कूड़ा निस्तारण पर सरकार का विशेष ध्यानः त्रिवेन्द्र

उत्तराखंड सरकार कूड़ा निस्तारण की दिशा में विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए हरिद्वार में कूड़ा निस्तारण को एक बड़ा प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट में नीदरलैंड के विशेषज्ञ काम कर रहे है। प्रोजेक्ट सफल रहा था तो इससे एविशन फ्यूल, खाद आदि तैयार की जा सकेगी। यह बात मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कही। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना के तहत पहले सब्सिडी 30 प्रतिशत मिली थी, जोकि अब बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जा रही है।

उन्होने कहा कि डोइवाला के आसपास करीब 25 से 50 एकड़ भूमि पर फिल्म सिटी बनेगी। इसके लिए भूमि तलाशी जाएगी। उत्तराखंड फिल्म जगत के हिसाब से पूरी तरह परिपूर्ण है, यहां की वादियों को कैमरे में कैद किया जाएगा। बड़े पर्दे पर उत्तराखंड की सौंदर्य छवि देखने को मिलेगी। इससे यहां पर्यटन बढ़ेगा।

उन्होने कहा कि अटल आयुष्मान योजना से राज्य में अब तक चार लाख 46 हजार गोल्डन कार्ड लोगों के बनाए जा चुके है। जबकि प्रतिदिन 35 हजार गोल्डन कार्ड विभिन्न क्षेत्रों में बन रहे है। इस योजना के मरीजों के बिल का भुगतान सरकार 15 दिनों के भीतर करेगी। साथ ही सप्ताह भर की निशुल्क दवाइयां भी देने का प्रावधान रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडी) शुरू किए जाने पर काम चल रहा है।

राज्य सरकार प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक डिजिटल सेवाएं देने का कर रही प्रयासः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जल्द ही राज्य सरकार की 700 से अधिक सेवाएं कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से आमजन को उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही उत्तराखंड के हर ब्लॉक में एक गांव डिजिटल विलेज बनाया जाएगा। उत्तराखंड सरकार का प्रयास है कि आने वाले एक वर्ष के भीतर दूरस्थ क्षेत्रों तक डिजिटल सेवाएं उपलब्ध हो। हमारे नौजवान सृजनशील, परिश्रमी व बुद्धिमान है, उन्हें केवल व्यवसायिक कौशल सीखने की जरूरत है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि प्रगति के लिए व्यवसायिक गुण होना बहुत जरूरी है। उत्तराखंड सरकार द्वारा बिजनेस मॉडल पर आधारित कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के द्वारा रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने घोषणा की कि हरिद्वार देश का पहला जिला है जिसकी सभी पंचायतें वाई-फाई हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को आईआरडीटी सभागार में उत्तराखंड टॉप ट्रांजैक्टिंग वीएलई कांफ्रेंस के दौरान प्रदेश भर से आए सीएससी ग्रामीण स्तरीय उद्यमियों का उत्साहवद्धर्न किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्तराखंड में 5000 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर सक्रिय है। राज्य में 9622 कॉमन सर्विस सेंटर पंजीकृत है जिसमें से 7619 ग्रामीण क्षेत्र में है तथा दो हजार के लगभग शहरी क्षेत्र में है। आज राज्य में 233044 लाभार्थी पंजीकृत किए जा चुके हैं जिनमें से 100412 लाभार्थी प्रमाणीकृत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह खुशी की बात है कि उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में आईटी के माध्यम से विषमताओं को दूर करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) राज्य में काम कर रहे हैं उससे पता चलता है कि उत्तराखंड बहुत तेजी से आईटी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। उत्तराखंड सरकार का प्रयास है कि जल्द से जल्द पूरे राज्य को वाईफाई सेवाएं पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस प्रकार के नीतिगत परिवर्तन किए हैं ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में तकनीक के माध्यम से आमजन को सेवाएं उपलब्ध हो सके।

