धामी सरकार ने जोशीमठ आपदा के प्रभावित छात्रों को दी ये सुविधा

जोशीमठ में भू-धंसाव से प्रभावित छात्र-छात्राओं की परेशानी देखते हुये उन्हें बोर्ड परीक्षा के लिये परीक्षा केन्द्र चुनने की छूट दी जायेगी, इसके लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं। शीघ्र ही प्रभावित छात्र-छात्राओं से परीक्षा केन्द्र के लिये विकल्प मांगे जायेंगे। बोर्ड परीक्षाओं में परीक्षार्थियों का मनोबल बढ़ाने के दृष्टिगत प्रधानमंत्री के साथ ‘परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम’ का प्रदेशभर के स्कूलों में आयोजन किया जायेगा। इसके साथ ही सूबे के स्कूलों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वारियर’ की थीम पर चित्रकला प्रतियागिता का भी आयोजन किया जायेगा। जिसके आयोजन की तैयारियों के बावत विभागीय अधिकारियों को दिशा-निर्देश दे दिये गये हैं। बैठक में विभागीय अधिकारियों को वित्तीय वर्ष 2022-23 हेतु विभिन्न मदों में स्वीकृत बजट को शीघ्र व्यय कर उपयोगिता प्रमाण पत्र शासन को उपलब्ध करने को कहा गया है।
आपदा प्रभावित क्षेत्र जोशीमठ दौरे से वापस लौटने पर विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने आज शिक्षा महानिदेशालय ननूरखेड़ में विभागीय बैठक ली। जिसमें डॉ0 रावत ने राहत कैम्पों में रह रहे प्रभावित छात्र-छात्राओं को बोर्ड परीक्षा में परीक्षा केन्द्र चुनने की छूट देने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि भू-धंसाव से प्रभावित छात्रों को बोर्ड परीक्षा देने में कोई परेशानी न हो इसके लिये उन्हें अपनी सुविधानुसार किसी भी शहर में परीक्षा केन्द्र चुनने की छूट देने का निर्णय लिया है। इसके लिये जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सूची तैयार कर शीघ्र संबंधित बोर्ड के अधिकारियों को प्रभावित छात्र-छात्राओं का विवरण उपलब्ध कराने को कहा है। बैठक में डॉ0 रावत ने बताया कि जोशीमठ आपदा प्रभावित क्षेत्र के अधिकतर छात्र-छात्राएं उत्तराखंड बोर्ड व सीबीएससी बोर्ड के विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। इस संबंध में सीबीएससी बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी व उत्तराखंड बोर्ड के सचिव को प्रभावित छात्र-छात्रों को उनकी सुविधानुसार बोर्ड परीक्षा केन्द्र आवंटित कराने के निर्देश दे दिये गये हैं। बैठक में डॉ0 रावत ने आगामी 27 जनवरी को प्रधानमत्रीं के साथ ‘परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम’ की तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यक्रम के माध्यम से बोर्ड परीक्षाओं में प्रतिभाग करने वाले परीक्षार्थियों को सम्बोधित करेंगे। प्रदेश के सभी विकासखंड मुख्यालयों के विद्यालयों में इस कार्यक्रम को आयोजित किया जायेगी, जिसकी सभी तैयारियों के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं। विभागीय मंत्री ने बताया कि आगामी 20 जनवरी से 23 जनवरी तक प्रदेशभर के विद्यालयों में चित्रकला प्रतियागिता का आयोजन किया जायेगा, जोकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वारियर’ की थीम पर आधारित होगी। जिसमें विजेता छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र भी दिये जायेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों कार्यक्रमों में सांसद, स्थानीय विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति जरूरी है। इसके विभागीय अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिये गये।
बैठक में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, अपर सचिव योगेन्द्र यादव, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी, सीबीएससी बोर्ड के संयुक्त सचिव व क्षेत्रीय अधिकारी रणवीर सिंह चौहान, निदेशक माध्यमिक शिक्षा आर0के0 कुंवर, निदेशक प्राथमिक शिक्षा वंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक आर0डी0 शर्मा सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

