क्वारंटीन सेंटर में किसी प्रकार की कोई लापरवाही न बरतें अधिकरीः डीएम मंगेश घिल्डियाल

कोरोना वायरस को लेकर जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने वीडियों कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के उप जिलाधिकारियों एवं प्रभारी चिकिसा अधिकारियो की बैठक ली। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए जब तक कोरोना की जांच रिपोर्ट नही आ जाती तब तक क्वारंटीन सेंटर में रखे व्यक्ति को घर जाने की अनुमति किसी भी दशा में न दी जाए। जिलाधिकारी ने कहा, कन्टेनमेंट जोन में किसी भी तरह का आवागम नही होगा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया की यदि कन्टेनमेंट जोन में केन्द्र सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन का उलंघन पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि कन्टेनमेंट जोन एक गंभीर विषय है, इसमे किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नही होगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि कन्टेनमेंट जोन का औचक निरीक्षण किया जाएगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। वही कल से कन्टेनमेंट जोन पर लगाये गए बैरियर की फोटो अनिवार्य रूप से उपलब्ध करने के निर्देश दिए है। जिलाधिकारी ने प्रभारी चिकित्साधिरारियो को कन्टेनमेंट जोन में प्रत्येक परिवार का दैनिक रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है।

जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया की कोरोना पाॅजीटिव व्यक्ति के संपर्क में आये व्यक्तियो (कांटेक्ट ट्रेसिंग से) उन व्यक्तियो को अनिवार्य रूप से संस्थागत क्वारंटीन किये जाने के निर्देश दिए है। कोरोना महामारी आपदा के दौरान तमाम व्यवस्थाओ हेतु तहसील स्तर पर प्रयाप्त धनराशि की उपलब्धता के बावजूद लंबित बीजकांे के भुगतान न किये जाने पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। प्रभारी चिकिसाधिकारियो को स्पष्ट निर्देश दिए की कोरोना के लक्षण वाले व्यक्ति को कौन सी दवाई देनी है कौन सी नही, इस हेतु हेल्थ टीमों को नियमित रूप से प्रशिक्षित करने के निर्देश भी दिए है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश, गैरसैंण ई-विधानसभा बनने की ओर

ग्रीष्म कालीन राजधानी गैरसैंण को ई-विधानसभा बनाया जायेगा। पर्यावरण का संरक्षण हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है। पर्यावरण प्रदूषण से मुक्ति एवं जैव विविधता को बनाये रखने के लिए हमें जनभागीदारी से प्रयास करने होंगे। यह बात मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सचिवालय में सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियों कांफ्रेंसिंग के दौरान कही। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और मानव के बीच कैसे संतुलन बना रहे, इस दिशा में अनुसंधान की आवश्यकता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य की पर्यावरण रिपोर्ट की बुक का विमोचन भी किया।

गैरसैंण को ई-विधानसभा बनाया जायेगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रीष्म कालीन राजधानी गैरसैंण को ई-विधानसभा बनाया जायेगा। उत्तराखण्ड सरकार ने ई-कैबिनेट की शुरूआत की है। हमने अपने ऑफिसों को ई-ऑफिस बनाने का निर्णय लिया। अभी 17 कार्यालय, ई-ऑफिस हो गये हैं। प्रयास है कि राज्य के ब्लॉक स्तर तक जितने भी कार्यालय हैं, इनको ई-ऑफिस बनाया जाय।

हरेला पर्व पर फिजीकल डिस्टेंस रखते हुए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला पर्व पर फिजीकल डिस्टेंस का पालन करते हुए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जायेगा। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि हरेला पर्व पर वृक्षारोपण के लिए जन सहभागिता पर विशेष ध्यान दिया जाय। किसी भी अभियान को सफल बनाने के लिए जन सहयोग बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी अपने जनपदों में नदियों, नौलों, एवं जल के स्रोतों के पुनर्जीवन की दिशा में कार्य करें। राज्य सरकार ने मिशन रिस्पना टू ऋषिपर्णा एवं कोसी के पुनर्जीवन का लक्ष्य रखा है। रिस्पना नदी के लिए आईआईटी रूड़की ने प्रोजक्ट रिपोर्ट तैयार की है। इस अभियान के तहत मिशन मोड में कार्य किया जायेगा।

भारत में जैव विविधता को बनाये रखने में उत्तराखण्ड का अहम योगदान
वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि भारत में जैव विविधता को बनाये रखने में उत्तराखण्ड का महत्वपूर्ण योगदान है। उत्तराखण्ड में देश की 28 प्रतिशत जैव विविधता पायी जाती है। यहां की जैव विविधता का प्रभाव भारत ही नहीं अपितू सम्पूर्ण विश्व पर पड़ता है। प्रकृति हमें सब कुछ देती है। मानव को प्रकृति के साथ पूरा संतुलन बनाकर आगे बढ़ना होगा। पर्यावरण संतुलन के लिए लोगों में सजगता होना बहुत जरूरी है। हम छोटे-छोटे प्रयासों से भी इस दिशा में अपना योगदान दे सकते हैं। हम भावी पीढ़ी को कैसा पर्यावरण देना चाहते हैं, यह हम पर निर्भर है।

