सीएस की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में व्यय-वित्त समिति की बैठक आयोजित हुई। व्यय-वित्त समिति की बैठक के दौरान ऋषिकेश में जानकी सेतु के पास राफ्टिंग मैनेजमेंट सेंटर के निर्माण कार्य एवं डोईवाला-दूधली मोटर मार्ग के डबललेन कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने राफ्टिंग मैनेजमेंट सेंटर के डिजाइन में पहाड़ी संस्कृति और ग्रीन बिल्डिंग को शामिल किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि राफ्टिंग मैनेजमेंट सेंटर को सेल्फ सस्टेनेबल बनाया जाए ताकि इसके संचालन एवं रखरखाव के लिए फंड्स की व्यवस्था होती रहे।

बैठक के दौरान बताया गया कि राफ्टिंग मैनेजमेंट सेंटर निर्माण की कुल लागत 4404.27 लाख है। इसके निर्माण के बाद राफ्टिंग पॉइन्ट्स पर ड्रोन एवं सीसीटीवी कैमरों से लाइव वीडियो मॉनिटरिंग के साथ ही परमिट, समय-सारणी और क्राउड कंट्रोल जैसे कार्य किए जाएंगे। बैठक में 1306.64 लाख की लागत के डोईवाला-दूधली मोटर मार्ग के डबललेन कार्य को भी स्वीकृति प्रदान की गयी।

इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय एवं श्रीधर बाबू अद्दांकी सहित अन्य विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड में सामाजिक विकास के क्षेत्रों में कार्य के लिए किया गया समझौता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उपस्थिति में सचिवालय में तीन महत्वपूर्ण समझौते किये गये। उत्तराखंड सरकार, सेतु आयोग और टाटा ट्रस्ट ने सामाजिक विकास के क्षेत्रों में कार्य के लिए समझौता किया गया। उत्तराखंड को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत का प्रमुख कौशल केंद्र बनाने की दिशा में सेतु आयोग, उच्च शिक्षा विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग और नैस्कॉम/आईटी-आईटीईएस सेक्टर स्किल काउंसिल के बीच त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। राज्य को उभरती टेक्नोलॉजी और छात्रों के रोजगार परक व्यक्तित्व विकास के लिए कौशल विकास केंद्र बनाने के लिए भी सेतु आयोग, उच्च शिक्षा विभाग और वाधवानी फाउंडेशन के बीच त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

उत्तराखंड में सामाजिक और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए टाटा ट्रस्ट के साथ 10 साल के लिए किए गए समझौते के तहत जल प्रबंधन, पोषण, टेलीमेडिसिन, ग्रामीण आजीविका और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम किया जाएगा।

उत्तराखंड को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में प्रमुख कौशल केंद्र बनाने के लिए नैस्कॉम के साथ हुए समझौते के तहत राज्य के सभी सरकारी और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में कोर्सेस को शैक्षणिक क्रेडिट के साथ शामिल किया जाएगा और प्रत्येक जिले में एक मॉडल कॉलेज को ‘मेंटर संस्थान’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य राज्य के लगभग 1.5 लाख छात्रों को फ्यूचर स्किल्स प्राइम प्लेटफॉर्म के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, पायथन, जनरेटिव जैसे क्षेत्रों में जानकारी और कौशल विकास करना है।

उत्तराखंड को उभरती टेक्नोलॉजी और छात्रों के रोजगार परक व्यक्तित्व विकास के लिए कौशल विकास केंद्र बनाने हेतु वाधवानी फाउंडेशन के साथ तीन वर्षों के लिए किये गये समझौते के तहत राज्य के सभी सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में कोर्सेस को अगले सत्र से शैक्षणिक क्रेडिट के साथ शामिल किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य राज्य के लगभग 1.20 लाख छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित व्यक्तित्व विकास और स्वरोजगार सम्बंधित कौशल विकास में सहायता प्रदान करना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सामाजिक विकास, राज्य को डिजिटल टैलेंट का केंद्र बनाने और एआई आधारित व्यक्तित्व विकास के आधुनिक कोर्स प्रारंभ करने के लिए आज हुए तीनों समझौते राज्य के लोगों के लिए अत्यधिक उपयोगी होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को हर क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा समाज के अंतिम छोर के लोगों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। राज्य के समग्र विकास के लिए हर क्षेत्र और वर्ग के लोगों को साथ लेकर अनेक नई पहल की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये समझौते उत्तराखण्ड में आधुनिक कौशल से परिपूर्ण मानव संसाधन को तैयार करने और राज्य को आधुनिक एआई व साइबर सिक्योरिटी हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एआई अधारित पाठ्यक्रम उत्तराखंड को युवा छात्रों को रोजगार परक कौशल बढ़ाने और 21वीं सदी के लिए सॉफ्ट स्किल विकास की दिशा में कारगर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने राज्य में किये गये इन तीन महत्वपूर्ण समझौतों के लिए टाटा ट्रस्ट, नैस्कॉम और वाधवानी फाउन्डेशन का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राज शेखर जोशी, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सीईओ सेतु आयोग शत्रुघ्न सिंह, टाटा ट्रस्ट के सीईओ सिद्धार्थ शर्मा, नैस्कॉम स्किल काउंसिल की सीईओ अभिलाषा गौड़, वाधवानी फाउन्डेशन के एक्जीक्यूटिव वीपी सुनील दहिया, उच्च शिक्षा सचिव रंजीत सिन्हा, सचिव राधिका झा, नितेश झा, चन्द्रेश यादव, वी षणमुगम, सी. रविशंकर उपस्थित थे।

