एम्स का स्टाफ अब अधिग्रहित होटलों में ठहराया जायेगा

ऋषिकेश एम्स में भर्ती कोरोना पॉजिटिव महिला की मौत के बाद नगर निगम प्रशासन सहित जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है। हालांकि महिला की मौत ब्रेन हैमरेज से हुई है। शुक्रवार सुबह आनन फानन में मेयर अनिता ममगाईं ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की और ताजा हालातों पर चर्चा की।
इस दौरान ऋषिकेश नगर निगम प्रशासन ने एम्स हॉस्पिटल के चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के रहने के लिए शहर के तमाम प्रमुख होटलों को अधिग्रहण करने का निर्णय लिया है। तेजी से बदल रहे हालातों को देखते हुए शहर के होटलों को क्वारंटीन सेंटर बनाए जाने की कवायद तेज कर दी गई है। शुक्रवार को बैठक में ऋषिकेश के होटलों को क्वारंटीन सेंटर बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण परिस्थितियां रोज बदल रही हैं। माना जा रहा कि आने वाले कुछ दिन और चुनौती भरे हैं। इनसे निपटने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। लॉकडाउन के चलते पर्यटकों की आवाजाही रुकी हुई है। सभी होटल खाली हैं। प्रशासन अपनी तरफ से ज्यादा से ज्यादा क्वारंटीन सेंटर बनाकर उन्हें आरक्षित रखना चाहता है। निगम आज से ही इन होटल को सैनिटाइजेशन करने का कार्य शुरू कर देगा।
बैठक में नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वींरियाल, उपजिलाधिकारी प्रेमलाल, आईएएस अधिकारी अपूर्वा पांडेय, पुलिस उपाधीक्षक वीरेंद्र रावत, तहसीलदार रेखा आर्य, कोतवाली प्रभारी रितेश शाह, मौजूद थे।

एम्स कर्मियों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य की जांच शुरू
टिहरी जिले में कोरोना संक्रमण के प्रवेश को रोकने के लिए सीआरटी (सिटी रिस्पांस टीम) ने एम्स कर्मियों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य की जांच शुरू कर दी है। सभी की थर्मल स्क्रीनिंग और सामान्य परीक्षण किए जा रहे हैं। इस दौरान सभी को होम क्वारंटीन रहने के विशेष निर्देश भी दिए गए। बीते दिनों सीआरटी की टीम ने ढालवाला, मुनिकीरेती और तपोवन क्षेत्र से एम्स में कार्य करने वाले 40 कर्मियों को चिह्नित किया था।
तहसीलदार मंजू राजपूत के नेतृत्व में सीआरटी ने इन एम्स कर्मियों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य की जांच शुरू की। स्वास्थ्य विभाग फकोट के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. जगदीश जोशी ने बताया कि निश्चित अंतराल पर लगातार इन सभी के स्वास्थ्य की पुनरू जांच की जाएगी। पालिका के अधिशासी अधिकारी और सीआरटी के नोडल अधिकारी बद्री प्रसाद भट्ट ने बताया कि होम क्वारंटीन के दौरान केवल एम्स में कार्यरत कर्मी ही घर से बाहर ड्यूटी के लिए आवाजाही कर सकेगा। इस मौके पर सीआरटी के प्रभारी रूपेश भट्ट, अनूप सकलानी, जाबिर अली, विकास सेमवाल आदि उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने दिलाया भरोसा, आपके द्वारा दिये गये दान से जरुरतमंद को हो रही मदद