कोई अभ्यर्थी भी दोषी पाया गया तो 10 साज की सजा और परीक्षाओं से रहेगा वंचित-धामी

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत में मीडिया से बात करते हुए कहा कि राज्य सरकार देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून बनाने जा रही है। कैबिनेट में इस पर निर्णय लिया जा चुका है। इस कानून में अपराधियों को आजीवन सजा का प्राविधान किया जा रहा है। साथ ही संपत्ति भी जब्त की जाएगी। जो अभ्यर्थी इसमें लिप्त पाए जायेंगे उन्हे 10 साल तक किसी भी परीक्षा में बैठने से अयोग्य कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सिस्टम में सुधार कर रहे हैं। परीक्षाओं की धांधली में शामिल लोगों को कानून की गिरफ्त में लाया गया है और उन पर कड़ी कार्रवाई भी की गई है। पहले परीक्षाओं में गड़बड़ियों का पता ही नही लगता था। अगर पता लगता भी था तो कोई कार्यवाही नहीं होती थी। हमने गडबडी करने वालों को जेल भेजा,उनकी सम्पत्तियों को ध्वस्त किया। हमने मुखबिर तंत्र को मजबूत किया है। किसी प्रकार की धांधली का न केवल पता चल रहा है बल्कि गड़बड़ी करने वालों को अविलंब पकड़ा भी जा रहा है। हम अपने युवाओं के साथ कोई अन्याय नहीं होने देंगे। अब ये तो साफ है कि गड़बड़ी करके कोई बच नहीं सकता।

अभ्यर्थियों को धामी सरकार की राहत, आवेदन शुल्क नही और ट्रांसपोर्ट का खर्च भी नही लेगी सरकार

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने बताया कि कैबिनेट में निर्णय लिया गया है कि भर्तियों में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार द्वारा शीघ्र ही एक सख्त नकल विरोधी कानून लाया जाएगा, जिसमें दोषी को उम्रकैद तक की सजा का प्राविधान किया जाएगा। साथ ही, इस कार्य में अर्जित की गयी सम्पत्ति को भी जब्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोग द्वारा लेखपाल की परीक्षा को दोबारा आयोजित किया जाएगा। जिन अभ्यर्थियों ने पूर्व में इसके लिए आवेदन किया है, उन्हें दोबारा आवेदन नहीं करना होगा। न ही इसके लिए कोई फीस देनी होगी। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि उत्तराखण्ड ट्रांसपोर्ट कार्पाेरेशन की बसों में अभ्यर्थियों को किराया नहीं देना होगा, अभ्यर्थियों का प्रवेश पत्र ही उनका यूटीसी की बसों में टिकट माना जाएगा।

उच्च शिक्षण संस्थानों के सभी छात्रों की बनेगी आभा आईडी

प्रदेश की उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बनाये रखने एवं छात्र-छात्राओं में नैतिक मूल्यों के विकास के दृष्टिगत एनईपी के अंतर्गत विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा संबंधी विषयों का समावेश किया जायेगा। इसके साथ ही प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लाने के लिये सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में एक प्रवेश, एक परीक्षा, एक परिणाम और एक चुनाव कार्य योजना को लागू किया जायेगा। सभी शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की डिजीटल हेल्थ आईडी अनिवार्य रूप से बनाई जायेगी। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों में नशा मुक्त अभियान, तम्बाकू मुक्त अभियान, टीबी मुक्त अभियान एवं रक्तदान अभियान चलाये जायेंगे।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने आज राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान देहरादून के सभागार में श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय से सम्बद्ध अशासकीय एवं निजी शिक्षण संस्थानों के साथ विभिन्न बिन्दुओं को लेकर बैठक की। जिसमें डॉ0 रावत ने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे सभी छात्र-छात्राओं की डिजिटल हेल्थ आईडी अनिवार्य रूप से बनाई जायेगी, ताकि छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य से संबंधित समस्त जानकारियां ऑनलाइन सुरक्षित रह सकेगी और जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग कर सकेंगें। इसी प्रकार सभी छात्र-छात्राओं की आयुष्मान कार्ड भी बनाये जायेंगे, जिसके लिये राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण विश्वविद्यालयों के साथ क्यूआर कोड़ साझा करेगा, जिसे विश्वविद्यालय अपने संबद्ध संस्थानों को उपलब्ध करायेगा जिसके आधार पर सभी छात्र-छात्राएं डिजीटल हेल्थ आईडी के लिये अपना पंजीकरण करा सकेंगे। डॉ0 रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत प्रदेश को 2024 तक टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें उच्च शिक्षण संस्थानों की भागीदारी भी अहम है। उन्होंने ने सभी शिक्षण संस्थानों से अपनी क्षमता के अनुसार एक से पांच तक टीबी मरीजों को गोद लेते हुये अपने सामाजिक दायित्वों को निभाने का आह्वान किया। इसी प्रकार सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में सुभाष चन्द्र बोस जयंती 23 जनवरी से लेकर एक माह तक रक्तदान शिविरों का आयोजन कराने को कहा, जिसमें स्वास्थ्य विभाग का भी सहयोग रहेगा। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत सभी छात्र-छात्राओं को स्वैच्छिक रक्तदान के लिये ई-रक्तकोश, आरोग्य सेतु ऐप और विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा ताकि जरूरत पड़ने पर रक्तदान के लिये बुलाया जा सके। इसके अलावा उन्होंने शिक्षण संस्थानों में नशा मुक्त अभियान, तम्बाकू मुक्त अभियान संचालित करने को भी कहा। विभागीय मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापरक शिक्षा के साथ ही नैतिक शिक्षा आधारित ज्ञान का होना भी आवश्यक है। इसके लिये एनईपी-2020 के तहत विश्वद्यालयों के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परम्परा आधारित नैतिक शिक्षा से संबंधित विषयों को भी शामिल किया जायेगा। उन्होंने उच्च शिक्षा में एकरूपता लाने के लिये विश्वविद्यालयों को एक प्रवेश, एक परीक्षा, एक परिणाम और एक चुनाव की कार्य योजना पर काम कर अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने के निर्देश दिये। उन्होंने सभी निजी शिक्षण संस्थानों से नैक मूल्यांकन के लिये अनिवार्य रूप से आवेदन करने को कहा। इसके लिये विश्वविद्यालय के माध्यम से नैक मूल्यांकन कार्यशाला का आयोजन फरवरी माह में कराया जायेगा। बैठक में श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 महावीर सिंह रावत ने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित क्रियाकलापों व भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी, साथ ही उन्होंने निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों को किसी भी प्रकार की समस्या का त्वरित समाधान का भरोसा दिलाया। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलसचिव खेमराज भट्ट ने निजी शिक्षण संस्थानों से मान्यता से संबंधी प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने को कहा। कार्यक्रम का संचालन सहायक परीक्षा नियंत्रक डॉ0 हेमंत बिष्ट ने किया।