उत्तराखंड राज्य का 71 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित होने के कारण विभिन्न प्रकार के पर्यावरणीय अनुमोदन की आवश्यकता पड़ती है। अतः राज्य सरकार द्वारा नीतिगत परिवर्तन द्वारा इस दिशा में निश्चित रूप से गति आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हमारे गांव डिजिटल रूप से मजबूत होते हैं तो ग्रामीणों को अधिक से अधिक सरकारी सेवाओं व योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। पिछले वर्ष राज्य सरकार ने टेली रेडियोलॉजी व टेलीमेडिसिन की शुरुआत की। आज हमारे 35 मुख्य अस्पतालों विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों के अस्पतालों को टेलीमेडिसिन व टेली रेडियोलॉजी से जोड़ा गया है।

आने वाले समय में उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ जैसे स्थानों पर भी कॉल सेंटर्स खोले जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार स्थानीय संसाधनों के आधार पर स्थानीय आर्थिक को मजबूत करके स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अधिकाधिक अवसर खोलने हेतु ग्रोथ सेंटर विकास की परिकल्पना पर काम कर रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने राज्य की तीन सर्वश्रेष्ठ महिला उद्यमियों व डिजिटल लिटरेसी के माध्यम से लाभ प्राप्त करने वाले पांच लाभार्थियों को सम्मानित किया। इसके साथ ही इस अवसर पर राज्य सरकार की 250 से अधिक सेवाएं कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से दिए जाने के संबंध में एमओयू किया गया।

सीएम जन्मदिनः त्रिवेन्द्र के जन्मदिन पर डॉक्टूमेंट्री का प्रदर्शन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के जन्मदिन पर गुरूवार को सुभाष रोड स्थित होटल में कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें शोद्यार्थी अनूप कुमार की ओर से मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र के जीवन चरित्र व कार्यकलापों पर आधारित पुस्तक ‘‘कर्मण्येवाधिकारस्ते त्रिवेन्द्र एक परिवर्तनकारी नेतृत्व’’ का विमोचन किया गया। पुस्तक का विमोचन विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द्र अग्रवाल, विधायक हरबंश कपूर, दून के मेयर सुनील उनियाल गामा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भटट, पदमश्री अनिल जोशी, सुशीला बलोनी, बसन्ती बिष्ट ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान मुख्यमंत्री के जीवन पर आधारित कर्मशील एवं सचरित्र मुख्यमत्री त्रिवेन्द्र पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित जनसमूह ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी गई।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमारे लोकतंत्र व जनता का आसीम विश्वास व स्नेह का प्रतिफल है कि एक सामान्य परिवार में जन्में सामान्य व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाकर इस प्रदेश की सेवा का अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि वे उत्तराखण्ड के निर्माण से लेकर राज्य गठन तक इसके समग्र चिन्तन के साक्षी रहे है। जिन आकाक्षाओं व आवश्यकाताओं की पूर्ति के लिये राज्य निर्माण हुआ है वे उसे पूर्ण करने का मन, वचन व कर्म से प्रयास कर रहे है। इसके लिये सभी से सहयोग की भी अपेक्षा की।

इस अवसर पर पदमश्री अनिल जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र के कार्यकाल को जनता ने सराहा है। अपने कार्यों की उन्होंने समाज में बडी धाक जमाई है। ईमानदारी की उन्होंने मिशाल पेश की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने पहाड़ में पहाड़ के गांवो को गम्भीरता से महसूस कराया है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द्र अग्रवाल व विधायक हरबंश कपूर ने उन्हें योग्य, ईमानदार कर्मठ मुख्यमंत्री बताया। देहरादून के मेयर सुनील उनियाल गामा ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र के जन्म दिवस के अवसर पर शहर में एक पखवाडे का स्वच्छता अभियान चलाये जाने की बात कही। स्वामी चिदानन्द मुनि ने मुख्यमंत्री को कार्यकुशल, कर्तव्य परायण व सबको गले लगाने वाला व्यक्ति बताया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भटट ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र को संगठन व राजनीति के शिष्टाचार का ज्ञाता, भ्रष्टाचार के विरूद्ध मुहिम चलाने वाला इमानदार तथा विकास को गति देने वाला व्यक्ति बताया। पुस्तक के लेखक अनुप कुमार ने कहा कि यह पुस्तक उन लोगों के योगदान का परिणाम है जिन्होंने उन्हें विकासात्मक कार्य हेतु परिवर्तन कारी नेतृत्व त्रिवेन्द्र सिंह रावत के सन्दर्भ में शोध कार्य करने के लिये प्रेरित किया।

