सरकार ने एनएच-74 के विस्तारीकरण को दी हरी झंड़ी

बुधवार को हुयी कैबिनेट बैठक में मंत्रीमंडल ने एनएच-74 के हरिद्वार-नगीना तक विस्तारीकरण को वन क्षेत्र की 847.98 करोड़ मूल्य की 64.74 हेक्टेयर भूमि नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को मुफ्त देने पर मुहर लगाई है। इससे गढ़वाल को कुमाऊं से जोड़ने में मदद मिलेगी। वहीं यात्रियों का सफर भी सुरक्षित होगा और समय की बचत भी होगी।

वहीं राज्य में अब रात्रि पाली में भी महिला कार्मिक बेरोकटोक कार्य कर सकेंगी। उधर, मंत्रिमंडल ने अगले माह प्रस्तावित इन्वेस्टर्स समिट के दौरान पूंजी निवेशकों के लिए विभिन्न योजनाओं में गांव स्तर तक निवेश का रास्ता साफ करते हुए विभिन्न नियमावलियों को मंजूरी दी। सौर ऊर्जा नीति में संशोधन कर पांच मेगावाट तक सोलर प्रोजेक्ट राज्य के स्थायी निवासियों को आवंटित किए जाएंगे। इन्हें पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित किया जा सकेगा। वहीं नगर निगम सीमा में शामिल क्षेत्रों को कम भी किया जा सकेगा। इसके लिए मौजूदा अधिनियम में संशोधन विधेयक को स्वीकृति दी गई।

त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल की बुधवार को सचिवालय में दिनभर चली बैठक में 24 बिंदुओं पर चर्चा हुई। दो बिंदु स्थगित किए गए। विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी होने के चलते कैबिनेट फैसलों की ब्रीफिंग नहीं की गई। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट ने एक जनवरी, 2016 से पहले के पेंशनरों के लिए केंद्र सरकार की ओर से लागू पेंशन व्यवस्था को राज्य में लागू किए जाने को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। इससे 1985, 1995, 2006 के पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशनर्स की पेंशन में विसंगति दूर होगी। पेंशनर्स को कोई एरियर नहीं दिया जाएगा। शासनादेश जारी होने की तिथि से उक्त पेंशन व्यवस्था लागू मानी जाएगी।

कैबिनेट प्रमुख फैसले
-एक जनवरी, 2016 से पहले सेवानिवृत्त हुए कार्मिकों की पेंशन विसंगति खत्म, पेंशन में 300 से 1000 रुपये की वृद्धि

-इन्वेस्टर्स समिट में निवेशकों के लिए निवेश का रास्ता साफ, सौर ऊर्जा, आयुष समेत कई अहम नियमावलियां मंजूर

-महिला कार्मिकों को रात्रि पाली में काम करने की अनुमति, पहले लगा प्रतिबंध हटाया

-ग्रोथ सेंटर योजना के तहत राज्य की 670 न्याय पंचायत स्तर पर ग्रोथ सेंटर होंगे संचालित, एमएसएमई किसानों, बुनकरों को संगठित कर देगा प्रोत्साहन

-कीड़ा जड़ी दोहन और विपणन की नीति व प्रक्रिया को मंजूरी, जड़ी एकत्र करने वालों को कराना होगा पंजीकरण

-एनएच-74 के हरिद्वार-नगीना तक विस्तारीकरण को वन क्षेत्र की 847.98 करोड़ मूल्य की 64.74 हेक्टेयर भूमि नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को मुफ्त देने पर मुहर

-प्राथमिक स्कूलों के बाद अब 30 से कम छात्रसंख्या वाले 34 सरकारी हाईस्कूल और इंटर को बंद करने का निर्णय

-उत्तराखंड सौर ऊर्जा नीति-2016 में संशोधन को मंजूरी, पांच मेगावाट तक प्रोजेक्ट राज्य के स्थायी निवासियों को आवंटित

-उत्तराखंड (उत्तरप्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959) संशोधन अधिनियम, 2018 विधेयक को मंजूरी, नगर निगम की सीमा को अब घटा सकेगी सरकार

एनएच घोटाले में आइएएस अधिकारी पंकज कुमार व चंद्रेश यादव हुये सस्पेंड

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जीरो टॉलरेंस को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए भ्रष्टाचार के आरोप में दो आइएएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। सरकार के निर्देश पर शासन ने हरिद्वार-ऊधमसिंह नगर-बरेली (एनएच-74) चौड़ीकरण मुआवजा मामले में आइएएस अधिकारी व प्रभारी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय और अपर सचिव चंद्रेश यादव को निलंबित कर दिया है।

