प्रबंध समिति की स्कूल ड्रेस वितरण में भूमिका होगी समाप्त

अब विद्यालय प्रबंध समितियों का स्कूल ड्रेस वितरण में भूमिका समाप्त हो जाएगी। इसका कारण है कि राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को निशुल्क दी जाने वाली स्कूल ड्रेस के स्थान पर धनराशि मिलेगी और यह धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में की जायेगी।

राज्य में सरकारी व सहायताप्राप्त प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत समस्त छात्रओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को मुफ्त स्कूल ड्रेस मुहैया कराई जाती है। इस योजना से राज्य के करीब ढाई लाख छात्र-छात्रएं लाभान्वित होते हैं।

अब सरकार ने मुफ्त किताबों की तर्ज पर स्कूल ड्रेस का पैसा भी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना के तहत छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में देने का निर्णय लिया है। कक्षा एक से आठवीं तक समस्त छात्र-छात्रओं को दी जाने वाली निशुल्क पाठ्यपुस्तकों के स्थान पर पुस्तकों की मूल्य राशि डीबीटी के तहत उपलब्ध कराई जा रही है। अब इस योजना को स्कूल ड्रेस के लिए भी लागू किया जा रहा है। इस योजना में प्रति लाभार्थी छात्र-छात्र को दो स्कूल ड्रेस के लिए 600 रुपये दिए जाएंगे। इस मद में तकरीबन 14 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

इस संबंध में फैसला लेने में देरी के चलते स्कूल ड्रेस के लिए दी जाने वाली धनराशि निदेशालय स्तर से जिलों को भेजी जा चुकी है। केंद्र सरकार डीबीटी योजना को प्रोत्साहित कर रही है। इसमें धनराशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में मुहैया कराई जा रही है। केंद्र के रुख को भांपकर राज्य सरकार भी डीबीटी योजना को प्रोत्साहित कर रही है। इस कड़ी में अब स्कूल ड्रेस के लिए भी इसे लागू किया जा रहा है। हालांकि इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए सर्व शिक्षा अभियान कार्यकारिणी परिषद में भी डीबीटी के प्रस्ताव पर मुहर लगानी होगी। लिहाजा शासन स्तर पर कार्यकारिणी परिषद की बैठक 30 अक्टूबर को बुलाई गई है।

स्कूली अनुबंधित बसों का टैक्स आधा होने से मिलेगी राहत

अब स्कूलों में अनुबंध पर लगने वाली बसों का टैक्स भी आधा होने की उम्मीद है। परिवहन विभाग ने इसके लिये प्रस्ताव बनाया हैं। अभी तक टैक्स में छूट स्कूलों की स्वयं की बसों और वैन को ही है।

परिवहन दफ्तरों में पंजीकृत होने वाली स्कूल बस का टैक्स निजी बसों की अपेक्षा कम होता है। टैक्स व्यवस्था के हिसाब से स्कूल बस से तीन महीने के लिए 90 रुपये प्रति सीट के हिसाब से टैक्स वसूला जाता है, जबकि निजी बसों से 300 रुपये टैक्स लिया जाता है। निजी बस को अनुबंध पर स्कूली बच्चों के परिवहन के लिए चलाया जाता है तब भी उसे 300 रुपये प्रति सीट के हिसाब से ही टैक्स देना होता है। ऐसे में निजी ट्रांसपोर्टर स्कूल में बसें लगाने से बचते हैं। ट्रांसपोर्टर अनुबंधित स्कूल बसों के लिए भी स्कूल वैन की तर्ज पर टैक्स में छूट की मांग कर रहे हैं। दरअसल, स्कूल का टैक्स मैक्सी-कैब की अपेक्षा आधा है। मैक्सी कैब का तीन महीने का टैक्स 415 रुपये प्रति सीट है, जबकि स्कूल वैन का टैक्स 207.50 रुपये प्रति सीट है।

