उत्तराखंड में फल-सब्जी पर नहीं लगेगा मंडी शुल्क

उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र के फार्मूले को अपनाया है। प्रदेश में लागू उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी विकास एवं विनियमन अधिनियम को खत्म कर इसकी जगह केंद्र का मॉडल एक्ट (कृषि उपज एवं पशुधन विपणन अधिनियम) को लागू किया है। मंत्रिमंडल ने इसकी मंजूरी दे दी है।
केंद्र ने किसानों की आय बढ़ानेे के लिए कृषि उत्पादों का व्यापार खुला करने के लिए मॉडल एक्ट को लागू किया है। अब किसानों को मंडियों में कृषि उत्पाद लाने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। किसान अपने उत्पाद को उचित दामों पर मंडी से बाहर कहीं भी बेच सकेंगे। मंडी समिति की ओर से फल-सब्जी व अन्य कृषि उत्पादों के कारोबार पर शुल्क नहीं लिया जाएगा।
वर्तमान में लागू उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी विकास एवं विनियमन अधिनियम (एपीएमसी) में यह व्यवस्था है कि मंडी समिति के अधीन आने वाले क्षेत्रों में फल-सब्जी के कारोबार पर एक प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जाता है। लाइसेंस के बिना कोई भी आढ़ती कृषि उत्पादों का कारोबार नहीं कर सकता है। मॉडल एक्ट में बिना लाइसेंस के भी आढ़ती किसानों का उत्पाद खरीद सकते हैं।

कांट्रेक्ट फार्मिंग से बंजर होने से बचेगी कृषि भूमि
उत्तराखंड के किसान अब कांट्रेक्ट फार्मिंग (अनुबंध खेती) कर सकेंगे। मंत्रिमंडल ने कांट्रेक्ट फार्मिंग एक्ट 2018 को राज्य में लागू करने की मंजूरी दे दी है। इससे कृषि क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार किसानों से खेती के लिए कांट्रेक्ट कर सकते हैं।


कर्नाटक और मैसूर की तर्ज पर राज्य में कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक्ट बनाया है। इस एक्ट के आधार पर प्रदेश में अनुबंध खेती की मंजूरी दे दी है। इस एक्ट के लागू होने से जिन किसानों के काफी कृषि भूमि है और वे बुढ़ापे में खेेतीबाड़ी नहीं कर सकते हैं। ऐसे किसान अपनी कृषि भूमि को कांट्रेक्ट फार्मिंग के लिए कंपनी को लीज पर दे सकते हैं। किसान के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने एक्ट में व्यवस्था की है। जिससे लीज पर दी जाने वाली जमीन को न तो ट्रांसफर किया जाएगा और न ही उस पर कोई कब्जा कर सकता है।

राज्य में तीन लाख हेक्टेयर भूमि बंजर
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब सात लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। जिसमें रबी और खरीफ फसलें उगाई जाती है। लगभग तीन लाख हेक्टेयर कृषि भूमि बंजर हो चुकी है। जंगली जानवरों और बंदरों की समस्या, सिंचाई का अभाव से किसान खेती छोड़ रहे हैं। राज्य गठन के बाद प्रदेश में लगभग 17 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल कम हुआ है।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को दिये निर्देश, उद्योग मित्र की बैठकें आयोजित कर समस्याओं का त्वरित समाधान हो

