स्वामी नित्यानंद की तरह मेरी सरकार भी राजनीति में शुचिता बनाने को कर रही कामः सीएम

राजनीति के क्षेत्र में शुचिता के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को गुरूवार को नित्यानन्द स्वामी जनसेवा समिति ने प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री स्व. नित्यानन्द स्वामी के 90वीं जयन्ती के अवसर पर राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में ‘‘स्वच्छ राजनीतिज्ञ सम्मान’’ से सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि यदि हम वास्तव में स्वच्छता चाहते है व भ्रष्टाचार के विरूद्ध लड़ना चाहते है तो यह धर्मयुद्ध की तरह है। यदि धर्मयुद्ध की तरह लड़ सके तो जीत मिल सकती है। सरकार को भ्रष्टाचार के विरूद्ध धर्मयुद्ध में सबका सहयोग चाहिए। राजनीति और स्वच्छता दोनांे में काफी दुश्मनी मानी जाती है। क्योंकि यहां मोह व लोभ होता है तथा लालच व दबाव देने वाले भी होते है। सरकार में जिम्मेदार लोग भी जनता के बीच से आते है। राजनीति से साफ निकल जाना जैसे काजल की कोठरी में से साफ निकल जाना माना जाता है। प्रबुद्ध लोग भी ऐसा मानते है कि यह वास्तव में काफी कठिन काम है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्व. नित्यानन्द स्वामी ने राजनीति में शुचिता कायम रखने की भरपूर कोशिश की। हमारी पूरी कोशिश रहती है कि राजनीति में शुचिता बनी रहे तथा राजनीति में शुचिता तभी बनी रह सकती है जब पारदर्शिता हो। अधिकाधिक पारदर्शिता से हम अधिक से अधिक शुचिता ला सकते है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने गत बीस महीनों को पारदर्शिता लाने की भरसक कोशिश की। हमने टेन्डर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया। बायोमेट्रिक हाजिरी की शुरूआत की। जो लोग अच्छा काम करते है उनके लिए इस वर्ष स्व. अटल की जयन्ती पर मुख्यमंत्री सुशासन और स्वच्छता पुरस्कार की शुरूआत की है।

राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि स्वामी नित्यानंद सरल, निश्छल, व्यवहार कुशल, व्यक्तित्व के धनी, बहुप्रतिभावान व मधुरभाषी व्यक्ति थे। उन्होंने उत्तराखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। उनके कन्धों पर नये राज्य को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी थी। उनके कार्यकाल में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता आन्दोलन में भी स्वामी नित्यानंद सरस्वती ने अमूल्य योगदान दिया था। उन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन में भी भाग लिया और इसके लिए जेल भी गए। उन्होंने कहा कि स्वामी जी का उद्देश्य केवल न्याय और जनहित रहा। उनके जन्मदिन के अवसर पर निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए यह सराहनीय कदम है।

सरकारी टेंडर दिलाने के नाम पर की दो लाख की ठगी, पुलिस ने धर दबोचा

देहरादून के एक व्यक्ति को सरकारी टेंडर के जरिए ठेका दिलाने की बात कहने वाले फर्जी पीसीएस अधिकारी को दून पुलिस ने धर दबोचा है। फर्जी अधिकारी के पास कई सरकारी विभागों की मोहरे भी मिली है। पुलिस ने जानकारी के अनुसार पकड़ा गया युवक पीसीएस के इंटरव्यू में फेल हो जाने के बाद से फर्जी पीसीएस अधिकारी बनकर घूम रहा था।

एसपी सिटी पीके राय ने बताया कि मंगलवार को दून में प्रापर्टी डीलिंग और रेस्टोरेंट चलाने वाले ओमवीर सिंह ढाका निवासी ग्राम भवानीपुर, पोस्ट चंदोक, बिजनौर ने बताया कि कुछ दिन पहले उनसे एक शख्स मिला। उसने अपना नाम सुधांशु पांडेय बताया और कहा कि वह सचिवालय में पीसीएस अधिकारी है और इन दिनों श्रम विभाग में कार्यरत है। कहा कि वह उसे श्रम विभाग में ठेकेदारी का लाइसेंस दिला देगा। इसके लिए उसने रुपये की मांग की।