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम, बचाव व राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मुख्यमंत्री राहत कोष में अब तक प्राप्त धनराशि के साथ ही राहत एवं बचाव कार्यों पर व्यय हुई धनराशि की समीक्षा की। उन्होंने कहा है कि वर्तमान में पूरे विश्व के साथ ही देश एवं प्रदेश में कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी के कारण आम जनमानस के स्वास्थ्य एवं आर्थिक सुरक्षा के लिये गम्भीर चुनौतियां पेश हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संकट के समय देश एवं प्रदेश की जनता द्वारा उदारतापूर्वक मुख्यमंत्री राहत कोष में दान दिया जा रहा है जिसमें देश एवं प्रदेश के प्रत्येक वर्ग जिसमें सफाई कर्मियों, दैनिक वेतनभोगियों, कर्मचारियों, अधिकारियों, महानुभावों, विभिन्न संगठनों, स्वंयसेवी संस्थाओं, विभिन्न निगमों, शैक्षणिक संस्थाओं, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों एवं आम जनमानस आदि से अभी तक लगभग 55 करोड दान के रूप में प्राप्त हुये हैं। मुख्यमंत्री ने इसके लिए सभी दान-दाताओं का हार्दिक आभार प्रकट करते हुये धन्यवाद भी ज्ञापित किया है।
मुख्यमत्री ने कहा कि राज्य स्तर पर इस आपदा कि स्थिति से निपटने हेतु जिन कार्यों में भारत सरकार, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं किसी अन्य मद से वित्तीय स्वीकृति दिया जाना संभव नहीं था उनमें मुख्यमंत्री राहत कोष से धनराशि आवंटित की जा रही है। मुख्यमंत्री राहतकोष से मुख्यतः बेसहारा, निर्धन, असंगठित क्षेत्र के मजदूरो और जरूरतमंद छात्र-छात्राओं, पर्यटकों आदि की भोजन व्यवस्था हेतु जिलाधिकारियों को 30 करोड़, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार व सुदृढीकरण हेतु 10 करोड रूपये चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग को, 10 करोड चिकित्सा शिक्षा विभाग को, कोविड-19 के संक्रमण के दृष्टिगत चिन्हित किये गये गढवाल एवं कुमॉंऊ मण्डल के पर्यटक गृहो में कोरनटाईन सुविधायें विकसित किये जाने हेतु 1.00 करोड़ पर्यटन विभाग को, लाकडाउन में राज्य के विभिन्न स्थानों मे फॅंसे पर्यटकों व तीर्थ यात्रियों को उनके गन्तव्य तक पहुचाने के दृष्टिगत 1 करोड परिवहन निगम को एवं नई दिल्ली मे फॅसे उत्तराखण्ड के जरूरतमंदो की भोजन व ठहरने आदि की व्यवस्था हेतु 50 लाख अपर स्थानिक आयुक्त को आवंटित किये गये हैं। साथ ही कोविड-19 के संक्रमण, बचाव व राहत कार्यों में तैनात कोरोना वारियर्स के जीवन को यदि दुर्भाग्यवश क्षति होती है तो उनके आश्रितों को सम्मान निधि के रूप में 10 लाख दिये जाने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री का मानना है कि किसी भी आपदा की स्थिति का बेहतर ढंग से सामना करने हेतु सार्वजनिक भागीदारी सबसे प्रभावी तरीका है जिसमें हम सब मिलकर COVID-19 को हराने में समर्थ होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा अवगत कराया कि मुख्यमंत्री राहत कोष, उत्तराखण्ड के पक्ष मे बैंक ड्राफ्ट/चैक के साथ ही भारतीय स्टेट बैंक, सचिवालय शाखा मे संचालित खाता संख्या-30395954328 IFSC Code-SBIN0010164 मे UPI ID: cmukrf@sbi, Debit Cards and Credit Cards, Internet Banking, Internet Banking, UPI (BHIM, PhonePe, Amazon Pay, Google Pay, PayTM, etc के साथ ही सीधे मुख्यमंत्री राहत कोष, उत्तराखण्ड की Website-www.cmrf.uk.gov.in के माध्यम से धनराशि दान की जा सकती है।
सचिव मुख्यमंत्री राधिका झा ने बताया कि कतिपय उद्योग, कम्पनियां, व्यवसायिक प्रतिष्ठान CSR के तहत भी COVID-19 के दृष्टिगत राज्य को वित्तीय सहायता देने के इच्छुक हैं। उन्होंने इस सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित संस्थानों से अपेक्षा की है कि वह उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (Disaster Management Authority) के पक्ष मे भारतीय स्टेट बैंक, सचिवालय शाखा में संचालित खाता संख्या-39282041468 IFSC Code-SBIN0010164 मे अपना योगदान कर सकते हैं।

