आयुष मंत्रालय ने इम्यूनिटी बूस्टर ड्रिंक को प्रमाणिक माना, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी

सारंडा वन प्रमण्डल ने आयुष मंत्रालय की गाइड लाइन पर आधारित इम्यूनिटी बूस्टर ड्रिंक तैयार किया है। आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज चाईबासा के पूर्व प्राचार्य डॉ मधुसूदन मिश्रा की देखरेख में इस काम को किया जा रहा है। मिश्रा का मानना है कि वायरल संक्रमण का इलाज संभव तो नहीं लेकिन उसके लिए शरीर में एंटीजेन तैयार कर हम उसे मात दे सकते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने से ही संभव होता है।
साल के वृक्षों के लिए मशहूर एशिया प्रसिद्ध सारंडा का वन क्षेत्र औषधीय पौधों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहीं से प्राप्त जड़ी बूटियों और अन्य वन उपजों को इकट्ठा कर स्थानीय वन समिति के जरिए इम्यूनिटी बूस्टर ड्रिंक का वृहद पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है। सारंडा के डीएफओ रजनीश कुमार ने बताया कि इसे जिले के पुलिस कर्मियों और स्वास्थ्य कर्मियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें दिया जाएगा।
पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त अरवा राजकमल ने इस ड्रिंक को उपयोगी बताते हुए कहा कि इसके उत्पादन से वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों की आमदनी को बढ़ाने में मदद तो मिलेगी ही, कोरोना के फ्रंटलाइनर योद्धाओं के लिए भी यह ड्रिंक सहायक साबित होगी। कोरोना संक्रमण काल में जब तक इसका कोई इलाज नहीं मिल जाता तब तक रोग प्रतिरोधक झमता बढ़ाना भी एक कारगर उपाय माना जा रहा है।
कोरोना संकट ने हमारे समक्ष जहाँ स्वास्थ्य चुनौती पेश की है वही यह हमें जीने की नई राह भी दिखा रहा। बड़े तो बड़े बच्चे तक इस संक्रमण काल में अब नवाचारों की ओर बढ़ रहे है। गुमला के एक बच्चे ने करेंसी सैनिटाइजर मशीन का निर्माण किया है जिसको बनाने में महज 1500 रूपए का खर्च आया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनौती को अवसर में बदलने पर हमेशा जोर दिया करतें हैं। कोरोना काल में संक्रमण का खतरा मंडराया तो गुमला के अर्जित आर्य ने सोचा की करेंसी नोट भी संक्रमण का वाहक बन सकता है। इस खतरे को भांपते हुए उन्होंने मात्र 1500 रूपए खर्च कर मुख्यतः जुगाड़ तकनीक से एक मोटर और दो रोलर समेत कुछ अन्य चीजों के सहयोग से करेंसी सैनिटाइजर मशीन बना डाला है।
जिले के उपायुक्त शशि रंजन ने गुमला के इस होनहार बालक के इस इनोवेशन की जमकर तारीफ की है। उपायुक्त ने कहा कि इसमें और अधिक सुधार करके बैंकों को उपलब्ध कराए जाने पर विचार किया जा रहा है। जनजातीय बहुल गुमला में नवाचार की बात यही नहीं रूकती। गुमलावासियों ने काफी सुरक्षित फेस कवर का भी निर्माण किया है।
जिसमें फेस कवर आई विजन के साथ सिर को ढकने की भी व्यवस्था है। इस फेस कवर को बनाने में महज 40 रुपए की लागत आती है। कोरोना काल निश्चित रूप से परेशान करने वाला है लेकिन आने वाले समय में इसके द्वारा दिया गया सबक मानव जाति के कल्याण के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

14 दिन के लिए होम क्वारंटीन किये गये पूर्व कैबिनेट मंत्री और उनके परिवार के सदस्य