ओमवीर ने बताया कि यह बात जब उसने अपने दोस्तों को बताई तो वह भी लाइसेंस लेने के लिए तैयार हो गए और सुधांशु को लगभग सवा दो लाख रुपये दे दिए। इसके बाद उसने सरकारी मोहर लगे कुछ दस्तावेज उन्हें दिखाए, लेकिन जब उसकी पड़ताल की गई तो वह फर्जी पाए गए।

एसपी सिटी ने बताया कि दस्तावेजों में सरकारी भाषा की नकल गई थी, लेकिन कई ऐसी बातें सामने आई, जिससे सुधांशु के फर्जी अधिकारी होने का शक पुख्ता हो गया। बुधवार को उसे आइटी पार्क के पास बुलाया गया, जहां उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सुधांशु के पास से कई सरकारी मोहरें और फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। उसके खिलाफ राजपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।

अंग्रेजी बोलने में है अव्वल
सुधांशु पांडेय (32) पुत्र मुन्नू प्रसाद निवासी 126 किदवईनगर, थाना महराजगंज, कानपुर नगर दून में ग्राम चालंग थाना राजपुर में पिछले कई साल से रह रहा है। एसओ राजपुर अरविंद सिंह ने बताया कि सुधांशु फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है। यही वजह थी कि जिससे भी वह बात करता, वह उसके झांसे में आ जाता। सुधांशु ने छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर से एमएससी की परीक्षा 87 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की है। उसने 2006 में एसएससी मेन की परीक्षा पास की थी, लेकिन साक्षात्कार में फेल हो गया। वर्ष 2014 में उसने पीसीएस मेन क्वालीफाई किया, लेकिन यहां भी साक्षात्कार में उसकी किस्मत ने साथ नहीं दिया।

समाचार प्लस के मालिक उमेश जे कुमार को पुलिस ने किया गिरफ्तार, राज्य में स्टिंग को लेकर थी ये मंशा

उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल लाने के उद्देश्य से एक पत्रकार पर स्टिंग ऑपरेशन करने का दबाव बनाने वाले एक निजी चैनल के मालिक उमेश जे कुमार को उत्तखंड और उत्तर प्रदेश पुलिस ने गाजियाबाद स्थित घर से दबोच लिया। यहां से पुलिस ने 39 लाख रुपये नगदी के साथ ही विदेशी मुद्रा और स्टिंग के उपकरण भी बरामद किए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून निवेदिता कुकरेती ने बताया कि इस सिलसिले में उत्तराखंड आयुर्वेदिक विवि के निलंबित कुल सचिव मृत्युंजय मिश्र और चैनल के तीन कर्मचारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज है।

शिकायतकर्ता आयुष गौड़ के मुताबिक आरोपितों ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव और कुछ अन्य नेताओं को भी फंसाने का षडयंत्र रचा था। गिरफ्तार आरोपित ने वर्ष 2016 में उत्तराखंड में तत्कालीन सीएम हरीश रावत का स्ंिटग कर राजनीतिक हलचल मचा दी थी। गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने की पुलिस और उत्तराखंड पुलिस ने एटीएस एडवांटेज सोसायटी के टावर नंबर 19 के टॉप फ्लोर पर स्थित आरोपित उमेश के फ्लैट पर छापा मारा। टीम की वहां तैनात सीआरपीएफ जवानों से नोकझोंक भी हुई। घर की तलाशी के बाद पुलिस टीम ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। अभी आरोपित से इंदिरापुरम थाने में पूछताछ की जा रही है।

ये सामान मिला फ्लैट से
39,73000 रुपये नगद, 116,279 अमेरिकी डालर, 11,030 थाई मुद्रा, कई मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, आईपैड, लैपटॉप, कैमरा व डीवीडी।
उक्त प्रकरण के सामने आने पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि यह सब जांच का विषय है और जांच के बाद देखा जाएगा कि और क्या हो सकता है। किसी भी रूप में लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास किसी भी स्तर पर नहीं होना चाहिए। लोकतंत्र के सभी अंगों को समाज की बेहतरी के लिए कार्य करना चाहिए। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर, उत्तराखंड अशोक कुमार ने कहा कि निजी चौनल के मालिक समेत साजिश में शामिल सभी आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। मुख्य आरोपी उमेश जे कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य की तलाश की जा रही है।

