मुख्यमंत्री ने कहा, नागरिकों को पारदर्शी एवं समयबद्ध सेवाएं देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

उत्तराखण्ड पुलिस को वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पासपोर्ट आवेदनों के सत्यापन में उत्कृष्ट एवं प्रभावी कार्य निष्पादन के लिए भारत सरकार द्वारा “Institutional Performance Award for State Police” से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान देशभर में पासपोर्ट आवेदनों के पुलिस सत्यापन संबंधी प्रदर्शन के आधार पर प्रदान किया गया।

नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय के जवाहरलाल नेहरू भवन में आयोजित समारोह में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर द्वारा उत्तराखण्ड पुलिस की ओर से ए. पी. अंशुमान, अपर पुलिस महानिदेशक, प्रशासन को यह सम्मान प्रदान किया गया।

पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने बताया कि यह सम्मान उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया को समयबद्ध, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने हेतु किए गए सतत प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि के लिए उत्तराखण्ड पुलिस को बधाई देते हुए कहा कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह उपलब्धि उसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सफलता का प्रतीक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी उत्तराखण्ड पुलिस नागरिक सेवाओं के क्षेत्र में इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का गौरव बढ़ाती रहेगी।

सीएम धामी की बड़ी कार्रवाई, हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले में पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी और तत्कालीन डीएम पर मेजर पनिशमेंट की संस्तुति

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है।

प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के समुचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (क्वच्ज्) को संस्तुति भेजी जा रही है।

इसके अलावा, उस समय कार्यरत एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।

गौरतलब है कि हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले के सामने आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया था। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट के माध्यम से पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल कराई गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वाेपरि है तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।

धामी सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जिसने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनधन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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हरिद्वार भूमि खरीद प्रकरण में बड़ा एक्शन, 10 लोगों पर दर्ज होगा अभियोग
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस के संकल्प के तहत हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी कार्रवाई की गई है। विजिलेंस की विस्तृत जांच में आपराधिक षड्यंत्र एवं धोखाधड़ी के माध्यम से भूमि क्रय-विक्रय कर नगर निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मामले में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों तथा भूमि विक्रेताओं के विरुद्ध अभियोग दर्ज किए जाने का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा अनुमोदन किया गया है। जांच में दोषी पाए गए व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

अभियोग दर्ज किए जाने वाले व्यक्तियों में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकान्त भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियन्ता एवं प्रभारी अधिशासी अभियन्ता आनन्द सिंह मिश्राण, तत्कालीन सम्पत्ति लिपिक वेदपाल तथा तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त भूमि विक्रेता एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों में सुमन देवी, जितेन्द्र कुमार, अभिषेक यादव तथा सुजीत कुमार सिंह के विरुद्ध भी अभियोग दर्ज किया जाएगा।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। शासन की प्राथमिकता पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करना है तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।

फिर सफल होंगे सीएम धामी के प्रयास, मेरठ से लक्ष्मणझूला ऋषिकेश तक चलेगी हाई स्पीड नमो भारत ट्रेन

मेरठ के मोदीपुरम से ऋषिकेश के पास लक्ष्मणझूला तक हाई स्पीड नमो भारत ट्रेन (आरआरटीएस) का सपना सच होने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से, उत्तराखण्ड, यूपी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के बीच आरआरटीएस ट्रेन के मौजूदा नेटवर्क को मेरठ से ऋषिकेश तक विस्तार देने पर सहमति बन गई है। परियोजना की डीपीआर के लिए जल्द सर्वे होने जा रहा है।

