शाह-जादा को सत्ता का कानूनी सहारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा

कांग्रेस बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह मामले में पीछे नहीं हटना चाहती है। कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह और उनके बेटे जय शाह के ऊपर तंज कसा है।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस मामले में जय शाह को राज्य सरकार द्वारा मदद मिल रही है। राहुल के ट्विटर हैंडल ऑफ आरजी की तरफ से ट्वीट किया गया कि शाह-जादा को सत्ता का कानूनी सहारा! झंडा ऊंचा रहे हमारा!
वहीं पहले राहुल गांधी ने पॉपुलर तमिल फिल्म एक्टर धनुष का गाना व्हाई दिस कोलावेरी डी का सहारा लेकर अंग्रेजी में तंज कसा और उसके साथ ही हिंदी में कहा शाह-जादा को सत्ता का कानूनी सहारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा।
इसके साथ-साथ राहुल गांधी ने अंग्रेजी में लिखा था कि स्टेट लीगल हेल्प फॉर शाह-जादा, व्हाई दिस व्हाई दिस कोलावेरी डी।

पुलिस कांस्टेबल की पूरी तैयारी थी राम रहीम को भगाने की

गुरमीत राम रहीम सिंह को दोषी करार दिए जाने के बाद कोर्ट से भगाने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार लाल सिंह को दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। आरोप ये भी है कि लालचंद ही पुलिस के हर मूवमेंट की जानकारी गुरमीत के खास भक्तों तक पहुंचा रहा था। पूछताछ के दौरान उसने अपनी साजिश के बारे में अहम खुलासे किए हैं।
पंचकुला हिंसा की जांच कर रही एसआईटी का दावा है कि डेरामुखी राम रहीम को भगाने की जिम्मेदारी चंडीगढ़ पुलिस की इंटेलिजेंस विंग के कॉन्स्टेबल लालचंद ने ली थी। यह खुलासा पूछताछ के दौरान हुआ है। बता दें कि लालचंद को एसआईटी ने पूछताछ के लिए सेक्टर-26 स्थित क्राइम ब्रांच के ऑफिस में बुलाया था और फिर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
एसआईटी ने लालचंद को कोर्ट में पेश किया। जहां से पुलिस को दो दिन का रिमांड मिल गया। अब लगातार पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। पुलिस उससे कई सवालों के जवाब पाना चाहती है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, 25 अगस्त को फैसला आने के बाद जैसे ही गुरमीत को कोर्ट से बाहर लाया गया, लालचंद दूसरे पुलिसवालों से राम रहीम को बुलेटप्रूफ गाड़ी में बैठाने को कहने लगा, लेकिन पुलिसकर्मी तैयार नहीं हुए, फिर लालचंद ने प्लान-बी पर काम शुरू कर दिया।
प्लान-बी के मुताबिक गुरमीत राम रहीम की गाड़ी में कमांडो को बैठाना था, ये कमांडो उसका खास था। उसका जिम्मा गुरमीत को गनपॉइंट पर गाड़ी से उतारना था। उसके बाद उसे बुलेटप्रूफ गाड़ी से चंडीगढ़ में एंटर कराना था, लेकिन भागना हिमाचल की तरफ था।
इस दौरान लालचंद के पास वायरलेस सेट था। जिसमें सारे मैसेज फ्लैश हो रहे थे। तभी कोर्ट के बाहर उसने एक कमांडो को अफसरों से भिड़ने का इशारा किया। कमांडो ने वैसा ही किया, लेकिन इस दौरान भी लालचंद गुरमीत तक नहीं पहुंच पाया। यहां भी साजिश नाकाम रही तो उसने गुरमीत का पीछा किया।
लालचंद ने गुरमीत को छुड़ाने में एक आखिरी कोशिश और की। अपनी गाड़ी से गुरमीत को लेकर जा रही गाड़ी का पीछा कमांड तक किया। एक बुलेटप्रूफ गाड़ी साथ लगा दी, ताकि बीच में घेरकर उसे छुड़ाया जा सके। डेरामुखी के कमांडोज को पुलिस मूवमेंट का हर अपडेट मिला रहा था।
फैसले वाले दिन पुलिस ने तीन स्टेशनों पर वायरलेस सेट लगाए थे। लालचंद को फ्रीक्वेंसी पता थी, इसलिए हर सूचना गुरमीत की जैमर लगी गाड़ी में बैठे कमांडोज को वायरलेस सेट पर भी मिल रही थी।

