एमवी एक्ट में राज्य सरकार की ओर से दी गई छूट की मियाद खत्म, अब लगेगा कंपाउंडिंग शुल्क

बृहस्पतिवार से राज्य सरकार की ओर से संशोधित मोटरयान अधिनियम में प्रदूषण जांच और चाइल्ड सीट बेल्ट के मामले में एक माह की छूट खत्म हो रही है। शुक्रवार से ध्वनि और वायु प्रदूषण जांच न कराने वालों पर वाहनों से नई दरों पर 25 सौ रूपए का कंपाउंडिंग शुल्क वसूला जाएगा।

परिवहन विभाग ने 31 अक्तूबर तक प्रदूषण करने वाले वाहनों से नई दरों के हिसाब से जुर्माना न वसूलने का फैसला किया था। शुक्रवार से चाइल्ड सीट बेल्ट का प्रयोग न करने पर भी जुर्माना लागू हो जाएगा।

प्रदेश सरकार ने पिछले महीने मोटरयान अधिनियम के तहत विभिन्न अपराधों के मामले में कंपाउंडिंग शुल्क संशोधित कर लागू किया था, लेकिन प्रदूषण जांच और चाइल्ड सीट बेल्ट के मामले में वाहन स्वामियों व चालकों को एक महीने की मोहलत दी थी।

ये छूट सरकार ने इसलिए दी ताकि वाहनों के प्रदूषण की जांच कराने का कुछ समय मिल सके और चाइल्ड सीट बेल्ट को लेकर लोगों में जागरूकता आ सके। शासन ने इन दोनों धाराओं में कंपाउंडिंग शुल्क एक नवंबर से वसूलने का फैसला किया था। शुक्रवार को यह समयसीमा खत्म हो जाएगी।

इस तरह रहेगा कंपाउंडिग शुल्क
ध्वनि और वायु प्रदूषण की जांच न कराने पर पहली बार में 2500 रुपये जबकि दूसरी और उसके बाद पकड़े जाने पर कंपाउंडिंग शुल्क दर पांच हजार रुपये हो जाएगी। इसके अलावा चाइल्ड सीट बेल्ट न लगाने पर परिवहन विभाग 1000 रुपये कंपाउंडिंग शुल्क वसूलेगा।

पर्यावरण के प्रति भारत समय पर जागाः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड श्रद्धा, विश्वास एवं आस्था की भूमि है। भारतीय संस्कृति की प्रतीक गंगा का उद्भव यही से हुआ है। हमारे संत महात्मा हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संवाहक है। हमारे संतो ने सदैव ही समाज को सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है, चाहे वह पर्यावरण संरक्षण की बात हो या पौधारोपण अथवा नदियों के पुनर्जीवीकरण हो सभी उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये संतो ने समाज का मार्गदर्शन किया है तथा समाज को प्रेरणा प्रदान की है।

शुक्रवार को परमार्थ निकेतन ऋषिकेश में संत नर्मदानंद बापजी द्वारा सम्पादित की जा रही 10,300 कि0मी0 लम्बी द्वादस ज्योर्तिलिंगों की यात्रा का उत्तराखण्ड में स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने संत नर्मदानंद द्वारा राष्ट्र व समाज हित में की जा रही यात्रा को समाज व मानव कल्याण के लिये कल्याणकारी बताया। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण के लिये हमारे संतो के प्रयास सदैव सार्थक हुए हैं। पर्यावरण संरक्षण एवं गंगा की शुद्धता के लिये किये जा रहे संत नर्मदानंद के प्रयास फलीभूत होंगे, इसकी उन्होंने कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण के प्रति भारत समय पर जागा है। इस दिशा में किये जा रहे प्रयासों से एक संदेश भी गया है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि गंगा गोमुख से गंगासागर तक निर्मल हो, गंगा ही नही देश की हर नदी स्वच्छ हो इसके लिये देश में जागरूकता का व्यापक प्रसार भी हुआ है।