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नई दिल्ली से लौटे उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री नवप्रभात और उनके परिवार को 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन किया है। कल शाम को ही पूर्व कैबिनेट मंत्री परिवार समेत नई दिल्ली से लौटे हैं। विभाग ने सभी के स्वास्थ्य की जांच भी की है। बीते बृहस्पतिवार सुबह ही नवप्रभात अपनी पत्नी रुपा शर्मा समेत अपनी नातिनों को लेने के लिए दिल्ली गए थे।
उनकी बेटी बानी शर्मा और दामाद राहुल चैधरी नई दिल्ली स्थित आरके पुरम में रहते हैं। उनके दामाद नई दिल्ली में आईपीएस अधिकारी हैं। बृहस्पतिवार की शाम को ही वह अपनी नातिनों को लेकर वापस विकासनगर लौट आए। घर लौटने के बाद उन्होंने सरकारी की गाइडलाइन के अनुसार इसकी जानकारी विकासनगर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम को दी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनके घर पहुंचकर सभी की स्वास्थ्य जांच की। इसके बाद उन्हें होम क्वारंटीन कर दिया। उन्होंने 14 दिन घर में ही रहने संबंधित एक शपथ पत्र विकासनगर कोतवाली में भी दिया है। अपर स्वास्थ्य निदेशक उप जिला अस्पताल विकासनगर डॉ. केके शर्मा ने बताया कि पूरा परिवार स्वस्थ मिला है। ट्रैवल हिस्ट्री को देखते हुए पूर्व मंत्री को परिवार समेत होम क्वारंटीन किया गया है। इस दौरान डॉक्टरों की टीम लगातार उनके और उनके परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग करती रहेगी।

नवप्रभात के बयान की मुन्ना ने की निंदा
क्षेत्रीय विधायक मुन्ना सिंह चैहान ने पूर्व कैबिनेट मंत्री नवप्रभात के दिल्ली में फंसे छात्रों को लेने के लिए बस भेजने संबंधित बयान को गैर जिम्मेदाराना बताया है। विधायक ने कहा कि पूर्व कैबिनेट मंत्री के बयान से दिल्ली में फंसे छात्रों में असमंजस की स्थिति पैदा होगी। उनके बीच अफरातफरी भी मच सकती है। उन्होंने कहा कि वह पूर्व कैबिनेट मंत्री का सम्मान करते हैं, लेकिन महज राजनीतिक बढ़त के लिए इस तरह के बयान देना उनके गैर जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है।

मिलेगी जीतः देश में डबलिंग रेट के साथ रिकवरी रेट में भी सुधार

गुरुवार को कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में हिन्दुस्तान को अच्छी खबरें मिली हैं। एक तरफ कोरोना के डबलिंग रेट में सुधार हो रहा है। वहीं, मरीजों की संख्या की तुलना में ठीक होने वालों का अनुपात भी सुधर रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि देश में डबलिंग रेट के साथ रिकवरी रेट में भी सुधार हुआ है।
आपको बता दें कि देश में कोरोना वायरस केसों का डबलिंग रेट अब बढ़कर 11 दिन हो गया है, जोकि लॉकडाउन से पहले महज 3.4 दिन था। कई राज्यों ने राष्ट्रीय स्तर से भी अच्छा प्रदर्शन किया है। चार राज्यों में तो केसों का डबलिंग रेट 40 दिन से भी अधिक है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश जम्मू-कश्मीर, ओडिसा, राजस्थान, तमिलनाडु और पंजाब में डबलिंग रेट 11 से 20 दिन का है तो कर्नाटक, लद्दाख, हरियाणा, उत्तराखंड और केरल में कोरोना संक्रमण के केस 20 से 40 दिन में दोगुने हो रहे हैं। असम, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश में कोरोना केस डबल होने में 40 दिन से अधिक का समय लग रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण केसों की संख्या बढ़कर 33050 हो गई है। 1074 लोगों की मौत हो चुकी है। अब तक 8325 लोग ठीक हो चुके हैं। 24 घंटे में 630 ठीक हुए हैं। इसके साथ ही देश में रिकवरी रेट सुधरकर 25.19 पर्सेंट हो चुका है, जोकि 14 दिन पहले 13.06 फीसदी था।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में कोरोना वायरस की वजह से मृत्यु दर 3.2 पर्सेंट हैं। मृतकों में 78 फीसदी ऐसे लोग हैं जो दूसरी बीमारियों से भी ग्रस्त थे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में कोरोना मरीजों की मृत्य दर 3.20 पर्सेंट है। इनमें से 65 पर्सेंट पुरुष और 35 पर्सेंट महिलाएं हैं। उम्र के लिहाज से देखें तो मृतकों में 14 पर्सेंट 40 साल से कम के हैं। मृतकों में 34.8 पर्सेंट 40-60 उम्र के हैं तो 51.2 पर्सेंट की उम्र 60 साल से अधिक थी।