पूरी तैयारी के साथ गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस
मुख्य आरोपी उमेश जे कुमार की गिरफ्तारी के लिए उत्तराखंड पुलिस पूरी तैयारी के साथ रविवार सुबह गाजियाबाद पहुंची। हाईप्रोफाइल मामला होने के चलते वह अपने साथ कोर्ट से सर्च और गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट लेकर गई थी।

ऐसे आया मामला सामने
समाचार प्लस चैनल के मुलाजिम आयुष गौड़ ने बीती 10 अगस्त को देहरादून में राजपुर थाने में चैनल के सीईओ के साथ ही उत्तराखंड आयुर्वेदिक विवि के पूर्व कुल सचिव मृत्युंजय मिश्र, प्रवीण साहनी, सौरभ साहनी और राहुल भाटिया के खिलाफ तहरीर दी थी। आयुष का आरोप था कि उस पर वरिष्ठ नौकरशाहों और नेताओं का स्टिंग करने का दबाव बनाया जा रहा है, जान से मारने की धमकी जा रही है। करीब ढाई महीने की जांच के बाद पुलिस ने रविवार को इसमें बड़ी कार्रवाई की।

वहीं शासन ने विवादित अधिकारी डॉ. मृत्युंजय कुमार मिश्र को उनका नाम मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश समेत अन्य अधिकारियों के स्टिंग के प्रयास को लेकर दर्ज एफआइआर में आने के बाद निलंबित कर दिया है। हालांकि, शासन ने अधिकारिक तौर पर निलंबन का आधार उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में बतौर कुलसचिव उनके विरुद्व सतर्कता विभाग में चल रही खुली जांच व अन्य जांच को बनाया है। सचिव आयुष शैलेश बगौली द्वार जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलपति ने यह अंदेशा जताया है कि मृत्युंजय मिश्र के आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलसचिव पद पर बने रहने से जांच प्रभावित हो सकती है। इस कारण उन्हें तत्काल प्रभावित से निलंबित किया गया है।

वेबसाइट्स पर पोर्न वीडियो दिखाई गयी तो होगी आईटी एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही

केंद्र सरकार पोर्न वेबसाइट्स पर लगातार नजर रख रही है। यदि पोर्न वेबसाइट्स द्वारा वीडियों दिखायी जाएंगी तो आईटी एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही हो पाएगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के अधीन (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन) नाम से साइबर क्राइम पोर्टल लांच किया है। जिसमें साइबर क्राइम की शिकायत या सूचना दर्ज की जा सकती है। गुरूवार को उच्च न्यायालय नैनीताल में दूरसंचार विभाग की ओर से इस मामले में हलफनामा भी पेश किया गया। विभाग की ओर से 827 पोर्न वेबसाइट्स को बंद करने के आदेश दिए गये है।

हाईकोर्ट नैनीताल के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ के समक्ष केंद्रीय दूरसंचार विभाग की ओर से हलफनामा प्रस्तुत किया गया। जिसमें हाई कोर्ट की ओर से पारित आदेश के क्रियान्वयन को लेकर जानकारी दी गई। हलफनामे में बताया गया है कि अश्लीलता परोस रही इन वेबसाइट्स पर लगातार नजर रखने के विभाग को निर्देश दिए गए हैं। शपथ पत्र में यह भी बताया गया है कि 30 अन्य वेबसाइट्स की जांच में अश्लीलता फैलाने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा कुछ विदेशी वेबसाइट भी हैं, जिन पर इंटरपोल व ब्रिटेन इंटरनेट वॉच फाउंडेशन नजर रखता है, जो भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआइ से सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।

कठोरता से अश्लीलता पर रोक लगाएगी सरकार
केंद्र सरकार के हलफनामे के आधार पर खंडपीठ ने उम्मीद जताई कि सरकार अश्लीलता पर कठोरता से रोक लगाएगी, ताकि बच्चों को यौन अपराध से बचाया जा सके। कोर्ट ने साइबर क्राइम पोर्टल का 24 घंटे में प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया में प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। ज्ञातव्य है कि पिछले माह दून में अश्लील वीडियो देखकर चार नाबालिग बच्चों ने एक नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस घटना के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य व केंद्र सरकार को अश्लीलता रोकने के दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस मामले में अगली सुनवाई अब 26 नवंबर को होगी।