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उद्यमियों से मेरा सामाजिक दायित्व (माई सोसियल रिस्पांसिबिलिटी) के तहत प्रदेश में शिक्षा एवं स्वास्थ्य की बेहतरी के लिये सहयोगी बनने की अपेक्षा की है। उन्होंने प्रदेश में उद्योगों को सुविधायुक्त वातावरण प्रदान करने, उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिये भी सभी सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये हैं।
सचिवालय में इंडस्टस्ट्रीज एशोसियेशन ऑफ उत्तराखण्ड (आई.ए.यू) के प्रतिनिधियों एवं शासन के उच्चाधिकारियों के साथ एशोसियेशन की समस्याओं एवं सुझावों पर कार्यवाही किये जाने सम्बन्धी बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों के अनुकूल नीतियां निर्धारित किये जाने के बावजूद भी उद्यमियों की कोई समस्या हो तो उसका त्वरित समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने आई.ए.यू द्वारा प्रदेश में एम.एस.एम.ई सेक्टर को बढ़ावा देने के साथ ही उद्यमियों की विभिन्न समस्याओं एवं सुझावों पर त्वारित कार्यवाही हेतु अधिकारियों को निर्देश दिये। उन्होंने श्रम, उद्योग एवं सिडकुल, सीडा से सम्बन्धित समस्याओं के निराकरण हेतु नियमित रूप से उद्योग मित्र की बैठक आयोजित करने के भी निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिये है कि जिलास्तरीय अधिकारी उद्यमियों के साथ अच्छा व्यवहार करें उनकी समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने श्रम, उद्योग एवं सिडकुल आदि, उद्यमिता विकास से जुड़े जिलास्तरीय अधिकारियों के कार्य व्यवहार की जांच करने के भी निर्देश दिये हैं। उन्होंने उद्यमियों से अपेक्षा की कि वे समय समय पर अपनी समस्याओं से विभागीय प्रमुखों को भी अवगत कराये ताकि औद्योगिक विकास मे तेजी आ सके।
मुख्यमंत्री ने उद्यमियों का ऊधम सिंह नगर की भांति मेरा सामाजिक दायित्व के तहत प्रदेश में शिक्षा व स्वास्थ्य की बेहतरी के लिये कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उधमसिंह नगर में इस योजना के तहत 1100 स्कूलों को 528 स्कूलों में संयोजित कर उन्हें उद्यमियों द्वारा गोद लेकर इनमें परिवहन, स्मार्ट क्लास तथा अध्यापकों की संख्या दुगनी करने के साथ ही पढ़ाई का बेहतर वातावरण सृजित किया गया है। इसी प्रकार जनपद के 8 अस्पतालों का उच्चीकरण कर उन्हें हाईटेक बनाया गया है। उन्होंने अन्य जनपदों में भी इस प्रकार के प्रयास करने की उद्यमियों से अपेक्षा की।
मुख्यमंत्री ने एशोसियेशन की मांग पर प्रत्येक जनपद में ईएसआई अस्पताल के लिये भूमि उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिये। उन्होंने हरिद्वार व उधम सिंह नगर में ईएसआई हास्पिटल की स्वीकृति के लिये केन्द्रीय श्रम मंत्री से वार्ता करने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यमियों के व्यापक हित में ग्रिवास कमीटी भी गठित की गई है। यहां भी वे अपनी समस्याये रख सकते हैं।

देहरादून में हुई आईटीएटी की सर्किट बैंच की स्थापना

केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा गुरूवार को हरिद्वार बाई पास स्थित होटल में आयकर अपीलीय अधिकरण (आईटीएटी) की देहरादून सर्किट बैंच का मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत एवं आयकर अपीलीय अधिकरण के अध्यक्ष जस्टिस पीपी भट्ट की उपस्थिति में शुभारम्भ किया। उत्तराखण्ड पोस्टल सर्किल द्वारा तैयार की गई विशेष एलबम का भी अनावरण किया गया।

उत्तराखंड से विशेष लगाव, सभी लोग ईमानदारी से टैक्स देंः रविशंकर
इस अवसर पर अपने सम्बोधन में केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उनका उत्तराखण्ड से विशेष लगाव है। देहरादून में आईटीएटी की सर्किट बैंच की स्थापना को राज्य हित में बताते हुए इसे आयकर अपीलार्थियों एवं अधिवक्ताओं के व्यापक हित में बताया। उन्होंने इस अवसर पर जौलीग्रांट हवाई अड्डे पर वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराये जाने की भी घोषणा की।