बैठक में जानकारी दी गई कि झाझरा, देहरादून में ‘आनंद वन’ के नाम से सिटी फॉरेस्ट विकसित किया जा रहा है। उत्तराखण्ड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रत्येक जनपद के लिए जनपद स्तरीय प्रदूषण नियंत्रण मैनेजमेंट प्लान बनाया जा रहा है। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम जैव विविधता है। बैठक में मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रविन्द्र दत्त, प्रमुख सचिव वन आनन्द वर्द्धन, पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस.नेगी, प्रमुख वन संरक्षक जयराज, निदेशक उत्तराखण्ड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एस.पी. सुबुद्धि आदि उपस्थित थे।

सरकारी लैब में अभी 6133 सैंपलों की जांच जारी, तेजी से बढ़ रहे संक्रमित मरीज

प्रदेश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अभी तक सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों को ऑरेंज जोन में शामिल किया था। लेकिन अब लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए सरकार ने नैनीताल को ऑरेंज से हटाकर रेड जोन में शामिल कर दिया है। वहीं, ऊधमसिंह नगर को ग्रीन जोन में शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, नैनीताल में अब तक करीब 260 मामले सामने आ चुके हैं। ऊधमसिंह नगर में संक्रमित मरीजों की संख्या 82 हो गई है। वहीं इसके बाद अब 11 जिले ऑरेंज जोन में शामिल हैं।
प्रदेशभर में रविवार को 158 मरीजों में कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत ने इसकी पुष्टि की है। वहीं, दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की एक महिला डॉक्टर भी संक्रमित मिलीं हैं। दून मेडिकल कॉलेज के डिप्टी एमएस और कोरोना के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. एनएस खत्री ने जानकारी दी। इसके साथ ही अब प्रदेश में सक्रमित मरीजों का आंकड़ा 907 पहुंच गया है। 
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, आज देहरादून में 49, हरिद्वार में 17, नैनीताल में 31, टिहरी में तीन, अल्मोड़ा में 18, चंपावत में चार, पौड़ी में छह, ऊधमसिंह नगर में 20, चमोली में दो, उत्तरकाशी में सात और रुद्रप्रयाग में एक संक्रमित केस मिला है। अभी भी प्रदेश में 692 एक्टिव केस हैं। इसके साथ ही अब नैनीताल को रेड जोन में शामिल कर दिया है। जबकि ऊधमसिंह नगर को ग्रीन जोन में शामिल किया गया है। अपर सचिव युगल किशोर पंत ने बताया कि 102 मरीज ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं। चार सरकारी लैब में अभी 6133 सैंपलों की जांच चल रही है। इनकी रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है।
उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण अभी सामुदायिक फैलाव के फेज में नहीं आया है। जितने भी पॉजिटिव केस आए हैं, उनकी ट्रैवल हिस्ट्री और कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग जारी है। ज्यादातर मामले बाहर से लौटे प्रवासियों के संक्रमित होने के आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग संक्रमण से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। मीडिया के माध्यम से उन्होंने जनता से अपील की है कि आने वाले दिनों में और अधिक अनुशासन बनाए रखने की जरूरत है। कहा कि धीरे-धीरे बाजार के खुलने में ढील दे रहे हैं, लेकिन लोगों को दुकानों में भीड़ एकत्रित नहीं होने देनी है।

सतपाल महाराज पाॅजीटिव, कैबिनेट में शामिल हुए मंत्री और अधिकारी होंगे क्वारंटीन

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज व उनके परिवार और स्टाफ के 23 सदस्य कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। बेटे, बहुएं और पांच साल के पोते में भी संक्रमण की पुष्टि हुई है। जबकि बड़े बेटे का सैंपल दोबारा जांच के लिए भेजा गया है। कल पूर्व मंत्री अमृता रावत कोरोना पॉजिटिव पाई गई थीं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने महाराज और उनके परिवार के सभी सदस्यों के साथ ही आवास में काम करने वाले कर्मचारियों के सैंपल जांच के लिए भेजे थे।
इनमें कैबिनेट मंत्री महाराज, उनके छोटे बेटे सुयश, बड़ी बहू आराध्य, छोटी बहू मोहिनी, पांच साल के पोते श्रेयांश में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। जबकि बड़े बेटे श्रद्धेय का सैंपल दोबारा से जांच के लिए भेजा जा रहा है। वहीं, महाराज के आवास में काम करने वाले 17 कर्मचारी भी संक्रमित मिले है।
महाराज और उनका परिवार कोरोना संक्रमित मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। महाराज की पत्नी अमृता रावत को रविवार सुबह ही एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था, इसके बाद दोपहर में महाराज और अन्य लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। जिसके बाद महाराज समेत लोगों को भी एम्स ऋषिकेश में भर्ती करा दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव युगल किशोर पंत ने बताया कि कैबिनेट मंत्री महाराज और उनके परिवार के सदस्यों व स्टाफ में कोरोना की पुष्टि हुई है। विभाग की ओर से 41 सैंपल जांच के लिए गए थे। इसमें 22 सैंपल कोरोना पॉजिटिव आए हैं। सभी को भर्ती कराया गया है। इन सभी के संपर्क में आए लोगों को चिन्हित करने की कोशिश की जा रही है।