विजय दिवसः सीएम त्रिवेन्द्र और जनरल वीके सिंह ने किया पूर्व सैनिकों को सम्मानित

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि 16 दिसम्बर का दिन वीरता व पराक्रम में ऐतिहासिक दिन है। मात्र 13 दिन में भारतीय सैनिकों के साहस व बहादुरी के सामने नतमस्तक होकर पाकिस्तानी सेना के 93 हजार सैनिकों को आत्मसमर्पण करना पड़ा था। यह सैन्य इतिहास में सबसे बड़ी विजय थी। मुख्यमंत्री, 1971 भारत-पाक युद्ध के शहीदों की स्मृति में डिफेंस कालोनी में आयेाजित कार्यक्रम में सम्बोधित कर रहे थे। विजय दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत व विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने देश की रक्षा में अपना सर्वस्व त्याग करने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि हमारे सैनिकों के पराक्रम से पाकिस्तानी सैनिकों का मनोबल टूट गया था। स्कूल कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को भारतीय सेना के शौर्य, त्याग व बलिदान के बारे में बताया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष से स्कूलों में विजय दिवस पर छात्रों को भारत के इस गौरवपूर्ण इतिहास के बारे में बताया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड, देवभूमि के साथ ही वीर भूमि भी है। यहां सदैव देशभक्ति व राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना रही है। उत्तराखण्ड दो देशों की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर स्थित है। परंतु आज तक कभी अराष्ट्रवादी तत्व यहां नहीं आ सके हैं।

केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने कहा कि विजय दिवस हमें भारतीय सेना की बहादुरी व बलिदान को याद दिलाता है। केवल 13 दिनों में इतनी बड़ी जीत हासिल करना और एक अलग देश बना देना, निश्चित तौर पर देश के लिए गौरवपूर्ण है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत व केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने कार्यक्रम में वीर नारियों व वीरता पदक प्राप्त सैनिकों व पूर्व सैनिकों को सम्मानित भी किया।

होमगार्डस अपनी जिम्मेदारी कुशलता से निभा रहेः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य में जल्द ही 1111 पुरूष व महिला होमगार्डस की नई भर्तियां करने की घोषणा की है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने ड्यूटी के दौरान बलिदान देने वाले होमगार्डस जवानों के आश्रितों हेतु कल्याण कोष में आवंटित धनराशि में वृद्धि की स्वीकृति दी है।

होमगार्डस व नागरिक सुरक्षा के जवानों से रिस्पना पुनर्जीवीकरण में भागीदारी की अपेक्षा के साथ मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा दृढ़ विश्वास है कि रिस्पना में पानी आएगा। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से व्यापक जनसहयोग से ‘‘रिस्पना से ऋषिपर्णा’’ मिशन सफल होगा व रिस्पना पुनर्जीवित होगी।

होमगार्डस एंव नागरिक सुरक्षा संगठन की स्थापना दिवस के अवसर पर होमगार्डस निदेशालय ननूरखेड़ा देहरादून में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि होमगार्डस के जवान मेहनत, लगन व निष्काम भावना से शान्ति, कानून व्यवस्था, यातायात व्यवस्था, मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रमों व बोर्ड की परीक्षा के दौरान व्यवस्था बनाए रखने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां कुशलता से निभा रहे हैं। इसके साथ ही पर्यटन, चारधाम यात्रा, वनाग्नि नियंत्रण, रिस्पना के पुनर्जीवीकरण, पौधरोपण में भी सहयोग कर रहे है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने होमगार्डस एवं नागरिक सुरक्षा संगठन की भव्य रैतिक परेड की सलामी ली। मुख्यमंत्री ने परेड के उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु होमगार्डस व नागरिक सुरक्षा संगठन को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने डयूटी पर दिवंगत होमगार्डस स्वयंसेवक की वीरांगना पत्नियों को बीमा सहायता राशि व कल्याण कोष की सहायता राशि प्रदान की। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सराहनीय सेवाओं के लिए वरिष्ठ स्टाफ अधिकारी अमिताभ श्रीवास्तव, राजीव बलूनी, सहायक उपमहासमादेष्टा एकता उनियाल, मण्डलीय कमाण्डेन्ट ललित मोहन जोशी, स्टाफ अधिकारी राहुल संचान आदि को पुरस्कृत किया गया।