ग्रीन जोन के जिलों में सुबह सात से शाम छह बजे तक खुलेंगी दुकानें

उत्तराखंड में 9 जिलों में आज से लॉकडाउन में छूट दी जा रही है। केन्द्र सरकार द्वारा दुकानों को खोले जाने के संबंध में जारी गाइडलाइन पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित बैठक में विचार विमर्श किया गया।
बैठक में तय किया गया कि ग्रीन जोन वाले नौ पर्वतीय जिलों में केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार दुकानों को खोला जाएगा। यहां दुकानें सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक खुलेंगी। शराब, नाई, होटल और रेस्टोरेंट आदि जिन दुकानों को प्रतिबंधित रखा गया है, उन दुकानों को बंद रखा जाएगा।
चार जिलों देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंहनगर में वर्तमान की स्थिति बरकरार रहेगी। इन जिलों में आवश्यक वस्तुओं की दुकानें पहले की तरह सुबह सात से दोपहर एक बजे तक ही खुलेंगी। इन चार जिलों में यदि किन्हीं क्षेत्रों में शिथिलता दी जानी है तो उसके संबंध मे संबंधित जिलाधिकारी निर्णय लेंगे। इंटर स्टेट व इंटर डिस्ट्रिक्ट यातायात पर पहले की तरह ही रोक रहेगी।

हर हाल में सोशल डिस्टेंसिंग का करना होगा पालन
मुख्यमंत्री ने निजी निर्माण कार्यों की अनुमति दिये जाने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन यह सुनिश्चित कर ले कि सोशल डिस्टेंसिंग को हर हाल में बनाए रखा जाए। लोग बिना काम के बाहर न निकलें।
घर से बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग करें। मुख्यमंत्री ने छूट के दायरे में आने वाले नौ जिलों के लोगों से अपील की है कि जरूरी होने पर ही घर से निकले, अनावश्यक बाहर न जाएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करें। बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल कुमार रतूङी, सचिव अमित नेगी, नितेश झा, शैलेश बगोली, राधिका झा उपस्थित थे।

किसानों को राहत, त्रिवेन्द्र सरकार ने कृषि उत्पाद खरीदने की खुली छूट दी

लॉकडाउन के कारण किसानों को आ रही दिक्कतों को देखते हुए त्रिवेन्द्र सरकार ने बिना लाइसेंस कृषि उत्पाद खरीदने की छूट किसान समूहों, सहकारी समितियों व किसान उत्पादक संगठनों को दी है। अब लोग सीधे किसानों से कृषि उत्पाद की खरीद कर सकते हैं। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की ओर से जारी अधिसूचना 20 अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू हो गई है।
कोरोना वायरस को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने लॉकडाउन को तीन मई 2020 तक बढ़ाया है। इस कारण प्रदेश के किसानों को कृषि उत्पाद बेचने और भंडारण करने में दिक्कतें आ रही हैं। किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने उत्तराखंड कृषि उत्पाद (विकास एवं विनियमन) अधिनियम की व्यवस्था को अतिक्रमित कर कृषि उत्पाद खरीदने की खुली छूट दे दी है।
अधिसूचना के अनुसार लॉकडाउन अवधि में राज्य में घोषित मंडी क्षेत्र के तहत किसान समूह, किसान उत्पादक संगठन, सहकारी समितियों को सीधे किसान से कृषि उत्पाद खरीदने की अनुमति दी गई है। इसके लिए लाइसेंस जरूरी नहीं होगा। वहीं, उत्पादों को भंडारण के लिए कोल्ड स्टोर, गोदाम, क्लस्टर को उप मंडी घोषित किया गया है।
अभी तक उत्तराखंड कृषि उत्पाद (विकास एवं विनियमन) अधिनियम में फल, सब्जी व अन्य कृषि उत्पादों के कारोबार के लिए मंडी समिति लाइसेंस जारी करती है। मंडी से बाहर कृषि उत्पादों का थोक कारोबार बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता है। सरकार की ओर से छूट देने से किसानों को उत्पाद बेचने का झंझट नहीं रहेगा और मंडियों में भी भीड़ कम होगी।

देश में कोरोना वायरस का पहला प्लाज्मा परीक्षण सफल

देश में कोरोना वायरस का पहला प्लाज्मा परीक्षण सफल रहा है। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती मरीज पर प्लाज्मा तकनीकी का इस्तेमाल किया गया था। सोमवार को वेंटिलेटर से हटाने के बाद भी उसकी स्थिति बेहतर है। अस्पताल ने हाल में प्लाज्मा तकनीक का ट्रायल शुरू किया था। इसमें कोरोना से ठीक हो चुके लोगों का प्लाज्मा संक्रमित व्यक्ति पर चढ़ाया जाता है।
दरअसल, एक ही परिवार के कई लोग बीमार होने के बाद भर्ती हुए थे, जिनमें दो वेंटिलेटर पर थे। इस बीच, वेंटिलेटर पर रखे एक मरीज की मौत हो गई, दूसरा वेंटिलेटर पर ही था। दिल्ली के इस 49 वर्षीय मरीज पर ही परीक्षण हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार एक व्यक्ति के खून से अधिकतम 800 मिलीलीटर प्लाज्मा लिया जा सकता है।
वहीं, कोरोना मरीज के शरीर में एंटीबॉडीज डालने के लिए 200 मिलीलीटर प्लाज्मा चढ़ाते हैं। सूत्रों के अनुसार, इलाज में प्लाज्मा तकनीक कारगर साबित हो चुकी है। जिसने रक्त दिया वह मरीज तीन सप्ताह पहले ही ठीक हो चुका है।