इसी वर्ष फरवरी माह में दिल्ली से मेरठ के मोदीपुरम तक हाईस्पीड नमो भारत ट्रेन का संचालन शुरू हो चुका है। इस हाईस्पीड ट्रेन को मोदीपुरम से ऋषिकेश तक विस्तार देने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार प्रयासरत रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर प्रस्ताव भी सौंपा था। इसके बाद इस ट्रेन को मोदीपुरम से ऋषिकेश में लक्ष्मणझूला तक विस्तार देने पर सहमति बन गई है। परियोजना को गति देने के लिए उत्तराखण्ड सरकार अपर सचिव रीना जोशी को नोडल अधिकारी नियुक्त कर चुकी है, इसी तरह एनसीआरटीसी ने अपना नोडल नियुक्त कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार भी परियोजना पर सहमति दे चुकी है। इसके बाद अब कुल 150 किलोमीटर प्रस्तावित ट्रैक की डीपीआर तैयार करने के लिए सर्वे शुरु होने जा रहा है।

प्रस्तावित परियोजना के मुताबिक मेरठ के मोदीपुरम स्टेशन से नया ट्रैक शुरू होगा, जो मुजफ्फरनगर होते हुए, उत्तराखण्ड की सीमा में प्रवेश करेगा। इसके बाद ये ट्रैक रुड़की, हरिद्वार में हर की पैड़ी होते हुए, ऋषिकेश के अंतिम छोर लक्ष्मणझूला तक पहुंचेगा। इसका 72 किमी का हिस्सा उत्तर प्रदेश में और 78 किमी का हिस्सा उत्तराखण्ड में आएगा।

इससे उत्तराखण्ड आने वाले तीर्थयात्रियों सहित दिल्ली जाने वाले उत्तराखण्ड के लोगों का भी नया आधुनिक ट्रांसपोर्ट विकल्प मिल पाएगा। वर्तमान में दिल्ली से ऋषिकेश जाने में सड़क मार्ग से करीब पांच से छह घंटे का समय लगता है। नमो भारत ट्रेन (160 किमी/प्रति घंटे की रफ्तार) के शुरू होने के बाद यह सफर सिर्फ ढाई से तीन घंटे में पूरा हो जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मेरठ से ऋषिकेश तक नमो भारत ट्रेन सेवा का विस्तार उत्तराखण्ड की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा। इससे तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को तेज, सुरक्षित एवं आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। राज्य सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और एनसीआरटीसी के साथ लगातार समन्वय कर रही है। हमारा प्रयास है कि उत्तराखण्ड में बेहतर रेल और परिवहन अवसंरचना के माध्यम से विकास तथा रोजगार के नए अवसर सृजित हों

केंद्रीय मंत्री से मिले सीएम धामी, किशाऊ बांध परियोजना को लेकर स्थिति स्पष्ट

किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ होने से उत्तराखंड को ऊर्जा संकट से निपटने में बड़ी राहत मिलेगी। प्रदेश को इससे लगभग 220 मेगावाट बिजली उपलब्ध होगी।

परियोजना के अंतर्गत पावर प्लांट के निर्माण का खर्च उत्तराखंड और हिमाचल मिलकर उठाएंगे। उत्तराखंड को खर्च के लिए केंद्र की ओर से वित्तीय सहायता देने पर सहमति बनी है।

15 हजार करोड़ लागत से किशाऊ बहुद्देश्यीय परियोजना से 442 मेगावाट विद्युत उत्पादन होना है। इस परियोजना के बनने से उत्तराखंड समेत छह राज्य हिमाचल, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान लाभान्वित होंगे।

उत्तराखंड व हिमाचल को कुल उत्पादित बिजली का 50-50 प्रतिशत मिलेगा, जबकि अन्य चार राज्यों की बांध से मिलने वाले पानी में हिस्सेदारी रहेगी। किशाऊ एशिया में टिहरी बांध के बाद दूसरा सबसे बड़ा बांध होगा।

इसकी ऊंचाई 235 मीटर प्रस्तावित है। टिहरी बांध की ऊंचाई 260 मीटर है। उत्तराखंड में देहरादून जिले और हिमाचल के सिरमौर जिले में यमुना की सहायक नदी टोंस पर इस परियोजना के निर्माण में हिमाचल की ओर से अड़ंगा लगा हुआ था।

जलविद्युत सरप्लस हिमाचल ने इस परियोजना पर होने वाले वित्तीय व्ययभार को उठाने में असमर्थता व्यक्त की थी। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में स्टेकहोल्डर सभी राज्यों के साथ बैठक में इस परियोजना को लेकर लंबे समय से बना गतिरोध टूट गया।

