बिथ्याणी महाविद्यालय में एआई बॉट से रूबरू हुए मुख्यमंत्री योगी और धामी, ओपन जिम में व्यायाम कर दिया फिटनेस का संदेश

उत्तराखंड की पावन भूमि यमकेश्वर आज दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों के मिलन और विकास कार्यों की साक्षी बनी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संयुक्त रूप से यमकेश्वर क्षेत्र का भ्रमण कर महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी में विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दोनों मुख्यमंत्रियों ने यमकेश्वर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया। उन्होंने महादेव से देश व प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की प्रार्थना की। यमकेश्वर आगमन पर जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने अतिथियों का स्वागत किया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पैतृक गाँव पंचूर पहुँचे। यहाँ उन्होंने श्री विष्णु महायज्ञ में प्रतिभाग किया और परिवार व ग्रामीणों के साथ आध्यात्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बने। मुख्यमंत्री योगी ने मंदिर समिति का आभार जताते हुए कहा कि तीन वर्ष पूर्व जहाँ केवल श्रद्धा का भाव था, आज वहाँ भव्य मंदिर खड़ा है। युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा जीवन में प्रगति के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण का होना अनिवार्य है। अच्छा सोचने से परिणाम सुखद होते हैं, और इस सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने के लिए ईश्वर की भक्ति और आध्यात्मिकता ही सबसे सशक्त माध्यम है।

मुख्यमंत्री धामी ने मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व की सराहना करते हुए ऑपरेशन सिंदूर की बरसी का उल्लेख किया। उन्होंने क्षेत्र को बड़ी सौगात देते हुए बिथ्याणी महाविद्यालय को आदर्श कॉलेज के रूप में विकसित करने और क्षेत्र में मिनी स्टेडियम का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को वैश्विक स्तर की शिक्षा और खेल सुविधाएं देने हेतु संकल्पबद्ध है, जिसके क्रम में इस महाविद्यालय को हाईटेक किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है।

महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय, बिथ्याणी पहुँचने पर छात्राओं ने पारंपरिक भव्यता के साथ दोनों मुख्यमंत्रियों का भावपूर्ण अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरु गोरखनाथ की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अतिथियों ने महाविद्यालय की नई एआई आधारित वेबसाइट का डिजिटल उद्घाटन किया, जिसकी कार्यप्रणाली के बारे में त्रिलोक चंद्र शर्मा ने विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान डिजिटल तकनीक का अनूठा उदाहरण तब देखने को मिला जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं एआई बॉट से संवाद कर महाविद्यालय की परीक्षा प्रणाली व परिणामों की समीक्षा की, जबकि मुख्यमंत्री धामी ने छात्र संख्या और कौशल विकास जैसे विषयों पर चर्चा की। इसके अतिरिक्त, महाविद्यालय के नए भवन व सेमिनार हॉल का उद्घाटन और श्विकसित भारत एक संकल्पश् पुस्तक का विमोचन भी गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ।

युवाओं को फिटनेस के प्रति प्रेरित करने के लिए महाविद्यालय परिसर में ओपन जिम का लोकार्पण किया गया। दोनों मुख्यमंत्रियों ने स्वयं जिम उपकरणों पर व्यायाम कर स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता का संदेश दिया। प्रस्तावित स्टेडियम के लिए चिन्हित भूमि के निरीक्षण के दौरान उन्होंने आश्वस्त किया कि निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही यह जनता को समर्पित कर दिया जाएगा।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डॉ धन सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, स्थानीय विधायक रेनू बिष्ट, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ आनंद उनियाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, मुख्य विकास अधिकारी, गिरीश गुणवंत, उपजिलाधिकारी चतर सिंह चौहान, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ योगेश कुमार शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष राजगौरव नौटियाल सहित अन्य अधिकारी, महाविद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाएं, छात्र छात्राएं तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी पुरुषोत्तम के नेतृत्व में निर्वाचन प्रक्रिया का अध्यन करेगा प्रतिनिधिमंडल

भारत निर्वाचन आयोग की पहल पर विभिन्न राज्यों द्वारा लोकतांत्रिक देशों के निर्वाचन प्रक्रिया के शोध-अध्यन हेतु मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड डॉ. बी.बी.आर.सी. पुरुषोत्तम के नेतृत्व में 5 सदस्यी प्रतिनिधिमंडल यूरोप के सर्बिया गणराज्य पहुंचा।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सर्बिया के नोवी साद प्रांत की विधानसभा का भ्रमण किया, जहां लोकतांत्रिक संस्थाओं के संचालन एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की गई।

बैठक एवं भ्रमण कार्यक्रम में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदण्डे तथा सर्बिया में भारत के एम्बेसडर श्री अभिषेक शुक्ला सहित जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल उपस्थित रहे।