गैस वितरण परियोजना से दूनवासियों को नई सौगात मिलेगीः त्रिवेन्द्र

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरूवार को विज्ञान भवन नई दिल्ली से 9वें नगर गैस वितरण बोली चक्र के अन्तर्गत देश के 19 राज्यों के 129 जिलो में स्थित 65 भौगोलिक क्षेत्रों में गैस वितरण की परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इसमें जनपद देहरादून भी शामिल है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने 14 राज्यों में फैले 124 जिलो के 50 भौगोलिक क्षेत्रों के लिये 10वें गैस वितरण बोली चक्र का भी शुभारंभ किया। जबकि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देहरादून जनपद की गैस वितरण परियोजना का शुभारंभ किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कोयले और अन्य तरल ईंधनों की तुलना में प्राकृतिक गैस पर्यावरण अनुकूल, सुरक्षित, सस्ता, उत्कृष्ट ईंधन है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व के 23.4 प्रतिशत प्राकृतिक गैस उपयोग की तुलना में भारत का ऊर्जा क्षेत्र में प्राकृतिक गैस का प्रतिशत 6.2 है। इसे 15 प्रतिशत तक किये जाने की दिशा में हम अग्रसर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 10वें नगर गैस वितरण बोली चक्र के पश्चात् देश के 27 राज्यों के 52 प्रतिशत क्षेत्रफल के 402 जनपदो की 70 प्रतिशत आबादी को यह सुविधा उपलब्ध हो जायेगी। इससे आम आदमी का जीवन आसान होगा। 2014 तक सीएनजी स्टेशनों की संख्या 947 थी, वह आज 1470 हो गयी है। इस दशक के अन्त तक इसकी संख्या 10 हजार के पार किये जाने की व्यवस्था की जा रही है। सिटी गैस वितरण का कार्य तेजी से बढ़ रहा है। इसमें वितरण की परेशानियों का भी समाधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह रिफार्म, ट्रांसफार्म व परफार्म का अच्छा उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले गैस कनेक्शन के लिये लाईन में लगना होता था, जिससे अब निजात मिल गई है। एलपीजी कनेक्शन व्यवस्था जहां 1955 में आरम्भ हुई थी तथा 2014 तक 13 करोड़ कनेक्शन वितरित हुए, जबकि पिछले चार वर्षों में ही 12 करोड़ गैस कनेक्शन वितरित किये गये है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास देश की 40 प्रतिशत ऊर्जा की जरूरत गैस व अन्य पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों से पूरा करने का है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देहरादून जनपद को नगर गैस वितरण परियोजना से जोडने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपेक्षा की कि गेल इस परियोजना को एक से डेढ़ वर्ष में पूर्ण कर लेगा। उन्होंने इसे देहरादूनवासियों के लिये नई सौगात बताते हुए इसे दून वैली के पर्यावरण को भी मजबूती प्रदान करने वाला बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गैस पाइप लाईन से जहां लोगों को तमाम तरह की कठिनाईयों से निजात मिलेगी वहीं सीएनजी स्टेशनों की स्थापना से सीएनजी वाहनों की संख्या भी बढ़ेगी तथा इससे वाहनों से होने वाले प्रदूषण से भी दूनवासियों का छुटकारा मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देहरादून में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। राज्य के मैदानी क्षेत्रों में आबादी का दबाव निरन्तर बढ़ रहा है। उसी क्रम में आगे भी वाहनों का दबाव बना रहेगा, इसका बेहतर रास्ता सीएनजी ही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने आईआईपी, देहरादून में स्थापित बायोगैस संयत्र का अवलोकन कर संयत्र के संबंध में भी वैज्ञानिकों से जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर तथा देहरादून के बाद नैनीताल के साथ ही अन्य स्थानों में भी गैस पाइप लाइन का कार्य आरम्भ होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को गैस ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया है। बिजली के संकट से जूझ रहे अनेक कारखानों को गैस ईंधन नई ऊर्जा मिल रही है। उन्होंने कहा कि गैस ईंधन कम खर्चीला तथा इको फ्रेन्डली है। इससे दूनवासियों के जीवन में निश्चित रूप में बदलाव आयेगा तथा आम जिंदगी खुशहाल होगी।