संत नर्मदानंद ने कहा कि उनके द्वारा जल, जीवन व जंगल की रक्षा को लेकर यह यात्रा की जा रही है। देवभूमि उत्तराखण्ड भगवान केदार एवं गंगा का उद्गम क्षेत्र है। इस पावन क्षेत्र से उन्होंने यात्रा की शुरूआत की है। उन्होंने उत्तराखण्ड में पर्यावरण संरक्षण एवं गंगा स्वच्छता के लिये मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनकी यह कामना है कि गंगा की पवित्रता व जल की शुद्धता जितनी हरिद्वार में है वह आगे भी हमें प्राप्त होती रहे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता समाज व प्रकृति के लिये हितकर है।

इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द मुनि ने कहा कि स्वामी नर्मदानंद जी द्वारा देवभूमि के साथ ही योग एवं ध्यान की इस पावन भूमि से अपनी राष्ट्रहित व समाज हित से जुड़ी यात्रा की शुरूआत नये आयाम स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि स्वामी जी द्वारा 12 ज्योर्तिलिंगो की यह यात्रा पैदल सम्पन्न होगी जो समाज को नया सन्देश देगी।

इस दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने परमार्थ निकेतन मे आयोजित गंगा पूजन एवं गंगा आरती में भी सम्मिलित हुए तथा प्रदेश वासियों की खुशहाली की कामना की।

राज्य स्थापना दिवस पर आयोजित होगा भारत भारती समारोह, दिखायी जायेगी भारतीयता की झलक

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भावी चिकित्सकों से समाज के गरीब एवं बेसहारा लोगों को बेहतर स्वास्थ सुविधा उपलब्ध कराने का अणु व्रत लेने की अपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री प्रतिभा सम्मान योजना के तहत प्रतिवर्ष 25 मेधावी छात्रों को उनकी आधी फीस की धनराशि वापस की जायेगी। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के प्रति लोगों का बड़ा विश्वास एवं भरोसा रहता है, उन्हें उस विश्वास व भरोसे को बनाये रखना होगा।

शुक्रवार को राजकीय दून मेडिकल कालेज के पहले वार्षिकोत्सव फॉरनिक्स-19 का शुभारम्भ करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि दून मेडिकल कालेज में सभी आवश्यक सुविधायें उपलब्ध करायी जायेंगी। मेडिकल कालेज व मेडिकल चिकित्सालय आस पास हो इसके लिये मेडिकल कालेज को मण्डी स्थल पर और जगह उपलब्ध करायी जायेगी। उन्होंने सचिव, स्वास्थ शिक्षा को निर्देश दिये हैं कि दून मेडिकल कालेज में फेकल्टी अस्थायी के बजाय स्थायी हो इसके लिये प्रयास किये जाय। उन्होंने कहा कि स्थायी फेकल्टी मेडिकल छात्रों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने में अधिक मददगार रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून लघु भारत की तरह है। यहां पर देश भर के हजारों छात्र विभिन्न संस्थानो में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी 9 नवम्बर को राज्य गठन के 19 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित होने वाले राज्य स्थापना दिवस पर देहरादून में वृहद भारत भारती कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा जिसमें देहरादून में रह रहे विभिन्न राज्यों के छात्र व अन्य लोग अपनी अपनी सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रस्तुतियां देंगे ताकि राज्यों का वैशिष्टय यहा दिखाई दें, इसमें ‘हम सब एक है‘ तथा भारतीयता का बोध होगा। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता हमारी पहचान है। राष्ट्र एक भौगोलिक व सांस्कृतिक इकाई होती है तभी भारत की पहचान बनती है। हमे अपने इस स्वरूप से भावी पीढ़ी को भी परिचित कराना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही प्रदेश में एक रेजिंडेशियल कालेज की स्थापना की जायेगी जिसमें मेधावी छात्रों को कक्षा 6 से प्रतियोगिता के माध्यम से प्रवेश दिलाया जायेगा। इस कालेज में छात्रों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने के साथ ही उनके व्यक्तित्व विकास से सम्बन्धित विभिन्न गतिविधियों भी निशुल्क उपलब्ध करायी जायेगी। इसमें अमीरी गरीबी के हिसाब से नही बल्कि केवल छात्रों की प्रतिभा के बल पर प्रवेश दिया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सबको स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में पहल करने वाला उत्तराखण्ड पहला राज्य है जहां राशन कार्ड के आधार पर आम जनता का स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कालेज की पहली वार्षिक पत्रिका का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य दून मेडिकल डॉ. आशुतोष सयाना ने कालेज की गतिविधियों की जानकारी दी, तथा छात्रों द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गई।

