देहरादून की सड़कों पर सीएम के नेतृत्व में हुई तिरंगा शौर्य सम्मान यात्रा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में शौर्य स्थल चीड़बाग से गांधी पार्क तक भव्य “तिरंगा शौर्य सम्मान यात्रा” का आयोजन किया गया। यह यात्रा हाल ही में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा सफलतापूर्वक चलाए गए “ऑपरेशन सिंदूर” की ऐतिहासिक विजय को समर्पित रही। हजारों की संख्या में आमजन, पूर्व सैनिक, युवा वर्ग एवं मातृशक्ति ने तिरंगे के साथ पद यात्रा में भाग लिया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर शौर्य स्थल पर पुष्प चक्र अर्पित कर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि भी दी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ऑपरेशन सिंदूर में भाग लेने वाले वीर सैनिकों, वायु सेना, नौसेना और सभी सुरक्षा बलों को नमन करते हुए कहा कि भारत ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने में पूरी तरह सक्षम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने न केवल अपने वीर सपूतों की बहादुरी का प्रदर्शन किया, बल्कि आतंकवाद और उसके समर्थकों को यह स्पष्ट संदेश भी दिया कि नया भारत अब हर आतंकी कार्रवाई का जवाब उसी की भाषा में देगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत किसी भी आतंकी चुनौती का मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम है और अब देश की सीमाओं की रक्षा अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक से की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड वीर भूमि है, जहाँ का लगभग हर परिवार देशसेवा से जुड़ा है। उन्होंने प्रदेश के युवाओं से आह्वान किया कि वे सेना और सुरक्षा बलों के अनुशासन, शौर्य और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा लेकर आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक विजय के उपलक्ष्य में ‘तिरंगा शौर्य सम्मान यात्रा’ को प्रत्येक वर्ष मनाए जाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, राज्यसभा सांसद और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक,विधायक खजान दास, उमेश शर्मा काऊ, बृज भूषण गैरोला, भरत चौधरी, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय, भाजपा के प्रदेश महामंत्री आदित्य कोठारी, महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल, दर्जाधारी रजनी रावत, डॉ. देवेंद्र भसीन, श्याम अग्रवाल मौजूद थे।

सहारनपुर से सप्लाई हुए कुट्टू के आटे में मिलावट, 100 लोगों की तबीयत बिगड़ी, सीएम ने जाना हाल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को कोरोनेशन अस्पताल पहुंचकर फूड प्वाइजनिंग से बीमार लोगों को हाल चाल जाना। देहरादून जनपद में फूड प्वाइजनिंग की वजह से लगभग 100 से अधिक लोग बीमार हो गये। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सहारनपुर से सप्लाई हुए कुट्टू के आटे में मिलावट की संभावना से लोगों का स्वास्थ्य खराब हुआ।

मुख्यमंत्री ने कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। उन्होंने जिलाधिकारी देहरादून और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अस्पतालों में भर्ती लोगों को समुचित इलाज देने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर अस्पताल में बेड की संख्या बढ़ाई जाए। फूड प्वाइजनिंग की वजह से कोरोनेशन अस्पताल में 66 और दून मेडिकल कॉलेज में 44 मरीज भर्ती हैं। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग और जिलाधिकारी देहरादून को निर्देश दिये कि जिन भी अस्पतालों में मरीज आ रहे हैं, उनके इलाज का पूरा प्रबंध किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सहारनपुर से जिस दुकान के लिए कुट्टू का आटा सप्लाई हुआ है, वह दुकान सील कर ली गई है। उस दुकान से जिन दुकानों के लिए कुट्टू का आटा सप्लाई हुआ है, उनको भी सूचना दे दी गई है। सहारनपुर के जिला प्रशासन को भी देहरादून जिला प्रशासन से इसके बारे में जानकारी दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों के इलाज के लिए पूरी व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि जिनके कारण यह घटना हुई है, स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिये गये हैं कि पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो स्वास्थ्य विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग और अन्य संबंधित विभाग मिलकर घटना की पूरी जांच करेंगे। लापरवाही करने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।

इस अवसर पर आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डेय, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, एसएसपी देहरादून अजय सिंह, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे।

प्रेमचंद अग्रवाल ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा

उत्तराखंड के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने रविवार को इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा बजट सत्र के दौरान उनके एक विवादास्पद भाषण के कुछ हफ़्तों बाद आया है। इस भाषण में उन्होंने पहाड़ी लोगों की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि राज्य सिर्फ पहाड़ियों के लिए नहीं है। विपक्ष ने भाजपा पर पहाड़ी निवासियों की उपेक्षा और अपमान करने का आरोप लगाया था। इसके बाद राज्य सरकार बैकफुट पर आ गई थी। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अग्रवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आवास पर अपना इस्तीफा सौंपा।

फरवरी में बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक मदन बिष्ट की एक टिप्पणी पर प्रेमचंद अग्रवाल ने गुस्से में प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने उत्तराखंड राज्य के लिए इसलिए संघर्ष नहीं किया था कि श्पहाड़ीश् और श्देसीश् के बीच भेदभाव किया जाए। अग्रवाल ने विपक्षी विधायकों के साथ बहस के दौरान एक आपत्तिजनक शब्द का भी इस्तेमाल किया था। उनकी इस टिप्पणी से लोगों में, खासकर राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों में काफी गुस्सा था।

