अतिरिक्त मजदूर लगाकर यात्रा से पहले पूरे करें सभी अनिवार्य कार्यः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव उत्तराखण्ड राधा रतूड़ी ने श्री केदारनाथ धाम पहुँचकर पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यों का जायजा लेते हुए समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न निर्माण एवं पुनर्निर्माण कार्यों की रफ्तार बढ़ाते हुए 10 मई को श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले सभी अनिवार्य कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके लिए अतिरिक्त मजदूर एवं संसाधन इस्तेमाल करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की समस्या न हो इसका विशेष ध्यान रखा जाए।

एक दिवसीय केदारनाथ भ्रमण पर मुख्य सचिव उत्तराखण्ड, पर्यटन विभाग उत्तराखंड सरकार के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) भास्कर खुल्बे, डीजीपी अभिनव कुमार, पर्यटन सचिव सचिन कुर्वे करीब 07ः45 बजे हेलिकॉप्टर से केदारनाथ हैलीपैड पर पहुचें। उन्होंने जिलाधिकारी एवं लोनिवि के अधिकारियों से वर्तमान में गतिमान पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यों की जानकारी ली। जिसके बाद मंदाकिनी- सरस्वती घाट, गेस्ट हाउस, अस्पताल, आस्था पथ, केदारनाथ मंदिर परिसर सहित अन्य निर्माणाधीन कार्यों का जायजा लेते हुए तय डेडलाइन से पहले सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। आस्था पथ एवं वाटर एटीएम सहित अन्य अनिवार्य कार्यों पर अतिरिक्त लेबर लगाने के निर्देश संबंधित विभागों को देते हुए यात्रा शुरू होने से पहले सभी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए, ताकि श्रद्धालुओं को कोई समस्या न हो। इसके साथ ही जिलाधिकारी को अधिक संसाधनों का प्रयोग करते हुए निर्माण कार्यों में तेजी लाते हुए गोल चबूतरे से मंदिर परिसर तक कॉरिडोर का कार्य तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसियों को निर्माण कार्यों में इस्तेमाल हो रही सामाग्री में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखने के निर्देश भी दिए। इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधाओं का ध्यान रखने एवं यात्रा सुगम- सुव्यवस्थित बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने को भी कहा। करीब 10ः30 बजे मुख्य सचिव हैलीपैड से बदरीनाथ के लिए रवाना हुई।

इस दौरान मुख्य सचिव, भास्कर खुल्बे, डीजीपी अभिनव कुमार एवं जिलाधिकारी सौरभ गहरवार ने स्थानीय व्यापारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं भी सुनी। व्यापरियों से वार्ता करते हुए अधिकारियों ने उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

डीजीपी अभिनव कुमार ने पुलिस विभाग के लिए केदारनाथ में तैयार हो रहे भवन एवं व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए संबंधित संस्थाओं को निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए समय से सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

इस अवसर परअधीक्षण अभियंता आठवां वृत्त लोनिवि टिहरी मुकेश परमार, डीडीएमए विनय झिंक्वाण, सहायक अभियंता लोनिवि राजविंद्र सिंह, मनीष, अजय थपलियाल सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

राज्य के प्राकृतिक स्त्रोतों के पुनर्जीवीकरण के लिए जिलाधिकारियों को एक सप्ताह की डेडलाइन

