प्रधानमंत्री ने ड्रोन के माध्यम से केदारनाथ धाम में चल रहे कार्यों का अवलोकन किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से श्री केदारनाथ धाम में चल रहे कार्यों की जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने ड्रोन के माध्यम से केदारनाथ धाम में चल रहे विभिन्न कार्यों का अवलोकन भी किया। उन्होंने केदारनाथ मन्दिर परिसर, आदिगुरू शंकराचार्य की समाधि, सरस्वती घाट एवं आस्था पथ, भैरव मन्दिर के रास्ते पर बने पुल, केदारनाथ में बन रही गुफाओं, मन्दाकिनी नदी पर बन रहे पुल, मंदाकिनी एवं सरस्वती के संगम पर बन रहे घाटों का अवलोकन किया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि रामबाड़ा से केदारनाथ तक छोटे-छोटे पेच को श्री केदारनाथ की ऐतिहासिकता से जोड़ा जाय, ताकि श्रद्धालुओं को केदारनाथ के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व के बारे में भी रोचक जानकारियां मिल सके। इस क्षेत्र में आध्यात्म से संबंधित भी अनेक कार्य किये जा सकते हैं। इस ओर ध्यान दिया जाय। इससे श्रद्धालुओं को केदारनाथ के दर्शन के साथ ही यहां से जुड़ी धार्मिक एवं पारंपरिक महत्व के बारे में भी जानकारी मिलेगी। केदारनाथ के आस-पास जो गुफाएं बनाई जा रही हैं, उनका सुनियोजित तरीके से विकसित किया जाए ताकि इनका स्वरूप आकर्षक हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी केदारनाथ में निर्माण कार्य तेजी से किये जा सकते हैं। शीर्ष प्राथमिकता के कार्य चिन्हित कर पहले उन्हे पूर्ण कर लिया जाय। उन्होंने कहा कि भगवान केदारनाथ एवं बदरीनाथ में विभिन्न कार्यों के लिए राज्य सरकार को केन्द्र से हर सम्भव मदद दी जायेगी। भगवान बदरीनाथ धाम के लिए भी डेवलपमेंट प्लान बनाया जाय। अगले 100 साल तक की परिकल्पना के हिसाब से डेवलपमेंट प्लान बनाया जाय। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने केदारनाथ धाम में यात्रा की स्थिति के बारे में जानकारी ली।

वीडियो कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि केदारनाथ में विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए राज्य को लगभग 200 करोड़ रूपये की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों के लिए सीमित संख्या में भगवान केदारनाथ एवं बदरीनाथ जी के दर्शन के लिए अनुमति दी गई है। मास्क का उपयोग, सामाजिक दूरी के पालन करते हुए एक दिन में अधिकतम 800 लोग दर्शन कर सकते हैं।

इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने केदारनाथ धाम में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आदिगुरू शंकराचार्य की समाधि के पुनर्निर्माण का कार्य 31 दिसम्बर 2020 तक पूरा हो जायेगा। सरस्वती घाट का कार्य पूर्णता की ओर है, यह कार्य 30 जून जक पूर्ण हो जायेगा। भैरव मन्दिर के रास्ते पर पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, यह कार्य निर्धारित समयावधि से पहले ही पूरा किया गया है। तीर्थ पुरोहितों को रहने के लिए 05 ब्लॉको में घर बनाऐ जा रहे हैं, जिसमें से 02 ब्लाको में बनाये जा चुके हैं, शेष ब्लाको में सितम्बर तक कार्य पूरा हो जायेगा। केदारनाथ में आध्यात्म की दृष्टि से तीन गुफाएं बनाई जा रही हैं, जिनका निर्माण कार्य सितम्बर 2020 तक पूर्ण हो जायेगा। मन्दाकिनी नदी पर बन रहे पुल का कार्य 31 मार्च 2021 तक पूर्ण किया जायेगा। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम में ओपन म्यूजियम बनाने की योजना भी बनाई जा रही है।