उन्होंने कहा कि देश को आर्थिक रूप से सशक्त बाने तथा विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिये जरूरी है कि सभी लोग ईमानदारी से टैक्स दें। उन्होंने कहा कि देश की 130 करोड़ की आबादी में मात्र 9 करोड़ लोग ही टेक्स देते हैं। एक करोड़ की आय दिखाने वाले 2 हजार प्राफेसनल हैं, जबकि पिछले चार साल में 2 करोड़ लोग विदेश गये। 2.50 करोड़ लोगों ने नई गाड़ी खरीदी, 10 लाख से ऊपर अपनी आय दिखाने वाले मात्र 50 हजार हैं, यह स्थिति सोचनीय है। हमें ईमानदारी से टैक्स देने की सोच बढ़ानी होगी।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा आयकर दाताओं के हित में बड़े निर्णय लिये है। अब 31 अक्टूबर के बाद किसी भी करदाता को नोटिस डिजिटल फार्मेट में ही भेजी जाएंगी। पेनाल्टी के निर्धारण के लिये तीन आयकर आयुक्तों की समिति बनाई गई है। 31 मार्च तक आईटीएटी के तहत विभिन्न न्यायालयों में जितने भी केस लंबित है उसमें अपीलार्थी को मूल धनराशि ही जमा करनी होगी। उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री के रिफार्म परफार्म एवं ट्रांसफार्म की अवधारण के साथ कर सुधारों एवं समावेशी डिजिटल भारत की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज देश में 121 करोड़ लोगों के पास मोबाइल है 70 करोड़ स्मार्टफोन है। फर्जी नाम से चलने वाले एकाउन्ट को बंद कर 1.40 करोड़ की बचत की गई है। उन्होंने कहा कि सभी गांवों में बिजली पहुंचाने के साथ ही 2.50 लाख न्याय पंचायतों में आप्टिकल फाइवर लाइन बिछाई गई हैं। इससे पूरा देश नेटवर्किंग से जुड़ जायेगा।

उन्होंने कहा कि दुनिया के 06 देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश तेजी से विकास की ओर अग्रसर हैं दुनिया में देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है। उन्होंने नागरिकता कानून को आस्था के कारण पीड़ितों को मदद करने वाला बताते हुए कहा कि यह नागरिकता देने वाला है किसी की नागरिकता छीनने वाला नहीं।

अधिवक्ताओं की समय के साथ होगी आर्थिक बचत
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आईटीएटी की सर्किट बेंच को राज्य के लिये बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि इससे अपीलार्थियों एवं अधिवक्ताओं को बार-बार दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा तथा उनकी समय के साथ-साथ आर्थिक बचत भी होगी। उन्होंने कहा कि लोगों को स्वकर निर्धारण की दिशा में आगे आना चाहिए तथा ईमानदारी के साथ अपना टैक्स अदा करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने राज्य में नगर पालिका एवं नगर पंचायतों में भी स्वकर निर्धारण की व्यवस्थ बनायी है। आपसी सहयोग विश्वास व समन्वय से विवादों का समाधान हो इसकी भी उन्होंने जरूरत बतायी। उन्होंने कहा कि देश व प्रदेश के विकास में जागरूक नागरिकों द्वारा ईमानदारी के साथ टैक्स के रूप में दिये गये सहयोग की बड़ी भूमिका रहती है।

आईटीएटी के अध्यक्ष जस्टिस पीपी भट्ट ने कहा कि इस सर्किट बैंच की स्थापना से राज्य के करदाताओं को लाभ होगा। इस बैंच की दिल्ली से राज्य में सम्बन्घित 880 अपीलों के दस्तावेज यहां लाये गये है। इनका शीघ्र निस्तारण हो इसका उन्होंने आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इस बैंच को और अधिक जनोपयोगी बनाये जाने तथा कार्य निर्वहन में आई टी का अधिकतम उपयोग का उनका प्रयास रहेगा।

अनाथ बच्चों को 5 प्रतिशत आरक्षण देगी राज्य सरकार

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के वैष्णो माता मंदिर, पोस्ट ऑफिस चैक नत्थनपुर में रूपये 96.33 लाख की लागत से नलकूप निर्माण कार्य, रूपये 96.01 लाख लागत से ग्राम पंचायत नत्थनपुर में नलकूप निर्माण कार्य का शिलान्यास, अम्बेडकर बस्ती नत्थनपुर में रूपये 97.11 लाख की लागत से नलकूप निर्माण कार्य का लोकार्पण एवं मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा नत्थनपुर में सामुदायिक भवन एवं मिलन केन्द्र निर्माण कार्य का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया।
अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि क्षेत्र से लगे सैयद नाले के शेष बचे कार्यों को शीघ्र ही पूर्ण किया जाएगा, जिसमें लगभग 4.5 करोड़ रूपये की लागत आएगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की पानी की समस्या को दूर करने के लिए इन निर्माण कार्यों को ससमय पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देहरादून के आसपास के क्षेत्र की पानी की समस्या को दूर करने के लिए सूर्यधार झील का कार्य किया जा रहा है। इससे क्षेत्र के 29 गांवों को गुरूत्व आधारित पीने का पानी उपलब्ध होगा। इसके साथ ही, सौंग बांध हेतु भूमि की व्यवस्था हो गयी है। प्रभावितों के विस्थापन के तुरन्त बाद इसके निर्माण का कार्य प्रारम्भ कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बांध के निर्माण का कार्य 350 दिनों में पूर्ण किया जाएगा।

