उत्तराखंड रजत जयंती पर सीएम ने विधानसभा विशेष सत्र में दिया ऐतिहासिक संबोधन

उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने विस्तृत और ऐतिहासिक संबोधन में राज्य की 25 वर्ष की विकास यात्रा, उपलब्धियों और आगामी संकल्पों का विस्तार से उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की स्थापना कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि यह वर्षों के लंबे संघर्ष, असीम त्याग और हजारों आंदोलनकारियों के बलिदान का परिणाम है। उन्होंने राज्य निर्माण में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी हुतात्माओं, आंदोलनकारियों और पूर्व प्रधानमंत्रियों, मुख्यमंत्रियों तथा जनप्रतिनिधियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखंड आज विभिन्न क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 26 गुना और प्रति व्यक्ति आय में 18 गुना वृद्धि हुई है। नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य सूचकांक में उत्तराखंड को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि किसानों की आय वृद्धि दर में भी राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पिछले वर्षों में 30 से अधिक नई नीतियाँ लागू की गई हैं जिनसे उद्योग, पर्यटन, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 3.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौते हुए, जिनमें से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव धरातल पर उतारे जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता (न्ब्ब्) कानून लागू कर समानता, न्याय और महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। साथ ही, राज्य में भू-कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून और नकल विरोधी कानून जैसे कड़े कदम उठाकर पारदर्शी व जवाबदेह शासन की मिसाल पेश की गई है।

उन्होंने बताया कि राज्य में 26 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियों में अवसर दिए गए हैं, जबकि 1 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान के लिए आरक्षण, पेंशन और पहचान पत्र जैसी व्यवस्थाओं को सशक्त बनाया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड “विकसित भारत के लिए विकसित उत्तराखंड” के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री मोदी जी के “2047 तक विकसित राष्ट्र” के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश की सवा करोड़ जनता के सहयोग से उत्तराखंड आने वाले वर्षों में देश का श्रेष्ठ राज्य बनेगा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गीत की प्रेरक पंक्तियों के साथ अपनी बात समाप्त की-
“पतवार चलाते जाएंगे, मंज़िल आएगी… आएगी।”

सीएम धामी से चौखुटिया में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने को आंदोलनरत प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में चौखुटिया में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने हेतु आंदोलन कर रहे प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री धामी का आभार व्यक्त किया कि चौखुटिया क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल के उन्नयन हेतु शासनादेश जारी कर दिया है। इसके अंतर्गत चौखुटिया अस्पताल की क्षमता 30 बेड से बढ़ाकर 50 बेड कर दी गई है, साथ ही विभिन्न आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं को चरणबद्ध रूप से सुदृढ़ करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि जनहित की प्रत्येक मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार संवेदनशील है और जन आकांक्षाओं के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विषय में वह स्वयं स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक करेंगे तथा प्रगति की सीधे मॉनिटरिंग करेंगे। उन्होंने कहा कि चौखुटिया एवं आसपास के क्षेत्रवासियों की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत एक्स-रे मशीन के संचालन की जिम्मेदारी उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन परिषद को दी गई है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के लिए एम्स ऋषिकेश में उत्तराखंड वासियों के लिए विशेष काउंटर स्थापित करने हेतु तत्काल बात की जाएगी, ताकि प्रदेशवासियों को त्वरित एवं सरल चिकित्सा सेवा मिल सके।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए सरकार ठोस स्वास्थ्य नीति पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री स्वयं भी जल्द ही चौखुटिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करेंगे और व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अल्मोड़ा जनपद के चौखुटिया में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की क्षमता को बढ़ाते हुए इसे 30 बेड से विस्तारित कर 50 बेड का अस्पताल बनाया जाएगा। इसके साथ ही अस्पताल में अत्याधुनिक डिजिटल एक्स-रे मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पहाड़ के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। इसी उद्देश्य से चौखुटिया में उप जिला चिकित्सालय के निर्माण से संबंधित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन परिषद को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है और प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल के विस्तार से चौखुटिया और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों को लाभ मिलेगा तथा स्वास्थ्य उपचार में होने वाली देरी को रोका जा सकेगा।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी अल्मोड़ा, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चौखुटिया के जनप्रतिनिधि तथा आंदोलनकारी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य उपस्थित रहे।