उत्तराखण्ड में जलस्रोतों, धाराओं व नदियों के पुनर्जीवीकरण के सम्बन्ध में जिलों से एक्शन प्लान प्राप्त ना होने पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इस सम्बन्ध में जिलाधिकारियों को एक सप्ताह की डेडलाइन दी है। विषय की गम्भीरता को देखते हुए सीएस ने जिलाधिकारियों को इस कार्य हेतु जिलें में तत्काल एक पूर्णकालिक समर्पित जलागम नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को तत्काल तीन दिन के भीतर जिला स्तरीय Spring and river rejuvenation authority (SARRA) की बैठक लेने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को इस अभियान से प्रमुखता से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। सीएस ने अपर मुख्य सचिव वित्त को निर्देश दिए कि विभिन्न माध्यमों जैसे मनेरगा, नाबार्ड, कैम्पा, पीएमकेएसवाई से जलस्रोतों व नदियों के पुनर्जीवीकरण हेतु फण्डिंग यूटिलाइजेशन के सम्बन्ध में बैठक करने हेतु पत्र जारी किया जाए। मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने बुधवार को सचिवालय में आयोजित बैठक में सम्बन्धित अधिकारियों को राज्य के जलस्रोतों, नदियों, सहायक नदियों, धाराओं के पुनर्जीवीकरण हेतु जिलावार योजना के स्थान पर Holistic and Integrated पर कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य में जल संरक्षण के सम्बन्ध में आज की महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जिलाधिकारियों को जल संरक्षण अभियान 2024 के तहत प्रत्येक ब्लॉक में 10 Critical सूख रहे स्प्रिंग तथा जिलें में 20 Critical सूख रहे जलधाराओं/सहायक नदियों के चिन्हीकरण के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रत्येक जिले में दीर्घ अवधि के योजना के तहत एक नदी के पुनर्जीवीकरण की योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने मैदानी जिलों में सूख चुके तालाबों के चिन्हीकरण एवं पुनर्जीवीकरण के एक्शन प्लान पर भी कार्य के करने के निर्देश दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि जल संरक्षण अभियान 2024 के तहत ग्राम स्तर पर जल संरक्षण कार्य हेतु लक्ष्यों के अंतर्गत बताया गया है कि प्रायः पर्वतीय ग्रामों में 2 से 3 जल स्रोत उपलब्ध होते हैं। इन जल स्रोतों के पुनरुद्धार को लक्षित करते हुए इन स्रोतों के जल संभरण क्षेत्रों में कन्टूर ट्रेचेंज एवं रिचार्ज पिट्स निर्मित किये जा सकते हैं। मैदानी ग्रामों में कच्चे तालाब, चैक डैम एवं रिचार्ज पिट्स के माध्यम से भू-जल रिचार्ज किया जा सकता है। ग्रामों के समीप वन क्षेत्रों एवं चारागाह क्षेत्रों में चाल-खाल का निर्माण किया जा सकता है।

इसके साथ ही जल संरक्षण अभियान 2024 के तहत विकासखंड स्तर पर Critical जल स्रोतों के उपचार का लक्षयों में बताया गया है कि Critical जल स्रोतों के चिन्हीकरण हेतु पेयजल विभाग एवं जल संस्थान द्वारा चिन्हित ऐसी पेयजल योजनाएं जिसमें जल का प्रवाह अत्यधिक कमी दृष्टिगत हो रही है, के उपचार की योजना निर्माण कर क्रियान्वयन की कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है। केंद्रीय भू-जल बोर्ड द्वारा चिन्हित 4 मैदानी जनपदों में चिन्हित Aquifer के रिचार्ज क्षेत्रों में योजना निर्माण कर क्रियान्वयन की कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है। पेयजल विभाग एवं जल संस्थान विभाग द्वारा 145 Critical जल स्रोत उपचार हेतु चिन्हित किये गये हैं।

जल संरक्षण अभियान 2024 के तहत जनपद स्तर पर सहायक नदियों और धाराओं के उपचार का लक्षयो के तहत बताया गया है कि पेयजल एवं जल संस्थान विभाग द्वारा निर्मित कई पेयजल योजनाएं जोकि वर्षा आधारित सहायक नदियों/गधेरों पर निर्भर है, इनके जीर्णोद्धार की योजना प्राथमिकता के आधार पर निर्मित कर गतिविधियां प्रारंभ की सकती हैं। सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित विभिन्न सिंचाई योजनाएं सहायक नदियों / धाराओं पर आधारित संभरण क्षेत्रों को चिन्हित कर योजना बनाकर गतिविधियां प्रारंभ की जा सकती हैं। उपरोक्त योजनाओं का यदि संभरण क्षेत्र आरक्षित वन में हैं, ऐसी स्थिति में वन विभाग से अर्न्त-विभागीय समन्वय स्थापित करते हुए कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है । पेयजल विभाग/जल संस्थान विभाग द्वारा 412 सहायक नदियां/धाराएं एवं 6 नदियां उपचार हेतु चिन्हित की गई हैं।

बैठक में अपर मुख्य सचिव आनंदवर्धन, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी मौजूद रहे।

10वीं और 12वीं के उत्तराखंड बोर्ड का परिणाम जारी, इन होनहारों ने किया टॉप

उत्तराखंड बोर्ड के 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए अच्छी खबर है। आज उनके रिजल्ट का इंतजार खत्म हो गया है। यूके बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट घोषित हो चुका है। टॉपर्स के नाम घोषित किए जा चुके हैं। हाईस्कूल का परिणाम 89.14 फीसदी रहा है। इंटरमीडिएट में कुल 82.63 प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा है। इंटरमीडिएट की परीक्षा में अल्मोड़ा के पीयूष कोहलिया ने पहले स्थान पर बाजी मारी। वहीं, दूसरे स्थान पर रुद्रप्रयाग के अंशुल नेगी ने दूसरा व ऋषिकेश के हरीश चंद्र बिजल्वाण ने तीसरा स्थान पाया।