सांस्कृतिक एकता को मजबूती प्रदान कर समरसता की भावना को भी मजबूत करता है होलीः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नगर निगम देहरादून द्वारा आयोजित होली मिलन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नगर निगम देहरादून में वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता बनाये रखने के उद्देश्य से बनाई गई ई-कोष वेबसाइट का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों को हर्ष, उल्लास, उमंग और रंगों से भरे पर्व होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व समाज में सांस्कृतिक एकता को मजबूती प्रदान कर समरसता की भावना को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि हमारी इस सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सभी को निरंतर प्रयास करने होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी ट्रिपल इंजन की सरकार देहरादून के प्रत्येक नागरिक के जीवन स्तर को और अधिक बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। देहरादून नगर निगम द्वारा जहां एक ओर उच्च कोटि की जन सुविधाएँ प्रदान करने के लिए कार्य किये जा रहे हैं, वहीं शहर में स्वच्छता को और भी अधिक बेहतर बनाने का प्रयास भी किया जा रहा है। केदारपुरम में 3.5 हेक्टेयर भूमि पर 5 करोड़ की लागत से योगा पार्क बनाया जा रहा है और यमुना कालोनी में 1.3 करोड़ रूपए की लागत से एक नए पार्क का निर्माण किया जा रहा है। विभिन्न पार्कों के सौंदर्यीकरण एवं उच्च कोटि की कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था बनाए जाने के लिए 2 स्थानों पर मैकेनाईज्ड ट्रांसफ़र स्टेशन स्थापित करने और वार्डों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 3 पर्यावरण मित्रों को प्रत्येक माह स्वच्छता सेनानी सम्मान योजना के अन्तर्गत दस हजार रूपये प्रति माह का सम्मान भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगम द्वारा भवन कर का भुगतान के लिए ऑनलाइन सुविधा देने के साथ ही वित्तीय प्रकरणों में पारदर्शिता बनाये रखने के उद्देश्य से ई-कोष वेबसाईट तैयार की गयी है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में नगर निगम देहरादून को देश में 68 वां तथा उत्तराखण्ड के सभी नगर निगमों में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस वर्ष देहरादून की स्वच्छता रैंकिंग में और अधिक सुधार आएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा राज्य की जन भावनाओं के अनुरूप राज्य के विकास के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। विधानसभा में उत्तराखंड का भू कानून के लिए विधेयक पारित किया जा चुका है। राज्य की जनभावनाओं के अनुरूप सख्त भू कानून लाया जा रहा है। समान नागरिक संहिता लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है। यूसीसी महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नया अध्याय लिख रहा है और महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यूसीसी की ये गंगा देश के हर राज्य को लाभ देने का कार्य करेगी। उत्तराखण्ड में निवेश के लिए निवेशको का रूझान तेजी से बढ़ रहा है, उनको सिंगल विंडो सिस्टम से अनुमतियां प्रदान की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 04 जुलाई 2021 को शपथ लेने के बाद उन्होंने राज्य में सरकारी विभागों में सभी रिक्त पदों को भरने का निर्णय लिया था। इस साढ़े तीन साल में 20 हजार से अधिक युवाओं को राज्य में नौकरी दी गई है। यह कालखण्ड रोजगार का कालखण्ड भी है।

मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल ने होली मिलन कार्यक्रम में सीएम का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सीएम के मार्गदर्शन में राज्य ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। सरकार आम जन की भावनाओं के अनुरूप नीतियों को लागू कर रही है जिससे उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके। मेयर ने शहर के समस्त नागरिकों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शहर वासियों को बेहतर जन सुविधाएं देने के लिए नगर निगम प्रयासरत है। सहस्त्रधारा स्थित पूर्व ट्रेचिंग ग्राउंड के लीगेसी वेस्ट को 2025 तक समाप्त कर दिया जाएगा। इसके बाद इस स्थल को आम जन के लिए सुरक्षित व्यापक हाट बाजार में तब्दील किए जाने की योजना है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजान दास, सविता कपूर, दुर्गेश्वर लाल, पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा, अन्य जनप्रतिनिधिगण, नगर आयुक्त नमामि बंसल, नगर निगम के अधिकारी ओर कर्मचारी उपस्थित थे।

बड़ी संख्या में सीएम से मिले विधायक, जताया आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से विधानसभा परिसर में विधानसभा बजट सत्र में उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) (संशोधन) विधेयक, 2025 ध्वनि मत से पारित होने पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, महंत दिलीप रावत, प्रमोद नैनवाल, रेणु बिष्ट, सुरेश चौहान, राम सिंह कैड़ा, महेश जीना, राजकुमार, अनिल नौटियाल सहित विभिन्न विधायकों ने भेंट कर इस ऐतिहासिक कार्य के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

हमारा संकल्प उत्तराखंड के संसाधनों, जमीनों, को भू माफियाओं से बचाए रखना है-मुख्यमंत्री