आज से मंदिर, होटल, रेस्टोरेंट, शाॅपिंग माॅल खोलने की मिली अनुमति

आज से धार्मिक गतिविधियां सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक शुरू होंगी। मंदिरों के बोर्ड, ट्रस्ट या प्रबंधन समितियां सैनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करवाएंगी। होटल और होम स्टे को खोलने की अनुमति भी दे दी गई है। इसके साथ रेस्टोरेंट और शापिंग मॉल भी सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक खुल सकेंगे। वहीं, देहरादून नगर निगम क्षेत्र और कंटोनमेंट जोन में किसी भी गतिविधि को शुरू करने की अनुमति शासन ने नहीं दी है।
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने होटल, रेस्टोरेंट, शापिंग मॉल और धार्मिक स्थल खोलने की अनुमति प्रदान कर दी है। प्रदेश सरकार ने इसके लिए गाइडलाइन जारी की है। जिलाधिकारी अपने अपने जिलों में इसके लिए अलग से दिशा-निर्देश जारी करने होंगे।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि आठ जून से प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट, शापिंग माल और धार्मिक गतिविधियों को शुरू करने की अनुमति प्रदान कर दी है। इसके लिए गाइडलाइन जारी की गई है। दिशानिर्देशों के तहत सभी जिले व्यवस्था बनाने के लिए कार्यवाही करेंगे।

होटल को खोलने की दी अनुमति
होटल, होम स्टे आदि सेवाओं को खोलने की अनुमति दे दी है। होटल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश हैं कि कोविड-19 के प्रति संवेदनशील 75 शहरों में से आने वालों की बुकिंग नहीं की जाएगी। देश के अन्य शहरों से आने वाले अतिथियों के लिए सात दिन तक के लिए बुकिंग होगी। होटल को जिला प्रशासन को प्रत्येक गेस्ट की सूचना देनी होगी। होटल प्रबंधन को प्रत्येक व्यक्ति से लिखकर लेना होगा कि वे पर्यटन स्थल या सार्वजनिक स्थल में नहीं जाएंगे। इसके लिए पर्यटन विभाग अलग से एसओपी जारी करेगा।

रेस्टोरेंट और शॉपिंग मॉल मालिकों को राहत
सरकार ने रेस्टोरेंट और शापिंग मॉल के मालिकों को राहत देते हुए सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक प्रतिष्ठान खोलने की अनुमति दे दी है। शापिंग मॉल मालिकों को लिखित में देना होगा कि एयर कंडिशनर चलाने के लिए सीपीडब्ल्यूडी के मानकों का पालन करेंगे। केवल पचास प्रतिशत दुकानें एक समय में खोली जाएंगी। जिला प्रशासन तय करेगा कि अधिकतम कितने लोग मॉल में एक समय में जा सकेंगे। इसके लिए अलग से एसओपी जारी की जाएगी। रेस्टोरेंट मालिकों को सामाजिक दूरी और सर्विस के दौरान टेबल की दूरी को लेकर भी व्यवस्था बनानी होगी।

धार्मिक स्थल खुलेंगे
धार्मिक स्थल सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक ही खुलेंगे। जिला प्रशासन मंदिरों के ट्रस्ट, बोर्ड और प्रबंधन समितियों से सलाह करने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या तय करेगा कि एस समय में कितने लोग मंदिर में आ सकते हैं।

देवस्थानम बोर्ड तय करेगा चारधाम यात्रा
प्रदेश सरकार ने चार धाम देवस्थानम बोर्ड को चार धाम यात्रा शुरू करने का जिम्मा सौंपा है। जारी गाइडलाइन के अनुसार बोर्ड प्रबंधन यात्रा को लेकर जिला प्रशासन और अन्य हक हकूकधारियों से चर्चा करेगा। आम सहमति बनने के बाद यात्रा शुरू की जाएगी। कितने श्रद्धालु यात्रा में आ सकते हैं, इसके लिए प्रोटोकॉल तय किया जाएगा। गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट निर्देश है कि कोरोना संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य सुरक्षा को मानकों का पूरी तरह से अनुपालन होगा। यात्रा शुरू करने से पहले उसका पूरी तरह से प्रचार किया जाएगा। इसके साथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए तय प्रावधानों के बारे भी जानकारी दी जाएगी। उड़ान योजना के तहत हेलीकॉप्टर से सवारी के लिए भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए सिविल एविएशन अलग से एसओपी जारी करेगा।