प्रभारी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय और अपर सचिव चंद्रेश कुमार यादव पर जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर के पद पर रहते हुए आर्बिट्रेटर की भूमिका निभाने के दौरान नियम विरुद्ध मुआवजा वितरित करने का आरोप है। दरअसल, राष्ट्रीय राजमार्ग 74 के चौड़ीकरण के लिए सरकार ने रुद्रपुर में सड़क के दोनों ओर की भूमि का अधिग्रहण किया था। इसके लिए भूस्वामियों को मुआवजा दिया गया। इस दौरान कई तरह की अनियमितताएं सामने आई थीं। इसमें कृषि भूमि को अकृषि दिखाकर अधिक मुआवजा बांटने व नियम विरुद्ध मुआवजा निर्धारण करना आदि शामिल थे। सरकार ने शुरुआती जांच के बाद बीते वर्ष मार्च में सात एसडीएम (एक सेवानिवृत्त) निलंबित कर दिए थे। मामले की विस्तृत जांच के लिए एसआइटी का गठन किया गया।

कुछ समय पूर्व एसआइटी ने अपनी रिपोर्ट में आइएएस अधिकारी डॉ. पंकज कुमार पांडेय और चंद्रेश यादव के आर्बिट्रेटर के रूप में लिए गए फैसलों पर सवाल उठाए थे। इस पर शासन ने दोनों अधिकारियों से इस मामले में स्पष्टीकरण तलब किया। दोनों अधिकारियों के अनुरोध पर दो बार जवाब लेने का समय बढ़ाया गया। इनके जवाब का परीक्षण करने के बाद शासन ने दोनों को निलंबित कर दिया है।

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की ओर से जारी आदेशों में साफ किया गया है कि एसआइटी की विवेचनात्मक जांच आख्या के आधार पर दोनों अधिकारियों को निलंबित किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दोनों अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही के लिए आरोप पत्र जारी करने और जांच अधिकारी की नियुक्ति के लिए अलग से आदेश जारी किए जाएंगे।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि शासन की मंशा स्पष्ट है। इन अधिकारियों के खिलाफ जांच में सामने आए तथ्यों पर स्पष्टीकरण लिया गया था। विचार विमर्श के बाद दोनों को निलंबित करने का निर्णय लिया गया है।

अब शासन इन दोनों अधिकारियों को अलग से आरोप पत्र जारी करेगा। इसमें उनसे एसआइटी की रिपोर्ट पर उठाए गए सवालों के जवाब लिए जाएंगे। इसके साथ ही एक जांच अधिकारी की भी नियुक्ति की जाएगी। यह जांच अधिकारी वरिष्ठ आइएएस अधिकारी होगा। अधिकारियों का जवाब मिलने के बाद जांच अधिकारी इसकी जांच करेंगे। आरोप पुष्ट होने पर कार्रवाई के लिए डीओपीटी और संघ लोक सेवा आयोग को पत्र भेजा जाएगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर सरकार कायम है। भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। सरकार सबके खिलाफ समान रूप से कार्रवाई करेगी। इन दोनों अधिकारियों को भी प्रथम दृष्ट्या आरोप पुष्ट होने पर निलंबित किया गया है।

महिलाओं ने बांधा सीएम की कलाई में रक्षा सूत्र

राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाओं ने मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हॉल में उपस्थित होकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को रक्षा सूत्र बांधा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामना देते हुये तोहफे भी दिये।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि समय एवं देशकाल परिस्थिति के अनुसार महिलाओं द्वारा रक्षा सूत्र बांधे गये हैं। भाई-बहनों के इस रक्षा सूत्र के त्यौहार के अलावा प्राचीन समय में भी जब राजा युद्ध के लिए जाते थे तो उनकी रक्षा के लिए उनकी पत्नियों द्वारा रक्षा सूत्र बांधा जाता था। आज भी जब हमारे सैनिक देश की रक्षा के लिए सीमाओं पर जाते हैं तब भी उनके कष्ट निवारण के लिए बेटियों द्वारा रक्षा सूत्र बांधा जाता है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि रक्षाबन्धन भावनात्मक रूप से जुडा हुआ पर्व है। इस त्यौहार से आपसी संबंध भी मजबूत होते है। मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि एवं स्वस्थ दीर्घायु की कामना ईश्वर से की है।