इस गतिरोध के चलते परियोजना की लागत 11500 करोड़ से बढ़कर 15 हजार करोड़ हो चुकी है। वर्ष 1944-45 में इस परियोजना की परिकल्पना की गई, लेकिन वर्ष 1965 में इसकी पहली डीपीआर तैयार हो सकी।

अब तक इसकी डीपीआर कई बार संशोधित हो चुकी है। वर्ष 2015 में इस राष्ट्रीय परियोजना पर काम आगे बढ़ने की उम्मीद बंधी थी, लेकिन मामला अटक गया।

परियोजना के निर्माण से उत्तराखंड के नौ गांव व 1452 हेक्टेयर भूमि और हिमाचल के आठ गांव व 1498 हेक्टेयर भूमि समेत लगभग छह हजार व्यक्ति इससे प्रभावित होंगे। इस परियोजना से 1379 मिलियन यूनिट बिजली सालाना मिलेगी।

किशाऊ बांध परियोजना से 97,076 हेक्टेयर जमीन को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इस परियोजना में करीब 32 किमी लंबी झील बनना प्रस्तावित है।

परियोजना में विद्युत घटक के अंतर्गत पावर प्लांट के निर्माण पर हिमाचल और उत्तराखंड को 1536 करोड़ खर्च करने हैं।

इसका आधा उत्तराखंड के हिस्से में आएगा। साथ में पानी पर हिस्सेदारी के लिए बांध निर्माण में लगभग 150 करोड़ की राशि उत्तराखंड को खर्च करनी होगी।

केंद्र सरकार ने विद्युत घटक पर होने वाले लगभग 800 करोड़ के खर्च के लिए राज्य को 50 वर्ष की अवधि के लिए ब्याजमुक्त ऋण के रूप में विशेष वित्तीय सहायता देने पर सहमति व्यक्त की है।

मुख्यमंत्री धामी ने दिवंगत निशानेबाज जसपाल राणा के आवास पहुंचकर व्यक्त की शोक संवेदना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज पद्मश्री से सम्मानित एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त निशानेबाज स्वर्गीय जसपाल राणा के देहरादून आवास पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय जसपाल राणा के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों को इस दुःख की घड़ी में धैर्य एवं संबल प्रदान करने की कामना की।

मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिवारजनों से भेंट कर उन्हें सांत्वना दी और ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने की प्रार्थना की।

अर्न्तराष्ट्रीय सेमीनार के आयोजन से उत्तराखण्ड की दालचीनी को वैश्विक स्तर पर मिलेगी पहचानः गणेश

कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास सस्थान सेलाकुई, देहरादून में दालचीनी प्रवर्धन, सतत खेती एवं कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों में नवाचार विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला का शुभारम्भ किया।

कृषि मंत्री द्वारा अपने सम्बोधन में सिनामन पर अर्न्तराष्ट्रीय सेमीनार के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इससे उत्तराखण्ड की दालचीनी का वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार होगा। उन्होंने कहा कि महक कान्ति नीति के अन्तर्गत दालचीनी की खेती के विकास में वैज्ञानिक तरीके से कार्य किया जायेगा। इस सेमीनार में श्रीलंका, इण्डोनेशिया एवं भारत के प्रतिष्ठित सस्थानो से सिनामन के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, एरोमा उद्योगों से जुडे उद्यमियों के साथ-साथ राज्य में सिनामन की खेती कर रहे किसान सम्मिलित हुये है, जिससे किसानों को विशेषज्ञों के अनुभव का लाभ होगा तथा सिनामन की खेती में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकेगा।
इस अवसर पर डा० सुरेन्द्र नारायण पाण्डे, सचिव, कृषि एवं कृषक कल्याण द्वारा बताया गया कि महक कान्ति नीति के अन्तर्गत किसानों को सिनामन एवं अन्य सगन्ध फसलों की खेती हेतु नीति तैयार की गयी है। इस नीति के सफल क्रियान्वयन से राज्य में सगन्ध सेक्टर का टर्नओवर रु० 1180 करोड प्रतिवर्ष किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।