हरेला जैसे पर्व प्रकृति से जुडने की हमारे पूर्वजों की दूरगामी सोच का ही परिणामः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति संकल्पबद्ध होकर कार्य करने का आह्वान किया है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें एकजुट होकर प्रकृति के संरक्षण की दिशा में भी चिन्तन करना होगा। पर्यावरण संरक्षण को जीवन से जुड़ा विषय बताते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण उत्तराखण्डवासियों के स्वभाव में है। हरेला जैसे पर्व प्रकृति से जुडने की हमारे पूर्वजों की दूरगामी सोच का ही परिणाम है। पर्यावरण संरक्षण में उत्तराखण्ड़वासियों की अग्रणी भूमिका रही है। प्रदेश सरकार समृद्ध जैव संसाधनों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उत्तराखंड अपनी वन सम्पदा और नदियों के कारण पर्यावरण संरक्षण की मुहिम का ध्वजवाहक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी प्रयासों के साथ ही आम लोगों, जनप्रतिनिधियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन चेतना जागृत करने और इसके संवर्द्धन में निरंतर सक्रिय योगदान करना होगा। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक वृक्ष लगाने के साथ ही नदी और जल स्रोतों की साफ सफाई के लिए भी पूरा प्रयास जरूरी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पर्यावरण में हो रहे बदलावों, ग्लोबल वार्मिंग के साथ ही जल, जंगल, जमीन से जुड़े विषयों पर समेकित चिंतन की भी जरूरत बतायी है। सामाजिक चेतना तथा समेकित सामूहिक प्रयासों से ही हम इस समस्या के समाधान में सहयोगी बन सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण दिवस के उपलक्ष में प्रदेशभर में संचालित पौधारोपण एवं स्वच्छता अभियान में सभी लोगों से बढ़चढ़ कर प्रतिभाग करने की अपील करते हुए एक पेड़ माँ के नाम अभियान को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने और उत्तराखण्ड को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया है।

उत्तराखंड में शहरी स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने को सेतु आयोग ने सौंपी मुख्यमंत्री को रिपोर्ट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सचिवालय में सेतु आयोग ने नगर निकायों के सशक्तिकरण की दिशा में गहन विश्लेषण आधारित रिपोर्ट सौंपी। सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राज शेखर जोशी ने रिपोर्ट सौंपते हुए कहा कि नगर निगम और निकायों को स्वावलंबी और सशक्त बनाने, प्रदेश के शहरी विकास और नगरों की समस्याओं को सुधारने की दिशा में सुझाव दिये गये हैं। रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वित्तीय स्वायत्तता और राजस्व जुटाने की क्षमता बढ़ाना और भारतीय संविधान की 12वीं अनुसूची में शामिल 18 कार्यों (जैसे जल आपूर्ति, सार्वजनिक स्वास्थ्य, शहरी नियोजन) को निकायों को हस्तांतरित करना है।

रिपोर्ट में तकनीकी नवाचार के लिए स्मार्ट गवर्नेंस, जीआईएस मैपिंग और डेटा-आधारित निर्णय लेने को बढ़ावा देना है। निकायों के कर्मचारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उड़ीसा आदि राज्यों में इस दिशा में किए गए सुधारों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई है। देश के सफल शहरी निकायों के मॉडलों को उत्तराखंड की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी रूप से ढ़ाले जाने के लिए भी सुझाव दिये गये हैं। रिपोर्ट में आपदा-रोधी योजना, भूस्खलन प्रबंध नियोजन में आम लोगों की राय को प्राथमिकता देने का भी जिक्र किया गया है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सेतु आयोग सीईओ शत्रुघ्न सिंह, सचिव शहरी विकास सचिव नितेश झा, राधिका झा, चंद्रेश यादव, सेतु आयोग से डॉ. भावना शिंदे, डॉ. प्रिया भारद्वाज, अंकित कुमार एवं शहजाद अहमद मलिक उपस्थित थे।