विधानसभा बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) (संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा के दौरान कहा कि यह संशोधन भू सुधारों में अंत नहीं अपितु एक शुरुआत है। राज्य सरकार ने जन भावनाओं के अनुरूप भू सुधारों की नींव रखी है। भू प्रबंधन एवं भू सुधार पर आगे भी अनवरत रूप से कार्य किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य की जनता की जनभावनाओं एवं अपेक्षाओं के अनुरूप निर्णय लिया है। सरकार कई नए महत्वपूर्ण मामलों पर ऐतिहासिक निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा हम उत्तराखंड के संसाधनों, जमीनों को भूमाफियाओं से बचाने का संकल्प है। जिन उद्देश्यों से लोगों ने जमीन खरीदी है, उसका उपयोग नहीं दुरुपयोग हुआ, ये चिंता हमेशा मन में थी। उन्होंने कहा उत्तराखंड में पर्वतीय इलाकों के साथ मैदानी इलाके भी हैं। जिनकी भौगोलिक परिस्थिति एवं चुनौतियां अलग-अलग है। उन्होंने कहा जब से स्व. श्री अटल जी ने उत्तराखंड राज्य के लिए औद्योगिक पैकेज दिया तब से राज्य सरकार बड़ी संख्या में औद्योगीकरण की ओर जा रही है। ऐसे में राज्य में आने वाले असल निवेशकों को कोई दिक्कत न हो, निवेश भी न रुके। उसके लिए इस नए संशोधन/कानून में हमने सभी को समाहित किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सबकी जन भावनाओं के अनुरूप कार्य कर रही है। हम लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास रखते हैं। बीते कुछ वर्षों में देखा जा रहा था कि प्रदेश में लोगों द्वारा विभिन्न उपक्रम के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार देने के नाम पर जमीनें खरीदी जा रही थी। उन्होंने कहा भू प्रबंधन एवं भू सुधार कानून बनने के पश्चात इस पर पूर्ण रूप से लगाम लगेगी। इससे असली निवेशकों और भू माफियाओं के बीच का अंतर भी साफ होगा। राज्य सरकार ने बीते वर्षों में बड़े पैमाने पर राज्य से अतिक्रमण हटाया है। वन भूमि और सरकारी भूमियों से अवैध अतिक्रमण हटाया गया है। 3461.74 एकड़ वन भूमि से कब्जा हटाया गया है। यह कार्य इतिहास में पहली बार हमारी सरकार ने किया। इससे इकोलॉजी और इकॉनमी दोनों का संरक्षण मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कृषि एवं औद्योगिक प्रयोजन हेतु खरीद की अनुमति जो कलेक्टर स्तर पर दी जाती थी। उसे अब 11 जनपदों में समाप्त कर केवल हरिद्वार और उधम सिंह नगर में राज्य सरकार के स्तर से निर्णय लिए जाने का प्रावधान किया गया है। किसी भी व्यक्ति के पक्ष में स्वीकृत सीमा में 12.5 एकड़ से अधिक भूमि अंतर्करण को 11 जनपदों में समाप्त कर केवल जनपद हरिद्वार एवं उधम सिंह नगर में राज्य सरकार के स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा आवासीय परियोजन हेतु 250 वर्ग मीटर भूमि क्रय हेतु शपथ पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। शपथ पत्र गलत पाए जाने पर भूमि राज्य सरकार में निहित की जाएगी। सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योगों के अंतर्गत थ्रस्ट सेक्टर एवं अधिसूचित खसरा नंबर भूमि क्रय की अनुमति जो कलेक्टर स्तर से दी जाती थी, उसे समाप्त कर, अब राज्य सरकार के स्तर से दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा इसके साथ की नए कानून में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा सरकार ने गैरसैंण में भी हितधारकों, स्टेकहोल्डर से विचार लिए थे। इस नए प्रावधानों में राज्यवासियों के विचार लिए गए हैं, सभी के सुझाव भी लिए गए हैं। सभी जिलों के जिलाधिकारियों एवं तहसील स्तर पर भी अपने जिलों में लोगों से सुझाव लिए गए। सभी के सुझाव के अनुरोध ये कानून बनाया गया है। उन्होंने कहा उत्तराखंड राज्य मूल स्वरूप बना रहे, यहां का मूल अस्तित्व बचा रहे। इसके लिए इस भू सुधार किए गए हैं। उन्होंने कहा राज्य की डेमोग्राफी बची रहे इसका विशेष ध्यान रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में औद्योगिक, पर्यटन, शैक्षणिक, स्वास्थ्य तथा कृषि एवं औद्यानिक प्रयोजन आदि हेतु आतिथि तक राज्य सरकार एवं कलेक्टर के स्तर से कुल 1883 भूमि क्रय की अनुमति प्रदान की गयी। उक्त प्रयोजनों/आवासीय प्रयोजनों हेतु क्रय की गयी भूमि के सापेक्ष कुल 599 भू-उपयोग उल्लंघन के प्रकरण प्रकाश में आये हैं, जिनमें से 572 प्रकरणों में उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) (अनुकूलन एवं उपान्तरण आदेश-2001) की धारा 166/167 के अन्तर्गत वाद योजित किये गये हैं तथा 16 प्रकरणों में वाद का निस्तारण करते हुए 9.4760 हे० भूमि राज्य सरकार में निहित की गयी है। अवशेष प्रकरणों में कार्यवाही की जा रही है।