निदेशक, परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास संस्थान डॉ. नृपेन्द्र चौहान द्वारा राज्य में सगन्ध सेक्टर में किये जा रहे प्रयासों के सम्बन्ध में सक्षिप्त में अवगत कराया गया तथा साथ ही बताया गया कि वृहद स्तर पर सगन्ध खेती के विस्तार हेतु राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड महक कान्ति नीति 2026-36 तैयार की गयी जिसके अन्तर्गत आज की कार्यशाला के विषय दालचीनी की खेती जनपद नैनीताल एवं चम्पावत में 5200 है० क्षेत्रफल में किये जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके अन्तर्गत 20800 किसानों को लाभान्वित किया जायेगा।

इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि के रुप में उपस्थित योगेश दूबे, अध्यक्ष फेगरेन्स एण्ड फ्लेवर एसोसियेशन ऑफ इण्डिया, मुम्बई, सुनीत गोयल, अध्यक्ष इन्शेसियल ऑयल एसोसियेशन आफ इण्डिया, नोयडा तथा रोहित सेठ, अध्यक्ष, सुगन्ध व्यापार संघ नई दिल्ली द्वारा काशीपुर, ऊधम सिंह नगर में स्थापित किये जा रहे एरोमा पार्क के प्रगति के सम्बन्ध में अपने सम्बोधनों में अवगत कराया गया और साथ ही उनके द्वारा एरोमा पार्क में मिलने वाले प्रोत्साहन योजनाओं के लाभ की सीमा को बढाने का अनुरोध किया गया।

कार्यक्रम में श्रीलंका से आये चिन्धका विदाना पथिराना, उपनिदेशक, नेशनल सिनेमन रिसर्च एंड ट्रेनिग सेटर, मुदिता जयतिलका, निदेशक, प्योर सिनेमन एक्सपोर्ट्स, श्रीलंका, डॉ. सेटियारी मरवान्तो. रिसर्च सेंटर फॉर एस्टेट क्रॉप्स, इंडोनेशिया के साथ-साथ देश के अनेक प्रतिष्ठित संस्थानो जैसे स्पाइसेज बोर्ड ऑफ इंडिया, आई०सी०ए०आर० एवं सी०एस०आई०आर के संस्थान, एफ०एस०एस०ए०आई०. डाबर इण्डिया लि० गाजियाबाद, हार्पेक श्रीनगर गढ़वाल आदि संस्थानों के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। उक्त के अतिक्ति कृषि, उद्यान, रेशम, बायोटेक आदि विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

सिनामन सेमीनार के तकनीकी सत्र में आज श्रीलंका एवं इण्डोनेशिया से आये विशेषज्ञों द्वारा अपने अपने देश में सिनामन की उन्नत प्रवर्धन एवं नर्सरी तकनीक तथा बाजार पर व्याख्यान दिया गया। तदोपरान्त अण्डमान एवं निकोबार स्थित आई०सी०ए०आर० संस्थान से आये विशेषज्ञ डा० अजित वमन द्वारा उन्नत एग्रोनोमिक प्रैक्टिसेस् से खेती एव प्रवर्धन पर अपने अनुभव साझा किये गये। सेमीनार के दौरान पारडी द्वारा स्टॉल पर्दशन के माध्यम से श्रीलंका, इण्डोनिशिया एवं भारत के अन्य राज्यो के सिनामन के उत्पादों का भी प्रर्दशन किया गया।

इस अवसर पर प्रताप सिह गुसाई, उपाध्यक्ष, राज्य औषधीय पादप बोर्ड उत्तराखण्ड, सोना सजवाण, उपाध्यक्ष, जडी-बूटी सलाहकार समिति, डॉ० आनन्द श्रीवास्तव, अपर सचिव, कृषि एवं कृषक कल्याण तथा संस्थान के समस्त वैज्ञानिक एवं कार्मिक आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डा० पंकज बिजल्वाण द्वारा किया गया।