बैकुंठ चतुर्दशी का यह मेला आस्था एवं समृद्ध सांस्कृतिक लोक परंपराओं का प्रतीकः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रीनगर, पौड़ी में आयोजित बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले के शुभारंभ अवसर पर जनता को वर्चुअल संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीनगर गढ़वाल में स्थित माँ धारी देवी और भगवान कमलेश्वर महादेव के पौराणिक मंदिर सम्पूर्ण उत्तराखंड की अनमोल धरोहर है। प्रत्येक वर्ष बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर आयोजित होने वाला यह मेला आस्था एवं समृद्ध सांस्कृतिक लोक परंपराओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा इस प्रकार के पारंपरिक मेले हमें हमारी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास को आगे बढ़ा रही है। राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और कनेक्टिविटी सहित अनेकों क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश के विकास के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को भी संरक्षित किया जा रहा है। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत पुनर्निर्माण कार्य चल रहे हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का कार्य तेजी के साथ चल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन के पूर्ण होने पर श्रीनगर के साथ पूरे गढ़वाल क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार द्वारा श्रीनगर क्षेत्र में अनेकों विकास कार्य भी करवाए जा रहे हैं। 4 करोड़ 88 लाख की लागत से रोडवेज बस स्टेशन एवं पार्किंग का निर्माण किया गया है। अलकनन्दा नदी के किनारे गंगा संस्कृति केंद्र का निर्माण कार्य, श्रीनगर नगर पालिका को नगर निगम बनाया गया है। 37 करोड़ से अधिक की लागत से मढ़ी-चौरास-जाखड़ी पंपिंग पेयजल योजना का निर्माण भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा श्रीनगर के बेलकेदार और बेल कंडी मार्ग से लगे क्षेत्र में एक नई टाउनशिप स्थापित करने, श्रीनगर नगर निगम के दायरे में आने वाले सभी मोहल्लों तक सीवरेज की व्यवस्था पहुंचाने, ट्राइडेंट पार्क निर्माण, पुराने कलैक्ट्रेट भवन को हैरिटेज भवन के रूप में विकसित करने, धारी देवी मंदिर पैदल मार्ग का निर्माण, गोला पार्क का सौंदर्गीकरण कार्य जैसी विभिन्न विकास योजनाओं पर भी कार्य किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिरों का ये शहर धार्मिक, ऐतिहासिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रीनगर, प्रदेश में शिक्षा के हब के रूप में भी उभर रहा है, इसे देखते हुए राज्य सरकार यहां एक पैरामेडिकल कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज का निर्माण भी करा रही है, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण कार्य अंतिम चरण में हैं। बेस अस्पताल में 25 करोड़ रुपए की लागत से क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण किया जा रहा है, जिसका लाभ पौड़ी के साथ ही चमोली, टिहरी और रूद्रप्रयाग जिले के हजारों मरीजों को मिलेगा।

इस अवसर पर मेयर आरती भण्डारी, जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया एवं अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

चौखुटिया में सीएम धामी ने की घोषणा, डिजिटल एक्स-रे मशीन होगी उपलब्ध

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अल्मोड़ा जनपद के चौखुटिया में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की क्षमता को बढ़ाते हुए इसे 30 बेड से विस्तारित कर 50 बेड का अस्पताल बनाया जाएगा। इसके साथ ही अस्पताल में अत्याधुनिक डिजिटल एक्स-रे मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पहाड़ के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। इसी उद्देश्य से चौखुटिया में उप जिला चिकित्सालय के निर्माण से संबंधित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन परिषद को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है और प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल के विस्तार से चौखुटिया और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों को लाभ मिलेगा तथा स्वास्थ्य उपचार में होने वाली देरी को रोका जा सकेगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उत्तराखंड रजतोत्सव के क्रम में विधानसभा के विशेष सत्र में संबोधन दिया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उत्तराखंड राज्य स्थापना, रजतोत्सव के अवसर पर आयोजित, उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित किया।

राष्ट्रपति ने इस ऐतिहासिक अवसर के लिए उत्तराखंड विधान सभा के पूर्व और वर्तमान सदस्यों तथा सभी राज्यवासियों को बधाई देते हुए कहा कि, अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में, यहां के जनमानस की आकांक्षा के अनुरूप, बेहतर प्रशासन और संतुलित विकास की दृष्टि से, नवंबर, 2000 में इस राज्य की स्थापना की गई। विगत पचीस वर्षों की यात्रा के दौरान उत्तराखंड के लोगों ने विकास के प्रभावशाली लक्ष्य हासिल किए हैं। पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन, स्वास्थ्य-सेवा और शिक्षा के क्षेत्रों में राज्य ने सराहनीय प्रगति की है। इसी तरह डिजिटल और फिजिकल कनेक्टिविटी तथा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलमेंट के क्षेत्रों में भी विकास हुआ है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि विकास के समग्र प्रयासों के बल पर राज्य में मानव विकास सूचकांक के मानकों पर सुधार हुआ है। राज्य में साक्षरता बढ़ी है, महिलाओं की शिक्षा में विस्तार हुआ है, मातृ एवं शिशु-मृत्यु-दर में कमी आई है, राज्य में स्वास्थ्य- सेवाओं को सुलभ बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