सैनिकों के लिए उनका आई कार्ड ही प्रवेश पत्रः मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक देश का गौरव हैं। राज्य सरकार सैनिकों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री आवास एवं सचिवालय में सैनिकों के प्रवेश के लिए उनके आई कार्ड को मान्यता दे दी गयी है। अब कोई भी सैनिक अपना आई कार्ड दिखा कर सचिवालय में प्रवेश कर सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा परम विशिष्ट सेवा मेडल प्राप्त सैनिकों को दी जाने वाली धनराशि को 15 हजार से बढ़ाकर 2 लाख रूपये किया गया है। इसी प्रकार अति विशिष्ट सेवा मेडल की धनराशि को भी 7 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार किया गया है। सेना मेडल प्राप्त सैनिकों को 1 लाख रूपये दिए जाएंगे। इसी प्रकार विशिष्ट सेवा मेडल प्राप्त सैनिक को दी जाने वाली धनराशि को 3 हजार से बढ़ाकर 75 हजार किया गया है। उन्होंने कहा कि अनाथ बच्चों 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें कौशल विकास कार्यक्रमों से भी जोड़ा जाएगा।

अनाथ बच्चों को भी 5 प्रतिशत आरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में अनाथ बच्चां के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की है। इससे राजकीय अनाथालयों में रह रहे अनाथ बच्चों को रोजगार प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। इस वर्ष महिलाओं के लिए 5100 किओस्क की व्यवस्था की जाएगी, ताकि महिलाएं अपने पैरों में खड़ी हो सकें। महिलाओं को मजबूती प्रदान करने के लिए एकल महिलाओं को बिना ब्याज के 1 लाख रूपये एवं महिला समूहों को बिना ब्याज के 5 लाख रूपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

कलेक्ट्रेट होंगे ऑनलाइन
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कलेक्ट्रेट को ऑनलाइन किया जायेगा जिससे आम जनता को पेपर लैस सुविधा प्राप्त हो सकेगी। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सुविधा के माध्यम से आम जनमानस की समस्याओं का निस्तारण करने में आसानी होगी तथा साथ ही लोगों की समस्याओं को ट्रेस कर यथा समय निराकरण करने में भी मदद मिल सकेगी।

युवाओं को तरजीह देगी सरकार, युवा आयोग का गठन करने की तैयारी में सरकार

राज्य सरकार ने युवा वर्ग के हितों का संरक्षण करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत राज्य में युवा आयोग का गठन किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो आयोग के गठन का मकसद युवा शक्ति के सर्वांगीण विकास के साथ ही रोजगार के अवसरों का सृजन करना है। प्रस्तावित युवा आयोग का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है और जल्द ही इसे कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
बताया जा रहा कि उत्तराखंड में युवाओं की संख्या काफी ज्यादा है। अगर मतदाताओं के लिहाज से आकलन करें तो 18 से 39 वर्ष तक के युवा वर्ग का हिस्सा 55 फीसद से ज्यादा है। राजनीतिक नजरिये से देखे तो युवा तबका उत्तराखंड में एक बड़े वोट बैंक की भूमिका में है। राज्य में दो साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं, लिहाजा सरकार अब इन्हें लक्ष्य कर भावी योजनाओं को आकार दे रही है। युवाओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार ही है, इसलिए आने वाले दो वर्षों में सरकार का फोकस ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने पर है। प्रस्तावित युवा आयोग का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण उद्देश्य भी यही है।
यूं तो उत्तराखंड में युवा नीति वर्ष 2011 से ही वजूद में है लेकिन अब इसमें कुछ अहम संशोधन किए जाने की तैयारी है। दरअसल, पिछले साल संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) का एक प्रतिनिधिमंडल उत्तराखंड आया था। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के विभिन्न विभागों, गैर सरकारी संस्थाओं और सिविल सोसायटी के सदस्यों से विचार-विमर्श किया। इसकी रिपोर्ट के आधार पर अब प्रदेश में संशोधित युवा नीति पर काम चल रहा है। अब नीति में युवा कल्याण विभाग को नोडल विभाग बनाने की तैयारी है। सभी विभाग अपने यहां युवा विकास की कार्ययोजना बनाने के साथ ही इसका अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। इनके बीच आपसी समन्वय बनाने का काम युवा कल्याण विभाग करेगा।
संशोधित युवा नीति के मुताबिक ही अलग युवा आयोग का गठन किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक आयोग में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के अलावा लगभग आधा दर्जन सदस्य शामिल किए जाएंगे। इनमें विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों को तरजीह दी जाएगी। यह भी संभव है कि स्वयं मुख्यमंत्री युवा आयोग के पदेन अध्यक्ष हों। युवा आयोग के गठन से पहले सभी विभागों को युवाओं के विकास के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। युवा आयोग के जरिये रोजगार के साथ ही विकास में युवाओं की भूमिका सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सरकार युवा आयोग के गठन के संबंध में गंभीरता से विचार कर रही है। संभवतया इस तरह के आयोग का गठन करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य होगा। युवाओं के चहुंमुखी विकास और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है।

राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में मुख्यमंत्री ने श्रद्धासुमन अर्पित किये

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर शहीदों की शौर्य गाथा और पराक्रम को नमन करते हुए पुष्प्प च्रक एवं श्रद्धासुमन अर्पित किया। इस अवसर पर प्रेस प्रतिनिधियोें को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा की यह राष्ट्रीय स्मारक, राष्ट्र की रक्षा में पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्स के जवानों के बलिदान और समपर्ण की याद दिलाता है। उन्होंने कहा की राष्ट्रीय पुलिस स्मारक एक प्रेरणादायक स्मारक है। यह सदैव सर्वोच्च बलिदान की गौरवगाथा को बताता है।

मुख्यमंत्री ने बताया की वर्ष 2013 में उत्तराखण्ड राज्य में आई भीषण आपदा के उपरान्त राज्य में एस.डी.आर.एफ का गठन किया गया है जिसके द्वारा प्राकृतिक आपदा दुर्घटना के समय राहत एवं बचाव का कार्य किया जाता है। वर्तमान में राज्य में एस.डी.आर.एफ की चार कम्पनियाॅ कार्यरत है। मुख्यमंत्री ने कहा की सिटी क्राइम पर नियन्त्रण किये जाने के उद्देश्य से प्रयोग के रूप में उत्तराखण्ड राज्य के चार जनपदों में सीटी पेट्रोल यूनिट (सी.पी.यू) का गठन किया गया है जिसका कार्य चैन स्नेचिंग, महिला छोड़खानी, आटो लिफिटिंग लूट, एक्सीडेंट रोकना आदि है।
मुख्यमंत्री ने बताया की उत्तराखण्ड में वर्ष 2000 से 2019 तक शहीद पुलिसकर्मियों की संख्या 182 है। उन्होंने कहा कि देश में शांति व्यवस्था कायम रखने, प्राकृतिक आपदा या दुर्घटनाओं में बचाव और राहत पहुॅचाने का कार्य हमारे जवान करते है और जब भी इनकी जरूरत होती है, यह उस समय मौजूद रहते है। इनकी कर्तव्य परायणता हम सभी को प्रेरणा देती है।

मुख्यमंत्री ने विजिटर बुक में लिखा “राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित करने का अवसर मिला। हमारे जवानों की शहादत ने स्मारक बनाने की प्रेरणा दी। देश की राजधानी में स्मारक बनने से उनकी शहादत को ‘‘सलाम‘‘ करने का यह अवसर मिला”।
कार्यक्रम में उत्तराखंड मे कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, सांसद राजलक्ष्मी शाह, सांसद अजय भट्ट, विधायक देशराज कर्णवाल, रितु खण्डूरी, हरबंस कपूर, गणेश जोशी, सुरेन्द्र सिंह जीना, मुन्ना सिंह चैहान, पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, पुलिस अपर महानिदेशक विनय कुमार, पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल, एस.डी.आर.एफ, तृप्ती भट्ट, औद्योगिक सलाहकार मा. मुख्यमंत्री केएस पंवार आदि उपस्थित थे।