वैन भी अनुबंध या निजी करार पर स्कूलों के लिए संचालित होती हैं। अनुबंधित स्कूल बसों को टैक्स में छूट देने के लिए परिवहन आयुक्त ने एक टैक्स निर्धारण कमेटी का गठन किया था। जिसमें आरटीओ देहरादून दिनेश चंद्र पठोई कमेटी के अध्यक्ष हैं। इस कमेटी ने स्कूली बच्चों की सुविधाओं को देखते हुए अनुबंध पर संचालित स्कूल बसों का टैक्स आधा कर देने की सिफारिश की है। इसमें शर्त होगी कि बस का संचालन निजी बुकिंग पर नहीं किया जाएगा।

कमेटी ने रिपोर्ट में बताया है कि स्कूलों संग अनुबंध करने वाले वाहन स्वामी प्रदेशस्तर का कांट्रेक्ट कैरिज परमिट लेते हैं और स्कूल बंद हो तो ये बसें निजी मार्गो पर संचालित की जाती हैं। टैक्स की छूट उन्हीं निजी बसों को मिलेगी, जो सभी नियम पूरे करती हों, रंग पीला हो और बसें केवल स्कूल के लिए संचालित हों।

रेल मंत्री पीयूष गोयल से मिले राज्यमंत्री अजय टम्टा और सांसद कोश्यारी, की इस रेल लाइन के शीघ्र निर्माण की मांग

केन्द्रीय वस्त्र राज्यमंत्री अजय टम्टा व सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने बुधवार को नई दिल्ली में रेल मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के शीघ्र निर्माण का अनुरोध किया।

रेल मंत्री को लिखे पत्र में टम्टा ने कहा है कि उनके संसदीय क्षेत्र अल्मोड़ा की जनता कई दशकों से टनकपुर-बागेश्वर रेल मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर संघर्षरत है। इस रेल मार्ग के निर्माण हेतु 1912 में ब्रिटिश शासनकाल से वर्ष 2010-11 तक अनेक बार सर्वे का कार्य किया गया है। उन्होंने इस विषय को लोकसभा में रेल बजट पर अपने भाषण में भी उठाया था और इसका निर्माण शीघ्र प्रारम्भ करने का अनुरोध किया था।

उन्होंने कहा कि राज्यसभा की याचिका समिति के समक्ष रक्षा मंत्रालय द्वारा टनकपुर-बागेश्वर रेलमार्ग को भारत की सुरक्षा की दृष्टि से सामरिक महत्व की परियोजना के रूप में चिन्ह्ति किया था। समिति द्वारा अपनी 141वीं रिपोर्ट में इसके शीघ्र निर्माण का प्रस्ताव किया गया था। इस रेल मार्ग के निर्माण में विलम्ब से क्षेत्रवासियों में अत्यंत रोष है।

उन्होंने इस संबंध में बागेश्वर-टनकपुर रेलमार्ग निर्माण संघर्ष समिति के साथ सांसद भगत सिंह कोश्यारी के पत्र का भी उल्लेख किया है, जिसमें भी उल्लेख किया गया है कि सामरिक सुरक्षा की दृष्टि से संसद की याचिका समिति के सम्मुख हिमालयी राज्यों में 14 नये रेल लाईनों की आवश्यकता बताई गयी। इन 14 रेल लाईनों में तीन उत्तराखण्ड से है, जिनमें ऋषिकेश-कर्णप्रयाग-चमोली, टनकपुर-बागेश्वर व टनकपुर-जौलजीवी है। इनमें टनकपुर बागेश्वर रेल लाईन के बीच में लगभग 80 किमी के बाद जौलजीवी 35 किमी के आसपास रेल लाईन बनेगी।

उक्त रेल लाईनों में टनकपुर-बागेश्वर-जौलजीवी छोडकर ऋषिकेश कर्णप्रयाग सहित सभी रेल लाईनों को केन्द्र ने राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के रूप में ले लिया है। उन्होंने पत्र के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा व सीमान्त क्षेत्र की जनता के हित में टनकपुर-बागेश्वर रेल लाईन को शीघ्र बनवाने का आग्रह किया। सामरिक महत्व के कारण इसे नेशनल प्रोजेक्ट के रूप में लिया जा सकता है। इस रेल लाईन के बनने से भारत के साथ-साथ नेपाल के नागरिकों को भी बहुत सुविधा होगी।