कथा के श्रवण को दक्षिण भारत से पहुंचे हजारो लोग

तीर्थनगरी ऋषिकेश में सनातन धर्म के श्रुति धर्मगं्रथ उपनिषद कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा में दक्षिण भारत से हजारों लोंगों का दल यहां पहुंचा।
परमार्थ निकेतन गंगातट पर कथा का भव्य शुभारंभ आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती महाराज, आश्रम परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज व दक्षिण भारत से आए कथा व्यास नेच्चुर वेंकटरमण ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि आत्मा ही सबसे बड़ा तीर्थ है। आत्मा ही सत्य है। मन यदि स्वच्छ होगा तो आत्मा भी पवित्र होगी और जब आत्मा पवित्र होती है तब हम परमात्मा की प्राप्ति का लक्ष्य अतिशीघ्र हासिल कर लेते हैं। आश्रम परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि हिमालय की धरती आरण्यक संस्कृति है। इस धरती ने हमारी सभ्यता, संस्कृति एवं संस्कारों को जन्म दिया है। पूरे विश्व को वसुधैव कुटुंबकम का मंत्र दिया व सर्वे भवंतु सुखिनरू की संस्कृति दी। आज उसी धरती पर उपनिषदों के गहन ज्ञान की धारा प्रवाहित हो रही है। कथा व्यास नेच्चुर वेंकटरमण के सानिध्य में यह कथा सात दिनों तक आयोजित होगी। इस अवसर पर आश्रम परिवार ने कथा व्यास वेंकटरमण को शिवत्व का प्रतीक रुद्राक्ष का पौधा भी भेंट किया।

उत्तराखंड में 334 विद्यालय हो सकते है बंद

अब ऐसे विद्यालयों जिनकी छात्र संख्या दस या उससे भी कम है। सरकार उन्हें बंद करने का मन बना चुकी है। जी हां, जिले में प्राथमिक व जूनियर 334 विद्यालय ऐसे हैं, जहां पर छात्र संख्या दस से कम रह गई है, और ऐसे में सरकार इस पर जल्द फैसला लेगी।
प्राथमिक विद्यालयों में लगातार छात्रसंख्या घट रही है। कम संख्या वाले सबसे ज्यादा विद्यालय देवप्रयाग में 42 व सबसे कम प्रतापनगर में 26 हैं। इन विद्यालयों को नजदीकी विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा। जिले में शून्य छात्र संख्या वाले करीब 80 विद्यालय पहले से ही बंद है। दस से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों की सूची तीन सौ से ऊपर है, लेकिन इसमें दूरी का भी ध्यान रखा गया है। बंद होने वाले विद्यालय की दूरी समायोजित होने विद्यालय से दूरी एक किमी रखी गई है ताकि बंद होने वाले विद्यालयों के छात्रों को दूसरे विद्यालय जाने में परेशानियों का सामना न करना पड़े। एक किमी दूरी वाले विद्यालयों को ही बंद किया जाता है तो फिर बंद होने वाले स्कूलों की संख्या कुछ कम हो जाएगी।

परमाणु हथियार रखने को पाक बना रहा सुरंग

कुछ दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने कहा था कि भारत के कोल्ड वॉर का जवाब देने के लिए पाकिस्तान ने शॉर्ट रेंज के परमाणु हथियार विकसित कर लिए हैं। लेकिन अब खबर आ रही है कि पड़ोसी देश अपने परमाणु हथियारों का जखीरा रखने के लिए सुरंगों का निर्माण कर रहा है और ये सुरंगे दिल्ली से महज 750 किलोमीटर और अमृतसर से कुछ सौ किमी की दूरी पर स्थित हैं।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमृतसर के नजदीक पाकिस्तान के मियांवाली जिले में इन सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। ये भारत की राजधानी दिल्ली से महज 750 किमी तथा आर्थिक राजधानी मुंबई से 1500 किमी की दूरी पर स्थित हैं। टनल में संभावित हमले को देखते हुए परमाणु हथियारों को रखा जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार इन सुरंगों की लंबाई और चौड़ाई दस मीटर है। ये सुंरगें चौड़ी सड़कों से जुड़ी हुईं हैं और इनमें आने-जाने के अलग- अलग दरवाजे हैं। खुफिया जानकारी के अनुसार प्रत्येक टनल में 12 से 24 परमाणु हथियारों को रखा जा सकता है। एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पाकिस्घ्तान 130-140 वॉरहेड के परमाणु शस्घ्त्रागार को तेजी से बढ़ा रहा है। साथ ही रिपोर्ट का कहना है कि पाक अपने शस्त्रागार को और मजबूत बना रहा है व अधिक साइटों पर इनकी तैनाती कर रहा है जिनके बारे में पता लगाना फिलहाल कठिन है।