80 फीसदी मामलों में नहीं दिख रहे लक्षण
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर ने बताया, देश में करीब 80 प्रतिशत मरीजांे में लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं। जरूरी नहीं कि संक्रमण आज हुआ है, तो लक्षण सात दिन में मिले ही। जबकि स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता लव अग्रवाल ने कहा था, आंकड़ों को देखें तो बिना लक्षण वाले मरीजों की संख्या अधिक नहीं है।

ऋषिकेश मेयर अनिता ने सीएम से मुलाकात कर राहत राशि का डेढ़ लाख का चेक सौंपा

कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के लिए राज्य आपदा राहत कोष में नगर निगम मेयर अनिता ममगाई ने डेढ़ लाख रूपए देकर मिसाल कायम की है।

मेयर अनिता ने मुख्यमंत्री आवास में जाकर राहत राशि का चेक मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को सौंपा। कोविड-19 के दृष्टिगत मेयर ने मुख्यमंत्री राहत कोष हेतु डेढ़ लाख रुपए का चेक दिया। जिसमें एक लाख पति डा. हेतराम ममगाई व पुत्र 50 हजार डा. हिमांशु ममगाई की ओर से दिए गए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश मेयर द्वारा कोरोना के खिलाफ जंग में कुशलता के साथ सरकारी नियमों का अनुपालन कराने एवं चलाये जा रहे राहत कार्यों की सराहना की। मेयर अनिता ममगाई ने मुख्यमंत्री की होसला अफजाई का आभार व्यक्त किया।

एम्स ने एक दिन के वेतन से दिए 80 लाख रूपए
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश की ओर से कोरोना वायरस (कोविड 19) के विश्वव्यापी बढ़ते दुष्प्रभाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री केयर फंड में 80 लाख से अधिक की धनराशि दान की है। इसमें संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों का एक दिन का वेतन शामिल है।

निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि संस्थान हमेशा जनहित व स्वास्थ्य सेवा को लेकर तत्पर रहता है, लिहाजा एम्स ऋषिकेश संकट की इस घड़ी में अपने संपूर्ण संसाधनों से मरीजों की सेवा में जुटा है। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी ने बताया कि संस्थान की ओर से कोरोना मरीजों के लिए एम्स में 100 बेड का आइसोलेशन वार्ड संचालित किया जा रहा है और इस संख्या को जल्द बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मरीजों के सैंपल की जांच के लिए माइक्रो बायोलॉजी विभाग में प्रयोगशाला शुरू कर दी गई है,जिसमें संस्थान में आने वाले कोविड 19 आशंकित मरीजों के अलावा राज्य के विभिन्न अस्पतालों से आने वाले नमूनो की जांच भी नियमिततौर पर की जा रही है। निदेशक एम्स प्रो.रवि कांत जी ने बताया कि संस्थान द्वारा कोविड 19 ग्रसित मरीजों की सुविधा के लिए संस्थान में वेंटीलेटर्स की संख्या 65 से बढ़ाकर 200 की जा रही है, इस दिशा में कार्य चल रहा है।

जनता कर्फ्यू से लगातार निर्धनों को सूखा राशन और भोजन उपलब्ध करा रहा रियल एस्टेट

कहते है सही वक्त पर और जरूरतमंद व्यक्ति के चेहरे पर जो मुस्कान ला दे, वहंी वास्तव में समाज को दिशा दे सकता है। देशव्यापी लॉकडाउन में रियल एस्टेट एसोसिएशन यही काम ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में जरूरतमंदों के लिए कर रहा है। जनता कर्फ्यू से ऋषिकेश में सक्रिय रियल एस्टेट एसोसिएशन रोजाना उत्तम क्वालिटी का आटा का कट्टा मात्रा 10 किलो, चावल मात्रा 10 किलो, दो किलो दाल, हर तरह के मसाले के पैकेट, एक लीटर सरसों के तेल की शीशी लोगों के जरूरतमंद लोगों के घर-घर जाकर पहुंचा रहा है।