इसके उपरान्त मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने बालावाला स्थित एक स्थानीय वैडिंग में आयोजित रक्षाबंधन समारोह में प्रतिभाग किया। यहां भी भारी संख्या में स्थानीय महिलाओं ने मुख्यमंत्री की कलाई में रक्षा सूत्र बांधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे त्यौहारों में संस्कार होता है तथा वे हमारे रिश्तों को भी मजबूत बनाते हैं।

त्रिवेंद्र सरकार का अहम निर्णय, धर्मान्तरण पर होगी ये सजा

अब राज्य में जबरन धर्मान्तरण किया गया तो दंडात्मक कार्यवाही होगी। कैबिनेट ने इस नियमावली पर अपनी मोहर लगा दी है। त्रिवेंद्र सरकार की मौजूदगी में हुयी बुधवार को कैबिनेट की बैठक में धर्म स्वतंत्रता एक्ट पास किया गया। धर्म परिवर्तन के मामले में आरोपित व्यक्ति को दोषमुक्त साबित करने के लिए खुद प्रमाण देने होंगे।

त्रिवेंद्र सरकार ने बीते मार्च माह में गैरसैंण विधानसभा सत्र में उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता विधेयक को पारित कराने के बाद उसे एक्ट की शक्ल दी थी। अब उक्त एक्ट की नियमावली पर मंत्रिमंडल की मुहर लग गई। सचिवालय में बुधवार को मंत्रिमंडल के फैसलों को काबीना मंत्री प्रकाश पंत ने ब्रीफ किया। उन्होंने बताया कि धर्म स्वतंत्रता एक्ट की नियमावली बनने के बाद इसका क्रियान्वयन सुनिश्चित हो जाएगा। अब धर्म परिवर्तन के इच्छुक व्यक्ति को पहले अपने स्थायी निवास स्थल क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी। जिला मजिस्ट्रेट ऐसी सूचनाओं की 15 दिन के भीतर जांच कराएगा।

सात दिन में होगी जांच

इस जांच में यह भी देखा जाएगा कि धर्म परिवर्तन जबरन, प्रलोभन, उत्पीडन या कपटपूर्ण अथवा विवाह के जरिये किया जा रहा है अथवा नहीं। बिना सूचना के किसी ने भी धर्म परिवर्तन किया तो ऐसे मामलों की जांच होगी। जिला मजिस्ट्रेट ऐसे मामलों में सात दिन के भीतर जांच कराएंगे। सरकार ने नियमावली में यह प्रावधान भी किया है कि प्रत्येक जिलाधिकारी को हर महीने की दस तारीख तक पिछले माह के दौरान ऐसे मामलों की रिपोर्ट सरकार को देनी होगी।

यह है सजा का प्रावधान

यदि धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से विवाह किया गया तो उस धर्म परिवर्तन को अमान्य घोषित किया जाएगा। धर्म परिवर्तन के लिए जिला मजिस्ट्रेट या कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक माह पहले शपथपत्र देना होगा। धर्म परिवर्तन के लिए समारोह की भी पूर्व सूचना देनी होगी। सूचना नहीं देने की स्थिति में इसे अमान्य करार दिया जाएगा। धर्म स्वतंत्रता कानून का उल्लंघन होने की स्थिति में तीन माह से एक वर्ष की सजा होगी। अनुसूचित जाति-जनजाति के मामले में यह छह माह से दो वर्ष होगी।
धर्म परिवर्तन के एवज में किसी तरह का दान या अंशदान लेन-देन का मामला सामने आया तो जांच के बाद ऐसी राशि जब्त की जाएगी। साथ ही इसके लिए दोषी संस्था, व्यक्ति अथवा पुजारी को दंडित किया जाएगा। जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में जेल जाने का प्रावधान भी किया गया है।

