900 छात्रों ने छोड़ा संस्थान, राष्ट्रपति सहित मुख्य न्यायधीश को किया सूचित

एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) में स्थायी कैंपस पुख्ता इंतजाम न होने के कारण यहां के करीब 900 छात्र-छात्राओं ने संस्थान छोड़कर अपने घरों का रूख किया। छात्रों ने कहा कि स्थायी कैंपस और पुख्ता सुरक्षा इंतजाम होने पर ही वह संस्थान में वापस लौटेंगे। छात्रों ने मेल, फैक्स आदि के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और मानव संसाधन मंत्री के साथ ही उत्तराखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को अपने निर्णय की सूचना दी है।

स्थायी परिसर का निर्माण जल्द शुरू कराने और तब तक अस्थायी परिसर अन्यत्र शिफ्ट करने की मांग को लेकर संस्थान में पढ़ रहे विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्रएं 19 दिनों से कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे थे। मंगलवार सुबह ये सभी हास्टल में अपने कमरों पर ताले डालकर घर चले गए।

छात्र-छात्रओं ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि सामूहिक चर्चा के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया है। अब वे संस्थान में तभी लौटेंगे, जब उनकी मांगों पर कार्रवाई शुरू हो जाएगी। इधर, एनआइटी के कुलसचिव कर्नल सुखपाल सिंह का कहना है कि निदेशक डॉ. श्याम लाल सोनी ने घटनाक्रम से मानव संसाधन मंत्रलय के उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

एनआईटी की कक्षाएं दो परिसरों में संचालित हो रही है। प्रयोगशाला और प्रशासनिक भवन पुराने आईटीआई की जमीन पर बनाए गए हैं, जबकि कक्षाएं यहां से दो सौ मीटर दूरी पर पालीटेक्निक भवन में संचालित की जा रही हैं। हॉस्टल के लिए संस्थान ने यहां से कुछ दूरी पर होटल किराये पर ले रखे हैं। छात्र-छात्रएं इस व्यवस्था से खफा हैं। उनका कहना है कि ये सब एक ही कैंपस में होना चाहिए। मौजूदा व्यवस्था में सुरक्षा को लेकर भी बच्चे सशंकित रहते हैं, इसी महीने की शुरुआत में एक से दूसरे कैंपस में जाते वक्त दो छात्रएं वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इनमें एक का अभी उपचार चल रहा है।

प्रबंध समिति की स्कूल ड्रेस वितरण में भूमिका होगी समाप्त

अब विद्यालय प्रबंध समितियों का स्कूल ड्रेस वितरण में भूमिका समाप्त हो जाएगी। इसका कारण है कि राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को निशुल्क दी जाने वाली स्कूल ड्रेस के स्थान पर धनराशि मिलेगी और यह धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में की जायेगी।

राज्य में सरकारी व सहायताप्राप्त प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत समस्त छात्रओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को मुफ्त स्कूल ड्रेस मुहैया कराई जाती है। इस योजना से राज्य के करीब ढाई लाख छात्र-छात्रएं लाभान्वित होते हैं।

अब सरकार ने मुफ्त किताबों की तर्ज पर स्कूल ड्रेस का पैसा भी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना के तहत छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में देने का निर्णय लिया है। कक्षा एक से आठवीं तक समस्त छात्र-छात्रओं को दी जाने वाली निशुल्क पाठ्यपुस्तकों के स्थान पर पुस्तकों की मूल्य राशि डीबीटी के तहत उपलब्ध कराई जा रही है। अब इस योजना को स्कूल ड्रेस के लिए भी लागू किया जा रहा है। इस योजना में प्रति लाभार्थी छात्र-छात्र को दो स्कूल ड्रेस के लिए 600 रुपये दिए जाएंगे। इस मद में तकरीबन 14 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

इस संबंध में फैसला लेने में देरी के चलते स्कूल ड्रेस के लिए दी जाने वाली धनराशि निदेशालय स्तर से जिलों को भेजी जा चुकी है। केंद्र सरकार डीबीटी योजना को प्रोत्साहित कर रही है। इसमें धनराशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में मुहैया कराई जा रही है। केंद्र के रुख को भांपकर राज्य सरकार भी डीबीटी योजना को प्रोत्साहित कर रही है। इस कड़ी में अब स्कूल ड्रेस के लिए भी इसे लागू किया जा रहा है। हालांकि इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए सर्व शिक्षा अभियान कार्यकारिणी परिषद में भी डीबीटी के प्रस्ताव पर मुहर लगानी होगी। लिहाजा शासन स्तर पर कार्यकारिणी परिषद की बैठक 30 अक्टूबर को बुलाई गई है।