900 छात्रों ने छोड़ा संस्थान, राष्ट्रपति सहित मुख्य न्यायधीश को किया सूचित

एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) में स्थायी कैंपस पुख्ता इंतजाम न होने के कारण यहां के करीब 900 छात्र-छात्राओं ने संस्थान छोड़कर अपने घरों का रूख किया। छात्रों ने कहा कि स्थायी कैंपस और पुख्ता सुरक्षा इंतजाम होने पर ही वह संस्थान में वापस लौटेंगे। छात्रों ने मेल, फैक्स आदि के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और मानव संसाधन मंत्री के साथ ही उत्तराखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को अपने निर्णय की सूचना दी है।

स्थायी परिसर का निर्माण जल्द शुरू कराने और तब तक अस्थायी परिसर अन्यत्र शिफ्ट करने की मांग को लेकर संस्थान में पढ़ रहे विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्रएं 19 दिनों से कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे थे। मंगलवार सुबह ये सभी हास्टल में अपने कमरों पर ताले डालकर घर चले गए।

छात्र-छात्रओं ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि सामूहिक चर्चा के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया है। अब वे संस्थान में तभी लौटेंगे, जब उनकी मांगों पर कार्रवाई शुरू हो जाएगी। इधर, एनआइटी के कुलसचिव कर्नल सुखपाल सिंह का कहना है कि निदेशक डॉ. श्याम लाल सोनी ने घटनाक्रम से मानव संसाधन मंत्रलय के उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

एनआईटी की कक्षाएं दो परिसरों में संचालित हो रही है। प्रयोगशाला और प्रशासनिक भवन पुराने आईटीआई की जमीन पर बनाए गए हैं, जबकि कक्षाएं यहां से दो सौ मीटर दूरी पर पालीटेक्निक भवन में संचालित की जा रही हैं। हॉस्टल के लिए संस्थान ने यहां से कुछ दूरी पर होटल किराये पर ले रखे हैं। छात्र-छात्रएं इस व्यवस्था से खफा हैं। उनका कहना है कि ये सब एक ही कैंपस में होना चाहिए। मौजूदा व्यवस्था में सुरक्षा को लेकर भी बच्चे सशंकित रहते हैं, इसी महीने की शुरुआत में एक से दूसरे कैंपस में जाते वक्त दो छात्रएं वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इनमें एक का अभी उपचार चल रहा है।

प्रबंध समिति की स्कूल ड्रेस वितरण में भूमिका होगी समाप्त

अब विद्यालय प्रबंध समितियों का स्कूल ड्रेस वितरण में भूमिका समाप्त हो जाएगी। इसका कारण है कि राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को निशुल्क दी जाने वाली स्कूल ड्रेस के स्थान पर धनराशि मिलेगी और यह धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में की जायेगी।

राज्य में सरकारी व सहायताप्राप्त प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत समस्त छात्रओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को मुफ्त स्कूल ड्रेस मुहैया कराई जाती है। इस योजना से राज्य के करीब ढाई लाख छात्र-छात्रएं लाभान्वित होते हैं।

अब सरकार ने मुफ्त किताबों की तर्ज पर स्कूल ड्रेस का पैसा भी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना के तहत छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में देने का निर्णय लिया है। कक्षा एक से आठवीं तक समस्त छात्र-छात्रओं को दी जाने वाली निशुल्क पाठ्यपुस्तकों के स्थान पर पुस्तकों की मूल्य राशि डीबीटी के तहत उपलब्ध कराई जा रही है। अब इस योजना को स्कूल ड्रेस के लिए भी लागू किया जा रहा है। इस योजना में प्रति लाभार्थी छात्र-छात्र को दो स्कूल ड्रेस के लिए 600 रुपये दिए जाएंगे। इस मद में तकरीबन 14 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