इस अवसर पर नोवी साद प्रांत विधानसभा की चेयरमैन दीना वुचिनिच ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए भारत और सर्बिया के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों एवं निर्वाचन प्रक्रियाओं के क्षेत्र में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।

इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि इस अध्ययन भ्रमण से दोनों देशों के निर्वाचन प्रबंधन, मतदाता जागरूकता एवं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिला है, जिससे भविष्य में आपसी सहयोग को और मजबूती मिलेगी।

भारत और सर्बिया के मध्य निर्वाचन प्रक्रियाओं एवं लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के श्रेष्ठ अनुभवों के आदान-प्रदान के उद्देश्य से भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सर्बिया की प्रांतीय निर्वाचन आयोग के साथ महत्वपूर्ण बैठक की।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सर्बिया की निर्वाचन प्रणाली, प्रशासनिक कार्यप्रणाली तथा चुनाव प्रबंधन की विभिन्न व्यवस्थाओं का अध्ययन किया।

प्रतिनिधिमंडल में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदण्डे, जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल, ईआरओ काशीपुर गौरव पांडे एवं बीएलओ मोहम्मद कलीम शामिल हैं।

बद्रीनाथ धाम के दिव्य स्वरूप को और अधिक भव्य व आकर्षक बनाने को मास्टर प्लान में सभी आवश्यक प्रावधान करेंः धामी

बद्रीनाथ धाम में संचालित पुनर्निर्माण कार्यों के साथ ही अब बद्रीनाथ को स्प्रिचुअल हिल टाउन के रूप में विकसित किये जाने की कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष सचिवालय में पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान के अंतर्गत चल रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी साझा की। बैठक में सचिव पर्यटन धीराज गर्ब्याल द्वारा प्रस्तुतिकरण के माध्यम से बताया गया कि बद्रीनाथ को एक आध्यात्मिक स्मार्ट हिल टाउन के रूप में विकसित करने के लिए बहु-आयामी और चरणबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य तीर्थयात्रियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ दिव्य और व्यवस्थित अनुभव प्रदान करना है।

उन्होंने बताया कि मास्टर प्लान के तहत क्षेत्र के सौंदर्यीकरण, सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्थलों को विशेष रूप से विकसित किया जा रहा है। देव दर्शनी पॉइंट को इस प्रकार तैयार किया जा रहा है कि श्रद्धालुओं को यहां से बद्रीनाथ धाम के प्रथम दर्शन एक भव्य और दिव्य रूप में प्राप्त हो सकें। वहीं बद्रीनारायण चौक को एक प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं और आकर्षक सार्वजनिक स्थल उपलब्ध होंगे।

बद्रीनाथ धाम में आईएसबीटी वॉल पर स्थानीय कला एवं धार्मिक विषयों पर आधारित भित्ति चित्रों के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जायेगा। वसुधा वाटिका कलाकृति के माध्यम से प्रकृति, आध्यात्मिकता और उत्तराखंड की पारंपरिक कला का समावेश करते हुए आकर्षक लैंडस्केप तैयार किए जायेंगे।

मास्टर प्लान में भगवान विष्णु से जुड़े प्रतीकों को भी प्रमुखता दी गई है, जिनमें पाञ्चजन्य शंख, कौमोदकी गदा, सुदर्शन चक्र, वैकुंठ द्वार जैसी भव्य कलाकृतियों का निर्माण किया जायेगा, जो न केवल धार्मिक महत्व को दर्शायेंगे, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र भी बनेंगे। इसके साथ ही शेषनेत्र कलाकृति और पंच तत्व थीम पर आधारित संरचनाएं आध्यात्मिक ऊर्जा और भारतीय दर्शन को दर्शाने का कार्य करेंगी। भगवान राम एवं कृष्ण पर आधारित रामायण एवं महाभारत कालीन प्रतीकों का इसमें समावेश किया गया है। दिया आरती स्थल के विकास की योजना भी तैयार की गई है, ताकि यहां आयोजित होने वाली आरती श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य और अविस्मरणीय अनुभव बने। वहीं पूरे क्षेत्र में स्ट्रीटस्कैप का विकास कार्य किया जाना भी प्रस्तावित है, जिसके तहत आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से पैदल मार्ग, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की सुविधाएं, साइनेज और सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्य कराये जायेंगे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बद्रीनाथ धाम के दिव्य स्वरूप को और अधिक भव्य एवं आकर्षक बनाने के लिए इस मास्टर प्लान में सभी आवश्यक प्रावधान सुनिश्चित किये जायें। साथ ही स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों के माध्यम से बद्रीनाथ में न केवल आध्यात्मिक वातावरण सुदृढ़ होगा, बल्कि पर्यटन को भी नई दिशा दी जा सकेगी। परियोजना के पूर्ण होने पर बद्रीनाथ एक ऐसे आदर्श स्थल के रूप में स्थापित होगा, जहां आस्था, आधुनिकता और प्रकृति का संतुलित संगम देखने को मिलेगा।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगोली, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, संयुक्त सचिव अनिल जोशी एवं संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