बांदीकुई के एक साल बाद चलने से यात्रियों में उत्साह

लंबी दूरी की रेल सेवा ऋषिकेश-बांदीकुई पैंसेंजर एक वर्ष तक बंद रहीं। शनिवार से यह रेल सेवा एक बार पुनः चलने लगी। रेल सेवा के चलने पर शनिवार को स्टेशन पर यात्रियों की अच्छी खासी संख्या उमड़ी। इस रूट पर चलने वाले यात्रियों, व्यापारियों व स्थानीय लोगों ने रेल सेवा के पुनः संचालित होने पर हर्ष व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि मुरादाबाद रेलवे ट्रेक पर काम होने के चलते करीब एक वर्ष पूर्व ऋषिकेश-बांदीकुई रेल सेवा को रद कर दिया गया था। बांदीकुई के रद होने से इस रूट पर सफर करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। आखिर एक वर्ष के इंतजार के बाद एक बार फिर से बांदीकुई ऋषिकेश से अपने नियत समय 11 बजकर 50 मिनट पर रवाना हुई। इससे पूर्व शनिवार को यह गाड़ी हरिद्वार से पैसेंजर बनकर 10 बजकर 20 मिनट पर ऋषिकेश पहुंची। इसके बाद यह सेवा पूर्व की भांति अपने नियत समय दोपहर 2रू45 बजे ऋषिकेश पहुंची। जबकि यह गाड़ी 6-एचआर बनकर रात 10 बजकर 20 बजे हरिद्वार पैसेंजर के रूप में संचालित हुई।

बताते चलें कि रेलवे ने हाल में ही दून-नैनी रेल सेवा शुरू होने के बाद ऋषिकेश-हरिद्वार के बीच संचालित होने वाली पैसेंजर को हमेशा के लिए रद कर दिया था। जिसके बाद सुबह साढ़े सात बजे के बाद रात्रि साढ़े दस बजे तक ऋषिकेश-हरिद्वार के बीच कोई भी पैसेंजर सेवा नहीं रह गई थी।

मगर, अब लोगों को दोपहर में ऋषिकेश-हरिद्वार के बीच बांदीकुई एक विकल्प के तौर पर जरूर मददगार बनेगी। समाजसेवी लोकेश झा ने बताया कि करीब एक वर्ष से बंद बांदीकुई का संचालन होना खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि इस सेवा से लंबी दूरी के यात्रियों के अलावा ऋषिकेश-हरिद्वार के बीच के यात्रियों को भी पैसेंजर सेवा के रूप में मदद मिलेगी। स्टेशन मास्टर मनोज कुमार ने बताया कि बांदीकुई के आने व जाने का समय पूर्ववत ही रहेगा।

सीएम बोले, राज्य में महिलायें स्वावलंबी बन रही

सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि केदारनाथ में 19 लाख का प्रसाद वितरित किया गया। यह आंकड़ा भविष्य में डेढ़ करोड़ रूपये तक पहुंचने की उम्मीद है। सीएम ने बताया कि यह सभी प्रसाद केदारनाथ क्षेत्र की ही महिलाओं ने बनाया था। इससे जहां महिलाओं को रोजगार मिला। वहीं पलायन पर भी रोक लगी। उन्होंने बताया कि प्रसाद के बदले मिला रूपया सीधे महिलाओं को मिला।

सीएम ने चौलाई, मंडवा आदि पारंपरिक उत्पादों को लेकर कहा कि ग्रोथ सेंटर भविष्य में रोजगार का एक बड़ा बनेंगे। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि 22 जुलाई को रिस्पना से ऋषिपर्णा अभियान के अंतर्गत लंढौर मसूरी से लेकर मोथरोवाला तक पेड़ लगाएं। बैठक में सीएम ने डोईवाला में सीपेट की स्थापना का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि इससे पहले साल 1500 बच्चे निकलेंगे, जिन्हें कम से कम 30000 रुपये महीने का रोजगार मिलेगा। क्योंकि सीपेट की डिमांड बच्चों की तुलना में 300 फीसद अधिक है और सीपेट में 85 फीसद बच्चे उत्तराखंड से ही लिए जाएंगे। सीएम ने निफ्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इसके लिए 200 करोड़ स्वीकृत हुआ है पर इसमें सीपेट के मुकाबले रोजगार सृजन की इतनी गारंटी नहीं है।