इस संबंध में फैसला लेने में देरी के चलते स्कूल ड्रेस के लिए दी जाने वाली धनराशि निदेशालय स्तर से जिलों को भेजी जा चुकी है। केंद्र सरकार डीबीटी योजना को प्रोत्साहित कर रही है। इसमें धनराशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में मुहैया कराई जा रही है। केंद्र के रुख को भांपकर राज्य सरकार भी डीबीटी योजना को प्रोत्साहित कर रही है। इस कड़ी में अब स्कूल ड्रेस के लिए भी इसे लागू किया जा रहा है। हालांकि इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए सर्व शिक्षा अभियान कार्यकारिणी परिषद में भी डीबीटी के प्रस्ताव पर मुहर लगानी होगी। लिहाजा शासन स्तर पर कार्यकारिणी परिषद की बैठक 30 अक्टूबर को बुलाई गई है।

बांदीकुई के एक साल बाद चलने से यात्रियों में उत्साह

लंबी दूरी की रेल सेवा ऋषिकेश-बांदीकुई पैंसेंजर एक वर्ष तक बंद रहीं। शनिवार से यह रेल सेवा एक बार पुनः चलने लगी। रेल सेवा के चलने पर शनिवार को स्टेशन पर यात्रियों की अच्छी खासी संख्या उमड़ी। इस रूट पर चलने वाले यात्रियों, व्यापारियों व स्थानीय लोगों ने रेल सेवा के पुनः संचालित होने पर हर्ष व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि मुरादाबाद रेलवे ट्रेक पर काम होने के चलते करीब एक वर्ष पूर्व ऋषिकेश-बांदीकुई रेल सेवा को रद कर दिया गया था। बांदीकुई के रद होने से इस रूट पर सफर करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। आखिर एक वर्ष के इंतजार के बाद एक बार फिर से बांदीकुई ऋषिकेश से अपने नियत समय 11 बजकर 50 मिनट पर रवाना हुई। इससे पूर्व शनिवार को यह गाड़ी हरिद्वार से पैसेंजर बनकर 10 बजकर 20 मिनट पर ऋषिकेश पहुंची। इसके बाद यह सेवा पूर्व की भांति अपने नियत समय दोपहर 2रू45 बजे ऋषिकेश पहुंची। जबकि यह गाड़ी 6-एचआर बनकर रात 10 बजकर 20 बजे हरिद्वार पैसेंजर के रूप में संचालित हुई।

बताते चलें कि रेलवे ने हाल में ही दून-नैनी रेल सेवा शुरू होने के बाद ऋषिकेश-हरिद्वार के बीच संचालित होने वाली पैसेंजर को हमेशा के लिए रद कर दिया था। जिसके बाद सुबह साढ़े सात बजे के बाद रात्रि साढ़े दस बजे तक ऋषिकेश-हरिद्वार के बीच कोई भी पैसेंजर सेवा नहीं रह गई थी।

मगर, अब लोगों को दोपहर में ऋषिकेश-हरिद्वार के बीच बांदीकुई एक विकल्प के तौर पर जरूर मददगार बनेगी। समाजसेवी लोकेश झा ने बताया कि करीब एक वर्ष से बंद बांदीकुई का संचालन होना खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि इस सेवा से लंबी दूरी के यात्रियों के अलावा ऋषिकेश-हरिद्वार के बीच के यात्रियों को भी पैसेंजर सेवा के रूप में मदद मिलेगी। स्टेशन मास्टर मनोज कुमार ने बताया कि बांदीकुई के आने व जाने का समय पूर्ववत ही रहेगा।

सीएम बोले, राज्य में महिलायें स्वावलंबी बन रही

सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि केदारनाथ में 19 लाख का प्रसाद वितरित किया गया। यह आंकड़ा भविष्य में डेढ़ करोड़ रूपये तक पहुंचने की उम्मीद है। सीएम ने बताया कि यह सभी प्रसाद केदारनाथ क्षेत्र की ही महिलाओं ने बनाया था। इससे जहां महिलाओं को रोजगार मिला। वहीं पलायन पर भी रोक लगी। उन्होंने बताया कि प्रसाद के बदले मिला रूपया सीधे महिलाओं को मिला।