वहीं, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के परिवार में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होने पर प्रशासन ने सर्कुलर रोड, डालनवाला स्थित उनके आवास के आसपास का क्षेत्र पाबंद (सील) कर दिया है। क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बना दिया है। अगले आदेश तक यहां के लोग क्षेत्र से बाहर नहीं जाएंगे। इस दौरान क्षेत्र के बैंक, दुकानें और अन्य प्रतिष्ठान भी बंद रहेंगे।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने रविवार को इसके आदेश जारी कर दिए हैं। पर्यटन मंत्री के सर्कुलर रोड स्थित आवास के पूरब में कर्जन रोड, पश्चिम में अब्दुल्ला खान का मकान, उत्तर में अमित अग्रवाल का मकान और दक्षिण में 13 म्यूनिसिपल रोड के क्षेत्र को पाबंद किया है। डीएम ने कहा कि इस क्षेत्र में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति अब प्रशासन कराएगा।
परिवार का एक सदस्य खरीदारी के लिए बाहर निकल सकता है। मोबाइल वैन के जरिए पाबंद क्षेत्र में दूध की सप्लाई की जाएगी। नगर निगम को क्षेत्र की साफ-सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के साथ मुनादी कर लोगों को जागरूक करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अलावा पुलिस क्षेत्र की बैरिकेडिंग करेगी। सीएमओ को सामुदायिक स्वास्थ्य पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि अगर कोई इमरजेंसी है तो कंटेनमेंट जोन के लोग पुलिस के टोल फ्री नंबर 112 पर संपर्क कर सकते हैं। आदेश का पालन न करने वाले लोगों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

एहतियात बरतते हुए होंगे होम क्वारंटीन
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के कोरोना पॉजिटिव आने से सरकार पर कोरोना संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है। पॉजिटिव आने से पहले महाराज मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल हुए थे। इस बैठक में मुख्यमंत्री समेत सभी कैबिनेट मंत्री, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह सहित शासन के अन्य उच्च अधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एहतियात बरतते हुए सभी बैठकें निरस्त कर दी हैं, जबकि कई मंत्री होम क्वारंटीन में चले गए हैं।
हालांकि आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुसार मंत्रिमंडल की बैठक जिस फार्मेट में होती है, वह संक्रमण के लिहाज से लो रिस्क श्रेणी में आती है। महाराज के पॉजिटिव आते ही सरकार में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रविवार को अपनी सभी बैठकें निरस्त कर दी। उन्होंने किसी से मुलाकात भी नहीं की।
वहीं अधिकांश मंत्रियों ने खुद को होम क्वारंटीन कर लिया है। महाराज के साथ बैठक में मौजूद होने से कई मंत्री भी सहमे हुए हैं कि कहीं उनमें कोरोना का लक्षण न आ जाए। मुख्य सचिव उत्पल कुमार ने बताया कि मंत्रिमंडल में जो भी अधिकारी शामिल थे, उनमें से आधे अधिकारी होम क्वारंटीन होंगे और आधे वर्क फ्रॉम होम करेंगे।

पत्नी के पाॅजीटिव होने से एक दिन पहले कैबिनेट बैठक में शामिल हुए थे महाराज

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की पत्नी अमृता रावत कल कोरोना पॉजिटिव पाई गईं। जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव और अपर सचिव युगल किशोर पंत ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि अमृता रावत की तबीयत खराब थी। शनिवार सुबह देहरादून की एक निजी लैब में उनकी कोरोना जांच की गई, देर शाम रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
अमृता रावत की रिपोर्ट पाॅजीटिव आने की खबर से स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया। एक दिन पहले ही कैबिनेट में सतपाल महाराज शामिल हुए थे। ऐसे में राज्य की कैबिनेट और शासन के वरिष्ठ अधिकारियों में चिंता होना लाजिमी है। सतपाल महाराज के कोविड टेस्ट के बाद ही कुछ स्थिति साफ हो पायेगी। क्योकि रिपोर्ट अगर पाॅजीटिव आती है तो नियमानुसार सभी को क्वारंटीन करना होगा। बता दें कि कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्री भी शामिल थे। ऐसे में यह देश का पहला राज्य होगा जहां पूरी सरकार को ही क्वारंटीन होना पड़ेगा। लेकिन महाराज की रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो यह सभी के लिए राहत की बात होगी।  
बता दें कि अभी कुछ दिन पहले ही दिल्ली से मंत्री सतपाल महाराज से मिलने आए लोगों को मंत्री आवास में ही क्वांरटीन कर दिया गया था। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के घर के बाहर क्वारंटीन का स्टीकर भी चस्पा किया गया था। 
कुछ लोग दिल्ली से सतपाल महाराज से मिलने उनके सर्कुलर रोड स्थित घर पर आए थे। इसलिए केंद्र सरकार की गाइड लाइन के हिसाब से महाराज के घर आए तीन लोगों को प्रशासन ने उनके आवास में ही होम क्वांरटीन कर दिया था। वहीं मंत्री ने अपना ऑफिस भी सरकारी आवास में शिफ्ट कर दिया था।