हिमाद्रि आइस रिंक की प्रथम वर्षगांठ कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में आयोजित हिमाद्रि आइस रिंक के जीर्णाेद्धार की प्रथम वर्षगांठ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों एवं सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए हिमाद्रि आइस रिंक की प्रथम वर्षगांठ पर शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड हॉकी आइस टीम की जर्सी व पे और प्ले पोर्टल का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की एकमात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर की आइस रिंक “हिमाद्रि” केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है, जो खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में स्थापित जीपे आइस रिंक में सर्वप्रथम साउथ एशियन विंटर गेम्स का आयोजन किया गया था, लेकिन बाद के वर्षों में विभिन्न कारणों से इसका सुचारु संचालन एवं रखरखाव नहीं हो पाने के कारण इसे बंद करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि आइस रिंक की बदहाल स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने इसे पुनः संचालित करने का संकल्प लिया और लगभग साढ़े 8 करोड़ रुपये की लागत से पिछले वर्ष इसी दिन इसका जीर्णाेद्धार कर इसे पुनः खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को समर्पित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके संचालन के लिए एक मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित कर हरित ऊर्जा को भी बढ़ावा दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के सामूहिक प्रयासों के परिणामस्वरूप आज यह आइस रिंक एक बार फिर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन का केंद्र बन रही है। उन्होंने बताया कि बीते एक वर्ष के दौरान यहां नेशनल आइस स्केटिंग चौंपियनशिप, एशियन ट्रॉफी, राष्ट्रीय आइस हॉकी लीग तथा महिला एवं बालक वर्ग की राष्ट्रीय टीमों के प्रशिक्षण शिविरों का सफल आयोजन किया गया। साथ ही वर्तमान में विभिन्न राज्यों के खिलाड़ी यहां स्केटिंग एवं आइस हॉकी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय आइस हॉकी टीम का प्रशिक्षण शिविर भी इसी आइस रिंक में आयोजित किया गया। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि पिछले वर्ष अगस्त माह में भारत ने पहली बार “एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी” की सफल मेजबानी की, जिसमें एशिया के 11 देशों के 200 से अधिक खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें भी उस ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनने का अवसर प्राप्त हुआ था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में आइस स्केटिंग और आइस हॉकी के प्रति बढ़ते आकर्षण को देखते हुए आने वाले समय में भारत शीतकालीन खेलों में एक मजबूत शक्ति के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “खेलो इंडिया” और “फिट इंडिया मूवमेंट” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से देश में खेल संस्कृति को प्रोत्साहन मिला है और आज भारत खेलों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार उत्तराखंड में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन से उत्तराखंड को “देवभूमि” के साथ-साथ “खेलभूमि” के रूप में नई पहचान मिली है। इन राष्ट्रीय खेलों में राज्य के खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना विकसित करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि इसी दिशा में शीघ्र ही राज्य के आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियों की स्थापना के लिए ‘स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान’ लागू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत प्रतिवर्ष 920 विश्वस्तरीय एथलीटों और 1000 अन्य खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में उत्तराखंड के पहले खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना के लिए भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेलों के समग्र विकास और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नई खेल नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेताओं को सरकारी नौकरी की सुविधा प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने खेल मंत्री रेखा आर्य से यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि खिलाड़ियों से संबंधित योजनाओं और प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो।

उन्होंने कहा कि आवासीय स्पोर्ट्स कॉलेजों में अध्ययनरत खिलाड़ियों को निःशुल्क प्रशिक्षण के साथ खेल छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त ‘मुख्यमंत्री खेल विकास निधि’, ‘मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना’, ‘मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी योजना’ तथा ‘खेल किट योजना’ के माध्यम से प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेलों को राष्ट्र निर्माण और युवा सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम मानते हुए उत्तराखंड को खेलों के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के खिलाड़ी अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर उत्तराखंड का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करते रहेंगे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, विधायक उमेश शर्मा काऊ, विशेष सचिव अमित सिन्हा, खेल विभाग के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में खिलाड़ी एवं खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

केदारनाथ धाम में किसी भी दशा में वीआईपी दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगीः पांडेय