कुंभ कार्यों को समय और गुणवत्ता के साथ संपन्न करांए अधिकारीः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरिद्वार में कुम्भ 2021 के सम्बन्ध में अखाड़ा परिषद के संत महात्माओं के साथ विचार विमर्श किया। बैठक के दौरान मेलाधिकारी दीपक रावत ने कुम्भ मेले हेतु किए जा रहे कार्यों की अद्यतन जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने सभी महात्माओं का माल्यार्पण कर स्वागत करते हुए कहा कि कुंभ की परंपरा में संतों के आशीर्वाद की आवश्यकता रहती है। संत महात्माओं ने मुख्यमंत्री के आश्वासन पर संतोष व्यक्त करते हुए मेले के सफल आयोजन के लिए अपना पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने श्री गंगा सभा हरिद्वार द्वारा कुम्भ महापर्व 2021 की प्रमुख स्नान तिथियों में से सभी अखाड़ों के संत महात्माओं की उपस्थिति में उनकी सर्वसम्मति से आगामी कुंभ मेले में आयोजित होने वाले चार शाही स्नानों की घोषणा की कुंभ मेले में होने वाले शाही स्नान में 11 मार्च 2021 (महाशिवरात्रि), 12 अप्रैल 2021 सोमवती अमावस्या, 14 अप्रैल 2021 बैसाखी कुम्भ स्नान एवं 27 अप्रैल 2021 चौत्र पूर्णिमा स्नान आयोजित होंगे। इसके साथ ही 6 पर्व स्नान 14 जनवरी 2021 (मकर संक्रान्ति), 11 फरवरी 2021 (मौनी अमावस्या), 16 फरवरी 2021 (बसंत पंचमी), 27 फरवरी 2021 (माघ पूर्णिमा), 13 अप्रैल 2021 (नव सम्वत् सर) एवं 21 अप्रैल 2021 (राम नवमी) को आयोजित होंगे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि वे कुंभ कार्यों को समयबद्धता एवं गुणवत्ता के साथ संपन्न कराएं। इसमें जिन विभागों को कोई भी समस्या हो, उसे मेलाधिकारी के संज्ञान में लाएं। यदि स्वीकृति शासन स्तर से की जानी हो तो उसकी भी व्यवस्था की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने जल संस्थान के अधिकारियों को सीवर के कार्यों में तेजी लाते हुए निर्धारित समय पर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने एनएचएआई को भी कुम्भ क्षेत्र में नेशनल हाइवे के कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों को दिन रात करते हुए युद्ध स्तर पर करने के निर्देश देते हुए कहा कि राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहायता दी जाएगी। उन्होंने सभी आवश्यक अधिकारी तैनात किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रमुख संतों को आवश्यक सुरक्षा एवं अखाड़ों से लगातार संपर्क कर कुंभ मेले हेतु कार्य किए जाएं। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के लिए समयबद्धता के साथ कार्य किया जाए। कुंभ क्षेत्र में निर्माण कार्यों के लिए निर्माण सामग्री की आवश्यकता के अनुसार विभागों को पट्टे आबंटित किए जाएंगे। इसके लिए दिन रात कार्य करने हेतु परमिट दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ मेले के सफल आयोजन हेतु सभी अखाड़ों के संत महात्माओं का सहयोग आवश्यक है।

बैठक में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, विधायक सुरेश राठौर, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी महाराज, महामंत्री हरिगिरी महाराज, रविन्द्र पुरी महाराज, महंत प्रेम गिरी महाराज, महंत धर्म दास, महंत राजेन्द्र दास, मुखिया मंहत भगत राम, महन्त जसविंदर सिंह, महंत साधना नन्द, मंहत देवेंद्र सिंह शास्त्री, महंत राम दास आदि उपस्थित रहे।