हाईस्कूल में प्रियांशी रावत ने किया टॉप

उत्तराखंड बोर्ड कक्षा 10 और 12 के नतीजे घोषित हो गया है। हाईस्कूल का परिणाम 89.14 फीसदी रहा है। प्रियांशी रावत ने 500 में से 500 अंक प्राप्त कर टॉप किया है। यह पिथौरागढ़ की छात्रा है। वहीं शिवम मलेथा ने लड़कों में किया टॉप शिवम को 99.60 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं।।

उत्तराखंड बोर्ड का 12वीं का रिजल्ट जानने के लिए आपको न्ज्ञ12 (तवसस दनउइमत) टाइप करके उसे भी 56767450 पर भेजना होगा। इसके बाद 12वीं का परिणाम भी आपके नंबर पर आ जाएगा। इसके अलावा छात्र उत्तराखंड बोर्ड की अधिकारी वेबसाइट नइेम.ना.हवअ.पद या नंतमेनसजे.दपब.पद पर भी अपना रिजल्ट देख सकते हैं। यहां आपको मार्कशीट स्क्रीन पर दिखाई दे जाएगी। जिसे आप डाउनलोड भी कर सकते हैं।

इस साल उत्तराखंड बोर्ड में हाईस्कूल में एक लाख 15 हजार 606 छात्रों ने परीक्षा दी है, तो वहीं इंटरमीडिएट में 94 हजार 748 छात्र शामिल हुए थे। उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाएं 27 फरवरी को शुरू होकर 16 मार्च तक चली थी।

स्वास्थ्य सचिव ने डेंगू और चिकनगुनिया को लेकर सभी जिलों के डीएम, सीएमओ व नगर निगम को जारी किए कड़े निर्देश

राज्य में डेंगू व चिकनगुनिया के मरीजों को देखते हुए उनकी रोकथाम व उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को गाइडलाइन जारी की है। जिलाधिकारियों व सीएमओ को 20 बीस महत्वपूर्ण बिंदुओं की गाइडलाइंस जारी की गई है। सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार लगातार डेंगू व चिकनगुनिया रोकथाम के लिए लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझाव पर स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू व चिकनगुनिया मरीजों के उपचार व रोकथाम के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा विगत वर्षों से डेंगू व चिकनगुनिया रोग राज्य में एक प्रमुख जन स्वास्थ्य समस्या के रूप में परिलक्षित हो रहा है। डेंगू एवं चिकनगुनिया रोग का वेक्टर एडिज मच्छर है। जुलाई से नवम्बर माह तक का समय डेंगू वायरस के संक्रमण के लिये अनुकूल होता है। डेंगू एवं चिकनगुनिया रोग एक मच्छर जनित रोग है जो कि कूलर, फूलदान, गमले, खुली पानी की टंकी, पुराने टायर, एकत्रित कबाड, इत्यादि में जमा पानी में पैदा होते हैं। डेंगू रोग के रोकथाम के लिए जन सहभागिता अत्यन्त आवश्यक है। स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा डेंगू एवं चिकनगुनिया रोग की समुचित रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु अन्य समस्त विभागों की भी महत्वपूर्ण भागीदारी होती है। समस्त विभागों द्वारा डेंगू रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु उनके द्वारा की जाने वाली गतिविधियां समयान्तर्गत की जायें। डेंगू मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए की जाने वाली समस्त गतिविधियां समस्त विभाग निरन्तर करते रहें ताकि डेंगू के मच्छर को पनपने से रोका जा सकें और इसकी सूचना जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा निरन्तर प्राप्त की जाए। स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा डेंगू एवं चिकनगुनिया रोग पर रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु ब्लाक वार Micro Plan बनाकर कार्यवाहिया करना सुनिश्चित करे व उक्त माइक्रोप्लान राज्य एन०वी०बी०डी०सी०पी० यूनिट को प्रेषित किये जायें। नगर निगमों द्वारा स्वच्छता अभियान चलाया जाये ताकि डेंगू रोग के मच्छरों को पनपने से रोका जा सके।

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा डेंगू एवं चिकनगुनिया रोग की समुचित रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु अन्य समस्त विभागों की भी महत्वपूर्ण भागीदारी होती है। समस्त विभागों द्वारा डेंगू रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु उनके द्वारा की जाने वाली गतिविधियां समयान्तर्गत की जायें।

1. डेंगू मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए की जाने वाली समस्त गतिविधियां समस्त विभाग निरन्तर करते रहें ताकि डेंगू के मच्छर को पनपने से रोका जा सकें और इसकी सूचना जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा निरन्तर प्राप्त की जाए।