7वें कॉमन रिव्यू मिशन की बैठक आयोजित, सुझावों पर चर्चा

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी तथा भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत 7वें कॉमन रिव्यू मिशन का नेतृत्व कर रहे संजय अग्रवाल (सेनानिवृत आईएएस, पूर्व सचिव कृषि एवं कृषक कल्याण) ने राज्य में कॉमन रिव्यू मिशन से अपेक्षाओं के सम्बन्ध में आज विधानसभा भवन में बैठक ली।
सीआरएम (कॉमन रिव्यू मिशन) द्वारा 7वें कॉमन रिव्यू मिशन के तहत मुख्य सचिव एवं ग्रामीण विकास, जलागम, पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभागों से राज्य की विशेष परिस्थितियों के अनुरूप वर्तमान में संचालित योजनाओं में आवश्यक बदलावों के सम्बन्ध में सुझाव मांगे गए हैं। सीआरएम द्वारा ग्राम्य विकास से सम्बन्धित विभिन्न योजनाओं से बेहतर परिणाम प्राप्त करने हेतु प्रत्येक योजना में कम से कम 5 इनोवेटिव सुझाव मांगे गए हैं। इसके साथ ही सीआरएम सदस्यों ने राज्य में योजनाओं के क्रियान्वयन दौरान अपनायी जा रही बेस्ट प्रैक्टिसेज का विवरण भी सीआरएम को देने के निर्देश दिए हैं। सीआरएम द्वारा राज्य में योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान आ रही समस्याओं, बाधाओं एव कमियों से भी अवगत कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि उनमें आवश्यक सुधार किया जा सके।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राज्य के विशेष परिस्थितियों के अनुरूप कुछ योजनाओं में नीतिगत स्तर पर आवश्यक सुधारों की बात कही। उन्होंने मनेरगा के तहत सेवा क्षेत्र को सम्मिलित करने तथा वॉटर शेड प्रोग्राम में राज्य के विशेष परिस्थितियों के अनुकूल सुधार के सुझाव दिए हैं।
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार का 7वां कॉमन रिव्यू मिशन (सी०आर०एम०) 18 फरवरी से 2 मार्च तक प्रस्तावित है। सी०आर०एम० को ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के प्रकरणों को समझने एवं बेहतर सार्वजनिक सेवा वितरण हेतु सुझाव देने का कार्य सौंपा गया है। 7वां सी०आर०एम० संजय अग्रवाल, पूर्व सचिव, कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय द्वारा लीड किया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, वरिष्ठ शिक्षाविदों सहित कुल 36 सदस्यों द्वारा उत्तराखंड सहित 9 राज्यों का दौरा किया जायेगा। सी०आर०एम० के सदस्यों द्वारा 21 फरवरी को राज्य के अधिकारियों के साथ मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में ब्रीफिंग सेशन किया गया, तत्पश्चात् सदस्य दो समूहों में गठित होकर 22 फरवरी से दिनांक 24 फरवरी तक दो जनपदों का दौरा करेंगे, जिसके उपरान्त सचिवालय में 25 फरवरी को सभी सदस्य पुनर्गठित होकर सचिव, ग्राम्य विकास विभाग की अध्यक्षता में डीब्रीफिंग सत्र में प्रतिभाग करेंगे।
बैठक में सचिव राधिका झा, चन्द्रेश कुमार, अपर सचिव मनुज गोयल सहित सभी संबंधित विभागों के अपर सचिव एवं अधिकारी मौजूद रहे।

बजट के खास प्रावधानों पर एक नजर…

बजट केवल एक वार्षिक वित्तीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह हमारे प्रदेश की आर्थिक दिशा, नीतियों और सामाजिक कल्याण पहलों को आकार देने का एक शक्तिशाली साधन है।

बजट 2025-26 का आकार लगभग ₹1,01,175.33 करोड़ है। यह 2024-25 के अनुमान ₹89,230.07 करोड़ से लगभग 13 प्रतिशत अधिक है। पहली बार ₹1 लाख करोड़ से अधिक का बजट प्रस्तुत करने का सौभाग्य हमारी सरकार को प्राप्त हुआ है। राज्य गठन के उपरान्त 2001-02 में ₹4,506 करोड़ का बजट पेश किया गया था। इस प्रकार 24 वर्षों में लगभग 24 गुना बजट हमने आज प्रस्तुत किया है।

लगभग 16.68 प्रतिशत की वृद्धि के साथ इस बजट में ₹16,961.32 करोड़ का प्रावधान जेंडर बजट में किया गया है।

इकॉलोजी, इकोनामी, इनोवेशन, टेक्नालॉजी, सस्टेनेबल व इन्क्लूजिव डेवलवपमेंट तथा एकाउन्टेबिलिटी के व्यापक फ्रेमवर्क को ध्यान में रखते हुए हम कार्य कर रहे हैं।
सरलता, समाधान और निस्तारीकरण द्वारा विकास के अवरोध दूर कर रहे हैं।
हम ध्येय पथ पर बढ़ रहे हैं।