तेज आंधी के साथ हुई बारिश से तापमान में दर्ज हुई गिरावट

उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल गया। गुरुवार दोपहर बाद तेज हवाओं के साथ बारिश हुई तो कहीं ओले भी गिरे। इससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग की मानें तो अभी राहत मिलने के आसार नही है। एक तरफ ओलावृष्टि और बारिश से फसलें बर्बाद हो रही हैं जिससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। गुरुवार को मौसम विभाग की बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी सही साबित हुई है। वहीं, चारधाम में भी बर्फबारी के आसार बन रहे है।
उत्तराखंड में दिनभर बादलों और धूप की आंख-मिचैनी चलती रही। कुछ पर्वतीय क्षेत्रों में शाम के समय हल्की बूंदाबांदी भी हुई। जबकि, मौसम विज्ञान केंद्र ने गुरुवार को प्रदेश के अधिकांश इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की थी, जो कि सही साबित भी हुई। मैदानी क्षेत्रों में तेज हवाएं चलने के साथ बारिश हुई। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. बिक्रम सिंह के मुताबिक अभी अगले तीन से चार दिन मौसम का मिजाज में ऐसा ही रहेगा। बताया कि पहाड़ी जिलों में ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली गिरने के आसार बन रहे हैं।
पिछले तीन दिनों से मौसम के बदले मिजाज के चलते पर्वतीय जिलों के लोगों को अभी भी सर्दी का सामना करना पड़ रहा है। दो दिन तक बारिश होने के बाद बुधवार को भी सुबह से असमान में बादल छाए रहे और दिनभर तेज हवाएं चलती रही जिस कारण लोग परेशान रहे।

राज्यों के लॉकडाउन उल्लंघन पर केन्द्र का सख्त, कहा-ढील कहीं भारी न पड़ जाये

गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लॉकडाउन संबंधी संशोधित दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने की अपील की है। मंत्रालय ने पत्र में कहा है कि कुछ राज्य ऐसे कार्यों की अनुमति दे रहे हैं, जो गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में नहीं दिए गए हैं। मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि लॉकडाउन के उल्लंघन की खबरें मिल रही हैं, जिनसे लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है और कोविड-19 के फैलने का जोखिम उत्पन्न हो सकता है। कोरोना के इलाज से सीधे तौर पर जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों पर हिंसा, परस्पर सुरक्षित दूरी के पूरी तरह से उल्लंघन और शहरी क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही की घटनाएं हुई हैं। केंद्र सरकार ने कोविड-19 की स्थिति के ऑन-स्पॉट आकलन, इसके समाधान के लिए राज्य प्राधिकरणों को आवश्यक निर्देश देने और केंद्र सरकार को उनकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए छह अंतर-मंत्रालय टीमों का गठन किया है। ये टीमें दिशा-निर्देशों के अनुरूप लॉकडाउन के अनुपालन, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, परस्पर सुरक्षित दूरी बनाए रखने, इलाज की तैयारी, स्वास्थ्य पेशेवरों की सुरक्षा और कामगारों तथा गरीबों के लिए राहत शिविरों की शर्तों पर ध्यान केंद्रित करेंगी।

अफवाह न फैलायें, देश में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन का पर्याप्त भंडार है

दुनिया में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन के उत्पादन और निर्यात में भारत का शीर्ष स्थान है। वैश्विक आपूर्ति में भारत की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत है। फार्मास्क्युटिकल्स विभाग ने बताया कि देश में एपीआई का पर्याप्त भंडार है और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन की उत्पादन क्षमता देश की आवश्यकता और निर्यात की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। इस बीच, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर रमन गंगाखेडकर ने नई दिल्ली में कहा कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन एक रोग प्रतिरोधक है और यह इलाज नहीं है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के इलाज में इसकी आम जनता के लिए कभी भी सिफारिश नहीं की गई।