नीट की पुनः परीक्षा को लेकर मुख्य सचिव ने ली बैठक, 21 जून को होनी है परीक्षा

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली। मुख्य सचिव ने 21 जून, 2026 को आयोजित होने वाली नीट पुनर्परीक्षा की तैयारियों के सम्बन्ध में सभी आवश्यक कदम उठाए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि नीट परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और लीक-प्रूफ आयोजित कराए जाने हेतु अत्यधिक सुरक्षा एवं निगरानी के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय पर पूर्ण कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने परीक्षार्थियों के लिए परिवहन विभाग की बसों में निशुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध कराए जाने हेतु शीघ्र शासनादेश जारी किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों बारिश की सम्भावना को देखते हुए सड़कें बंद होने पर बैकअप प्लान भी तैयार रखे जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने 14 जून, 2026 को उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तरीय पुनर्परीक्षा के लिए भी सभी आवश्यक कदम उठाए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारियों को सभी आवश्यक जांचें, संदिग्ध का वैरीफिकेशन, परीक्षार्थियों की चौकिंग आदि के साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही मुख्य सचिव ने 21 जून, 2026 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा एवं आवश्यक तैयारियों के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों एवं जिलाधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी जिलाधिकारी जनपद स्तर पर आयोजन स्थलों के लिए आवश्यक बुनियादी व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराएंगे। साथ ही आयोजन स्थलों के पास वाहन पार्किंग की व्यवस्था भी आवश्यक रूप से उपलब्ध करायी जाए।

इस अवसर पर अध्यक्ष उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग जी.एस. मार्ताेलिया, प्रमुख सचिव अमित कुमार सिरोही, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, एडीजी डॉ. वी. मुरूगेशन, सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, आर. राजेश कुमार, विनोद कुमार सुमन एवं धीराज सिंह गर्ब्याल, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं जनपदों से जिलाधिकारी एवं एसएसपी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री धामी ने पीएम मोदी के 12 साल के ऐतिहासिक विकास कार्यों का किया बखान

देश की बागडोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में आने के बाद विगत 12 वर्षों के दौरान उत्तराखंड में सड़क, रेल से लेकर हवाई सेवाओं का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व ने इस रफ्तार पर डबल इंजन लगाने का काम किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2016 में चारधाम सड़क परियोजना का शिलान्यास किया था। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के चारों धामों को ऑल वेदर रोड से जोड़ना है, करीब 12,000 करोड़ रुपए लागत की इस परियोजना का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जिस कारण चारधामों सहित पहाड़ के बड़े हिस्से में आवाजाही सुगम हुई है। प्रधानमंत्री ने दिल्ली -देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में एक और सौगात उत्तराखंड को दी है। 11,963 करोड़ रुपए की लागत से बने 210 किमी लंबे इस हाईवे के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून का सफर ढाई घंटे के अकल्पनीय समय में पूरा करना संभव हो पाया है। केंद्र सरकार के सहयोग से वर्तमान में सितारगंजदृटनकपुर, पौंटा साहिबदृदेहरादून, भानियावालादृ ऋषिकेश, काठगोदामदृलालकुआंदृहल्द्वानी बाईपास तथा रुद्रपुर बाईपास जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी कार्य जारी है।

आम आदमी ने भरी उड़ान
बीते 12 वर्षों के भीतर राज्य के दूर दराज के क्षेत्रों के लिए भी हवाई सेवाएं शुरु हुई हैं। केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य के तीन बड़े एयरपोर्ट जॉलीग्रांट, पंतनगर और पिथौरागढ़ का विस्तार किया जा चुका है। साथ ही आम आदमी के सपनों का पंख देने के लिए शुरु केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत भी प्रदेश में 18 हैलीपोर्ट विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से 12 पर सेवाएं प्रारंभ हो चुकी हैं। डबल इंजन की सरकार के कार्यकाल में ही देहरादून एयरपोर्ट से अहमदाबाद, भुवनेश्वर, बैंगलोर, मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, पुणे, कुल्लू जैसे शहरों के लिए नियमित हवाई सेवा प्रारंभ हो चुकी है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक हवाई सेवा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री उड़न खटोला योजना संचालित कर रही है। इस योजना के तहत राज्य के पर्वतीय जिलों के लिए देहरादून और हल्द्वानी से हेली सेवा का संचालन किया जा रहा है।