कांग्रेस के निशाने पर आएं महाराज
कांग्रेस पार्टी की ओर से सतपाल महाराज सहित पूरी कैबिनेट और मुख्यमंत्री को क्वारंटीन करने की मांग की गई है। साथ ही ऐसे अधिकारी जो बैठक में शामिल हुए उन्हें भी ऐतिहातन के तौर पर क्वारंटीन करने और सभी का सैंपल लेने की बात की जा रही है। सोशल मीडिया में भी महाराज की पत्नी के पाॅजीटिव पाये जाने पर कई तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली।

मदन कौशिक पर बढ़ा दबाव
उत्तरी हरिद्वार में एक युवक के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के उपर दबाव बढ़ गया है। कारण यह कि युवक तीन दिन पहले प्रदेश के कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक समेत कई लोगों के संपर्क में आया था। दरअसल, युवक खड़खड़ी में मदद के लिए बांटा गया राशन लेने पहुंचा था। वहीं, सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या मंत्री समेत अन्य को भी क्वारंटाइन किया जाएगा। दरअसल, खड़खड़ी क्षेत्र के रामलीला मैदान में गरीब, असहाय व जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए राशन बांटा गया था। इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के अलावा एक बड़े संत, एक कथावाचक व कई पार्षद और बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए थे।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए प्रदेश में 11 नए ग्रोथ सेंटरों को मंजूरी

मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि पिछले दिनों में कोराना संक्रमितों की संख्या में बढ़ोतरी से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उत्तराखण्ड में अभी तक सामुदायिक संक्रमण नहीं हुआ है। जितने भी केस आ रहे हैं, उनकी कोई ट्रेवल हिस्ट्री है या कान्टेक्ट के केस हैं। ये सभी पहले से निगरानी में चल रहे थे। अभी कुछ दिन और कुल मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है परंतु 10-15 दिनों में एक्टीव केस की संख्या में कमी आने लगेगी। हमारी डबलिंग रेट में पिछले तीन दिन में कुछ सुधार हुआ है। प्रदेश में पाॅजिटिवीटी रेट, राष्ट्रीय औसत से कम है। हमारे यहां कोरोना संक्रमण में मृत्यु दर 1 प्रतिशत से कम है जबकि भारत का औसत लगभग 2.8 प्रतिशत है। पेंशेंट केयर मेनेजमेंट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कान्टेक्ट ट्रेसिंग को भी प्रमुखता दी जा रही है। प्रदेश में 31 कंटेन्मेंट जोन बनाए गए हैं, जहां बहुत सख्त व्यवस्था लागू है।

कोरोना टेस्ट बढ़ाने के निर्देश
मुख्य सचिव ने कहा कि कोरोना टेस्ट की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। पहले सप्ताह में प्रति दिन सेम्पल का औसत एक था जबकि 16 वें सप्ताह में यह औसत बढ़कर 834 हो गया है। यह जल्द ही 1000 प्रति दिन हो जाएगा। देहरादून में लगभग 5500 प्रति मिलीयन और नैन्ीताल में 3185 प्रति मिलीयन जनसंख्या टेस्ट किए जा रहे हैं जो कि राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं। अन्य जिलों में भी टेस्ट बढ़ाए जा रहे हैं। टेस्टिंग लेब की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।यदि राज्य में कोराना संक्रमित मामलों का विश्लेषण किया जाए तो इनमें 41 प्रतिशत में कोई लक्षण नहीं है, 53 प्रतिशत में बहुत ही मामूली लक्षण हैं, 4.5 प्रतिशत में मध्यम और 1.74 प्रतिशत अधिक लक्षण वाले हैं। स्पष्ट है कि हमारे यहां गम्भीर केस नहीं हैं।

उत्तराखण्ड आने के इच्छुक अधिकांश लोगों को लाया जा चुका
मुख्य सचिव ने बताया कि बाहर से प्रदेश में आने के लिए लगभग 2 लाख 62 हजार प्रवासियों ने आनलाईन रजिस्ट्रेशन कराया है, इनमें से 1 लाख 81 हजार लोगों को ट्रेन, बस या निजी वाहनों के माध्यम से लाया जा चुका है। अब लोग आने के लिए कम इच्छुक हैं। 28 मई को 98 हजार बल्क एसएमएस किए गए जिनमें से लगभग 3 हजार लोगों ने ही आने की इच्छा व्यक्त की।