बिचैलिये का खेल खत्म नही हुआ तो सीबीआई जांच करायेगी सरकार

बजट सत्र के सातवां दिन भी सदन में काफी शोर शराबा रहा। राहुल गांधी के बयान को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच हंगामे की वजह से दो बार लोकसभा स्थगित करनी पड़ी। तीसरी बार जब कार्यवाही शुरू हुई तो फिर दोनों पक्षों ने हंगामा किया इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने कल तक के लिए लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी।
इसी बीच केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि एक देश एक राशन कार्ड योजना के तहत पूरे देश में एक जून से एक राशन कार्ड लागू कर दिया जाएगा। यह योजना अभी 12 राज्यों में लागू है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के जवाब में बताया कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को देश में कहीं भी राशन लेने की सुविधा देने के लिये ‘एक देश एक राशन कार्ड’ योजना को एक आगामी एक जून से लागू कर दिया जायेगा।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि 2013 में 11 राज्यों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बाद अब इसके दायरे में सभी राज्य आ गए हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के अगले चरण में सरकार ने पूरे देश के लिये एक ही राशन कार्ड जारी करने की पहल गत एक जनवरी को 12 राज्यों (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल कर्नाटक, राजस्थान, हरियाणा, त्रिपुरा गोवा, झारखंड और मध्य प्रदेश) से शुरू कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक देश एक राशन कार्ड के लिये नए कार्ड की जरूरत नहीं होगी। साथ ही पासवान ने नए कार्ड जारी किए जाने की अफवाहों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि यह बिचैलियों का खेल है, अगर यह खेल नहीं रुका तो मंत्रालय इसकी सीबीआई जांच कराने से भी पीछे नहीं हटेगा।
पासवान ने एक अन्य पूरक प्रश्न के जवाब में बताया कि मंत्रालय ने एक जून से पूरे देश में एक देश एक राशन कार्ड लागू करने का लक्ष्य तय किया है। इस समयसीमा से सिर्फ पूर्वोत्तर राज्यों को अलग रखा गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत सभी राशन की दुकानों को फिंगर प्रिंट पहचान मशीन (पॉश मशीन) से लैस करने और राशन कार्ड को आधार से लिंक करने की अनिवार्यता को देखते हुए पूर्वोत्तर राज्यों को इस समय सीमा से मुक्त रखा गश है।
राशन कार्ड पर मिलने वाले खाद्यान्न की कीमत सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजने (डीबीटी) की योजना के बारे में पासवान ने बताया कि तीन केन्द्र शासित क्षेत्र (पुदुचेरी, चंडीगढ़ और दादर नगर हवेली) में पायलट प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया है। इसके लिए उन्होंने पुड्डुचेरी सरकार की असहमित को मुख्य वजह बताते हुए कहा कि राज्य सरकारों की सहमति के बिना राशन कार्ड योजना को डीबीटी से नहीं जोड़ा जा सकता है। इसलिये फिलहाल एक देश एक राशन कार्ड योजना को लागू करने पर ही सरकार ने ध्यान केन्द्रित किया है।

मुख्यमंत्री की पहल से कुपोषण से मुक्त हुए बच्चें, बेहतर परिणाम से सरकार खुश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पहल पर अतिकुपोषित बच्चों को गोद लेने की योजना के अच्छे परिणाम मिलने लगे हैं। प्रदेश के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा गोद लिए गए कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। विगत वर्ष सितम्बर माह में ‘‘कुपोषण मुक्ति हेतु गोद अभियान’’ की शुरूआत की गई थी। मुख्यमंत्री सहित मंत्रीगणों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने चिन्हित अति कुपोषित बच्चों को गोद लिया था। कुपोषित बच्चों को न केवल गोद लिया गया बल्कि संबंधित जनप्रतिनिधि व अधिकारी, इन बच्चों के अभिभावकों के लगातार सम्पर्क में रहे। इसके सार्थक परिणाम भी मिल रहे हैं। 6 बच्चे कुपोषण से मुक्त हो चुके हैं, जबकि 11 बच्चों की ग्रेड में सुधार हुआ है और 207 बच्चों के वजन में वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि, ‘‘कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उनकी जिम्मेवारी लेने की पहल की गई थी। इसके सुखद परिणाम मिलने लगे हैं। बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं। हमारा उद्देश्य प्रदेश को कुपोषण से पूरी तरह से मुक्त करना है। लगभग सभी गोद लिए गए बच्चों के वजन में संतोषजनक वृद्धि हुई है। मुझे पूरा विश्वास है कि सभी गोद लिए बच्चे कुपोषण से मुक्त होंगे।’’