आपदा से क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों के पुनर्निर्माण के निर्णय का शासनादेश जारी

राज्य में आपदा से क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों की मरम्मत/पुनर्निर्माण तथा तात्कालिक दृष्टि से जन सुविधा बहाल किये जाने हेतु राज्य आपदा मोचन निधि एसडीआरएफ द्वारा निर्धारित मानकों से आच्छादित कार्यों की स्वीकृतियों हेतु जिलाधिकारियों/मण्डलायुक्तों के वित्तीय/प्रशासनिक अधिकार की सीमा बढ़ाये जाने के सम्बन्ध में पूर्व में कैबिनेट द्वारा लिए गये निर्णय के अनुपालन से संबंधित शासनादेश जारी कर दिया गया है।

सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन द्वारा मण्डलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों को जारी शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि अब राज्य में आपदा से क्षतिग्रस्त सम्पतियों के मरम्मत व पुनर्निर्माण आदि के लिए जिलाधिकारी को रू0 20.00 लाख से रू0 1.00 करोड़ तक तथा मण्डलायुक्तों को रू0 20.00 लाख से रू0 50.00 लाख रू0 के स्थान पर 1.00 करोड़ से रू0 5.00 करोड़ तक के वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति के अधिकार प्रदान किये गये हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मण्डलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों को प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त सम्पतियों के पुनर्निर्माण तथा तात्कालिक दृष्टि से जन सुविधायें बहाल किये जाने हेतु उनके वित्तीय अधिकारों को संशोधित किये जाने से आपदा पीड़ितों को त्वरित राहत मिल सकेगी तथा पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लायी जा सकेगी।

उत्तराखंडः सीएम ने की घोषणा, लोक कलाकारों को मिलेगा दुर्घटना बीमा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में लोक संस्कृति के सम्वर्धन से जुड़े सांस्कृतिक दलों के लोक कलाकारों के व्यापक हित में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हेतु मार्ग दुर्घटना की स्थिति में लोक कलाकारों का दुर्घटना बीमा (इंश्योरेंस) किये जाने की घोषणा करते हुए निर्देश दिये हैं कि संस्कृति विभाग के सांस्कृतिक दलों का कार्यक्रम आवंटन एवं भुगतान संस्कृति निदेशालय से किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक संस्कृति को बढावा देने वाले हमारे संस्कृति कर्मी हमारी पंरम्परागत लोक संस्कृति, लोक संगीत एवं लोक कला को पहचान दिलाने का कार्य कर रहे हैं। राज्य सरकार सांस्कृतिक दलों से जुडे कलाकारों के हित में निरंतर कार्य कर रही है।

नगर निगम हरिद्वार भूमि घोटाला प्रकरण की होगी विजिलेंस जांच, सीएम धामी ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नगर निगम हरिद्वार में हुए जमीन घोटाले पर सख्त रुख अपनाते हुए, दो आईएएस, एक पीसीएस अधिकारी सहित सात अधिकारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए हैं, इस मामले में तीन अधिकारी पूर्व में निलंबित हो चुके हैं, जबकि दो की पूर्व में सेवा समाप्त की जा चुकी है। इस तरह इस प्रकरण में अब तक 10 अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं।

हरिद्वार नगर निगम द्यारा ग्राम सराय में कूड़े के ढेर के पास स्थित अनुपयुक्त 2.3070 हैक्टेयर भूमि को करोड़ों रुपये में खरीदने पर सवाल उठने के बाद, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रकरण की जांच के आदेश दिए थे। जिसके बाद सचिव रणवीर सिंह चौहान ने मामले की प्रारंभिक जांच कर, रिपोर्ट 29 मई को ही शासन को सौंपी थी। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री ने कार्मिक विभाग को दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जिस पर कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने मंगलवार को सभी सात आरोपित अधिकारियों को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद, कार्मिक विभाग ने मंगलवार को हरिद्वार नगर निगम के तत्कालीन प्रशासक और मौजूदा डीएम कर्मेंद्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, हरिद्वार के तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह, वरिष्ठ वित्त अधिकारी निकिता बिष्ट, वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक विक्की, रजिस्ट्रार कानूनगो राजेश कुमार, हरिद्वार तहसील के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कमलदास को निलंबित कर दिया है।