अनुशासन, धैर्य और साहस बनाए रखने की अपील
मुख्य सचिव ने कहा कि हालांकि स्थिति चुनौतिपूर्ण है, परंतु किसी तरह से घबराने या आशंकित होने की आवश्यकता नहीं है। हमारी पूरी तैयारी है। अनुशासन, धैर्य और साहस से हम जल्द ही प्रदेश में कोरोना को नियंत्रित कर लेंगे। ग्राम स्तर से लेकर राज्य स्तर तक अधिकारी व कर्मचारी अनवरत लगे हैं। मुख्यमंत्री स्तर पर स्टेट टास्क फोर्स के साथ रोज समीक्षा की जाती है और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लिए जाते हैं। केबिनेट भी नियमित रूप से स्थिति की समीक्षा करती है।
मुख्य सचिव ने कहा कि धीरे-धीरे शिथिलता दी जा रही है। बाजार के खुलने के समय को सुबह के 7 बजे से शाम के 7 बजे तक किया गया है। लेकिन कुछ सावधानियां रखनी जरूरी हैं। एक जगह पर भीड़ न करें। फिजीकल डिस्टेंस बनाकर रखें, बाहर जाने पर मास्क का अनिवार्यता से प्रयोग करें और हाथों को बार-बार धोएं।

मनरेगा के 18 हजार कार्य संचालित, 2 लाख 44 हजार श्रमिक कार्यरत
मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में सभी जिलों में मनरेगा के काम चल रहे हैं। 18 हजार से अधिक मनरेगा के कार्यों में 2 लाख 44 हजार श्रमिक लगे है। 9760 नए जाॅब कार्ड बनाए गए है। इनमें से 6400 को काम भी उपलब्ध कराया गया है।

11 नए ग्रोथ सेंटर स्वीकृत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। ऐसे ही एक निर्णय किया गया है कि आराकोट में मंडी परिषद के माध्यम से सेब का सोर्टिंग व ग्रेडिंग सेंटर बनाया जाएगा। इससे हमारे सेब के उत्पादकों को अच्छी कीमत मिलेगी। प्रदेश में पहले से 83 ग्रोथ सेंटर स्थापित हैं। हाल ही में प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर 11 नए ग्रोथ सेंटर को मंजूरी दी गई है। इनमें पिथौरागढ़ के मुन्स्यारी में पक्षी पर्यटन, चमोली के गैरसैंण में मसाला व देवाल में शहद, नैनीताल के कोटाबाग में शहद और आर्गेनिक उत्पाद, रामगढ़ में खाद्य प्रसंस्करण, अल्मोड़ा में नेचुरल फाईबर, ऊधमसिंहनगर के गदरपुर में मसाला, जसपुर में दुग्ध व उच्च गुणवत्ता की रजाई, उत्तरकाशी के रैथल में साहसिक पर्यटन पर आधारित ग्रोथ सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसी प्रकार भीमताल में बेकरी, रामनगर में सोवेनियर, बागजला में ऐंपण के ग्रोथ सेंटर को सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है। इन ग्रोथ सेंटर से युवाओं और स्थानीय लोगों को आजीविका के अवसर मिलेंगे।
सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग।

रात्रिकालीन कर्फ्यू रहेगा, रात नौ से सुबह पांच बजे तक पाबंदी

बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच देश को फिर से पटरी पर लाने के लिए केंद्र सरकार ने 68 दिनों की बंदी के बाद चरणबद्ध तरीके से बंदिशें हटाने का एलान कर दिया। 30 जून तक चलने वाले लॉकडाउन-5.0 के दौरान पाबंदियां सिर्फ कंटेनमेंट जोन में रहेंगी। इसके अलावा बाकी जगहों पर सभी गतिविधियां चरणबद्ध तरीके से शुरू होंगी। एक जून से पूरे देश में कहीं भी लोग आ जा सकेंगे। इसके लिए किसी पास या मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। वहीं, देशभर में रात का कर्फ्यू अब रात नौ बजे से सुबह पांच बजे तक रहेगा। इस दौरान सिर्फ आवश्यक गतिविधियों की मंजूरी होगी।
अनलॉक-1 के पहले चरण में केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक आठ जून से सभी धार्मिक स्थल, होटल, रेस्टोरेंट और शॉपिंग मॉल खुल सकेंगे। वहीं, दूसरे चरण में स्कूल-कॉलेज समेत सभी शिक्षण संस्थानों को खोलने की तैयारी है। हालांकि इसकी तारीख राज्यों से पहले चरण के फीडबैक के आधार पर जुलाई में तय होगी। इसके बाद तीसरे चरण में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें, मेट्रो रेल, स्वीमिंग पूल, जिम, सामाजिक, सांस्कृतिक, खेल, राजनीतिक गतिविधियां शुरू करने पर फैसला होगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अनलॉक-1 के विस्तृत दिशा-निर्देश के तहत कंटेनमेंट जोन में पाबंदियां पहले की तरह ही 30 जून तक लागू रहेंगी। कंटेनमेंट जोन का निर्धारण संक्रमण स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन करेगा। इस जोन में सिर्फ चिकित्सा तथा आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की ही मंजूरी होगी। राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र कंटेनमेंट जोन के बाहर बफर जोन तय कर हालात के मुताबिक कुछ पाबंदियां लगा सकते हैं। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी जरूरत के हिसाब से पाबंदियां लगाई जा सकेंगी।