2. डेंगू एवं चिकनगुनिया रोग पर रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु ब्लाक वार Micro Plan बनाकर कार्यवाहिया करना सुनिश्चित करे व उक्त माइक्रोप्लान राज्य एन०वी०बी०डी०सी०पी० यूनिट को प्रेषित किये जायें।
3. नगर निगमों द्वारा स्वच्छता अभियान चलाया जाये ताकि डेंगू रोग के मच्छरों को पनपने से रोका जा सके।

4. डेंगू एवं चिकनगुनिया रोग पर नियंत्रण हेतु लार्वा निरोधात्मक कार्यवाहियां (सोर्स रिडक्शन) एक कारगर व उपयुक्त उपाय है, जिसके लिए नगर निगम/नगर पालिका आशा कार्यकत्री व अन्य विभागों के सहयोग से टीमें बनाकर क्षेत्र में कार्यवाही की जाए।

5. डेंगू एवं चिकनगुनिया रोग को महामारी का रूप लेने से रोकने के लिए नगर निगम/नगर निकाय द्वारा आवश्यकतानुसार फॉगिग की जाये।
6. जनजागरूकता व जनसहभागिता हेतु आई०ई०सी० संसाधनो का समुचित्त व समयान्तर्गत उपयोग करें।

7. डेंगू एवं चिकनगुनिया रोकथाम हेतु स्वास्थ्य विभाग के साथ अन्य विभागों जैसे नगर निगम, शिक्षा विभाग, ग्राम्य एवं शहरी विकास, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, लोक निर्माण, जल संस्थान, जल निगम आदि के सहयोग व अंतर्विभागीय समन्वय हेतु जनपद स्तर पर बैठकों का समय से आयोजन किया जाए व उनके कार्यवृत्त राज्य एन०वी०बी०डी०सी०पी० यूनिट को प्रेषित किये जायें।

8. डेंगू के उपचार एवं नियंत्रण हेतु भारत सरकार की गाईडलाइन “National Guidelines for Clinical Management of Dengue fever” (संलग्न) को समस्त राजकीय एवं निजी चिकित्सालायों/चिकित्सकों को आवश्यक कार्यवाहियों हेतु उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

9. जनपदों के चिकित्सालयों (जिला/बेस व मेडिकल कालेज) में भारत सरकार की गाईडलाइनके अनुसार आवश्यक कार्यवाही जैसे पृथक डेंगू आईसोलेशन यार्डतैयार करमच्छरदानी (LLIN) युक्त पर्याप्तबेड की उपलब्धता, Standard Case Management आदि सुनिश्चित करें एवं डेंगू आइसोलेशन वार्ड के लिए नोडल अधिकारी नामित करें।

10. डेंगू एवं चिकनगुनिया रोगियों के समुचित प्रबन्धन हेतु अपने जनपद में चिकित्सा केन्द्रों को पूर्ण रूप से कार्यशील रखें व उनमें पर्याप्त स्वास्थ्य मानव संसाधन जैसे चिकित्सक, नर्स आदि की व्यवस्था सुनिश्चित रखें।

11 . डेंगू पीडित गम्भीर रोगियों (DHF/DSS) हेतु Platelets की उपलब्धता सुनिश्चित करें। 12. डेंगू जांच केन्द्रो में समय से आवश्यक सामग्री जैसे ELISA जांच किट व अन्य जांच सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये।

13. डेंगू रोगियों की शुरूआती चरण में पहचान हेतु, फीवर सर्वे किये जायें, लक्षणों के आधार पर डेंगू रोग की संदिग्धता होने पर जांच की जाये।

14. डेंगू एवं चिकनगुनिया रोगी पाये जाने की स्थिति में रोगी के घर के आस-पास लगभग 50 घरों की परिधि में आवश्यक रूप से Space/ Focal Spray कराने के साथ साथ जनपदीय आर०आर०टी० द्वारा क्षेत्र में सघन फीवर सर्विलेन्स एवंलार्वा निरोधात्मक कार्यवाहियां (सोर्स रिडक्शन) कराएँ।

15. डेंगू एवं चिकनगुनिया रोग की रोकथाम के लिए आम जनमानस का सहयोग अत्यन्त आवश्यक है व जन जागरूकता ही एक कारगर उपाय है। अतः आप अपने स्तर से प्रभावी प्रचार प्रसार करवायें। प्रचार प्रसार सामग्री की सापट प्रति संलग्न।

16. स्वास्थ्य विभाग व आई०एम०ए० प्रतिनिधियों / निजी चिकित्सालयों/पैथोलोजी लैबों के मध्य समन्वय बैठक (CME Meeting/Workshop) की जाये ताकि आमजन में डेंगू एवं चिकनगुनिया रोग के प्रति व्यापत भ्रान्ति/भय को दूर किया जा सके। दृष्टिगत जनपद स्तर पर जिला कार्ययोजना मे भी