लॉकडाउन और दो सप्ताह बढ़ाने पर राज्यों के बीच सहमति बनी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोविड-19 से निपटने की रणनीति पर विचार-विमर्श करने के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस की है। कई राज्यों ने प्रधानमंत्री से लॉकडाउन और दो सप्ताह बढ़ाने का अनुरोध किया है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि लॉकडाउन और दो सप्ताह बढ़ाने पर राज्यों के बीच सहमति लगती है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ हमारा संघर्ष तब तक मजबूत रहेगा जब तक देश का प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभायेगा और सरकार तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करेगा।
मोदी ने लॉकडाउन तथा परस्पर सुरक्षित दूरी पर जोर देते हुए कहा कि लोगों का जीवन बचाने के लिए यह आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार का मंत्र जान है तो जहान है के स्थान पर जान भी और जहान भी होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि केन्द्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से कोविड-19 का प्रकोप घटाने में मदद मिली है, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है और सतर्कता जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगले तीन-चार सप्ताह वायरस के प्रभाव को जानने के लिए महत्वपूर्ण हैं। मोदी ने कहा कि भारत में आवश्यक दवाई की पर्याप्त आपूर्ति है और अग्रिम पंक्ति में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कालाबाजारी और जमाखोरी करने वाले लोगों को सख्त चेतावनी दी। डॉक्टरों और चिकित्सकर्मियों पर हमले और पूर्वोत्तर तथा कश्मीर के छात्रों के साथ बुरे बर्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे मामलों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। उन्होंने लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों पर काबू करने तथा परस्पर दूरी बनाये रखने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा मजबूत करने और रोगियों तक टेलीमेडिसन के जरिये पहुंचने को भी कहा। उन्हांेने सुझाव दिया कि कृषि उपज की डायरेक्ट मार्केटिंग करने से मंडियों में भीड़ को रोका जा सकता है। इसके लिए कृषि उत्पाद मंडी समिति प्रावधानों में सुधार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की मदद हो सकेगी। प्रधानमंत्री ने आरोग्य सेतु एप को लोकप्रिय बनाने को कहा। उन्होंने इसके लिए दक्षिण कोरिया और सिंगापुर में मिली सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके अनुभव से भारत ने इस एप के माध्यम से यह प्रयास किया है। इस एप को ई-पास के रूप में इस्तेमाल संभावना तलाशने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि यह एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करने में सहायक होगा।
आर्थिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संकट आत्मनिर्भर बनने और देश को आर्थिक शक्ति बनाने का एक मौका है। बैठक में मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों की स्थिति के बारे में अवगत कराया और महामारी को काबू करने के उपाय, स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार प्रवासी मजदूरों की मदद और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाये रखने के कदमों की जानकारी दी।

केन्द्रीय कैबिनेट ने सांसदों का वेतन एक वर्ष के लिए 30 प्रतिशत कम किया

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद सदस्य के वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम 1954 में संशोधन के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी। इसके तहत सांसदों का वेतन एक वर्ष के लिए 30 प्रतिशत कम हो जाएगा।
यह अध्यादेश पहली अप्रैल से प्रभावी हो गया। मंत्रिमंडल के फैसलों के बारे में सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने संवाददाताओं को बताया कि केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों का वेतन एक वर्ष के लिए 30 प्रतिशत घट जाएगा।
जावड़ेकर ने बताया कि मंत्रिमंडल ने 2020-21 से 2021-22 तक दो वर्ष के लिए सांसद क्षेत्रीय विकास निधि को निलंबित करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि यह 79 अरब रुपये की राशि कोविड-19 से निपटने के लिए भारत की समेकित निधि में जमा कराई जाएगी।
मंत्रिमंडल के फैसलों के बारे में सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने संवाददाताओं को बताया कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यों के राज्यपालों ने सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में एक वर्ष तक अपने वेतन में एच्छिक रूप से 30 प्रतिशत कमी करने का फैसला किया है। यह राशि भी भारत की समेकित निधि में जमा कराई जाएगी।