दूसरे राज्य में जाने के लिए पास जरूरी नहीं, नियम तोड़ने पर होगी सजा
सोमवार से एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने या राज्य के भीतर कहीं भी लोगों और वस्तुओं की आवाजाही पर कोई पाबंदी नहीं होगी। इसके लिए अलग से कोई मंजूरी या ई-पास भी जरूरी नहीं होगा। हालांकि कोई राज्य या केंद्र शासित प्रदेश अगर स्वास्थ्य कारणों से आवाजाही रोकना चाहता है तो इस बारे में पहले व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार करना होगा। श्रमिक स्पेशल, विशेष ट्रेनें, घरेलू विमान सेवाएं तथा विदेश में फंसे भारतीयों की वापसी जारी रहेगी। कोई भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश वस्तुओं की आपूर्ति या आवाजाही पर रोक नहीं लगा सकेगा।

नियम तोड़ने पर सजा का प्रावधान
महामारी के दौरान सरकार आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 और आईपीसी की धारा-188 के तहत कार्रवाई करेगी। आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत निमभन परिस्थितियों में कार्रवाई की जाएगी।
अकारण किसी अधिकारी या अन्य सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने पर धारा-51 के तहत एक साल की सजा व जुर्माना
केंद्र या राज्य सरकार की तरफ से दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने पर भी धारा-51 के तहत एक साल की सजा व जुर्माना
सरकारी राहत कार्यों को लेकर किसी तरह का झूठा दावा करने पर धारा-52 के तहत दो साल की सजा व जुर्माना
राहत अभियान के तहत मिले सामान या पैसे में घपला करने पर धारा-53 की तहत दो साल की सजा व जुर्माना
आपदा या महामारी को लेकर किसी तरह की झूठी अफवाह फैलाने पर धारा-54 के तहत एक साल की सजा या जुर्माना
किसी सरकारी विभाग की तरफ से किए गए अपराध के लिए विभागीय प्रमुख होगा दोषी, धारा-55 (1) के तहत कार्रवाई
यदि यह साबित हो कि अपराध विभागीय प्रमुख के बजाय अन्य अधिकारी ने किया है तो धारा-55 (2) के तहत कार्रवाई
बिना इजाजत लिए आपदा के दौरान ड्यूटी से गायब रहने वाले सरकारी अधिकारी को धारा-56 के तहत एक साल की सजा या जुर्माना
धारा-65 के तहत दिए गए आदेश का पालन करने में असफल रहने वाले व्यक्ति को एक साल कैद या जुर्माना या दोनों सजा
कंपनियों द्वारा अधिनियम के तहत जारी निर्देशों का पालन नहीं करने पर धारा-58 के तहत आपराधिक कार्रवाई
धारा-55 व धारा-56 के तहत किए गए अपराध में अभियान की कार्रवाई धारा-59 के तहत पूरी की जाएगी
अधिनियम की धारा-60 के तहत कोई भी अदालत कुछ खास परिस्थितियों में मामले का संज्ञान नहीं लेगी

पहला चरण
धार्मिक स्थल, सार्वजनिक पूजा स्थल, होटल, रेस्तरां और शॉपिंग मॉल आठ जून से खुलेंगे। इनके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय दिशा-निर्देश जारी करेगा।

दूसरा चरण
स्कूल, कॉलेज, कोचिंग आदि शिक्षण संस्थान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चर्चा के बाद खुलेंगे। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश अभिभावकों तथा शिक्षण संस्थान संचालकों से विचार विमर्श कर केंद्र को फीडबैक देंगे। इसके आधार जुलाई में इन्हें खोलने पर फैसला होगा।