वहीं दूसरी ओर ऐसे लोग जो खुले आसमान के नीचे रहने पर मजबूर है और न ही उनके पास खाना पकाने के लिए चूल्हा जैसी कोई व्यवस्था है। इन लोगों का ख्याल भी रियल एस्टेट ने बखूबी से रखा है। इन लोगों के लिए संगठन के अध्यक्ष दिनेश कोठारी ने दो वक्त का बना हुआ भोजन उपलब्ध कराया है। दिनेश कोठारी का मानना है कि जिंदगी बार-बार नहीं मिलती है, अगर हमारे जरिए किसी के चेहरे पर मुस्कान लाई जा सकती है, तो इसे हमें अपनाना चाहिए। उन्होंने तमाम सामर्थ्यवान लोगों से संकट की इस घड़ी में निर्धन वर्ग के लोगों की मदद को आगे आने का भी आह्वान किया।

संगठन अध्यक्ष दिनेश कोठारी को अपनी युवा टीम का भी बहुत सपोर्ट मिल रहा है या यूं कहे कि दिनेश कोठारी की रीढ़ की हड्डी यही युवा है, इसमें विशाल कक्कड़, विवेक तिवारी, सार्थक कोठारी, अंकित अरोड़ा, सोनू किंगर, शिवम किंगर, आशीष छाम, आशीष नरूला, शैलेष जैन आदि युवा शामिल रहते है।

बाहरी राज्यों से लौटे लोगों को राज्य में ही रोका जा सकता है…, इसकी रणनीति तैयार करे आयोग

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण के कारण हुए रिवर्स पलायन पर पलायन आयोग से अध्ययन रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों से गांव वापस लौटे उत्तराखंड वासियों को किस तरह राज्य में रोका जा सकता है, इसे लेकर रणनीति तैयार की जाए। सीएम ने मंगलवार को अपने आवास पर मंत्रिपरिषद के साथ देश में लॉकडाउन से पैदा परिस्थितियों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आपदा को अवसर के रूप में किस प्रकार बदला जाए हमें इस दिशा में गंभीरता से सोचना होगा। लॉकडाउन की स्थिति के लिए केंद्र सरकार की ओर से जारी होने वाले निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में कार्य योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। बदलते हालात में अर्थव्यवस्था को किस प्रकार मजबूती प्रदान की जाए, इसकी भी चुनौती है। उन्होंने कहा कि इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों को लौटे हैं।

ये लोग रिवर्स माइग्रेशन की ओर अग्रसर हों, इसके लिए पलायन आयोग एक अध्ययन रिपोर्ट तैयार करके पेश करे। आयोग इनसे वार्ता कर उनसे सुझाव भी प्राप्त करे। यहां लौटे लोगों को यहां पर बेहतर संसाधन एवं सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें रोका जा सकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम एवं लॉकडाउन के दौरान सरकार सामूहिक निर्णय लेगी। इस संबंध में कोई भी विभाग अपने स्तर से किसी भी प्रकार का आदेश निर्गत नहीं कर सकेगा।

कोरोना संक्रमण की रोकथाम में तैनात सभी लोगों के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष से 10 लाख की सम्मान निधि की व्यवस्था की गई है। इसके लिए एक कमेटी का गठन किया गया है जो इससे संबंधित प्रकरणों को देखेगी तथा किसी अनहोनी की स्थिति में उनके आश्रितों को यह धनराशि प्रदान करने की संस्तुति करेगी।

सीएम के निर्देश पर तीन माह तक प्रति माह प्रति कार्ड मिलेगा 7.5 किग्रा अतिरिक्त खाद्यान्न

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर राज्य खाद्य योजना में अप्रैल से जून 2020 तक तीन माह के लिए प्रति माह प्रति कार्ड 7.5 किग्रा अतिरिक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए 33.84 लाख रूपये की राशि जारी की गई है।