सीएम ने चौलाई, मंडवा आदि पारंपरिक उत्पादों को लेकर कहा कि ग्रोथ सेंटर भविष्य में रोजगार का एक बड़ा बनेंगे। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि 22 जुलाई को रिस्पना से ऋषिपर्णा अभियान के अंतर्गत लंढौर मसूरी से लेकर मोथरोवाला तक पेड़ लगाएं। बैठक में सीएम ने डोईवाला में सीपेट की स्थापना का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि इससे पहले साल 1500 बच्चे निकलेंगे, जिन्हें कम से कम 30000 रुपये महीने का रोजगार मिलेगा। क्योंकि सीपेट की डिमांड बच्चों की तुलना में 300 फीसद अधिक है और सीपेट में 85 फीसद बच्चे उत्तराखंड से ही लिए जाएंगे। सीएम ने निफ्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इसके लिए 200 करोड़ स्वीकृत हुआ है पर इसमें सीपेट के मुकाबले रोजगार सृजन की इतनी गारंटी नहीं है।

इजरायल से सीखना होगा बर्षा जल का इस्तेमाल

वहीं, सीएम ने बताया कि झाझरा में बनने वाली साइंस सिटी के लिए जमीन उपलब्ध कराने पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने पिरुल के लिए भी वित्त उपलब्ध कराने की बात कही। इसके साथ ही सूखते हुए नदी-नाले और स्त्रोत को लेकर उन्होंने कहा कि एक रिपोर्ट में बताया गया है कि गंगा में आज 45 प्रतिशत जल कम हो गया है। हमें इजराइल से सीखना होगा कि वो किस तरह से बारिश के पानी का 95 प्रतिशत तक दोबारा इस्तेमाल कर लेता है।

देहरादून में बन रहे सौंग बांध को लेकर सीएम ने कहा, हमारी योजना है कि करीब एक साल में बांध को तैयार कर लिया जाए। उन्होंने बताया कि समय सीमा में कार्य करने के कारण इसकी लागत 1200 सौ करोड़ से घटकर 750 करोड़ हो गई है। वहीं, मलढूंग बांध और सौंग बांध से देहरादून की पेयजल की समस्या भी हल होगी और विद्युत उत्पादन के साथ लैंड रिचार्ज भी होगा।

आईडीपीएल वापस पाना एक बड़ी उपलब्धि

कार्यसमिति की बैठक में सीएम ने कहा कि ऋषिकेश आईडीपीएल वापस पाना एक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस पूरी 936 एकड़ जमीन का मूल्य करीब दो हजार करोड़ रुपये है। जिसमें से 200 एकड़ एम्स को, कुछ भूमि आईडीपीएल को और शेष लगभग 700 एकड़ भूमि पर कन्वेंशन सेंटर बनाया जाएगा, जो पूरे भारत में एक अनूठी मिसाल होगा।

सीएम ने मलिन बस्तियों के मुद्दे पर कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2021 तक एक लाख चालीस हजार घर बनाने का लक्ष्य है। इसे समय से पूरा करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। प्रभारी मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि जनता ने हमें जनादेश दिया है और इस कारण तोड़फोड़ से जनता को होने वाली परेशानी को हमें ही समझना होगा। उन्होंने एक दिन पहले बुलाई बैठक का हवाला देते हुए कहा कि हमने इस संबंध में वीसी एमडीडीए और जिलाधिकारी को आदेश दे दिए हैं। वहीं, कार्यसमिति के समापन पर बस दुर्घटनाओं और आपदाओं में मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन रखा गया ।

मनोरंजन से भरपूर रेडियो चैनल उत्तराखंड में हुआ लांच

रेड एफएम 93.5 रेडियो चैनल का शुभारंभ मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किया। यह रेडियो चैनल राज्य का पहला रेडियो चैनल है। यह रेडियो चैनल राज्य में 24 घंटे लोगों को मनोरंजन प्रदान करेगा। साथ ही कई सामाजिक मुद्दों पर भी प्रकाश डालेगा।

देहरादून के कौलागढ़ रोड स्थित साउथ एशिया एफएम लिमिटेड के कार्यालय से रेड एफएम 93.5 रेडियो चैनल का बुधवार को शुभारंभ हो गया। मुख्यमंत्री ने राज्य के पहले इस निजी रेडियो चैनल का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने रेडियो चैनल की टीम को बधाई व शुभकामना देते हुए कहा कि रेड एफएम 93.5 का उत्तराखण्ड व देहरादून में पहला रेडियो स्टेशन है।