तीसरा चरण
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, मेट्रो रेल, सिनेमाघर, जिम, स्वीमिंग पूल, मनोरंजन पार्क, थियेटर, बार, सभागार, सामाजिक, राजनीतिक, खेल, मनोरंजन, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, धार्मिक समारोह और अन्य बड़े कार्यक्रमों को शुरू करने की तारीखों का फैसला हालात के आकलन के बाद तीसरे चरण में होगा।
कार्य स्थलों के लिए ये हैं दिशानिर्देश, चेहरा ढकना और सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य
सार्वजनिक जगहों, कार्य स्थलों और सफर के दौरान चेहरा ढकना अनिवार्य होगा।
सार्वजनिक स्थलों पर हर किसी को दो गज (छह फुट) की दूरी का पालन करना होगा।
बड़ी सार्वजनिक सभाओं व कार्यक्रमों पर रोक रहेगी। शादी में 50 से ज्यादा और अंतिम संस्कार में 20 से ज्यादा लोगों के शामिल होने पर पाबंदी।
सार्वजनिक जगहों पर थूकना होगा दंडनीय अपराध, लगेगा जुर्माना।
सार्वजनिक स्थलों पर शराब पीना, गुटखा और तंबाकू इत्यादि खाने पर रहेगी रोक।
 
कार्यालयों के लिए दिशानिर्देश
यथासंभव वर्क फ्रॉम होम लागू हो
दफ्तरों, कार्यस्थलों, दुकानों, बाजारों, उद्योगों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में बिजनेस ऑवर का पालन हो
कर्मचारियों की थर्मल स्क्रीनिंग, हाथ धोने और आने जाने वाले द्वार पर हैंड सैनिटाइजर की व्यवस्था हो
कार्यस्थलों में नियमित तौर पर सैनिटाइजेशन हो। शिफ्ट बदलने के दौरान भी रखें सफाई का ध्यान
सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो। शिफ्ट के बीच पर्याप्त अंतराल हो
कर्मचारियों के आरोग्य सेतु एप का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाए

टिकटॉक को आ गया बाय-बाय करने का समय, स्वदेशी एप मित्रों हो रहा पॉपुलर

भारत में टिकटॉक का बाय-बाय करने का वक्त आ गया है। भारत के युवाओं की जुबां पर अब टिकटॉक नहीं बल्कि स्वदेशी निर्मित एप मित्रों का नाम है। अभी तक इस एप को 50 लाख से ज्यादा युवा गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर चुके है। इसे आईआईटी रूड़की के पूर्व छात्रों ने बनाया है। इसे टिकटॉक का क्लोन भी कहा जा रहा है।

आईआईटी के पूर्व छात्रों का कहना है कि एप लांच करते समय हमें ऐसे ट्रैफिक की उम्मीद नहीं थी। इसे बनाने के पीछे लोगों को सिर्फ भारतीय विकल्प देना था। आईआईटी रुड़की में वर्ष 2011 में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ब्रांच से पासआउट छात्र शिवांक अग्रवाल ने अपने चार साथियों के साथ मित्रों एप बनाया है।

11 अप्रैल को हुआ था मित्रों एप लांच
पेटीएम के पूर्व सीनियर वाइस प्रेजिडेंट दीपक के ट्वीट के बाद इसकी चर्चा हर किसी की जुबान पर है। अचानक बड़ी संख्या में लोगों के एप डाउनलोड करने से नेटवर्क ट्रैफिक भी प्रभावित होने लगा। टीम मेंबर ने बताया कि वास्तव में 11 अप्रैल को एप लांच करते समय यह नहीं सोचा था कि इसे इतनी सफलता मिलेगी। टिकटॉक को पीछे छोड़ना जैसी कोई बात नहीं है। हमारा उद्देश्य लोगों को सिर्फ एक भारतीय विकल्प देना था। लोग इसका इस्तेमाल करना चाहेंगे या नहीं यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हमें लोगों से जो आशीर्वाद मिला, उससे हम बहुत खुश हैं। उन्होंने बताया कि हमें किसी ने फंड नहीं दिया है, उनका फंड लोगों का प्यार ही है।

मित्रों स्वदेशी नाम, इसलिए देना उचित
टीम मेंबर ने बताया कि मित्रों का अर्थ मित्र ही है। एक तो यह भारतीय उपभोक्ताओं को भारतीय मंच के जरिए सेवा देने के लिए है। हम स्वदेशी नाम देकर भारतीय नामों के खिलाफ पूर्वाग्रहों को भी दूर करना चाहते हैं।

कोरोना से बचना है तो भीड़-भाड़ वाले स्थानों में जाने से बचें, जानिए क्यों है जरुरी