इजरायल से सीखना होगा बर्षा जल का इस्तेमाल

वहीं, सीएम ने बताया कि झाझरा में बनने वाली साइंस सिटी के लिए जमीन उपलब्ध कराने पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने पिरुल के लिए भी वित्त उपलब्ध कराने की बात कही। इसके साथ ही सूखते हुए नदी-नाले और स्त्रोत को लेकर उन्होंने कहा कि एक रिपोर्ट में बताया गया है कि गंगा में आज 45 प्रतिशत जल कम हो गया है। हमें इजराइल से सीखना होगा कि वो किस तरह से बारिश के पानी का 95 प्रतिशत तक दोबारा इस्तेमाल कर लेता है।

देहरादून में बन रहे सौंग बांध को लेकर सीएम ने कहा, हमारी योजना है कि करीब एक साल में बांध को तैयार कर लिया जाए। उन्होंने बताया कि समय सीमा में कार्य करने के कारण इसकी लागत 1200 सौ करोड़ से घटकर 750 करोड़ हो गई है। वहीं, मलढूंग बांध और सौंग बांध से देहरादून की पेयजल की समस्या भी हल होगी और विद्युत उत्पादन के साथ लैंड रिचार्ज भी होगा।

आईडीपीएल वापस पाना एक बड़ी उपलब्धि

कार्यसमिति की बैठक में सीएम ने कहा कि ऋषिकेश आईडीपीएल वापस पाना एक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस पूरी 936 एकड़ जमीन का मूल्य करीब दो हजार करोड़ रुपये है। जिसमें से 200 एकड़ एम्स को, कुछ भूमि आईडीपीएल को और शेष लगभग 700 एकड़ भूमि पर कन्वेंशन सेंटर बनाया जाएगा, जो पूरे भारत में एक अनूठी मिसाल होगा।

सीएम ने मलिन बस्तियों के मुद्दे पर कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2021 तक एक लाख चालीस हजार घर बनाने का लक्ष्य है। इसे समय से पूरा करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। प्रभारी मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि जनता ने हमें जनादेश दिया है और इस कारण तोड़फोड़ से जनता को होने वाली परेशानी को हमें ही समझना होगा। उन्होंने एक दिन पहले बुलाई बैठक का हवाला देते हुए कहा कि हमने इस संबंध में वीसी एमडीडीए और जिलाधिकारी को आदेश दे दिए हैं। वहीं, कार्यसमिति के समापन पर बस दुर्घटनाओं और आपदाओं में मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन रखा गया ।

मनोरंजन से भरपूर रेडियो चैनल उत्तराखंड में हुआ लांच

रेड एफएम 93.5 रेडियो चैनल का शुभारंभ मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किया। यह रेडियो चैनल राज्य का पहला रेडियो चैनल है। यह रेडियो चैनल राज्य में 24 घंटे लोगों को मनोरंजन प्रदान करेगा। साथ ही कई सामाजिक मुद्दों पर भी प्रकाश डालेगा।

देहरादून के कौलागढ़ रोड स्थित साउथ एशिया एफएम लिमिटेड के कार्यालय से रेड एफएम 93.5 रेडियो चैनल का बुधवार को शुभारंभ हो गया। मुख्यमंत्री ने राज्य के पहले इस निजी रेडियो चैनल का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने रेडियो चैनल की टीम को बधाई व शुभकामना देते हुए कहा कि रेड एफएम 93.5 का उत्तराखण्ड व देहरादून में पहला रेडियो स्टेशन है।

उन्होंने उम्मीद जतायी कि रेड एफएम 93.5 मनोरंजन के साथ-साथ, विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सामाजिक चेतना लाने में अहम भूमिका निभायेगा। साथ ही राज्य में जनकल्याणकारी योजनाओं व नीतियों को लोगों तक पहुंचाने में कारगार सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय स्तर पर एफएम रेडियो चैनल से उत्तराखण्ड की रमणीय, सौन्दर्य, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक विशेषताएं और अधिक उजागर होंगी। रेडियो चैनल की शुरूआत से राज्य के ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं, जो रोचक तरीके से रेडियो पर प्रस्तुतिकरण दे सकते हैं, के लिए नये अवसर मिलेंगे।