राष्ट्रपति ने राज्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि, इससे राज्य में सुशीला बलूनी, बछेन्द्री पाल, गौरा देवी, राधा भट्ट और वंदना कटारिया जैसी असाधारण महिलाओं की गौरवशाली परंपरा आगे बढ़ेगी। इसी तरह श्रीमती ऋतु खंडूरी भूषण को राज्य की पहली महिला विधान सभा अध्यक्ष नियुक्त करके उत्तराखंड विधान सभा ने अपना गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा वे सभी हितधारकों के सक्रिय प्रयास से उत्तराखंड विधान सभा में महिलाओं की संख्या में बढ़ोत्तरी होते देखना चाहेंगी।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड की इस देव-भूमि से अध्यात्म और शौर्य की परम्पराएं प्रवाहित होती रही हैं। कुमांऊ रेजीमेंट और गढ़वाल रेजीमेंट के नाम से ही यहां की शौर्य परंपरा का परिचय मिलता है। यहां के युवाओं में भारतीय सेना के जरिए मातृ-भूमि की रक्षा करने के प्रति उत्साह दिखाई देता है। उत्तराखंड की यह शौर्य परंपरा सभी देशवासियों के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा को शक्ति प्रदान करने में भी उत्तराखंड के अनेक जन-सेवकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने ’नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता’ के निर्माण के लिए संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत प्रावधान किया था। संविधान निर्माताओं की इसी भावना के अनुरूप अब उत्तराखंड विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक लागू कर दिया है, जिसकी वो सराहना करती हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विधान सभा में 550 से अधिक विधेयक पारित किए गए हैं। उन विधेयकों में उत्तराखंड लोकायुक्त विधेयक, उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था विधेयक तथा नकल विरोधी विधेयक शामिल हैं। इससे पारदर्शिता, नैतिकता और सामाजिक न्याय की भावना मजबूत हुई है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विधान सभाएं हमारी संसदीय प्रणाली का प्रमुख स्तम्भ हैं। बाबासाहब अंबेडकर ने कहा था कि संविधान निर्माताओं ने संसदीय प्रणाली को अपनाकर निरंतर उत्तरदायित्व को अधिक महत्व दिया था। जनता के प्रति निरंतर उत्तरदाई बने रहना संसदीय प्रणाली की शक्ति भी है और चुनौती भी। विधायक-गण, जनता और शासन के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जमीनी स्तर पर क्षेत्र की जनता से जुड़कर उनकी सेवा करने का अवसर मिलना बड़े सौभाग्य की बात है।

राष्ट्रपति ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक विधायक के रूप उन्हें भी नौ वर्ष जन-सेवा का अवसर मिला है। इसलिए वो अपने अनुभव से कह सकती हैं कि यदि विधायक सेवा-भाव से निरंतर जनता की समस्याओं के समाधान तथा उनके कल्याण में सक्रिय रहेंगे तो जनता और जन-प्रतिनिधि के बीच विश्वास का बंधन अटूट बना रहेगा। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि विकास तथा जन-कल्याण के कार्यों को सभी लोग पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाएं। ऐसे कार्य दलगत राजनीति से ऊपर होते हैं। सबको समाज के वंचित वर्गों के कल्याण एवं विकास पर विशेष संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की जरूरत है।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि उत्तराखंड विधान सभा में इस वर्ष राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन की व्यवस्था का शुभारंभ हुआ है, इसके माध्यम से दो सत्रों का संचालन किया जा चुका है। इस एप्लीकेशन के जरिये सभी विधायक-गण, संसद तथा अन्य विधान-सभाओं एवं विधान परिषदों के बेस्ट प्रैक्टिस को अपना सकते हैं।

संबोधन में अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तराखंड में अनुपम प्राकृतिक संपदा और सौन्दर्य विद्यमान हैं। प्रकृति के इन उपहारों का संरक्षण करते हुए, राज्य को विकास के मार्ग पर आगे ले जाना है। उत्तराखंड की 25 वर्ष की विकास-यात्रा, विधायकों के योगदान से ही संभव हो पाई है। उन्होंने उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि आगे भी सभी विधायक जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति देते रहेंगे।
’राष्ट्र सर्वाेपरि’ की भावना के साथ राज्य तथा देश को विकास-पथ पर तेजी से आगे ले जाने की जरूरत है। उन्होंने अपने संबोधन का समापन उत्तराखंड के सभी निवासियों को भविष्य की मंगलकामना देने के साथ की।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने अपने अभिभाषण में प्रदेश की 25 वर्ष की विकास यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि यह कालखण्ड उत्तराखण्ड के लिए आर्थिक समृद्धि, सुशासन, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत संरचना निर्माण का स्वर्णिम दौर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड “समृद्ध एवं सशक्त उत्तराखण्ड” की दिशा में निरंतर अग्रसर है।