हाईकोर्ट का उपनल कर्मियों को बड़ा तोहफा

नैनीताल हाईकोर्ट ने उपनल कर्मियों के पक्ष में सरकार को आदेश दिए है। जिसके अनुसार सरकार को कोर्ट ने कहा कि वह एक वर्ष के भीतर उपनल कर्मियों को नियमावली के अनुसार नियमित करे। साथ ही उन्हें न्यूनतम वेतनमान भी दे।

कोर्ट के फैसले से राज्य के विभिन्न विभागों, संस्थानों, निगमों में कार्यरत 20 हजार से अधिक उपनल कर्मियों को बड़ी सौगात मिली है। साथ ही उपनल कर्मचारियों की यूनियन को सरकार पर नियमित करने के लिए दबाव बनाने का हथियार भी मिल गया है।

पिछले दिनों हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने सरकार से पूछा था कि उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए क्या नीति बनाई है? सरकार की ओर से जवाब में कोर्ट को बताया गया कि इस प्रकरण पर विचार किया जा रहा है।

मामले के अनुसार कुंदन सिंह नेगी ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम उपनल द्वारा की जा रही नियुक्तियों पर रोक लगाने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने इस पत्र का स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था।

याचिका में कहा गया था कि उपनल का संविदा लेबर एक्ट मेें पंजीकरण नहीं है, इसलिए यह असंवैधानिक संस्था है। उपनल का गठन पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों के लिए हुआ था मगर राज्य सरकार ने इस संस्था को आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की नियुक्ति का माध्यम बना दिया। जिस पर पूर्ण नियंत्रण राज्य सरकार का है। याचिका में उपनल कर्मियों के सामाजिक व आर्थिक स्थिति को देखते हुए भविष्य के लिए नीति बनाने की मांग की थी।

कोर्ट ने इस मामले में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एमसी पंत को न्यायमित्र नियुक्त किया था। अधिवक्ता पंत ने कोर्ट को बताया कि कर्मचारियों ने जब याचिका दायर की तो सरकार की ओर से बताया गया कि उन्हें साल में फिक्सनल ब्रेेक दिया जाता है। कोर्ट ने इस ब्रेक को ना देने तथा इसे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध माना था। सोमवार को हाई कोर्ट की ओर से उपनल कर्मियों को नियमावली के अनुसार नियमित करने तथा उन्हें न्यूनतम वेतनमान देने के आदेश पारित किए।

राज्य के विभिन्न विभागों, निगमों व संस्थानों में 20 हजार से अधिक उपनल कर्मचारी कार्यरत हैं। इसमें ऊर्जा के तीनों निगमों में ही 1200 कर्मी हैं। उपनल कर्मचारी को प्रतिमाह सरकार द्वारा करीब 12 हजार मासिक मानदेय दिया जाता है। इस आधार सरकार करीब 25 करोड़ मासिक व सालाना करीब तीन सौ करोड़ मानदेय दे रही है। नियमित होने अथवा न्यूनतम वेतनमान के बाद सरकार पर सालाना करीब एक हजार करोड़ वित्तीय बोझ पड़ेगा।

भविष्य में यूजेवीएन लिमिटेड की स्थिति में और सुधार होगाः त्रिवेन्द्र

यूजेवीएन लिमिटेड द्वारा राज्य सरकार को लाभांश के रूप में 18.69 करोड़ रूपये का चैक सौंपा। इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि यूजेवीएन लिमिटेड अच्छा कार्य कर रहा है। भविष्य में निगम की स्थिति में और भी अधिक सुधार होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में विद्युत उत्पादन की काफी क्षमता है, लेकिन कतिपय कारणों से उसका दोहन नहीं हो पा रहा है। जो परियोजनाएं जल्द संचालित हो सकती हैं, उनको शीघ्र संचालित करने का हमारा प्रयास है। जल विद्युत परियोजनाओं के साथ ही सोलर प्रोजक्ट पर भी राज्य में कार्य किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस दौरान निगम के सेवानिवृत्त अधिकारियों को सम्मानित किया। वहीं, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन, पॉवर व कृषि तीन ऐसे क्षेत्र हैं, जिनका राज्य की आर्थिकी में महत्वपूर्ण योगदान है। स्वरोजगार, पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकने लिए इन क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