पहाड़ में पहुंचने वाली है रेल
केंद्र में मोदी सरकार बनने बाद राज्य में रेल नेटवर्क में भी तेजी से विस्तार हुआ है। केंद्र सरकार के विशेष प्रयास से 125 किमी लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का 72 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सक्रिय प्रयासों से केंद्र सरकार ने टनकपुर दृ बागेश्वर और डोईवाला से गंगोत्री-यमुनोत्री तक रेललाइन के सर्वे पर भी सहमति प्रदान कर दी है। साथ ही प्रदेश के 11 रेलवे स्टेशनों को अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का कार्यकाल उत्तराखंड के विकास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। विगत 12 वर्षों में उत्तराखंड में हर तरह की कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। अब प्रदेश के किसी भी हिस्से से कुछ घंटों में बड़े शहरों तक पहुंच संभव है। राज्य सरकार भी प्रदेश में हर तरह के यातायात साधन विकसित करने का प्रयास कर रही है।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

सिलक्यारा रेस्क्यू का मैनेजमेंट पहुंचा अंतरराष्ट्रीय मंच पर, ब्रिक्स में हुई सराहना

देहरादून। प्राकृतिक आपदाओं और वर्षा जनित संकटों की दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तराखंड ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक बार फिर राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। भारत की अध्यक्षता में ओडिशा के पुरी में 3 से 5 जून 2026 तक आयोजित BRICS Disaster Risk Reduction (DRR) working group की द्वितीय तकनीकी बैठक में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल की मुक्त कंठ से सराहना की गई।

तीन दिवसीय इस अहम बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया सहित 11 ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण, मजबूत अवसंरचना, सामुदायिक आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली, पूर्वानुमान आधारित त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और आपदा प्रबंधन के लिए सतत वित्तीय व्यवस्थाओं पर अनुभवों का आदान-प्रदान करना था।

सम्मेलन में विभिन्न देशों ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अपने नवाचार और सफल मॉडल साझा किए। इसी क्रम में उत्तराखंड की ओर से सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी (आईपीएस) और यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया। दोनों अधिकारियों ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नेतृत्व में विकसित आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, क्षमता विकास, तकनीकी नवाचार और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

प्रस्तुति के दौरान उत्तराखंड की भौगोलिक जटिलताओं, हिमालयी परिस्थितियों, भूस्खलन, अतिवृष्टि, ग्लेशियर झीलों, सड़क अवरोध और तीर्थयात्रा से जुड़े जोखिमों को विस्तार से रखा गया। साथ ही राज्य में विकसित बहु-एजेंसी समन्वय प्रणाली, पूर्व चेतावनी तंत्र और त्वरित राहत-बचाव व्यवस्था को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।

विशेष रूप से सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन और धराली आपदा प्रबंधन कार्यों को उत्तराखंड के सफल आपदा प्रबंधन मॉडल के रूप में सामने रखा गया। सम्मेलन में मौजूद प्रतिनिधियों ने इन अभियानों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में धैर्य, तकनीक, प्रशासनिक समन्वय और मानवीय संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

बैठक में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की पूर्व चेतावनी प्रणाली, जोखिम न्यूनीकरण उपायों और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की विशेष सराहना की गई। वहीं, उत्तराखंड एसडीआरएफ की त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया क्षमता को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उत्कृष्ट आपदा प्रतिक्रिया मॉडल के रूप में रेखांकित किया गया।

सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी ने कहा, “ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आपदा प्रबंधन को लेकर संवेदनशील और सक्रिय दृष्टिकोण के कारण राज्य में जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, क्षमता निर्माण और एजेंसियों के बीच समन्वय को लगातार मजबूत किया जा रहा है। वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में आपदा प्रबंधन केवल राहत और बचाव तक सीमित नहीं रह सकता। इसके लिए पूर्व तैयारी, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, प्रशिक्षित बलों की उपलब्धता और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के निर्देशन में राज्य में संचालित गतिविधियों को भी प्रतिनिधियों के साथ साझा किया गया। यूएलएमएमसी निदेशक शांतनु सरकार ने कहा, “ भू-स्थानिक तकनीक, रिमोट सेंसिंग, डेटा एनालिटिक्स और पूर्व चेतावनी तंत्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण को अधिक प्रभावी बना रहे हैं। भविष्य की आपदा चुनौतियों से निपटने में तकनीक आधारित समाधान निर्णायक भूमिका निभाएंगे।”

सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों में ब्रिक्स देशों के बीच आपदा जोखिम न्यूनीकरण में सहयोग को मजबूत करना, तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देना, सामुदायिक स्तर पर तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए साझा रणनीतियां विकसित करना और वैश्विक आपदा प्रबंधन सहयोग को नई दिशा देना शामिल रहा।

BRICS Disaster Risk Reduction (DRR) working group की बैठक में उत्तराखंड के मॉडल को मिली सराहना को राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों के सतत प्रयासों को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता है।

नीति घाटी का जागरण सीमांत स्वाभिमान की नई इबारत: धामी

सीमांत जनपद चमोली की सुरम्य एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नीति घाटी में 31 मई से 2 जून तक आयोजित हो रहे ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ के अंतर्गत विभिन्न स्पर्धाओं के विजेताओं को सम्मानित करते हुए पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत आयोजित यह आयोजन सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सीमांत गांवों को “देश का पहला गांव” मानते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ जैसे आयोजन उनका जीवंत उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होने के साथ रिवर्स माइग्रेशन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि नीति क्षेत्र में होम स्टे की संख्या 35 से बढ़कर 450 से अधिक हो चुकी है, जो इस क्षेत्र में पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि 11 हजार फीट की ऊंचाई पर आयोजित यह अल्ट्रा रन युवाओं के अदम्य साहस, ऊर्जा और आत्मविश्वास का प्रतीक बनकर उभरा है। “नीति घाटी का यह जागरण केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्रों के स्वाभिमान, स्वावलंबन और नए विश्वास की नई इबारत है।

उन्होनें कहा यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि उत्तराखंड की हर सीमांत घाटी तक पहुंचेगा।” मुख्यमंत्री ने आयोजन की सफलता पर सभी आयोजकों, भारतीय सेना, आईटीबीपी तथा स्थानीय जनता को शुभकामनाएं दीं।

पर्यटन विभाग द्वारा भारतीय सेना एवं आईटीबीपी के सहयोग से आयोजित इस अनूठे आयोजन में देश के 27 राज्यों से आए 1200 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। तीन दिवसीय इस आयोजन का उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना, स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाना तथा युवाओं में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ के अंतर्गत 5, 10, 21, 42 एवं 75 किलोमीटर की विभिन्न स्पर्धाओं में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मलारी गांव में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल सहित अन्य अतिथियों ने विजेताओं को पुरुष्कार धनराशि एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

प्रतियोगिताओं के प्रमुख परिणाम:

05 किलोमीटर (18 वर्ष से कम आयु वर्ग) पुरुष वर्ग में हर्षित यादव प्रथम, आयुष कुमार द्वितीय एवं शिवम भुजवान तृतीय रहे। महिला वर्ग में रेखा प्रथम, भावना रावत द्वितीय एवं राधिका तृतीय स्थान पर रहीं।

05 किलोमीटर ओपन वर्ग के पुरुष वर्ग में प्रकाश भट्ट प्रथम, मोहम्मद अशरफ द्वितीय एवं मोहम्मद क्वासम तृतीय रहे। महिला वर्ग में अर्पिता सैनी प्रथम, वाई. तिमनाह द्वितीय एवं अनिता चौहान तृतीय रहीं।