बैठक में श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ0 एम0एस0 रावत, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ0 विनीता शाह, निदेशक एनआईवीएच डॉ0 मनीष वर्मा, वरिष्ठ प्रशिक्षण अधिकारी एनईवीएच जगदीश लखेड़ा, कुलसचिव खेमराज भट्ट, सहायक परीक्षा नियंत्रक डॉ0 हेमंत बिष्ट, देवेन्द्र सिंह रावत, सुनील नौटियाल सहित विश्वविद्यालय से सम्बद्ध आशासकीय मान्यता प्राप्त एवं निजी शिक्षण संस्थानों के चेयरमैन, निदेशक एवं प्राचार्य उपस्थित रहे।

धामी मामा ने साल का पहला दिन बच्चों के साथ गुजारा, व्यवस्थाओं को और मजबूत करने का लिया फैसला

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को बनियावाला, प्रेमनगर में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस छात्रावास का लोकार्पण किया एवं बालिकाओं को गणवेश प्रदान किये। मुख्यमंत्री ने नव वर्ष के अवसर पर बालिकाओं के साथ केक काटकर उनका उत्साहवर्द्धन किया। उन्होंने छात्रावास का निरीक्षण किया एवं विभिन्न व्यवस्थाओं का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश के समस्त राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता को बढ़ावा देने हेतु प्रत्येक विद्यालय स्तर पर सेनेट्री पैड की उपलब्धता बनी रहे इसके लिए कॉर्पस फण्ड से प्रति विद्यालय 50 हजार रूपये की दर से निधि बनाई जायेगी। सुभाष चन्द्र बोस छात्रावास बनियावाला एवं गदरपुर का उच्चीकरण किया जायेगा तथा कक्षा 9वीं से 12वीं तक की छात्राओं को निःशुल्क आवासीय सुविधा के माध्यम से स्कूली शिक्षा दी जायेगी। चम्पावत में नये नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय छात्रावास का निर्माण किया जायेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी को नव वर्ष की शुभकामना देते हुए कहा कि नव वर्ष के अवसर पर निर्धन एवं समाज के वंचित वर्ग की बालिकाओं के लिए यह आवासीय छात्रावास का लोकार्पण किया गया है, इससे इनको रहने के साथ ही पढ़ाई के लिए अच्छा वातावरण मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य में 11 आवासीय छात्रावास हैं, इनकी और संख्या बढ़ाने के लिए सरकार प्रयासरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही कोई देश शक्तिशाली एवं समृद्धशाली बन सकता है। राज्य में शिक्षा के गुणात्मक सुधार के लिए राज्य सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश आजादी के अमृत महोत्सव में प्रवेश कर गया है। आने वाले 25 साल भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। हमारे नौनिहाल भारत का भविष्य हैं। इन नौनिहालों को अच्छी शिक्षा एवं अनुशासन मिले, इस दिशा में सबको प्रयास करने होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से प्रगति कर रहा है। आज का नया भारत नए संकल्पों को पूरा करने के लिए अग्रसर है। वैश्विक स्तर पर भारत का मान, सम्मान एवं स्वाभिमान बढ़ा है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड भी विकास के नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। राज्य सरकार उत्तराखण्ड के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के साथ-साथ वर्ष 2025 तक उत्तराखंड को देश का “सर्वश्रेष्ठ राज्य“ बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प“ की सिद्धि के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा बंशीधर तिवारी ने कहा कि समाज के अपवंचित, बेसहारा एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए राज्य में जो 11 आवासीय छात्रावास चलाए जा रहे हैं। इन छात्रावासां के माध्यम से विद्यार्थियों को निःशुल्क भोजन, आवास, गणवेश, शिक्षण सामग्री आदि उपलब्ध कराई जा रही है। इन आवासीय छात्रावासों की कुल क्षमता 750 विद्यार्थियों की है। वर्तमान में 650 विद्यार्थी इनमें पढ़ रहे हैं, जबकि 100 विद्यार्थियों के प्रवेश की प्रक्रिया गतिमान है। उन्होंने जनपद देहरादून के चार छात्रावासों के किचन निर्माण एवं अन्य सामग्री के लिए 11 लाख रूपये की धनराशि उपलब्ध कराने के लिए जिलाधिकारी सोनिका का आभार भी व्यक्त किया।
इस अवसर पर सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, जिलाधिकारी देहरादून सोनिका, मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून डॉ. मुकुल कुमार सती एवं शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

