दो अधीक्षण अभियंताओं पर नेपाल सीमा में सड़क निर्माण पर लापरवाही का आरोप, निलंबित

(एनएन सर्विस)
शासन ने अंतरराष्ट्रीय और सामरिक महत्व के टनकपुर-जौलजीवी मोटर मार्ग के निर्माण में लापरवाही पर दो अधीक्षण अभियंताओं को निलंबित किया है। अधीक्षण अभियंता मयन पाल सिंह वर्मा व प्रभारी अधीक्षण अभियंता मनोहर सिंह पर आरोप है कि दोनों ने मार्ग की निविदा प्रक्रिया संपन्न न कर प्रक्रिया को टालने का प्रयास किया।
भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बलों के आवागमन और भारतीय सीमा की सुरक्षा के लिए टनकपुर-जौलजीवी मार्ग का निर्माण प्रस्तावित है। इस मार्ग के 30 किमी से 55 किमी का निर्माण ठेकेदार दिलीप सिंह अधिकारी को आवंटित गया। ठेकेदार पर अनुबंध के दौरान फर्जी प्रमाणपत्र लगाने के शिकायत की जांच के बाद यह कार्य अगस्त 2017 में निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद इसके लिए दोबारा टेंडर आमंत्रित किए गए। इस पर ठेकेदार कोर्ट और फिर ट्रिब्यूनल में गया। आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने मामले में यथास्थिति रखने के निर्देश दिए, जिसे विभाग ने कमर्शियल कोर्ट में चुनौती दी।
जुलाई 2019 में ट्रिब्यूनल के यथास्थिति रखने के आदेश को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद पिथौरागढ़ में तैनात तत्कालीन अधीक्षण अभियंता मयन पाल ने अपने स्तर से 12 दिसंबर 2019 को निविदाएं आमंत्रित की। अपरिहार्य कारणों का उल्लेख करते हुए 24 दिसंबर 2019 को निविदाएं फिर से स्थगित कर दी गई। मुख्य अभियंता लोनिवि पिथौरागढ़ के निर्देशानुसार चार जनवरी 2020 को अधीक्षण अभियंता पिथौरागढ़ तृतीय वृत्त को फिर से निविदाएं आमंत्रित करने को पत्र भेजा गया। बावजूद इसके उन्होंने 12 जनवरी 2020 तक अपने कार्यकाल के दौरान इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। 13 जनवरी को यहां मनोहर सिंह को प्रभारी अधीक्षण अभियंता के रूप में भेजा गया। एक माह बाद, यानी 12 फरवरी 2020 को उन्होंने 12 दिसंबर 2019 को आमंत्रित निविदा में शुद्धिपत्र लगाया। इसमें निविदा आमंत्रित करने की अंतिम तिथि 19 मार्च रखी गई।

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इस बीच 18 मार्च को उन्होंने अपरिहार्य कारणों का उल्लेख करते हुए एक शुद्धि पत्र जारी किया और निविदा आमंत्रित करने की अंतिम तिथि 26 मार्च 2020 रखी। इसी दौरान बीच 25 मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन हो गया। इसका उल्लेख करते हुए प्रभारी अधीक्षण अभियंता ने केवल दो निविदादाताओं की हार्ड कॉपी प्राप्त होने का उल्लेख करते हुए 19 मई 2020 को फिर से निविदाएं निरस्त कर दीं। 28 मई को तीसरी बार निविदाएं आमंत्रित की गई।
इस बीच एक जून को आर्बिटेशन अवार्ड में ठेकेदार दिलीप सिंह अधिकारी के पक्ष में निर्णय पारित हो गया। इस प्रकरण को शासन ने बेहद गंभीरता से लिया। सचिव लोनिवि आरके सुधांशु ने दोनों अभियंताओं को शासकीय नियमों की अनदेखी करते हुए संबंधित ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के आरोप में निलंबित कर दिया। मयन पाल निलंबन अवधि में प्रभारी मुख्य अभियंता कार्यालय देहरादून तो मनोहर सिंह लोक निर्माण विभाग पौड़ी कार्यालय में संबद्ध रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने दिया, सीमांत क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी को सुधारने पर जोर