आयुक्त गढ़वाल मंडल विनय शंकर पांडेय तथा आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप द्वारा आज रुद्रप्रयाग पहुंचकर श्री केदारनाथ धाम यात्रा व्यवस्थाओं के संबंध में यात्रा व्यवस्था नोडल अधिकारियों, संबंधित विभागीय अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं व्यापार मंडल के पदाधिकारियों के साथ जिला कार्यालय सभागार रुद्रप्रयाग में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में गढ़वाल आयुक्त द्वारा यात्रा व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा ने गढ़वाल आयुक्त महोदय को अब तक की यात्रा संचालन स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि अब तक 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए हैं। 31 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं तथा 11 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने हेली सेवाओं का उपयोग किया है। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा घोड़ा-खच्चर एवं डंडी-कंडी के माध्यम से यात्रा की गई है।

उन्होंने बताया कि यात्रा कंट्रोल रूम के माध्यम से सतत निगरानी की जा रही है, गैस सिलेंडर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, सभी अस्पताल पूर्णतः क्रियाशील हैं तथा म्यूल टास्क फोर्स तैनात है। 8 हजार से अधिक घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण एवं बीमा किया गया है। निर्धारित मानकों के उल्लंघन पर ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की जा रही है तथा अतिक्रमण वाले डेरे हटाए गए हैं। पशु चिकित्सालयों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं रेंडम चेकिंग भी कराई जा रही है।

यात्रा मार्ग पर पर्याप्त संख्या में शौचालयों की व्यवस्था की गई है तथा गौरीकुंड स्थित तप्तकुंड पर महिला एवं पुरुषों के लिए चेंजिंग रूम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त विद्युत, पेयजल, सोलर लाइट, स्ट्रीट लाइट एवं शटल सेवाओं की जानकारी भी दी गई।

पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर द्वारा यात्रा रूट प्लान, ट्रैफिक व्यवस्था, पार्किंग एवं आपातकालीन सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

गढ़वाल आयुक्त ने शौचालयों की नियमित साफ-सफाई, कार्मिकों की पर्याप्त तैनाती, सफाई सामग्री एवं पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही सेक्टर मजिस्ट्रेट के माध्यम से शौचालयों की रेंडम चेकिंग कराने के निर्देश देते हुए कहा कि यात्रा में स्वच्छता सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने यात्रा से संबंधित भ्रामक खबरों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा संबंधित विभागों को तत्काल अपना पक्ष जारी करने के निर्देश दिए, ताकि अफवाहों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

हेली सेवाओं में टिकटों का निर्धारित दरों पर ही विक्रय सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा गया कि यदि मनमाने तरीके से टिकट बिक्री या वसूली की शिकायत मिलती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सोनप्रयाग में रजिस्ट्रेशन काउंटर पर भीड़ नियंत्रण हेतु विशेष प्लान लागू करने के निर्देश भी दिए गए।

धाम क्षेत्र में फायर ऑडिट कराने तथा सभी आवश्यक अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

जनप्रतिनिधियों से भी लिए सुझाव
आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पांडेय ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं व्यापार मंडल के सदस्यों के साथ बैठक कर श्री केदारनाथ धाम यात्रा के सुगम संचालन के संबंध में आवश्यक जानकारी प्राप्त की। बैठक में विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल ने यात्रा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए तुना-बौंठा मोटर मार्ग के डामरीकरण, तुंगनाथ-चोपता में पार्किंग निर्माण, शौचालय व्यवस्था तथा प्रमुख मंदिर मार्गों पर साइन बोर्ड लगाने की मांग रखी। जिलाधिकारी द्वारा एक सप्ताह में साइन बोर्ड लगाने का आश्वासन दिया गया।

जिला पंचायत सदस्य अमित मैंखंडी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा भी विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए गए, जिन पर आयुक्त द्वारा आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।

गढ़वाल आयुक्त ने बताया कि उन्होंने ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग तक सड़क मार्ग का निरीक्षण किया है, जिसमें अधिकांश स्थानों पर मार्ग की स्थिति संतोषजनक पाई गई है तथा आवश्यक स्थलों पर सुधार हेतु निर्देश जारी किए गए हैं।

18 किलोमीटर पैदल मार्ग पर शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने हेतु हर समय सफाई कर्मियों एवं पर्यावरण मित्रों की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं। केदारनाथ धाम में अग्नि सुरक्षा के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद हेतु ₹5 लाख की धनराशि पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग को आवंटित की गई है।

सुरक्षा के दृष्टिगत रात्रि 10रू00 बजे से प्रातः 4रू00 बजे तक यात्रा मार्ग पर यात्री वाहनों एवं पैदल आवागमन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। केवल आवश्यक सामग्री के परिवहन को अनुमति दी जाएगी तथा उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गढ़वाल आयुक्त ने कहा कि पुलिस एवं सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की गई है तथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि वे सोनप्रयाग एवं गौरीकुंड का स्थलीय निरीक्षण करेंगे तथा यात्रियों से संवाद स्थापित करेंगे। मौसम अनुकूल होने पर केदारनाथ धाम तक पैदल निरीक्षण भी प्रस्तावित है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दशा में वीआईपी दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। मौसम की प्रतिकूलता के कारण हेली सेवाओं में आ रही बाधाओं का संज्ञान लेते हुए हेली कंपनियों को पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