‘‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से राष्ट्र निर्माण’’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में सीएम धामी ने किया प्रतिभाग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरियाणा के गुरुग्राम में एसजीटी विश्वविद्यालय, बुधेरा में ‘‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से राष्ट्र निर्माण’’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना श्री गुरू गोबिंद सिंह जी महाराज के नाम पर हुई। विश्वविद्यालय ने शिक्षा जगत में किए गए अपने कार्यों द्वारा अपने इस नाम को चरितार्थ किया है। गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज जहां एक ओर महान योद्धा थे वहीं दूसरी ओर वे अद्वितीय लेखक, विचारक और विश्व में आध्यात्मिक चेतना का पुनर्जागरण करने वाले विराट व्यक्तित्व भी थे। शौर्य, समर्पण और बलिदान से परिपूर्ण उनका जीवन न केवल भारतवासियों के लिए प्रेरणापुंज है बल्कि समस्त विश्व के लिए एक पाथेय का कार्य भी करता है। वे शिक्षा के प्रचार-प्रसार को विशेष महत्व दिया करते थे। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के समन्वित विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण माध्यम शिक्षा है। शिक्षा से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और दिशा निर्देशन में तैयार की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में मनुष्य से मानवता तक और अतीत से आधुनिकता तक सभी बिंदुओं का समावेश है। नई शिक्षा नीति समय की मांग थी। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृतकाल में नए भारत के निर्माण और सामर्थ्य को सार्थक करने में यह शिक्षा नीति अपनी प्रभावी भूमिका का निर्वहन करने में सफल होगी। नई शिक्षा नीति में मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं के प्रयोग पर विशेष बल दिया गया है। यह कदम जहां एक ओर देश के सर्वांगीण विकास हेतु सहायक सिद्ध होगा वहीं देश को एकता के एक सूत्र में पिरोने का कार्य भी करेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कौशल विकास अभियान के तहत ’’युवा भारत-नया भारत’’ से युवाओं को प्रोत्साहन मिला है। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु इस शिक्षा नीति में जो विशेष प्राविधान किए गए हैं वे “आत्मनिर्भर“ भारत के लिए नींव का पत्थर साबित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक शिक्षित और संस्कारी समाज के निर्माण में शिक्षकों की विशेष भूमिका रहती है। नई शिक्षा नीति के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सभी शिक्षकों को पूरे मनोयोग से कार्य करने होंगे। यह महान कार्य तभी पूर्ण होगा जब नई शिक्षा नीति पूर्ण रूप से पूरे देश में लागू हो जाएगी। शिक्षा नीति को लागू करने के इस अभियान में हमारे शिक्षक पूर्ण उत्साह से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का प्रथम राज्य है जिसने स्कूली शिक्षा एवं उच्च शिक्षा दोनों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2022 को लागू किया है।

इस अवसर पर सांसद लल्लू सिंह, एसजीटी विश्वविद्यालय के चांसलर राम बहादुर राय, कुलपति प्रो.ओ.पी.कालरा, मधुप्रीत कौर चावला, मनमोहन सिंह चावला, विश्वविद्यालय के अध्यापक एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