अन्य राज्यों के श्रद्धालु नहीं आयेंगे
प्रदेश सरकार के स्तर से जारी गाइडलाइन से स्पष्ट है कि चार धाम यात्रा और प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों में दर्शन के लिए केवल राज्य के नागरिकों को अनुमति होगी। प्रदेश के बाहर के लोगों को यात्रा और धार्मिक स्थलों में दर्शन की अनुमति नहीं होगी।

समाज कल्याण विभाग के कार्यालयों, स्कूल, हॉस्टलों की दीवारों पर बनेगी कुमांऊ की ऐंपण पेंटिंग

कुमांऊ की प्रसिद्ध ऐंपण कला को अब समाज कल्याण विभाग नशे के खिलाफ ढाल बनाएगा। इस कला के जरिए नशे के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए विभाग अपने कार्यालयों, स्कूल और हॉस्टलों की दीवारों पर ऐंपण पेंटिंग बनाने जा रहा है। बता दें कि केंद्र सरकार ने समाज कल्याण विभाग को नशा मुक्ति कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी है। जिला समाज कल्याण अधिकारी हेमलता पांडे ने कार्यक्रम की शुरुआत की है।

सर्वप्रथम इसकी शुरूआत देहरादून से की जाएगी, यहां सर्वे चौक स्थित जिला समाज कल्याण कार्यालय में ऐपण पेंटिंग कराने की योजना है। इसके बाद कंडोली स्थित विभाग के सरकारी हॉस्टल व भगत सिंह कॉलोनी स्थित राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय में होगी।

क्या है ऐपण लोक कला
ऐपण उत्तराखंड के कुमांऊ मंडल की प्रसिद्ध लोककला चित्रकला है, जो विश्व प्रसिद्ध है। कुमाऊं में दीपावली, देवी पूजन, लक्ष्मी पूजन, यज्ञ, हवन, जनेऊ संस्कार, छठ कर्म, शिवपूजन, विवाह, व्रत-त्योहार में घर की चौखट व दीवारों पर ऐपण लोक कला बनाने की परंपरा है। इसमें घर के आंगन से मंदिरों तक के मार्ग में ऐपण कला बनाई जाती है। इसमें सबसे पहले गेरू से पुताई करते हैं। इसके बाद उसके ऊपर बिस्वार (चावल के आटे का घोल बनाकर) से चित्र बनाए जाते हैं। इन चित्रों को शुभ माना जाता है।

पर्यावरण की सुरक्षा होगी तो प्राकृतिक आपदाओं से मिलेगा छुटकाराः महापौर अनिता ममगाईं

विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ नगर निगम प्रशासन ने निगम जनसंघ के संस्थापक दीनदयाल उपाध्याय पार्क में पौधारोपण किया। महापौर अनिता ममगाई की अगुवाई में आज सुबह निगम पार्षदों ने निगम वाटिका में विभिन्न फलदार और औषधीय पौधे रोंपे। इस अवसर पर महापौर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के अभाव में पृथ्वी कई रूप में प्रभावित हो रही है। पृथ्वी का प्रभावित होना जन जीवन के लिए घातक सिद्ध होने लगा है। जिसका ज्वलंत उदाहरण जल संकट के रूप में देखने को मिल रहा है। यदि पृथ्वी पर जल संकट गहराता रहा तो मानव सहित सभी जीव जंतु खतरे में पड़ जाएंगे। जल के अभाव में सुरक्षित जीवन की कल्पना यथोचित नहीं होगा। अर्थात हमें पृथ्वी पर पेड़ पौधों की संख्या बढ़ानी होगी और पर्यावरण की सुदृढ़ता कर कार्य करने होंगे।
महापौर ममगाई ने कहा कि दुनिया और देशभर में कोविड-19 के कहर के कारण मचे हाहाकार के बीच इससे निपटने के लिए लगाये गये देशव्यापी लॉकडाउन ने इंसान को जहां बंदिशों में रखा। वहीं प्रकृति को फिर से सजने और संवरने का मौका मिला है। लॉकडाउन प्रकृति के लिए नायाब तोहफे की तरह आया जिसमें विभिन्न प्रकार के प्रदूषण पर लगी रोक ने पयार्वरण को खुद से खुद को ठीक करने का मौका दिया। उन्होंने पौधारोपण कार्यक्रम में मौजूद सभी से पर्यावरण पहरी के तौर पर कार्य करने का आह्वान भी किया। इस दौरान पार्षद विजय बडोनी, विजेंद्र मोगा, सुजीत यादव, विपिन कुकरेती, हर्ष गवाढ़ी, शिवम गर्ग, सफाई निरीक्षक अभिषेक मल्होत्रा, हवलदार नरेश खैरवाल, राजेंद्र बाल्मीकि, मुकेश खैरवाल आदि शामिल थे।