इस बजट में हम नई अनेक नई योजनाएं लेकर आये हैंः-

वेंचर फंड की स्थापना
रिवर फ्रन्ट डेवलपमेंट परियोजना
प्रवासी उत्तराखण्ड परिषद
यू.आई.आई.डी.बी. को परामर्शी सेवाओं एवं सर्विस सेक्टर सब्सिडी
रेणुका जी बांध परियोजना मे राज्य की अंशपूंजी
स्मार्ट सिटी के अन्तर्गत इलेक्ट्रिक बसों के संचालन
खेल विश्वविद्यालय की स्थापना
होमगार्ड कल्याण कोष
मादक पदार्थों से सम्बन्धित अभियोग में कार्यवाही के लिए पुलिस कर्मियों आदि के उत्साहवर्धन हेतु रिवाल्विंग फंड की स्थापना,
सैनिक विश्राम गृहों की साज सज्जा
यह बजट N, A, M, O (नमो) यानि नवाचार, आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड, महान विरासत व ओजस्वी मानव संसाधन की थीम पर आधारित है।

नमो का प्रथम बिन्दु N अर्थात नवाचार के प्रतीक अनेक बिन्दु जैसे परिवार पहचान पत्र, पेपरलेस रजिस्ट्रेशन, बायोमैट्रिक आधारित आधार प्रमाणीकरण, फायर हाइड्रेन्ट मशीन, स्मार्ट मीटर, साईंस सॅन्टर, स्मार्ट क्लास के लिए बजट में प्रावधान किया गया है।

नमो के दूसरे बिन्दु Aअर्थात आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के लिए बजट में “सप्तऋषि“ की अवधारणा दी गयी हैः कृषि, उद्योग, ऊर्जा, अवसरंचना, संयोजकता, पर्यटन तथा आयुष। ये ’सप्तऋषि आधुनिक उत्तराखण्ड के हमारे ग्रोथ इंजन हैं।

नमो के तीसरे बिन्दु M अर्थात महान विरासत के संरक्षण के लिए अनेक पहल हमारी सरकार ने की हैः-

शीतकालीन यात्रा, आदि कैलाश, ओम पर्वत आदि पवित्र स्थानों के लिए सड़क संयोजकता को सुगम बनाना, गोविंद घाट से घांघरिया मार्ग का नाम साहिबजादे जोरावर सिंह, बिडौरा छेवी पातशाही गेट से धूमखेड़ा मार्ग का नाम साहिबजादे फतेह सिंह मार्ग किए जाने की स्वीकृति आदि।

हरिद्वार और ऋषिकेश के पुनर्विकास, शारदा रिवर फ्रंट और इसके निकटवर्ती क्षेत्रों का विकास, कांवड़ मेले के आयोजन, अर्द्धकुम्भ मेले की प्रारम्भिक तैयारी, ऋषिकेश में हिमालयन संग्रहालय की स्थापना हेतु विभिन्न मेलों के आयोजन, संस्कृत पाठशालाओं व विश्वविद्यालय को अनुदान आदि हेतु बजट प्रावधान किये गये हैं।

संस्कृति के पावन मूल्यों की रक्षा,
प्रदेश का भविष्य उज्जवल करना
तथा विकास भी और विरासत भी
के सिद्धांत पर अडिग रहना
यह हमारी कार्यनीति है।
इसका परिलक्षण इस बजट में होता है।

नमो के चौथे बिन्दु O अर्थात ओजस्वी मानव संसाधन के लिए हमारी पहल –

उत्तराखण्ड वेंचर फंड की स्थापना, उद्यमिता को प्रोत्साहन, कृषकों को प्रोत्साहन, खेल सुविधाओं का विकास, खिलाड़ियों को प्रोत्साहन, देवभूमि उद्यमिता योजना, छात्रवृत्तियां, शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम, प्रशिक्षण तथा साइंटिफिक टेम्परामेंट को प्रोत्साहन आदि।

केवल सरकार के प्रयास से नहीं, जागृत जनता और ओजस्वी जनता से बनेगा विकसित उत्तराखण्ड ।
इस बजट में समावेशी व समग्र विकास के दृष्टिकोण से ज्ञान (GYAN) अर्थात गरीब, युवा, अन्नदाता एवं नारी कल्याण को केन्द्र में रखा गया है।

गरीब कल्याण हेतु बजटीय प्रावधानः-

सामाजिक सुरक्षा के अन्तर्गत विभिन्न पेंशन योजनाओं हेतु लगभग ₹1,811.86 करोड़
विभिन्न योजनाओं में सब्सिडी हेतु लगभग ₹918.92 करोड़
अन्नपूर्ति योजना ₹600.00 करोड़
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) हेतु लगभग ₹207.18 करोड़
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) हेतु लगभग ₹54.12 करोड़
EWS आवासों हेतु अनुदान ₹25.00 करोड़
परिवहन निगम की बसों में निर्धारित श्रेणी के यात्रियों हेतु निःशुल्क यात्रा की सुविधा हेतु ₹40.00 करोड़
राज्य खाद्यान योजना हेतु ₹10.00 करोड़
सस्ती दरों पर नमक उपलब्ध कराने हेतु लगभग ₹34.36 करोड़
निर्धन परिवारों हेतु रसोई गैस पर अनुदान हेतु ₹55.00 करोड़