अब तक हुई कार्रवाई

कर्मेन्द्र सिंह – जिलाधिकारी और तत्कालीन प्रशासक नगर निगम हरिद्वार (निलंबित)
वरुण चौधरी – तत्कालीन नगर आयुक्त, नगर निगम हरिद्वार (निलंबित)
अजयवीर सिंह- तत्कालीन, उप जिलाधिकारी हरिद्वार (निलंबित)
निकिता बिष्ट – वरिष्ठ वित्त अधिकारी, नगर निगम हरिद्वार (निलंबित)
विक्की – वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक (निलंबित)
राजेश कुमार – रजिस्ट्रार कानूनगो, तहसील हरिद्वार (निलंबित)
कमलदास – मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, तहसील हरिद्वार (निलंबित)

पूर्व में हो चुकी कार्रवाई

रविंद्र कुमार दयाल- प्रभारी सहायक नगर आयुक्त (सेवा समाप्त)
आनंद सिंह मिश्रवाण- प्रभारी अधिशासी अभियंता (निलंबित)
लक्ष्मी कांत भट्ट्- कर एवं राजस्व अधीक्षक (निलंबित)
दिनेश चंद्र कांडपाल- अवर अभियंता (निलंबित)
वेदपाल- सम्पत्ति लिपिक (सेवा विस्तार समाप्त)

हमारी सरकार ने पहले ही दिन से स्पष्ट किया है कि लोकसेवा में “पद’ नहीं बल्कि ‘कर्तव्य’ और ‘जवाबदेही’ महत्वपूर्ण हैं। चाहे व्यक्ति कितना भी वरिष्ठ हो, अगर वह जनहित और नियमों की अवहेलना करेगा, तो कार्रवाई निश्चित है। हम उत्तराखंड में भ्रष्टाचार मुक्त नई कार्य संस्कृति विकसित करना चाहते हैं। सभी लोक सेवकों को इसके मानकों पर खरा उतरना होगा।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

यूनिक और प्रभावी सर्विस, वन गेटवे तथा बेहतर मार्केटिंग के जरिए बढ़ाएं इको टूरिज्मः सीएस

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में डेवलपमेंट ऑफ इको टूरिज्म की राज्य स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एच. पी. सी.) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन विभाग तथा संबंधित अधिकारियों के साथ इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के किए जा रहे प्रयासों के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में मुख्य सचिव ने वन विभाग को निर्देशित किया कि पूरे राज्य में जबरखेत मॉडल आधारित बड़े इको टूरिज्म डेस्टिनेशन डेवलप करें। इको टूरिज्म का एक बहुत बड़ा डेस्टिनेशन हो जिसके चारों ओर छोटे-छोटे डिस्टेंस पर फॉरेस्ट टूरिज्म से संबंधित छोटे-छोटे फॉरेस्ट टूरिस्ट स्टेशन हो। जहां पर इको टूरिज्म से संबंधित विविध प्रकार की एक्टिविटी (फॉरेस्ट ट्रैकिंग, बर्ड वाचिंग, वाइल्डलाइफ सफारी, हेरिटेज ट्रेल, इको कैंपिंग, नेचर एडवेंचर, नेचर गार्डन इत्यादि) मौजूद हो। इसको एक पूरे पैकेज की भांति डेवलप करें। इस बात का भी होमवर्क करें कि इसका बेहतर संचालन कैसे संभव हो अर्थात डेस्टिनेशन के डेवलपमेंट से लेकर, उसकी मार्केटिंग और उसका प्रभावी संचालन कैसे हो इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए कार्य करें।

यूनिक और स्मूथ सर्विस तथा वन गेटवे और बेहतर मार्केटिंग से इको टूरिज्म को बनाएं प्रभावी

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि शुरुआती चरण में 20 से 25 ऐसे इको टूरिज्म डेस्टिनेशन डेवलप करें जिनको डेवलप करना आसान हो और जहां पर डेवलप होने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हो। उन्होंने निर्देशित किया कि इस बात की भी संभावनाएं तलाशें कि जो डेस्टिनेशन पहले से ही मौजूद हैं अथवा जिनको विकसित किया जा रहा है उनमें और अधिक वैल्यू एडिंग क्या की जा सकती है ताकि उसको और अधिक आकर्षक बनाया जा सके। बड़े और छोटे दोनों तरह के डेस्टिनेशन डेवलप करें।