टिकटॉक को आ गया बाय-बाय करने का समय, स्वदेशी एप मित्रों हो रहा पॉपुलर

भारत में टिकटॉक का बाय-बाय करने का वक्त आ गया है। भारत के युवाओं की जुबां पर अब टिकटॉक नहीं बल्कि स्वदेशी निर्मित एप मित्रों का नाम है। अभी तक इस एप को 50 लाख से ज्यादा युवा गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर चुके है। इसे आईआईटी रूड़की के पूर्व छात्रों ने बनाया है। इसे टिकटॉक का क्लोन भी कहा जा रहा है।

आईआईटी के पूर्व छात्रों का कहना है कि एप लांच करते समय हमें ऐसे ट्रैफिक की उम्मीद नहीं थी। इसे बनाने के पीछे लोगों को सिर्फ भारतीय विकल्प देना था। आईआईटी रुड़की में वर्ष 2011 में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ब्रांच से पासआउट छात्र शिवांक अग्रवाल ने अपने चार साथियों के साथ मित्रों एप बनाया है।

11 अप्रैल को हुआ था मित्रों एप लांच
पेटीएम के पूर्व सीनियर वाइस प्रेजिडेंट दीपक के ट्वीट के बाद इसकी चर्चा हर किसी की जुबान पर है। अचानक बड़ी संख्या में लोगों के एप डाउनलोड करने से नेटवर्क ट्रैफिक भी प्रभावित होने लगा। टीम मेंबर ने बताया कि वास्तव में 11 अप्रैल को एप लांच करते समय यह नहीं सोचा था कि इसे इतनी सफलता मिलेगी। टिकटॉक को पीछे छोड़ना जैसी कोई बात नहीं है। हमारा उद्देश्य लोगों को सिर्फ एक भारतीय विकल्प देना था। लोग इसका इस्तेमाल करना चाहेंगे या नहीं यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हमें लोगों से जो आशीर्वाद मिला, उससे हम बहुत खुश हैं। उन्होंने बताया कि हमें किसी ने फंड नहीं दिया है, उनका फंड लोगों का प्यार ही है।

मित्रों स्वदेशी नाम, इसलिए देना उचित
टीम मेंबर ने बताया कि मित्रों का अर्थ मित्र ही है। एक तो यह भारतीय उपभोक्ताओं को भारतीय मंच के जरिए सेवा देने के लिए है। हम स्वदेशी नाम देकर भारतीय नामों के खिलाफ पूर्वाग्रहों को भी दूर करना चाहते हैं।