10 किलोमीटर ओपन वर्ग के पुरुष वर्ग में सुरेंद्र सिंह प्रथम, मन्नू सिंह द्वितीय एवं सजन पंवार तृतीय रहे। महिला वर्ग में पूजा बिष्ट प्रथम, निशा नेगी द्वितीय एवं ईशा बर्त्वाल तृतीय रहीं।

10 किलोमीटर 60+ आयु वर्ग में दलबीर सिंह प्रथम, गोविंद कुमार राणा द्वितीय एवं सतीश चंद चौहान तृतीय रहे।

21 किलोमीटर ओपन वर्ग में लोकेश कुमार प्रथम, दीपक रावत द्वितीय एवं कुलदीप नेगी तृतीय रहे। महिला वर्ग में प्रिया प्रथम, निकिता खोलिया द्वितीय एवं आयुषी कनवाल तृतीय रहीं।

21 किलोमीटर 50+ आयु वर्ग में दीपेश जोशी प्रथम, नंदन सिंह द्वितीय एवं पवन तृतीय रहे। महिला वर्ग में अनुदा तमांग प्रथम, अंजू कुटियाल द्वितीय एवं इंदिरा दीवान तृतीय रहीं।

42 किलोमीटर ओपन वर्ग में यश राज प्रथम, सत्यम द्वितीय एवं महेंद्र सिंह बिष्ट तृतीय रहे। महिला वर्ग में दिया प्रथम, अर्पिता सैनी द्वितीय एवं अंजू तृतीय रहीं।

42 किलोमीटर 40+ आयु वर्ग में सतपाल प्रथम, महेश यादव द्वितीय एवं कलम सिंह बिष्ट तृतीय रहे। महिला वर्ग में मीना कंडारी प्रथम, सुष्मिता राय द्वितीय एवं शांति राय तृतीय रहीं।

42 किलोमीटर 60+ आयु वर्ग में थॉमस प्रथम, मुकेश राणा द्वितीय एवं सतीश चंद्रा तृतीय रहे।

75 किलोमीटर ओपन वर्ग में दिगंबर सिंह प्रथम, अर्जुन प्रधान द्वितीय एवं विजय सिंह तृतीय रहे। महिला वर्ग में मीनाक्षी प्रथम, मीना कुमारी सुब्बा द्वितीय एवं फलेश्वरी रजवाड़े तृतीय रहीं।

75 किलोमीटर 50+ आयु वर्ग में चरण सिंह प्रथम, किशन बढ़वार द्वितीय एवं रतन सिंह सोनल तृतीय रहे। महिला वर्ग में आशा सिंह प्रथम एवं कशीरसगरा रमसमिता द्वितीय रहीं।

75 किलोमीटर 60+ आयु वर्ग में कृष्णा तमांग प्रथम, महिपाल सिंह द्वितीय एवं शिवेंद्र सिंह बिष्ट तृतीय रहे।

इस महाआयोजन में राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक भागीदारी देखने को मिली। देश के 27 राज्यों से आए 1200 से अधिक प्रतिभागियों ने सीमांत क्षेत्र में आयोजित इस आयोजन को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

श्रेणीवार प्रतियोगिताओं में 75 किलोमीटर अल्ट्रा रन में 160 प्रतिभागी, 42 किलोमीटर मैराथन में 155 प्रतिभागी, 21 किलोमीटर हाफ मैराथन में 215 प्रतिभागी, 10 किलोमीटर शॉर्ट रन में 210 प्रतिभागी तथा 5 किलोमीटर फन रन में 260 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कुल मिलाकर 1100 से अधिक प्रतिभागियों ने विभिन्न दौड़ स्पर्धाओं में प्रतिभाग किया।

2 जून, आयोजन के अंतिम दिन में गमसाली से मलारी के मध्य 30 किलोमीटर एमटीबी चैलेंज प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें 100 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा लेंगे।

इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित भारतीय सेना, आईटीबीपी, चिकित्सा विभाग, पर्यटन विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी व बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।