महिलाओं के विकास के बिना किसी भी समाज का विकास संभव नहींः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को नगर निगम देहरादून सीमान्तर्गत प्रथम स्मार्ट वेंडिंग जोन का लोकार्पण किया। अपने सम्बोधन में नगर निगम व विक्रेताओं को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि यह वेंडर जोन बहुत ही व्यवस्थित तरीके से बनाया गया है। व्यवस्थित होने से हमारी सोच में भी बदलाव आता है और हम एक अच्छी व्यवस्था की ओर आगे बढ़ते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के विकास के बिना किसी भी समाज का विकास सम्भव नहीं। प्रदेश की महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से इस वर्ष 5100 वेंडर कार्ट वितरित की जाएगी। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड के लोग बहुत ही मेहनती होते हैं। परन्तु हमें अपने अन्दर व्यवसायिक गुण विकसित करने की आवश्यकता है। व्यवसाय के क्षेत्र में आगे बढ़कर ही हम अपने प्रदेश को विकसित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस वेंडर कार्ट से विक्रेता और उपभोक्ता दोनों को ही लाभ होगा। मुख्यमंत्री ने स्मार्ट वेंडिंग जोन के लिए बैंकों द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि यह वेंडिंग जोन पीपीपी मॉडल पर बनाया गया है, जिसमें प्रत्येक ट्रॉली का मूल्य लगभग 01 लाख 06 हजार रूपये है। भारत सरकार की गाइडलाइन्स के अनुसार स्मार्ट वेंडिंग जोन के सभी फीचर इसमें शामिल किए गए हैं। सभी वेंडर्स को स्मार्ट कार्ड जारी किए गए हैं एवं वेंडिंग जोन में सीसीटीवी भी लगाए गए हैं। इससे वेंडिंग जोन पर नगर निगम कार्यालय से नजर रखी जा सकती है।

तीन माह के भीतर सीबीएसई का क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून में खुलेगा

राज्य में पांच नए केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने सीबीएसई, एनआईटी, जेएनवी, केविएस, एनआईओएस, इग्नू के अधिकारियों की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव को जमीन उपलब्ध कराने को कहा हैं।

सीबीएसई के 90 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ओएनजीसी तेल भवन परिसर में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान क्षेत्रीय अधिकारी रणबीर सिंह ने मानव संसाधन मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को स्मृति चिह्न भेंट किया। इसके बाद उन्होंने सीबीएसई की कार्यप्रणाली की जानकारी दी। चर्चा के दौरान डॉ. निशंक ने सीबीएसई चेयरमैन से फोन पर वार्ता कर तीन माह के भीतर देहरादून में क्षेत्रीय कार्यालय की बिल्डिंग का शिलान्यास करने के निर्देश दिए। बैठक में केंद्रीय विद्यालयों का मुद्दा प्रमुखता से उठा।

केंद्रीय विद्यालयों में 187 पदों के सापेक्ष अभी तक केवल 60 प्रतिशत ने ज्वाइन किया है। इनमें से 40 प्रतिशत ने ज्वाइन नहीं किया है। इस पर मंत्री ने उनकी जगह दूसरों को मौका देने की बात कही। इसके अलावा गौचर, बनबसा, हल्द्वानी, श्रीनगर और ऋषिकेश में केंद्रीय विद्यालय के लिए मुख्य सचिव को जमीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में सभी केंद्रीय संस्थानों के अधिकारी मौजूद रहे।