“युवा शक्ति“ हेतु महत्वपूर्ण वित्तीय प्रावधानः-

टाटा टैक्नोलॉजी मॉडल के अनुसार आईटीआई का उन्नयन हेतु कुल ₹63.00 करोड़
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत प्रतिपूर्ति हेतु लगभग ₹178. 83 करोड़
9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क पाठ्य पुस्तक हेतु लगभग ₹59.41 करोड़
कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों हेतु निःशुल्क जूता एवं बैग की व्यवस्था हेतु ₹23.00 करोड़
विद्यालयी शिक्षा छात्रवृत्ति हेतु ₹15.00 करोड़
उच्च शिक्षा छात्रवृति हेतु ₹15.00 करोड़
उदीयमान खिलाडियों को छात्रवृत्ति हेतु ₹10.00 करोड़
बालिका शिक्षा प्रोत्साहन (साईकिल) योजना हेतु ₹15.00 करोड़
साइन्स सिटी एवं विज्ञान केन्द्रों हेतु लगभग ₹26.64 करोड़
विज्ञान केन्द्र चम्पावत हेतु ₹10.00 करोड़
खेल महाकुम्भ के आयोजन हेतु ₹15.00 करोड़
युवा महोत्सव के आयोजन हेतु रू0 5.00 करोड़
मुख्यमंत्री युवा मंगल दल स्वावलम्बन योजना हेतु रू0 5.00 करोड़
अन्नदाता हेतु प्रमुख बजटीय प्रावधानः-
दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजनान्तर्गत समग्र रूप से ₹85.00 करोड़
किसान पेंशन योजनान्तर्गत समग्र रूप से लगभग ₹4218 करोड़
हाउस ऑफ हिमालयाज के अन्तर्गत ₹15.00 करोड़
मिशन एप्पल योजना अन्तर्गत ₹35.00 करोड़
साईलेज आदि हेतु समग्र रूप से ₹40.00 करोड
दुग्ध मूल्य प्रोत्साहन योजना हेतु समग्र रूप से ₹30.00 करोड़
मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजनान्तर्गत ₹25.00 करोड़
मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना हेतु समग्र रूप से ₹12.43 करोड़
मिलेट मिशन योजना के प्रोत्साहन हेतु ₹4.00 करोड़
स्थानीय फसलों को प्रोत्साहन कार्यक्रम हेतु लगभग ₹5.75 करोड़
नेशनल मिशन फॉर नेचुरल फार्मिंग योजना हेतु समग्र रूप से लगभग ₹3.22 करोड़

नारी कल्याण को समर्पित प्रमुख बजटीय प्रावधान-
नन्दा गौरा योजनान्तर्गत लगभग ₹157.84 करोड़
मुख्यमंत्री बाल पोषण योजनान्तर्गत लगभग ₹29.91 करोड़
मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजनान्तर्गत लगभग ₹22.82 करोड़
मुख्यमंत्री वात्सल्य योजनान्तर्गत लगभग ₹18.88 करोड़
मुख्यमंत्री महिला पोषण योजनान्तर्गत लगभग ₹13.96 करोड़
मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजनान्तर्गत ₹14.00 करोड़
मुख्यमंत्री बाल एवं महिला बहुमुखी विकास निधि हेतु ₹8.00 करोड़
निराश्रित विधवाओं की पुत्रियों के विवाह हेतु ₹5.00 करोड़
मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजनान्तर्गत लगभग ₹3.76 करोड़
मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना हेतु ₹5.00 करोड़
महिला उद्यमियों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनांतर्गत ₹5.00 करोड़
ईजा-बोई शगुन योजना हेतु लगभग ₹14.13 करोड़

अक्सर बढ़ते हुए ऋण बोझ के कारण सरकार निशाने पर रहती थी। हमने वित्तीय प्रबन्धन पर जोर दिया और यह सुनिश्चित किया कि राज्य के स्वंय के संसाधनों से आय बढे तथा केन्द्र पोषित योजनाओं तथा बाड्य सहायतित योजनाओं में निर्वाध रूप से भारत सरकार से धनराशि प्राप्त की जा सके। इस हेतु लगातार समीक्षाए की जा रही हैं। समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रेषित किये जा रहे हैं तथा सार्वजनिक व्यय में वृद्धि हो रही है।

हम उत्तराखण्ड के सुनहरे भविष्य के लिए जहा एक ओर निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रयत्नशील हैं वहीं इस बात का भी ध्यान रख रहे हैं कि राज्य अनावश्यक ऋण के बोझ से न दबे।
पूंजीगत परिसम्पत्तियों के सृजन में अभिवृद्वि राज्य की शीर्ष प्राथमिकता है। पहली बार हमारी सरकार की कार्यकाल में ₹10 हजार करोड से अधिक का पूंजीगत परिव्यय हुआ है। पूंजीगत परिव्यय में 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए वर्ष 2023-24 में ₹10982 करोड़ के रिकार्ड को प्राप्त किया था।
इस वर्ष अभी तक ₹7 हजार करोड़ से अधिक का पूंजीगत परिव्यय हो गया है।

वर्ष 2025-26 के लिए बजट में लगभग 7 प्रतिशत वृद्धि करते हुए ₹4,763.13 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