त्रिवेंद्र सरकार दिव्यांगों की हर सम्भव मदद के लिए तैयार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एएनएम घोष ऑडिटोरियम ओएनजीसी में आईवीवाई मेमोरीयल इण्टीग्रेटिड एजुकेशन सोसायटी द्वारा आयोजित दिव्यांग विद्यार्थियों के उत्सव कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। उत्तराखंड में प्रथम बार आयोजित दो दिवसीय दिव्यांग टैलेंट शो दिव्यांगोत्सव में कई स्कूलों और संस्थाओं के बच्चों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि समय के साथ समाज एवं माता-पिता की दिव्यांगों के प्रति सोच बदली है। आधुनिकतम तकनीकी के प्रयोग और नवाचारों से दिव्यांग स्कूलों में अध्यापको ने बच्चों को हर खुशी देने का सराहनीय प्रयास किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार दिव्यांगों की हर सम्भव मदद के लिए तैयार है। दिव्यांगों को बसों में आनेजाने के लिए सहायक की आवश्यकता न पड़े इसके लिए इसके लिए अधिकारियों को समाधान निकालने के निर्देश दिये गये हैं। राज्य में विभिन्न चयन संस्थाओं द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित होने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों हेतु सुविधा प्रदान किये जाने, परीक्षा केन्द्र बहुमंजिले भवन में होने की स्थिति में दिव्यांग अभ्यर्थियों को भवन के भूतल स्थित कक्ष में ही सीट आवंटित किये जाने एवं परीक्षा केन्द्र जनपद मुख्यालयों में रेलवे स्टेशन अथव बस स्टेशन के समीप बनाए जाने के आदेश जारी कर दिये गए हैं। आवश्यकतानुसार उनकी सुगमता हेतु रैम्प आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। दिव्यांगोत्सव में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने विभिन्न स्कूलों से आये दिव्यांग छात्र-छात्राओं में, चित्रकला, संगीत, ग्रुप डांस एवं अन्य प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को पुरस्कृत भी किया। आई.आई.टी. रूडकी की अनुश्रुति संस्था को सर्वश्रेष्ठ संस्था का पुरस्कार मिला। इस अवसर पर एग्लो इंडियन विधायक जार्ज आईवन ग्रेगरी मैन एवं विभिन्न स्कूलों से आये दिव्यांग छात्रों के शिक्षक उपस्थित थे।

मनमोहन सरकार से दुगुना किया खर्च मगर नहीं रूकी घटनाएं

आतंकवाद के खिलाफ लड़ने को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाली केंद्र सरकार के तीन वर्षो के कार्यकाल में जम्मू एवं कश्मीर में आतंकी घटनाएं बढ़ी हैं। सूचना के अधिकार द्वारा गृह मंत्रालय से मांगी गई सूचना के मुताबिक, बीते तीन वर्षो में जम्मू एवं कश्मीर में 812 आतंकी घटनाएं हुईं, जिनमें 62 नागरिक और 183 भारतीय जवान शहीद हो गए।
बीती मनमोहन सरकार के आखिर के तीन वर्षो के कार्यकाल में कुल 705 आतंकी घटनाओं में 59 नागरिक एवं 105 जवान शहीद हुए थे।
अधिकारी ने बताया कि इसी दौरान मनमोहन सरकार के अंतिम तीन वर्ष में गृह मंत्रालय ने आतंकवाद से लड़ने के लिए तकरीबन 850 करोड़ रुपये जारी किए, जबकि मोदी सरकार के समय गृह मंत्रालय ने 1,890 करोड़ रुपये इस बाबत जारी किए।
गृह मंत्रालय के लोक सूचना अधिकारी ने जवाब में बताया, मई, 2011 से मई, 2014 के बीच में जम्मू एवं कश्मीर में 705 आतंकवादी घटनाएं हुईं, जिसमें 59 आम नागरिक मारे गए एवं 105 जवान शहीद हो गए, जबकि मोदी सरकार अर्थात मई, 2014 से मई, 2017 तक 812 आतंकवादी घटनाएं हुईं, जिनमें 62 नागरिक मारे गए एवं 183 जवान शहीद हो गए।
उत्तर प्रदेश के नोएडा निवासी आरटीआई कार्यकर्ता रंजन तोमर ने गृह मंत्रालय से हासिल सूचना के आधार पर बताया कि उन्होंने गृह मंत्रालय से चार सवाल पूछे थे। मोदी की सरकार के आने के तीन साल एवं उसके पहले मनमोहन सिंह सरकार के आखिरी तीन साल में जम्मू एवं कश्मीर में कितनी आतंकवादी गतिविधियां हुई एवं उनमें कितने आम नागरिक एवं कितने जवान शहीद हुए? उन्होंने कहा, तीसरा सवाल यह था कि इस दौरान आतंकवादी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए गृह मंत्रालय ने मनमोहन सरकार के अंतिम तीन वर्ष में कितनी धनराशि जारी की एवं चौथा प्रश्न था कि मोदी सरकार ने प्रथम तीन वर्ष में कितनी धनराशि जारी की।
राजनाथ बोले, रोज मार रहे 5-6 आतंकी
इससे इतर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हर रोज पांच से छह आतंकवादी सुरक्षा बलों के हाथों मारे जा रहे हैं। एक कार्यक्रम में राजनाथ ने कहा कि सेना, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के अनवरत प्रयासों के चलते जम्मू-कश्मीर में हर दिन पांच-छह आतंकवादी मारे जा रहे हैं। मैं उनकी तारीफ करता हूं।

