिए उत्तराखण्ड को भारत सरकार से पुरस्कृत किया गया है।

लोक कल्याणकारी सरकार
आंगनबाड़ी कार्यकत्री, आंगनबाड़ी सहायिका, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकत्री के मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांगजन पेंशन की राशि को 1000 रूपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 1200 रूपए प्रतिमाह किया गया। ग्राम प्रहरियों का मानदेय रूपए 2000 हजार प्रतिमाह किया गया। दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत किया गया। उत्तराखण्ड पहला राज्य है जहां अनाथ बच्चों की चिंता करते हुए उनके लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण की व्यवस्था की गई है। दुर्घटना राहत राशि को मृत्यु पर 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख, गम्भीर घायल होने पर 20 हजार से बढ़ाकर 40 हजार और साधारण घायल होने पर 5 हजार से बढ़ाकर 10 हजार रूपए किया है। शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को उसकी योग्यता अनुसार सरकारी नौकरी दी जा रही है। विशिष्ट सेवा पदक से अलंकृत सैनिकों को अनुमन्य राशि में कई गुना बढ़ोतरी की है।

कोविड-19 से लड़ाई, हेल्थ सिस्टम को मजबूती
उत्तराखण्ड में सभी के सहयोग से कोविड-19 से लड़ाई लड़ी जा रही है। परिस्थितियों के अनुसार निर्णय ले रहे हैं। सर्विलांस, सेम्पलिंग, टेस्टिंग पर फोकस किया जा रहा है। राज्य में हेल्थ सिस्टम को मजबूत किया गया है। पर्याप्त संख्या में कोविड अस्पताल, आइसोलेशन बेड, आईसीयू बेड, आक्सीजन सपोर्ट बेड और वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। अब राज्य के सभी जनपदों में आई0सी0यू0 स्थापित किए जा चुके हैं। मार्च में राज्य में कोरोना संक्रमण की टेस्टिंग सुविधा नहीं थी। वर्तमान में 5 सरकारी और विभिन्न प्राईवेट लेब में कोविड-19 के सेम्पल की जांच की जा रही है। वर्तमान में 481 आईसीयू बेड, 543 वेंटिलेटर, 1846 आक्सीजन सपोर्ट बेड, 30500 आईसोलेशन बेड उपलब्ध हैं। रुद्रपुर, हरिद्वार और पिथौरागढ़ में भी मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं। पिछले लगभग तीन साल में पर्वतीय क्षेत्रों में डाक्टरों की संख्या में पहले से लगभग ढाई गुना वृद्धि की गई है। टेलीमेडिसीन और टेलीरेडियोलोजी भी लाभदायक साबित हो रही हैं।

कुपोषित बच्चों को गोद लेने का अभियान सफल दिशा में जा रहाः त्रिवेंद्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कुपोषण मुक्त उत्तराखण्ड के लिए शुरू किये गये गोद अभियान में कुपोषण मुक्त बच्चों के अभिभावकों को सम्मानित किया। कहा कि प्रधानमंत्री ने कुपोषण मुक्त भारत का जो अभियान चलाया है। इस दिशा में स्वयं सेवी संस्थाओं, जन प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने बच्चों को गोद लेकर उनको कुपोषण मुक्त करने की दिशा में अच्छा कार्य किया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि एक वर्ष पूर्व अति कुपोषित बच्चों को गोद लेने का जो अभियान शुरू किया गया था, इसके अच्छे परिणाम रहे। बच्चों को कुपोषण मुक्त बनाने में माँ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बच्चों की नियमित एवं संतुलित खान-पान से कुपोषित बच्चे जल्द सामान्य श्रेणी में आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के कुपोषित होने पर उसका नुकसान न केवल बच्चे के माता-पिता पर पड़ता है, बल्कि पूरे समाज को इसका नुकसान होता है। कुपोषण मुक्त भारत बनाने के लिए हम सबको प्रयास करने होंगे।

सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास सौजन्या ने कहा कि कुपोषण मुक्त उत्तराखण्ड के लिए शुरू किये गये गोद अभियान को आगे भी जारी रखा जायेगा। पिछले वर्ष जब यह अभियान शुरू हुआ था, तब राज्य में 1700 अति कुपोषित एवं 12 हजार कुपोषित बच्चे थे। इस अभियान के तहत 9 हजार 177 बच्चों को गोद लिया गया। जिसमें से 2349 बच्चों के ग्रेड में सुधार हुआ है। बच्चों को आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के माध्यम से टेक होम राशन का घरों में वितरण किया जा रहा है। सरकार द्वारा अतिकुपोषित एवं कुपोषित बच्चों को प्रति सप्ताह दो-दो दिन अण्डा, केला एवं दूध दिया गया, इससे भी बच्चों को कुपोषण से सामान्य श्रेणी में लाने में मदद मिली।

त्रिवेंद्र सरकार कर रही कोरोना संक्रमण पर वार

चीन की लैब से जन्मे कोरोना वायरस ने आज संपूर्ण विश्व को अपनी चपेट में ले रखा है। भारत में ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 49,30,236 लोग संक्रमित हो चुके है, जबकि 38,59,399 मरीज कोरोना से जंग जीत चुके है। वहीं, 80,776 ने संघर्ष करते हुए कोरोना से जंग हार ली। उत्तराखंड में नजर डालें तो यहां अब तक एक्टिव केस मात्र 5445 हैं, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम हैं। मगर, इन आंकड़ों से संतुष्ट होने के बजाए इसे रोकना एक चुनौती है और इस चुनौती को उत्तराखंड की त्रिवेन्द्र सरकार ने स्वीकार किया है। त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार लगातार इस मामले में अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। इसके लिए राज्य सरकार ने 104 हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। यहीं नहीं, शुरूआत से ही रावत सरकार ने एक्टिव केस को बढ़ने से रोकने को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए, इनमें राज्य की सीमाओं पर पुलिस की चैकसी है।

कोरोना संक्रमण और लाॅकडाउन के चलते राज्य के ज्यादातर नागरिकों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है, ऐसे में कोरोना टेस्ट शुल्क व्यय करना भी इन नागरिकों के लिए काफी मुश्किल था। इस मुश्किल दौर में त्रिवेंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा राहत पहुंचाने वाला फैसला लिया। निजी अस्पतालों में अटल आयुष्मान योजना के तहत कोरोना का ईलाज किया जायेगा। यह अन्य रोगों की भांति निःशुल्क होगा। वहीं इस फैसले के अलावा भी प्रदेश के निजी अस्पतालों में केंद्र की ओर से तय दरों का 80 प्रतिशत उपचार शुल्क लिया जाएगा। इसमें 1200 और 2000 रुपये पीपीई किट का खर्च और बिस्तर, भोजन, निगरानी, नर्सिंग देखभाल, डॉक्टरों का परामर्श, कोविड जांच ऑक्सीजन समेत अन्य सुविधाएं भी शामिल हैं।

लोगों में कोरोना के प्रति जागरूकता लाने के लिए त्रिवेंद्र सरकार ने राज्य की पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं। राज्य में बिना मास्क आवागमन करने वाले लोगों पर पुलिस चालानी कार्रवाई कर मास्क उपलब्ध करवा रही है, तो वहीं, सोशल डिस्टेंस का पालन कराने में भी मित्र पुलिस अहम रोल अदा कर रही है। स्वयं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनका मंत्रिमंडल भी इस नियम को फाॅलो कर रहा है।

एक्टिव केस को बढ़ने से रोकने के लिए सरकार ने अब अहम निर्णय लिया है, इसके चलते नेगेटिव रिपोर्ट के बिना कोई भी राज्य की सीमा पर प्रवेश नहीं कर सकेगा। चार दिन की नेगेटिव रिपोर्ट लेकर आने वालों को क्वांरटीन नहीं होना होगा। रिपोर्ट न होने पर कोविड लोड शहरों से आने वालों को सात दिन संस्थागत क्वारंटीन जबकि अन्य शहरों से आने वालों को 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन होना होगा।

इसके अलावा सरकार ने सावन मास की कांवड़ यात्रा को स्थगित किया लेकिन आस्था से कोई समझौता ना करते हुए गंगाजल को अन्य शहरों में उपलब्ध कराया। इससे कोरोना के मामले में बढ़ोतरी होने से बड़ी कामयाब मिली। इसके अलावा त्रिवेंद्र सरकार ने 21 सितंबर से कक्षा नौ और 12वीं तक के छात्रों के लिए खुलने जा रहे स्कूलों पर भी रोक लगा दी है। राज्य सरकार का यह निर्णय कोरोना के मामले को रोकने में महत्वपूर्ण निर्णय साबित हो रहा है। सरकार के इस निर्णय से न सिर्फ अभिभावक बल्कि विशेषज्ञों ने भी सराहा है।