(एनएन सर्विस)
उत्तराखंड सरकार ने चीन और नेपाल सीमा की सामरिक महत्व की सड़कों को लेकर समीक्षा की। सीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में सड़कों के निर्माण को तय समय में पूरा करने और मानसून में सड़कों पर यातायात को बनाए रखने के लिए हरसंभव कोशिश करना तय किया गया। 
सामरिक महत्व को देखते हुए सीमा सड़क की समीक्षा बैठक को गोपनीय रखा गया। शासन के आला अफसरों से लेकर सूचना विभाग ने तक जानकारी देने से इनकार किया। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में सीमा सड़क संगठन के अधिकारी भी शामिल थे। तय किया गया कि केंद्र के संबंधित मामलों पर केंद्रीय स्तर पर बातचीत की जाएगी। यह भी कहा गया कि मानसून में भूस्खलन से सीमा की सामरिक महत्व की सड़कें अगर बंद होती हैं तो इन सड़कों को जल्द से जल्द खोला जाए।
यह भी बताया गया कि इस तरह के मामलों में चीन सीमा से लगी चमोली जिले की नीति घाटी में मलारी मार्ग के लिए 35 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण होना है। इसमें राजस्व विभाग से कहा गया है कि मुआवजे की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इसी तरह नेपाल सीमा से लगी सड़कों के प्रस्ताव पर भी सीएम ने तेजी से काम करने को कहा है। बैठक में सीमांत क्षेत्र विकास योजना के तहत सीमांत क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए अधिक प्रस्ताव बनाने पर जोर दिया गया।
बाद में सचिवालय में मीडिया कर्मियों से बातचीत में सीएम ने कहा कि सामरिक महत्व की सड़कों को मानसून में बंद न होने देने के लिए अधिकारियों को कहा गया है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार के साथ ही राजस्व, लोक निर्माण विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, बीआरओ के अधिकारी शामिल थे। 

उत्तराखंड के विकास में डेरी योजनाओं को करना होगा शामिलः मुख्यमंत्री

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत समेकित सहकारी विकास परियोजना व गंगा गाय महिला डेरी योजना में दुधारू पशु क्रय कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है जहां मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना जैसी योजना प्रारम्भ की गई है। इसमें कोविड-19 से प्रभावित होकर वापिस लौटे प्रवासियों के साथ ही युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उद्योग विभाग के तहत योजना प्रारम्भ करने के साथ ही अन्य विभिन्न विभागों की योजनाओं को भी इसमें समावेशित किया गया है। मुख्यमंत्री ने दूधली में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत समेकित सहकारी विकास परियोजना व गंगा गाय महिला डेरी योजना में दुधारू पशु क्रय कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।

स्वरोजगार से ही आत्मनिर्भर भारत सम्भव
मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वरोजगार की राह पर चलना होगा। हमने प्रदेश में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की है। इसमें ऋण व अनुदान की व्यवस्था की गई है। लगभग 150 प्रकार के काम इसमें लिए गए हैं। लाभार्थी अपनी रूचि और अनुभव के आधार पर इनमें से कोई भी काम शुरू कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने 20 लाख करोड़ रूपए का पैकेज दिया है। इसमें देश के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत का आह्वान किया है। राज्य में भी इसी क्रम में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का न केवल प्रारूप बनाया गया बल्कि इसका धरातल पर क्रियान्वयन भी शुरू किया जा चुका है। जिला योजना में स्वरोजगार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

बद्री गाय के संरक्षण व दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य राज्य में दूध की उपलब्धता को बढ़ाना भी है। इसीलिए निर्णय लिया गया कि योजना के तहत दुधारू पशु राज्य के बाहर से लाए जाएंगे। साथ ही बद्री गाय के संरक्षण पर काम किया जा रहा है। बद्री गाय के घी की बाजार कीमत काफी अधिक है। कोशिश की जा रही है कि इनकी दुग्ध क्षमता को बढ़ाया जा सके। इसमें कुछ सफलता भी मिली है।

घर लौटे प्रवासियों के लिए रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड़-19 की स्थितियों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में प्रवासी भाईयों को उनके घर पहुंचाया गया है। उनके स्वास्थ्य, भोजन आदि की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही इनमें से जो लोग अब उत्तराखण्ड में रहकर ही काम करना चाहते हैं, उनके लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में व्यवस्था की गई है। मनरेगा में 36 हजार नए रजिस्ट्रेशन करते हुए काम उपलब्ध कराया गया है।