रेप माना जाएगा, नाबालिग पत्नी से संबंध बनाने पर

नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध बनाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध बनाना रेप का अपराध है। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि सहमति से सेक्स करने की उम्र बनाने को कम नहीं किया जा सकता है। 15 से 18 साल की पत्नी से शारीरिक संबंध बनाना रेप की श्रेणी में आएगा। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि पत्नी पुलिस के पास शिकायत कर सकती है। कोर्ट ने इस प्रावधान को पोक्सो के साथ जोड़ा है।
दरअसल आईपीसी 375 (2) कानून का यह अपवाद कहता है कि अगर कोई 15 से 18 साल की पत्नी से संबंध बनाता है तो उसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। केन्द्र सरकार ने कोर्ट में कानून की तरफदारी करते हुए कहा कि संसद ने सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए इस कानून को नहीं छेड़ा। देश में आर्थिक रूप से पिछड़े समाज में आज भी बाल विवाह के मामले देखने को मिलते हैं।
बता दें कि देश में विवाह की उम्र महिलाओं के लिए 18 और पुरुषों के लिए 21 साल रखी गई है। इससे कम उम्र में हुई शादी को जुर्म माना गया है। इंडियन पीनल कोर्ड के तहत मामले में दो साल की सजा हो सकती है। बावजूद इसके देश के बड़े शहरों में बाल विवाह का आंकड़ा 0.7 फीसदी बढ़ा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसका ग्राफ 0.3 फीसदी घटा है।
डब्ल्यूसीडी मंत्रालय द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार देश में साल 2014 से 16 के बीच 1785 मामले रजिस्टर हुए और 4,777 लोगों की गिरफ्तारी हुई। हालांकि इसमें सिर्फ 274 को ही अपराधी साबित किया जा सका।with a minor wife

कठिन परिस्थिति में सीआरपीएफ का अहम योगदान

मेरठ पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथा सिंह ने कहा कि रैपिड एक्शन फोर्स के पांच और नई बटालियन का गठन होगा। जल्द ही यह नई बटालियन पहली जनवरी से काम करेगी। यह बात उन्होंने आरएएफ-108 बटालियन के सिल्वर जुबली समारोह में बोले।
उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी देश की सीमा और विभिन्न क्षेत्रों में सीमा सुरक्षा बल (सीआरपीएफ) और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान काम करते हैं। उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक प्रगति तभी होगी जब सांप्रदायिकता, क्षेत्रवाद, जातिवाद और अराजकता को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने रैपिड एक्शन फोर्स के 5 और नई बटालियन गठित करने की घोषणा की। यह नई बटालियन 1 जनवरी से काम करने लगेगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2022 नए भारत के निर्माण का संकल्प लिया गया है। देश की सुरक्षा कानून व्यवस्था में जवानों को जान भी गंवानी पड़ती है, इसके लिए सरकार ने एक जनवरी 2016 से कम से कम एक करोड़ की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अब केंद्रीय सुरक्षा बलों को वर्दी की जगह प्रतिवर्ष 10000 रुपये नकद दिए जाएंगे। उन्होंने रैपिड एक्शन फोर्स के 25 साल पूरे होने पर बधाई दी और कहा कि जब भी देश के किसी भी भाग में जरूरत पड़ती है तो फोर्स के जवान कानून-व्यवस्था में सरकार को मदद करती है। हालात बिगड़ने की स्थिति में राज्य सरकार की मांग सबसे पहले रैपिड एक्शन फोर्स की होती है।