आधारभूत अवसंचना को समर्पित अनेक महत्वपूर्ण प्रावधान इस बजट में हैं-
जमरानी बांध परियोजना हेतु ₹625.00 करोड़
सौंग परियोजना हेतु ₹75.00 करोड़
लखवाड़ परियोजना हेतु ₹285.00 करोड़
राज्यों के लिए विशेष पूंजीगत सहायता (SASCI ₹1,500.00 करोड़
जल जीवन मिशन हेतु समग्र रूप से ₹1,843.44 करोड़
नगरीय पेयजल / जलोत्सारण योजना का निर्माण हेतु ₹100.00 करोड़
अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास योजनार्न्न्तगत ₹60.00 करोड़
अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में विकास सम्बन्धी निर्माण कार्य हेतु ₹8.00 करोड़
लोक निर्माण विभाग के अन्तर्गत पूंजीगत मद में लगभग ₹1,268.70 करोड़ तथा अनुरक्षण के लिए लगभग ₹900 करोड़
ग्राम्य विकास के अन्तर्गत पीएमजीएसवाई हेतु ₹1,065.00 करोड़

अन्य प्रमुख योजनाओं में बजटीय प्रावधानः-
यूनीफार्म सिविल कोड(UCC) हेतु ₹30.00 करोड़
परिवार पहचान पत्र योजना हेतु लगभग ₹10.28 करोड़
राज्य आन्दोलनकारियों को पेंशन हेतु ₹48.00 करोड़
गौ सदनों एवं निराश्रित पशुओं हेतु ₹70.00 करोड़
गैरसैंण में अवस्थापना कार्य हेतु ₹20.00 करोड तथा गैरसैंण विकास परिषद को अनुदान हेतु ₹5.00 करोड़
अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना हेतु ₹550.00 करोड़
राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम व राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन हेतु समग्र रूप से लगभग ₹989.74 करोड़
ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना अन्तर्गत ₹150.00 करोड़
स्प्रिंग एण्ड रिवर रेजुविनेशन प्राधिकरण (सारा) के अन्तर्गत कुल ₹127. 00 करोड़
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना हेतु ₹60.00 करोड़
मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना हेतु ₹10.00 करोड़

सतत और समावेशी विकास करना हमारी प्राथमिकता है। आदरणीय प्रधानमंत्री ने यह कहा है कि यह दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा। उनके प्रेरणादायी शब्द हमें निरन्तर और बेहतर करने की प्रेरणा देते हैं।

हमने यह निश्चय किया है कि हम देवभूमि उत्तराखण्ड को एक प्रगतिशील, उन्नत एवं हर क्षेत्र में आदर्श राज्य बनायेंगें। गत 24 वर्षों में राज्य ने कई उपलब्धिया प्राप्त की है. किन्तु अभी हमें बहुत आगे जाना है तथा इस प्रदेश को अग्रणी प्रदेश बनाना है। मुझे विश्वास है कि आप सभी के सहयोग एवं विकल्प रहित संकल्प से हम इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होंगें।

हम राजनीति नहीं अपितु राष्ट्रनीति को सर्वोपरि मानते हैं। इसीलिए राजनीतिक रूप से लाभ-हानि की चिंता किये बगैर हम प्रदेश के विकास को गति देने के लिए अथक कार्य कर रहे हैं। बड़े स्केल व अधिक स्पीड पर काम कर रहें हैं। जनता की आशाओं और आकांक्षाओं के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। जनता के आदेश को शिरोधार्य कर रहें हैं।

विकसित उत्तराखण्ड तथा इस दशक को उत्तराखण्ड का दशक बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए हमारे प्रयासों को इस बजट से गति मिलेगी।

निर्मल पावन भावना है
देवभूमि की समृद्धि की कामना है।

बजट, राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और संकल्पों को प्रस्तुत करता है-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में बजट पेश होने के उपरान्त मीडिया से औपचारिक वार्ता करते हुए उत्तराखण्ड के रजत जयंती वर्ष में ऐतिहासिक बजट पेश करने के लिए वित्त मंत्री और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बजट राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और संकल्पों को प्रस्तुत करता है। जो सरकार की भविष्य की योजनाओं को प्रस्तुत करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के रजत जयंती वर्ष में बजट के आकार ने 1 लाख करोड़ को पार किया है। पिछले बजट की तुलना में इस वर्ष के बजट में 13 प्रतिशत वृद्धि हुई है। उत्तराखण्ड राज्य के प्रथम बजट से इस बार का बजट 24 गुना अधिक है। बजट इकोलॉजी, इकोनोमी, इनोवेशन, इन्क्लूसिव और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के साथ-साथ टेक्नोलॉजी और एकाउंटेबिलिटी को ध्यान में रख कर बनाया गया है। रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना, प्रवासी उत्तराखण्ड परिषद का गठन, स्मार्ट सिटी के अंतर्गत इलेक्ट्रिक बसों का संचालन, खेल विश्वविद्यालय की स्थापना, होमगार्ड कल्याण कोष का गठन, पुलिस कर्मियों के उत्साहवर्धन के लिए रिवाल्विंग फंड की स्थापना जैसी अनेक नए पहलुओं को इसमें सम्मिलित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट (नमो) अर्थात नवाचार, आत्मनिर्भर उत्तराखंड, महान विरासत व ओजस्वी मानव संसाधन की थीम पर आधारित है। उन्होंने कहा कि बजट में राज्य के समावेशी एवं समग्र विकास के लिए (ज्ञान) अर्थात गरीब कल्याण, युवा, अन्नदाता एवं नारी कल्याण को केंद्र में रखा गया है। राज्य सरकार ने इस बजट में वित्तीय प्रबंधन पर भी विशेष जोर दिया है। उन्होंने कहा हम अपने संसाधनों से राज्य की आय बढ़ाने का प्रयास करेंगे। बजट में शिक्षा, ग्रामीण विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, चिकित्सा, उद्योग आदि क्षेत्रों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूल मंत्र के अनुरूप बजट है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने बाबा केदार के धाम से कहा था कि इस सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा, इसी को ध्येय लेकर बजट में इस संकल्प की प्राप्ति के लिए प्रयास किए गए हैं, जो आने वाले समय में राज्य के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह बजट आदर्श उत्तराखंड बनाने तथा उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने के संकल्प को पूरा करेगा।