20 हजार दुधारू पशु का लक्ष्य
सहकारिता एवं दुग्ध विकास मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है, जहां मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की शुरूआत हुई है। कोरोना की महामारी के बाद उत्तराखण्ड वासियों के लिए मुख्यमंत्री जी ने यह बड़ी सौगात दी है। इस योजना के तहत प्रदेश के लाखों लोगों को रोजगार दिया जायेगा। डेरी विकास विभाग में राष्ट्रीय सहकारी विकास परियोजना के अंतर्गत डेरी क्षेत्र के लिए कुल 444.62 करोड़ रूपए स्वीकृत हैं। इसके तहत राज्य के दुग्ध सहकारी संघों के सुदृढ़ीकरण, कोल्ड चैन की स्थापना के साथ ही तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने और प्रोत्साहन के लिए ऋण एवं अनुदान की व्यवस्था की गई है। योजना के अंतर्गत लगभग 5400 लाभार्थियों को 20 हजार दुधारू पशु राज्य के बाहर से क्रय कराए जाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के पहले वर्ष चालू वित वर्ष में लगभग 2800 लाभार्थियों को 10 हजार दुधारू पशु क्रय कराए जाएंगे। योजना के तहत इकाई लागत का 65 प्रतिशत ऋण, 10 प्रतिशत लाभार्थी अंशदान और एनसीडीसी व राज्य अंतर्गत संचालित गंगा गाय महिला डेरी योजना से कुल 25 प्रतिशत अनुदान दिये जाने की व्यवस्था है। दुधारू पशुओं का बीमा पशुधन बीमा योजना में किया जाएगा। पूरे प्रदेश में 500 मिल्क बूध की स्थापना की जा रही है। डेरी के क्षेत्र में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि इस क्षेत्र में प्रदेश के 10 हजार से अधिक लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि अगले दो महिने में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पशु मेले लगाये जायेंगे।

इस अवसर पर उत्तराखण्ड वन पंचायत सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष करन बोहरा, भाजपा के जिलाध्यक्ष शमशेर सिंह पुण्डीर, मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रवीन्द्र दत्त, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, निदेशक डेरी विकास जीवन सिंह नगन्याल, दुग्ध संघ से विजय रमोला, हरेन्द्र पाल सिंह आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में फ्लोटिंग टरबाइन से अवसर तलाशने को कहा

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य की नदियों एवं नहरों में फ्लोटिंग टरबाइन के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन की संभावनाएं तलाशने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सोलर व विंड पावर की भांति ऊर्जा उत्पादन की यह विधि राज्य की नहरों एवं नदियों के अनुकूल होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में नदियों में इस प्रकार के फ्लोटिंग टरबाइन ऊर्जा उत्पादन के साथ ही खेतों की सिंचाई तथा पेयजल आपूर्ति में मददगार हो सके इसकी भी संभावनाएं तलाशी जाएं, इससे वर्षा जल पर आधारित खेतों की सिंचाई की निर्भरता कम होगी। उन्होंने इसके लिए स्थानीय लोगों को भी प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत बताई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की नदियों एवं नहरों का राज्य हित में तकनीकी के माध्यम से ऊर्जा एवं पर्यटन की दृष्टि से बेहतर उपयोग समय की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस दिशा में नदियों व नहरों की क्षमता के उपयोग लागत आदि का भी आधुनिक तकनीकी दक्षता के साथ आकलन करने को कहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयासों से नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर इस संबंध में प्रस्तुतीकरण भी प्रस्तुत किया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री के तकनीकी सलाहकार नरेंद्र सिंह, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव अमित नेगी, नितेश झा, राधिका झा, तीनों ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशकों के साथ ही अन्य संस्थानों के अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।