मंत्रिमंडल की बैठकों को पेपरलेस बनाने का राज्य सरकार ने लिया निर्णय

राज्य सरकार द्वारा ई-गवर्नेंस की दिशा में प्रभावी पहल करते हुए मंत्रिमण्डल की बैठकों को धीरे-धीरे पेपरलेस किये जाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए, सोमवार को सचिवालय में ई-मंत्रिमण्डल से सम्बन्धित जानकारी सभी मंत्रीगणों को उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि नवम्बर माह में आयोजित होने वाली मंत्रिमण्डल की बैठक को ई-मंत्रिमण्डल के रूप में आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही, ई-मंत्रिमण्डल पोर्टल पर अब तक हुई मंत्रिमण्डल की बैठकों में लिये गये निर्णयों को भी अपलोड किया जायेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि हम ग्रीन कैबिनेट की ओर बढ़ रहे हैं। यह ई-गवर्नेंस की दिशा में बढ़ाया गया एक बेहतर कदम है। इससे पेपर की बचत होगी और कम से कम पेपर के उपयोग से पर्यावरण को भी बचाने में सहायता मिलेगी। साथ ही निर्णयों के क्रियान्वयन में तेजी लाने के साथ ही पारदर्शिता भी आयेगी। इससे शासन की योजनाओं की जानकारी भी त्वरित रूप से आम जनता को उपलब्ध करायी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की यह पहल अन्य राज्यों को भी पेपरलेस गवर्नेंस के लिए प्रेरित करेगी।

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने बताया कि ई-मंत्रिमण्डल की शुरूआत होने के उपरान्त मंत्रिमण्डल के कार्यों हेतु गोपन विभाग का पूर्णतः कम्पयूटराईजेशन किया जाना है। इससे सभी विभाग, मंत्रिमण्डल की बैठक सम्बन्धित कार्य हेतु, गोपन विभाग से सीधे जुड़ जाएंगे। साथ ही इससे मंत्रिमण्डल के निर्णयों के कार्यान्वयन का कागज रहित अनुश्रवण एवं समीक्षा की जा सकेगी।

अधिकांश हिस्सों में पूर्ण ग्रेविटी का जल मिले, इसके लिए राज्य सरकार प्रयासरत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को एटलांटिस क्लब पंडितवाडी, देहरादून मे इंडियन वाटर वर्क्स एसोसिएशन, देहरादून सेंटर द्वारा आयोजित एक दिवसीय सेमिनार का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने सेमिनार से सम्बन्धित विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर आधारित पुस्तिका का विमोचन भी किया। सेमिनार में देश के 12 राज्यों एवं विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभाग किया गया। जल संरक्षण एवं स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर इस सेमिनार में मंथन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच सालों में हर घर में जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। हर घर तक शुद्ध जल पहुॅचें इसके लिए इंजीनियरों को मंथन करने की जरूरत है कि कैसे पानी की बचत हो और कैसे बेहतर इस्तेमाल किया जा सके। आज सेमिनार में विषय विशेषज्ञ एक दूसरे के साथ अपने अनुभवों को सांझा करेंगे। जिसके भविष्य में अच्छे परिणाम मिलेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल का कैसे बैहतर तरीके से संरक्षण और पूर्ति हो, इसके लिए लोगों में भी जागरूकता लाने की जरूरत है। जल संचय का सबसे अच्छा तरीका वर्षा जल का एकत्रीकरण है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

सीएम ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखण्ड के अधिकांश हिस्सों में पूर्ण ग्रेविटी का जल मिल सके, इसके लिए सौंग, सूर्यधार व मलुढूंग बांध पर कार्य किया जा रहा है। सौंग बांध का कार्य शुरू होने से 350 दिनों में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। सूर्यधार डेम पर कार्य प्रारम्भ हो गया है। इससे 29 गांवों को ग्रेविटी वाटर उपलब्ध होगा। पंचेश्वर बांध बनने से ऊधमसिंह नगर एवं चम्पावत के तराई क्षेत्र में ग्रेविटी का पेयजल उपलब्ध होगा।