विदित हो कि इस रेडियो स्टेशनक की फ्रीक्वेंसी 48 किलोमीटर तक की रहेगी। शुरूआती दौर में देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, मंसूरी और विकासनगर के अलावा कई अन्य शहरों को इसका लाभ मिलेगा। यह रेडियों चैनल पांच आरजे की टीम वाला है। जिसे लीड आरजे काव्य करेंगे।

पूर्व सैनिक पिता ने दी शहीद बेटे विकास गुरूंग को मुखाग्नि

जब तक सूरज चांद रहेगा। विकास गुरूंग तेरा नाम रहेगा…., पाकिस्तान मुर्दाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारों के बीच शहीद विकास गुरूंग की अंतिम यात्रा तीर्थनगरी के विभिन्न मार्गों से होती हुयी मुनिकीरेती के पूर्णानंद घाट पहुंची। जहां उनका सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार लामा रिति रिवाज से किया गया। शहीद विकास गुरूंग के पिता रमेश गुरूंग ने अपने बेटे को मुखाग्नि दी।

शनिवार को जम्मू-कश्मीर में नौशेरा के लाम सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ से हुई गोलाबारी में 21 गोरखा रायफल में तैनात गुमानीवाला निवासी रायफलमैन विकास शहीद हो गए थे। 21 वर्षीय शहीद का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक आवास पहुुंचा था, तभी से वहां श्रद्धांजलि देने वालों को तांता लगा हुआ था। सोमवार सुबह सेना के जवानों ने शहीद के पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

शहीद विकास गुरूंग को पूर्णानदं घाट पर 24 फील्ड रेजीमेंट के जवानों ने हवा में 32 राउंड फायर कर सशस्त्र सलामी दी। गंगा घाट पर शहीद जवान का लामा रीति से अंतिम संस्कार किया गया। पिता रमेश गुरुंग ने बेटे को मुखाग्नि दी। घाट पर विधानसभा अध्यक्ष, सेना के अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों ने शहीद को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इसे पहले सुबह करीब नौ बजे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शहीद के घर पहुंच कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास गुरुंग की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। ऐसे वीरों के कारण ही हमारा देश सुरक्षित है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने शहीद विकास की स्मृति में द्वार बनाने, उनकी एक आदमकद मूर्ति स्थापित करने और गुलरानी फार्म का नाम शहीद के नाम पर करने की घोषणा की।

शहीद विकास गुरूंग की अंतिम या़त्रा में राजनैतिक संगठनों ने भी शिरकत की। मगर, राजनीति के लिये नहीं बल्कि देशभक्ति की भावना उन्हें एक साथ ले आयी। शहीद की विदाई यात्रा में हर पचास कदम की दूरी पर व्यापारी ने अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद कर शहीद को श्रद्धांजलिद अर्पित की। शहीद विकास के सम्मान में देश भक्ति के गीत चल रहे थे। यह देश भक्ति ही थी जो लोगों को भीषण गर्मी में घर से बाहर सड़क तक ले आयी।

सभी वर्ग के लोगों ने दी नम आंखों से विदाई

शहीद की अंतिम यात्रा में क्या बच्चे, क्या बुढ़े और क्या जवान इन सभी के साथ सैकड़ों की संख्या में महिलायें भी चल रही थी। शहीद के घर से लेकर पूर्णानंद घाट तक सभी ने भारत माता की जय जैसे नारे के साथ शहीद जवान को अपनी-अपनी श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री ने ली वन्य जीव बोर्ड की बैठक, लिया ये अहम फैसला

मुख्ममंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में उत्तराखंड राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक बुलाई गयी। जिसमें अहम फैसला लेते हुये वन्य जीवों द्वारा मारे जाने व गंभीर रूप से घायल होने पर मिलने वाली मुआवजा राशि को बढ़ाया गया। इसके लिये कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जायेगा। इसके बाद मारे गये मृतक के परिजनों को तीन के बजाए पांच लाख रूपये व गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को 50 हजार रूपये की बजाए दो लाख रूपये की मुआवजा राशि मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वनों के प्रबंधन में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। वनों के संरक्षण के लिए ग्रामीणों का सहयोग जरूरी है। वनों का संरक्षण भी हो और स्थानीय ग्रामीण इनसे आजीविका भी प्राप्त कर सकें इसके लिए ग्रीन टूरिज्म की कन्सेप्ट पर काम किया जाए। कार्बेट के बफर जोन व रामनगर वन प्रभाग में हाथी सफारी को भी अनुमति दी गई। यह भी तय किया गया कि राजाजी टाईगर रिजर्व में पर्यटन से होने वाली आय का 100 फीसदी राजाजी टाईगर रिजर्व कंजरवेशन फाउंडेशन के कोष में जमा किया जाएगा। इसका कुछ भाग सामुदायिक गतिविधियों में प्रयोग किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साल में एक बार होने वाली उत्तराखण्ड राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक हर छह माह में आयोजित की जाए। इसमें प्रस्तुत किए जाने वाले बिंदुओं के साथ विस्तृत रिपोर्ट भी संलग्न होनी चाहिए। यदि कोई मामला जनता से जुड़ा हो तो बोर्ड की बैठक में प्रस्तुत करने से पहले यह भी अध्ययन करा लिया जाए कि इससे सम्भावित लाभ व हानि क्या-क्या हैं।