उत्तराखंड में पलायन रोकने के लिए कृषि ही मददगारः सुबोध उनियाल

(एनएन सर्विस)
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की 26 वीं बैठक में उत्तराखण्ड के उद्यान, कृषि एवं रेशम विकास विभाग मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं, परन्तु अभी भी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि औषधीय खेती एवं जैविक खेती को बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। कृषि उत्पादों का निर्यात भारत सरकार की प्राथमिकताओं में है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने हेतु प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि नई नई फसलों को विकसित किए जाने की आवश्यकता है। इससे उत्पादकता बढ़ेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि किसानों को इंश्योरेंस के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों में छोटे छोटे किसानों की संख्या अधिक है। उनको ध्यान में रखते हुए योजनाओं को तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यों में सिंचाई के दायरे को बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। नए अध्यादेशों एवं फसल बीमा योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों को पहुंचे इसके प्रयास किए जाएं, ताकि हमारे किसान आत्मनिर्भर भारत बनाने में अपना योगदान दें सकें।
उत्तराखण्ड के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य में कृषि महिला आधारित है, इसलिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा वुमन फ्रेंडली खेती की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैविक कृषि के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल है। ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए वनों के वेस्ट मटीरियल से खाद बनाने हेतु योजनाओं पर बल दिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य में जैविक उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु सब्जी और फल फसलों में कीट नियंत्रण के लिए जैविक शोध कार्यक्रम चलाए जाने पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने राज्य के उत्पादों जैसे रेड राईस, राजमा, मंडुवा आदि की उन्नत किस्मों पर भी अनुसंधान किए जाने की आवश्यकता बताई।
कृषि मंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों के साथ ही कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाले बीजों पर भी रिसर्च किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के अन्तर्राष्ट्रीय बॉर्डर क्षेत्रों हेतु उचित जलवायु अनुसार फसलों पर अधिकाधिक शोध कराए जाएं ताकि सीमांत क्षेत्रों के किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़े। इससे पलायन भी रोका जा सकेगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य में नींबू वर्गीय फलों हेतु कल्मी पौध रोपण के लिए आईसीएआर एवं उद्यान विभाग उत्तराखण्ड द्वारा नींबू वर्गीय फलों के नेटवर्क परियोजना को लागू किए जाने की मांग की। उन्होंने राज्य में आलू उत्पादन की अपार सम्भावनाओं के दृष्टिगत केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखण्ड राज्य में भी क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने की भी मांग की।
इस अवसर पर सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम एवं अन्य विभागीय वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने को एमएसएमई सेक्टर में किये गये बदलाव का लाभ उठाये उद्योग जगतः गडकरी