मेडिकल कॉलेजों में फीस संबंधी मामले पर हाईकोर्ट ने छात्रों को दी राहत

उच्च न्यायालय नैनीताल ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को राहत दी है। कोर्ट ने कॉलेजों के फीस संबंधित हिमालयन मेडिकल कॉलेज व कम्बाइंड इंट्रेंस एक्जाम एसोसिएशन की विशेष अपील को खारिज कर एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा है। उक्त मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी खंडपीठ ने की।

पूर्व में एकलपीठ ने सरकार के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के फीस बढ़ाने वाले शासनादेश को निरस्त कर दिया था। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया था कि जिन छात्रों ने नये शासनादेश के हिसाब से फीस भर दी है। उनको 15 दिनों के भीतर फीस वापस दी जाए।राज्य सरकार ने आयुर्वेदिक मेडिकल कालेजो की फीस बढाने को लेकर 14 अक्टूबर 2015 को एक शासनादेश जारी किया था। इस साशनादेश को छात्र ललित तिवारी समेत अन्य ने याचिका के माध्यम से हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, याचिका में कहा गया था कि सरकार ने गलत तरीके से फीस बढाने का जीओ जारी किया है ।

याचिका में कहा गया था कि मेडिकल कॉलेजों ने अपने प्रॉस्पेक्ट्स के आधार पर एडमिशन फीस को 80 हजार रुपये ली थी। परन्तु सरकार ने नया जीओ जारी कर इस फीस को बढ़ाकर दो लाख 15 हजार कर दिया। जो एक्ट के विरुद्ध व अवैध है। पूर्व में एकलपीठ ने छात्रो से अधिक ली गयी फीस को वापस करने के आदेश दिए थे। इस आदेश को कालेज व अन्य ने खण्डपीठ में चुनोती दी थी जिसपर आज सुनवाई करते हुए खण्डपीठ ने एकलपीठ के आदेश को सही मानते हुए कालेज व अन्य की विशेष अपील निरस्त कर दी है।

उत्तराखंड में गुरुवार मध्य रात्रि से पेट्रोल-डीजल के दामों में होंगे पांच रूपये कम

केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली की पेट्रोल-डीजल पांच रूपया सस्ता करने की घोषणा के बाद उत्तराखंड सरकार ने भी राज्य में पेट्रोल-डीजल पांच रूपया सस्ता करने की घोषणा कर दी। जिससे राज्य के नागरिकों को कुछ राहत अवश्य मिलेगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री की घोषणा के बाद गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, असम, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, झारखंड और हिमाचल प्रदेश ने भी 2.50 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल सस्ता किए जाने की घोषणा की। इसके बाद इन राज्यों में गुरुवार आधी रात से पेट्रोल और डीजल पांच रुपये प्रति लीटर सस्ता हो जाएगा।

पेट्रोल-डीजल के दामों में कटौती का स्वागत करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के साथ-साथ सभी भाजपा शासित राज्यों ने भी पेट्रोल और डीजल पर ढाई रूपये कम करने का निर्णय लिया है। जिससे पेट्रोल और डीजल के दाम पांच रुपये कम होंगे। जनता को राहत देने वाले इस संवेदनशील निर्णय के लिए मैं सभी भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बधाई देता हूँ।

उधर, बिहार के उप मुख्घ्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि हमें जेटली की तरफ से कोई चिट्ठी नहीं मिली। पहले हम इस आदेश को देखेंगे फिर पेट्रोल-डीजल की कीमत पर फैसला लेंगे। हर राज्य की अलग-अलग स्थिति होती है इसलिए पहले लेटर आने दीजिए।

कर्नाटक के मुख्घ्यमंत्री कुमार स्वामी ने कहा कि हमने पहले दो रुपये प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल के दाम कम करके दो महीने पहले ही लोगों को राहत दे दी है।

उधर, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से अपील की है कि वह भी अन्य राज्यों की तरह 2.50 रुपये की कटौती करें, जिससे आम लोगों को राहत मिल सके।