कोरोना वायरस आने के बाद सब एक दूसरे से उचित दुरी बना कर रख रहे है। लोगों से कहा जा रहा है कि दूर-दूर रहो. कम से कम एक या दो मीटर की दूरी। लेकिन अब एक अध्ययन में सामने आया है कि कोरोना से बचने के लिए दो मीटर की दूरी नाकाफी है. क्योंकि इंसान की लार की बूंदें कम गति वाली हवा में भी कुछ नहीं तो छह मीटर तक ट्रैवल तो करती ही हैं।
ये अध्ययन अमेरिकन इंस्टिट्यूट ऑफ फिजिक्स के तहत फिजिक्स ऑफ फ्लुइड्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें कहा गया है कि जब हवा की गति जीरो थी, तब लार की बूंदों ने दो मीटर से ज्यादा ट्रैवल नहीं किया। जो कि सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के लिए एकदम सही है। लेकिन जब हवा चार किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है, तब ये बूंदें छह मीटर तक ट्रैवल कर लेती हैं।
लार की बूंदों पर ये स्टडी रिसर्चर्स तालिब डीबौक और दिमित्रिस ड्रक्कैकिस ने की है। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के ई-मेल के जवाब में ड्रक्कैकिस ने लिखा है कि ‘चार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवा के एक झोंके से भी ये बूंदें पांच सेकंड्स के अंदर छह मीटर तक ट्रैवल कर जाती हैं। इसलिए दो मीटर की दूरी काफी नहीं है। भीड़ वाले इलाके काफी ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।’
लार की बूंदों पर स्टडी करने के लिए रिसर्चर्स ने कम्प्यूटेशनल फ्लुइड्स डायनेमिक्स का इस्तेमाल किया गया है। इस स्टडी में ये देखा गया कि खांसते हुए आदमी के मुंह से निकलने वाली लार की हर बूंद किस तरह मूव करती है। उमस का उस बूंद पर क्या प्रभाव होता है। बूंदों का आपस में और हवा के साथ कैसा बर्ताव रहता है, और किस तरह ये बूंदें लिक्विड से गैस बनकर हवा होती हैं।
स्टडी में रिसर्चर्स ने ये कहा है कि उन्होंने ये पता लगाने की पूरी कोशिश की है कि सर्दी और बसंत के मौसम का इन बूंदों पर क्या प्रभाव होता है। ड्रक्कैकिस कहते हैं, ‘हमें बूंदो के वाष्पीकरण को अभी और गहराई से समझना है। अलग-अलग वातावरण को लेकर भी स्टडी करनी है। काम अभी चल ही रहा है। इनडोर वातारवरण में बूंद का बर्ताव कैसा होगा, ये जानना बहुत जरूरी है।
वैज्ञानिक कह रहे हैं कि अभी अलग-अलग वातावरण के हिसाब से स्टडी करना बाकी है। लेकिन ये स्टडी सोशल डिस्टेंसिंग के सुझाव के लिहाज से समझना और होना बेहद जरूरी है।

ग्रीन टैक्स लगाकर आय बढ़ायेगा देहरादून नगर निगम

देहरादून नगर निगम क्षेत्र में प्रवेश करने पर अब प्रवेश शुल्क देना होगा। मनाली जैसे शहरों की तर्ज पर देहरादून नगर निगम ने शहर में प्रवेश करने पर बाहरी वाहनों पर ग्रीन टैक्स लगाने की तैयारी की है। महापौर सुनील उनियाल गामा की अध्यक्षता में आयोजित हुई बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई। टैक्स कितना होगा, कौन से वाहन इसके दायरे में आएंगे और किन्हें छूट रहेगी, इसका प्रारूप तैयार कर शासन को भेजने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जायेगी।
महापौर सुनील उनियाल गामा ने बताया कि देहरादून में पंजीकृत वाहनों को छूट रहेगी। कोरोना संक्रमण के चलते ठप पड़े कार्यो को शुरू करने और नगर निगम को फिर से पटरी पर लाने के लिए कसरत शुरू हो गई है। इसी के मद्देनजर गुरुवार को महापौर ने निगम कार्यकारिणी की बैठक बुलाई। निगम की कार्यकारिणी के जनवरी में चुने जाने के बाद यह पहली बैठक रही। निगम के सभा हॉल में हुई बैठक में शारीरिक दूरी के साथ महापौर और नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय की मौजूदगी में बैठक शुरू हुई।
इसमें मुख्य एजेंडा निगम की आय बढ़ाने का रहा। इस दौरान महापौर ने प्रस्ताव रखा कि मनाली व कुछ अन्य शहरों में बाहरी राज्यों के वाहनों से ग्रीन टैक्स वसूला जाता है। मसूरी में भी ऐसी व्यवस्था है। ऐसे में देहरादून में भी ये टैक्स लगाया जाना चाहिए। इसे पार्षदों की ओर से हरी झंडी दे दी गई। महापौर गामा ने बताया कि निगम अधिकारी इस बारे में प्रारूप तैयार करेंगे और शासन से मंजूरी के बाद नगर निगम क्षेत्र में सभी सीमाओं पर टोल-बैरियर लगाकर टैक्स की वसूली की जाएगी। वहीं, बैठक में तय हुआ कि नए ग्रामीण वार्डों में सफाई की व्यवस्था प्रभावी बनाने के लिए एक जून से सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। ऐसे 29 ग्रामीण वार्ड हैं, जहां मौजूदा समय में महज पांच-आठ सफाई कर्मचारी हैं। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में शहर की तर्ज पर बस स्टैंड भी बनाए जाएंगे।