(एनएन सर्विस)
केन्द्रीय एमएसमई मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदयुरप्पा, मेघालय के मुख्यमंत्री के. संगमा, पंजाब के शिक्षा मंत्री विजय इन्द्र सिंगला ने संयुक्तरुप से ग्लोबल एलायन्स फाॅर मास एन्टरप्रिन्योरशिप की नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट का वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से विमोचन किया।
इस अवसर पर केन्द्रीय एमएसमई मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कोविड 19 के दृष्टिगत अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए हमें एमएसमई के क्षेत्र में तेजी से कार्य करने होंगे। एमसएमई ऐसा क्षेत्र है, जिसमें रोजगार सृजन के साथ ही अर्थव्यवस्था में तेजी से प्रगति की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है कि हम किन क्षेत्रों में अपनी स्ट्रेन्थ को और मजबूत कर सकते हैं। राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार उनमें कुछ विशिष्टताएं हैं। एग्रो एमएमई, हेण्डलूम, हेन्डीक्राफ्ट के क्षेत्र में अनेक राज्यों में कार्यों की प्रबल संभावनाएं हैं।
केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में एमएसमई क्षेत्र में अनेक कार्य किये जा सकते हैं, हमें उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ ही राज्यों में औद्योगिक स्थापना के लिए प्रक्रियाओं के सरलीकरण की ओर ध्यान देने की जरूरत है। कोविड 19 के दृष्टिगत पीपीई किट, सेनिटाईजर एवं अन्य उपयोगी उत्पादों को एमएसमई के माध्यम से बढ़ावा दिया जा सकता है। लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम क्षेत्र के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए दूरस्थ क्षेत्रों तक इन गतिविधियों को बढ़ाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था विशेषकर उत्तराखण्ड जैसे राज्यों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने और आर्थिक विकास के लिए के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। कोविड-19 से पूरा विश्व प्रभावित हुआ है। व्यापार करने और काम करने के तरीकों में बदलाव आया है। लाॅकडाउन में प्रभावित उद्योगों को पुनः संचालित करने के लिए आत्मनिर्भर पैकेज में एमएसएमई सेक्टर पर विशेष ध्यान दिया गया है। एमएसएमई ही ऐसा क्षेत्र है जहां रोजगार के अवसर बड़े पैमाने पर सृजित किए जा सकते हैं और अर्थव्यवस्था में तेजी लाई जा सकती है।
आत्मनिर्भर भारत पैकेज के अंतर्गत एमएसएमई के लिए लागू इमरजेंसी क्रेडिट लाईन गारंटी स्कीम का लाभ पात्र इकाईयों को पहुंचाने के लिए राज्य सरकार एसएलबीसी, बैंकों और औद्योगिक संगठनों के साथ मिलकर कार्य कर रही है। इस योजना में उत्तराखण्ड राज्य में 34671 पात्र खातों में 1835 करोड़ रूपए की स्वीकृति और 1067 करोड़ का वितरण यिका जा चुका है। इस योजना के क्रियान्वयन में उत्तराखण्ड राज्य की परफोरमेंस सर्वश्रेष्ठ राज्यों में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए लगातार सुधार कर रहे हैं। ईज आॅफ डूईंग बिजनेस के लिए सतत क्रियाशील हैं। सिंगल विंडो सिस्टम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में उत्तराखण्ड राज्य देश में लगातार अच्छी उपलब्धि अर्जित कर रहा है। कोविड-19 की परिस्थितियों में युवाओं और बाहर से घर लौटे प्रवासियों के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की है। इस योजना में विनिर्माण और सेवा के साथ ही व्यवसाय और एलाईड एग्रो गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। जिला स्तर पर भी जिला स्वरोजगार प्रोत्साहन एवं अनुश्रवण समिति गठित की गई हैं। ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में उद्यमियों को उद्यम स्थापना के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं में सहयोग, तकनीकी ज्ञान आधारित उद्यमों की स्थापना और स्थानीय स्तर पर स्केलेबल बिजनेस माॅडल चिह्नित करने, मूल्य संवर्द्धन, पैकेजिंग और विपणन में सहयोग के लिए 2 रूरल बिजनेस इन्क्यृबेटर स्थापित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने ग्लोबल एलायन्स फाॅर मास एन्टरप्रिन्योरशिप के उत्तराखण्ड में उद्यमिता विकास के लिए ईको सिस्टम विकसित करने के लिए दिए गए प्रस्ताव पर सहमति देते हुए कहा कि राज्य में निवेश के प्रोत्साहन के लिए सुनियोजित तरीके से काम किया जा रहा है। मेडिकल डिवाईसेस पार्क, फार्मा सिटी, अरोमा पार्क आदि के लिए सिडकुल के माध्यम से काम किया जा रहा है।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार, मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रविन्द्र दत्त, आर्थिक सलाहकार आलोक भट्ट, निदेशक उद्योग सुधीर चन्द्र नौटियाल आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कोविड-19 की समीक्षा की, लोगों को दी कई राहते, आप भी जानें