17 . किसी भी प्रकार की आकस्मिक / आपातकालीन आवश्यकता के डेंगू के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया जाये।

18. मीडिया को डेंगू एवं चिकनगुनिया सम्बन्धित संवेदनशील सूचनायें व सकारात्मक जानकारी सम्बोधित करने हेतु जनपद स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के किसी एक अधिकारी को Media Spokes person अधिकृत किया जाये।

19. जनमानस को डेंगू सम्बन्धित जागरूकता एवं समुचित जानकारी प्रदान करने के लिये राज्य मुख्यालय पर Integrated Helpline क्रियाशील है जिसका टोल फ्री नं० 104 है। इसी प्रकार जनपद स्तर पर डेंगू के संक्रमण काल (माह जून से नवम्बर तक) के दौरान कन्ट्रोल रूम स्थापित कर उक्त दूरभाष न० से राज्य एन०वी०बी०डी०सी०पी० यूनिट को अवगत करायें।

20. डेंगू एवं चिकनगुनिया की दैनिक रिर्पोट (केस शून्य होने पर भी) संलग्न प्रारूप पर सायं 4:00 बजे तक नियमित रूप से राज्य स्तर पर E-mail- uknvbdcp@gmail.com पर भेजना सुनिश्चित करें। अतः उपरोक्तानुसार समयबद्ध कार्यवाही कर, कृत कार्यवाही से अधोहस्ताक्षरी को अवगत कराना सुनिश्चित करें।

सीएम ने वनाग्नि के लिए अधिकारियों को दिये हर समय सतर्क रहने के निर्देश, वनाधिकारियों के अवकाश पर लगाई रोक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन प्रशिक्षण अकादमी सभागार में वनाग्नि को रोकने के लिये किये जा रहे प्रयासों की गहनता से समीक्षा की। उन्होंने वनाग्नि को रोकने के लिये अधिकारियों को हर समय सतर्क रहने के निर्देश दिये है। मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिये कि जब तक वनों में लगी आग पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो जाती है तब तक वनाधिकारियों के अवकाश पर जाने पर रोक लगायी जाय। केवल गम्भीर बीमारी के मामलों में ही छूट दी जाय।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिये है कि वनाधिकारी हर समय वनाग्नि से प्रभावित क्षेत्रों में रहकर इसे नियंत्रित करने का प्रयास करें। इस कार्य में लगे अधिकारियों को अनावश्यक रूप से बैठक में प्रतिभाग हेतु देहरादून न बलाये जाने के भी निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये है। उन्होंने कहा कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए वन विभाग के अलावा अन्य विभाग भी अलर्ट मोड पर रहें। वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए सूचना तंत्र और मजबूत किया जाए। क्विक रिस्पांस टाईम कम से कम किया जाए। वनाग्नि पर प्रभावी रोकथाम के लिए स्थानीय स्तर पर लोगों का सहयोग लिया जाए।

उन्होंने कहा कि इस में सेना का भी सहयोग लिया जा रहा है। जो भी लोग वनों में आग लगाये जाने के दोषी पाये जायेंगे उनके विरूद्ध कार्यवाही किये जाने के भी निर्देश उन्होंने दिये है। मुख्यमंत्री ने लीसा डिपो के आस पास बनाग्नि के नियंत्रण पर ध्यान देने को कहा तथा फायर ब्रिगेड को भी एक्टिव करने को कहा। ताकि लीसा डिपो या अन्य संस्थानों को कोई नुकसान न हो। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने वनाग्नि से प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि सभी के प्रयासों से वनाग्नि की घटनाएं नियंत्रित हो रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बढ़ते तापमान के दृष्टिगत पेयजल की कमी को दूर करने के भी निर्देश अधिकारियों को दिये।

इस अवसर पर विधायक सरिता आर्य, आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत, जिलाधिकारी वंदना के साथ ही वन एवं पुलिस विभाग के उच्चाधिकारी एवं अन्य जन प्रतिनिधि आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से खेल के क्षेत्र में देश व प्रदेश का नाम रोशन करने का किया आह्वान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड के बहुउद्देशीय हॉल में रोल बाल फेडरेशन ऑफ़ इंडिया द्वारा आयोजित 16वीं सब जूनियर (अंडर-14) बॉयज एंड गर्ल्स नेशनल रोल बाल चौंपियनशिप में प्रतिभाग करते हुये खिलाड़ियों का उत्साहवर्द्धन किया।