चारधामः ऑनलाइन दर्शन और ऑडियो के माध्यम से पूजा-अर्चना करने की सुविधा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखण्ड चारधाम देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड की पहली बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वभर में उत्तराखण्ड आध्यात्म का केन्द्र है। उत्तराखण्ड के मन्दिरों की प्राचीन शैली इसकी विशिष्टता है। इसको बनाये रखने के लिए यह सुनिश्चित किया जाय कि मन्दिरों का प्राचीन स्वरूप बना रहे। जो लोग मन्दिरों के ऑनलाइन दर्शन करना चाहते हैं, उन्हें गर्भगृह को छोङकर बाकी मन्दिर परिसर के ऑनलाइन दर्शन एवं ऑडियो के माध्यम से पूजा-अर्चना करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही इसमें धार्मिक मान्यताओं का भी पूरा ध्यान रखा जाय। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड चारधाम देवस्थाम प्रबन्धन बोर्ड में सबके हक-हकूकों का ध्यान रखा जायेगा। बैठक में मन्दिरों एवं उनसे जुड़ी प्रमुख पाण्डुलिपियों एवं अन्य ऐतिहासिक महत्व के सामग्री संग्रहण के लिए संग्रहालय बनाने की बैठक में चर्चा की गई है।
बोर्ड की इस पहली बैठक में निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार द्वारा धार्मिक यात्रा के समुचित संचालन के लिए अन्तर्विभागीय समन्वय हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जायेगा। उत्तराखण्ड चारधाम देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड का अलग लोगो बनाया जायेगा। मन्दिरों की सम्पति, निधि, बहुमूल्य वस्तुओं को बोर्ड के प्रबंधन में अन्तरित करने हेतु मुख्य कार्यकारी अधिकारी को अधिकृत किया गया है, इसके लिए कार्यवाही सबंधित जिलाधिकारियों द्वारा की जायेगी। उत्तराखण्ड चारधाम देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड का अलग बैंक एकाउण्ट होगा। इसके लिए बैठक में राज्य सरकार द्वारा 10 करोड़ रूपये की धनराशि की स्वीकृति दी गई है। बदरी-केदार मंदिर समिति की अवशेष धनराशि भी उत्तराखण्ड चारधाम देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड में ट्रांसफर की जायेगी। बद्री-केदार मंदिर समिति के कार्मिकों का समायोजन उत्तराखण्ड चारधाम देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड में किया जायेगा। बोर्ड के लिए अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की जायेगी एवं वित्त नियंत्रक का एक पद सृजित किया जायेगा। उत्तराखण्ड चारधाम देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड में विभिन्न न्यायिक मामलों के लिए ट्रिब्यूनल बनाई जायेगी। एनआईसी द्वारा बदरी-केदार मंदिर समिति के लिए बनाई गई वेबसाइट का अधिग्रहण कर इसका अपग्रेडेशन किया जायेगा। इस अवसर पर उत्तराखण्ड चारधाम देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने कोविड-19 के दृष्टिगत बदरी-केदार मन्दिर समिति के कार्मिकों द्वार दिये गये एक दिन के वेतन का 5 लाख रूपये का चेक मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को सौंपा।
उत्तराखण्ड चारधाम देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड के उपाध्यक्ष सतपाल महाराज ने मानव उत्थान सेवा समिति के माध्यम से भी बोर्ड को 5 लाख एक रूपये की धनराशि देने की घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी रखे।
बैठक में विधायक बदरीनाथ महेन्द्र भट्ट, विधायक गंगोत्री गोपाल सिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव पर्यटन एवं संस्कृति दिलीप जावलकर, सचिव वित्त सौजन्या उपस्थित थे।