आरक्षित वन और टाईगर रिजर्व के बफर जोन में एंगलिंग का परमिट नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वन विभाग द्वारा जिन पर्वतारोही दलों को अनुमति दी जाती है उसकी सूचना पुलिस को भी दी जाए। ताकि किसी आकस्मिक स्थिति में फंसे पर्वतारोहियों को बचाया जा सके। बैठक में वाईल्ड लाईफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा प्रस्तावित कंडी मार्ग पर किए गए फिजीबिलिटी सर्वे का प्रस्तुतिकरण किया गया। बताया गया कि इसके बनने से गढ़वाल से कुमायूं के लिए सीधा सम्पर्क मार्ग बनेगा और इससे यात्रावधि में लगभग तीन घंटे की कमी आएगी। इस पर कंडी मार्ग के संबंध में एक कार्यकारी समिति बनाने का निर्णय किया गया।

उत्तराखंड पुलिस ने मांउट एवरेस्ट पर सफल आरोहण कर किया ऐतिहासिक कार्यः त्रिवेन्द्र

माउंट एवरेस्ट पर्वतारोहरण पर गये उत्तराखंड पुलिस के 15 सदस्यों को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने उन आठ सदस्यों जिन्होंने माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक आरोहण किया। को पद में पदोन्नति व वेतन वृद्धि की घोषणा की।

जिन आठ सदस्यों ने सफलतापूर्वक आरोहण किया। उनमें से छह आरक्षी, एक निरीक्षक तथा एक मिनी फायरमैन शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इन छह आरक्षियों को मुख्य आरक्षी के पद पर पदोन्नति एवं निरीक्षक तथा मिनी फायरमैन को एक-एक वैयक्तिक वेतन वृद्धि की घोषणा की। माउंट एवरेस्ट आरोहण के लिए गये दल को पांच लाख रूपये देने की घोषणा भी की। जिन आरक्षियों को पदोन्नति दी जायेगी। उनमें विजेन्द्र प्रसाद काला, मनोज जोशी, सूर्यकान्त उनियाल, विजेन्द्र कुड़ियाल, प्रवीण सिंह, योगेश रावत शामिल हैं। जबकि निरीक्षक संजय उप्रेती एवं मिनी फायरमैन रवि चौहान को वेतन वृद्धि दी जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस दल ने माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण कर एक ऐतिहासिक कार्य किया है। उत्तराखण्ड पुलिस का दल देश का ऐसा पहला पुलिस दल है, जिसने माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को अनुभवी और हिम्मत वाले जवानों की हमेशा आवश्यकता रहेगी। इस तरह के अभियानों में प्रतिभाग कर जवानों का हौंसला बढ़ता है और नये अनुभव प्राप्त होते हैं। इस तरह के अभियान समय-समय पर चलाने जरूरी हैं। उत्तराखण्ड पर्वतीय राज्य होने के साथ ही आपदा के दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। राज्य में आपदा प्रबन्धन के लिए तकनीक के विकास के साथ ही प्रशिक्षित लोगों का होना जरूरी है। इसके लिए राज्य सरकार हर सम्भव प्रयास कर रही है।

मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने उत्तराखण्ड पुलिस दल को माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण पर बधाई देते हुए कहा कि जवानों के दृढ़ निश्चय एवं आत्मविश्वास की वजह से अभियान सफल रहा। उत्तराखण्ड में कार्य करने के लिए अपार सम्भावनाएं हैं, यहां के लोगों में बहुत क्षमता है। उन्होंने कहा कि पुलिस के इस दल ने टीम स्प्रिट का संदेश दिया है। हमें जनता की सेवा के लिए भी टीम स्प्रिट की भावना से कार्य करना होगा।

पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी ने कहा कि सीमित संसाधन होने के बावजूद भी उत्तराखण्ड पुलिस दल ने दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर आरोहण कर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड पुलिस का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि ऐसे साहसिक अभियान के बाद जवानों को जो अनुभव प्राप्त हुए हैं, उससे निश्चित रूप से भविष्य में फायदा होगा।

युवाओं को नदियों के पुनर्जीवीकरण को आगे आना होगाः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री ने मैराथन दौड़ को हरी झंडी दिखाते हुये कहा कि युवाओं को नदियों के पुनर्जीवीकरण के लिये आगे आना होगा। मैड संस्था इस संबंध में बच्चों की ऊर्जा को सही दिशा देने का रचनात्मक कार्य किया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि रिस्पना एवं कोसी नदी को पुनर्जीवित कर हमें देश के समक्ष रोल मॉडल बनाना होगा। यह कार्य जन सहयोग से ही पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन नदियों के पुनर्जीवन के लिए सरकार को समाजिक संस्थाओं, विभिन्न संगठनों एवं स्थानीय जनता का पूरा सहयोग मिल रहा है।

त्रिवेन्द्र रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ गंगा मिशन को सफल बनाने के लिए हमें पूरा सहयोग करना होगा। नमामि गंगे के तहत 25 हजार करोड़ रूपये इस प्रोजेक्ट में रखे गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून को पूर्ण ग्रेविटि का पानी उपलब्ध कराने के लिए अगले वर्ष तक सौंग बांध की नीव रखी जायेगी।

राज्य सरकार द्वारा ईको सिस्टम, पर्यावरण सरंक्षण, जल संरक्षण, नदियों के पुनर्जीवीकरण व स्थानीय उत्पादों पर आधारित स्वरोजगार के अवसर विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

37 हजार की ऑनलाइन शॉपिंग में मिला पत्थर का टुकड़ा

तीर्थनगरी के एक छात्र ने एक नामी कंपनी से ऑनलाइन कैमरा का आर्डर दिया, जिसके लिये उसने 37450 रूपये की रकम भी ऑनलाइन जमा कर दी। मगर, जब कुछ दिन बाद आर्डर किया हुआ पार्सल घर आया, तो छात्र के होश उड़ गये। उसके पार्सल खोला तो उसमें से 40 ग्राम का एक पत्थर का टुकड़ा निकला। जिसके बाद छात्र ने पुलिस की शरण ली।

मुनिकीरेती में मधुबन आश्रम के पास कैलाश गेट निवासी शुभम झा पुत्र लल्लन झा बीसीए का छात्र है। छात्र के मुताबिक उसने 17 मई को एक नामी अंतराष्ट्रीय कंपनी से ऑनलाइन कैनन ईओएस-200डी का ऑर्डर दिया था। कैमरे की कीमत 37450 रुपये उसने ऑनलाइन जमा भी करा दिए थे। 20 मई को कस्तूरबा गांधी मार्ग दिल्ली स्थित एसएस इंटरप्राइजेज ने ब्लूडॉर्ट कोरियर सर्विस के जरिये भेजा गया पार्सल छात्र को प्राप्त हुआ।

पार्सल की बनावट देख छात्र शुभम को शक हुआ। तो उसने वीडियों रिकॉर्डिंग करते हुए पार्सल को खोला। देखा तो उसमें पत्थर का टुकड़ा निकला। जिसका वजन करीब 40 ग्राम था। शुभम ने पार्सल के साथ आए कागजों के आधार पर डिलीवरी करने वाली एजेंसी को फोन किया। शुभम के मुताबिक तीन बार उक्त नंबर पर घंटी गई, फिर चौथी बार नंबर स्विच ऑफ हो गया। शुभम ने कोरियर कंपनी कार्यालय जाकर शिकायत की, तो उन्होंने इस पार्सल को लेने से इंकार कर दिया।

दोस्तों से पैसे उधार लेकर कैमरा मंगाने वाले शुभम ने पुलिस चौकी जाकर तहरीर दी। थाना मुनिकीरेती के प्रभारी निरीक्षक आरके सकलानी ने बताया कि यह भी संभव है कि नामी कंपनी के नाम से किसी अन्य ने यह धोखाधड़ी किया हो। पुलिस मामले से जुड़े हर पहलु की गहनता से जांच कर रही है।