भारत दर्शन जा रहे छात्रों ने सीएम धामी से की भेंट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में भारत दर्शन पर जा रहे विधानसभा क्षेत्र देवप्रयाग के मेधावी छात्रों से भेंट की। उन्होंने कहा कि देवप्रयाग के विधायक विनोद कण्डारी द्वारा मेधावी बच्चों को शैक्षिक भ्रमण पर ले जाने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है। मेधावी छात्रों को भारत भ्रमण में नई-नई चीजें सीखने को मिलेंगी। भारत दर्शन करने के साथ-साथ ये भविष्य दर्शन भी करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य के अन्य मेधावी छात्रों को भी इस तरह से भारत भ्रमण पर ले जाने के लिए भविष्य में राज्य सरकार की ओर से कार्य योजना बनाई जायेगी।
मुख्यमंत्री ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि वे भविष्य में जिस भी क्षेत्र में कार्य करें, एक लीडर की भूमिका में कार्य करें। यदि हम किसी कार्य को पूर्ण मनोयोग एवं दृढ़ निश्चय से करते हैं, तो उसमें सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य अनंत ऊर्जा का भंडार है। ऊर्जा का संचार सकारात्मक दृष्टि से हो तो कोई भी कार्य असंभव नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भ्रमण के दौरान इन मेधावियों को शैक्षिक एवं औद्योगिक संस्थानों के बारे में भी जानकारी प्राप्त होगी।
विधायक विनोद कण्डारी ने बताया कि 19 दिसम्बर 2022 तक देवप्रयाग विधानसभा के हाईस्कूल में उच्च स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को विभिन्न स्थानों पर शैक्षिक भ्रमण कराया जा रहा है। शैक्षिक संस्थानों के अलावा इन मेधावी छात्रों को औद्योगिक एवं अन्य संस्थानों का भ्रमण भी कराया जायेगा।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, जिला पंचायत अध्यक्ष टिहरी सोना सजवाण उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्तापरक मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में अग्रसर होना है-राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने शुक्रवार को दून विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में 36 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। समारोह में वर्ष 2021 के स्नातक, परास्नातक एवं पी.एच.डी के 669 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले 36 विद्यार्थियों में 24 छात्राएं शामिल थीं। जिन्होंने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की थीम ‘उभरती नारी शक्ति’ को चरितार्थ किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देवभूमि उत्तराखंड को नमन करते हुए कहा कि आज दून विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लेकर उन्हें बहुत खुशी हो रही है। डिग्री और मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि इस दिन की स्मृति इन विद्यार्थियों के जीवन-यात्रा के सबसे यादगार अनुभव में से एक रहेगी। आज इन विद्यार्थियों का एक सपना साकार हो रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह विश्वविद्यालय शिक्षा के विभिन्न मानकों पर एक उत्कृष्ट संस्थान के रूप में अपनी पहचान बनाएगा। राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति, उसके मानव संसाधन की गुणवत्ता पर निर्भर होती है। मानव संसाधन की गुणवत्ता, शिक्षा की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। आज का युवा, कल का भविष्य है, इस सूत्र वाक्य को अंगीकार करते हुए, दून विश्वविद्यालय को सिर्फ राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्तापरक मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में कार्यरत रहना है।
राष्ट्रपति ने कहा कि दून विश्वविद्यालय युवाओं को सक्षम बनाने हेतु उन्हें कौशल प्रदान करने के लिए कृतसंकल्प है। विश्वविद्यालय द्वारा पांच विदेशी भाषाओं और तीन स्थानीय भाषाओं का भी अध्ययन व अध्यापन कार्य किया जा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा स्थानीय भाषाओं को प्रोत्साहित करना हमारी लोक संस्कृति की संरक्षण का सराहनीय प्रयास है। हमारी लोक भाषाएं हमारी संस्कृति की अमूर्त धरोहर हैं। विश्वविद्यालय ने वर्तमान सत्र से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू किया है। भारत को नॉलेज सुपर पावर बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में यह उपयोगी कदम है। उन्होंने कहा कि हम स्वाधीनता के 75 वर्ष पूरे होने पर आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है कि देश को अगले पच्चीस वर्षाे के अमृत- काल में विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में शामिल करें। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवा शक्ति का सहयोग अधिक महत्वपूर्ण होगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि विश्वविद्यालय में ’सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी चेयर स्थापित की गई है, जो राज्य के विकास के लिए नीति-निर्माण और क्षमता विकास के लिए समर्पित है। डॉ. नित्यानंद हिमालयी शोध एवं अध्ययन केन्द्र भी स्थापित किया गया है, जिसमें राज्य के भौगोलिक, ईकोलॉजिकल, आर्थिक और सामाजिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों में शोध और अध्ययन को प्रोत्साहित किया जायेगा। उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय स्तर के अनेक संस्थान भारतीय सैन्य अकादमी, भारतीय वन्य जीव संस्थान, लाल बहादुर शास्त्री अकादमी, वन अनुसंधान संस्थान, भारतीय पेट्रोलियम अनुसंधान संस्थान तथा गोविंद वल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय विद्यमान हैं जिनकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दून विश्वविद्यालय भी इन संस्थानों की तरह ख्याति प्राप्त करेगा। राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो पूरे राष्ट्र में बदलाव ला सकता है। शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि छात्र तकनीकी कौशल से और अधिक सम्पन्न हां और स्वयं रोजगार की तलाश करने के बजाए दूसरों को रोजगार उपलब्ध करवाएं। विश्वविद्यालय में डेमोग्राफिक रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किये गये डाटा सेंटर से राज्य की डेमोग्राफिक इंफोर्मेशन सहज उपलब्ध होगी, और डेमोग्राफिक रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी बेटियां जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर रही हैं। इसका साक्षात उदाहरण आज के इस दीक्षांत समारोह में देखने को मिला 36 गोल्ड मेडल्स में से 24 मेडल छात्राओं को प्राप्त हुए हैं, जबकि सोलह शोधार्थियों में से आठ बेटियों को पीएचडी की डिग्री प्रदान की गई है। इससे यह सिद्ध होता है कि संस्थान में महिलाओं को शिक्षा के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं और उनको प्रोत्साहित करने के लिए संस्थान प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय में तकनीकी शिक्षा को विशेष रूप से बढ़ावा देने के लिए, तीन तकनीकी स्कूल-स्कूल ऑफ बायोलोजिकल साइंस, स्कूल ऑफ डिजाइन और स्कूल आफ एनवायरमेंट एंड नेचुरल रिसोर्सेज कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हमारी बेटियां विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित जैसे विषयों में और अधिक उत्कृष्टता प्राप्त करेंगी तो महिला सशक्तीकरण को और अधिक बल मिलेगा। आज उपाधि और पदक प्राप्त करने के बाद, इन विद्यार्थियों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि ये विद्यार्थी जिस भी क्षेत्र में जाएं, उस कार्य को बहुत निष्ठा से और सर्वाेत्तम रूप से करें, तभी शिक्षा कारगर और सार्थक होगी।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि आज एक सुखद अनुभूति रही है। आज दून विश्वविद्यालय में सर्वाेच्च मातृशक्ति के रूप में माननीय राष्ट्रपति जी हम सभी को आशीर्वाद प्रदान करने हेतु उपस्थित हुई हैं। विश्वविद्यालय ने पूरे वर्ष के लिए ‘उभरती नारी शक्ति’ थीम को आत्मसात किया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हमारे सामने है, आज विश्वविद्यालय की मीडिया एवं एन.सी.सी की टीम में बड़ी तादात में हमारी बेटियां भाग ले रही हैं। राज्यपाल ने डिग्री प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि आज का दिन इन विद्यार्थियों के लिए एक उत्सव का दिन है, लेकिन आज का दिन मनन का भी है। कुछ साल पहले जब इन विद्यार्थियों ने इस ज्ञान के मन्दिर के अन्दर कदम रखा था, तो इनके ज्ञान के सच्चे साधक होने का प्रशिक्षण, आपके आलोचनात्मक सोच के क्षितिज को व्यापक बनाने का प्रशिक्षण शुरु हुआ था। दीक्षांत समारोह औपचारिक रूप से उस दीक्षा के पूरा होने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि डिग्री हासिल करने का यह अर्थ नहीं है कि हमारी सीखने एवं ज्ञान अर्जन की प्रक्रिया पूरी हो गयी, उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये विद्यार्थी पूरे जीवन ज्ञान और विद्या के शिक्षार्थी बनें रहेंगे। राज्यपाल ने आशा व्यक्त की कि ये विद्यार्थी अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग न केवल अपनी भौतिक समृद्धि के लिए करेंगे, बल्कि अपनी आध्यात्मिक समृद्धि के लिए भी करेंगे। जीवन की सफलताओं में विनम्र बने रहेंगे, एक जिम्मेदार नागरिक बनेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी के संघर्षमय जीवन का फलक अत्यंत व्यापक रहा है। उनकी प्रगतिशील चेतना ही थी जिसने इन भीषण संघर्षों की ज्वाला में तपाकर उनको विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत की राष्ट्रपति होने का गरिमामय आसन प्रदान किया। राष्ट्रपति का जीवन संघर्ष के साथ साथ महिला सशक्तिकरण की भी प्रेरणादाई मिसाल है। उनका सरल स्वभाव, धैर्यशीलता एवं विनम्र आचरण सभी के लिए अनुकरणीय उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा राज्य प्राचीन काल से ही धर्म, आध्यात्म और संस्कृति की महान परम्परा का ध्वजवाहक रहा है। देवभूमि उत्तराखंड सच्चे अर्थों में वसुधैव कुटुम्बकम की समृद्ध विचारधारा का पुण्य स्त्रोत है, जहां से “चिपको“ जैसा जनआंदोलन प्रारंभ हुआ जिसने प्रकृति की महत्ता को विश्व पटल पर पुनः रेखांकित किया और विश्व को गौरा देवी जी जैसी जुझारू महिला के व्यक्तित्व से परिचित होने का मौका दिया। उत्तराखण्ड के शैक्षणिक संस्थान भारत ही नहीं अपितु विश्वभर में विद्या के प्रचार प्रसार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उत्तराखंड की समृद्ध ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाते हुये दून विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। उत्तराखण्ड सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को राज्य में लागू करने का निर्णय लिया जा चुका है। दून विश्वविद्यालय के लिये नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसलिये भी प्रासंगिक हो जाती है क्योंकि दून विश्वविद्यालय उत्तराखण्ड का एकमात्र विश्वविद्यालय है जहाँ विदेशी भाषाओं जैसे जापानी, फ्रेंच, जर्मन, चीनी तथा स्पेनिश में ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट एवं पीएच०डी० कोर्स संचालित किये जा रहे हैं, जिससे छात्रों को न केवल अंतराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों की भाषा एवं संस्कृति को समझने में मदद मिल रही है बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने डिग्री प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामना देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करना वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है। राज्य में उच्च शिक्षा में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य में 05 लाख से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिसमें से 65 प्रतिशत बालिकाएं हैं। 2025 तक राज्य को पूर्ण साक्षर बनाने, क्षय रोग मुक्त उत्तराखण्ड, नशा मुक्त उत्तराखण्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस अवसर पर वैज्ञानिक, पद्म विभूषण डॉ० के. कस्तूरीरंगन, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल, सुबोध उनियाल, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, विधायकगण, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