मुख्यमंत्री ने इस मौक़े पर उत्तराखंड तथा हिमाचल के बीच आयोजित मैच का आनंद लिया तथा खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री ने इससे पहले सभी खिलाड़ियों का परिचय लिया तथा खेल के क्षेत्र में देश व प्रदेश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

उल्लेखनीय है कि 25 से 28 अप्रैल, 2024 तक आयोजित राष्ट्रीय स्तर की इस सब जूनियर (अंडर-14) बॉयज एंड गर्ल्स नेशनल रोल बाल चैपियनशिप में देशभर की 28 टीमें भाग ले रही हैं।

इस अवसर पर नेशनल रोल बाल चैंपियनशिप के प्रेजिडेंट पंकज भारद्वाज, सेकेट्री चिरतानजी नेगी, अमित भाटिया, आशीष नेगी, डॉ. वरुण प्रताप सिंह, प्रियांक शर्मा, प्रमोद कुमार सहित बड़ी संख्या में खेल प्रेमी मौजूद रहे।

कैलाश गहतोड़ी के स्वास्थ्य हाल की सीएम ने ली जानकारी


मुख्यमंत्री ने अध्यक्ष, उत्तराखंड वन विकास निगम कैलाश चंद्र गहतोड़ी के स्वास्थ्य की ली जानकारी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अध्यक्ष, उत्तराखंड वन विकास निगम कैलाश चंद्र गहतोड़ी से उनके यमुना कालोनी स्थित आवास पहुंच कर मुलाक़ात की तथा कुशल क्षेम पूछी। मुख्यमंत्री ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेते हुये उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उनके परिवार जनों को हर संभव सहायता का आश्वासन भी दिया।

उत्तराखंडः 26 मई को संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा

उत्तराखंड राज्य में पहली बार राज्य संयुक्त बी0एड0 प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जायेगा जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय को जिम्मेदारी दी गयी है। उत्तराखंड राज्य में उच्च शिक्षा के अन्तर्गत तीन राज्य विश्वविद्यालय जिसमें श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय टि0ग0, कुमांऊ विश्वविद्यालय, नैनीताल एवं सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा सम्मिलित हैं, की राज्य संयुक्त बी0एड0 प्रवेश परीक्षा का आयोजन श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय द्वारा किया जायेगा।

बीते दिनों श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एन0के0 जोशी की अध्यक्षता में उत्तराखंड राज्य संयुक्त बी0एड0 प्रवेश परीक्षा 2024-26 के सम्बन्ध में ऑन लाईन बैठक आयोजित की गयी। बैठक में तीनों विश्वविद्यालयों के कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, नोडल, संयुक्त बी0एड0 प्रवेश परीक्षा, विश्वविद्यालय समर्थ नोडल तथा राज्य समर्थ नोडल अधिकारी, डॉ0 शैलेन्द्र कुमार सिंह शामिल रहे। बैठक में लिये गये निर्णयों के क्रम में प्रो0 जोशी ने बताया कि उत्तराखंड राज्य विश्वविद्यालयों (श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय टि0ग0, कुमांऊ विश्वविद्यालय, नैनीताल एवं सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा) से सम्बद्ध समस्त राजकीय/अशासकीय महाविद्यालयों/स्ववित्त पोषित शिक्षण संस्थानों में सत्र 2024-26 में प्रवेश परीक्षा का आयोजन दिनांक 26 मई, 2024 (रविवार) को गढ़वाल एवं कुमांऊ मण्डल के विभिन्न परीक्षा केन्द्रों में किया जायेगा, जिस हेतु ऑनलाइन आवेदन पत्र पंजीकरण भरने की तिथि 26 अप्रैल, 2024 से 15 मई, 2024 तक निर्धारित की गयी तथा परीक्षा शुल्क जमा करने की अन्तिम तिथि दिनांक 16 मई, 2024 निर्धारित की गयी। प्रो0 जोशी ने बैठक में उत्तराखंड राज्य संयुक्त बी0एड0 प्रवेश परीक्षा के सफल आयोजन हेतु तीनों विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों एवं बैठक में उपस्थित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये।

कुलपति प्रो0 जोशी ने बताया कि छात्रों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तीनों विश्वविद्यालय आपस में समन्वय स्थापित कर प्रवेश परीक्षा केन्द्रों का निर्धारण किया जाएगा। उन्होने बताया कि प्रवेश परीक्षा के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं तथा समयबद्धता के साथ दिनांक 26 मई, 2024 को प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाएगा साथ ही विश्वविद्यालय अधिकारियों को उत्तराखंड राज्य संयुक्त बी0एड0 प्रवेश परीक्षा 2024-26 के आयोजन के सम्बन्ध में आवश्यक तैयारियां 15 मई, 2024 तक पूर्ण करने हेतु निर्देश दिये गये हैं।