50 प्रतिशत यात्री क्षमता के साथ खुलेंगे सार्वजनिक परिवहन

राज्य सरकार ने ऑरेंज और ग्रीन जोन वाले जिलों में वाहनों को आधी क्षमता के साथ संचालन की अनुमति दे दी है। परिवहन विभाग इसके लिए जल्द ही एसओपी जारी करने वाला है। किसी जिले के रेड जोन में आने की स्थिति में वहां सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह से बंद रहेगा। जबकि इंटर स्टेट परिवहन सामान्य तौर पर प्रतिबंधित है, लेकिन राज्यों की आपसी सहमति के आधार पर प्रवासियों को लाने के लिए बसें चलाई जा सकेंगी।
अभी प्रदेश में कोई भी जिला रेड जोन में नहीं होने से पूरे प्रदेश में बसों सहित अन्य सार्वजनिक परिवहन का संचालन करने का निर्णय ले लिया गया है। एक जिले से दूसरे जिले के बीच बसों के संचालन से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि वाहन की क्षमता से आधी सवारी को ही लेकर जाया जा सकेगा।
राज्य सरकार ने इंटर स्टेट परिवहन के संचालन को भी सहमति दी है, जिसके लिए नोडल अधिकारी, मंडलायुक्त और जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश में परिवहन विभाग को निर्देशित किया गया है कि सार्वजनिक परिवहन की एसओपी (स्टेंडर्ड ऑपरेंटिंग प्रोसिजर) तैयार कर लें, जिसके बाद संचालन शुरू हो सकेगा। संचालन में सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का पूरी तरह से पालन होगा।
इस नियम का करना होगा पालन
उत्तराखंड में लॉकडाउन-4 में अब वाहनों का संचालन होने लगेगा। लेकिन अधिक आबादी वाले आठ शहरों में निजी वाहनों का संचालन ऑड-ईवन नंबर प्लेट के हिसाब से होगा। एक दिन ऑड नंबर और दूसरे दिन ईवन नंबर के चैपहिया वाहन चलाएं जा सकते हैं। वहीं, दोपहिया वाहन सभी दिन चल सकेंगे। उल्लंघन करने वालों पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि देहरादून, हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर, हरिद्वार, कोटद्वार, रुड़की, ऋषिकेश में सरकार ने सड़कों पर वाहनों की सीमित संख्या रखने के लिए ऑड-ईवन की व्यवस्था बनाई है। जिलों को इस संबंध में निर्देश जारी किए जाएंगे, जिसके बाद यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। यह व्यवस्था प्राइवेट वाहनों के लिए रहेगी।

लॉकडाउन में भी पीएम-किसान योजना के लिए आवेदन करे!

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि केन्द्र सरकार ने मार्च से जारी लॉकडाउन के दौरान पीएम-किसान योजना के तहत 9.13 करोड़ किसानों को कुल 18,253 करोड़ रुपये की राशि भेजी है। पीएम किसान योजना के तहत सरकार पात्र किसानों को साल में तीन बराबर किस्त में 6,000 रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजती है। लॉकडाउन की वजह से देश के गरीब किसानों की मुश्किलों को देखते हुए सरकार ने पीएम-किसान योजना के तहत चालू वित्त वर्ष की पहली किस्त को अप्रैल के पहले सप्ताह में ही भेजने का फैसला किया था। अगर आप किसान हैं और इस योजना के लिए रजिस्ट्रेशन करना चाहते हैं तो आपको बता दें कि ऐसा करना बहुत ही आसान है।

पीएम-किसान योजना के लिए ऐसे करे रजिस्ट्रेशन-
सबसे पहले पीएम-किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉग ऑन करिए।
वेबसाइट पर आपको फारमर्स काॅनर्स पर अपने माउस के कर्सर को ले जाना है।
ड्रॉप डाउन लिस्ट में आपको सबसे ऊपर न्यू फारमर्स कारनर्स का विकल्प मिलेगा।
इसके बाद आपको आधार कार्ड का नंबर एवं कैप्चा डालकर आगे बढ़ना होगा।
इसके बाद खुले पेज पर आपको जरूरी जानकारी डालकर रजिस्ट्रेशन करना होगा।
आप इस वेबसाइट के जरिए ही अपने आवेदन की स्थिति देख सकते हैं। साथ ही लाभार्थियों की सूची भी देख सकते हैं।
बतातें चले कि सीतारमण ने एक ट्वीट कर जानकारी दी, लॉकडाउन के दौरान मार्च, 2020 से अब तक सरकार ने 9.13 करोड़ किसानों को पीएम-किसान के तहत 18,253 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। कुल 4,22,113 करोड़ रुपये का कृषि ऋण लेने वाले करीब तीन करोड़ किसानों ने लोन पर तीन माह के मोराटोरियम के विकल्प का फायदा उठाया है।