गढ़वाल आयुक्त ने कहा कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार यदि यात्रा मार्ग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो आवश्यकतानुसार यात्रा को रोका जा सकता है। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को परिस्थिति के अनुसार 2-3 घंटे के लिए यात्रा रोकने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में आज भी यात्रा को कुछ समय के लिए रोका गया।

उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है तथा सुरक्षित एवं सुगम यात्रा संचालन सरकार की प्राथमिकता है, जिसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य कर रहे हैं।

बैठक में विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, अगस्तमुनि ब्लॉक प्रमुख भुवनेश्वरी देवी, जिला पंचायत सदस्य अमित मैंखंडी, जिला पंचायत सदस्य जयवर्धन कांडपाल, नगर पालिका अध्यक्ष रुद्रप्रयाग संतोष रावत, जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत, अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा, उपजिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल रावत, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम प्रकाश, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आशीष रावत, अधिशासी अभियंता एनएच ओंकार पांडे, जिला पर्यटन अधिकारी राहुल चौबे, जिला विकास अधिकारी अनीता पंवार, जिला पूर्ति अधिकारी के.एस. कोहली, एआरटीओ धर्मेंद्र सिंह, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र महेश प्रकाश, सुलभ इंटरनेशनल से धनंजय पाठक, जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेश मिश्रा, अधिशासी अभियंता डीडीएमए राजविंद सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

चार धाम यात्रा 2026ः अब तक चार लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

प्रदेश में चारधाम यात्रा सुचारु रूप से संचालित हो रही है। राज्य सरकार द्वारा यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि श्रद्धालु निश्चिंत होकर सुरक्षित एवं सुगम रूप से दर्शन कर सकें।

चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों, श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए चारधाम यात्रा मार्गों सहित प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पार्किंग एवं यातायात व्यवस्थाओं को सुदृढ़ एवं व्यवस्थित किया गया है।

राज्य सरकार ने यात्रा व्यवस्थाओं के संबंध में भ्रामक जानकारी प्रसारित करने वालों तथा गंदगी फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, ताकि यात्रा की पवित्रता एवं व्यवस्थाएं बनी रहें।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार चारधाम कपाट खुलने से 28 अप्रैल, 2026 की सांय 7रू00 बजे तक मात्र दस दिनों में कुल 04 लाख 08 हजार 401 श्रद्धालु चारधाम में दर्शन हेतु पहुंचे हैं।

धामवार विवरण इस प्रकार हैकृ

श्री बद्रीनाथ धामः कपाट उद्घाटन के छह दिनों में 84,942 श्रद्धालु पहुंचे।

श्री केदारनाथ धामः सात दिनों में 2,07,452 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

यमुनोत्री धामः दस दिनों में 57,794 श्रद्धालु पहुंचे।

गंगोत्री धामः दस दिनों में 57,863 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

इसके अतिरिक्त गौमुख में अब तक 440 यात्री पहुंचे हैं।

वर्तमान यात्रा सीजन में अब तक कुल 64,115 वाहन यात्रियों को लेकर चारधाम पहुंचे हैं।

राज्य सरकार द्वारा सभी संबंधित विभागों के समन्वय से यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

देहरादून में महिला आरक्षण बिल गिरने पर सड़कों पर उतरी मातृशक्ति, सीएम धामी ने विपक्ष की मानसिकता की उजागर

देहरादून में आज गांधी पार्क से घण्टाघर तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आयोजित महिला आक्रोश मशाल यात्रा ने प्रदेश में एक नया संदेश दिया। इस विशाल आयोजन में महिला आरक्षण बिल गिरने के विरोध में हजारों की संख्या में माताएं, बहनें और बेटियां शामिल हुईं, जिसने स्पष्ट कर दिया कि अब नारी शक्ति अपने अधिकारों को लेकर पूरी तरह सजग और मुखर हो चुकी है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह मशाल यात्रा केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं, बल्कि उन ताकतों के खिलाफ जनाक्रोश है जो महिलाओं के अधिकारों में बाधा डालने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश की नारी अब अपने सम्मान और अधिकारों के लिए एकजुट होकर खड़ी है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को वर्षों तक लंबित रखा गया, जबकि हाल के प्रयासों ने इसे आगे बढ़ाने का कार्य किया। लेकिन राजनीतिक स्वार्थों के चलते इस दिशा में बाधाएं उत्पन्न की गईं, जिसे जनता भली-भांति देख रही है।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए यह संदेश दिया कि कुछ राजनीतिक दल महिलाओं के अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं हैं और उन्होंने हमेशा इसे केवल एक राजनीतिक मुद्दा बनाकर रखा। उन्होंने यह भी संकेत किया कि नई पीढ़ी की महिलाएं अब इन बातों को समझ चुकी हैं और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देंगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज की भारतीय नारी केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली शक्ति बन रही है। केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए किए गए प्रयासों को उन्होंने परिवर्तनकारी बताया और यह संकेत दिया कि अब नीतियां केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीन पर दिखाई दे रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी कुछ परंपरागत और परिवारवादी राजनीति करने वाले दलों को असहज कर रही है। इसी कारण वे महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार देने से कतराते रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने यह विश्वास भी दिलाया कि राज्य सरकार मातृशक्ति के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की प्रगति ही प्रदेश और देश के विकास का आधार है।