राज्यपाल ने राष्ट्रपति का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सानिध्य एवं मार्गदर्शन से प्रदेशवासियों को नई प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति महोदया का देवभूमि उत्तराखण्ड के प्रति स्नेह और संवेदना हम सभी के लिए गौरव का विषय है।

राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में कहा कि इस विशेष सत्र के माध्यम से राज्य की अब तक की विकास यात्रा पर चर्चा की जाएगी और आगामी वर्षों के लिए नए विकास रोडमैप का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सत्र उत्तराखण्ड के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखेगा। उन्होंने कहा कि “विकसित उत्तराखण्ड” का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि समावेशी और चहुँमुखी विकास से है, जहां “प्रकृति और प्रगति दोनों साथ चलें।” उन्होंने प्रदेश के लिए “समृद्ध गाँव, सशक्त युवा, सशक्त नारी और सुरक्षित पर्यावरण” का मंत्र दिया।

राज्यपाल ने कहा कि आने वाले 25 वर्षों में उत्तराखण्ड को आध्यात्मिकता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, जैविक कृषि और हरित ऊर्जा के आदर्श राज्य के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पलायन रोकने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान देने और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों से उत्तराखण्ड “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य में अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे एकजुट होकर प्रदेश के हर नागरिक के जीवन में समृद्धि और सम्मान सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजतोत्सव पर आयोजित इस विशेष सत्र में माननीय राष्ट्रपति का मार्गदर्शन हम सबको प्राप्त हो रहा है। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का सम्पूर्ण जीवन संघर्ष, समर्पण और राष्ट्र सेवा का अनुपम उदाहरण है। उनके व्यक्तित्व में मातृत्व की ममता, सेवा का संकल्प और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का अद्भुत संगम निहित है। उन्होंने सदैव अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए समाज के वंचित, शोषित एवं पिछड़े वर्गों के सशक्तिकरण हेतु कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने निजी जीवन में अत्यंत विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए भी हमेशा राष्ट्र सर्वाेपरि की भावना से कार्य करते हुए समाज जीवन में अपना योगदान दिया। झारखंड की राज्यपाल के रूप में भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों का अनुसरण करते हुए उन्होंने जनजातीय समाज के उत्थान में अविस्मरणीय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दूसरा मौका है कि जब उत्तराखंड की विधानसभा में हमारे देश के राष्ट्रपति का अभिभाषण हो रहा है, इससे पूर्व 18 मई 2015 को पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय प्रणव मुखर्जी ने विधानसभा को संबोधित किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की प्रथम नागरिक के रूप में राष्ट्रपति द्वारा उत्तराखंड की विधानसभा में दिया जाने वाला ऐतिहासिक अभिभाषण हमारे राज्य के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित किया जाएगा। उनके प्रेरणादायी शब्द आने वाले 25 वर्षों तक उत्तराखंड की प्रगति के लिए हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड 9 नवंबर को अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है। यह ऐतिहासिक अवसर प्रत्येक उत्तराखंडवासी के लिए आत्मगौरव का क्षण होने के साथ ही अत्यंत भावनात्मक क्षण भी है। उत्तराखण्ड राज्य हमारी उन असंख्य माताओं, बहनों, युवाओं और जननायकों के अदम्य साहस और संघर्ष का प्रतीक है, जिनके तप, त्याग और बलिदान के बल पर ये गौरवशाली राज्य अस्तित्व में आया। मुख्यमंत्री ने सभी ज्ञात-अज्ञात राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि अमर आंदोलनकारियों के बलिदान को उत्तराखंड का कोई भी नागरिक कभी नहीं भुला सकता।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति के आशीर्वाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और उत्तराखंड की जनता के सहयोग से हम उत्तराखंड को एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में स्थापित करने के अपने विकल्प रहित संकल्प में अवश्य सफल होंगे।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूडी ने स्वागत संबोधन में कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राज्य स्थापना दिवस पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित कर रही हैं। प्रदेश की विधानसभा के लिए भी यह गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति के अजातशत्रु स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी के निर्णय से नवंबर 2000 में अस्तित्व में आने के बाद उत्तराखंड विधानसभा की पहली बैठक 12 जनवरी 2001 के दिन आयोजित की गई। तब से अब तक भारतीय लोकतंत्र के उच्च सिद्धांतों और परम्पराओं पर चलते हुए, उत्तराखंड विधानसभा ने कई महत्वपूर्ण आयाम स्थापित किए हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का बलिदान हमें, उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए चेष्टावान बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण में मातृशक्ति ने अहम भूमिका निभाई है। उत्तराखंड की महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण, खेती-बाड़ी, समाज सुधार से लेकर राज्य निर्माण आंदोलन में तक सक्रिय भूमिका निभाई है। राष्ट्रपति के संबोधन से उत्तराखंड की मातृशक्ति गौरवांवित हुई है। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों के कालखंड में उत्तराखंड विधानसभा ने महिला आरक्षण विधेयक सहित पांच सौ से अधिक विधेयक पारित किए हैं। वर्ष 2001 में अंतिम विधानसभा से लेकर वर्तमान विधानसभा के सदस्यों ने तक महत्वपूर्ण अवसरों पर दलगत राजनीति से उठकर, प्रदेश के सामने उपस्थित चुनौतियों का सफलतापूर्वक सम्मान करते हुए, अपने ज्ञान, विवेक और परिश्रम से आम जनता की आशा, आकांक्षाओं को मूर्त रूप दिया है। इससे प्रदेश में संसदीय लोकतंत्र की नींव भी मजबूत हुई है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनभावना के अनुरूप प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र में समुचित विकास सुनिश्चित करने के लिए भराडीसैंण – गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया है, अब वहां भी एक विधानसभा भवन संचालित किया जा रहा है। उत्तराखंड विधानसभा ने ग्रीन इनिसिटेव के तहत अब पेपरलेस विधायिका की ओर कदम बढ़ दिए हैं। देहरादून के साथ ही भराडीसैंण विधानसभा परिसर में भी नेशनल ई विधान एप्लकेशन लागू किया गया है। विधानसभा में ई लाइब्रेरी भी स्थापित की गई है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के विकास में शोध के महत्व पर जोर देते हैं, इसके लिए भराड़ीसैंण विधानसभा के अंतर्गत, पूर्व राष्ट्रपति डॉ प्रवण मुखर्जी द्वारा स्वीकृत इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पार्लियामेंट्री स्टडीज, रिसर्च एंड ट्रेनिंग शुरू किया गया है। जिसे विधायी और संसदीय कार्य के साथ ही पॉलिसी प्लानिंग में उच्च कोटि के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के संबोधन से सब में नई ऊर्जा का संचार होगा, जिससे उत्तराखंड वासी वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल की दिशा में संकल्पित होकर कार्य कर सकेंगे।