श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय प्रदेश में छात्र नामांकन की दृष्टि से प्रदेश का अग्रणीय विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को सत्र 2022-23 से प्रारम्भ किया गया है एनईपी द्वितीय बैच के द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएं दिनांक 06 मई, 2024 से प्रस्तावित हैं साथ ही अन्य आधारभूत एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम जो कि नॉन एनईपी पाठ्यक्रम संचालित हैं उनकी परीक्षाएं भी दिनांक 06 मई, 2024 से प्रस्तावित हैं। छात्र हितों के मध्येनजर विभिन्न पाठ्यक्रमों के परीक्षा परिणाम समय पर घोषित किये जा रहे हैं। शैक्षणिक कैलेन्डर के अनुरूप विश्वविद्यालय में प्रवेश, परीक्षा तथा परिणाम का अनुपालन सुनिश्चित किया गया है। शासन द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों के अनुरूप विश्वविद्यालय समन्वय स्थापित कर कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय में नवाचार के लिए शैक्षिक गतिविधियों का समय-समय पर आयोजन किया जा रहा है तथा उत्तराखंड राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप विभिन्न प्रकार की व्यावसायिक व रोजगार परक पाठ्यक्रम भी विश्वविद्यालय परिसरों में संचालित किये जा रहे हैेैं।

मुख्य सचिव प्रत्येक सप्ताह चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की करेंगी बैठकः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आगामी चारधाम यात्रा की तैयारियों की बैठक लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिये कि चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले यात्रा मार्गों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। चारधाम यात्रा से जुड़े सभी विभागों के सचिव यात्रा मार्गों का स्थलीय निरीक्षण कर सभी व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिये कि चारधाम यात्रा की सभी तैयारियों को लेकर साप्ताहिक समीक्षा बैठक की जाए। चारधाम यात्रा में यातायात प्रबंधन और कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए डीजीपी को भी चारधाम यात्रा से पूर्व स्थलीय निरीक्षण के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये हैं। बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए चारधाम यात्रा मार्ग पर जग्ह-जगह प्राईवेट हेल्थकेयर टेस्टिंग किट की व्यवस्था की जायेगी।
चारधाम यात्रा मार्गों पर प्लास्टिक और कूड़ा प्रबंधन के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की चारधाम यात्रा देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आस्था के प्रमुख केन्द्र हैं। यह सुनिश्चित किया जाए कि देवभूमि उत्तराखण्ड का अच्छा संदेश देश और दुनिया तक जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि यात्रा मार्गों में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए। प्लास्टिक और कूड़ा प्रबंधन के लिए चारधाम यात्रा से जुड़े जनपदों के जिलाधिकारियों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा धनराशि उपलब्ध कराई जाए।

घोड़े और खच्चर चालकों का किया जायेगा वेरिफिकेशन ।
चारधाम यात्रा के लिए घोड़ा और खच्चर चालकों का वेरिफिकेशन कराया जाए। तथा सभी का पुलिस और आपराधिक रिकॉर्ड चेक कर लिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि जो भी घोड़े और खच्चर चारधाम यात्रा में लगाये जाएं उनका स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही पंजीकरण किया जाए। घोड़े और खच्चरों के लिए गर्म पानी की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाय।

चारधाम यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं से शालीनतापूर्ण व्यवहार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को यह भी निर्देश दिये कि चारधाम यात्रा मार्गों पर विद्युत, पेयजल और सड़कों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यात्रा मार्गों पर जगह-जगह बने शौचालयों को दुरस्त किया जाए एवं महिलाओं के लिए पृथक शौचालय की व्यवस्था की जाए। चारधाम यात्रा से जुड़े सभी अधिकारी और कर्मचारी शालीनता एवं सहनशीलता का परिचय दें, यह सुनिश्चित किया जाए कि श्रद्धालुओं के साथ अभद्रता न हो। यात्रा ड्यूटी में तैनात सुरक्षाकर्मी अलर्ट मोड पर रहें। यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक छह घंटे के बाद सुरक्षा में तैनात कर्मियों को आराम दिया जाए। यात्रा में आने वाले वाहन चालकों के रहने और सोने की उचित व्यवस्था की जाए। यह भी प्रयास हो कि चारधाम यात्रा में जाने वाले वाहनों में दो-दो वाहन चालकों की व्यवस्था हो। वाहनों की फिटनेस का विशेष ध्यान रखा जाए।