गौरतलब है कि पेट्रोल और डीजल पर लगने वाला वैट राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है, जबकि एक्साइज ड्यूटी केंद्र सरकार के क्षेत्राधिकार में आने वाला कर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की वजह से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हो रहा है। गुरुवार को कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो पिछले चार सालों के दौरान कीमतों में आई सबसे बड़ी उछाल है।

सभी जिलाधिकारी किन्नरों के रिकॉर्ड रखेः हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने किन्नरों के सम्मानजनक जीवन के लिये मुख्य धारा में शामिल किये जाने व उनके आवास के लिये व्यवस्था करने के लिये कहा है।

देहरादून निवासी किन्नर रजनी रावत ने अपनी सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में उनका कहना था कि 1996 में विरासत में मिली देहरादून की गद्दी की वजह से वह वसूली करती आई है, मगर हरियाणा, उत्तर प्रदेश के किन्नर शहर में आकर उनके नाम से वसूली कर रहे हैं। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।

उन्होंने देहरादून एसएसपी को मांग पत्र देकर बाहरी किन्नरों को हटाने की मांग की थी, मगर उन्हें नहीं हटाया गया। आरोप लगाया कि बाहरी किन्नर अवैध रूप से वसूली कर रहे हैं। शुक्रवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की किन्नर रजनी रावत व रानो तथा अन्य को सुरक्षा मुहैया कराने के एसएसपी देहरादून को दिए।

कोर्ट ने सभी जिलाधिकारियों से किन्नर समुदाय का रिकार्ड रखने को कहा है, ताकि समाज में कोई भेदभाव न हो सके और दूसरे व्यक्तियों की तरह इन्हें भी समान अधिकार प्राप्त हों। कोर्ट ने कहा कि किन्नरों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा मिले, उन्हें सार्वजनिक स्थान जिसमें खेल मैदान, सड़कें, शिक्षण संस्थान, बाजार, अस्पताल, होटल पर आने-जाने की छूट हो। सरकार किन्नरों के लिए सरकारी इमारतों, बस स्टेशन में छह माह के भीतर अलग शौचालय बनाए। सरकार किन्नर वेलफेयर बोर्ड का गठन करते हुए इसमें किन्नरों को भी प्रतिनिधित्व दे।

सभी जिलाधिकारी किन्नरों का पंजीकरण करें और यह सुनिश्चित करें कि किन्नर किसी बच्चे को उसके माता-पिता की अनुमति के न ले जाएं। किन्नर बच्चा अगर पैदा होता है तो उसे जुदा न किया जा सके, इसके लिए तीन माह में उचित नियम व कानून बनाया जाए। जिस परिवार में ऐसे बच्चे पैदा होते हैं, उन्हें सरकार आर्थिक सहायता दे।

दस हजार छात्रों को शिक्षित करेगा पतंजलि का आचार्यकुलम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पतंजलि योगपीठ के नव निर्मित आचार्यकुलम भवन का लोकार्पण कार्यक्रम में कहा कि स्वामी रामदेव ने जो शिक्षा का संकल्प लिया है, वह भारतीय संस्कृति को सुदृढ़ करने का कार्य भी करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी रामदेव की ओर से योग क्रांति के बाद जो शिक्षा क्रांति का संकल्प लिया गया है, वह भारतीय संस्कृति को सुदृढ़ करने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि 10 हजार छात्रों को शिक्षित करने की क्षमता रखने वाला आचार्यकुलम वैदिक और आधुनिक शिक्षा पद्धति के समन्वय का केन्द्र बनेगा।

उन्होंने कहा कि स्वामी रामदेव विश्व में योग के प्रसार के बाद अब वैदिक शिक्षा पद्धति को विश्व स्तर पर ले जाने की दिशा में अग्रसर हुए हैं। यह मानव निर्माण की प्रयोगशाला है, जहां भविष्य के भारत का निर्माण होगा। भारत को विश्व गुरू बनाने में हम सभी स्वामी रामदेव के इस अभियान में सहयोगी और साथी हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि स्वामी रामदेव भारत के भविष्य का निर्माण कार्य कर रहे है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व गुरू बनाने में पतंजलि योग पीठ का आचार्यकुलम प्रभावी भूमिका निभायेगा। इसके लिये उन्होंने स्वामी रामदेव के प्रयासों की सराहना की।