इस मौके पर नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तराखंड सभी मानकों में विशिष्ट प्रदेश है, उत्तराखंड की सीमाएं तिब्बत और नेपाल से मिलती हैं इस तरह ये हिमालयी राज्य देश की रक्षा में अडिग खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने इस राज्य को परोपकारी हिमालय से निकलने वाली सदानीरा नदियां दी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं ने हमेशा राज्य के जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए संघर्ष किया है। विश्व प्रसिद्ध चिपको आंदोलन इसका उदाहरण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति के संबोधन से सदस्यों को नई ऊर्जा और दिशा प्राप्त होगी।

एफआरआई देहरादून में 9 नवम्बर को होगा उत्तराखण्ड रजत जयंती उत्सव का मुख्य कार्यक्रम, पीएम रहेंगे मौजूद

उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 9 नवम्बर को प्रदेशभर में भव्य रजत जयंती उत्सव का आयोजन किया जाएगा। मुख्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई) में आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा के विशेष सत्र में प्रतिभाग करने के उपरांत सीधे एफआरआई पहुंचकर कार्यक्रम की तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल, सुरक्षा व्यवस्था, दर्शक दीर्घा, यातायात प्रबंधन, सांस्कृतिक मंच और स्वागत तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य स्थापना दिवस का यह ऐतिहासिक अवसर गरिमामय और व्यवस्थित तरीके से मनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन उत्तराखंड की 25 वर्ष की विकास यात्रा, संघर्ष और उपलब्धियों का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सानिध्य में यह रजत जयंती समारोह प्रदेश के लिए प्रेरणादायक अवसर होगा।

इस अवसर पर सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरुप, अपर सचिव बंशीधर तिवारी एवं शासन – प्रशासन के अन्य अधिकारी मौजूद थे।