पौधारोपण कार्यक्रम को सफल बनाने में आमजन की भूमिका अहमः त्रिवेन्द्र

देवभूमि उत्तराखंड पर्यावरण को सुरक्षित करने में अपनी भूमिका बखूबी तरह से निभा रहा है। राज्य में विभिन्न जगहों पर हरेला महोत्सव के अंतर्गत पौधारोपण कार्यक्रम चलाये जा रहे है। आपसी जन सहभागिता के कुछ भी काम सफल नहीं होता। इसलिये उन्होंने सभी नागरिकों से उत्तराखंड को हरा-भरा बनाये रखने में सहयोग करने की अपील की।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार को भोगपुर (बागी) के कुआंखाला मे उत्तराखंड वन विभाग के तत्वधान में वह विभिन्न सामाजिक संगठनों, विद्यालयो के स्कूली छात्र छात्राओं के साथ थानों रेंज मे वृहद पौधारोपण कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष चिदानंद स्वामी, पर्यावरणविद् हैस्को के संस्थापक डॉ अनिल जोशी के साथ बेलपत्री, चंदन, रुद्राक्ष, पीपल आदि के पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण का आव्हान भी किया। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष मुनि स्वामी चिदानंद ने कहा कि वृक्षों से मनुष्य का प्राचीन समय से नाता रहा है। इसलिए इनकी रक्षा करना हमारा धर्म भी है। उन्होंने कहा कि पेड़ पौधे प्रकृति के बीच संतुलन बनाने के साथ हमारे प्राण तत्व भी है।

पर्यावरणविद् हैस्को के संस्थापक डॉक्टर अनिल जोशी ने कहा कि पेड़ पौधे सुरक्षित रहेंगे। तभी हमारा जीवन व पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। ग्लेशियर भी सुरक्षित रहेंगे।

प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड जयराज सिंह ने कहा कि विभाग पूरे प्रदेश में पौधारोपण कार्यक्रम को बढ़ावा दे रहा है। वन संरक्षक राहुल सिंह, प्रभारी डीएफओ भारत भूषण मर्तोलिया, थानों रेंज अधिकारी डॉक्टर उदय नंद गौड ने भी पौधारोपण का आह्वान किया। पौधरोपण कार्यक्रम में श्री गुरु रामराय विद्यालय भोगपुर, चार्ल्स बेन स्कूल, दून भवानी इंटरनेशनल विद्यालय, राजकीय इंटर कॉलेज रानीपोखरी, आर्यन पब्लिक स्कूल, शिशु विद्या मंदिर व इको टास्क फोर्स के जवानों ने भी पौधारोपण कार्यक्रम में शिरकत की।

कैबिनेट ने अध्यादेश लाकर दूर की भाजपा विधायकों की नाराजगी

उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में मलिन बस्तियों को अतिक्रमण हटाओ अभियान से राहत देने के लिए अध्यादेश लाकर मंजूरी दे दी गई है। साथ ही तीन साल के भीतर मलिन बस्तियों का नियमितीकरण करने का भी फैसला लिया गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें कई अहम फैसलों पर मुहर लगी है। बैठक में उत्तराखंड ग्राम पंचायत विकास अधिकारी संशोधन नियमावली को मंजूरी दी गई है। जबकि सातवें वेतनमान के भत्तों के लिए वित्त मंत्री प्रकाश पंत की अध्यक्षता में समिति गठित की है।

कैबिनेट के कुछ अन्य महत्वपूर्ण फैसले
-उत्तराखंड नगर निकाय एवं प्राधिकरण हेतु विशेष प्रावधान प्रावधान 2018 अध्यादेश कैबिनेट में पास। इसके अंतर्गत लागू तिथि से तीन साल तक कोई भी दंडात्मक कार्यवाही नहीं की जाएगी। पूर्व में 2016 के अध्यादेश की नियमावली कब तक लागू रहेगी, जब तक नई नियमावली नहीं बन जाती है। इस अध्यादेश का संबंध केवल मलिन बस्तियों के लिए ही है।

-किशोरी बालिका सेनेटरी नैपकिन योजना के अंतर्गत प्रति पैकेट आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दो रुपये प्रोत्साहन धनराशि दी जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार छह करोड़ रुपए का रिवॉल्विंग फंड बनाएगी।

-राज्य पुनर्गठन आयुक्त कार्यालय उत्तराखंड लखनऊ को धन कर संबंधित कार्मिकों को देहरादून वापस बुलाया जाएगा। इस वक्त चार कार्मिक कार्यरत हैं।

-न्यायालय शुल्क संशोधन विधेयक 2018 को मंजूरी। कोर्ट फीस ट्रेजरी के अतिरिक्त ई-पेमेंट को मिली मंजूरी। यह व्यवस्था नैनीताल हाईकोर्ट और अधीनस्थ न्यायालय में होगी लागू।

-उत्तराखंड पुलिस निरीक्षक एवं उप निरीक्षक सेवा नियमावली 2018 को मंजूरी।

-डब्ल्यूएचओ सहायतित उत्तराखंड परियोजना मे 25 आइटीआइ को चुनकर उन्हें अपग्रेड किया जाएगा।