केन्द्र ने राज्यों को 30 अरब रुपये की अतिरिक्त राशि जारी की

सरकार ने कोविड-19 महामारी के प्रबंधन के लिए राज्यों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निधि से अतिरिक्त तीन हजार करोड़ रूपए जारी किए हैं। इससे पहले इस निधि में 11 सौ करोड रुपये जारी किए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने नई दिल्ली इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान देशभर में अब तक 16 लाख 94 हजार मीट्रिक टन अनाज का परिवहन किया गया। इस बीच, देश में पिछले 24 घंटे में छह सौ 93 लोगों में कोविड-19 के संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके साथ ही संक्रमित लोगों की संख्या चार हजार 67 हो गई। इनमें से दो सौ 91 लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि एक सौ नौ लोगों की मृत्यु हुई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि कुल मामलों में से 76 प्रतिशत पुरूष और 24 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि संक्रमित लोगों में से एक हजार चार सौ 45 तब्लीगी जमात से संबंधित हैं।
अग्रवाल ने कहा कि कोविड-19 के शिकार एक सौ नौ लोगों में से 63 प्रतिशत की उम्र 60 वर्ष से अधिक थी। मृतकों में 40 से 60 वर्ष की उम्र के 30 प्रतिशत जबकि 40 वर्ष से कम उम्र के सात प्रतिशत लोग थे। उन्होंने उच्च जोखिम वाले लोगों को सरकार के निर्देशों और दिशानिर्देशों का पालन करने का सुझाव दिया।
अग्रवाल ने देशवासियों से कोविड-19 महामारी को फैलने से रोकेने के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखने और दिशा निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया।
अग्रवाल ने बताया कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान देशभर में अब तक 16 लाख 94 हजार मीट्रिक टन अनाज का परिवहन किया गया। उन्होंने कहा कि 13 राज्यों में एक लाख 30 हजार मीट्रिक टन गेहूं और आठ राज्यों में एक लाख 32 हजार मीट्रिक टन चावल आवंटित किया गया। कहा कि भारतीय खाद्य निगम के पास केंद्र के हिस्से वाला 55 लाख 47 हजार मीट्रिक टन अनाज है।
अग्रवाल ने कहा कि इस महामारी के प्रबंधन के लिए राज्यों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निधि से 11 अरब रुपये जारी किए गए हैं। इस संबंध में 30 अरब रुपये की अतिरिक्त राशि जारी की गई है।
गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि लॉकडाउन के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं और चीजों की उपलब्धता संतोषजनक है।
तब्लीगी जमात से संबंधित मामलों के बारे में सुश्री श्रीवास्तव ने कहा कि अथक प्रयायों से तब्लीगी जमात के 25 हजार पांच सौ से अधिक स्थानीय लोगों और उनके सम्पर्क में आए लोगों को क्वारेंटीन किया गया है।

सब इंस्पेक्टर शाहिदा से सीखे, पहले फर्ज कैसे निभाया जाता है

देशभर में कोरोना वायरस के खौफ और लॉकडाउन के बीच ऋषिकेश के मुनिकीरेती थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर शाहिदा परवीन ने जिम्मेदारी की ऐसी मिसाल कायम की है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी नजीर बन जाएगी। शाहिदा ने अपनी आने वाली खूबसूरत जिंदगी के आगे वर्दी के फर्ज को चुना और कोरोना को हराने के बाद ही निकाह करने का फैसला लिया। सब कुछ ठीक रहता तो शाहिदा 5 अप्रैल को दुल्हन के रूप में सजी होतीं। लेकिन, उनके मुंह पर मास्क था और हाथ में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए डंडा। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान पांच अप्रैल को होने वाली अपनी शादी को अपने कर्तव्य के लिए स्थगित कर दिया है। शाहिदा के इस फैसले से उत्तराखंड पुलिस विभाग में ही नहीं, समाज में भी उनका कद और बढ़ गया है।
2016 बैच की भर्ती सब इंस्पेक्टर शाहिदा परवीन पुत्री रहीम शाह निवासी कान्हरवाला, भानियावाला देहरादून वर्तमान में मुनिकीरेती थाने में तैनात है। उनका निकाह लक्सर जिला हरिद्वार निवासी शाहिद शाह पुत्र गुलाम साबिर के साथ पांच अप्रैल को तय हुआ था। शाहिद शाह वर्तमान में हरिद्वार रेलवे में टीटीई के पद पर कार्यरत हैं। दोनों ही परिवारों ने निकाह की पूरी तैयारी कर ली थी।
यहां तक की सब इंस्पेक्टर ने निकाह के लिए 50 दिनों के अवकाश के लिए आवेदन भी कर दिया था। इसके बाद लॉकडाउन की पीएम नरेंद्र मोदी ने घोषणा की और शाहिदा परवीन ने निकाह से पहले अपने फर्ज को पूरा करने की ठानी। इसके लिए उन्होंने होने वाले शौहर से बात की और कोरोना खत्म होने तक निकाह न करने का फैसला किया।
इसे हरिद्वार निवासी शाहिद शाह ने भी स्वीकारा। शाहिदा ने बताया कि यदि पुलिस अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगी तो इसका गलत प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि मैंने जब से खाकी वर्दी पहनी है, मेरे लिए लोगों की परेशानी और ड्यूटी पहले है। यही कारण है कि लॉकडाउन में निकाह से पहले ड्यूटी को चुना। परवीन ने बताया कि निकाह की तारीख बदलने से सबसे ज्यादा उनकी मां अनीशा निराश हुईं। इसके बावजूद मां ने बेटी के फैसले को सहर्ष स्वीकार कर लिया।