वर्तमान में राज्य खाद्य योजना के प्रचलित राशन कार्ड धारकों को 2.5 किग्रा चावल 11 रुपये प्रति किलो की दर से और 5 किग्रा गेहूँ 8.60 रूपये प्रति किग्रा की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। अब अप्रैल, मई व जून 2020 इन तीन महीनों के लिए 7.5 किग्रा खाद्यान्न प्रति माह प्रति कार्ड के स्थान पर 15 किग्रा खाद्यान्न प्रति माह प्रति कार्ड (7.5 किग्रा चावल व 7.5 किग्रा गेहूँ) पूर्व निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा।

सस्ता राशन विक्रेता भी कोरोना वॉरियर्स की श्रेणी में शामिल

23 लाख से अधिक परिवारों को सस्ता राशन उपलब्ध कराने वाले उत्तराखंड के विक्रेताओं को भी सरकार ने कोरोना वॉरियर्स की श्रेणी में रखा है। यदि संक्रमण से उनकी मौत होती है, तो उनके आश्रितों को 10 लाख रुपये की सहायता राशि मुख्यमंत्री राहत कोष से मिलेगी। बता दें कि प्रदेश में नौ हजार से अधिक सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें हैं। इन दुकानों के माध्यम से 23 लाख से अधिक परिवारों को हर महीने सस्ता राशन वितरित किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लॉकडाउन में सस्ते गल्ले की इन दुकानों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक सस्ता राशन पहुंचाने के काम में ये दुकानें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

सरकार ने इन विक्रेताओं को भी कोरोना वॉरियर्स की श्रेणी में शामिल किया है। सचिव खाद्य आपूर्ति सुशील कुमार का कहना है कि कोरोन वॉरियर्स को लेकर जारी शासनादेश में सस्ते गल्ले की दुकानों के विक्रेताओं को भी इसमें शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री की पहल पर संशोधित हुआ आदेश, अब भत्तों में भी 30 प्रतिशत की होगी कटौती

उत्तराखंड के विधायकों का 30 प्रतिशत वेतन के साथ ही उनके भत्ते में भी कटौती होगी। यह पैसा कोरोना महामारी से लड़ने के लिए बने कोविड-19 फंड में जाएगा। विधायकों के वेतन व भत्तों से यह कटौती एक अप्रैल से 31 मार्च 2021 तक होगी। इस संबंध में सचिव विधायी एवं संसदीय कार्य प्रेम सिंह खिमाल ने आदेश जारी किए हैं। कोरोना के खिलाफ जारी जंग में आगे लड़ाई के लिए आवश्यक फंड जुटाने को प्रदेश मंत्रिमंडल ने पिछले दिनों बैठक करके विधायकों, मंत्रियों व मुख्यमंत्री के वेतन से 30 फीसदी कटौती का निर्णय लिया था। जिसमें संशोधन करते हुए सरकार ने शासनादेश जारी कर दिया है।
इसके तहत अब विधायकों, मंत्रियों व मुख्यमंत्री को मिलने वाले भत्तों में भी 30 फीसदी की कटौती की जाएगी। कैबिनेट ने अधिनियम की धारा 24 में संशोधन को मंजूरी देते हुए वेतन व भत्तों में कटौती के प्रस्ताव पर मुहर लगाई। विदित हो कि कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय के बाद यह संशय था कि एक साल के लिए विधायक के सिर्फ वेतन से 30 फीसदी की कटौती होगी या फिर इसमें भत्ते भी शामिल होंगे। प्रदेश में एक विधायक को 30 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। इस हिसाब से यदि प्रदेश सरकार के नौ मंत्री व राज्य मंत्रियों को छोड़ दें तो बाकी 62 विधानसभा सदस्यों के 30 हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन के हिसाब से एक साल की सहयोग निधि 66 लाख 96 हजार रुपये बैठती है। यदि इसमें मंत्रियों और राज्य मंत्रियों की राशि को जोड़ दें तो इसमें कुछ और इजाफा हो जाता है। लेकिन, आदेश में निर्वाचन क्षेत्र भत्ता व सचिव भत्ता में भी 30 प्रतिशत की कटौती करने का उल्लेख किया गया है।

पार्थिव शरीर को पैतृक गांव ले जाने से नहीं रोका जा सकता
लॉकडाउन के दौरान पार्थिव देह (डेड बॉडी) को पैतृक गांव ले जाने से नहीं रोका जा सकता है। पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) अशोक कुमार ने इस संबंध में सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने आगाह भी किया कि मेडिकल इमरजेंसी के मामलों में परमिशन देने में हीलाहवाली या लापरवाही करने से कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए पुलिस भी परोक्ष रूप से जिम्मेदार होगी।