-उत्तराखंड निवेश सम्मेलन 2018 को मंजूरी, 25 करोड़ का बजट स्वीकृत। 1250 करोड़ जारी करने को मिली मंजूरी।

महिलाओं ने किया मुख्यमंत्री के इस फैसले का स्वागत, जाने क्या है वह फैसला

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड की देश और विश्वभर में एक अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवों की भूमि है और देव भूमि में नाबालिग बच्चियों के साथ जघन्य अपराधों के लिये मृत्युदंड से कम सजा हो ही नहीं सकती। इस दौरान प्रदेशभर से आयी 300 से अधिक महिलाओं ने मुख्यमंत्री के इस फैसले का स्वागत किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने विचार किया कि उत्तराखण्ड में छोटी मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों के लिए मृत्युदंड का कानून बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में वर्ष 2016 में 38947 रेप के केस दर्ज किए गए, जिनमें से 33628 में ही चार्जसीट दर्ज हो सकी। इनमें से 18552 में ट्रायल पूरी हुई एवं 4739 में सजा हो पाई। छोटी-छोटी बालिकाओं के साथ रेप जैसे जघन्य अपराधों के लिए मृत्यु दंड से कम सजा नहीं हो सकती।

अपराधी के मन में मौत का भय आना ही इस कानून का मकसद है। मुख्यमंत्री ने कहा इसके लिए मां को मजबूत होना आवश्यक है। मां मजबूत होगी तो परिवार मजबूत होगा। हमारी बच्चियां ऐसे हालात का मुकाबला कर सके इसके लिए हमें उन्हें मजबूत बनाना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस आधुनिक युग में सिर्फ नौकरी का इंतजार करना ठीक नहीं। आज के युवाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ना होगा। राज्य सरकार द्वारा इसके लिए छोटी सी शुरुआत की है। महिला स्वयं सहायता समूह की सहायता से देवभोग प्रसाद तैयार कर प्रदेश के मंदिरों में वितरित किया जा रहा है।

केदारनाथ में सवा करोड़ का देवभोग प्रसाद बेचा गया। उन्होंने कहा कि हमने 110 महिलाओं को एलईडी लाइट बनाने का प्रशिक्षण दिया है। हमारी महिला बहनों ने इसमें बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। इनके द्वारा निर्मित उत्पाद बहुत ही सस्ता एवं टिकाऊ है। जहां अन्य उत्पादों की एक साल की वारंटी है, हमारी बहनों द्वारा तैयार उत्पाद की दो साल की वारंटी है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पिरूल नीति तैयार की गई है। इस में महिला समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई है जिसमें देश की 40 प्रतिशत आबादी को हेल्थ कवरेज दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार में प्रदेश के सभी नागरिकों को हेल्थ कवरेज देने का फैसला किया है। प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति देश के किसी भी हॉस्पिटल में इलाज करा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी के अभाव में प्रदेश की बहुत सी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों को नहीं मिल पाता। हम सभी का प्रयत्न होना चाहिए, ऐसे पात्र लोगों को इसकी जानकारी देकर उनकी सहायता करें।

किसी भी जाति का प्रशिक्षित व्यक्ति बन सकता है मंदिर में पुजारी

हाईकोर्ट नैनीताल ने साफ किया है कि राज्य के एससी-एसटी व अन्य निम्न वर्ग के लोगों को किसी भी मंदिर में प्रवेश से रोका नहीं जाएगा। उच्च कुलीन पंडित निम्न जाति के लोगों को मंदिर में पूजा के लिये रोक नहीं सकते है। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक प्रशिक्षित व योग्य व्यक्ति ही मंदिर का पुजारी बन सकता है। फिर चाहे वह किसी भी जाति का क्यों न हो।

राजस्थान निवासी पुखराज और अन्य ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हरिद्वार हर की पैड़ी में अर्धकुंभ के दौरान बनाई गई सीढ़ियां संत रविदास मंदिर को जोड़ती हैं। इन सीढ़ियों के बनने से मंदिर को बहुत नुकसान हुआ है और लोगों को मंदिर दर्शन से वंचित रहना पड़ रहा है। 2016 में सरकार के आदेश के बाद रविदास मंदिर की सीढ़ियां 42.17 लाख रुपये खर्च कर फिर से बनाई जा रही हैं। जिससे मंदिर को फिर नुकसान हो रहा है और यह सरकारी धन का दुरुपयोग भी है। वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने गुरुवार को इस मामले का विस्तृत संदर्भ लेते हुए एससी-एसटी वर्ग के व्यक्तियों के प्रवेश व पूजा को लेकर भी आदेश पारित किया है। खंडपीठ ने जिला प्रशासन हरिद्वार को सीढ़ियां हटाने से पहले नगर निगम व एससी-एसटी वर्ग के लोगों के साथ बैठक करने के निर्देश दिए।