इस विशाल मशाल यात्रा के माध्यम से एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी उभराकृकि आने वाले समय में महिला शक्ति अपनी एकजुटता के बल पर उन सभी ताकतों को जवाब देगी जो उनके अधिकारों के मार्ग में बाधा बनती हैं।

अंततः यह आयोजन केवल विरोध नहीं, बल्कि एक संकल्प के रूप में सामने आयाकृएक ऐसा संकल्प, जिसमें नारी शक्ति अपने सम्मान, अधिकार और भागीदारी के लिए निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है।

कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, विधायक सविता कपूर, आशा नौटियाल सहित विभिन्न जनप्रतिननिधि तथा बड़ी संख्या में प्रदेश भर से आई महिलाएं उपस्थिति रही।

देहरादूनः मुख्यमंत्री धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को किया संबोधित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र दृ ‘नारी सम्मान- लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने सदन के सामने महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति वंदन बिल को यथाशीघ्र लागू करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए सर्वसम्मत संकल्प व्यक्त करने का प्रस्ताव रखा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन की शुरुआत राज्य आंदोलनकारियों के साथ ही उत्तराखंड में नारी शक्ति का प्रतीक गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, मंगला देवी, हंसा धनाई, सरला बहन, बेलमती चौहान, सुशीला बहन, कमला पंत जैसी महिलाओं को नमन करने के साथ किया। मुख्यमंत्री ने सदन से अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे उपायों का समर्थन करने में किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को देवी मानकर उसकी आराधना की जाती है। माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती के रूप में हम नारी के साहस, समृद्धि और ज्ञान के स्वरूप का वंदन करते हैं। उन्होने कहा कि भारत के इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले से लेकर अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला तक नारी शक्ति के असंख्य प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिलते हैं। नारी शक्ति अब केवल ’’सहभागिता’’ तक सीमित नहीं है, बल्कि ’’नेतृत्व’’ की भूमिका निभा रही है। चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता हो, क्रिकेट का विश्व कप जीतना हो, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से पास-आउट होना हो, या फिर सेना और वायु सेना में अग्रिम पंक्ति के मोर्चों पर काम करना हो, ये सब नारी शक्ति के उदाहरण हैं। इसी तरह उत्तराखंड भी अदम्य साहस की प्रतीक तीलू रौतेली, उत्तराखंड की लक्ष्मी बाई कही जाने वाली रानी जिया रानी और चिपको आंदोलन की अग्रदूत गौरा देवी नारी शक्ति का उदाहरण हैं।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम युगांतकारी कदम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नारी शक्ति के सामर्थ्य को समझते हुए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए थे। इस ऐतिहासिक अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। ये इन सदनों में केवल मातृशक्ति की संख्या बढ़ाने का प्रयास भर नहीं था, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया एक युगांतकारी कदम था। प्रधानमंत्री ने इस विराट संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए समस्त देशवासियों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों से भी सहयोग और समर्थन का आह्वान किया था। इसी कड़ी में अगले लोकसभा चुनावों तक देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने के उद्देश्य से 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस ऐतिहासिक संकल्प को साकार करने की दिशा में निर्णायक प्रयास किया। परंतु विपक्षी दलों ने मिलकर इस ऐतिहासिक और युग परिवर्तनकारी पहल को संसद में पारित नहीं होने दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि लोकसभा में संख्या बल के कारण जब बिल पारित नहीं हो पाया तो, विपक्षी दल के नेता तालियाँ बजा रहे थे। उस दृश्य को देखकर महाभारत की वो सभा याद आ गई, जिसमें द्रौपदी का अपमान किया गया था।