दिन भर सोशल मीडिया पर ट्रेंड करता रहा #IgaasLokparvWithDhami

उत्तराखंड में आज सोशल मीडिया पर #IgaasLokparvWithDhami जमकर ट्रेंड हुआ। इस ट्रेंड के ज़रिए प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस प्रयास की सराहना कर रही है, जिसके तहत राज्य की लोक संस्कृति, परंपराओं और पर्वों को नई पहचान दी जा रही है।

लोक पर्वों को मिला सम्मान
मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में इस बार ईगास-बग्वाल पर्व को पूरे उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। प्रदेश सरकार ने ईगास पर्व पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया, जिससे न केवल सरकारी स्तर पर बल्कि जन-जन तक पर्व की खुशियां फैल सकीं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री धामी पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने उत्तराखण्ड के लोकपर्व ईगास पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करना शुरू किया है।

मुख्यमंत्री आवास देहरादून में भी ईगास पर्व की भव्य झलक देखने को मिली, पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, नृत्य और पहाड़ी व्यंजनों के बीच पूरा परिसर लोकसंस्कृति के रंग में रंग गया। प्रदेशभर से आए सम्मानित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ नेता और स्थानीय लोग इस आयोजन का हिस्सा बने।

लोक संस्कृति को संजीवनी
मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर कहा कि “हमारे पर्व हमारी पहचान हैं, इन्हें संजोना और आगे बढ़ाना हम सबका कर्तव्य है।” उनकी इस पहल से प्रदेशभर में यह संदेश गया कि उत्तराखंड की लोक परंपराएं केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज की पीढ़ी की जीवनशैली का गर्वपूर्ण प्रतीक हैं।

सोशल मीडिया पर जनता की प्रतिक्रियाएं
X (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर #IgaasLokparvWithDhami हैशटैग के तहत हजारों लोगों ने मुख्यमंत्री के इस कदम की सराहना की। कुछ यूज़र्स ने लिखा कि सीएम धामी ने पर्वों को सिर्फ परंपरा नहीं, पहचान बना दिया, तो किसी ने कहा कि ईगास पर सार्वजनिक अवकाश देकर सरकार ने अपनी संस्कृति को सम्मान दिया। मुख्यमंत्री धामी की इस पहल ने साबित किया है कि विकसित उत्तराखंड की राह केवल आधुनिक विकास से नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ाव से भी होकर गुजरती है। ईगास पर्व का यह उत्सव जनभावनाओं, संस्कृति और सरकार की संवेदनशीलता का अद्भुत संगम बन गया कृ जहाँ “विकास और विरासत” दोनों एक साथ दिखे।

पतंजलि विवि के दीक्षांत समारोह में पहुंची राष्ट्रपति मुर्मू, स्वर्ण पदक प्राप्त विद्यार्थियों को किया सम्मानित

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार के द्वितीय दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में कुल 1454 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। 62 शोधार्थियों को विद्या वारिधि और 3 शोधार्थियों को विद्या वाचस्पति की उपाधि प्रदान की गई, जबकि 615 विद्यार्थियों को परास्नातक और 774 विद्यार्थियों को स्नातक की उपाधि प्रदान की गई। इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि.) ने राष्ट्रपति को राष्ट्रपति भवन की विविध वनस्पतियों पर आधारित दो पुस्तकें ‘फ्लोरा ऑफ राष्ट्रपति भवन’ एवं ‘मेडिसिनल प्लांट्स ऑफ राष्ट्रपति भवन’ की प्रतिलिपियाँ भी भेंट कीं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई एवं आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने पदक प्राप्त विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के जीवन-निर्माण में योगदान देने वाले अध्यापकों और अभिभावकों का भी विशेष अभिनंदन किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों में 64 प्रतिशत बेटियाँ हैं तथा पदक प्राप्त करने वाली छात्राओं की संख्या छात्रों की तुलना में चार गुना अधिक है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विकसित भारत के उस स्वरूप का परिचायक है जिसमें महिलाएं नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय महर्षि पतंजलि की तप, साधना और ज्ञान परंपरा को आधुनिक समाज के लिए सुलभ बना रहा है। विश्वविद्यालय योग, आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से स्वस्थ भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय की भारत-केन्द्रित शिक्षा-दृष्टि की सराहना करते हुए कहा कि इसमें विश्व बंधुत्व की भावना, वैदिक ज्ञान एवं आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समन्वय और वैश्विक चुनौतियों के समाधान जैसी विशेषताएँ निहित हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से वसुधैव कुटुंबकम की भावना पर आधारित जीवन-मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान-प्राप्ति नहीं है, बल्कि सदाचार, तपस्या, सरलता और कर्तव्यनिष्ठा जैसे जीवन-मूल्यों को आत्मसात करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को न केवल आत्म-विकास बल्कि राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। गंगा तट पर स्थित हरिद्वार की सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ये पवित्र स्थल ज्ञान और अध्यात्म का संगम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पतंजलि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी स्वाध्याय और तपस्या जैसे आदर्शों का पालन करते हुए स्वस्थ, संस्कारित और समरस समाज के निर्माण में योगदान देंगे।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि.) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए उनके देवभूमि आगमन को गर्व का क्षण बताया। राज्यपाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि योग, आयुर्वेद और अध्यात्म का प्राण-केंद्र है। इस पवित्र धरती से प्रचलित योग और आयुर्वेद की परंपरा ने न केवल भारत को, बल्कि समूचे विश्व को स्वास्थ्य, संतुलन और सद्भाव का संदेश दिया है। उत्तराखंड की यह ऋषि-परंपरा आज भी हमें यह प्रेरणा देती है कि ज्ञान का सर्वाेच्च उद्देश्य केवल आत्म-विकास नहीं, बल्कि विश्व-कल्याण है।

राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और आशा व्यक्त की कि वे दीक्षांत समारोह के पश्चात आने वाली चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करेंगे। उन्होंने कहा कि आज उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी अपने राष्ट्र, प्रदेश और समाज की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे तथा अपनी शिक्षा, प्रतिभा एवं प्रशिक्षण का उपयोग मानव-कल्याण के लिए करेंगे।

राज्यपाल ने कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों ने जो ज्ञान अर्जित किया, वह केवल हमारे लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड के कल्याण के लिए था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को स्वीकृति दिलाकर योग के विज्ञान पर किए गए हजारों वर्षों के कार्य को वैश्विक मंच प्रदान किया। विगत कुछ वर्षों में योग और आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति आई है, और आज करोड़ों लोग इनके माध्यम से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का देवभूमि उत्तराखंड की सवा करोड़ देवतुल्य जनता की ओर से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सदैव अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए समाज के वंचित, शोषित एवं पिछड़े वर्गों के सशक्तिकरण के लिए कार्य किया है। हाल ही में जब उन्होंने लड़ाकू विमान ‘राफेल’ में उड़ान भरी, तो पूरे देश ने उनके अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रेरक उदाहरण देखा। उनके व्यक्तित्व में मातृत्व की ममता, सेवा का संकल्प और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का अद्भुत संगम निहित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सभी उत्तराखंड वासियों का सौभाग्य है कि राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के इस ऐतिहासिक अवसर पर हमें राष्ट्रपति का सान्निध्य और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग करके अपने बेहतर भविष्य के साथ ही अपने परिवार की सुख-समृद्धि और समाज के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। उन्होंने कहा कि स्वामी रामदेव के मार्गदर्शन में पतंजलि विश्वविद्यालय आधुनिक शिक्षा को भारतीय संस्कारों और परंपराओं से जोड़ने का अतुलनीय कार्य कर रहा है। यहाँ विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जहाँ विद्यार्थी केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-मूल्यों की भी शिक्षा प्राप्त करते हैं। पतंजलि विश्वविद्यालय ने आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से ऐसी शिक्षा पद्धति विकसित की है, जो योग, आयुर्वेद, विज्ञान और प्रौद्योगिकी को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार अनेक नवाचार कर रही है। राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने के साथ ही प्रदेश के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसे कोर्स संचालित करने की पहल की गई है। भारतीय संस्कृति, दर्शन और इतिहास के गहन अध्ययन के लिए दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज’ की स्थापना भी की गई है। देहरादून में साइंस सिटी, हल्द्वानी में एस्ट्रो पार्क और अल्मोड़ा में साइंस सेंटर के निर्माण के माध्यम से राज्य में वैज्ञानिक अनुसंधान को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलाधिपति स्वामी रामदेव, कुलपति आचार्य बालकृष्ण, सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, डॉ. कल्पना सैनी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

आदि कैलाश में पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन में 22 राज्यों के 700 प्लस प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

उत्तराखंड के पौराणिक और आध्यात्मिक धरोहर स्थल आदि कैलाश की पवित्र छाया में आज राज्य की पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित यह आयोजन उत्तराखंड की साहसिक खेल क्षमता, प्राकृतिक धरोहर और पर्यटन संभावनाओं के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