डेढ़ माह में हरिद्वार की सभी सड़क, गलियों व पैदल मार्गो से अतिक्रमण हटाने, चंडीघाट, चंडी पुल पर अवैध कब्जे विशेष अभियान चलाकर हटाने को कहा है। जिलाधिकारी हरिद्वार को गंगा घाट की सफाई सुनिश्चित करने, कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। मंडलायुक्त गढ़वाल को उन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, जिनके कार्यकाल में अतिक्रमण हुआ। हर की पैड़ी में संत रविदास का उचित रखरखाव व सौंदर्यीकरण तीन माह में किया जाए।

वहीं पूर्व राज्यसभा सदस्य व भाजपा नेता तरूण विजय ने मंदिरों में पुजारी की नियुक्ति को लेकर हाइकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अब इस संबंध में हिंदू संगठनों को आगे आकर सेतु बनने का कार्य करना चाहिए।

विद्यालय विशेष बच्चों के लिये अलग से हॉस्टल बनायें

शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग व विशेष आवश्यकता वालें बच्चों पर हाईकोर्ट नैनीताल ने आदेश पारित किया है। इस आदेश में इन बच्चों के लिये विद्यालय को विशेष सुविधायें मुहैया करायी जायेंगी। साथ ही विद्यालयों को अलग से शिक्षकों की नियुक्ति करने व अलग हॉस्टल बनाये जाने के आदेश दिए गये है।

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने कमल गुप्ता के पत्र पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने पत्र में कहा था कि प्रदेश के विद्यालयों में दिव्यांगों व विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा के लिए कोई सुविधा नहीं है। जिस कारण उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संविधान के अनुच्छेद 21 ए में छह से 14 साल तक के बच्चों को निरूशुल्क व अनिवार्य शिक्षा की बात कही गई है। खंडपीठ ने पिछले दिनों मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

हाईकोर्ट ने जरूरतमंद बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति करने तथा बच्चों को हर माह एक हजार छात्रवृत्ति प्रदान करने के आदेश पारित किए हैं। आदेश में यह भी कहा है कि सरकार ऐसे बच्चों को शैक्षणिक सत्र से पहले यूनीफार्म, किताबें उपलब्ध कराई जाएं। राज्य सरकार विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए एक साल के भीतर राज्य के चार जिलों में छात्रवास बनाए। जिन विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अभिभावक उनकी जरूरतें पूरी नहीं कर सकते, ऐसे अभिभावकों की मदद सरकार करे। सरकार सरकारी, गैर सरकारी, सहायता प्राप्त व गैर सहायता प्राप्त विद्यालयों के दिव्यांग बच्चों को स्वतंत्र विचरण के लिए मुफ्त में ट्रांसपोर्ट सुविधा प्रदान करे।

राज्य को मिली आईडीपीएल की 833 एकड़ भूमि

इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (आईडीपीएल) की 899.53 एकड़ भूमि से 833.25 एकड़ भूमि केंद्र ने राज्य सरकार को सौंप दी है। विदित हो कि इस भूमि में से 200 एकड़ भूमि राज्य सरकार एम्स ऋषिकेश को देने का एलान कर चुकी है तथा शेष भूमि पर राज्य सरकार कन्वेंशन सेंटर बनायेगी।

मंगलवार को देहरादून के निकट डोईवाला में सिपेट का उद्घाटन करने पहुंचे केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को दस्तावेज सौंपने के बाद कहा कि आइडीपीएल का संचालन केंद्र सरकार पूर्ववत करती रहेगी।

उन्होंने राज्य को सौंपी गयी शेष भूमि में से 200 एकड़ भूमि ऋषिकेश एम्स के विस्तार के लिए प्रदान करने का आग्रह किया। जबकि शेष भूमि पर विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर खोलने की योजना को आगे बढ़ाने की सहमति दी।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस जमीन पर सरकार आगामी पांच वर्षों में विश्व स्तरीय कन्वेंशन सेंटर का निर्माण करेगी। जिससे राज्य में पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।