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को सचिवालय में कोविड-19 एवं डेंगू के रोकथाम एवं बचाव के लिए सभी जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बैठक की। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि डेंगू से बचाव के लिए व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाय। स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाय। जिन जनपदों में पिछले वर्षों में डेंगू का फैलाव कम रहा, उन जनपदों में हम इसे पूरी तरह कैसे नियंत्रित कर सकते हैं, इसके लिए ठोस रणनीति बनायी जाय। यह सुनिश्चित किया जाय कि अस्पतालों में प्लेटलेट्स की पर्याप्त उपलब्धता हो। नगर निकायों द्वारा समय-समय पर फोगिंग की जाए। डेंगू से बचाव में रोकथाम के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार हो इसके लिए डाॅक्टर समय-समय पर मीडिया से समन्वय स्थापित करे। शहरी क्षेत्रों में डेंगू से बचाव के लिए स्वच्छता एवं जल निकासी पर विशेष ध्यान दिया जाय। प्रत्येक जनपद में सप्ताह में एक दिन व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाया जाय।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वर्षाकाल को दृष्टिगत रखते हुए पेयजल व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान दिया जाय। पर्वतीय जनपदों में वर्षाकाल में पेयजल लाईनें क्षतिग्रस्त होने से व दूषित जल से बीमारियों की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए जन प्रतिनिधियों से निरन्तर संवाद बनाये रखें। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेंगू की रोकथाम एवं जनजागरूकता के लिए किये जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के प्रभावी नियंत्रण के लिए सर्विलांस सिस्टम को और अधिक मजबूत किया जाय। जो लोग होम क्वारंटीन एवं होम आईसोलेशन है उनकी लगातार निगरानी की जाय। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाय। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि सभी जनपदों में दुकानों को शाम 8 बजे तक खोलने की अनुमति दी जाय। देहरादून में अगले सप्ताह से शनिवार और रविवार को भी मार्केट को खोलने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि लोगों को सुबह 5 बजे से माॅर्निंग वाॅक की अनुमति दी जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कोरोना पाॅजिटव की रिकवरी रेट में तेजी से सुधार हुआ है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों एवं स्वास्थ्य विभाग को सतर्कता एवं सुरक्षात्मक दृष्टि से कार्य करने को कहा। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में अब 1700 से अधिक टेस्ट प्रतिदिन हो रहे हैं। सोमवार से मुक्तेश्वर में भी कोरोना की टेस्टिंग शुरू हो जायेगी। यहां पर प्रतिदिन 100 टेस्ट होंगे।
बैठक में सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, सचिव शैलेष बगोली, सौजन्या, एस.ए. मुरूगेशन, पंकज पाण्डेय, डीजी स्वास्थ्य श्रीमती अमिता उप्रेती आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पर्यटन विभाग ने स्वरोजगार के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरु की

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद पर्यटन विभाग स्वरोजगार योजनाओं का लाभ देने के लिए कोई कमसर नही छोड़ना चाहता है। इसके लिए विभाग ने ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू कर दी है। ऑनलाइन सिस्टम से घर बैठे ही आवेदन किया जा सकता है। इससे आवेदकों को बड़ा फायदा होगा। अब उन्हें कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वहीं, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के तहत इलेक्ट्रिक बस खरीदने पर 50 प्रतिशत या 15 लाख तक सब्सिडी मिलेगी।
कोरोना महामारी के चलते प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। स्वरोजगार की योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना और पंडित दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू कर दी है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में तहत अब बेरोजगार युवा प्रदेश के अंदर विभिन्न मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसें खरीद कर रोजगार शुरू कर सकते हैं। बसों का संचालन परिवहन निगम के निर्धारित रूटों के साथ ही अंतर नगरीय क्षेत्रों में किया जाएगा। 
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में इलेक्ट्रिक बसों के अलावा अन्य वाहनों की खरीद पर पूर्व की भांति 25 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। वहीं, गैर वाहन मद में आवेदकों को पर्वतीय क्षेत्रों में 33 प्रतिशत या 15 लाख और मैदानी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत या 10 लाख तक सब्सिडी दी जा रही है। होम स्टे के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में 33 प्रतिशत  या 10 लाख और मैदानी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत या अधिकतम सात लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी।
पर्यटन विभाग के सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन करने की व्यवस्था लागू होने से योजना में पारदर्शिता आएगी और घर बैठे लोग आवेदन कर सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और योजना की रियल टाइम में मानीटरिंग हो सकेगी। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और होम स्टे योजना के लिए अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। 

यहां करें आवेदन 
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना और होम स्टे योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पर्यटन विभाग की वेबसाइट http://vcsgscheme-uk-gov-in पर किया जाएगा। स्वरोजगार शुरू करने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति घर बैठे आवेदन कर सकता है।