यूपी और उत्तराखंड की बसों के अस्थाई परमिट की व्यवस्था हुई खत्म, दोनों सरकारों ने लिया फैसला

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पारस्परिक परिवहन समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस मौके पर सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि इस समझौते के बाद अब यूपी और उत्तराखंड की जनता को परिवहन में बेहतर सुविधा मिलेगी। पिछले 18 सालों से चला आ रहा इंतजार अब खत्म हो गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि दोनों राज्यों की सरकारें समाधान में विश्वास करती हैं। दोनों ही सरकारें राज्य के विकास के लिये निरंतर कार्यरत है। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा भी की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच परिवहन समझौता होने से दोनों राज्यों के बीच बसों का आवागमन बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि हम सब साझी विरासत का हिस्सा है। इसलिए आने वाले दिनों में हमारे संबंध और अधिक प्रगाढ़ होंगे।

इस समझौते से अब यूपी परिवहन निगम की बसें उत्तराखंड में 216 मार्गों पर एक लाख 39 हजार किलोमीटर चलेंगी। वहीं उत्तराखंड की बसें यूपी में 335 मार्गों पर दो लाख 52 हजार किलोमीटर हर रोज चलेंगी।

उल्लेखनीय है कि मौजूदा समय में यूपी से उत्तराखंड जा रहीं और वहां से यूपी आ रहीं बसों का संचालन अस्थाई परमिट के आधार पर हो रहा है। परमिट की अवधि खत्म हो जाने के बाद दोनों राज्य एक-दूसरे की सीमा में प्रवेश करने वाली बसों को रोक दिया जाता है। इसके चलते बस यात्रियों को अत्यंत परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इस समझौते के होने के बाद दोनों राज्यों को अपनी बस चलाने के लिए किसी परमिट की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही अस्थाई परमिट की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह व उत्तराखण्ड के परिवहन मंत्री यशपाल आर्य भी उपस्थित थे।

वेबसाइट्स पर पोर्न वीडियो दिखाई गयी तो होगी आईटी एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही

केंद्र सरकार पोर्न वेबसाइट्स पर लगातार नजर रख रही है। यदि पोर्न वेबसाइट्स द्वारा वीडियों दिखायी जाएंगी तो आईटी एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही हो पाएगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के अधीन (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन) नाम से साइबर क्राइम पोर्टल लांच किया है। जिसमें साइबर क्राइम की शिकायत या सूचना दर्ज की जा सकती है। गुरूवार को उच्च न्यायालय नैनीताल में दूरसंचार विभाग की ओर से इस मामले में हलफनामा भी पेश किया गया। विभाग की ओर से 827 पोर्न वेबसाइट्स को बंद करने के आदेश दिए गये है।

हाईकोर्ट नैनीताल के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ के समक्ष केंद्रीय दूरसंचार विभाग की ओर से हलफनामा प्रस्तुत किया गया। जिसमें हाई कोर्ट की ओर से पारित आदेश के क्रियान्वयन को लेकर जानकारी दी गई। हलफनामे में बताया गया है कि अश्लीलता परोस रही इन वेबसाइट्स पर लगातार नजर रखने के विभाग को निर्देश दिए गए हैं। शपथ पत्र में यह भी बताया गया है कि 30 अन्य वेबसाइट्स की जांच में अश्लीलता फैलाने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा कुछ विदेशी वेबसाइट भी हैं, जिन पर इंटरपोल व ब्रिटेन इंटरनेट वॉच फाउंडेशन नजर रखता है, जो भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआइ से सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।

कठोरता से अश्लीलता पर रोक लगाएगी सरकार
केंद्र सरकार के हलफनामे के आधार पर खंडपीठ ने उम्मीद जताई कि सरकार अश्लीलता पर कठोरता से रोक लगाएगी, ताकि बच्चों को यौन अपराध से बचाया जा सके। कोर्ट ने साइबर क्राइम पोर्टल का 24 घंटे में प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया में प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। ज्ञातव्य है कि पिछले माह दून में अश्लील वीडियो देखकर चार नाबालिग बच्चों ने एक नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस घटना के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य व केंद्र सरकार को अश्लीलता रोकने के दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस मामले में अगली सुनवाई अब 26 नवंबर को होगी।