शासन के बड़े अधिकारियों की मानें तो सरकार ने कोरोना की रोकथाम के लिए जिस प्रकार से कार्य किया है वह अन्य राज्यों की तुलना में इक्कीस साबित हुआ है। कोविड सेन्टर के लिए सरकार ने प्राईवेट सेन्टर बनाये है जिनमें कई होटल भी शामिल है। जिससे लोगों को बड़ी राहत मिल रही है। शुरुआत दौर में सरकार को थोड़ा कठिनाई जरुर हुई लेकिन मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत की इच्छा शक्ति से इस ओर कामयाबी मिली है। निरन्तर जिलाधिकारियों और शासन के उच्च स्तर के अधिकारियों से संवाद और निर्देशन मुख्यमंत्री की कार्यकुशलता को दर्शाता है।

बाल कलाकारों की मेयर अनिता ने की प्रशंसा, पुरस्कार देकर सम्मानित किया

निर्धन बच्चों में अपार प्रतिभाएं होती हैं, उन्हें संवारा जाए तो यह बच्चे नया मुकाम हासिल कर सकते है। इससे इनकी निर्धनता भी दूर होगी और दूसरों को सीख भी मिलेगी। मेयर अनिता ममगाईं ने यह बात निर्धन बाल कलाकारों को पुरस्कार देने के दौरान कही।

कबाड़ से जुगाड़ कार्यशाला में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया। मेयर अनिता ममगाईं ने कहा कि यूएनडीपी के सहयोग से ट्रेंचिंग ग्राउंड के इर्द-गिर्द रहने वाले निर्धन बच्चों की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के कार्यशाला आयोजित की गई थी जिसमें 70 बच्चों ने अपनी कला के टैलेंट को संवारा। इस दौरान उनके द्वारा खूबसूरत गमले बनाए गए जिन्हें रंगों से भी सजाया गया था। अब इन गमलों पर निगम प्रशासन द्वारा पौधे लगाकर उन्हें शहर के विभिन्न स्थानों पर लगाया जायेगा।

तीन सप्ताह में टिहरी डीएम होगें रिलीव, नई नियुक्ति पीएमओ कार्यालय में होगी

जनपद टिहरी के जिलाधिकारी व आईएएस अफसर मंगेश घिल्डियाल को नई जिम्मेदारी मिली है। उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय में अंडर सेक्रेटरी के पद पर चार वर्ष के लिए नई जिम्मेदारी मिली है। इसकी पुष्टि स्वयं डीएम मंगेश घिल्डियाल ने की है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें जिम्मेदारी मिली है। मैं पूरी निष्ठा के साथ जिम्मेदारी निभाऊंगा।

केंद्रीय कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग के निदेशक जे श्रीनिवासन ने मुख्य सचिव ओम प्रकाश से उन्हें रिलीव करने को कहा है। डीएम घिल्डियाल को तीन सप्ताह के भीतर नई जिम्मेदारी को ग्रहण करना होगा।

जब सही नीयत हो तो कोई भी योजना लाभार्थी तक जरूर पहुंचती हैः पीएम

मध्य प्रदेश में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पौने दो लाख आवासों को वर्चुअल कार्यक्रम के जरिए हितग्राहियों को सौंपा। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में प्रधानमंत्री आवास योजना का काम तीव्र गति से हुआ। कहा कि आमतौर पर जो प्रधानमंत्री आवास 125 दिन में बनता था, वह कोरोना काल में मात्र 45 से 60 दिन में बनाया गया है। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम के दौरान गरीबों के घर के लिए बनने वाली पुरानी योजनाओं की कमियों को रखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना की खूबियों को गिनाया।

पीएम बोले, जब सही नीयत से कोई योजना बनती है तो उसका लाभ लाभार्थी तक पहुंचता है। कहा कि जिन्हें घर मिला, अब वे बेहतर भविष्य के लिए बच्चों को पढ़ाएं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने को हितग्राही नरेंद्र नामदेव की पत्नी ने आशीर्वाद देते हुए उन्हें घर आमंत्रित किया। जिसे प्रधानमंत्री ने सहर्ष स्वीकार भी किया।