उन्होंने कहा कि नंदा देवी पिक जो की 80 के दशक से बंद है वहां पर किस प्रकार से पुनः इको टूरिज्म की संभावना है तलाशी जा सकती हैं इसकी भी स्टडी करें।

मुख्य सचिव ने वन विभाग को निर्देशित किया कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों (वन एवं वन्य जीवों) का संरक्षण करते हुए स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दें।

इस दौरान बैठक में सचिव वन सी रवि शंकर, पीसीसीएफ धनंजय मोहन, मुख्य वन संरक्षक राहुल, अपर सचिव पर्यटन डॉ पूजा गर्ब्याल, अपर सचिव वन विनीत कुमार, सीसीएफ इको टूरिज्म पी के पात्रों सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
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गैर प्रकाष्ठ वन उपज का विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म प्रोजेक्ट की समीक्षा की

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में गैर प्रकाष्ठ वन उपज का विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म प्रोजेक्ट के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
मुख्य सचिव ने वन विभाग को प्रदेश में जड़ी- बूटी के विकास और संरक्षण से संबंधित वन विभाग द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी लेते हुए निर्देशित किया कि स्थानीय समुदायों और वन पंचायतों को जड़ी बूटी रोपण, इको टूरिज्म एवं मूल्य संवर्धन गतिविधियों के माध्यम से सशक्त बनाएं। उन्होंने जड़ी बूटी के विकास के माध्यम से आजीविका सृजन, कौशल विकास एवं स्थानीय आर्थिक व बुनियादी ढांचे में सुधार करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि कलस्टर लेवल फेडरेशन (स्थानीय वन पंचायत) के समन्वय से जड़ी बूटी उत्पादन के प्रोजेक्ट को इंप्लीमेंट करें।
निर्देशित किया कि प्रोजेक्ट के अंतर्गत जितनी वन पंचायतों को चिन्हित किया जा चुका है वहां पर कार्यों की प्रगति तेजी से बढ़ाएं।
इस दौरान वन विभाग ने अवगत कराया की गैर प्रकाष्ठ वन उपज का विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म प्रोजेक्ट की समय अवधि 10 वर्ष की है। इसका प्रथम चरण 2024 से 2029 तक तथा द्वितीय चरण 2028 से 2033 तक का है। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 628 करोड रुपए है तथा यह प्रोजेक्ट जनपद हरिद्वार एवं उधम सिंह नगर को छोड़कर राज्य के 11 जनपदों में इंप्लीमेंट किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 5000 वन पंचायतें लाभान्वित होंगी। इसके तहत 5000 हेक्टेयर वन पंचायत की भूमि पर तथा 5000 हेक्टेयर निजी भूमि पर जड़ी बूटी का वनीकरण किया जाना है।