एसबीएम इंटर कॉलेज में छात्रों को दी स्वेटर

श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज में देवभूमि वरिष्ठ जन कल्याण समिति ऋषिकेश द्वारा 100 स्वेटर वितरित की गई। श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज की प्रार्थना सभा में देवभूमि वरिष्ठ नागरिक जन कल्याण समिति द्वारा निर्धन छात्र छात्राओं को स्वेटर वितरित की गई। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य मेजर गोविंद सिंह रावत द्वारा सभी वरिष्ठ नागरिकों का स्वागत-सम्मान किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक अपने समय के बहुत ही बड़ी प्रतिभा के धनी हैं जिन्होंने विभिन्न विभागों में अपने अविरल सेवाएं देकर सेवा के पावन पवित्र आलोक को प्रज्वलित रखा है। सेवानिवृत्ति के बाद सभी वरिष्ठ नागरिक आज भी संपूर्ण क्षेत्र में अपने प्रतिभाओं के माध्यम से संपूर्ण छात्र छात्राओं को युवाओं को मार्गदर्शन दे रहे हैं। समय-समय पर वरिष्ठ नागरिकों के द्वारा मेडिकल कैंप गरीब बच्चों की मदद एवं अनेक प्रकार के जन सेवा के कार्य किए जाते हैं।
देवभूमि वरिष्ठ जन कल्याण के संस्थापक डा हरीश ढींगड़ा, संरक्षक के सी जोशी, समिति के अध्यक्ष एस पी अग्रवाल ने छात्र छात्राओं को अध्ययन के लिए अनेक महत्वपूर्ण टिप्स बताए। इस अवसर पर वरिष्ठ जन कल्याण समिति के हरीश आनंद, सचिव नरेंद्र दीक्षित, उमेश खेतान, महासचिव नरेश गर्ग, ओपी मुल्तानीडॉ विजय गुप्ता, उप सचिव अजीत शर्मा, सुरेंद्र आहूजा, दिनेश मुद्गल, हरि चरण सिंह आदि उपस्थित रहे।