हिन्डन एयरपोर्ट से मुख्यमंत्री ने किया गाजियाबाद से पिथौरागढ़ हवाई सेवा का शुभारंभ

उत्तराखण्ड के विभिन्न स्थानों को हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ने के प्रयासों में एक और सफलता मिली है। गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरपोर्ट से पिथौरागढ़ के लिए नियमित हवाई सेवा प्रारम्भ कर दी गई है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हिन्डन एयरपोर्ट पर आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम में हिन्डन- पिथौरागढ़ -हिन्डन हवाई सेवा का औपचारिक शुभारम्भ किया।

हेरिटेज एविएशन कम्पनी का 9-सीटर विमान, सप्ताह में 6 दिन (गुरूवार को छोड़कर) उड़ान भरेगा। प्रतिदिन पिथौरागढ़ से सुबह 11.30 बजे प्रस्थान कर विमान 12.30 बजे हिंडन एयरपोर्ट पहुंचेगा। जबकि हिंडन एयरपोर्ट से अपराह्न 1 बजे प्रस्थान कर अपराह्न 2 बजे विमान पिथौरागढ़ पहुंचेगा।

गाजियाबाद से पिथौरागढ़ के लिए हवाई सेवा शुरू होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि इससे प्रदेश के पिथौरागढ़ के अलावा अल्मोड़ा, चम्पावत, बागेश्वर से देश की राजधानी तक पहुंचने में समय की काफी बचत होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली से पिथौरागढ़ तक सड़क मार्ग से जाने में काफी समय लगता था, जो मंहगा भी था। इस हवाई सेवा के शुरू होने से जहां लोगों के समय की बचत होगी, वहीं आर्थिक दृष्टि से भी लोगों को फायदा होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिथौरागढ़, सीमान्त जनपद होने के कारण यह हवाई सेवा सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उत्तराखण्ड, आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। कई बार गम्भीर स्थिति होने के कारण मरीजों को हायर सेंटर रैफर करना होता है। कम समय में दूरस्थ क्षेत्रों से हायर सेंटर तक पहुंचाने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई सेवाएं बहुत जरूरी हैं। कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों को भी इस हवाई सेवा से लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि पिथौरागढ़ में एक ट्यूलिप गार्डन बनाया जा रहा है। ट्यूलिप गार्डन बनाने का मुख्य उद्देश्य है कि राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय पर्यटक यहां आयें और यहां के प्राकृतिक सौन्दर्य का आनन्द भी ले सकें। पर्वतारोहण के लिए पिथौरागढ़ आने वाले पर्यटकों को भी इस हवाई सेवा के शुभारम्भ होने से आसानी होगी।

उत्तराखण्ड में पिछले कुछ वर्षों से हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार किया गया है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जा रहा है। हाल ही में मुम्बई-देहरादून-वाराणसी हवाई सेवा शुरू की गई है। देहरादून को मुम्बई, वाराणसी, जम्मू, लखनऊ, हैदराबाद, पटना, रायपुर, बंगलौर, दिल्ली, कलकत्ता, अमृतसर, जयपुर गुवाहाटी सहित दर्जनों शहरों से जोड़ा जा चुका है। टिहरी झील में सी-प्लेन के लिए एमओयू किया जा चुका है। देहरादून से पंतनगर व पिथौरागढ़ के लिए भी हवाई सेवा संचालित की जा रही है।