विपक्ष कर रहा भ्रम फैलाने का प्रयास
उन्होंने कहा कि विपक्ष अब महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। जबकि लोकसभा में ही गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर किया था कि परिसीमन के माध्यम से किसी भी राज्य की सीटों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा, इसीलिए सीटें बढ़ाने का प्राविधान बिल में रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार देने के बारे में कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पर जब पहली बार किसी ने सच्चे मन से महिलाओं के हित में कार्य करने का प्रयास किया तो उसे भी नहीं करने दिया। जबकि आदरणीय प्रधानमंत्री लोकसभा में ये स्पष्ट कह चुके थे की यदि ये बिल पास हो जाएगा तो इसका पूरा श्रेय वो विपक्ष को देने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अब देश की मातृशक्ति पूरी तरह से समझ चुकी है कि कौन उनके अधिकारों के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहा है।

केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में शपथ लेने के साथ ही नारी सशक्तिकरण को शासन की प्राथमिकता में रखकर कार्य करना प्रारम्भ कर दिया था। यही कारण है कि पिछले 11 वर्षों में जेंडर बजट में पाँच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2026-27 के बजट में महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण हेतु 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2015 में शुरू हुए “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान से पिछले 11 वर्षों में लिंगानुपात और बालिका शिक्षा में उल्लेखनीय परिवर्तन आए हैं। पिछले 11 वर्षों में महिला-पुरुष लिंगानुपात में 12 अंकों की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, माध्यमिक स्तर पर स्कूलों में लड़कियों का कुल नामांकन अनुपात 3 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ा है। इतना ही नहीं, बीते 11 वर्षों में संस्थागत प्रसव 61 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत हो गया है। आज “सुकन्या समृद्धि योजना” के अंतर्गत बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 8.2 प्रतिशत की उच्च ब्याज दर के साथ टैक्स-फ्री बचत की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस योजना के तहत अब तक 4 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं और 3.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हो चुकी है।

तीन तलाक से दिलाई मुक्ति
वहीं “प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना” के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, “स्वच्छ भारत मिशन” के द्वारा घर-घर शौचालयों का निर्माण कर महिलाओं को गरिमा और सुरक्षा प्रदान की गई है। जिससे खुले में शौच की समस्या से मुक्ति मिली और महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सम्मान दोनों की रक्षा हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को इस कुप्रथा से कानूनी संरक्षण प्रदान करने का काम किया है। जबकि पूर्व में सरकारों ने इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट तक बदलने का काम किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प का ही परिणाम है कि आज देश के सामान्य घरों की बेटियां रसोई से रायसीना हिल तक का सफर तय कर रही है। राष्ट्रपति आदरणीय द्रौपदी मुर्मू से लेकर ‘’ऑपरेशन सिंदूर’’ में अग्रणी भूमिका निभाने वाली विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी इसका उदाहरण हैं।

उत्तराखंड को मिलता फायदा
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कुछ लोग उत्तराखंड में भी महिला आरक्षण पर वही झूठ और भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिसीमन के बाद उत्तराखंड विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 105 हो सकती थी, जिसमें से 35 महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती थी। इसी तरह सांसदों कि संख्या भी 5 से बढ़कर 7 या 8 हो जाती, इससे हर किसी का फायदा ही था, फिर भी विपक्ष ने बिल पास नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि यदि सामान्य घरों से महिलाएं राजनीति में आ जाएंगी तो कुछ दलों की वंशवादी राजनीति की दुकानें बंद हो जाएंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी के पहले मंत्रीमंडल और राजीव गांधी की कैबिनेट में केवल एक- एक महिला मंत्री थीं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा मंत्रिमंडल में 7 महिला मंत्री हैं।

प्रदेश में मजबूत हो रही मातृशक्ति
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार भी महिला सशक्तिकरण के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। इस वर्ष जेंडर बजट के अंतर्गत लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश सरकार द्वारा ’’उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन’’ के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है।
इसके साथ ही, ’’सशक्त बहना उत्सव योजना’’ और ’‘मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना’’ के माध्यम से हमने राज्य की मातृशक्ति को नए अवसर और शक्ति प्रदान करने का काम किया है। सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण और ‘’एकल महिला स्वरोजगार योजना’’ के माध्यम से महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान कर रही है। साथ ही साथ ’’मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना” के अंतर्गत महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में विकसित करने का काम भी किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के प्रयासों से आज प्रदेश की 2 लाख 65 हजार से अधिक बहनों ने “लखपति दीदी’’ बनकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में इतिहास रचा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है, वहीं, सहकारी समितियों में भी आज महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जा रहा है। खेल के क्षेत्र में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा लोहाघाट में लगभग 256 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किया जा रहा है।

एक दिन जरूर पूरा होगा संकल्प
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में सर्वप्रथम “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। यूसीसी से उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। अब यूसीसी की मांग पूरे देश में उठ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने धारा 370 हटाने, अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर निर्माण और दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारने का काम किया है। उसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य भी अवश्य करेगी।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर दलगत हितों से ऊपर उठकर सकारात्मक और स्पष्ट रुख अपनाया जाए, ताकि देश की आधी आबादी को उनका उचित अधिकार मिल सके।