रोजगारपरक शिक्षा, नवाचार और रैंकिंग पर रहेगा फोकस-रावत

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय चिंतन शिविर का आज समापन हो गया है। चिंतन शिविर के दूसरे विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में क्वालिटी एजुकेशन पर काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि सभी निजी व सरकारी शिक्षण संस्थानों को गुणवत्तापरक शिक्षा के लिये मार्च 2023 तक अनिवार्य रूप से नैक मूल्यांकन कराना होगा, इसके अलावा रोजगारपर शिक्षा, नवाचार और रैंकिंग को लेकर भी शिक्षण संस्थानों में काम करना होगा। विभागीय मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2025 तक सूबे में 25 मॉडल कॉलेज तैयार करने का लक्ष्य रखा है। उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश, परीक्षा एवं छात्र संघ चुनाव की तिथियों में एकरूपता सुनिश्चित की जायेगी। इसके अलावा शैक्षिक कैलेंडर, परीक्षा कैलेंडर, रोवर रेंजर, एनएसएस एवं एनसीसी सहित गैप एनालिसिस के लिये समितियों का गठन किया जायेगा। चिंतन शिविर में उच्च शिक्षा के उन्न्यन के लिये प्राचार्यों ने अपने सुझाव भी रखे।
उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार हेतु डीआईटी विश्वविद्यालय देहरादून में आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर के अंतर्गत राज्य स्तरीय नैक प्रत्यायन कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज समापन हो गया है। इस अवसर पर सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने बताया कि उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिये प्रदेश के सभी निजी एवं राजकीय उच्च शिक्षण संस्थानों को मार्च 2023 तक अनिवार्य रूप से नैक मूल्यांकन कराना होगा। उन्होंने कहा कि नैक मूल्यांकन कराने से पहले राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) बंगलूरू के सहयोग से प्रदेश के विभिन्न जनपदों में नैक प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जायेगी ताकि नैक एक्रिडिएशन कराने में महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों को सहूलियत हो सके। डॉ रावत ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2025 तक सूबे में 25 मॉडल कॉलेज तैयार करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में रोजगारपरक शिक्षा, नवाचार एवं राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में बेहत्तर प्रदर्शन के लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं।
चिंतन शिविर के समापन अवसर पर विभागीय मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को पांच टारगेट पर फोकस करने को कहा। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश, परीक्षा, परीक्षाफल, दीक्षांत समारोह एवं छात्र संघ चुनावों की तिथियों में एकरूपता लाई जाय, साथ ही विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह एक माह तथा छात्र संघ चुनावों को एक सप्ताह के भीतर कराया जाय। उच्च शिक्षण संस्थानों में 180 दिन अनिवार्य रूप से पठन-पाठन सुनिश्चित कराने के निर्देश भी विभागीय मंत्री ने दिये। इसके अलावा उन्होंने चिंतन शिविर में शैक्षिक कैलेंडर, परीक्षा कैलेंडर, रोवर रेंजर, एनएसएस एवं एनसीसी सहित गैप एनालिसिस के लिये समितियों के गठन के निर्देश भी दिये। डॉ0 रावत ने बताया कि विज्ञान विषयों की फैकल्टियों को शीघ्र ही राष्ट्रीय विज्ञान संस्थान बंगलुरू में प्रशिक्षण के लिये भेजा जायेगा जबकि राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को मैनेजमेंट ट्रेनिंग के लिये दो चरणों में आईआईएम काशीपुर में भेजा जायेगा। विभागीय मंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्रत्येक वर्ष अंतर विश्वविद्यालय खेलकूद एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जायेंगी ताकि छात्र-छात्राओं को शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिल सके। इसके अलावा एक भारत-श्रेष्ठ भारत योजना के तहत राज्य के छात्र-छात्राओं के देश के दूसरे राज्यों में शैक्षिक भ्रमण पर भेजा जायेगा। चिंतन शिविर में विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने उच्च शिक्षा के उन्नयन को लेकर अपने-अपने सुझाव रखे। उच्च शिक्षा सचिव शैलेश बगोली ने ऑनलाइन पाठ्यक्रम, ई-ग्रंथालय के उपयोग, एनईपी के तहत कौशल विकास, क्वालिटी रिसर्च और छात्र-छात्रओं एवं शिक्षकों की उपस्थिति पर प्रकाश डाला। उच्च शिक्षा निदेशक प्रो0 जगदीश प्रसाद एवं कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो0 एन.के. जोशी ने दूरस्त क्षेत्रों में मॉडल कॉलज बनाने, सोशल सर्विसेज पर अपना मत रखा। संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा प्रो0 ए0एस0 उनियाल ने चिंतन शिविर में आये सभी अतिथियों एवं शिक्षाविदों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक उच्च शिक्षा डॉ0 दीपक पाण्डेय ने किया। चिंतन शिविर में विभागीय मंत्री ने डॉ0 दीपक कुमार की पुस्तक डिजास्टर मैनेजमेंट प्रिंसिपल्स एंड प्रक्टिस का भी विमोचन किया।