यह 60 किलोमीटर लंबी अल्ट्रा रन आदि कैलाश से प्रारंभ हुई, जिसमें देश के 22 राज्यों से 700 से अधिक धावकों ने भाग लिया। ऊँचाई, कठोर मौसम और चुनौतीपूर्ण हिमालयी ट्रैक के बीच प्रतिभागियों ने अदम्य साहस, धैर्य और फिटनेस का अद्भुत प्रदर्शन किया।

प्रतिभागियों ने उत्तराखंड सरकार और जिला प्रशासन द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की जमकर प्रशंसा की। धावकों ने कहा कि आईटीबीपी तथा भारतीय सेना का सहयोग और मार्गदर्शन अतुलनीय रहा, जिसने इस कठिन रूट पर आयोजन को सफल और सुरक्षित बनाया।

प्रतिभागियों एवं स्थानीय लोगों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश आगमन के बाद इस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों में तेजी आई है। प्रधानमंत्री के हिमालयी क्षेत्रों में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण और राज्य सरकार के सतत प्रयासों से सीमांत क्षेत्र में साहसिक पर्यटन, धार्मिक पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।

कार्यक्रम में सचिव पर्यटन, आईटीबीपी अधिकारी श्, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग के अधिकारी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान स्थानीय जनता में भारी उत्साह देखने को मिला और हजारों लोगों ने धावकों का उत्साहवर्धन किया।

रजत जयंती वर्ष के अवसर पर यह आयोजन उत्तराखंड की ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ है, जो राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में एडवेंचर टूरिज़्म और खेल संस्कृति को नई ऊँचाई प्रदान करेगा। आदि कैलाश जैसे पवित्र और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थल से इस साहसिक पहल की शुरुआत को दूरगामी परिणामों वाला कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आदि कैलाश में पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन के सफल आयोजन पर सभी प्रतिभागियों, आयोजनकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि “यह आयोजन उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण है। आदि कैलाश जैसे पवित्र व आध्यात्मिक धाम में आयोजित यह ऐतिहासिक अल्ट्रा रन न केवल साहस और समर्पण की मिसाल है, बल्कि यह सीमांत क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन और खेल संस्कृति को नई दिशा देगा। राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यह आयोजन उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य और असीम संभावनाओं का प्रतीक है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और उनके द्वारा आदि कैलाश में किए गए दर्शन के बाद इस संपूर्ण क्षेत्र में पर्यटन और आध्यात्मिक गतिविधियों को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिला है। राज्य सरकार भी प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में हिमालयी और शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि-
“सीमांत क्षेत्रों का विकास हमारी प्राथमिकता है। अल्ट्रा मैराथन जैसे आयोजन न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देते हैं बल्कि युवा पीढ़ी में साहसिक खेलों के प्रति उत्साह भी पैदा करते हैं। आने वाले समय में उत्तराखंड साहसिक खेलों और पर्वतीय पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनेगा।”

राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण, उत्तराखंड में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में आयोजित हो रहे कला उत्सव

उत्तराखंड के पारंपरिक लोक पर्व इगास के शुभ अवसर पर आज देशभर से देहरादून पहुंचे प्रमुख फ़िल्म व कॉमेडी कलाकारों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की। राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में कला उत्सवों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें भाग लेने हेतु देशभर के लोकप्रिय हास्य व फ़िल्म कलाकार राजधानी में आए हैं।

इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कलाकारों का स्वागत एवं सम्मान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को नए आयाम देने, स्थानीय परंपराओं को संरक्षित करने और देवभूमि की नवाचार एवं पर्यटन क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। सांस्कृतिक आयोजनों में देश के प्रख्यात कलाकारों की भागीदारी से युवा पीढ़ी को नई प्रेरणा मिलती है तथा राज्य की कला एवं संस्कृति को वैश्विक पहचान प्राप्त होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक पर्व इगास उत्तराखंड की आस्था, परंपरा और सामूहिक उत्सव का प्रतीक है। इस पर्व के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक जड़ें और भी मजबूत होती हैं। उन्होंने कलाकारों द्वारा हास्य कला के माध्यम से समाज में सकारात्मकता, सौहार्द और उत्साह बढ़ाने के योगदान की सराहना की।

मुलाकात के दौरान कॉमेडी जगत के प्रसिद्ध कलाकार कृष्णा अभिषेक, हेमंत पांडे, हिमानी शिवपुरी सहित अनेक अन्य चर्चित कलाकार उपस्थित रहे। कलाकारों ने मुख्यमंत्री के साथ सांस्कृतिक संवाद साझा किया तथा प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक ऊर्जा की सराहना की। कलाकारों ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति, प्रकृति और लोगों के उत्साह से उन्हें अत्यंत प्रेरणा मिली है।

मुख्यमंत्री ने सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया तथा भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।