निर्मल ब्लॉक और वीआईपी कॉलोनी में एमडीडीए ने की कार्रवाई

(एनएन सर्विस)
मसरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने शुक्रवार को निर्मल ब्लॉक में दो बहुमंजिला भवन और वीआईपी कॉलोनी में निर्मित दो भवनों के छह फ्लेटों को सील किया है। अवैध निर्माणों के खिलाफ हुई एमडीडीए की कार्रवाई से बिल्डरों में भगदड़ मची रही।
शुक्रवार को एमडीडीए के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर श्याममोहन शर्मा के नेतृत्व में टीम निर्मल ब्लॉक पहुंची। यहां पर दो अवैध निर्माणाधीन भवनों की सीलिंग के आदेश पूर्व में ही जारी हुए थे। इस पर अमल करते हुए एमडीडीए टीम ने निर्मल ब्लॉक बी प्लॉट गली नंबर एक में नीरज अग्रवाल का पांच मंजिला भवन, त्रिलोकीनाथ यादव का आमबाग ब्लॉक प्लॉट नंबर एक गली नंबर दो पशुलोक में पांच मंजिला भवन को सील किया। इसके बाद टीम वीआईपी कॉलोनी पहुंची। यहां टीम ने किरण सुनेजा पत्नी दीपक सुनेजा का श्री रेजीडेंसी में अवैध रूप से निर्मित तीन फ्लैट्स को सील किया, जबकि शेष छह फ्लैट्स में रिहाइश होने के कारण सील नहीं किये। टीम ने यहां अन्य व्यक्ति संजय कुमार अग्रवाल 29 फ्लैट और एक स्टोर के तीन फ्लैट्स को सील किया है, जबकि शेष 26 फ्लैट्स जो कि वन रूम सेट हैं सील नहीं किए। टीम ने बताया कि रिहायश होने के चलते नोटिस देकर इन्हें खाली करवाया जायेगा फिर सील की कार्रवाई पूरी की जायेगी।
प्राधिकरण की टीम में अधिशासी अभियंता श्याम मोहन शर्मा, सहायक अभियंता मनोज जोशी, अवर अभियंता प्रेमपाल सिंह व पुलिसकर्मी मौजूद रहे।

स्टाॅक में लाखों रुपये की हेराफेरी, एक्सपायरी माल देख भड़की मंत्री

(एनएन सर्विस)
टिहरी जिले में स्थित मुनिकीरेती स्थित पशुपालन विभाग के केंद्रीय औषधि भंडारण गृह में उस समय हड़कंप मच गया, जब राज्य मंत्री रेखा आर्य ने औचक निरीक्षण कर छापेमारी की। छापेमारी के बाद रेखा आर्य ने बताया कि गोदाम में लाखों रुपए की ऐसी दवाइयां रखी गई है जो कि एक्सपायर हो चुकी है। वहीं, कुछ लाखों रुपए के बिल ऐसे भी पाए गए हैं, जो कि आर्डर के बाद दवाइयां आई ही नहीं। जबकि इनका भुगतान फर्म को कर दिया गया है।
राज्यमंत्री ने बताया कि स्टॉक रजिस्टर में 2019 के दौरान दिए गए, आर्डर को 2020 में दर्ज किया गया है। और 2020 के आर्डर 2019 में दर्ज किया गया है। जिसे देखने से पता चला कि इस मामले में भी बड़े स्तर पर घोटाला किया गया है। यह घोटाला विभागीय उच्च अधिकारियों के इशारे पर किया जाना बताया गया है। जिसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद घोटाले में संलिप्त सभी बड़े से बड़े अधिकारी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
राज्य मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि यह बड़े स्तर पर की गई वित्तीय अनियमितता है। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि दवाई खरीदने मे अधिकारियों ने अपनी कमाई ही देखी है। सरकार का फायदा नहीं देखा है। उनका कहना था की यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण लापरवाही है जिसकी गंभीरतापूर्वक जांच की जाएगी। उनका कहना था कि छापेमारी पशुपालकों की शिकायत पर की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी पशुपालक का दवाई खरीदने मे उत्पीड़न नहीं होने देगी। जिसे उनके विभाग द्वारा गंभीरता पूर्वक लिया गया है। छापेमारी के दौरान निजी सचिव लाल सिंह नागरकोटी सहित अन्य अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे ।

मंत्री ने दिए एफआइआर के आदेश दिए
राज्य मंत्री रेखा आर्य ने भ्रष्टाचार में लिप्त सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम को एफआइआर के आदेश दिए। उन्होंने बताया कि दवा भंडारगृह में निरीक्षण करने के दौरान कई तरह की अनियमितताएं पाई गई हैं। साफ पता लगता है कि दवाओं को लेकर बड़ा घोटाला हुआ है। मामले में उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। फिलहाल रजिस्टर और भंडारगृह को सील किया गया है।