उन्होंने उम्मीद जतायी कि रेड एफएम 93.5 मनोरंजन के साथ-साथ, विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सामाजिक चेतना लाने में अहम भूमिका निभायेगा। साथ ही राज्य में जनकल्याणकारी योजनाओं व नीतियों को लोगों तक पहुंचाने में कारगार सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय स्तर पर एफएम रेडियो चैनल से उत्तराखण्ड की रमणीय, सौन्दर्य, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक विशेषताएं और अधिक उजागर होंगी। रेडियो चैनल की शुरूआत से राज्य के ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं, जो रोचक तरीके से रेडियो पर प्रस्तुतिकरण दे सकते हैं, के लिए नये अवसर मिलेंगे।

विदित हो कि इस रेडियो स्टेशनक की फ्रीक्वेंसी 48 किलोमीटर तक की रहेगी। शुरूआती दौर में देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, मंसूरी और विकासनगर के अलावा कई अन्य शहरों को इसका लाभ मिलेगा। यह रेडियों चैनल पांच आरजे की टीम वाला है। जिसे लीड आरजे काव्य करेंगे।

पूर्व सैनिक पिता ने दी शहीद बेटे विकास गुरूंग को मुखाग्नि

जब तक सूरज चांद रहेगा। विकास गुरूंग तेरा नाम रहेगा…., पाकिस्तान मुर्दाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारों के बीच शहीद विकास गुरूंग की अंतिम यात्रा तीर्थनगरी के विभिन्न मार्गों से होती हुयी मुनिकीरेती के पूर्णानंद घाट पहुंची। जहां उनका सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार लामा रिति रिवाज से किया गया। शहीद विकास गुरूंग के पिता रमेश गुरूंग ने अपने बेटे को मुखाग्नि दी।

शनिवार को जम्मू-कश्मीर में नौशेरा के लाम सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ से हुई गोलाबारी में 21 गोरखा रायफल में तैनात गुमानीवाला निवासी रायफलमैन विकास शहीद हो गए थे। 21 वर्षीय शहीद का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक आवास पहुुंचा था, तभी से वहां श्रद्धांजलि देने वालों को तांता लगा हुआ था। सोमवार सुबह सेना के जवानों ने शहीद के पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

शहीद विकास गुरूंग को पूर्णानदं घाट पर 24 फील्ड रेजीमेंट के जवानों ने हवा में 32 राउंड फायर कर सशस्त्र सलामी दी। गंगा घाट पर शहीद जवान का लामा रीति से अंतिम संस्कार किया गया। पिता रमेश गुरुंग ने बेटे को मुखाग्नि दी। घाट पर विधानसभा अध्यक्ष, सेना के अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों ने शहीद को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इसे पहले सुबह करीब नौ बजे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शहीद के घर पहुंच कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास गुरुंग की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। ऐसे वीरों के कारण ही हमारा देश सुरक्षित है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने शहीद विकास की स्मृति में द्वार बनाने, उनकी एक आदमकद मूर्ति स्थापित करने और गुलरानी फार्म का नाम शहीद के नाम पर करने की घोषणा की।

शहीद विकास गुरूंग की अंतिम या़त्रा में राजनैतिक संगठनों ने भी शिरकत की। मगर, राजनीति के लिये नहीं बल्कि देशभक्ति की भावना उन्हें एक साथ ले आयी। शहीद की विदाई यात्रा में हर पचास कदम की दूरी पर व्यापारी ने अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद कर शहीद को श्रद्धांजलिद अर्पित की। शहीद विकास के सम्मान में देश भक्ति के गीत चल रहे थे। यह देश भक्ति ही थी जो लोगों को भीषण गर्मी में घर से बाहर सड़क तक ले आयी।

सभी वर्ग के लोगों ने दी नम आंखों से विदाई

शहीद की अंतिम यात्रा में क्या बच्चे, क्या बुढ़े और क्या जवान इन सभी के साथ सैकड़ों की संख्या में महिलायें भी चल रही थी। शहीद के घर से लेकर पूर्णानंद घाट तक सभी ने भारत माता की जय जैसे नारे के साथ शहीद जवान को अपनी-अपनी श्रद्धांजलि दी।