उत्तराखंड पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्णः अडाणी

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी से शिष्टाचार भेंट की। इस दोनों के बीच राज्य में ऊर्जा के अलावा कृषि, संचार एवं पर्यटन से सम्बन्धित अवस्थापना योजनाओं में निवेश से सम्बन्धित प्रस्तावों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने अडाणी के प्रस्तावों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य में निवेश की पहल को देश विदेश के उद्यमियों द्वारा सराहा गया है, जो राज्य के आर्थिक विकास एवं रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उद्यमियों को अनुकूल माहौल उपलब्ध कराया जायेगा। इसके लिये राज्य सरकार द्वारा व्यापक पहल व व्यवस्थायें भी सुनिश्चित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने अडाणी से बेमौसमी खाद्य उत्पादों, एरोमेटिक प्लान्ट तथा फलोत्पादन की दिशा में भी सहयोग की अपेक्षा की।

इस दौरान अडाणी ने देहरादून, मसूरी, नैनीताल, हेमकुण्ड साहिब, यमुनोत्री व केदारनाथ में रोपवे के निर्माण के प्रति दिलचस्पी दिखायी। इसके अलावा स्मार्टसिटी योजना, ऋषिकेश में स्थापित होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय कन्वेंसन सेन्टर, टिहरी लेक में होने वाली पर्यटन गतिविधियों, वेलनेस सेन्टर, सौर ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण, दुग्ध उत्पाद एवं कृषि से सम्बन्धित विभिन्न निवेश योजनाओं पर भी व्यापक चर्चा की।

अडाणी ने कहा कि उत्तराखण्ड का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसके दृष्टिगत पर्यटन गतिविधियों पर विशेष फोकस किये जाने की जरूरत है। उन्होंने स्थानीय उत्पादों के प्रोसेसिंग व पैकेजिंग पर भी ध्यान दिये जाने की बात कही तथा कृषि उत्पादों के बेहतर प्रसंस्करण के लिये अपनी टीम उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया।

छात्रसंघ चुनावों में महिला पदाधिकारियों के चुने जाने पर त्रिवेन्द्र ने जताई प्रसन्नता

सूबे के मुखिया त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एक देश एक चुनाव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधि व ब्लॉक प्रमुख, विधायक एव सांसद का चुनाव एक साथ कराये जाने से न सिर्फ धन की बचत होगी बल्कि ऊर्जा व समय की भी बचत होगी। उन्होंने छात्रसंघ चुनावों में महिला पदाधिकारियों के चुने जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि महिलाओं को अन्याय, उत्पीड़न, अत्याचार व सामाजिक भेदभाव के खिलाफ मजबूती से सामने आना होगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में समस्त राजकीय महाविद्यालयोंध्विश्वविद्यालयों के निर्वाचित छात्र पदाधिकारियों के एक दिवसीय सम्मेलन में प्रतिभाग कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में एक ही दिन सभी छात्र संघों के चुनाव से देश के समक्ष मिशाल कायम हुई हैं। यह देश को उदाहरण देने वाली शुरूआत है। अब हमें एक देश एक चुनाव के संकल्प पर गम्भीरता से विचार करना होगा।

मुख्यमंत्री ने पदाधिकारियों व छात्र-छात्राओं से कहा कि जीवन में कुछ अच्छा करने का ध्येय बनाए। पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, कॉलेज परिसर को पॉलिथिन मुक्त करने, निरक्षरों को साक्षर बनाने व अन्य रचनात्मक सामाजिक कार्यो का दृढ़ संकल्प के साथ अणुव्रत लें। हमने 2019 तक उत्तराखण्ड को पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा हैं। इसमें कॉलेज के छात्र-छात्राएं महत्वपूर्ण योगदान दे सकते है।