आपदाओं से बचाव के लिए व्यापक जन जागरूकता जरूरी-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को यूएसडीएमए के नव वर्ष 2025 के कैलेंडर (वॉल तथा टेबल टॉप) का विमोचन किया। उन्होंने चम्पावत, रुद्रप्रयाग, चमोली और ऊधमसिंहनगर जनपद के लिए सीएसआर मद में प्राप्त 4 पिकअप वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया। इन वाहनों में टैंट, स्लीपिंग बैग, लीफलेट तथा कैलेण्डर रवाना किए गए। इन फॉर बाय फॉर पिक अप वाहनों में 1-1 मिनी जनरेटर, 15 स्लीपिंग बैग एवं 70 टैंट तथा आकाशीय बिजली से बचाव हेतु 9500 लीफलेट एवं 40-40 नव वर्ष कैलेण्डर उपरोक्त प्रत्येक जनपद को भेजे गए। यह वाहन तथा अन्य उपकरण जनपदों में आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्यों के लिए उपयोगी साबित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा आपदाओं का सामना करने के लिए जन जागरूकता बहुत जरूरी है। जागरूकता, सजगता और सतर्कता से आपदा से नुकसान को काफी कम किया जा सकता है। यदि लोग आपदाओं के प्रकार, उनके प्रभाव और सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक होंगे, तो वे अपनी और दूसरों की जान बचाने के लिए सही कदम उठा सकेंगे।
मुख्यमंत्री द्वारा यूएसडीएमए को नव वर्ष कैलेण्डर में ऋतु अनुसार विभिन्न आपदाओं से बचाव के लिए जागरूकता सामग्री प्रकाशित किए जाने के निर्देश दिए गए थे। उनके निर्देश पर उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा विभिन्न माध्यमों से आपदाओं से बचाव के लिए जागरूकता संदेशों तथा सामग्री का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से नियमित तौर पर आपदाओं से सुरक्षा संबंधी पोस्ट, एनीमेटेड वीडियोज को प्रसारित किया जा रहा है। विभिन्न आपदाओं से बचाव हेतु जन सामान्य को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए तथा क्या-क्या एहतियात बरतने चाहिए, इन्हें लेकर लीफलेट्स मुद्रित किए गए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य के स्कूलों में प्राथमिक स्तर से ही पाठ्यक्रम में आपदा प्रबंधन विषय को शामिल किये जाने के अनुपालन में यूएसडीएमए के स्तर पर एक कमेटी गठित की गई है। बच्चे यदि आपदाओं के प्रति जागरूक रहेंगे तो यह न केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करेगा बल्कि उन्हें समाज में एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करेगा। छोटी उम्र से ही अगर बच्चे भूकंप, बाढ़, तूफान, भूस्खलन, सड़क दुर्घटनाओं जैसी आपदाओं के बारे में सीखेंगे, तो वे आपातकालीन स्थितियों में घबराने के बजाय सही और त्वरित निर्णय ले सकेंगे।
सचिव आपदा प्रबन्धन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि यूएसडीएमए समुदायों को जागरूक करने की दिशा में भी प्रयासरत है। स्थानीय लोग ही फर्स्ट रिस्पांडर्स के तौर पर सबसे पहले किसी भी आपदा का सामना करते हैं। यदि आपदा संभावित क्षेत्र में स्थानीय लोग विभिन्न आपदाओं के प्रति जागरूक और उनके बचाव के उपायों के बारे में शिक्षित होंगे, तो वे संकट की घड़ी में एक-दूसरे की सहायता कर सकते हैं। यूएसडीएमए द्वारा आपदा मित्रों की तरह ही आपदा सखी बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से समय पर आम जनमानस को अलर्ट भेजे जा रहे हैं ताकि लोगों को सचेत किया जा सके। विभिन्न आपदाओं से बचाव के लिए यूएसडीएमए द्वारा समस्त जनपदों तथा जनसामान्य के लिए एडवाइजरी भी जारी की जा रही हैं।
इस अवसर पर यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन आनन्द स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, अपर सचिव महावीर सिंह चौहान, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो ओबैदुल्लाह अंसारी आदि मौजूद रहे।