चारधाम यात्रा के दृष्टिगत श्रद्धालुओं को आवश्यक सूचनाएं समय पर मिल सके, इसके लिए सूचना तंत्र मजबूत किया जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि चारधाम यात्रा के कुशल प्रबंधन के लिए सभी विभाग अलर्ट मोड पर रहें। श्रद्धालुओं को मौसम से संबंधित जानकारी, यातायात प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी समय पर प्राप्त हो, इसके लिए श्रद्धालुओं को आवश्यक सूचनाएं ससमय प्राप्त हो इसके लिए सोशल मीडिया का बेहतर प्रयोग किया जाए। होटल, गेस्ट हाउस एवं होम स्टे में चारधाम यात्रा संबंधित निर्देशिका विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। इस निर्देशिका में चारधाम के साथ ही अन्य पर्यटक स्थलों की जानकारी भी विस्तृत रूप से दी जाए।

10 मई 2024 को श्री केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे जबकि 12 मई 2024 को श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। अभी तक चारधाम यात्रा के लिये 15 लाख से अधिक श्रद्धालु ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन करा चुके है।

वनाग्नि पर प्रभावी नियंत्रण के लिए भी अलर्ट मोड पर रहें अधिकारीः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में इस समय चारधाम यात्रा के साथ ही वनाग्नि को रोकना महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए वन विभाग के अलावा अन्य विभाग भी अलर्ट मोड पर रहें। वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए सूचना तंत्र और मजबूत किया जाए। क्विक रिस्पांस टाईम कम से कम किया जाए। वनाग्नि पर प्रभावी रोकथाम के लिए स्थानीय स्तर पर लोगों का सहयोग लिया जाए।

बैठक में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, शहरी विकास मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल, बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेन्द्र अजय, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डीजीपी अभिनव कुमार, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, सचिन कुर्वे, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, अरविन्द सिंह ह्यांकी, डॉ. रंजीत सिन्हा, डॉ. आर. राजेश कुमार, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी एवं चारधाम यात्रा से जुड़े विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और वर्चुअल माध्यम से संबंधित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम ने नारी शक्ति वंदन कार्यक्रमों को चुनाव से पूर्व ही कर तोड़ दी थी विपक्ष की उम्मीदें

विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचण्ड बहुमत से वापसी कराकर इतिहास लिख चुके मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लोकसभा चुनाव में फिर नायक बनकर उभरे हैं। राज्य में अकेले मुख्यमंत्री धामी ने राज्य में 90 से ज्यादा जनसभाएं, रोड शो, कार्यकर्ता मिलन कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर पार्टी चुनावी मोर्चे पर अंतिम दिन तक डटे रहे। मुख्यमंत्री धामी ने एक दिन में 3 से 4 रिकॉर्ड कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर सरकार और संगठन में समन्वय की मिसाल कायम की है। इसके अलावा मुख्यमंत्री धामी और संगठन के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम है कि केंद्रीय नेतृत्व ने भी राज्य की पांचों लोकसभा सीट पर गंभीरता से प्रचार किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने 70 विधानसभाओं में करीब डेढ़ सौ से ज़्यादा जनसभाएं, रोड शो, कार्यकर्ता मिलन कार्यक्रम कर सरकार की उपलब्धियों पर वोट मांगे। जबकि प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के प्रचार की बात करें तो केंद्रीय नेतृत्व ने पहले टिकट बंटवारे में देरी, फिर प्रचार में औपचारिकता भर जिम्मेदारी निभाने का काम भी पूरा नहीं किया है। कांग्रेस ने स्टार प्रचारकों की लंबी सूची तो जारी की, लेकिन राज्य में एंट्री सिर्फ प्रियंका गांधी की हुई। प्रियंका की दो लोकसभा सीट पर चुनावी जनसभा कर कांग्रेस ने प्रचार की जिम्मेदारी की इतिश्री कर दी। सचिन पायलट ने भी हल्द्वानी में रोड शो कर केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जबकि अन्य राष्ट्रीय नेताओं ने यहां कदम तक नहीं रखा। राज्य में कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी अपने बेटे की हरिद्वार सीट से बाहर नहीं निकल पाए। हालांकि, कुछ स्थानों पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने जरूर उपस्थिति दर्ज कराई।

पौड़ी लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी गणेश गोदियाल को छोड़ दिया जाए तो बाकी सीटों पर अंदाज लगाया जा सकता है कि कांग्रेस ने ये लोकसभा चुनाव कितनी गंभीरता से लड़ा और कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष देवभूमि के मतदाताओं का कितना सम्मान है। बहरहाल, राज्य की हितैषी बताने वाली कांग्रेस देवभूमि के दंगल से इस बार भी दूर ही नज़र आई।