छात्र संघ में निर्वाचित महिला पदाधिकारियों को विशेष बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार महिला सशक्तिकरण को धरातल पर लागू कर रही है। महिलाएं अपनी जिम्मेदारी गम्भीरता से निभा रही है। इसके साथ ही महिलाओं को हर प्रकार के अत्याचार व उत्पीड़न के विरूद्ध आगे आना होगा।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के गुणवत्ता विकास पर ठोस कार्य किए जा रहे है। केन्द्र सरकार द्वारा राज्य के 55 डिग्री कॉलेजों को रूसा-1 व रूसा-2 के तहत 300 करोड़ रूपये की धनराशि दी गई है। तीन मॉडल कॉलेज विकसित किए जा रहे है। 76 डिग्री कॉलेज शीघ्र ही अपने भवनों में स्थान्तरित कर दिए जाऐंगे। प्राचार्यो की शत-प्रतिशत भर्ती कर दी गई है। पुस्तक दान अभियान चलाया गया हैं।

विधायक निधि से 65 लाख रूपये स्कूल-कॉलेजों में किताबें व फर्नीचर व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान कर दिया गया है। 180 दिन का शैक्षिक कैलेण्डर कड़ाई से लागू कर दिया गया है। आगामी सत्र से 30 जून तक परीक्षाएं सम्पन्न करवा ली जाएगी। 15 जुलाई से एडमिशन प्रारम्भ कर दिए जाऐंगे। हमारा लक्ष्य है कि कॉलेजों में 200 दिन का कार्यदिवस लागू किया जाए। 96 डिग्री कॉलेजों में डै्रस कोड लागू कर दिया गया है। हमारा लक्ष्य है कि 100 प्रतिशत छात्र वोटिंग हो। इसके लिए ऑनलाइन वोटिंग की पहल भी की जाएगी। जल्द ही कॉलेजों में नशा मुक्ति अभियान चलाए जाएगें।

प्रदेश से बाहर भेजा जाएगा घुसपैठियों कोः सीएम

राज्य में घुसे बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों को सरकार प्रदेश से बाहर भेजने के लिये तैयारी कर रही है। राज्य के सभी जिलों, तहसील स्तर पर इन्हें चिह्नीकरण करने की प्रक्रिया तेज हो चुकी है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने घुसपैठियों पर सख्त रूख अपनाया है। उन्होंने कहा कि कोई भी घुसपैठिया, चाहे वह बांग्लादेशी हो या रोहिंग्या, सबको प्रदेश की सीमाओं से बाहर भेजा जाएगा। हम उन्हें उत्तराखंड में बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। उत्तराखंड सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण व संवेदनशील प्रदेश है। उन्होंने कहा कि जनता को भी कोई संदिग्ध व्यक्ति दिखे तो सरकार को सूचित करे। उन्होंने कहा कि सीएम एप, मेल व अन्य वेबसाइट के माध्यम से सरकार तक सूचना पहुंचायेे। सरकार एक-एक घुसपैठिये को यहां से बाहर करेगी।

प्रदेश में बीते कुछ महीनों से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों व रोोहग्या की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस संबंध में खुफिया एजेंसियां भी लगातार सरकार को इनपुट उपलब्ध कराती रही हैं। फिलहाल, इनके आने पर रोक लगाने के लिए अभी तक कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बन पाई है लेकिन इन्हें बाहर निकालने की तैयारी जरूर शुरू हो चुकी है।

दरअसल, कुछ समय पूर्व विधायक खानपुर (हरिद्वार) कुंवर प्रणव चौंपियन ने एक सनसनीखेज बयान में कहा था कि रोोहग्या हरिद्वार तक पहुंच चुके हैं। उस समय मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस बात का समर्थन नहीं किया था। इसके बाद उन्होंने खुफिया एजेंसियों से इसका इनपुट लिया।

इस पर सरकार को प्रदेश में बाहर से आकर अवैध रूप से बसने वालों की जानकारी मिली। इसके बाद सरकार के निर्देश पर हरिद्वार के साथ ही तराई वाले जिलों में खुफिया एजेंसियों ने बस्तियों व झुग्गियों में बाहरी लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की। इनकी संख्या देखकर खुफिया एजेंसियों के होश उड़ गए। इसके तुरंत बाद सभी जिलों में इनकी सूची बनाने के निर्देश जारी किए गए, जिस पर इन दिनों तेजी से काम चल रहा है। वहीं, सरकार ने अब आमजन का भी इसमें सहयोग लेने की बात कही है।