दिल्ली से दून ढाई घंटे में पहुंचे सीएम धामी, बोले ये है नए भारत की तेज रफ्तार

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली दौरे के बाद सड़क मार्ग से लौटते हुए दिल्ली देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से देहरादून का सफर महज करीब ढाई घंटे में पूरा किया, जो पहले की तुलना में बेहद कम समय है।

मुख्यमंत्री धामी ने इस दौरान केंद्र सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में देश में जिस गति से सड़क और परिवहन सुविधाओं का विकास हो रहा है, यह उसी का परिणाम है। अब उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों को भी इसका सीधा लाभ मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि दिल्लीदृदेहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर न केवल यात्रा समय को कम कर रहा है, बल्कि पर्यटन, निवेश और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। इससे चारधाम यात्रा समेत राज्य के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच और अधिक सुगम होगी।

मुख्यमंत्री ने इसे नए भारत की नई रफ्तार बताते हुए कहा कि इस तरह की परियोजनाएं उत्तराखंड के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

गुरूग्राम में सीएम धामी ने डायरेक्ट सेलिंग मॉडल को बताया आत्मनिर्भर भारत का सशक्त माध्यम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुग्राम में आयोजित AWPL के भव्य “विजय पर्व” कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से AWPL के उन प्रतिभाशाली एवं परिश्रमी साथियों को सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने अपने परिश्रम और समर्पण से सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि यह संस्थान डायरेक्ट सेलिंग मॉडल के माध्यम से अपने उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा रहा है, जिससे ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध हो रहे हैं और लाखों लोगों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित विशाल जनसमूह का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि डायरेक्ट सेलिंग मॉडल आज लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए AWPL के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ डॉ. संजीव कुमार तथा उनकी पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं को “जॉब सीकर” के बजाय “जॉब क्रिएटर” बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है और डायरेक्ट सेलिंग मॉडल इसी सोच का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम है, बल्कि व्यक्तित्व विकास और क्षमताओं को निखारने का भी अवसर प्रदान करता है।

उन्होंने विशेष रूप से युवाओं एवं मातृशक्ति की भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि आज महिलाएं इस प्रकार के प्लेटफॉर्म के माध्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं और समाज में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2021 में केंद्र सरकार द्वारा डायरेक्ट सेलिंग क्षेत्र के लिए उपभोक्ता संरक्षण एवं स्पष्ट नियम लागू किए गए, जिससे इस क्षेत्र में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। इन नियमों से डायरेक्ट सेलर्स के अधिकार मजबूत हुए हैं तथा पूरे सेक्टर को एक संगठित एवं भरोसेमंद ढांचा प्राप्त हुआ है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है और देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे देश में निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत को विश्व स्तर पर विकास, विश्वास और अवसरों की भूमि के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने “स्टार्टअप इंडिया”, “वोकल फॉर लोकल”, “मेक इन इंडिया”, “स्किल इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से देश आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में हो रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट के अंतर्गत 3.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौते हुए, जिनमें से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतारे जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था निरंतर सशक्त हो रही है, जिसमें जीएसडीपी में 7.23% की वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय में लगभग 41% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य का वार्षिक बजट 60 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं तथा स्टार्टअप्स की संख्या 700 से बढ़कर 1750 से अधिक हो गई है। साथ ही हेलिपोर्ट और हेलिपैड की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे कनेक्टिविटी और आपदा प्रबंधन क्षमता मजबूत हुई है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बिजली उत्पादन तीन गुना से अधिक बढ़ा है तथा पर्यटन क्षेत्र में होटल उद्योग में लगभग 25% और होमस्टे में 50% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य ने सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है तथा Ease of Doing Business और Startup Ranking में भी अग्रणी श्रेणियों में स्थान हासिल किया है। साथ ही, इनोवेशन इंडेक्स में हिमालयी राज्यों में दूसरा स्थान और नीति आयोग के SDG इंडेक्स में प्रथम स्थान प्राप्त करना राज्य की उपलब्धियों को दर्शाता है।

उन्होंने मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि “वोकल फॉर लोकल” और “लोकल टू ग्लोबल” की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए “हाउस ऑफ हिमालयाज” ब्रांड की शुरुआत की गई है, जिसके माध्यम से स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप प्रदेश की लगभग पौने तीन लाख महिलाएं “लखपति दीदी” बनकर सशक्तिकरण की दिशा में अग्रसर हुई हैं।

उन्होंने कहा कि AWPL भी स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

अंत में मुख्यमंत्री ने सभी उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे प्रधानमंत्री के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में अपना सक्रिय योगदान दें तथा देश को आगे बढ़ाने के इस अभियान में सहभागी बनें।