कुंभ क्षेत्र में गैस लाइन डालने को मिली हरी झंडी

राज्य सरकार ने लॉकडाउन के दौरान गेल को गैस पाइप लाइन डालने का काम शुरू करने की हरी झंडी दे दी है। गेल को कुंभ क्षेत्र और अखाड़ों के अंदर तक गैस पाइप लाइन पहुंचानी है। विदित हो कि लॉकडाउन के चलते कुंभ के सभी काम रोक दिए गए थे। अब तक तो हरकी पैड़ी और व्यस्त बाजार क्षेत्र तक गैस पाइप लाइन डालने का काम पूरा हो गया होता।
राज्य सरकार के अनुमति पत्र को जिलाधिकारी ने कार्य शुरू की परमिशन देने के लिए मेलाधिकारी कुंभ के पास भेज दिया है। मेन रोड पर आर्यनगर से शहर कोतवाली तक और निष्काम सेवा ट्रस्ट भूपतवाला से कांगड़ा मोड़ हरकी पैड़ी के पास तक गैस पाइप लाइन डाली जा चुकी है।

15 किलोमीटर की लाइन डलवानी है
रेलवे रोड से सप्तसरोवर तक और देश रक्षक से आईटीआई जगजीतपुर तक कुंभ एरिया में लगभग 15 किलोमीटर ट्रंक लाइन दो महीने के अंदर डालनी है। इस काम के लिए मई व जून का ही समय गेल के पास है। इसके बाद मानसून में काम नहीं होगा और मानसून समाप्त होने के तुरंत बाद खुदी सड़कों का पुनर्निर्माण व सुदृढ़ीकरण कार्य किया जाना है।
गेल के परियोजना प्रबंधक प्रंजय जोशी ने बताया कि उत्तरी हरिद्वार में भारतमाता मंदिर से रेलवे रोड तक लगभग आठ किमी और देश रक्षक चैक से आईटीआई जगजीतपुर तक एरिया में लगभग छह किमी मेन ट्रंक लाइन डालने का काम प्राथमिकता में है। राज्य सरकार ने अनुमति दे दी है और सोमवार तक मेला प्रशासन से अनुमति मिलने की उम्मीद है। मंगलवार से काम शुरू हो जाएगा।

महापौर ने खुद जांची व्यवस्थाएं, लोगों को जागरुक कर दिलाया भरोसा

कोरोना संकट काल में केन्द्र और राज्य सरकार के दिशा निर्देशानुसार व्यवस्थाओं को बनवाने और उनका अनुपालन कराने के लिए ऋषिकेश नगर निगम प्रशासन कोई कसर नही छोड़ रहा है। आज निगम महापौर अनिता ममगाई ने स्वंय व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।
महापौर के मीडिया समन्यवक अजय बिष्ट ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि श्री रामनवमी पर्व की पूजा के पश्चात लॉकडाउन के दौरान सड़क पर उतर कर महापौर ने वास्तु स्थिति का जायजा लिया। निगम अधिकारियों के साथ दोपहर महापौर ममगाई ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर निगम के भोजन व्यवस्थाओं की जांच की। अभियान पर निकली महापौर ने जहां हैल्पिंग हैंड संस्था के सहयोग से लोगों को लंच पैकेट बांटे। वहीं समाजसेवी राजेश भट्ट और कपिल कुमार के सहयोग से भी गुमानीवाला क्षेत्र में गरीब व असहाय लोगों में 600 भोजन के पेकेट वितरित किये। इस दौरान महापौर ने सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरा ख्याल रखा। साथ ही, उन्होंने लोगों को भी जागरूक किया। महापौर ने बताया कि गढवाल के मुख्य द्वार ऋषिकेश में प्रशासन के सहयोग से राशन व सब्जी की आपूर्ति सामान्य रखने की पूरी तैयारी की जा चुकी है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार तमाम व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं।
महापौर ने कहा कि ,प्रशासन के माध्यम से बस्तियों में चिन्हित कर निःशुल्क राशन दिया जा रहा है। उन्होंने हाथ जोड़ते हुए शहरवासियों से अपील की कि अफवाह फैलाकर आग से न खेलें और लॉकडाउन का सख्ती से पालन करें, ताकि देवभूमि में कोरोना वायरस के खतरों को टाला जा सकेे।