गत 11 वर्ष भारत के आत्मगौरव, स्वाभिमान और राष्ट्रीयता की भावना के पुनर्जागरण का ऐतिहासिक कालः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “मोदी सरकार के 11 वर्ष-संकल्प से सिद्धि तक” कार्यक्रम में आज मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअल प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आगामी 9 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के संकल्प के 11 स्वर्णिम वर्ष पूर्ण करने जा रहे हैं। 11 वर्षों का यह युग परिवर्तनकारी कालखंड भारत के आत्मगौरव, स्वाभिमान और राष्ट्रीयता की भावना के पुनर्जागरण का ऐतिहासिक काल रहा है जिसमें हमारा देश वैश्विक मंच पर एक सशक्त, सक्षम और समर्थ राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 से प्रारंभ हुई ये यात्रा भारतीय जनमानस की आकांक्षाओं को यथार्थ में बदलने की यात्रा रही। इस यात्रा में प्रधानमंत्री ने ‘‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’’ के मूल मंत्र के साथ राष्ट्रप्रथम की भावना को आत्मसात करते हुए राष्ट्र के नव निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। इन 11 वर्षों में प्रधानमंत्री जी ने शासन व्यवस्था को न केवल नई कार्य संस्कृति से समृद्ध किया, बल्कि नीतियों को निर्णायक बनाकर सही नीयत और नतीजों से विकास के नए आयाम स्थापित किए।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री की दूरगामी सोच और मजबूत नेतृत्व का ही परिणाम है कि आज भारत जी-20, क्वाड और ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। 2014 से पूर्व भारत का कोई भी बड़ा शहर आतंकवाद के साए से सुरक्षित नहीं था, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे, जयपुर सहित देश के हर कोने में लगातार आतंकी हमले किए जाते थे। परंतु आज दुश्मन देश के किसी भी आतंकी हमले का मुँहतोड़ जवाब दिया जाता है। जैसे उरी हमले का जवाब सर्जिकल स्ट्राइक से दिया गया, पुलवामा के बाद एयर स्ट्राइक की गई और अब पहलगाम हमले के बाद ‘‘ऑपरेशन सिंदूर’’ के माध्यम से दुश्मन के दांत खट्टे किए द्य आज मोदी सरकार में न केवल भारत की सीमाएं सुरक्षित हुई है बल्कि रक्षा के क्षेत्र में भी देश आत्मनिर्भर बन रहा है। आज भारत 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी रक्षा संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा है और 85 से अधिक देशों में रक्षा सामग्री का निर्यात भी कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी के लिए ये गर्व का विषय है कि आज भारत 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था बनकर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हो चुका है। आज ‘‘वोकल फॉर लोकल’’, ‘‘मेक इन इंडिया’’, ‘‘स्किल इंडिया’’ और ‘‘स्टार्टअप इंडिया’’ जैसी पहलों के माध्यम से देश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम वाला देश भी बन गया है। बीते 11 वर्षों में देश ने ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर रेवोल्यूशन’ का अभूतपूर्व दौर भी देखा है। आज भारत के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, हाईस्पीड ट्रेन नेटवर्क, मेट्रो रेल नेटवर्क, विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे और रोड नेटवर्क को देखकर दुनिया का प्रत्येक देश चकित है। इन 11 वर्षों में मोदी के मजबूत नेतृत्व में जहां कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति, अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण, ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथा का अंत, नागरिकता संशोधन कानून और वफ़्क़ संशोधन अधिनियम जैसे कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। वहीं जीएसटी का क्रियान्वयन, नए संसद भवन का निर्माण कर सेंगोल की स्थापना, भारत मंडपम और प्रधानमंत्री संग्रहालय का निर्माण, नारी शक्ति वंदन अधिनियम व भारतीय न्याय संहिता लागू करने जैसे कई ऐतिहासिक कार्य भी किए गए। आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश के अंतिम पंक्ति पर खड़े व्यक्ति के कल्याण के लिए शुरू की गई जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और मुफ्त राशन योजना जैसी अनेकों जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ देश के करोड़ों नागरिकों को मिल रहा है। प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में बीते 11 वर्षों में भारत ने कोरोना वैक्सीन के निर्माण सहित चंद्रयान-3, आदित्य स्1, गगनयान मिशन जैसी अभूतपूर्व उपलब्धियों के माध्यम से विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भी नए-नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज उत्तराखंड में भी विकास की गंगा बह रही है। दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड, ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, केदारनाथ-बद्रीनाथ मास्टर प्लान और भारतमाला- पर्वतमाला जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं इसके कुछ उदाहरण हैं।

इस वर्चुअल कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, संगठन महामंत्री अजेय कुमार सभी सांसद, विधायक, समस्त महापौरगण, जिला पंचायत अध्यक्ष तथा सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

शहीद सैनिकों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि अब होगी 50 लाख, शासनादेश जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा कारगिल विजय दिवस के अवसर पर प्रदेश में शहीद सैनिकों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख किये जाने की घोषणा की गई थी। मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुपालन से संबंधित शासनादेश सोमवार को जारी कर दिया गया है। सैनिक कल्याण अनुभाग के स्तर से जारी शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के क्रम में यह धनराशि शहीद आश्रितों को 26 जुलाई, 2024 से अनुमन्य की जायेगी। इस प्रकार प्रदेश में अब शहीद सैनिकों के आश्रितों को 50 लाख की अनुग्रह राशि अनुमन्य होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि उत्तराखण्ड देवभूमि के साथ वीर भूमि भी है। हमारे वीर जवानों ने देश की सीमाओं की सुरक्षा में अपने अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सैनिकों के हित में भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा रहे हैं। वन रैंक-वन पेंशन, नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण, रक्षा बजट में वृद्धि के साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध है। शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए किया गया है। सेना में परमवीर चक्र से लेकर मेन्सन इन डिस्पैच तक सभी वीरता पुरस्कारों से अंलकृत सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त तथा वार्षिकी राशि में भी वृद्धि की गई है। बलिदानियों के परिवार के एक सदस्य को राज्य की सरकारी नौकरी में समायोजित करने का भी निर्णय लिया गया है।