बिजली चोरी व लाइन लास को कम करने के लिये सीएम ने बताई समेकित प्रयासों की जरूरत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश में बिजली चोरी तथा लाइन लॉस को रोकने के लिये व्यापक जन-जागरूकता के प्रसार पर बल दिया है। गांधी जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हॉल में ऊर्जा की बचत तथा राजस्व वृद्धि के लिये बिजली चोरी रोकने के लिये ऊर्जा गिरी अभियान का शुभारम्भ करते हुए मुख्यमंत्री ने बिजली चोरी रोकने के लिये किये जा रहे प्रयासों में तेजी लाने पर बल दिया। उन्होंने राज्य गठन के बाद राज्य में ए.टी.एण्ड सी. हानियॉ 52.98 प्रतिशत से वर्तमान में 16.52 के स्तर लाये जाने के साथ ही वितरण हानियाँ 29.52 प्रतिशत से 14.32 प्रतिशत के स्तर पर लाये जाने पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे 13 प्रतिशत पर लाये जाने के निर्देश दिये।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बिजली चोरी रोकने के लिये प्रतिबद्ध है, ऊर्जा निगमों के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों का दायित्व है कि बिजली चोरी रोके जाने हेतु समुचित उपाय सुनिश्चित करें जिससे कि ईमानदार उपभोक्ताओं पर उसका भार न पड़े। उन्होंने विद्युत चोरी पर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिये यू.पी.सी.एल. विजिलेंस सेल को मजबूती प्रदान करने के भी निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि ऐसे प्रयासों से ही समाज में जन जागरूकता का प्रचार होता है तथा इसका समाज मे व्यापक प्रभाव भी पड़ता है उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने तथा राजस्व वृद्धि में भी सहायक होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तराखण्ड को लाइन लॉस व बिजली चोरी रोकने में गुजरात के बाद दूसरा नम्बर है। इस दिशा में हमें समेकित प्रयासों से देश में पहले नम्बर पर आने के प्रयास करने होंगे। मुख्यमंत्री ने स्वच्छता एवं वन टाइम यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने के संबंध में प्रधानमंत्री की अपील को साकार करने में भी योगदान देने की अपील की, उन्होंने कहा कि हमें इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा। स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता से हमने पर्यावरणीय मानकों में सुधार की शुरूआत की है।

अटल जी की देन है उत्तराखंडः टीएसआर

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को शहीद स्थल रामपुर तिराहा, मुजफ्फरनगर में शहीद स्मारक पर उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलकारी शहीदों की पुण्य स्मृति में श्रद्धासुमन अर्पित किये।

उन्होंने कहा कि राज्य आन्दोलकारियों के संघर्ष व बलिदान के परिणाम स्वरूप ही उत्तराखण्ड का नये राज्य के रूप में निर्माण हुआ। 01 सितम्बर 1994 को खटीमा में पहली घटना घटी थी, जिसमें भवान सिंह, प्रताप सिंह, धर्माननन्द भट्ट, गोपीचन्द, परमजीत सिंह और रामपाल सिंह शहीद हुए थे। दूसरी घटना मसूरी की हुई जिसमें मदन मोहन मंगल, धनपत सिंह, बेलमती चौहान, हंसा धनई, बलवीर सिंह नेगी व पुलिस के सीओ ऊमाकांत त्रिपाठी शहीद हुए। जब हम राज्य आन्दोलन का जिक्र करते हैं तो 02 अक्टूबर का वह दृश्य याद आता है, जब राज्य निर्माण को लेकर आन्दोलनकारी दिल्ली जा रहे थे, तब सूर्य प्रकाश थपलियाल, राजेश लखेड़ा, रवीन्द्र रावत, राजेश नेगी, सतेन्द्र सिंह चौहान, गिरीश भद्री, अशोक कुमार, ओमपाल, अतुल त्यागी, रामगोपाल और पंकज त्यागी ने राज्य निर्माण के लिए अपना बलिदान दिया। इसके अलावा उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के लिए अनेक युवक-युवतियों व माताओं ने अपना बलिदान दिया। इसके परिणाम स्वरूप 09 नवम्बर 2000 को उत्तराखण्ड राज्य का गठन हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य निर्माण की मांग पर्वतीय राज्य के रूप में बहुत पहले से हो रही थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल ने उत्तराखण्ड को एक पर्वतीय राज्य के रूप में तोहफा दिया। उन्होंने उत्तराखण्ड को औद्योगिक पैकेज दिया तो नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखण्ड में कनेक्टिविटी को बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। शहीद राज्य आन्दोलनकारियों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप राज्य बनाएं।